देहरादून – अब देहरादून (Dehradun) की सड़कों पर जर्मनी की मशीनें झाड़ू (german sweeping machine ) लगाती नजर आएंगी। जी हां, देहरादून नगर निगम ने स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत सड़कों को साफ करने को लेकर कदम उठाया। शहर की सड़के साफ रहे इसके लिए जर्मन तकनीक वाली एडवांस स्वीपिंग मशीनें खरीदी गई हैं। इनकी कीमत 6.5 करोड़ रुपए है। जल्द ही इन मशीनों का ट्रायल किया जाएगा। जिसके बाद ये काम करना शुरू कर देंगी।
देहरादून की सड़कों पर जर्मनी की मशीनें लगाएंगी झाडू
नगर निगम देहरादून ने जर्मन तकनीक वाली स्वीपिंग मशीनें खरीदी हैं। गुरुवार को देहरादून में ये मशीनें पहुंच गई है। ये एडवांस मशीने शहर की सड़कों की गंदगी को साफ करेंगी।
एक दिन में कई किमी तक करती है सफाई
बता दें कि ये जर्मनी की ये मशीनें एक ही दिन में कई किलोमीटर सफाई करेंगी। शहर में वीआईपी मूवमेंट के दौरान भी काफी कम समय में ये ज्यादा इलाका कवर कर सफाई कर सकती है। शहर की मुख्य सड़कों की सफाई इन्हीं से की जाएगी। जल्द ही नगर निगम इनका ट्रायल करेगा। जिसके बाद मशीनों को काम पर लगाया जाएगा।
साढ़े छह करोड़ है कीमत
बता दें कि इन मशीनों की कीमत साढ़े छह करोड़ है। ये मशीनें सड़कों पर पड़े कचरे, धूल और बाकी गंदगी को साफ करेगी।
देहरादून। ‘स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान’ के तहत प्रदेशभर में लगभग 4114 स्वास्थ्य शिविर लगायें जायेंगे, जिनकी मॉनिटिरिंग जनपद स्तर पर जिलाधिकारी करेंगे, जबकि मुख्य चिकित्साधिकारी उनका सहयोग करेंगे।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन 17 सितम्बर से 2 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले इन स्वास्थ्य शिविरों में प्रमुख रूप से महिला स्वास्थ्य, निःक्षय मित्र एवं रक्तदान शिविरों पर विशेष फोकस रहेगा।
कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिये विभागीय अधिकारियों को रेखीय विभाग एवं स्थानीय प्रशासन से समन्वय स्थापित करने के निर्देश दे दिये गये हैं ताकि आम लोगों का अधिक से अधिक स्वास्थ्य परीक्षण किया जा सके।
सूबे के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने आज स्वास्थ्य महानिदेशालय स्थित एनएचएम सभागार में ‘स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान’ की तैयारियों की समीक्षा की।
उन्होंने कहा कि ‘स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान’ के अंतर्गत प्रदेशभर के जिला अस्पतालों, उप जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों तथा आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में लगभग 4114 विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाये जायेंगे। इन शिविरों का फोकस खासकर महिलाओं और बच्चों की सेहत पर होगा, जहां उन्हें जांच, उपचार और स्वास्थ्य से जुड़ी जरूरी सेवाएं निःशुल्क मुहैया कराई जायेगी।
इसके अलावा आम लोगों का भी निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण किया जायेगा। इसके अलावा शिविर में स्वैच्छिक रक्तदान, टी.बी. रोगियों की स्क्रीनिंग के साथ ही निःक्षय मित्रों की संख्या बढ़ाने के प्रयास किये जायेंगे।
