नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने प्रदेश से जुड़े मुद्दों पर की चर्चा
आबादी घाटी से मैदान की तरफ खिसक रही, विधानसभा में उठा पलायन का मुद्दा
देहरादून। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के विधानसभा सत्र में संबोधन के अवसर पर नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने प्रदेश से जुड़े मुद्दों की चर्चा की। 25 साल की यात्रा व प्रदेश की विभिन्न खूबियों का उल्लेख भी किया। कहा कि उत्तराखंड सभी मानकों में एक विशिष्ट प्रदेश है। भौगोलिक दृष्टि से यह राज्य दक्षिण एशियाई क्षेत्र में अपनी सीमाएं नेपाल और तिब्बत से जोड़ता है। उत्तर में गिरीराज हिमालय उत्तराखंड और देश की रक्षा में अडिग प्रहरी की तरह खड़ा है।
आर्य ने कहा कि देवताओं की आत्मा वाले इस हिमालयी प्रदेश की विधानसभा में महामहिम का स्वागत करना उनका अहोभाग्य है। प्रकृति ने इस राज्य को हिमालय के साथ ही हिमालय की गोद से निकलने वाली ‘‘सदा नीरा’’ नदियाँ दी हैं, जो सदियों से आधे भारत की धरती की प्यास बुझा रही हैं। इन नदियों के साथ बहती ‘‘गंगा-जमुनी संस्कृति’’ ने इस भूमि को सहिष्णुता का प्रतीक बनाया है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में असंख्य ताल और कुण्ड हैं, जिनमें कई ‘‘पार्वती कुण्ड’’ के नाम से प्रसिद्ध हैं। मध्य हिमालय का नैनीताल, तराई का नानकसागर और 6 राष्ट्रीय उद्यान व 7 वन्यजीव अभयारण्य इस प्रदेश की जैव विविधता के प्रतीक हैं। इसी कारण हिमालय और उत्तराखंड को भारत भूमि का ‘‘ऑक्सीजन टावर’’ कहा जाता है।
नेता प्रतिपक्ष ने महामहिम राष्ट्रपति को ‘‘प्रकृति की बेटी’’ कहते हुए कहा कि जैसे वे ओडिशा के सिमलीपाल राष्ट्रीय उद्यान की गोद में पली-बढ़ी हैं, वैसे ही उत्तराखंड की महिलाएँ भी जंगलों को अपना मायका मानती हैं। जब-जब जल, जंगल और जमीन पर संकट आया, यहाँ की महिलाएँ संघर्ष के लिए घरों से निकल पड़ीं। विश्वविख्यात ‘‘चिपको आंदोलन’’ इसी धरती पर 1974 में गौरा देवी के नेतृत्व में शुरू हुआ था।
आर्य ने कहा कि उत्तराखंड धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता का गुलदस्ता है। यहाँ चारधामों में श्री बदरीनाथ, श्री केदारनाथ, श्री गंगोत्री और श्री यमुनोत्री जैसे पवित्र स्थल हैं। 15200 फीट की ऊंचाई पर स्थित हेमकुंड साहिब और तराई का नानकमत्ता साहिब सिख धर्म के आस्था केंद्र हैं। वहीं रुड़की के पास स्थित पीरान कलियर दरगाह सूफी परंपरा का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि देवभूमि का समाज सदियों से समावेशी रहा है, जिसने सभी को अपनाया और सम्मान दिया है। परंतु, यह राज्य अपनी प्राकृतिक विडंबनाओं से भी जूझ रहा है। हाल की आपदाओं में धराली, थराली, बसुकेदार और देहरादून में जनहानि हुई।
आर्य ने कहा कि उत्तराखंड के जंगल देश-दुनिया के पर्यावरण की रक्षा कर रहे हैं, लेकिन वन्य जीवों के कारण किसानों की खेती नष्ट हो रही है। वन्य जीव-मानव संघर्ष और वन कानून आमजन के लिए बड़ी समस्या हैं। 2006 में देशभर में लागू वनाधिकार कानून के बावजूद उत्तराखंड में आज तक इसके लाभ ग्रामीणों तक नहीं पहुँचे हैं।
