दोनों देशों के बीच लगातार छठे महीने हवाई क्षेत्र पर रोक जारी
नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के बीच एयरस्पेस को लेकर जारी खींचतान थमने का नाम नहीं ले रही है। भारत ने पाकिस्तानी विमानों और एयरलाइंस पर लगे हवाई क्षेत्र प्रतिबंध को एक महीने और आगे बढ़ा दिया है। एविएशन अथॉरिटी द्वारा जारी नए नोटिस टू एयरमेन (NOTAM) के मुताबिक, अब यह रोक 24 अक्टूबर सुबह 5:29 बजे तक लागू रहेगी।
लगातार छठे महीने यह स्थिति बनी हुई है, क्योंकि पाकिस्तान ने भी दो दिन पहले अपने हवाई क्षेत्र में भारतीय विमानों की आवाजाही पर रोक को आगे बढ़ाया था। इस तरह दोनों देशों के बीच एयरस्पेस विवाद अब आधे साल से ज्यादा लंबा खिंच चुका है।
एयरस्पेस की इस जंग की शुरुआत अप्रैल में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले के बाद हुई थी। हमले के बाद पाकिस्तान ने अचानक भारतीय विमानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया था, जिसके जवाब में भारत ने भी पाकिस्तानी उड़ानों पर प्रतिबंध लगा दिया। तब से हर महीने नए नोटम जारी कर दोनों देश इस रोक को बढ़ाते आ रहे हैं।
ध्यान देने वाली बात यह है कि यह रोक केवल भारत और पाकिस्तान की एयरलाइंस पर लागू है। विदेशी एयरलाइंस अब भी दोनों देशों के एयरस्पेस का इस्तेमाल कर सकती हैं। हालांकि, लंबे समय तक यह पाबंदी जारी रहने से दोनों देशों की एयरलाइंस को अतिरिक्त लागत और यात्रियों को असुविधा झेलनी पड़ रही है।
काशीपुर। काशीपुर नगर में हाल ही में हुए उपद्रव के बाद प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए अली खां मोहल्ला क्षेत्र में अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। पुलिस-प्रशासन की संयुक्त टीम ने क्षेत्र में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करते हुए अवैध कब्ज़ों को हटाने का अभियान चलाया।
नगर निगम और प्रशासन की संयुक्त टीम ने जेसीबी मशीनों की मदद से अवैध अतिक्रमण को ध्वस्त किया। इस दौरान दो बुलडोज़र लगातार तैनात रहे और अतिक्रमणकारियों में हड़कंप की स्थिति देखने को मिली। उपद्रव की घटनाओं के मद्देनज़र सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतज़ाम किए गए।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया है कि उपद्रव फैलाने वालों और अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ सरकार किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरतेगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि शांति व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों पर कठोरतम कार्रवाई की जाए।
प्रशासन की इस सख्ती से अराजक तत्वों और अवैध कब्ज़ाधारियों को स्पष्ट संदेश गया है कि सरकार कानून व्यवस्था और जनता की सुरक्षा के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं करेगी।
किसी भी निर्माण से पहले एमडीडीए से स्वीकृति अवश्य लें- बंशीधर तिवारी
ऋषिकेश। मसूरी–देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने ऋषिकेश में अवैध निर्माण पर सख़्त कार्रवाई की है। भानु रावत द्वारा गली नंबर 9, निर्मल बाग, ब्लॉक–बी, ऋषिकेश में किए जा रहे अवैध बहुमंजिला निर्माण को सोमवार को एमडीडीए टीम ने सील कर दिया। कार्रवाई के दौरान सहायक अभियंता शशांक सक्सेना, अवर अभियंता मनीष डिमरी, अमित भारद्वाज, सुपरवाइज़र बीरेंद्र खंडूरी, सतीश कुमार सहित पुलिस बल भी मौके पर मौजूद रहा।

एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा प्राधिकरण की प्राथमिकता है कि शहर और आसपास के क्षेत्रों में बिना अनुमति के हो रहे निर्माणों को रोका जाए। नियमों के विरुद्ध निर्माण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आमजन को भी सलाह है कि किसी भी निर्माण से पहले एमडीडीए से स्वीकृति अवश्य लें। एमडीडीए ने स्पष्ट किया है कि ऐसे अवैध निर्माणों पर भविष्य में भी इसी प्रकार की सख़्त कार्रवाई जारी रहेगी।
