उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को दिए जांच के निर्देश, मामले की जाँच के आधार पर हो कड़ी कार्रवाई – कुसुम कण्डवाल
देहरादून। राजधानी देहरादून से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जिस पर उत्तराखण्ड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष ने स्वतः संज्ञान लिया है। मामले में डालनवाला क्षेत्र के आराघर स्थित मदर केयर सेंटर (सिंह आई हॉस्पिटल) पर 26 वर्षीय महिला की मौत के बाद गंभीर लापरवाही के आरोप लगे हैं। मृतका के परिजनों ने अस्पताल परिसर में शव रखकर जमकर हंगामा किया और अस्पताल प्रशासन पर हत्या जैसी लापरवाही का आरोप लगाया।
मिली जानकारी के अनुसार, ज्योति प्रज्वल (26) निवासी लखीबाग ने 29 जनवरी को मदर केयर अस्पताल में ऑपरेशन के जरिए बेटे को जन्म दिया था। डिलीवरी के चार दिन बाद उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया था। लगभग दस दिन बाद ज्योति के पेट में दर्द शुरू हुआ, लेकिन जांच के बावजूद डॉक्टर कोई स्पष्ट कारण नहीं बता पाए। हालत बिगड़ने पर परिजनों ने दोबारा उन्हें उसी अस्पताल में भर्ती कराया, जिसके बाद ज्योति को ग्राफिक एरा अस्पताल रेफर कर दिया गया।
मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि ज्योति के पेट में सर्जरी के दौरान इस्तेमाल की गई पट्टी रह गई थी, जिससे गंभीर संक्रमण फैल गया और उस कारण से पीड़िता की मौत हो गई।
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने मामले में स्वतः संज्ञान लिया है उन्होंने सीएमओ देहरादून मनोज शर्मा को फोन पर वार्ता करते हुए कार्रवाई के एवं जांच के निर्देश दिए हैं जिस पर सीएमओ मनोज शर्मा ने बताया कि उन्होंने ने तत्काल प्रभाव से सिंह आई हॉस्पिटल एवं मदर केयर सेंटर का लाइसेंस जांच पूरी होने तक निलंबित कर दिया है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।
मामले में उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष ने कड़ा रुख अपनाते हुए संज्ञान लिया है। उन्होंने बताया कि दैनिक समाचार पत्रों व सोशल मीडिया के माध्यम पर प्रसारित खबर के माध्यम से स्वत: संज्ञान लेते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) देहरादून डॉ. मनोज शर्मा से त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने कहा कि—
“यह मामला अत्यंत गंभीर है। यदि एक महिला की मृत्यु अस्पताल की लापरवाही के कारण हुई है, जो कि निंदापूर्ण है। आयोग द्वारा एक विशेष जांच टीम गठित की जाएगी जो पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच करेगी। दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”
मामले में फ़िलहाल प्रशासनिक स्तर पर जांच जारी है और महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कहा है कि महिला आयोग व सरकार पीड़ित परिवार के साथ है। इस प्रकरण के हर दोषी के विरुद्ध नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजी केदारघाटी
मुख्यमंत्री धामी समेत कई अधिकारी और श्रद्धालु रहे मौजूद
रुद्रप्रयाग। केदारनाथ धाम के कपाट आज गुरुवार को भाई दूज के पावन अवसर पर सुबह 8:30 बजे वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक परंपराओं के साथ शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। इस पवित्र क्षण को देखने के लिए हजारों श्रद्धालु धाम पहुंचे और बाबा केदार के जयकारों से पूरी घाटी गूंज उठी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी इस मौके पर धाम पहुंचे और बाबा केदार के दर्शन किए।
