हम अपनी ज़िंदगी का लगभग एक तिहाई हिस्सा सोने में बिताते हैं। यह सुनने में भले ही लंबा लगे, लेकिन नींद शरीर और दिमाग दोनों के लिए उतनी ही जरूरी है जितनी कि खाना या सांस लेना। नींद सिर्फ आराम का समय नहीं है—यह शरीर की मरम्मत और मस्तिष्क को स्वस्थ रखने का अहम हिस्सा है।
हाल ही में हुए एक बड़े अध्ययन में यह खुलासा हुआ कि जिन लोगों की नींद खराब थी, उनका मस्तिष्क उनकी वास्तविक उम्र से ज़्यादा बूढ़ा दिख रहा था।
27,000 लोगों पर हुआ अध्ययन
यूके में 40 से 70 वर्ष की उम्र के 27,000 से अधिक लोगों के नींद के पैटर्न और मस्तिष्क के एमआरआई स्कैन का विश्लेषण किया गया। परिणाम चौंकाने वाले थे। जिन लोगों की नींद की गुणवत्ता खराब थी, उनके दिमाग की उम्र उनकी असली उम्र से कहीं अधिक पाई गई।
मस्तिष्क का “बूढ़ा होना” कैसे होता है?
जैसे शरीर बूढ़ा होने पर झुर्रियां पड़ती हैं, वैसे ही मस्तिष्क में भी उम्र के साथ बदलाव आते हैं। लेकिन हर मस्तिष्क एक ही गति से बूढ़ा नहीं होता।
आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से वैज्ञानिक अब मस्तिष्क की “जैविक उम्र” का अनुमान लगा सकते हैं। इसमें ऊतक घनत्व, कॉर्टेक्स की मोटाई और रक्त वाहिकाओं की स्वास्थ्य स्थिति का मूल्यांकन किया जाता है।
मस्तिष्क की उम्र कैसे मापी गई?
अध्ययन में 1,000 से अधिक एमआरआई संकेतों (इमेजिंग मार्कर) का विश्लेषण किया गया। मशीन लर्निंग मॉडल को उन लोगों के डेटा पर प्रशिक्षित किया गया जिनकी सेहत पूरी तरह ठीक थी। फिर बाकी प्रतिभागियों के परिणामों से तुलना की गई।
नतीजा: खराब नींद वाले लोगों में मस्तिष्क की उम्र असल उम्र से अधिक पाई गई। इसका मतलब है कि खराब नींद मस्तिष्क को समय से पहले बूढ़ा कर सकती है, जिससे भविष्य में संज्ञानात्मक क्षमता में कमी, डिमेंशिया और असमय मृत्यु का खतरा बढ़ सकता है।
नींद के पांच पहलुओं का विश्लेषण
शोध में नींद के निम्न पांच पहलुओं को ध्यान में रखा गया:
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व्यक्ति का क्रोनोटाइप (सुबह का या रात का व्यक्ति)
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औसतन कितने घंटे की नींद लेते हैं (7–8 घंटे आदर्श माने गए)
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अनिद्रा या सोने में कठिनाई
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खर्राटे लेना
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दिन में अत्यधिक नींद या थकान महसूस करना
इन सभी पहलुओं को जोड़कर “स्वस्थ नींद स्कोर” बनाया गया। जिनके चार या पांच पहलू स्वस्थ थे, उनकी नींद सबसे अच्छी पाई गई। वहीं जिनके पास केवल एक या दो स्वस्थ पहलू थे, उनमें मस्तिष्क की उम्र सबसे अधिक बढ़ी हुई दिखी।
सूजन और मस्तिष्क उम्र का संबंध
अध्ययन में प्रतिभागियों के खून के नमूनों का विश्लेषण भी किया गया। पाया गया कि खराब नींद शरीर में सूजन को बढ़ाती है। यह सूजन मस्तिष्क की उम्र बढ़ाने की प्रक्रिया में लगभग 10% योगदान करती है।
अपनी नींद कैसे सुधारें?