उन्होंने कहा कि गरीबी, पलायन, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी समस्याएँ आज भी पहाड़ के विकास में बाधक हैं। कृषि योग्य भूमि की कमी, कठिन जीवन, रोजगार व स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में लोग पलायन को विवश हैं। महिलाओं पर खेती और गृहस्थी का सारा बोझ है।
आर्य ने कहा कि बेरोजगारी, तकनीकी कौशल की कमी, औद्योगीकरण का अभाव और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों की अनुपस्थिति के कारण पहाड़ी अर्थव्यवस्था आत्मनिर्भर नहीं हो पाई है। शिक्षा और स्वास्थ्य की स्थिति भी अब तक संतोषजनक नहीं है।
उन्होंने कहा कि राज्य के विकास के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, कृषि, उद्यमिता, पर्यटन, ऊर्जा और जलापूर्ति जैसे क्षेत्रों में सतत प्रयासों की आवश्यकता है।
अंत में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि महामहिम राष्ट्रपति का विधानसभा में स्वागत उत्तराखंड के लिए गौरव का क्षण है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि महामहिम के मार्गदर्शन से राज्य सरकार प्रदेशहित में ठोस कदम उठाएगी।
डंपर चालक हिरासत में, जांच शुरू
जयपुर। हरमाड़ा थाना क्षेत्र में सोमवार को एक बेहद दर्दनाक हादसे ने शहर को स्तब्ध कर दिया। लोहे की मंडी रोड नंबर–14 पर अचानक अनियंत्रित हुए एक डंपर ने सड़क पर चल रहीं कई गाड़ियों को रौंद दिया। इस भीषण हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई, जबकि 15 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोपहर करीब 1 बजे यह डंपर हाईवे की ओर बढ़ रहा था। तभी अचानक ब्रेक फेल होने से चालक वाहन पर नियंत्रण खो बैठा। तेज रफ्तार में दौड़ रहा डंपर एक के बाद एक वाहन से टकराता गया और सड़क पर अफरातफरी मच गई। कई गाड़ियां बुरी तरह क्षतिग्रस्त होकर एक-दूसरे में फंस गईं।
हादसे के बाद स्थानीय लोग तुरंत बचाव कार्य में जुट गए। राहगीरों ने पुलिस, फायर और एम्बुलेंस सेवा को सूचना दी। कई घायल सड़क पर गंभीर अवस्था में पड़े थे। घायलों को पास के कांवटिया अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से 3 लोगों की हालत गंभीर होने पर उन्हें एसएमएस ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया। मृतकों के शवों को कांवटिया हॉस्पिटल की मॉर्चरी में सुरक्षित रखा गया है।
पुलिस टीम मौके पर पहुंची और यातायात को डायवर्ट कर राहत–बचाव शुरू किया गया। कुछ वाहनों में फंसे लोगों को निकालने के लिए मशीनों की मदद लेनी पड़ी। सड़क पर टूटे कांच, खून और वाहन के पुर्जे बिखरे पड़े थे। कई स्थानीय लोगों ने मौके पर ही मृतकों के शवों को चादरों और कपड़ों से ढक दिया।
पुलिस ने बताया कि डंपर चालक को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। प्राथमिक जांच में ब्रेक सिस्टम फेल होना वजह के तौर पर सामने आ रहा है। मृतकों की पहचान का कार्य जारी है और परिजनों को सूचना भेजी जा रही है। सड़क साफ कराने के बाद धीरे–धीरे यातायात बहाल किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री बोले– 25 साल की विकास यात्रा को भव्य तरीके से किया जाएगा सेलिब्रेट
