तेलुगु फिल्मों के नए सुपरस्टार बनकर उभर रहे तेजा सज्जा इन दिनों अपनी फैंटेसी-एक्शन फिल्म ‘मिराय’ को लेकर सुर्खियों में हैं। शानदार वीएफएक्स और दमदार एक्शन सीक्वेंसेज़ से सजी इस फिल्म ने शुरुआत से ही दर्शकों का ध्यान खींचा है। रिलीज के शुरुआती दो दिनों में ही फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बेहतरीन कलेक्शन कर चुकी है, जिससे यह सितंबर महीने की सबसे बड़ी ओपनिंग फिल्मों में शुमार हो गई है।
कलेक्शन रिपोर्ट:
फिल्म ने पहले दिन लगभग 13 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन दर्ज किया, जिसमें सबसे ज्यादा कमाई तेलुगु वर्जन से हुई। हिंदी बाजार में भी फिल्म ने उम्मीद के मुताबिक शुरुआत की। दूसरे दिन शनिवार तक ‘मिराय’ का कारोबार 7.66 करोड़ पहुंचा। कुल मिलाकर, शुरुआती दो दिनों में फिल्म का कलेक्शन 20 करोड़ रुपये के पार निकल चुका है।
वीकेंड का बंपर फायदा:
रिलीज के समय किसी बड़ी फिल्म से टकराव न होने का पूरा फायदा ‘मिराय’ को मिला। वीकेंड पर तेलुगु राज्यों में इसकी ऑक्यूपेंसी शानदार रही। खासकर हैदराबाद, विशाखापट्टनम और गुंटूर जैसे शहरों में दर्शकों की भीड़ देखने लायक थी। हैदराबाद में 374 शो में औसतन 87% सीटें भरी रहीं, जो नए रिलीज़ के लिए बड़ी उपलब्धि है।
हिंदी बेल्ट की स्थिति:
तेलुगु राज्यों में जहां फिल्म का प्रदर्शन जोरदार रहा, वहीं हिंदी पट्टी में इसे धीमी शुरुआत मिली। दिल्ली-एनसीआर ने बाकी शहरों की तुलना में बेहतर रिस्पॉन्स दिया, जबकि मुंबई, पुणे और जयपुर जैसे बड़े बाजारों में ऑडियंस औसत रही। एक्सपर्ट्स का मानना है कि पॉजिटिव वर्ड ऑफ माउथ से आने वाले दिनों में हिंदी दर्शक भी ‘मिराय’ को ज्यादा पसंद करेंगे।
फिल्म की खासियतें:
इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसका विजुअल ट्रीट है। ‘मिराय’ को 2डी और 3डी दोनों फॉर्मेट्स में आठ भाषाओं (हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम आदि) में रिलीज किया गया है। पौराणिक कथाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़कर निर्देशक ने दर्शकों को नया सिनेमाई अनुभव देने की कोशिश की है।
स्टारकास्ट और प्रतिक्रिया:
तेजा सज्जा के साथ फिल्म में मनचु मनोज, ऋतिका नायक, श्रिया सरन, जगपति बाबू और जयराम जैसे कलाकार नजर आते हैं। शानदार ग्राफिक्स, दमदार एक्शन और मल्टीस्टारर कास्ट के कारण यह फिल्म दर्शकों और समीक्षकों से पहले दिन से ही पॉजिटिव रिव्यू बटोर रही है।
(साभार)
हिन्दी दिवस पर बोले गृह मंत्री—तकनीक से लेकर न्याय-शिक्षा तक भारतीय भाषाएं बनें भविष्य की धुरी
नई दिल्ली। हिन्दी दिवस के अवसर पर केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय भाषाओं और संस्कृति का स्वर्णिम पुनर्जागरण हो रहा है। उन्होंने कहा कि आज समय की आवश्यकता है कि हिंदी सहित सभी भारतीय भाषाएं तकनीक, विज्ञान, न्याय, शिक्षा और प्रशासन की आधारशिला बनें। शाह ने अपील की—“मिलकर सोचो, मिलकर चलो और मिलकर बोलो, यही हमारी भाषाई और सांस्कृतिक चेतना का मूल मंत्र है।”
अपने संदेश में अमित शाह ने याद दिलाया कि गुलामी के कठिन दौर में भारतीय भाषाएं स्वतंत्रता आंदोलन की आवाज बनीं। गांव-देहात की बोली, लोकगीत, लोककथाएं और कविताएं ही आजादी के आंदोलन का आधार बनीं। वंदे मातरम् और जय हिंद जैसे नारे इसी भाषाई चेतना से उपजे और स्वतंत्र भारत के गौरव का प्रतीक बने।