वैज्ञानिकों के अनुसार, कुछ सरल आदतों से नींद की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है:
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सोने से पहले कैफीन, शराब और मोबाइल स्क्रीन से दूरी रखें
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अंधेरा और शांत वातावरण तैयार करें
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हर दिन एक ही समय पर सोने और उठने की आदत डालें
इन छोटे बदलावों से न केवल नींद सुधरेगी, बल्कि आपका मस्तिष्क भी लंबे समय तक जवान और सक्रिय रहेगा।
नई दिल्ली/नैनीताल: उत्तराखंड के युवा बेहतर रोजगार की तलाश में अक्सर अपने घर-परिवार और पहाड़ों को छोड़कर बड़े शहरों की ओर जाते हैं। लेकिन कभी-कभी यह संघर्ष उनकी जान तक ले लेता है। ऐसा ही एक दुखद मामला दिल्ली के “टर्निंग पॉइंट” होटल में सामने आया है, जहां नैनीताल जिले के बेतालघाट क्षेत्र के ऊंचाकोट मल्ला गांव निवासी प्रेमचंद पुत्र कुंदन राम की हत्या कर दी गई।
रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रेमचंद दिल्ली में होटल में काम कर रहे थे और अपने परिवार के लिए मेहनत कर रहे थे। रात करीब 1:45 बजे, होटल में उनके और उत्तर प्रदेश के रहने वाले अखिलेश के बीच विवाद हो गया। अचानक गुस्से में आए अखिलेश ने प्रेमचंद के सीने में कई बार चाकू मार दिया। इससे उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई।
इस घटना ने उनके परिवार पर गहरा शोक छोड़ दिया है। प्रेमचंद की पत्नी और दो छोटे-छोटे बच्चों का जीवन अचानक अंधकार में बदल गया है। परिवार न केवल पिता और पति को खोकर टूट गया है, बल्कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी के लिए संघर्ष करने के लिए मजबूर भी है।
सामाजिक कार्यकर्ता रोशन रतूड़ी ने घटना पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए आरोपी पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा, “उत्तराखंड के एक और होटलियर भाई की दिल्ली में बेरहमी से हत्या की गई। पुलिस प्रशासन द्वारा आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। हमें चाहिए कि ऐसी घटनाओं पर कड़ा कानूनी शिकंजा कसा जाए।”
पुलिस ने बताया कि हत्या का आरोपी गिरफ्तार कर लिया गया है और मामले की जांच जारी है। इस दुखद घटना ने रोजगार की तलाश में जाने वाले युवाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस दौरान पूरे परिवार और समाज से प्रार्थना की जा रही है कि भगवान दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और परिवार को यह अपार दुख सहने की शक्ति दें।
वाराणसी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को अपने दो दिवसीय दौरे पर वाराणसी पहुंचे। दौरे की शुरुआत उन्होंने शिवपुर स्थित अन्नपूर्णा ऋषिकुल ब्रह्मचर्य आश्रम के कार्यक्रम में भाग लेकर की, जहां उन्होंने 150 युवतियों को सिलाई और कढ़ाई मशीनें वितरित कीं। साथ ही मेधावी छात्र-छात्राओं को लैपटॉप देकर सम्मानित किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने आश्रम के महंत शंकरपुरी के सामाजिक योगदान की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास समाज को सशक्त बनाने की दिशा में मील का पत्थर हैं। उन्होंने कहा कि अन्नपूर्णा मंदिर आज न केवल धार्मिक गतिविधियों का केंद्र है, बल्कि यह आत्मनिर्भरता और रोजगार का भी प्रतीक बन चुका है।
सीएम योगी ने कहा, “मां अन्नपूर्णा के आशीर्वाद से यह संस्थान महिलाओं को स्वावलंबी बना रहा है। एक सिलाई मशीन एक परिवार की आर्थिक रीढ़ बन सकती है। हमारी बहन-बेटियां अब आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं।”
उन्होंने बताया कि मंदिर प्रबंधन परंपरा और आधुनिकता के संतुलन को बनाए रखते हुए कंप्यूटर शिक्षा भी प्रदान कर रहा है। साथ ही संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए छात्रवृत्तियों की व्यवस्था की गई है। उन्होंने यह भी बताया कि आश्रम में गऊ सेवा का कार्य भी सुचारु रूप से चल रहा है।
मुख्यमंत्री वाराणसी में अपने प्रवास के दौरान सर्किट हाउस में कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों की समीक्षा करेंगे। साथ ही काशी विश्वनाथ मंदिर और काल भैरव के दर्शन कर मंगलवार को शहर से प्रस्थान करेंगे।