परीक्षा प्रणाली को बदनाम करने वालों का होगा पर्दाफाश
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि कुछ लोग परीक्षा प्रणाली को बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं, उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि नकल माफिया को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा है कि उत्तराखंड का आने वाला समय स्थिरता और विकास के नाम रहेगा। स्थानीय होटल में साप्ताहिक समाचार पत्र अड्डा इनसाइडर के विमोचन अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि 4 जुलाई 2021 को उन्होंने जब मुख्य सेवक के रूप में काम काज संभाला तो उस वक्त, विभिन्न विभागों में करीब 22 हजार पद रिक्त पड़े हुए थे, अब सरकार के प्रयासों से 25 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी मिल चुकी है, इसमें एक भी परीक्षा में नकल का मामला सामने नहीं आया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भर्ती प्रकिया में बाधा न पहुंचे इसके लिए सरकार सख्त नकल विरोधी कानून लेकर आई। इससे कुछ लोगों के पेट में दर्द होने लगा, जिस कारण वो सरकार का बदनाम करने का प्रयास करने लगे। रविवार को भी फिर ऐसा प्रयास किया गया, जबकि ये पेपर लीक जैसा मामला नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ नकल माफिया, कोचिंग माफिया सरकार को बदनाम करने का षडयंत्र रच रहे हैं, इसका जल्द खुलासा होगा। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि नकल माफिया को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसा षडयंत्र पूर्व में भी हो चुका है, लेकिन सरकार ने पारदर्शिता के साथ सभी परीक्षाओं को सम्पन्न कराकर नकल माफिया के इरादों पर पानी फेर दिया।
जनता ने चुना राजनैतिक स्थिरता और विकास
एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की जनता ने विकास और स्थिरता को चुना है, उत्तराखंड का आने वाला समय विकास और स्थिरता के नाम रहेगा।
आपदा में फर्स्ट रिस्पांडर
एक अन्य सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बार पूरा हिमालयी क्षेत्र आपदा की जद में आया है, इसलिए उनकी कोशिश रहती है वो आपदा प्रभावितों के बीच पहुंचकर लोगों का दुख दर्द बांट सके, साथ ही तत्काल राहत और बचाव अभियान भी संचालित हो सके। उन्होंने कहा कि सरकार उत्तराखंड में मौजूद वैज्ञानिक संस्थानों के जरिए उत्तराखंड में आपदा के कारणों का पता लगाते हुए, आपदा की पूर्व सूचना जुटाने और नुकसान को कम से कम करने की दिशा में प्रयासरत है।
इस मौके पर कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा, पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक, कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, प्रमुख सचिव डॉ आर मीनाक्षी सुंदरम, सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी, प्रो. सुरेखा डंगवाल, प्रो दुर्गेश पंत, वरिष्ठ पत्रकार पवन लालचंद सहित तमाम लोग उपस्थित हुए।
श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के फिजियोथेरेपी विभाग की ओर से एक दिवसीय सेमिनार सह कार्यशाला का आयोजन
कंधे, गर्दन तथा पीठ दर्द की विभिन्न स्थितियों के नैदानिक मूल्यांकन और उपचार कौशल पर महत्वपूर्ण जानकारियाँ साझा की
देहरादून। “दवा से कहीं अधिक असरदार है नियमित फिजियोथेरेपी, यह न केवल दर्द को कम करती है बल्कि जीवनशैली को फिर से सक्रिय बनाती है“। इसी संदेश के साथ श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के फिजियोथेरेपी विभाग की ओर से एक दिवसीय सेमिनार सह कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विशेषज्ञों ने मैनुअल थेरेपी से जुड़े विभिन्न पहलुओं को रेखांकित किया और कंधे, गर्दन तथा पीठ दर्द की विभिन्न स्थितियों के नैदानिक मूल्यांकन और उपचार कौशल पर महत्वपूर्ण जानकारियाँ साझा कीं। श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के चेयरमैन श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज ने कार्यक्रम आयोजकों को शुभकामनाएं दीं।