उन्होंने कहा कि भारत मूलतः भाषा-प्रधान देश है, जहां भाषाओं ने सदियों से संस्कृति, परंपरा, दर्शन और अध्यात्म को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाया। उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक, हर क्षेत्र की भाषाएं भारतीय समाज को जोड़ने और संवाद का माध्यम रही हैं।
शाह ने उदाहरण देते हुए कहा कि संत तिरुवल्लुवर की रचनाएं उत्तर भारत में भी सम्मान से पढ़ी जाती हैं, तुलसीदास और कबीर के दोहे दक्षिण भारतीय भाषाओं में भी गूंजते हैं, और भूपेन हजारिका के गीत हरियाणा तक गुनगुनाए जाते हैं। यही हमारी भाषाई विविधता की ताकत है।
उन्होंने बताया कि संविधान निर्माताओं ने भाषाओं के महत्व को पहचानते हुए 14 सितम्बर 1949 को देवनागरी लिपि में हिंदी को राजभाषा के रूप में अंगीकृत किया। अनुच्छेद 351 में हिंदी के प्रचार-प्रसार और भारत की सामासिक संस्कृति के संवाहक के रूप में भूमिका तय की गई।
पिछले एक दशक में प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरराष्ट्रीय मंचों—संयुक्त राष्ट्र, जी-20 और एससीओ—पर हिंदी और भारतीय भाषाओं में संवाद कर उनके स्वाभिमान को बढ़ाया है। 2024 में ‘भारतीय भाषा अनुभाग’ की स्थापना कर सभी प्रमुख भारतीय भाषाओं के सहज अनुवाद का लक्ष्य रखा गया है।
अमित शाह ने कहा कि डिजिटल इंडिया, ई-गवर्नेंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग के दौर में भारतीय भाषाओं को भविष्य की तकनीक और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुकूल बनाया जा रहा है।
उन्होंने अंत में कहा कि भाषा केवल संवाद का साधन नहीं, बल्कि समाज को ऊर्जा, आत्मबल और एकता का मंत्र देने वाली शक्ति है। यही कारण है कि हमारे कवि विद्यापति ने कहा था—
“देसिल बयना सब जन मिट्ठा”,
अर्थात अपनी भाषा सबसे मधुर होती है।
टाइम्स ग्रुप ने सोशल मीडिया साइट “एक्स” और व्हाट्सएप कम्युनिटी में कराया सर्वे
आपदा प्रभावित राज्यों में सीएम धामी ने किया सबसे अच्छा काम
उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर, पंजाब और हिमाचल प्रदेश के सीएम के बीच हुआ था सर्वे
देहरादून। देश के आपदा प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के कामकाज पर आयोजित टाइम्स ग्रुप के सर्वे में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शीर्ष स्थान हासिल किया है। देश के आपदा प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के प्रदर्शन को लेकर नवभारत टाइम्स ने हाल ही में एक ऑनलाइन सर्वे कराया। सवाल था “आपदा प्रभावित राज्यों में सबसे बेहतर काम करने वाले मुख्यमंत्री कौन हैं?” इस सर्वे में चार नाम शामिल थे उमर अब्दुल्ला, सुखविंदर सिंह सुक्खू, पुष्कर सिंह धामी और भगवंत मान।

सर्वे के नतीजे साफ़ तौर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के पक्ष में रहे। सीएम धामी को 79% मत मिले। जबकि, कश्मीर के सीएम उमर अब्दुल्ला को 20%, हिमाचल प्रदेश के सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू को 1% और पंजाब के सीएम भगवंत मान को 1% वोट प्राप्त हुए।
जनता का यह रुझान बताता है कि आपदा की घड़ी में मुख्यमंत्री धामी ने जिस तरह त्वरित राहत कार्यों को अंजाम दिया, बचाव एवं पुनर्वास योजनाओं को लागू किया और प्रभावित क्षेत्रों का लगातार दौरा कर पीड़ितों से सीधा संवाद किया उसने उन्हें बाकी नेताओं से अलग और आगे खड़ा कर दिया।