अब अगले छह महीनों तक भगवान केदारनाथ की पूजा शीतकालीन गद्दीस्थल ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में होगी।
कपाट बंद होने से पहले मंदिर को सुंदर फूलों से सजाया गया था। बुधवार को भगवान केदार की पंचमुखी चल विग्रह डोली को मंदिर के सभामंडप में विराजमान किया गया था। आज सुबह चार बजे विशेष पूजन के साथ कपाट बंद करने की प्रक्रिया शुरू हुई। इसके बाद पंचमुखी डोली को मंदिर की परिक्रमा कराई गई और जयकारों के बीच मंदिर के कपाट विधिवत बंद किए गए। डोली आज रात रामपुर में प्रवास करेगी।
इस दौरान मुख्यमंत्री धामी के अलावा बदरी-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी, उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती, धर्माधिकारी ओंकार शुक्ला, पुजारी बागेश लिंग, आचार्य संजय तिवारी, अखिलेश शुक्ला सहित कई अधिकारी और श्रद्धालु मौजूद रहे।
17.39 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
इस वर्ष की यात्रा अवधि में 17.39 लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा केदारनाथ के दर्शन करने पहुंचे। शुरुआत से ही तीर्थयात्रियों का सैलाब केदारनाथ में उमड़ता रहा। बुधवार को भी करीब पांच हजार भक्तों ने बाबा के दर्शन किए। इस बीच धाम में ठंड का असर बढ़ गया था और दोपहर बाद कोहरे की चादर छा गई, जिससे श्रद्धालु शाम को ही अपने आवासों में लौट गए।
आज बंद होंगे यमुनोत्री धाम के कपाट
उधर, यमुनोत्री धाम में भी आज दोपहर 12:30 बजे मां यमुना मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। इसके बाद मां यमुना की उत्सव मूर्ति खरसाली गांव में पूजी जाएगी।
एडम जांपा और एलेक्स कैरी की टीम में वापसी
नई दिल्ली। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज का दूसरा मुकाबला गुरुवार को एडिलेड ओवल में खेला जाएगा। टीम इंडिया फिलहाल सीरीज में 0-1 से पिछड़ी हुई है और अब उसकी कोशिश होगी कि इस मैच को जीतकर सीरीज में वापसी की जाए। ऑस्ट्रेलियाई सरजमीं पर भारत का वनडे रिकॉर्ड बहुत प्रभावशाली नहीं रहा है, लेकिन टीम पिछली गलतियों से सबक लेकर मैदान में उतरने को तैयार है।
पर्थ में बारिश बनी थी विलेन, एडिलेड में साफ मौसम की उम्मीद
पर्थ में खेले गए पहले वनडे को बारिश ने काफी प्रभावित किया था और 26-26 ओवरों के मैच में टीम इंडिया को हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, इस बार एडिलेड में मौसम विभाग ने बारिश की कोई संभावना नहीं जताई है, जो भारतीय टीम के लिए राहत की बात है।
सभी की निगाहें एक बार फिर विराट कोहली और रोहित शर्मा पर होंगी, जो पहले मैच में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सके थे। दोनों खिलाड़ी इस मुकाबले में टीम को मजबूत शुरुआत देने के लिए नेट्स पर जमकर तैयारी कर चुके हैं।
गेंदबाजों पर भी दारोमदार
पहले मैच में भारतीय गेंदबाज भी खास प्रभाव नहीं छोड़ पाए थे। मोहम्मद सिराज और अक्षर पटेल को कम लक्ष्य का बचाव करना पड़ा, जो आसान नहीं था। एडिलेड में भी स्थिति बहुत अलग नहीं होगी, क्योंकि मिचेल स्टार्क और जोश हेजलवुड एक बार फिर भारतीय बल्लेबाजों की परीक्षा लेने के लिए तैयार हैं।
हालांकि, एडिलेड की पिच पर बल्लेबाजों को थोड़ी मदद मिलने की उम्मीद है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया की तेज और उछालभरी विकेट पर रन बनाना अब भी बड़ी चुनौती होगी।
टीम में बदलाव की संभावना कम
टीम इंडिया अपने संयोजन में बदलाव करे, इसकी संभावना कम दिखाई देती है। वाशिंगटन सुंदर की जगह कुलदीप यादव एक विकल्प हो सकते हैं, लेकिन एडिलेड की छोटी बाउंड्री को देखते हुए यह बदलाव मुश्किल माना जा रहा है। अगर अतिरिक्त स्पिनर की जरूरत पड़ी तो किसी तेज गेंदबाज को बाहर बैठना पड़ सकता है।