बैठक में विभागीय मंत्री ने सभी जनपदों के जिलाधिकारी को अपने-अपने जनपदों में प्रत्येक दिन स्वास्थ्य शिविरों की मॉनिटिरिंग करने के निर्देश दिये, जिसमें मुख्य चिकित्साधिकारी उनका सहयोग करेंगे। डॉ. रावत ने कहा कि इन स्वास्थ्य शिविरों में जनपदों के प्रभारी मंत्री, स्थानीय सांसद, क्षेत्रीय विधायक, नगर निगमों के मेयर, जिला पंचायत अध्यक्ष, नगर निकायों के अध्यक्ष, ब्लॉक प्रमुख एवं अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जायेगी। इसके अलावा बैठक में महाभियान के माइक्रोप्लान, कैलेंडर, जनपद व ब्लॉक स्तर पर नोडल अधिकारियों की तैनाती, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता आदि बिन्दुओं पर भी विभागीय अधिकारियों एवं जिलाधिकारियों के साथ चर्चा की और सभी तैयारियां पुख्ता रखने के निर्देश दिये।
बैठक में सचिव स्वास्थ्य डॉ. आर. राजेश कुमार, मिशन निदेशक एनएचएम मनुज गोयल, अपर सचिव स्वास्थ्य रीना जोशी, अनुराधा पाल, सलाहकार एनएचएम डॉ. तृप्ति बहुगुणा, अपर निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. आर. एस. बिष्ट, डॉ. कुलदीप मर्तोलिया, डॉ. अजय नागरकर, डॉ. तुहिन कुमार, सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे, जबकि सभी जनपदों के जिलाधिकारी एवं मुख्य चिकित्साधिकारियों ने वुर्चअल माध्यम से बैठक में प्रतिभाग किया।
प्रदेश भर में लगेंगे 4114 स्वास्थ्य शिवि
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि प्रदेशभर में ‘स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान’ के तहत 4114 स्वास्थ्य शिविर लगाये जायेंगे। जिनमें रूद्रप्रयाग में 271, बगेश्वर 110, टिहरी 528, पिथौरागढ़ 579, चम्पावत 121, नैनीताल 368, अल्मोड़ा 519, चमोली 295, उत्तरकाशी 209, पौड़ी 324, ऊधमसिंह नगर 18, हरिद्वार 367 तथा देहरादून में 405 हेल्थ कैम्प लगाये जायेंगे।
हेल्थ कैम्प में चिकित्सक करेंगे निःशुल्क जांच
प्रदेशभर में आयोजित स्वास्थ्य शिविरों में विशेषकर गैर संचारी रोगों की जांच की जायेगी। जिसमें बल्ड प्रेशर, डायबिटीज, ओरल कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर, सर्वाइकल कैंसर, एनीमिया, सिकल सेल की जांच की जायेगी। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य परामर्श के साथ ही बच्चों के लिये टीकाकरण की सुविधाएं भी शिविर में उपलब्ध रहेगी।
स्वैच्छिक रक्तदान को लेगेंगे शिविर
प्रदेश के विभिन्न चिकित्सा इकाईयों में आयोजित स्वास्थ्य शिविरों में ब्लड डोनेशन कैम्प भी लगाये जायेंगे। जिसके अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग के तत्वाधान में एनएसएस, स्काउट्स-गाइड्स, रोवर्स-रेंजर्स, रेडक्रॉस व रेखीय विभागों के सहयोग से रक्तदान हेतु जन जागरूकता अभियान चलाया जायेगा और अधिक से अधिक लोगों का स्वैच्छिक रक्तदान के लिये पंजीकरण काया जायेगा।
10 हजार निःक्षय मित्र बनाने का लक्ष्य
स्वास्थ्य शिविरों में टीबी मरीजों की स्क्रीनिंग भी की जायेगी, साथ ही आम जनमानस को टीबी के प्रति भी जागरूक किया जायेगा। इसके अलावा सामुदायिक सहभागिता के तहत टीबी मरीजों के उपचार में सहयोग लिये 10 हजार निःक्षय मित्र बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
विभागीय मंत्री ने कहा कि सामुहिक प्रयासों से ही टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य की प्राप्ति संभव है, इसके लिये विभागीय अधिकारी एवं रेखीय विभागों के अधिकारी भी स्वैच्छिक रूप से निःक्षय मित्र बनकर एक-एक टीबी मरीज को गोद लेना चाहिये। डॉ. रावत ने कहा कि ‘स्वस्थ नारी
देहरादून। चारधाम यात्रा के दूसरे चरण में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए केदारनाथ हेली सेवा की बुकिंग शुक्रवार को जब खोली गई तो कुछ ही घंटों में हजारों टिकट हाथों-हाथ बुक हो गए। आईआरसीटीसी द्वारा दोपहर 12 बजे पोर्टल ओपन करने के बाद शाम तक 4700 से अधिक टिकटों की एडवांस बुकिंग पूरी हो गई।
उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) के सीईओ आशीष चौहान ने बताया कि यह बुकिंग 15 से 22 सितम्बर के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए खोली गई है। करीब एक सप्ताह की अवधि के लिए टिकट उपलब्ध कराए गए, जिनमें से ज्यादातर सीटें तुरंत भर गईं। फिलहाल प्रतिदिन निर्धारित कोटे के अनुसार लगभग 300 टिकट ही शेष हैं।
उन्होंने बताया कि हेली सेवा शुरू करने से पहले नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की टीम उत्तराखंड का दौरा करेगी। यह टीम हेलिपैड, सुरक्षा इंतज़ाम, तकनीकी पहलुओं और हेलिकॉप्टरों के रखरखाव की जांच करेगी। सभी मानकों को पूरा करने और अनुमति मिलने के बाद ही केदारनाथ हेली सेवा का संचालन औपचारिक रूप से शुरू होगा।
देहरादून- प्रधानमंत्री श्री Narenrdra Modi जी के ‘सहकार से समृद्धि’ मंत्र को आत्मसात करते हुए 12 सितम्बर से 12 अक्टूबर, 2025 तक आयोजित सदस्यता महाअभियान से हर किसान और हर ग्रामीण परिवार को प्राथमिकता के साथ सहकारिता से जोड़ा जाए।
वर्ष 2023 में आयोजित प्रथम सदस्यता महाअभियान में 30 लाख से अधिक नए सदस्य जुड़े थे, जिनमें 17.33 लाख किसान, 3.92 लाख अकुशल श्रमिक, 1.56 लाख कुशल श्रमिक, 2.20 लाख पशुपालक और 6,411 मत्स्यपालक शामिल थे। इस महाअभियान से सहकारिता क्षेत्र में ₹70 करोड़ का अंशदान प्राप्त हुआ था ।
मुख्य न्यायाधीश बोले— स्वच्छ हवा का अधिकार पूरे देश को, केवल राजधानी को नहीं
नई दिल्ली। दिवाली नज़दीक आते ही एक बार फिर पटाखों पर बहस तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए सवाल उठाया कि आखिरकार पटाखों पर रोक सिर्फ दिल्ली-एनसीआर तक ही क्यों सीमित है? मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने स्पष्ट कहा कि स्वच्छ हवा का अधिकार पूरे देश के नागरिकों को है, केवल दिल्ली वालों को नहीं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि पटाखों को लेकर कोई भी नीति राष्ट्रीय स्तर पर समान होनी चाहिए।
सीजेआई गवई ने उदाहरण देते हुए कहा कि बीते साल वे अमृतसर में थे, जहां की हवा दिल्ली से भी ज्यादा प्रदूषित थी। ऐसे में यह मानना गलत होगा कि सिर्फ दिल्ली में विशेष नियम लागू हों। कोर्ट का कहना है कि अगर बैन जरूरी है, तो वह पूरे देश में लागू होना चाहिए।
वायु गुणवत्ता आयोग को नोटिस
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील अपराजिता सिंह ने भी कोर्ट की इस राय का समर्थन किया और कहा कि प्रदूषण बढ़ने पर अमीर लोग तो आसानी से दिल्ली छोड़कर दूसरी जगह चले जाते हैं, लेकिन बाकी जनता को जहरीली हवा में जीना पड़ता है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में पटाखों पर प्रतिबंध की मांग वाली याचिका पर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) को नोटिस जारी किया।
पहले भी लागू हो चुके हैं सख्त नियम
गौरतलब है कि बीते वर्षों में दिल्ली और एनसीआर में पटाखों पर लगातार कड़े प्रतिबंध लगाए जाते रहे हैं। दिल्ली सरकार ने 19 दिसंबर 2024 को सालभर के लिए पटाखों की बिक्री और भंडारण पर पूरी तरह रोक लगाई थी। इसके बाद जनवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने इस बैन को उत्तर प्रदेश और हरियाणा के एनसीआर जिलों तक बढ़ा दिया। अप्रैल 2025 में कोर्ट ने साफ कर दिया कि यह रोक सालभर लागू रहेगी और इसमें ग्रीन पटाखे भी शामिल होंगे। मई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए और चेतावनी दी कि उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई होगी।