सिर्फ नवभारत टाइम्स का सर्वे ही नहीं, बल्कि टाइम्स ऑफ़ इंडिया की WhatsApp Community पर भी जनता ने पुष्कर सिंह धामी को “पहली पसंद” करार दिया। इस प्लेटफ़ॉर्म पर भी यूज़र्स ने उनकी नेतृत्व क्षमता, त्वरित निर्णय लेने की शैली और संवेदनशील दृष्टिकोण की खुलकर सराहना की।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह परिणाम साबित करते हैं कि आपदा जैसी परिस्थितियों में मज़बूत और संवेदनशील नेतृत्व ही जनता का भरोसा जीत पाता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की बढ़ती लोकप्रियता उनके प्रशासनिक सक्रियता, समय पर लिए गए फैसलों और जमीनी जुड़ाव का प्रमाण है।
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राजकीय दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय पहुंचकर वहां भर्ती वरिष्ठ पत्रकार मोहन भुलानी से भेंट की और उनका कुशलक्षेम जाना।
मुख्यमंत्री ने पत्रकार भुलानी के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हुए डॉक्टरों से उनके स्वास्थ्य की स्थिति की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने परिजनों से भी मुलाकात कर उनका हालचाल पूछा और उन्हें हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पत्रकारों के योगदान को सदैव सम्मान की दृष्टि से देखती है और संकट की घड़ी में उनके साथ खड़ी है। उन्होंने अस्पताल प्रशासन को निर्देश दिए कि भुलानी के उपचार में किसी प्रकार की कमी न रहे और समुचित देखभाल सुनिश्चित की जाए।
इस अवसर पर अपर सचिव बंशीधर तिवारी, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, अस्पताल प्रशासन एवं पत्रकारगण उपस्थित रहे।
देहरादून। मसूरी के जॉर्ज एवरेस्ट पार्क को लीज पर दिए जाने के मुद्दे पर कांग्रेस ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि यह आवंटन गलत प्रक्रिया के तहत किया गया और इसे प्रदेश का अब तक का सबसे बड़ा घोटाला करार दिया।
कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष संगठन सूर्यकांत धस्माना ने शनिवार को कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि 142 एकड़ बेशकीमती जमीन को बाबा रामदेव के सहयोगी बालकृष्ण को मात्र एक करोड़ रुपये वार्षिक किराए पर 15 साल की लीज पर दिया गया है। धस्माना ने आरोप लगाया कि निविदा प्रक्रिया में भाग लेने वाली तीनों कंपनियां बालकृष्ण की ही हैं, जो नियमों का सीधा उल्लंघन है।
उन्होंने कहा कि इस घोटाले की जांच हाई कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में सीबीआई से कराई जानी चाहिए। इसके विरोध में कांग्रेस रविवार को प्रदेशभर में जिला मुख्यालयों पर सरकार का पुतला दहन करेगी। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष करण माहरा और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह से भी मुलाकात करेगा।
वोट चोरी के खिलाफ 15 सितंबर से हस्ताक्षर अभियान
धस्माना ने बताया कि कांग्रेस 15 सितंबर से वोट चोरी के खिलाफ देशव्यापी हस्ताक्षर अभियान शुरू करेगी। उत्तराखंड की सभी 70 विधानसभाओं में यह अभियान चलाया जाएगा। पार्टी का लक्ष्य है कि प्रदेश से पांच लाख लोगों के हस्ताक्षर जुटाए जाएं, जिन्हें राष्ट्रीय नेतृत्व को सौंपा जाएगा। इसके बाद यह हस्ताक्षर पूरे देश से एकत्रित कर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी निर्वाचन आयोग को सौंपेंगे।
संगठन सृजन कार्यक्रम
कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान पर भी उन्होंने जानकारी दी। धस्माना ने कहा कि नौ प्रशासनिक जिलों के संगठनात्मक जिलों में रायशुमारी का कार्य पूरा हो चुका है, जबकि शेष चार जिलों में यह काम इसी माह पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद राष्ट्रीय नेतृत्व वरिष्ठ नेताओं से परामर्श कर नए अध्यक्षों की घोषणा करेगा।
पत्रकार वार्ता में मौजूद नेता
पत्रकार वार्ता में कांग्रेस सैनिक विभाग अध्यक्ष कर्नल राम रतन नेगी, प्रदेश महामंत्री जगदीश धीमान, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करण माहरा के मीडिया सलाहकार सरदार अमरजीत सिंह और कमर सिद्दीकी भी मौजूद रहे।
देहरादून। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने शनिवार को कैंप कार्यालय में सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर मसूरी विधानसभा क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा की।
बैठक के दौरान काबीना मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि विधानसभा क्षेत्र में चल रहे सभी निर्माण कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरे किए जाएं। उन्होंने कहा कि जो कार्य अभी लंबित हैं, उन्हें प्राथमिकता से पूर्ण किया जाए। मंत्री ने विशेष रूप से नीलकंठ विहार, डोभालवाला, सालावाला, खालागांव और दून विहार जैसे क्षेत्रों में जल निकासी व्यवस्था, सुरक्षा दीवारों और आरसीसी पाइप से जुड़े बाढ़ सुरक्षा कार्यों को तेजी से पूरा करने के सख्त निर्देश दिए। साथ ही मुख्यमंत्री घोषणा के अंतर्गत स्वीकृत सेरकी, सिल्ला, मंसदावाला आदि क्षेत्रों की विकास कार्यों को भी प्राथमिकता पर पूर्ण करने पर बल दिया।
उन्होंने अधिकारियों को शासन स्तर पर लंबित प्रस्तावों की शीघ्र स्वीकृति के लिए लगातार फॉलोअप करने के निर्देश देते हुए कहा कि निर्माण कार्यों में किसी प्रकार की बाधा नहीं आनी चाहिए और सभी योजनाएं समयबद्ध ढंग से संपन्न हों।
बैठक में सिंचाई विभाग के प्रमुख अभियंता सुभाष चंद्र, अधीक्षण अभियंता संजय राय, अधिशासी अभियंता पुरुषोत्तम, दीक्षांत गुप्ता, भाजपा मंडल अध्यक्ष प्रदीप रावत, जिला पंचायत सदस्य वीर सिंह चौहान, पार्षद भूपेंद्र कठेत, नंदनी शर्मा, योगेश, संजय नौटियाल, मंजीत रावत सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
भारत की युवा निशानेबाज और ओलंपियन ईशा सिंह ने आईएसएसएफ विश्व कप राइफल/पिस्टल में इतिहास रच दिया है। उन्होंने महिला 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर भारत का खिताबी सूखा समाप्त किया। 20 वर्षीय ईशा ने रोमांचक फाइनल में चीन की याओ कियानक्सुन को महज 0.1 अंक से पछाड़ा। वहीं, दक्षिण कोरिया की मौजूदा ओलंपिक चैंपियन ओह येजिन को कांस्य से संतोष करना पड़ा।
यह ईशा का विश्व कप में पहला स्वर्ण है और इसी के साथ भारत पदक तालिका में संयुक्त पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। मेजबान चीन दो स्वर्ण, चार रजत और एक कांस्य पदक के साथ शीर्ष पर है।
स्वर्ण जीत के बाद ईशा ने कहा – “यह मेरे लिए बेहद खास है, क्योंकि मैंने इसी प्रतियोगिता से करियर की शुरुआत की थी। अब अगला लक्ष्य विश्व चैंपियनशिप है और हम उसके लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।”
