नीरज घेवान की फिल्म ‘होमबाउंड’ को रिलीज हुए पांच दिन हो चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर खूब सराही गई इस फिल्म को भारत में दर्शकों से उम्मीद के मुताबिक प्रतिक्रिया नहीं मिल पा रही है। सिनेमाघरों में इसका प्रदर्शन बेहद कमजोर साबित हो रहा है।
पहले पांच दिन की कमाई
रिलीज के पहले दिन फिल्म ने सिर्फ 30 लाख रुपये का कारोबार किया। दूसरे दिन थोड़ी बढ़त के साथ कलेक्शन 55 लाख रुपये तक पहुंचा। रविवार को भी आंकड़े इसी पर टिके रहे। चौथे दिन यानी सोमवार को गिरावट दर्ज की गई और बिजनेस घटकर 23 लाख रुपये पर आ गया। मंगलवार को हालात और बिगड़े और फिल्म केवल 18 लाख रुपये ही जुटा सकी। इस तरह पांच दिनों में ‘होमबाउंड’ की कुल कमाई सिर्फ 1.81 करोड़ रुपये रही।
विदेशों में सराहना, देश में उदासीनता
कान और टोरंटो जैसे बड़े फिल्म फेस्टिवल्स में ‘होमबाउंड’ की खूब तारीफ हुई। समीक्षकों ने नीरज घेवान की कहानी कहने की संवेदनशील शैली को सराहा। लेकिन भारतीय दर्शकों के बीच यह फिल्म प्रभाव छोड़ने में असफल रही। फिल्म विशेषज्ञों का मानना है कि देश में अब भी दर्शक ज्यादा मनोरंजन और स्टार पावर वाली फिल्मों को प्राथमिकता देते हैं।
वीकेंड भी नहीं बना सहारा
आमतौर पर वीकेंड फिल्मों के लिए सबसे अच्छा समय माना जाता है, लेकिन ‘होमबाउंड’ को इसका लाभ नहीं मिल पाया। इस दौरान हिंदी बॉक्स ऑफिस पर कोई बड़ी फिल्म रिलीज नहीं हुई थी, सिर्फ पवन कल्याण की तेलुगु फिल्म ‘दे कॉल हिम ओजी’ सिनेमाघरों में थी। बावजूद इसके नीरज घेवान की फिल्म दर्शकों को थियेटर तक खींचने में नाकाम रही।
फिल्म की कहानी और कलाकार
धर्मा प्रोडक्शंस के बैनर तले बनी इस फिल्म का निर्देशन नीरज घेवान ने किया है। ‘मसान’ जैसी यादगार फिल्म बनाने वाले निर्देशक ने इस बार दोस्ती, जातिगत भेदभाव और समाज में सफलता की परिभाषा जैसे गंभीर मुद्दों को पर्दे पर उतारा है। फिल्म में ईशान खट्टर, जान्हवी कपूर और विशाल जेठवा मुख्य भूमिकाओं में हैं। हालांकि कहानी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली, लेकिन घरेलू दर्शकों पर इसका असर फीका रहा।
(साभार)
उच्च जोखिम गर्भधारण वाली महिलाओं को मिला विशेष परामर्श और जांच
देहरादून। स्वस्थ नारी सशक्त परिवार अभियान के तहत प्रदेशभर में आयोजित स्वास्थ्य शिविरों में न केवल आम लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है बल्कि गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व स्वास्थ्य संबंधी परामर्श भी दिया जा रहा है। अभियान के तहत अब तक 80 हजार से अधिक गर्भवती महिलाओं की एएनसी (एंटीनेटल केयर ) जांच की गई, जिसमें गर्भस्थ शिशु और मां के स्वास्थ्य का आंकलन किया गया।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि स्वस्थ नारी सशक्त परिवार अभियान के तहत प्रदेशभर में लगाये जा रहे स्वास्थ्य शिविरों में 80,515 गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच की गई। जिसमें अल्मोड़ा जनपद में 2195, बागेश्वर 1131, चमोली 2285, चम्पावत 1758, देहरादून 15728, हरिद्वार 14472, नैनीताल 7853, पौड़ी 2375, पिथौरागढ़ 2067, रूद्रप्रयाग 1936, टिहरी 4650, ऊधमसिंह नगर 21509 तथा उत्तरकाशी में 2556 गर्भवती महिलाएं शामिल हैं।