नवरात्र तक हर दिन लिया जाएगा एक नया संकल्प, सफाई अभियान तीन श्रेणियों में विभाजित
देहरादून। प्रदेश में 17 सितंबर से स्वच्छोत्सव–स्वच्छता ही सेवा अभियान की शुरुआत होने जा रही है। इस अभियान के तहत नवरात्र पर्व तक विशेष सफाई और जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। हर दिन एक नया संकल्प लिया जाएगा और प्रदेशभर में सफाई को तीन अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर विशेष अभियान चलाए जाएंगे।
पंचायती राज मंत्री सतपाल महाराज की अध्यक्षता में स्वच्छोत्सव की तैयारियों की समीक्षा बैठक आयोजित हुई। मंत्री वर्चुअल माध्यम से जुड़े, जबकि देहरादून में बैठक का संचालन सचिव शहरी विकास नितेश झा ने किया।
बैठक में निर्णय लिया गया कि 17 सितंबर से 2 अक्तूबर तक चलने वाले इस अभियान में कचरा स्थलों की सफाई के लिए सात दिन, 30 दिन और 30 से अधिक दिन की श्रेणियों में विशेष सफाई अभियान चलेंगे। सफाई कर्मचारियों के लिए सुरक्षा शिविर लगाए जाएंगे, वहीं पर्यावरण अनुकूल और सिंगल यूज़ प्लास्टिक मुक्त कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
अभियान के दौरान विभिन्न विभागों में स्वच्छता शपथ दिलाई जाएगी और पर्यटन स्थलों पर स्वच्छता रंगोली बनाई जाएगी। इसके साथ ही 25 सितंबर को राज्यस्तरीय श्रमदान एवं स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा। अभियान की सभी गतिविधियों को आईटी पोर्टल पर अपलोड करने की व्यवस्था की जाएगी। बैठक में विभागीय अधिकारियों ने भी अपनी तैयारियों की जानकारी साझा की।
पेट में समय-समय पर होने वाला हल्का दर्द अक्सर हमें सामान्य लगता है और हम इसे गैस, अपच या गलत खान-पान की वजह मानकर अनदेखा कर देते हैं। लेकिन अगर यह दर्द बार-बार हो या लंबे समय तक बना रहे, तो यह शरीर में किसी गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकता है। लगातार बने रहने वाला पेट दर्द सिर्फ एक साधारण समस्या नहीं है, बल्कि यह पाचन तंत्र, लिवर, किडनी या आंतों से जुड़ी कई स्वास्थ्य दिक्कतों की ओर इशारा कर सकता है। इसलिए इसे नजरअंदाज करने की बजाय समय पर कारण को समझना और इलाज करना बेहद जरूरी है।
इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS)
आईबीएस एक सामान्य लेकिन परेशान करने वाली समस्या है, जो बड़ी आंत को प्रभावित करती है। इसके लक्षणों में पेट में लगातार हल्का दर्द, गैस, पेट फूलना और कब्ज या दस्त जैसी परेशानी शामिल होती है। यह बीमारी लंबे समय तक बनी रहती है और तनाव या कुछ खास खाने की चीजों से बढ़ सकती है।
गैस्ट्राइटिस और अल्सर
पेट की अंदरूनी परत में सूजन को गैस्ट्राइटिस कहा जाता है, जिससे जलन और दर्द महसूस होता है। अगर इसका समय पर इलाज न किया जाए तो यह अल्सर का रूप ले सकती है। अल्सर होने पर खाली पेट या खाना खाने के बाद तेज दर्द महसूस होता है, खासकर पेट के ऊपरी हिस्से में।
पित्ताशय और लिवर संबंधी दिक्कतें
पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में लगातार बना रहने वाला दर्द पित्ताशय या लिवर की समस्या का संकेत हो सकता है। पित्ताशय की पथरी या फैटी लिवर की स्थिति में मतली, उल्टी और लगातार दर्द जैसे लक्षण सामने आते हैं। ऐसे मामलों में डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना जरूरी है।
कब लें डॉक्टर की सलाह?