ईशा और उनकी साथी रिदम सांगवान ने 578 अंकों के साथ फाइनल में जगह बनाई। याओ क्वालीफिकेशन में शीर्ष पर थीं, जबकि भारत की पलक गुलिया ने 586 अंक जुटाए। फाइनल में रिदम ने शानदार शुरुआत की, लेकिन 18वें शॉट के बाद बाहर हो गईं और चौथे स्थान पर रहीं। निर्णायक पलों में ईशा ने लगातार दो 10.7 अंक के शॉट लगाकर बढ़त बनाए रखी और अंततः 242.6 अंक के साथ गोल्ड अपने नाम किया।
अन्य परिणामों में पुरुषों की 25 मीटर रैपिड-फायर पिस्टल स्पर्धा में भावेश शेखावत 22वें, प्रदीप सिंह शेखावत 23वें और मनदीप सिंह 39वें स्थान पर रहे।
देहरादून- उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री आदरणीय MYogiAdityanath से शिष्टाचार भेंट कर अपने संसदीय क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की।
इस दौरान उनसे IIT रुड़की परिसर के अंतर्गत उत्तर प्रदेश की भूमि को संस्थान को उपलब्ध कराने का अनुरोध किया, जिससे शोध एवं नवाचार की दिशा में और अधिक प्रगति हो सके। इसके अलावा किसानों की उत्पादकता और सिंचाई सुविधा को सुदृढ़ करने हेतु इकबालपुर-नागल सिंचाई परियोजना पर त्वरित कार्रवाई का आग्रह किया और रुड़की–मंगलौर नहर के किनारे किसानों की सुविधा और क्षेत्रीय विकास के लिए ठोस एवं दीर्घकालिक योजना बनाने का भी अनुरोध किया।
आदरणीय योगी जी ने गंभीरता से विषयों पर विचार करते हुए सकारात्मक सहयोग का आश्वासन दिया।
मुझे विश्वास है कि इन पहलों से क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी और किसानों एवं युवाओं दोनों को व्यापक लाभ प्राप्त होगा।
काठमांडू। नेपाल में पहली बार किसी महिला ने अंतरिम प्रधानमंत्री पद संभाला है। पूर्व सुप्रीम कोर्ट चीफ जस्टिस सुशीला कार्की को शुक्रवार रात राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने शपथ दिलाई। जन-जेनरेशन (Gen-Z) प्रदर्शनकारियों के समर्थन से सत्ता में आईं सुशीला कार्की को देश में एक ईमानदार और सख्त छवि वाली नेता माना जाता है। इसके साथ ही वे नेपाल के 220 सालों के इतिहास में इस पद तक पहुंचने वाली पहली महिला बन गईं हैं।
नेपाल की पहली महिला चीफ जस्टिस रही कार्की
कार्की पहले भी इतिहास रच चुकी हैं। 2016 में वे नेपाल की पहली महिला चीफ जस्टिस बनी थीं। अपने कार्यकाल में उन्होंने कई अहम फैसले दिए, जिनमें सरोगेसी को बिजनेस बनने से रोकना शामिल है। उनके नेतृत्व वाली बेंच ने कहा था कि किराए की कोख गरीब महिलाओं का शोषण कर रही है, जिसके बाद नेपाल में सरोगेसी टूरिज्म पर रोक लगी।
2017 में कार्की के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव
2017 में उस समय की प्रचंड सरकार ने उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया था। आरोप लगाया गया कि वे राजनीतिक दबाव को नज़रअंदाज़ कर फैसले देती हैं। लेकिन कार्की के समर्थन में हजारों लोग काठमांडू की सड़कों पर उतर आए और सुप्रीम कोर्ट ने भी उनके पक्ष में आदेश दिया। नतीजा यह हुआ कि संसद को प्रस्ताव वापस लेना पड़ा।
कार्की का निजी जीवन भी रहा सुर्खिया में
कार्की का निजी जीवन भी सुर्खियों में रहा। उनके पति दुर्गा प्रसाद सुबेदी कभी क्रांतिकारी आंदोलनों में सक्रिय रहे और 1973 में उन्होंने साथियों के साथ एक विमान हाइजैक किया था। यह घटना नेपाल के इतिहास की पहली हाइजैकिंग थी। हालांकि, कार्की ने पति के विवादित अतीत से दूरी रखते हुए अपनी पहचान मेहनत और ईमानदारी से बनाई।
कार्की का भारत से जुड़ाव गहरा