ऑस्ट्रेलिया को जांपा और कैरी से मजबूती
ऑस्ट्रेलिया ने पहले मैच में शानदार प्रदर्शन करने वाले बाएं हाथ के स्पिनर मैट कुहनेमैन को रिलीज कर दिया है। वहीं, एडम जांपा अपने बच्चे के जन्म के बाद टीम में लौट आए हैं।
इसके अलावा विकेटकीपर बल्लेबाज एलेक्स कैरी की भी वापसी हुई है। माना जा रहा है कि जांपा को सीधे प्लेइंग-11 में शामिल किया जाएगा, जिससे कंगारू टीम का स्पिन अटैक और मजबूत हो जाएगा।
मैच से जुडी जानकारियां
स्थान: Adelaide Oval, एडिलेड, ऑस्ट्रेलिया
दिनांक और समय: गुरुवार, 23 अक्टूबर 2025; शुरुआत भारतीय समयानुसार 9:00 AM IST से होगी।
टीवी चैनल: भारत में यह मैच Star Sports नेटवर्क पर प्रसारित होगा।
लाइव स्ट्रीमिंग: भारत में Jio Hotstar ऐप या वेबसाइट पर देखा जा सकता है।
गुणवत्ता और धार्मिक आस्था के संतुलन पर जोर, 2026 यात्रा सीजन की तैयारी अभी से शुरू करने के निर्देश
रुद्रप्रयाग। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने बुधवार को पवित्र केदारनाथ धाम पहुंचकर भगवान बाबा केदारनाथ के दर्शन किए और धाम परिसर में चल रहे पुनर्निर्माण एवं विकास कार्यों का विस्तृत स्थलीय निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने जिलाधिकारी प्रतीक जैन से धाम में जारी विभिन्न फेज़ों के निर्माण कार्यों की प्रगति, गुणवत्ता और निष्पादन की जानकारी ली। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सभी निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, सौंदर्य और धार्मिक आस्था का विशेष ध्यान रखा जाए।
उन्होंने कहा कि 23 अक्टूबर को बाबा केदारनाथ के कपाट शीतकाल के लिए बंद हो रहे हैं, इसलिए कपाट बंद होने के बाद भी धाम क्षेत्र में सुरक्षा, सामग्री संरक्षण और बर्फबारी की स्थिति में कार्यों के रखरखाव को लेकर पूरी तैयारी रखी जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वर्ष 2026 की यात्रा तैयारियों की योजना अभी से प्रारंभ की जाए।
मुख्य सचिव ने कहा कि बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य, संचार, परिवहन, सुरक्षा और आपदा प्रबंधन से जुड़े विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर यात्रियों को अगले सत्र में और भी सुविधाजनक अनुभव प्रदान किया जाए।
मुख्य सचिव ने कहा कि केदारनाथ धाम आज देश में पुनर्निर्माण और पुनरुत्थान का प्रतीक बन चुका है। सरकार और प्रशासन का लक्ष्य केवल भौतिक निर्माण नहीं, बल्कि आस्था और सुविधा का संतुलित संगम सुनिश्चित करना है, ताकि श्रद्धालुओं को एक पवित्र, सुरक्षित और दिव्य अनुभव प्राप्त हो।
इस अवसर पर जिलाधिकारी प्रतीक जैन, पुलिस अधीक्षक अक्षय प्रह्लाद कोंडे, मुख्य कार्याधिकारी मंदिर समिति विजय थपलियाल, उप जिलाधिकारी ऊखीमठ अनिल शुक्ला, अधिशासी अभियंता डी.डी.एम. विनय झिंकवाण, ए.आर.टी.ओ. धर्मेंद्र सिंह बिष्ट सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
देहरादून। गोवर्धन पूजा के पावन अवसर पर प्रदेश के कृषि, कृषक कल्याण एवं ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने आज देहरादून में पारंपरिक विधि-विधान से गोवर्धन पूजा एवं गौमाता का पूजन संपन्न किया।
काबीना मंत्री जोशी ने इस अवसर पर कहा कि गोवर्धन पूजा भारतीय कृषि संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण की गहरी भावना से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि गाय, गोबर और गोमूत्र हमारे ग्रामीण जीवन की आधारशिला हैं, जिनसे न केवल जैविक खेती को बढ़ावा मिलता है, बल्कि स्वच्छता एवं सतत विकास को भी बल मिलता है।
उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे जैविक खाद और प्राकृतिक खेती को अपनाकर सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाएं, जिससे किसानों की आय में वृद्धि के साथ-साथ पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा।
ओवरटेक के दौरान हुआ हादसा, कई लोग गंभीर रूप से घायल
कंपाला (युगांडा)। पूर्वी अफ्रीकी देश युगांडा में भीषण सड़क हादसे ने पूरे देश को दहला दिया। पश्चिमी युगांडा के गुलु हाईवे पर दो बसों और दो अन्य वाहनों की आमने-सामने की टक्कर में कम से कम 63 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
पुलिस के मुताबिक, दोनों बसें विपरीत दिशा से आ रही थीं और ओवरटेक करने की कोशिश में आमने-सामने टकरा गईं। हादसा किरियानडोंगो कस्बे के पास हुआ, जहां टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों बसें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। राहत और बचाव दल ने स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को नजदीकी सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया है।
रेड क्रॉस ने बताया भयावह दृश्य
रेड क्रॉस की प्रवक्ता आइरीन नाकासीता ने कहा कि हादसे के बाद का दृश्य बेहद दर्दनाक था। कई शव बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गए थे, जिन्हें पहचानना भी मुश्किल था। उन्होंने बताया कि देर रात होने के कारण मौके पर तुरंत मदद पहुंचाना भी मुश्किल रहा।
ओवरटेक और तेज रफ्तार बनी हादसे की वजह
पुलिस जांच में सामने आया है कि हादसे की मुख्य वजह खतरनाक ओवरटेकिंग और तेज रफ्तार थी। युगांडा पुलिस ने बताया कि देश में सड़क हादसों के मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। वर्ष 2024 में कुल 5,144 लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में हुई थी, जो 2023 के 4,806 से कहीं ज्यादा है। रिपोर्ट के अनुसार, 44.5% हादसे लापरवाह ड्राइविंग और ओवरस्पीडिंग के कारण होते हैं।
पुलिस ने लोगों से की अपील
युगांडा पुलिस ने सभी वाहन चालकों से अपील की है कि वे सड़क पर चलते समय विशेष सतर्कता बरतें। अधिकारियों ने कहा कि ओवरटेकिंग के दौरान लापरवाही देश में सड़क हादसों की सबसे बड़ी वजह बन चुकी है। पुलिस ने नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे ट्रैफिक नियमों का पालन करें ताकि भविष्य में ऐसे दर्दनाक हादसे रोके जा सकें।
वजन बढ़ना सिर्फ लुक खराब करने की समस्या नहीं है, बल्कि यह कई गंभीर बीमारियों का कारण भी बन सकता है। अनियमित दिनचर्या, जंक फूड, तनाव और शारीरिक गतिविधियों की कमी आजकल के मुख्य कारण हैं। विश्वभर में बड़ी आबादी इस समस्या से जूझ रही है। बढ़े हुए वजन से हृदय रोग और डायबिटीज़ जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए समय रहते वजन को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है।
विशेषज्ञों का मानना है – रसोई में ही है समाधान
आहार विशेषज्ञ पूजा शर्मा बताती हैं कि घर में मौजूद कुछ मसाले और खाद्य पदार्थ न सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ाते हैं, बल्कि वजन घटाने में भी मदद करते हैं। ये पूरी तरह प्राकृतिक होते हैं और इनमें मौजूद पोषक तत्व, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट मेटाबॉलिज्म को तेज करते हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि ये साइड इफेक्ट नहीं करते और रोजमर्रा के खाने में आसानी से शामिल किए जा सकते हैं।