अपने दौरे के दूसरे दिन सीएम योगी चांदपुर स्थित अंतरराष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान (IRRI) के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (ISARC) में आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन में भाग लेंगे। सम्मेलन में कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों और उत्तर प्रदेश की भूमिका पर विचार विमर्श होगा।
इसके अलावा मुख्यमंत्री पिपलानी कटरा स्थित सरोजा पैलेस में आयोजित स्वच्छता कार्यक्रम में लगभग 400 सफाईकर्मियों को ‘मुख्यमंत्री स्वच्छता किट’ वितरित करेंगे।
सीएम योगी कृषि विभाग की 150वीं वर्षगांठ पर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में भी शामिल होंगे, जहां वे अत्याधुनिक कृषि उपकरणों — ई-सीडर और प्रिसिजन हिल सीडर — का लोकार्पण करेंगे। इसके साथ ही धान की सीधी बुवाई पर आधारित पुस्तिका और ‘समृद्धि धान नेटवर्क’ का विमोचन भी करेंगे।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री वर्ष 2030 तक उत्तर प्रदेश को वैश्विक खाद्य भंडारण केंद्र के रूप में विकसित करने की राज्य सरकार की योजना पर भी विचार साझा करेंगे।
देहरादून। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) ने दीपावली के अवसर पर राज्य के आठ प्रमुख शहरों में हवा और ध्वनि प्रदूषण की निगरानी की तैयारी पूरी कर ली है। यह विशेष अभियान 13 अक्टूबर से शुरू होकर 15 दिन तक चलेगा, जैसा कि हर साल दीपावली के समय किया जाता है।
इस दौरान देहरादून, ऋषिकेश, टिहरी, हरिद्वार, काशीपुर, रुद्रपुर, हल्द्वानी और नैनीताल में हवा की गुणवत्ता और ध्वनि स्तर की जांच की जाएगी।
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देहरादून: घंटाघर और नेहरू कॉलोनी
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ऋषिकेश: नगर निगम परिसर
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टिहरी: डीएम कार्यालय और नगर पालिका परिषद परिसर
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हरिद्वार: ऋषिकुल आयुर्वेदिक कॉलेज
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काशीपुर: एलडी भट्ट उप जिला अस्पताल
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रुद्रपुर: नगर निगम परिसर
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हल्द्वानी: जल संस्थान कार्यालय
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नैनीताल: नगर पालिका परिषद परिसर
पीसीबी अधिकारियों के अनुसार, दीपावली के दौरान पटाखों और अन्य उत्सवों के कारण हवा और ध्वनि प्रदूषण में काफी वृद्धि होती है। इसलिए मानीटरिंग के लिए लगे स्टेशन के माध्यम से जांच होगी।
देहरादून। उत्तराखंड में वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर लगातार प्रयासों के बावजूद हाथियों की अप्राकृतिक मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा है। पिछले 25 वर्षों में प्रदेश में 167 हाथियों की मौत अप्राकृतिक कारणों से दर्ज की गई है, जो चिंताजनक स्थिति को दर्शाती है। हाल ही में हरिद्वार वन प्रभाग में तीन हाथियों की मौत ने एक बार फिर वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। इनमें एक हाथी की मौत करंट लगने से, एक की बीमारी से, जबकि तीसरे की मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका।
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2001 से अक्टूबर 2025 तक कुल 538 हाथियों की मौत दर्ज की गई। इनमें से 52 की मौत बिजली के करंट, 32 की ट्रेन से टकराने, 71 की दुर्घटनाओं, 2 की सड़क हादसों, 1 की जहर से, जबकि 9 की शिकार से हुई। इसके अलावा 79 हाथियों की मौत का कारण अब तक अज्ञात है। वहीं 102 हाथी आपसी संघर्ष में मारे गए और 227 की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई।
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि मानव बस्तियों के तेजी से विस्तार और जंगलों में घटती सुरक्षित जगहें इन घटनाओं का प्रमुख कारण हैं। राज्य में हाथियों की आबादी बढ़कर 2001 में 1507 से 2020 में 2026 तक पहुंच गई, जिससे मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं भी बढ़ी हैं। तराई केंद्रीय, हरिद्वार, रामनगर और तराई पूर्वी वन प्रभागों से सटे ग्रामीण इलाकों में अक्सर हाथियों का प्रवेश देखा जा रहा है।