देहरादून। विधानसभा के विशेष सत्र में राष्ट्रपति के सम्बोधन के बाद सीएम धामी ने सीधे एफआरआई का दौरा किया। यहां स्थापना दिवस के मुख्य कार्यक्रम में पीएम मोदी प्रमुख रूप से मौजूद रहेंगे। उत्तराखंड राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में 9 नवम्बर को प्रदेशभर में भव्य रजत जयंती उत्सव का आयोजन किया जाएगा। मुख्य राज्य स्तरीय कार्यक्रम देहरादून स्थित फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (एफआरआई) में आयोजित होगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एफआरआई पहुंचकर कार्यक्रम की तैयारियों का स्थलीय निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने आयोजन स्थल, सुरक्षा व्यवस्था, दर्शक दीर्घा, यातायात प्रबंधन, सांस्कृतिक मंच और स्वागत तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य स्थापना दिवस का यह ऐतिहासिक अवसर गरिमामय और व्यवस्थित तरीके से मनाया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आयोजन उत्तराखंड की 25 वर्ष की विकास यात्रा, संघर्ष और उपलब्धियों का प्रतीक है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सान्निध्य में यह रजत जयंती समारोह प्रदेश के लिए प्रेरणादायक अवसर होगा।
इस अवसर पर सचिव डॉ. पंकज कुमार पांडेय, गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडेय, आईजी गढ़वाल राजीव स्वरुप, अपर सचिव बंशीधर तिवारी एवं शासन – प्रशासन के अन्य अधिकारी मौजूद थे।
उत्तराखंड ने अपनी युवा शक्ति और संकल्प के दम पर देश में एक अलग पहचान बनाई- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विधानसभा के विशेष सत्र को किया संबोधित
राष्ट्रपति ने यूसीसी समेत विभिन्न उपलब्धियों को गिनाया
देहरादून। उत्तराखंड गठन के 25 साल पूरे होने पर सोमवार से विधानसभा में दो दिन का विशेष सत्र शुरू हुआ। इस मौके पर तीन दिवसीय प्रवास पर आईं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सदन को संबोधित करते हुए राज्य की उपलब्धियों, चुनौतियों और भविष्य की दिशा पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड ने अपनी युवा शक्ति और संकल्प के दम पर देश में एक अलग पहचान बनाई है और आने वाले वर्षों में इस पहचान को और मजबूत करना होगा।
सत्र की शुरुआत पर विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने राष्ट्रपति का स्वागत किया और रम्माण कला आधारित स्मृति चिह्न भेंट किया। राष्ट्रपति ने रम्माण पर आधारित एक पुस्तक भी रिलीज की। इस दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर धामी, राज्यपाल ले. जन. गुरमीत सिंह(सेनि), सभी वर्तमान विधायक, पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व सांसद भी सदन में मौजूद रहे।
राष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष 2000 में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में इस राज्य का गठन उत्तराखंडवासियों के सपनों को साकार करने के लिए हुआ था। 25 वर्षों में राज्य ने पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा उत्पादन, पर्यटन विकास, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाए। उन्होंने महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य और सशक्तीकरण में हुई प्रगति पर विशेष संतोष जताया। द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि उत्तराखंड की महिलाएं सदैव से अग्रणी रही हैं और आने वाले समय में भी राज्य की उन्नति में महिला शक्ति बड़ी भूमिका निभाएगी।