स्वास्थ्य शिविरों में इन महिलाओं की उच्च रक्तचाप, वजन, शारीरिक जांच, मुधमेह, एचआईवी व यूरीन के अलावा अन्य जांच की गई। इसके अलावा उच्च जोखिम गर्भधारण वाली महिलाओं की पहचान कर उन्हें आवश्यक चिकित्सीय परामर्श एवं सोनोग्राफी जांच कराने की सलाह दी गई। विशेषकर ऐसी महिलाओं को अतिरिक्त परामर्श दिया गया जिनका पहला प्रसव ऑपरेशन से हुआ हो, पहले गर्भपात या मृत शिशु का जन्म हुआ हो, जिनका वजन व ऊचांई कम हो, कम उम्र में गर्भधारण किया हो, गंभीर एनीमिया, उच्च रक्तचाप, मधुमेह या किसी अन्य गंभीर बीमारी से ग्रसित हो। इस दौरान डॉक्टरों ने गर्भवती महिलाओं को संतुलित आहार, नियमित दवा सेवन, हरी सब्जियां, दूध, सोयाबीन, फल, चना व गुड़ के सेवन पर बल दिया। एनीमिक महिलाओं को आयरन-फोलिक एसिड की गोलियां भी वितरित की।
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में मातृ-मृत्यु दर में कमी लाने के लिये राज्य सरकार खासी गंभीर है। इसके लिये स्वास्थ्य विभाग द्वारा एएनएम, आशा कार्यकर्ताओं व आंगनबाड़ी सेविकाओं के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को संस्थागत प्रसव के लिये लगातार प्रेरित किया जा रहा है, साथ ही प्रसव पूर्व जांच को बढ़ावा देने के लिये पंचायत स्तर पर काम किया जा रहा है।
बयान-
स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान के तहत स्वास्थ्य शिविरों में 80 हजार से अधिक गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांचे की गई। गर्भवती महिलाओं की एएनसी जांच होनी बेहद जरूरी है, इससे मां और बच्चे की सेहत का समय पर पता चल जाता है और गर्भावस्था के समय होने वाले जोखिम से बचा जा सकता है।– डॉ. धन सिंह रावत, स्वास्थ्य मंत्री, उत्तराखंड।
सुमित अंतिल ने रचा इतिहास, विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में लगातार तीसरा स्वर्ण पदक किया अपने नाम
अपने ही रिकॉर्ड को तोड़कर चमके सुमित, 71.37 मीटर भाला फेंककर जीता गोल्ड
नई दिल्ली। भारत के पैरा भाला फेंक स्टार सुमित अंतिल ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है। विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने एफ-64 वर्ग में लगातार तीसरा स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इससे पहले सुमित ने 2023 और 2024 में भी गोल्ड मेडल जीता था। यही नहीं, वह टोक्यो 2021 और पेरिस 2024 पैरालंपिक में भी स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। एशियाई पैरा खेलों के भी वह मौजूदा चैंपियन हैं।
सुमित ने इस बार अपने ही रिकॉर्ड को तोड़ा। उन्होंने पांचवें प्रयास में 71.37 मीटर भाला फेंका, जो उनके 2023 के रिकॉर्ड (70.83 मीटर) से बेहतर रहा।
केवल सुमित ही नहीं, बल्कि भारत के अन्य पैरा एथलीटों ने भी शानदार प्रदर्शन किया।
संदीप संजय सर्गर ने एफ-44 कैटेगरी में 62.82 मीटर भाला फेंककर गोल्ड मेडल जीता। यह उनका किसी भी बड़े टूर्नामेंट में पहला मेडल है। उन्होंने अपने साथी और पूर्व विश्व चैंपियन संदीप चौधरी (62.67 मीटर) को पीछे छोड़ा।
योगेश कथूनिया ने एफ-56 डिस्कस थ्रो कैटेगरी में 42.49 मीटर का थ्रो कर रजत पदक जीता। यह उनका विश्व चैंपियनशिप में लगातार तीसरा और कुल चौथा सिल्वर है।
वहीं, चैंपियनशिप में मौसम भी चर्चा का विषय बना। मंगलवार को हुई बारिश विदेशी खिलाड़ियों के लिए राहत बनकर आई। इससे पहले की उमस और भीषण गर्मी के कारण 15 विदेशी एथलीटों को मेडिकल सेंटर तक ले जाना पड़ा था। ज्यादातर यूरोपीय खिलाड़ियों को अभ्यास के दौरान परेशानी हुई थी, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद छोड़ दिया गया।
एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा, संकट की घड़ी में प्रदेशवासियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है प्राधिकरण
देहरादून। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने एक अनुकरणीय कदम उठाते हुए हाल ही में उत्तरकाशी के धराली और चमोली जिले के थराली में आई भीषण आपदा से प्रभावित लोगों की मदद के लिए सराहनीय पहल की है। विगत दिनों इन क्षेत्रों में आई प्राकृतिक आपदा के कारण भारी जनहानि हुई। कई परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया और सैकड़ों लोग अब भी जीवन की मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। प्रभावित क्षेत्रों में आज भी खाद्यान्न, जस्ती एवं अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुओं की सख्त आवश्यकता बनी हुई है।
जनहित को सर्वोपरि मानते हुए एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने निर्णय लिया है कि प्राधिकरण में कार्यरत सभी नियमित अधिकारी और कर्मचारी अपने सितंबर माह के एक दिन का वेतन आपदा पीड़ितों की सहायता के लिए देंगे। इस कटौती से प्राप्त राशि को एकमुश्त संकलित कर मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष में जमा कराया जाएगा। एमडीडीए की इस पहल से जहां आपदा पीड़ितों को तात्कालिक राहत मिलेगी, वहीं यह भी संदेश गया है कि संकट की घड़ी में सरकारी संस्थान और कर्मचारी समाज के साथ मजबूती से खड़े हैं। इस निर्णय की व्यापक स्तर पर सराहना हो रही है।
एमडीडीए उपाध्यक्ष एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा आपदा की इस विकट घड़ी में प्रभावित परिवारों की पीड़ा हम सभी की साझा पीड़ा है। एक दिन का वेतन देना हमारे कर्तव्य और सामाजिक दायित्व का प्रतीक है। हमारी कोशिश है कि आपदा पीड़ितों तक हरसंभव मदद पहुंचाई जाए। यह योगदान भले ही छोटा लगे, लेकिन इसका उद्देश्य प्रभावित परिवारों के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ना और यह विश्वास दिलाना है कि पूरा प्रदेश उनके साथ खड़ा है।
एक की करंट से मौत, दूसरे की वजह अब भी रहस्य
हरिद्वार। हरिद्वार वन प्रभाग में लगातार चार दिनों के भीतर दो हाथियों की मौत से हड़कंप मच गया है। 26 सितंबर को खानपुर रेंज के रसूलपुर क्षेत्र और 29 सितंबर को शाह मंसूर बीट में हाथियों के शव मिले। इनमें से एक हाथी की मौत खेत में लगी करंट वाली फैंसिंग से हुई, जबकि दूसरे की मौत का कारण अभी साफ नहीं हो पाया है।
पहली घटना में रसूलपुर बीट में हाथी का शव वन और राजस्व विभाग की सीमा पर मिला था। मौत का कारण स्पष्ट न होने पर सैंपल जांच के लिए आईवीआरआई बरेली और भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून भेजे गए हैं। पानी के नमूने भी जांच के लिए लिए गए हैं।
वहीं, शाह मंसूर में खेत में हाथी का शव मिला, जहां इलेक्ट्रिक फैंसिंग लगी थी। मामले में खेत मालिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध ने बताया कि दूसरी घटना में हाथी की मौत करंट लगने से हुई है। वहीं पहली घटना में अभी जांच रिपोर्ट का इंतजार है।