सोमवार को श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में कार्यशाला का शुभारंभ डॉ. आर.पी. सिंह (कोऑर्डिनेटर, श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय), डॉ. सोनिया गम्भीर (निदेशक, आईक्यूएसी, एसजीआरआरयू), डॉ. कीर्ति सिंह (डीन, स्कूल ऑफ पैरामेडिकल एंड एलाइड साइंसेज) तथा डॉ. शारदा शर्मा (विभागाध्यक्ष, फिजियोथेरेपी विभाग, श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल) एवम् प्रो. डाॅ नीरज कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डाॅ. अभिषेक शर्मा, रिसोर्स पर्सन, फाउंडर फिजियोक्लासरूम, अन्तर्राष्ट्रीय इंस्ट्रक्टर पीआरआरटी लंदन यूनाइटेड किंगडन ने महत्वपूर्णं जानकारियां सांझा कीं। डॉ. अभिषेक शर्मा एक अनुभवी मस्कुलोस्केलेटल एवं न्यूरो फिजियोथेरेपिस्ट हैं, जिन्हें इस क्षेत्र में 18 वर्षों से अधिक का समृद्ध अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वे लंदन में एनएचएस के साथ बैंड 7 एमएसके क्लिनिशियन एवं एफसीपी के रूप में सेवाएँ दे रहे हैं। वे 700 से अधिक शैक्षणिक वीडियो वाले वैश्विक शिक्षा मंच फिजियो क्लासरूम के संस्थापक हैं। अंतर्राष्ट्रीय पीआरआरटी प्रशिक्षक के रूप में उन्होंने दुनिया भर के फिजियोथेरेपिस्टों को दर्द प्रबंधन, मैनुअल थेरेपी और उन्नत नैदानिक तर्क की तकनीकों में प्रशिक्षित किया है।
उन्होंने अपने वक्तव्य में बताया कि किस प्रकार फिजियोथेरेपी द्वारा कंधे का दर्द (फ्रोजन शोल्डर, रोटेटर कफ इंजरी), गर्दन का दर्द, सर्वाइकल स्पोंडलाइटिस, मसल स्पास्म, कमर दर्द, लंबर पेन, साइटिका तथा घुटने की समस्याएं जैसी जटिल बीमारियों का प्रभारी उपचार सम्भव है। उन्होंने लाइव डेमो के माध्यम से मैनुअल थेरेपी, मोबिलाइजेशन तकनीक और स्ट्रेचिंग एक्सरसाइसाइज की बारीकियों को भी समझाया। उन्होंने अपना अनुभव सांझा करते हुए कहा कि नियमित फिजियोथेरेपी न केवल दर्द को कम करती है, बल्कि रोगी को दीर्घकालीन आराम और सक्रिय जीवनशैली की ओर अग्रसर करती है। प्रो. डाॅ. नीरज कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में डाॅ शमा परवीन, डाॅ संदीप कुमार, डाॅ तबस्सुम, डाॅ सुरभि, डाॅ रविन्द्र, डाॅ अकांक्षा, डाॅ अभिषेक, डाॅ सुषांत, डाॅ विशाल डाॅ जयदेव का विशेष सहयोग रहा।
जांच अधिकारी ने कहा- बीकेटीसी ने ना खुद सोना खरीदा, ना अपने स्तर से लगवाया
देहरादून। केदारनाथ धाम के गर्भगृह को स्वर्ण मंडित कराने को लेकर हुए विवाद के बाद उत्तराखंड शासन के निर्देश पर गढ़वाल आयुक्त द्वारा की गयी जांच में किसी प्रकार की अनियमितता की बात सामने नहीं आयी है। गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि श्री बदरीनाथ – केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने ना ही सोना खरीदा और ना ही अपने स्तर से लगवाया। बीकेटीसी ने स्वर्ण मंडित करने वाले दानीदाता को शासन से प्राप्त निर्देशों के क्रम में अपेक्षित सहयोग प्रदान किया।
सूचना अधिकार कार्यकर्त्ता अनिल सेमवाल द्वारा केदारनाथ धाम के गर्भगृह को स्वर्ण मंडित कराने के प्रकरण को लेकर शासन के पर्यटन व धर्मस्व विभाग से विभिन्न बिंदुओं को लेकर सूचना मांगी गयी थी। इसके जवाब में पर्यटन अनुभाग ने आवेदक को शासन स्तर पर प्रचलित पत्रावली और गढ़वाल आयुक्त की जांच रिपोर्ट प्रेषित की है।