वन संरक्षक राजीव धीमान ने बताया कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए विभाग लगातार प्रयासरत है। रेलवे ट्रैक के आसपास पेट्रोलिंग बढ़ाई गई है और ट्रेन की गति सीमित करने के उपाय किए गए हैं। वहीं, हरिद्वार वन प्रभाग के डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध के अनुसार, हाथियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए खेताें में लगी 40 अवैध करंट युक्त तारबाड़ें हटाई गईं, जिनसे हाथियों के लिए खतरा था। इस संबंध में एक मुकदमा भी दर्ज किया गया है।
वन विभाग का कहना है कि जनजागरूकता और ग्रामीणों के सहयोग से ही मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम किया जा सकता है। विभाग आने वाले समय में निगरानी और रोकथाम के लिए सैटेलाइट ट्रैकिंग और इलेक्ट्रिक फेंसिंग जैसे आधुनिक उपायों पर भी विचार कर रहा है।
देहरादून। जिलाधिकारी सविन बंसल के समक्ष खुड़बुड़ा निवासी 70 वर्षीय बुजुर्ग दंपति जसवंत सिंह और उनकी पत्नी ने अपने पुत्र व पुत्रवधु को घर से बेदखल करने की गुहार लगाई थी। बुजुर्ग दंपति ने नाराज होकर जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय में भरणपोषण अधिनियम के तहत वाद भी दर्ज कराया था।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने दो सुनवाई में ही मामले की गहराई को समझते हुए परिजनों के बीच उत्पन्न मनमुटाव को दूर कराया। उन्होंने बुजुर्ग दंपति से आग्रह किया कि वे अपने तीन नौनिहालों वाले बेटे-बहू को बेदखल न करें और परिवार को टूटने से बचाएं। साथ ही बेटे-बहू को भी बुजुर्गों के प्रति अपने कर्तव्य और जिम्मेदारियों का स्मरण कराया।
डीएम ने दोनों पक्षों को आपसी प्रेम, सम्मान और सहयोग के साथ रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि बुजुर्ग माता-पिता और निर्धन बेटे-बहू एक-दूसरे के सहारे हैं, इसलिए परिवारिक सौहार्द बनाए रखना ही सबसे बड़ा समाधान है।
बुजुर्ग दंपति के चार पुत्र हैं, जिनमें दो अपने परिवार के साथ अलग रहते हैं। एक पुत्र दिव्यांग है, जबकि पुत्र बंसी की आर्थिक स्थिति कमजोर है। उसका कपड़ों का छोटा व्यवसाय है और तीन नाबालिग बच्चे हैं। जिलाधिकारी ने बुजुर्गों से कहा कि वे अपने बेटे-बहू और नौनिहालों को घर से न निकालें, वहीं बेटे-बहू को भी समझाया कि वे बुजुर्गों का सम्मान करें और उनकी देखभाल में कोई कमी न आने दें। प्रशासन इस प्रकरण की नियमित मॉनिटरिंग करेगा ताकि परिवार में सौहार्द बना रहे।
कोटद्वार। जम्मू-कश्मीर के बारामूला क्षेत्र में ड्यूटी के दौरान क्रॉस फायरिंग में घायल होकर 25 वर्षीय राइफलमैन सूरज सिंह नेगी देश के लिए शहीद हो गए। गोरखा रेजिमेंट में तैनात सूरज नेगी का पार्थिव शरीर सेना के विशेष वाहन से कोटद्वार के कौड़िया कैंप में पहुंचा।
हर कही सूरज सिंह अमर रहे के नारे
सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार आज लालपुर गांव में किया गया। इस दौरान हजारों लोग नम आंखों और गर्व के भाव के साथ अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई देने के लिए जुटे। लोगों ने भारत माता की जय और “सूरज सिंह अमर रहें” के नारे लगाए।
दो भाइयों में छोटे राइफलमैन सूरज सिंह
सूरज सिंह नेगी, जो दो भाइयों में सबसे छोटे थे, वर्ष 2021 में गोरखा रेजिमेंट में भर्ती हुए थे। परिवार और गांव के लोग उनके बलिदान की खबर पाकर सदमे में हैं। उनके माता-पिता और भाई पंकज नेगी ने वीर जवान को खोने का गहरा शोक व्यक्त किया।
सीएम धामी ने जताया शोक

सोशल मीडिया पर लिखा हुआ सीएम धामी का शोक सन्देश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शहीद की शहादत पर गहरा शोक व्यक्त किया और सोशल मीडिया पर लिखा: “जम्मू-कश्मीर के बारामूला क्षेत्र में मां भारती की सेवा करते हुए कोटद्वार के वीर पुत्र, राइफलमैन सूरज सिंह नेगी के शहीद होने का अत्यंत दुःखद समाचार प्राप्त हुआ। आपकी वीरता और बलिदान को नमन। आपकी शौर्यगाथा सदैव हमारी स्मृतियों में जीवंत रहेगी।
सितंबर में आए थे राइफलमैन अपने घर
सूरज सितंबर माह में छुट्टी पर अपने घर आए थे और कुछ दिन पहले ही ड्यूटी पर लौटे थे। बारामूला के सीमावर्ती क्षेत्र में अचानक क्रॉस फायरिंग के दौरान उन्हें गोली लगी, जिसे तत्काल सैन्य चिकित्सालय ले जाया गया, लेकिन वहां उन्होंने अंतिम सांस ली।