राष्ट्रपति ने गढ़वाल रेजीमेंट और उत्तराखंड के सैनिकों के शौर्य का उल्लेख करते हुए कहा कि इस राज्य की सैन्य परंपरा देश के लिए गर्व का विषय है। साथ ही उन्होंने समान नागरिक संहिता विधेयक पास करने पर विधानसभा के सभी सदस्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जनता के भरोसे पर खरा उतरना ही विधायकों का सबसे बड़ा दायित्व है।
सदन में स्वागत भाषण में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने उत्तराखंड आंदोलन को याद करते हुए कहा कि जिन लोगों ने राज्य निर्माण के लिए बलिदान दिए, इस सत्र में उन्हें नमन करना हमारा दायित्व है। उन्होंने कहा कि राज्य को तकनीकी शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और पहाड़ी क्षेत्रों में रोजगार जैसे विषयों पर तेज गति से काम करने की जरूरत है।
इसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राष्ट्रपति का अभिनंदन करते हुए कहा कि 25 वर्ष उत्तराखंड के लिए गौरव और आत्ममंथन का अवसर है। राज्य जिस उद्देश्य से बना था, उसे साकार करने की दिशा में हम केंद्र सरकार के मार्गदर्शन में आगे बढ़ रहे हैं।
राज्यपाल ले. जन. गुरमीत सिंह ने कहा कि रजत जयंती सत्र राज्य की विकास यात्रा का मूल्यांकन और भविष्य की रणनीति तय करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में हमारा लक्ष्य ऐसा विकास मॉडल स्थापित करना होगा, जिसमें आर्थिक प्रगति और प्रकृति संरक्षण दोनों साथ–साथ चलें।
परेश रावल की फिल्म ‘द ताज स्टोरी’ पिछले कई दिनों से सोशल मीडिया पर चर्चा में थी। लम्बी बहस और विवादों के बीच आखिरकार यह फिल्म इस शुक्रवार थिएटर्स तक पहुँची। रिलीज़ के बाद अब फिल्म के शुरुआती तीन दिनों की कमाई के आंकड़े भी सामने आ चुके हैं।
बॉक्स ऑफिस पर तीन दिन का प्रदर्शन
फिल्म ने ओपनिंग डे पर लगभग 1 करोड़ रुपये की कमाई करते हुए शुरुआत की। शनिवार को बिज़नेस में उछाल दिखा और ‘द ताज स्टोरी’ ने लगभग 1.90 करोड़ रुपये बटोर लिए। वहीं रविवार यानी तीसरे दिन फिल्म की कमाई लगभग 2.21 करोड़ रुपये रही। तीन दिन में यह फिल्म करीब 5.11 करोड़ रुपये कमा चुकी है।
पहले वीकेंड में ग्रोथ देखी गई है लेकिन अब असली टेस्ट सोमवार के वर्किंग डे से शुरू होगा, जहाँ पता चलेगा कि ऑडियंस वर्ड ऑफ माउथ के आधार पर फिल्म को आगे चलाती है या नहीं।
फिल्म किस बारे में है?
कहानी ताजमहल की ऐतिहासिक मान्यताओं और उनसे जुड़े विवादित दावों के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म में ताजमहल के अंदर बंद 22 कमरों का जिक्र किया गया है और कहानी उन सवालों को उठाती है, जिन पर आमतौर पर पब्लिक प्लेटफॉर्म्स पर कम चर्चा होती है।
कास्ट और टीम
‘द ताज स्टोरी’ का निर्देशन तुषार अमरीश गोयल ने किया है और इसका निर्माण स्वर्णिम ग्लोबल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के बैनर तले हुआ है। परेश रावल के साथ जाकिर हुसैन, अमृता खानविलकर, नमित दास, स्नेहा वाघ जैसे कलाकार अहम भूमिकाओं में नजर आए हैं।
(साभार)
घुड़सवारी क्षेत्र में 8 चयनित PBG घोड़े होंगे तैनात
देहरादून। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति निकेतन में दो नई आगंतुक- केंद्रित सुविधाओं- फुट ओवर ब्रिज और घुड़सवारी क्षेत्र- का लोकार्पण किया। इन दोनों परियोजनाओं ने राष्ट्रपति निकेतन परिसर को आधुनिक अवसंरचना, सुरक्षा और हिमालयी विरासत के अनूठे संगम के रूप में स्थापित कर दिया है।