उन्होंने बताया कि जिस क्षेत्र में ये घटनाएं हुई हैं, वहां बड़े पैमाने पर अवैध इलेक्ट्रिक फैंसिंग पाई गई है। ऐसे में एक विशेष अभियान चलाकर इस तरह की फैंसिंग को हटाने की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही मामले की जांच एसडीओ स्तर के अधिकारी को सौंपी गई है।
सामाजिक, शैक्षणिक एवं समसामयिक विषयों पर किया विचार-विमर्श
देहरादून। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) से आज राजभवन में जैन समुदाय के प्रतिनिधिमण्डल ने शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर राज्यपाल ने प्रतिनिधिमण्डल के सदस्यों से सामाजिक, शैक्षणिक एवं समसामयिक विषयों पर विचार-विमर्श किया।
राज्यपाल ने जैन समुदाय की अहिंसा, सत्य, अनुशासन और शिक्षा जैसे उच्च जीवन मूल्यों की परंपरा की सराहना की। उन्होंने कहा कि जैन समाज ने सदैव सेवा, संस्कार और समाजहित के कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। विशेषकर शिक्षा और संस्कारों के क्षेत्र में उनकी पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायी है। प्रतिनिधिमण्डल ने राज्यपाल को अपनी गतिविधियों, सामाजिक पहलों तथा इनसे जुड़ी चुनौतियों की जानकारी दी।
धमाके से सड़क पर खड़ी गाड़ियां और इमारतें क्षतिग्रस्त
क्वेटा। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत की राजधानी क्वेटा मंगलवार को एक भीषण धमाके से दहल उठी। फ्रंटियर कॉर्प्स (FC) मुख्यालय के पास जरघुन रोड पर हुए इस हमले में कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई, जबकि 20 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। विस्फोट के बाद पूरे इलाके में अफरातफरी और दहशत का माहौल फैल गया।
स्थानीय मीडिया के मुताबिक, यह हमला आत्मघाती बम धमाका था। हमलावर ने खुद को उड़ा लिया, जिसके तुरंत बाद भारी गोलीबारी शुरू हो गई। सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए छह आतंकियों को ढेर कर दिया, जिनमें आत्मघाती हमलावर भी शामिल था।
धमाके की तीव्रता इतनी अधिक थी कि आसपास की इमारतों की खिड़कियां चकनाचूर हो गईं। कई गाड़ियां, मोटरसाइकिल और रिक्शे पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। मौके से उठता काला धुआं आसमान तक दिखाई देता रहा। क्वेटा के सिविल अस्पताल ने पुष्टि की कि मृतकों के 10 शव अस्पताल लाए गए हैं और 20 से ज्यादा घायल भर्ती हैं, जिनमें कई की हालत नाजुक है।
राहत दलों ने तुरंत घायलों को नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाया। इस बीच सुरक्षा बलों ने इलाके को सील कर दिया और बम डिस्पोजल स्क्वॉड को मौके पर तैनात किया गया। बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री मीर सरफराज बुगटी ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि सुरक्षाबलों और नागरिकों की कुर्बानियां व्यर्थ नहीं जाएंगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रदेश को हर हाल में सुरक्षित और शांतिपूर्ण बनाया जाएगा।
पिछले दिनों भी हमले
गौरतलब है कि 24 सितंबर को भी बलूचिस्तान के मुस्तुंग इलाके में जाफर एक्सप्रेस ट्रेन को निशाना बनाया गया था, जिसमें 12 लोग घायल हुए थे। वहीं, 23 सितंबर को क्वेटा रेलवे स्टेशन के पास पटरियों पर भी धमाका हुआ था।
गीतांजलि अंगमो बोलीं— डीजीपी के बयान झूठे और मनगढ़ंत, प्रशासन बना रहा है बलि का बकरा