अगर पेट का दर्द दो हफ्तों से ज्यादा समय तक बना रहे या इसके साथ उल्टी, बुखार, खून की उल्टी, भूख न लगना और वजन कम होना जैसे लक्षण हों, तो इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं।
बचाव और सावधानियां
संतुलित और पौष्टिक आहार लें।
तैलीय और मसालेदार भोजन से बचें।
रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
तनाव से दूर रहने की कोशिश करें।
नियमित व्यायाम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
(साभार)
स्थानीय उत्पादों को मिलेगा बड़ा मंच- किसान, कारीगर और महिला समूह अपने उत्पाद सीधे बेच सकेंगे
देहरादून। प्रदेश में 3 अक्टूबर से 31 दिसंबर तक सहकारिता विभाग द्वारा विशेष थीम आधारित वृहद सहकारिता मेलों का आयोजन किया जाएगा। इन मेलों का उद्देश्य स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देना और ग्रामीण आर्थिकी को नई दिशा प्रदान करना है।
सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि मेलों में किसानों, काश्तकारों, कारीगरों, युवाओं, महिला स्वयं सहायता समूहों और सहकारी संस्थाओं को अपने उत्पाद प्रदर्शित व विक्रय करने के लिए सीधा मंच मिलेगा। साथ ही विभागीय एवं अंतर्विभागीय योजनाओं का प्रचार-प्रसार भी इन मेलों के जरिए किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में अलग-अलग थीम पर मेला आयोजित होगा। अल्मोड़ा में हस्तशिल्प संरक्षण, पौड़ी में ग्रामीण सशक्तिकरण, बागेश्वर में पर्वतीय कृषि, रुद्रप्रयाग में धार्मिक पर्यटन, पिथौरागढ़ में सीमांत समृद्धि, चमोली में पर्यावरण संरक्षण व ईको टूरिज्म, चंपावत में सीमांत विकास, उत्तरकाशी में जैव संसाधन व साहसिक पर्यटन, ऊधमसिंहनगर में औद्योगिक कृषि, हरिद्वार में आध्यात्मिक समृद्धि, नैनीताल में पर्यटन विकास, टिहरी में पर्यावरण संरक्षण और देहरादून में शहरी-ग्रामीण एकता थीम पर मेले होंगे।
मेलों में सांसद, विधायक, महापौर, जिला पंचायत अध्यक्ष सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। प्रत्येक मेले की नियमित मॉनिटरिंग होगी और जिलास्तरीय समिति रोजाना राज्य स्तरीय समिति को रिपोर्ट भेजेगी। इसके अलावा मेले के समापन के 15 दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
इन मेलों में न सिर्फ उत्पाद प्रदर्शन होंगे बल्कि छात्र-छात्राओं को भी सहकारिता आंदोलन से जोड़ा जाएगा। कला, वाद-विवाद, क्विज प्रतियोगिताओं के साथ ही तकनीकी सत्र, स्वास्थ्य जागरूकता, डिजिटल साक्षरता, महिला सशक्तिकरण और सामुदायिक सहकारिता जैसे विषयों पर चर्चा भी आयोजित की जाएगी।
नकली दवाओं और ड्रग्स पर ज़ीरो टॉलरेंस – स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार का FDA मुख्यालय में औचक निरीक्षण
450 से अधिक मेडिकल स्टोरों और 65 मैनुफैक्चरिंग यूनिट्स पर छापेमारी, प्रवर्तन कार्यों में तेज़ी