सुशीला कार्की का भारत से भी गहरा जुड़ाव है। उन्होंने वाराणसी के बीएचयू से पढ़ाई की और अक्सर कहा कि गंगा किनारे बिताए दिन उनकी जिंदगी की सबसे यादगार यादें हैं। बिराटनगर की रहने वाली कार्की भारत-नेपाल सीमा से बेहद नज़दीक पली-बढ़ी और हिंदी भी समझती हैं।
भारत-नेपाल रिश्ते पर रुख सकारात्मक
भारत-नेपाल रिश्तों पर वे हमेशा सकारात्मक रुख रखती हैं। उनका कहना है कि दोनों देशों की जनता भावनात्मक रूप से जुड़ी है और छोटे-मोटे मतभेद रिश्तों की मजबूती को प्रभावित नहीं कर सकते।
देश की पहली महिला अंतरिम प्रधानमंत्री के तौर पर अब कार्की पर राजनीतिक स्थिरता और भ्रष्टाचार विरोधी उम्मीदों का बोझ है। आम लोगों को विश्वास है कि वे अपने सख्त और निष्पक्ष फैसलों से नेपाल की राजनीति को नई दिशा देंगी।
बिलासपुर/शिमला- हिमाचल प्रदेश में लगातार बारिश और भूस्खलन ने आम जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। बिलासपुर जिले के नम्होल की उप-तहसील के गुतराहन गांव में शनिवार सुबह बादल फटने की घटना हुई, जिससे कई वाहन मलबे की चपेट में आ गए। मौके से दो वाहन मलबे में दब गए जबकि पांच क्षतिग्रस्त हुए। सड़क पर आए मलबे की वजह से नम्होल–डाबर मार्ग बंद हो गया है। स्थानीय किसान कश्मीर सिंह की खेती को भी भारी नुकसान पहुंचा है। राहत की बात यह रही कि पानी का बहाव गांव की ओर न मुड़कर सड़क की तरफ चला गया, जिससे बड़ी तबाही टल गई।
लगातार बारिश से घुमारवीं क्षेत्र में सीर खड्ड का जलस्तर खतरनाक स्तर तक बढ़ गया है। यह इस बरसात का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है।
शनिवार सुबह 10 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में भूस्खलन की वजह से तीन नेशनल हाईवे सहित कुल 577 सड़कें बंद हो गईं। बिजली आपूर्ति भी बुरी तरह प्रभावित हुई है—389 ट्रांसफार्मर बंद हैं और 333 पेयजल योजनाएं ठप हो गई हैं। केवल कुल्लू में 174, मंडी में 166, शिमला में 48, कांगड़ा में 45, चंबा में 44 और सिरमौर में 28 सड़कें बाधित हैं। भरमौर-पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग पर तुन्नूहट्टी, लाहड़ और मैहला क्षेत्रों में भारी भूस्खलन हुआ है, जिससे यातायात ठप हो गया और वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
एनएच मंडल के अधिशासी अभियंता मीत शर्मा ने बताया कि बारिश से पेड़ गिरने और मलबा आने की वजह से हाईवे पर यातायात बाधित हुआ है। प्रशासन सड़क बहाली में जुटा है।
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने 19 सितम्बर तक बारिश जारी रहने का अनुमान जताया है। 13 और 14 सितम्बर को भारी बारिश और अंधड़ चलने का येलो अलर्ट जारी किया गया है। राज्य के कई इलाकों में शनिवार को झमाझम बारिश हुई, जबकि शिमला में धूप के बीच हल्के बादल छाए रहे। बीती रात पालमपुर में 86 मिमी, मुरारी देवी में 69.2 मिमी, कांगड़ा में 58.2 मिमी, जोगिंद्रनगर में 45 मिमी, धर्मशाला में 14.8 मिमी और मंडी में 13.6 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस मानसून सीजन में अब तक हिमाचल को 4,465 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हो चुका है। 20 जून से 12 सितम्बर के बीच 386 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 451 लोग घायल और 41 अब भी लापता हैं। सड़क हादसों में भी 168 लोगों की मौत दर्ज की गई है। वहीं, राज्य में 538 पक्के और 834 कच्चे मकान पूरी तरह ढह चुके हैं, जबकि हजारों को आंशिक क्षति हुई है।