राजपुर रोड पर बना 105 फीट लंबा पैदल पार पुल न केवल स्थानीय वास्तुकला का प्रतीक है, बल्कि यह राष्ट्रपति निकेतन और आगामी राष्ट्रपति उद्यान के बीच निर्बाध आवाजाही को भी संभव बनाता है। राज्य लोक निर्माण विभाग द्वारा ₹9 करोड़ की लागत से मात्र छह माह में तैयार की गई इस परियोजना को “हिमालयी डिज़ाइन की आधुनिक मिसाल” कहा जा रहा है। रैंप और रेलिंग सहित इसका डिज़ाइन इसे सभी आयु वर्गों के लिए सुगम और सुरक्षित बनाता है।
इसके बाद राष्ट्रपति ने राष्ट्रपति निकेतन परिसर में विकसित अत्याधुनिक घुड़सवारी क्षेत्र का भी उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने राष्ट्रपति अंगरक्षकों (PBG) के घोड़ों को स्वयं घास खिलाई और उनके रखरखाव की जानकारी ली। 0.7 एकड़ में फैला यह क्षेत्र सीपीडब्ल्यूडी द्वारा विकसित किया गया है, जहाँ राष्ट्रपति के अंगरक्षकों के 8 चयनित घोड़े रखे जाएंगे। यहां आगंतुकों के लिए देखने के गलियारे और निर्देशित भ्रमण (Guided Tours) की विशेष व्यवस्था की गई है। यह सुविधा सोमवार को छोड़कर प्रतिदिन सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक आम जनता के लिए खुली रहेगी।
वहीं राष्ट्रपति ने उत्तराखंड संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित सांस्कृतिक संध्या में भी शिरकत की। कार्यक्रम में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) भी उपस्थित रहे। राष्ट्रपति ने उत्तराखंड की लोकसंगीत और लोकनृत्य की प्रस्तुतियों का आनंद लिया और लोक कलाकारों से मिलकर उनकी हौसला-अफजाई की।
राष्ट्रपति निकेतन में हुआ यह लोकार्पण उत्तराखंड के लिए गौरवपूर्ण क्षण रहा। जहाँ आधुनिकता ने परंपरा का हाथ थामा, और राष्ट्रपति निकेतन ने भविष्य की ओर एक और सुनहरा कदम बढ़ाया।
शेफाली वर्मा बनीं ‘प्लेयर ऑफ द मैच’
नई दिल्ली। महिला क्रिकेट इतिहास में भारत ने एक ऐसा अध्याय जोड़ दिया है, जिसकी गूंज सालों तक सुनाई देगी। महिला वनडे विश्व कप 2025 के फाइनल में टीम इंडिया ने साउथ अफ्रीका को 52 रन से हराकर पहला वनडे वर्ल्ड कप अपने नाम कर लिया। लगभग पाँच दशकों से चले आ रहे इस टूर्नामेंट में भारत का यह पहला खिताब है।
भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 50 ओवर में 298 रन बनाकर बड़ा लक्ष्य दिया था। जवाब में साउथ अफ्रीकी टीम 246 रन पर ढेर हो गई। भारत की जीत में सबसे बड़ा योगदान दीप्ति शर्मा और शेफाली वर्मा ने दिया — एक ने बल्ले से पारी सँभाली और दूसरे ने गेंद से मैच बदल दिया।
भारत की बल्लेबाज़ी:
टॉप ऑर्डर ने शुरुआत शानदार दी और बड़े मैच का दबाव बिल्कुल नहीं दिखने दिया। शेफाली वर्मा 87 रन बनाकर टीम की सबसे बड़ी स्कोरर रहीं, जबकि दीप्ति शर्मा ने 58 रन जोड़े। स्मृति मंधाना 45 रन बनाकर आउट हुईं, जबकि ऋचा घोष ने 24 गेंदों पर 34 रन की धुआंधार पारी खेलकर स्कोर को 300 के करीब पहुंचाया। हालांकि बीच के ओवरों में रफ्तार थोड़ी धीमी हुई, नहीं तो भारत 350 तक जा सकता था।
साउथ अफ्रीका की बल्लेबाज़ी:
लक्ष्य बड़ा था और दबाव भी। कप्तान एल वोल्वार्ट ने 101 रन की बेहतरीन पारी खेली लेकिन दूसरे छोर से कोई भी बल्लेबाज़ टिक नहीं पाया। छोटे-छोटे पार्टनरशिप बनती रहीं लेकिन भारत की गेंदबाजी के सामने साउथ अफ्रीका टिक नहीं सका।