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों पर “ड्रग फ्री उत्तराखंड – 2025” अभियान को नई गति देने के लिए स्वास्थ्य सचिव एवं आयुक्त, खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FDA) डॉ. आर. राजेश कुमार ने FDA मुख्यालय का औचक निरीक्षण कर विभागीय कार्यों की बारीकी से समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने विभागीय गतिविधियों पर विस्तृत प्रेज़ेंटेशन दिया। सचिव ने स्पष्ट कहा कि मुख्यमंत्री के मिशन को युद्धस्तर पर चलाना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि “ड्रग फ्री उत्तराखंड – 2025” मुख्यमंत्री के नेतृत्व में केवल नारा नहीं, बल्कि ज़मीनी स्तर पर चल रहा ठोस अभियान है, जिसका लक्ष्य सुरक्षित, स्वस्थ और नशामुक्त समाज का निर्माण है।
तेज हुई कार्रवाई, ठोस परिणाम
डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री के ‘ड्रग फ्री उत्तराखंड – 2025’ के सपने को साकार करने के लिए विभाग युद्धस्तर पर जुटा है। क्विक रिस्पॉन्स टीम के गठन के बाद निरीक्षण और छापामारी में तेजी आई है। अब तक 450 से अधिक मेडिकल स्टोरों पर छापेमारी की कार्रवाई की जा चुकी है, 65 मैनुफैक्चरिंग यूनिट्स पर छापेमारी की गई है और बाकी की कार्रवाई गतिमान है। नेपाल बॉर्डर वाले इलाकों में सर्विलांस की कार्रवाई और तेज़ करने के निर्देश भी दिए गए हैं। नारकोटिक्स और नकली दवाओं पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए विभाग एसटीएफ, पुलिस और अन्य विभागों के साथ समन्वय को और तेज़ कर रहा है।
नकली दवाओं और ड्रग्स पर ज़ीरो टॉलरेंस
डॉ. आर. राजेश कुमार नकली दवाओं और नशीले पदार्थों के मामलों पर बेहद सख़्त नज़र आए। उन्होंने निर्देश दिया कि छापामार कार्रवाइयों की गति और दायरा दोनों बढ़ाए जाएं ताकि दोषियों के खिलाफ त्वरित और कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि दवाओं की गुणवत्ता न केवल स्वास्थ्य का बल्कि समाज के भरोसे का विषय है, इसलिए बाज़ार में बिक रही हर दवा सुरक्षित और वैज्ञानिक मानकों पर खरी उतरनी चाहिए।
लैब और मोबाइल वैन से बढ़ी टेस्टिंग क्षमता
निरीक्षण के दौरान डॉ. आर. राजेश कुमार ने फूड और कॉस्मेटिक लैब का भी जायज़ा लिया। उन्होंने सैंपलों की जांच, कार्रवाई और रिपोर्टिंग की व्यवस्था पर विस्तृत जानकारी ली और स्पष्ट निर्देश दिए कि हर स्तर पर पारदर्शिता और सख्ती बरती जाए। उन्होंने बताया कि वर्तमान में विभाग के पास तीन मोबाइल वैन हैं, जिनके ज़रिए सभी जगह सैंपल भरे जा रहे हैं। अगले दो से तीन माह में 10 और आधुनिक मोबाइल वैन मिलने वाली हैं। भारत सरकार से स्वीकृत मिल चुकी है। जल्द ही देहरादून स्थित लैव में आधुनिक उपकरण लग जायेगें। जिससे जांचों में और तेजी आयेगी। देहरादून में नई लैब खुलने से गढ़वाल क्षेत्र के सैंपलों की जांच में पहले से ही तेजी आई है।
प्रवर्तन कार्यों को मजबूत करने के लिए नए कदम