जांच रिपोर्ट में आयुक्त पांडेय ने कहा है कि केदारनाथ धाम के गर्भगृह में सोने की प्लेटें लगाए जाने में बरती गई कथित अनियमितताओं के संबंध में शासन द्वारा 23 जून, 2023 को उन्हें जांच अधिकारी नियुक्त किया गया था। इस क्रम में वे 21 जुलाई, 2023 को स्वर्ण परत लगाने के दौरान रुद्रप्रयाग में तैनात जिलाधिकारी और उनके स्थानांतरण के पश्चात नियुक्त रहे जिलाधिकारी तथा बीकेटीसी के तत्कालीन मुख्य कार्याधिकारी के साथ केदारनाथ पहुंचे और मामले की जांच की। गौरतलब है कि केदारनाथ धाम के गर्भगृह को स्वर्ण मंडित कराने के दौरान रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी पद पर मयूर दीक्षित और गढ़वाल आयुक्त की जांच के समय सौरभ गहरवार जिलाधिकारी पद पर तैनात थे। जबकि मुख्य कार्याधिकारी के पद पर वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी योगेंद्र सिंह तैनात थे।
अपनी रिपोर्ट में गढ़वाल आयुक्त ने गर्भगृह में सोने की परतें लगाए जाने की प्रक्रिया का बिंदुवार उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि शासन की स्वीकृति के पश्चात कार्य प्रारंभ होने से पूर्व भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग व सीबीआरआई, रुड़की की टीम द्वारा गर्भगृह का निरीक्षण किया गया, जिसमें उन्होंने कतिपय शर्तों के साथ उक्त कार्य को कराये जाने को उपयुक्त पाया। इसके पश्चात दानीदाता दलीप लाखी, जेम्स इम्पैक्स प्रा०लि० के द्वारा अधिकृत महालक्ष्मी अंबा ज्वैलर्स, नई दिल्ली के कारीगरों ने सबसे पहले गर्भगृह में लगी हुई चांदी की प्लेटों को उतारा। करीब 230 किग्रा वजन की इन चांदी की प्लेटों को बीकेटीसी द्वारा तत्समय मंदिर भंडार गृह में रक्षित किया गया।
इसके पश्चात दानीदाता के ज्वैलर्स द्वारा गर्भगृह की दीवारों पर नापजोख हेतु तांबे की प्लेटें स्थापित गईं और फिर इन्हें उतार कर स्वर्ण बर्क चढ़ाने के लिए अपने साथ दिल्ली ले गए। तांबे की प्लेटों पर स्वर्ण बर्क चढ़ाए जाने के बाद दिल्ली से इन्हें वापस लाया गया। गौरीकुंड से केदारनाथ तक घोड़े- खच्चरों के माध्यम से कड़ी सुरक्षा के साथ केदारनाथ पहुंचाया गया। स्वर्ण मंडित प्लेटों को केदारनाथ में पुलिस निगरानी में बीकेटीसी के इग्लू हट में रखा गया। पुलिस निगरानी में ही कारीगरों द्वारा प्लेटों को इग्लू हट से मंदिर गर्भगृह तक ले जाया गया। बीकेटीसी कार्मिकों व पुलिस की निगरानी में गर्भगृह को स्वर्ण मंडित कराने का कार्य किया गया।
आयुक्त ने अपनी रिपोर्ट के साथ दानीदाता द्वारा उपलब्ध कराये गए बिल भी संलग्न किये हैं, जिनमें सोने के बर्क का वजन कुल 23 किग्रा 777 ग्राम 800 मिग्रा और तांबे का वजन 1001.300 किग्रा है। इसे मंदिर समिति ने अपने स्टॉक रजिस्टर में भी दर्ज किया है।
पर्यटन विभाग द्वारा उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार 04 अगस्त, 2022 को बीकेटीसी के तत्कालीन अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने तत्कालीन सचिव, संस्कृति व धर्मस्व को पत्र प्रेषित कर एक दानदाता के सहयोग से केदारनाथ मंदिर के गर्भगृह को स्वर्ण मंडित कराने के बावत आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया था। इसके पश्चात 03 सितम्बर, 2022 को स्वयं दानीदाता दलीप लाखी ने सचिव, संस्कृति को इस संबंध में पत्र लिखा।
बीकेटीसी अध्यक्ष व दानीदाता के पत्रों के क्रम में तत्कालीन सचिव, संस्कृति व धर्मस्व हरिचंद्र सेमवाल ने जिलाधिकारी, रुद्रप्रयाग और बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी से आख्या मांगी और इसके पश्चात डीएम व सीईओ को एक अन्य पत्र के माध्यम से दानीदाता फर्म जेम्स इम्पैक्स प्राइवेट लिमिटेड को अपेक्षित सहयोग प्रदान करने का निर्देश दिया।
मुख्यमंत्री धामी ने प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि और उन्नति की कामना की
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को शारदीय नवरात्रि की शुरुआत पर शासकीय आवास में पूर्ण विधि-विधान के साथ माँ आदिशक्ति भगवती की पूजा-अर्चना की।

नवरात्रि के प्रथम दिन की अधिष्ठात्री देवी माँ शैलपुत्री के चरणों में नमन करते हुए सीएम धामी ने प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और राज्य की प्रगति के लिए प्रार्थना की।