लेह। पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर उनकी पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के बयानों को झूठा और मनगढ़ंत करार देते हुए इसे एक सोची-समझी साजिश बताया। गीतांजलि का कहना है कि प्रशासन किसी को बलि का बकरा बनाकर अपनी मनमर्जी थोपना चाहता है।
गीतांजलि ने सवाल उठाया कि सीआरपीएफ को गोली चलाने का आदेश आखिर किसने दिया, जबकि लद्दाख में कभी हिंसक प्रदर्शन नहीं हुए। उन्होंने कहा कि अपने ही नागरिकों पर गोली चलाना गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सोनम वांगचुक का इस घटना से कोई संबंध नहीं है, क्योंकि उस समय वे किसी अन्य स्थान पर शांतिपूर्वक भूख हड़ताल पर बैठे थे। ऐसे में उनके उकसाने का सवाल ही नहीं उठता।
गीतांजलि ने आरोप लगाया कि प्रशासन का असली उद्देश्य छठे शेड्यूल को लागू न करना है। इसके लिए झूठा नैरेटिव गढ़ा जा रहा है और डीजीपी के बयान उसी एजेंडे का हिस्सा हैं।
दिल्ली पब्लिक स्कूल रुद्रपुर में सीबीएसई नेशनल फेंसिंग चैंपियनशिप-2025 का शुभारंभ
रुद्रपुर/उधमसिंह नगर। दिल्ली पब्लिक स्कूल रुद्रपुर में मंगलवार को सीबीएसई की नेशनल फेंसिंग चैंपियनशिप-2025 का भव्य शुभारंभ हुआ। प्रतियोगिता में देश के लगभग सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की टीमें हिस्सा ले रही है।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि पहली बार उत्तराखंड की धरती पर इस स्तर की फेंसिंग चैंपियनशिप का आयोजन होना पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड अब केवल देवभूमि और वीरभूमि ही नहीं, बल्कि खेल भूमि के रूप में भी अपनी अलग पहचान बना रहा है।
रेखा आर्या ने कहा कि उनकी सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड को खिलाड़ियों की नर्सरी बनाना है और आने वाले वर्षों में प्रदेश को खेल जगत की सुपर पावर के रूप में स्थापित करना है।

उन्होंने कहा कि फ़ेंसिंग केवल एक खेल नहीं, बल्कि अनुशासन, गति और रणनीति का अद्भुत संगम है।
मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि खिलाड़ियों के लिए प्रदेश सरकार लगातार ठोस कदम उठा रही है। पदक विजेता खिलाड़ियों को अधिकतम नगद इनाम राशि और सरकारी नौकरी से लेकर युवा खिलाड़ियों के लिए छात्रवृत्ति योजनाओं तक विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि उत्तराखंड में हर सप्ताह किसी न किसी राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता का आयोजन हो रहा है, जो प्रदेश में तेजी से विकसित होती खेल संस्कृति का प्रमाण है।
कार्यक्रम का शुभारंभ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुआ। स्कूल के बच्चों ने पारंपरिक रंग-बिरंगे परिधानों में उत्तराखंड की लोक संस्कृति और संगीत की झलक पेश की। बच्चों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और पूरे माहौल में उत्साह और उमंग भर दी।
इस अवसर पर नेशनल फेंसिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया के महासचिव राजीव मेहता, उत्तरांचल ओलंपिक संघ के अध्यक्ष महेश नेगी, महासचिव डीके सिंह, फेंसिंग एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के अध्यक्ष सुरजीत सिंह ग्रोवर, बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य दीपक गुलाटी, भाजपा काशीपुर के जिला सह प्रभारी भारत भूषण चुघ और कुमाऊं विश्वविद्यालय के पूर्व स्पोर्ट्स ऑफिसर नागेन्द्र शर्मा सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।