दीप्ति ने गेंदबाज़ी में 5 विकेट लेकर फाइनल की तस्वीर ही बदल दी। शेफाली वर्मा ने भी 2 विकेट लेकर ऑलराउंड परफॉर्मेंस दिया और ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ बनीं।
भारत ने सूझबूझ भरी बल्लेबाजी, सही प्लानिंग और बेहतरीन गेंदबाजी के दम पर वह मुकाम हासिल किया जो महिला वनडे वर्ल्ड कप में कभी हासिल नहीं हुआ था। भारतीय महिला टीम अब आधिकारिक तौर पर वनडे विश्व चैंपियन है।
पुलिस लाइन में हुई संयुक्त ब्रीफिंग, वीवीआईपी रूट और फोर्स डिप्लॉयमेंट प्लान को मिला अंतिम रूप
नैनीताल। नैनीताल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दो दिवसीय दौरे को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने जिले में हाई अलर्ट जारी कर दिया है। तीन और चार नवंबर की वीवीआईपी मूवमेंट को ध्यान में रखते हुए पुलिस, प्रशासन और इंटेलिजेंस विभागों ने संयुक्त ब्रीफिंग कर सुरक्षा प्लान को फाइनल किया। अधिकारियों ने साफ कहा कि राष्ट्रपति के प्रवास के दौरान सुरक्षा मानकों में किसी भी तरह की चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पुलिस लाइन में आयोजित बैठक में राजपत्रित अधिकारियों, जिले के सभी एसपी, आईपीएस अधिकारियों और PAC व ATS यूनिट के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान वीवीआईपी रूट, डिप्लॉयमेंट, एंट्री पास सिस्टम, कम्युनिकेशन सेटअप और फ्रिंज एरियाज़ की निगरानी व्यवस्था का रिव्यू लिया गया। अधिकारियों ने यह भी निर्देश दिए कि बगैर पहचान पत्र किसी को भी किसी रूट या कार्यक्रम स्थल के आस-पास अनुमति नहीं दी जाएगी।
आईजी स्तर के अधिकारियों ने कहा कि हाल के महीनों में देश में कई महत्वपूर्ण सुरक्षा घटनाएं हुई हैं, इसलिए नैनीताल में राष्ट्रपति के प्रवास के दौरान हर पुलिस कर्मी को अलर्ट मोड में रहना होगा। संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल कंट्रोल रूम और वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाई जाए।
डीएम नैनीताल ने कहा कि पुलिस को प्रशासन की सभी टीमों का पूरा सहयोग मिलेगा। साथ ही यह भी निर्देश दिए कि ट्रैफिक डाइवर्जन इस तरीके से लागू हो कि आम जनता का सामान्य आवागमन बाधित न हो और उन्हें अनावश्यक परेशानी न हो।
सुरक्षा तैयारी की मुख्य बातें
सभी थानों में सत्यापन और सघन चेकिंग अभियान शुरू
ड्रोन उड़ान पर पूर्ण रोक, एंटी-ड्रोन सिस्टम ऐक्टिव
ATS, SDRF, BDS, फायर यूनिट पूरी तरह तैनात
सोशल मीडिया मॉनिटरिंग टीम भी एक्टिव मोड में
तैनाती (डिप्लॉयमेंट)
31 राजपत्रित अधिकारी
302 निरीक्षक/सब इंस्पेक्टर
938 हेड कांस्टेबल व कांस्टेबल
PAC की 3 कंपनी और 2 प्लाटून
इसी बीच राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) भी राष्ट्रपति के कार्यक्रमों को देखते हुए 3 और 4 नवंबर को नैनीताल में रहेंगे और तय कार्यक्रम के अनुसार विभिन्न स्थलों पर मौजूद रहेंगे।
मनीला। दक्षिण चीन क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियों के बीच फिलीपींस और कनाडा अब रक्षा साझेदारी को औपचारिक रूप देने की तैयारी में हैं। मनीला में रविवार को दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों के बीच बैठक के बाद एक रणनीतिक सैन्य सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस समझौते के तहत दोनों देश भविष्य में संयुक्त ट्रेनिंग, एक्सरसाइज व सुरक्षा मिशन में एक–दूसरे का सहयोग करेंगे।