बलिदान को हमेशा रखा जाएगा याद
लालपुर के वार्ड-19 के पार्षद नेत्र मोहन असवाल ने बताया कि सूरज का परिवार और पूरा गांव उनके बलिदान को याद करते हुए शोक में डूब गया। उनके साहस, कर्तव्यनिष्ठा और देशभक्ति ने पूरे गढ़वाल और उत्तराखंड के लोगों में गर्व की भावना पैदा की है।सूरज सिंह नेगी की शहादत न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे राज्य और देश के लिए गौरव का विषय है। उनके बलिदान को हमेशा याद रखा जाएगा
सीएम धामी बोले– शहीदों का पराक्रम हर भारतीय के लिए प्रेरणा
लैंसडाउन। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को लैंसडाउन स्थित गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल वॉर मेमोरियल पहुंचकर शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने वॉर मेमोरियल पर पुष्पचक्र अर्पित कर माँ भारती की सेवा में सर्वस्व न्योछावर करने वाले अमर सपूतों को नमन किया।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह स्मारक वीर सपूतों के शौर्य, त्याग और मातृभूमि के प्रति उनके अडिग प्रेम का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि गढ़वाल राइफल्स के जांबाज सैनिकों ने देश की रक्षा के लिए जो बलिदान दिए हैं, वे सदैव प्रेरणा स्रोत रहेंगे।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी भी मौजूद रहे।
आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में थकान महसूस होना या कुछ बाल झड़ना अब आम बात लगती है। हममें से ज़्यादातर लोग इसे काम के बोझ, तनाव या नींद की कमी से जोड़कर अनदेखा कर देते हैं। लेकिन अगर पर्याप्त आराम के बावजूद आप हर समय थके-थके रहते हैं, ऊर्जा की कमी महसूस करते हैं और बाल सामान्य से कहीं ज़्यादा झड़ रहे हैं, तो यह सिर्फ एक साधारण समस्या नहीं, बल्कि किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार थकान और बाल झड़ना थायराइड जैसी हार्मोनल समस्या की शुरुआती चेतावनी हो सकती है। यह एक ऐसी स्थिति है, जब गले में मौजूद तितली के आकार की थायराइड ग्रंथि पर्याप्त मात्रा में हार्मोन नहीं बना पाती, जिससे शरीर का मेटाबॉलिज्म प्रभावित होने लगता है।
क्यों होते हैं थकान और बाल झड़ने के लक्षण?
थायराइड ग्रंथि हमारे शरीर की ऊर्जा निर्माण और उपयोग की प्रक्रिया यानी मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करती है।
थायराइड दो तरह का होता है —
हाइपरथायरॉयडिज्म (Overactive Thyroid) – जब हार्मोन ज़रूरत से ज़्यादा बनते हैं।
हाइपोथायरॉयडिज्म (Underactive Thyroid) – जब हार्मोन पर्याप्त मात्रा में नहीं बनते।
हाइपोथायरॉयडिज्म की स्थिति में शरीर की ऊर्जा उत्पादन प्रक्रिया धीमी हो जाती है, जिससे लगातार थकान, सुस्ती और कमजोरी महसूस होती है। साथ ही, थायराइड हार्मोन बालों की जड़ों के विकास में अहम भूमिका निभाते हैं। जब हार्मोन की कमी होती है, तो बालों की ग्रोथ साइकिल प्रभावित होती है, जिससे बाल रूखे, बेजान और झड़ने लगते हैं।
हाइपोथायरॉयडिज्म के अन्य शुरुआती लक्षण
थकान और बाल झड़ने के अलावा इसके और भी संकेत हो सकते हैं—
वजन में अचानक वृद्धि
ठंड अधिक लगना
त्वचा का रूखापन और बालों का टूटना
कब्ज की समस्या
मूड में बदलाव और एकाग्रता में कमी
किन लोगों को होता है अधिक खतरा?
थायराइड की समस्या महिलाओं में पुरुषों की तुलना में अधिक आम है, खासकर 30 वर्ष की उम्र के बाद।
यदि परिवार में किसी को यह समस्या रही है, तो आनुवंशिक रूप से इसका जोखिम बढ़ जाता है।
इसके अलावा, ऑटोइम्यून बीमारियां, आयोडीन की कमी, और हार्मोनल बदलाव भी इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं।
क्या करें?
अगर आप लंबे समय से थकान, वजन बढ़ने या बाल झड़ने की समस्या झेल रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज न करें।
TSH टेस्ट जैसे सामान्य ब्लड टेस्ट से थायराइड की पहचान आसानी से की जा सकती है।
समय पर जांच और उचित दवा से इस बीमारी को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है।
संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और नियमित व्यायाम भी थायराइड को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं।
(साभार)