काली मिर्च: मेटाबॉलिज्म बढ़ाए, फैट घटाए
हर घर में इस्तेमाल होने वाली काली मिर्च सिर्फ खाने का स्वाद ही नहीं बढ़ाती, बल्कि मेटाबॉलिज्म को तेज कर पाचन सुधारती है। आहार विशेषज्ञों के अनुसार, यह वजन घटाने में भी सहायक हो सकती है।
दालचीनी: ब्लड शुगर नियंत्रण और फैट बर्न
दालचीनी में मौजूद सिनामाल्डिहाइड मेटाबॉलिज्म को बढ़ावा देता है और ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखता है। यह इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाकर फैट घटाने में मदद करती है। सुबह गुनगुने पानी में आधा चम्मच दालचीनी मिलाकर पीने से डिटॉक्स का भी असर मिलता है।
इलायची: स्वाद और वजन दोनों में मददगार
इलायची पाचन को सुधारती है और फैट बर्न करने में सहायक होती है। इसे चाय या मसालों के साथ रोजाना इस्तेमाल किया जा सकता है।
हल्दी: प्राकृतिक औषधि
भारतीय मसालों में हल्दी एंटी-बैक्टीरियल, एंटीऑक्सिडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर है। यह मेटाबॉलिज्म को बढ़ाकर वजन घटाने में मदद कर सकती है।
जीरा: फैट तेजी से घटाए
जीरा में मौजूद थाइमोल और क्यूमिनल्डिहाइड पाचन में सुधार करते हैं और फैट स्टोरेज रोकते हैं। शोध से पता चला है कि दही में जीरा पाउडर मिलाकर खाने से वजन तेजी से घटता है। सुबह गुनगुने पानी में एक चम्मच जीरा उबालकर पीना भी फायदेमंद है।
ध्यान दें: ये उपाय सामान्य जानकारी के लिए हैं। किसी भी नई डाइट या उपाय को अपनाने से पहले डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।
(साभार)
दिसंबर में देहरादून में होगा जनसंपर्क का महाकुंभ — पीआरएसआई का राष्ट्रीय सम्मेलन
देहरादून। पब्लिक रिलेशन्स सोसायटी ऑफ इंडिया (PRSI) देहरादून चैप्टर द्वारा आयोजित होने वाले 47वें ऑल इंडिया पब्लिक रिलेशन्स कॉन्फ्रेंस – 2025 के ब्रोशर का विमोचन राज्यसभा सांसद नरेश बंसल द्वारा किया गया। यह राष्ट्रीय सम्मेलन आगामी 13 से 15 दिसंबर 2025 तक देहरादून में आयोजित होगा। सम्मेलन का विषय रखा गया है — “विकसित भारत @ 2047 के लिए जनसंपर्क विज़न”।
इस अवसर पर सांसद नरेश बंसल ने कहा कि जनसंपर्क समाज, सरकार और जनता के बीच एक सशक्त सेतु के रूप में कार्य करता है। उन्होंने कहा कि जनसंपर्क केवल सूचना का प्रसार नहीं, बल्कि संवाद, विश्वास और सकारात्मक सोच के माध्यम से विकास को नई दिशा देने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं और कार्यक्रमों से जनता को जोड़ने में जनसंपर्क की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। यह सम्मेलन न केवल विचारों के आदान-प्रदान का मंच बनेगा, बल्कि भारत@2047 की दृष्टि को सशक्त बनाने में भी योगदान देगा।
सांसद बंसल ने कहा कि उत्तराखंड अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे कर रहा है, ऐसे में देहरादून में इस स्तर का आयोजन होना बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन से राज्य के जनसंपर्क क्षेत्र को नई पहचान मिलेगी और युवा पेशेवरों को सीखने-समझने का अवसर प्राप्त होगा।
पीआरएसआई देहरादून चैप्टर के पदाधिकारियों ने बताया कि तीन दिवसीय जनसंपर्क के महाकुंभ के रूप में आयोजित यह राष्ट्रीय सम्मेलन देशभर से जनसंपर्क विशेषज्ञों, मीडिया प्रतिनिधियों, कॉर्पोरेट प्रोफेशनल्स और शिक्षाविदों की उपस्थिति में आयोजित होगा। सम्मेलन के दौरान जनसंपर्क के बदलते परिदृश्य, डिजिटल मीडिया की भूमिका और लोक-संचार के नए आयामों सहित विभिन्न विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया जाएगा।