फिलीपींस सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य नियम आधारित व्यवस्था को मजबूती देना है ताकि क्षेत्र में किसी भी प्रकार की ‘बाहरी सैन्य दबाव की कोशिशों’ का जवाब दिया जा सके। फिलीपींस पिछले कुछ सालों से अपने डिफेंस नेटवर्क को बढ़ाने में जुटा है और कई देशों के साथ मिलकर नई रक्षा कवायदें शुरू कर चुका है।
हालांकि चीन पहले भी कई बार दक्षिण चीन सागर में सैन्य मुद्राओं पर सवाल उठाता रहा है और ऐसे रक्षा सहयोगों को “अस्थिरता बढ़ाने वाला” कदम बताता रहा है।
2016 में इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल दक्षिण चीन सागर में चीन के दावे को अस्वीकार कर चुका है, लेकिन चीन लगातार इस फैसले को मानने से इंकार करता रहा है। इस पूरे विवाद में वियतनाम, मलेशिया, ताइवान और ब्रुनेई जैसी कई और देश भी दावेदारी रखते हैं।
फिलीपींस रक्षा मंत्रालय के अनुसार नया समझौता उन सारे मामलों में सहयोग का रास्ता तय करेगा जहां साझा सुरक्षा हित जुड़े हुए हैं, और भविष्य में क्षेत्रीय शांति के लिए यह पार्टनरशिप अहम भूमिका निभा सकती है।
शरीर में विटामिन बी12 की कमी को लेकर अक्सर लोगों में यह भ्रम रहता है कि इसकी वजह केवल गलत खानपान है। जबकि विशेषज्ञों के अनुसार यह पोषक तत्व तंत्रिका तंत्र की सेहत, लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण और एनर्जी बनाए रखने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी कमी से लगातार थकान, चक्कर, पैरों में झुनझुनी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
हेल्थ एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि आजकल बी12 की कमी तेजी से इसलिए बढ़ रही है क्योंकि लोग मेडिकल सलाह के बिना कई ऐसी दवाएं लगातार उपयोग कर रहे हैं, जो पाचन तंत्र में बी12 के अवशोषण को कम कर देती हैं।
एक हालिया वीडियो में डॉक्टर शालिनी सिंह सोलंकी ने बताया कि एसिडिटी में दी जाने वाली दवाएं, एच-2 ब्लॉकर, एलर्जी की कुछ मेडिसिन, डायबिटिक मरीजों में इस्तेमाल होने वाली मेटफार्मिन और लंबे समय तक एंटीबायोटिक का प्रयोग, आंतों में मौजूद हेल्दी बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचा देते हैं। यही बैक्टीरिया विटामिन बी12 के अवशोषण में अहम भूमिका निभाते हैं। इसी कारण बी12 मात्रा कम होती-होती क्रॉनिक डेफिशिएंसी तक पहुंच जाती है।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि यदि कोई व्यक्ति पहले से ऐसी दवाएं ले रहा है, तो उन्हें अपने आप बंद न करे। सही तरीका यह है कि डॉक्टर की सलाह पर ही दवा की डोज, दवा बदलना या बी12 सप्लीमेंट जोड़ने की व्यवस्था की जाए।
डॉक्टरों के अनुसार डेयरी उत्पाद, अंडा, नॉनवेज, फोर्टिफाइड सीरियल्स जैसे स्रोत बी12 का अच्छा प्राकृतिक साधन हैं। वहीं अगर किसी को कमजोरी, मानसिक थकावट या नसों में झुनझुनी जैसे संकेत महसूस हों, तो अपने स्तर पर दवा लेने या सप्लीमेंट शुरू करने के बजाय पहले ब्लड टेस्ट करवा कर विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।