डीएवी इंटर कॉलेज पौड़ी में चार दिवसीय आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ
पौड़ी। डीएवी इंटर कॉलेज पौड़ी में भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी, जिला शाखा पौड़ी के तत्वावधान में चार दिवसीय आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारम्भ जिलाधिकारी एवं अध्यक्ष, भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी जिला शाखा पौड़ी, स्वाति एस. भदौरिया द्वारा किया गया।
सोमवार को आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यशाला के उद्घाटन कार्यक्रम में जिलाधिकारी ने कहा कि उत्तराखण्ड का अधिकांश क्षेत्र प्राकृतिक आपदाओं के दृष्टिगत संवेदनशील है। पहाड़ों की भौगोलिक एवं जलवायु संबंधी परिस्थितियाँ भूस्खलन, बादल फटना, सड़क दुर्घटनाएँ, जंगल की आग और भूकंप जैसी आपदाओं की चुनौती हमारे सामने बार-बार खड़ी करती हैं। ऐसे समय में यदि समाज के हर वर्ग विशेषकर युवा तैयार रहें तो बड़ी से बड़ी त्रासदी का सामना धैर्य और संयम से किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि पूर्व में घटित आपदाओं से यह स्पष्ट हुआ है कि समय रहते किया गया छोटा-सा प्रयास भी जीवन और मृत्यु के बीच अंतर पैदा कर सकता है। यही कारण है कि आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण आवश्यक है। इस कार्यशाला के माध्यम से युवाओं को प्रथम प्रत्युत्तरकर्ता (फर्स्ट रिस्पॉन्डर) के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा ताकि वे आपदा के समय सीमित संसाधनों के बीच राहत एवं बचाव कार्य को अंजाम देने में सक्षम बन सकें। प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल तकनीकी जानकारी देना ही नहीं है, बल्कि मनोवैज्ञानिक रूप से सुदृढ़ रहकर स्वयं को और दूसरों को सुरक्षित रखने की क्षमता विकसित करना भी है। कहा कि इस प्रकार के छोटे-छोटे प्रयास आगे चलकर मुसीबत में फॅंसी अनेक जिंदगियों के लिए जीवनदायी सिद्ध होंगे।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में कक्षा 9 से 11 तक छात्र-छात्रा प्रतिभाग कर रहे हैं। प्रशिक्षण के पहले दिन मास्टर ट्रेनर द्वारा प्राथमिक उपचार, आपदा में बचाव के तरीके तथा आपदाग्रस्त क्षेत्र में पहुंचने के तरीकों से संबंधित प्रशिक्षण दिया गया।
रेडक्रॉस सोसायटी के सचिव केसर सिंह असवाल ने कहा कि मानवीय सेवा के लिए कार्य करती है। समाज के जरूरतमंद वर्गों तक राहत पहुँचाना, रक्तदान शिविरों का आयोजन करना, वस्त्र, कम्बल, टेंट और खाद्य सामग्री वितरण जैसे कार्य रेडक्रॉस के प्रमुख सरोकार रहे हैं। इस कार्यशाला के माध्यम से रेडक्रॉस का उद्देश्य युवाओं में समाज सेवा की भावना जागृत करना और उन्हें जिम्मेदार नागरिक के रूप में तैयार करना है।
इस अवसर पर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. शिवमोहन शुक्ला, मुख्य शिक्षा अधिकारी नागेन्द्र बर्तवाल, जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) रणजीत सिंह नेगी, डीएवी इंटर कॉलेज पौड़ी के प्रधानाचार्य बालेश्वर प्रसाद सहित विद्यालय के शिक्षकगण एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।
डायबिटीज अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही, बल्कि हर उम्र के लोगों में तेजी से फैल रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह सिर्फ ब्लड शुगर बढ़ाने वाली बीमारी नहीं है, बल्कि समय रहते नियंत्रण न करने पर यह आंखों, किडनी और दिल जैसी महत्वपूर्ण अंगों को भी नुकसान पहुंचा सकती है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि हाई शुगर लंबे समय तक शरीर की नसों को कमजोर कर देता है, जिससे पैरों में रक्त का प्रवाह बाधित हो सकता है। इसे डायबिटिक फुट कहा जाता है। अगर इस स्थिति को नजरअंदाज किया जाए, तो पैरों में अल्सर बन सकते हैं और गंभीर मामलों में पैर का हिस्सा काटना भी पड़ सकता है।
डायबिटिक फुट कैसे बनता है?