बैठक में विभागीय कार्यों को मज़बूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इनमें नवनियुक्त 18 औषधि निरीक्षकों को प्रवर्तन कार्यों के स्पष्ट लक्ष्य देना, अभिलेखों के रख-रखाव में एकरूपता लाना, न्यायालयों में लंबित वादों की प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करना, वाद तैयार करने व विश्लेषण और दस्तावेजीकरण के लिए कार्यशाला आयोजित करना शामिल है। साथ ही विभागीय प्रवर्तन कार्यों पर Digital Repository और Coffee Table Book तैयार करने, repeated offenders की प्रभावी ट्रेसिंग की व्यवस्था बनाने और सीमांत जनपदों — चमोली, पिथौरागढ़ व चम्पावत — में सर्विलांस बढ़ाकर प्रवर्तन को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए गए।
भविष्य की योजना
सचिव ने कहा कि अगले तीन महीने विभाग के लिए निर्णायक होंगे। 18 नए ड्रग इंस्पेक्टरों की तैनाती के बाद फील्ड कार्यों में तेजी आई है। अंतर्राज्यीय समन्वय को और मज़बूत किया जाएगा और औषधि विक्रेताओं के distribution network की जांच कर उसका डेटा तैयार किया जाएगा। अगले दो–तीन महीनों में आधुनिक उपकरणों से लैस लैब के आने से दवा और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांचने की प्रक्रिया और तेज़ एवं पारदर्शी होगी।
विजय पर तंज, कहा राजनीति 24×7 की जिम्मेदारी, शनिवार-रविवार से जनता का भरोसा नहीं मिलता
चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में इन दिनों बयानबाज़ी तेज हो गई है। भाजपा नेता के. अन्नामलाई ने अभिनेता और टीवीके (तमिलगा वेत्री कषगम) के संस्थापक विजय कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि राजनीति केवल सप्ताहांत की गतिविधि नहीं हो सकती। अन्नामलाई का तर्क है कि विजय अगर अपनी पार्टी को डीएमके का विकल्प बताना चाहते हैं, तो उन्हें सातों दिन सक्रिय रहना होगा, क्योंकि राजनीति चौबीसों घंटे समर्पण मांगती है।
अन्नामलाई ने दावा किया कि भाजपा ही वास्तविक तौर पर डीएमके का विकल्प है, क्योंकि इसके कार्यकर्ता पूरे साल जमीनी स्तर पर सक्रिय रहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि एआईएडीएमके नेता एडप्पादी के. पलानीस्वामी लगातार जिलों में जाकर जनसभाएं कर रहे हैं, जबकि विजय केवल शनिवार और रविवार को जनता से जुड़ते हैं।
भाजपा नेता ने तंज कसते हुए कहा कि अगर टीवीके वास्तव में राज्य की वैकल्पिक ताकत बनना चाहती है, तो उसके नेता को भी गंभीरता और नियमितता के साथ राजनीति करनी होगी।
इस बीच, अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके 13 सितंबर को मरक्कदाई में बैठक करने जा रही है। माना जा रहा है कि यहीं से विजय आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अपने प्रचार अभियान की शुरुआत करेंगे। तमिलनाडु पुलिस ने बैठक को मंजूरी तो दी है, लेकिन कई शर्तों के साथ। कार्यक्रम की अवधि सिर्फ 25 मिनट होगी और किसी भी तरह के रोड शो या जुलूस की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्रचार सीमित दायरे में केवल तिरुचिरापल्ली तक रहेगा।
पुलिस ने साफ किया है कि रैली में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने नहीं दी जाएगी। तय कार्यक्रम के अनुसार, विजय का प्रचार 10:35 से 11 बजे तक ही चलेगा और वाहनों की संख्या उनके काफिले तक ही सीमित रहेगी। इसके अलावा पार्टी पदाधिकारियों के लिए पैदल मार्च या बड़े जुलूस पर पूरी तरह रोक होगी।