इस सम्मेलन का उद्देश्य जनसंपर्क के क्षेत्र में नवीन प्रयोगों और सफल पहलों को साझा करना है, ताकि भविष्य के भारत के लिए एक सशक्त और संवेदनशील जनसंपर्क तंत्र तैयार किया जा सके।
विमोचन कार्यक्रम में पीआरएसआई देहरादून चैप्टर के अध्यक्ष रवि बिजारनियां, सचिव अनिल सती, कोषाध्यक्ष सुरेश चंद्र भट्ट, सदस्य अनिल वर्मा, वैभव गोयल, संजय पांडे, नवीन कंडारी, दीपक नौटियाल, सुशील सती, सुनील राणा आदि उपस्थित रहे।
सीएम धामी ने आम जन से अपील की कि वे भी इस पावन पर्व को भक्ति और पर्यावरण संरक्षण के रूप में मनाएं
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गोवर्धन पूजा के पावन अवसर पर भक्ति, प्रकृति संरक्षण और पशुधन के प्रति अपनी निष्ठा का प्रदर्शन करते हुए गौ माता का पूजन किया और उनकी सेवा की। इस अवसर पर सीएम धामी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत की पूजा और धारण लीला के माध्यम से यह सन्देश दिया कि प्रकृति की रक्षा ही सच्ची भक्ति है।

सीएम धामी ने आम जन से अपील की कि वे भी इस पावन पर्व को भक्ति और पर्यावरण संरक्षण के रूप में मनाएं। उन्होंने प्रार्थना की कि प्रभु श्रीकृष्ण का आशीर्वाद सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आए।
गोवर्धन पूजा पर यह संदेश लोगों में प्रकृति के प्रति जागरूकता फैलाने और पशुधन की सेवा के महत्व को रेखांकित करता है।
मां गंगा की उत्सव डोली मुखबा गांव के लिए रवाना, श्रद्धालुओं ने दी भावपूर्ण विदाई
उत्तरकाशी। गंगोत्री धाम में आज ऐतिहासिक और भावपूर्ण पल देखने को मिला। अन्नकूट पर्व के अवसर पर पूर्वाहन 11:36 बजे विधिविधान के साथ गंगोत्री मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। इस दौरान सेना के बैंड और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर धुनों के बीच श्रद्धालुओं ने ‘जय मां गंगे’ के उद्घोष के साथ मां गंगा की उत्सव डोली को मुखबा गांव की ओर रवाना होते देखा। अब अगले छह माह तक मां गंगा के दर्शन यहीं मुखबा गांव में ही होंगे।
बुधवार सुबह से ही धाम में भव्य अनुष्ठानों का दौर शुरू हो गया था। तीर्थपुरोहितों ने घाट पर गंगा जी का अभिषेक और आरती, तथा मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की। हर्षिल से आए सेना के जवानों ने निशुल्क मेडिकल कैंप और लंगर का आयोजन कर श्रद्धालुओं की सेवा की।
पूर्वाहन 11:36 बजे मुहूर्तानुसार कपाट बंद होने के बाद गंगा जी की भोग मूर्ति डोली यात्रा के साथ मुखबा के लिए रवाना हुई। इस दौरान शीतकाल में भी धाम में साधनारत रहने वाले साधु-संत और मंदिर व आश्रम कर्मी ने मां गंगा को भावपूर्ण विदाई दी।
मार्कंडेयपुरी देवी मंदिर में रात्रि विश्राम और भजन कीर्तन
तीर्थपुरोहित राजेश सेमवाल ने बताया कि गंगा जी की उत्सव डोली रात्री विश्राम के लिए मार्कंडेयपुरी देवी मंदिर में रुकेगी। वहां रातभर भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाएगा। अगले दिन डोली शीतकालीन प्रवास के लिए मुखबा गांव जाएगी।
कपाट बंद होने के बाद भी जलता रहेगा अखंड दीपक
गंगोत्री धाम के कपाट भले ही बंद हो गए हों, लेकिन मंदिर समिति के अध्यक्ष धर्मानंद सेमवाल ने बताया कि तांबे के बड़े दीपक में अखंड जोत लगातार जलती रहेगी। अगले वर्ष अक्षय तृतीया के दिन जब कपाट खुलेंगे, तीर्थयात्री इसी अखंड जोत के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त करेंगे।
भैयादूज के अवसर पर 23 अक्टूबर को यमुनोत्री धाम के कपाट दोपहर 12:30 बजे शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे। इसके बाद मां यमुना की उत्सव मूर्ति को उनके शीतकालीन प्रवास खरसाली गांव में विराजमान किया जाएगा।