लंबे समय तक हाई शुगर रहने पर नसें कमजोर हो जाती हैं, जिससे पैरों में दर्द या चोट का एहसास नहीं होता।
रक्त वाहिकाओं के कमजोर होने से पैर तक ऑक्सीजन और खून सही मात्रा में नहीं पहुंचता।
छोटे घाव भी जल्दी ठीक नहीं होते और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
सावधानियाँ और बचाव:
पैरों में छोटे-छोटे छाले, कट या फटी एड़ियों पर तुरंत ध्यान दें।
अगर घाव 2-3 हफ्तों में ठीक न हो, बदबू या मवाद आए, या पैर का हिस्सा काला पड़ने लगे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
नियमित शुगर जांच और पैर की देखभाल से डायबिटिक फुट और इसके गंभीर परिणामों से बचा जा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि डायबिटीज और पैर की समस्याओं को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। समय रहते सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।
(साभार)
पीएम मोदी ने अरुणाचल को “उगते सूरज की धरती” बताया
इटानगर। अरुणाचल प्रदेश के इटानगर में सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5,100 करोड़ रुपये से अधिक के महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन किया। इंदिरा गांधी पार्क में आयोजित कार्यक्रम में पीएम मोदी ने शि योमी जिले में दो बड़े जलविद्युत प्रोजेक्ट्स और तवांग में एक कन्वेंशन सेंटर की आधारशिला रखी। उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएं राज्य के विकास और ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं।
पीएम मोदी ने अपने भाषण में कहा कि केंद्र सरकार की नीतियां पूर्वोत्तर राज्यों के सर्वांगीण विकास और सशक्तिकरण के लिए हैं। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश को “उगते सूरज की धरती” बताते हुए कहा कि राज्य के लोग शौर्य और शांति का प्रतीक हैं।
सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने भी कहा कि प्रधानमंत्री ने हमेशा पूर्वोत्तर को विकास की दिशा में देखा है, न कि राजनीतिक लाभ के लिए।
कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने स्थानीय व्यापारियों, उद्योगपतियों और करदाताओं के साथ जीएसटी सुधारों पर चर्चा की और स्वदेशी उत्पादों के प्रचार को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने ‘गर्व से कहो ये स्वदेशी है’ अभियान के पोस्टर भी वितरित किए।
प्रमुख परियोजनाएं:
ताटो-I प्रोजेक्ट: 186 मेगावाट क्षमता, 1,750 करोड़ रुपये लागत, सालाना 802 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन।
हेओ प्रोजेक्ट: 240 मेगावाट क्षमता, 1,939 करोड़ रुपये लागत, सालाना 1,000 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन।
तवांग कन्वेंशन सेंटर: 145.37 करोड़ रुपये, 1,500 लोगों की क्षमता, पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा।
स्वास्थ्य, कनेक्टिविटी और फायर सेफ्टी सहित अन्य प्रोजेक्ट्स की कुल लागत 1,290 करोड़ रुपये से अधिक।
पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में ये कदम राज्य और देश दोनों के लिए आर्थिक सशक्तिकरण का अवसर हैं।
