लिवर हमारे शरीर का ऐसा अंग है जो पाचन क्रिया, खून को शुद्ध करने और हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने में मुख्य भूमिका निभाता है। लेकिन आधुनिक जीवनशैली, फास्ट फूड, शराब और तनाव जैसी आदतें लिवर की सेहत को तेजी से प्रभावित करती हैं। लिवर के कमजोर होने पर थकान, अपच और कई गंभीर बीमारियां घेर सकती हैं। ऐसे में योगासन लिवर को डिटॉक्स करने और उसकी कार्यक्षमता बढ़ाने का एक सुरक्षित और प्राकृतिक उपाय है। रोजाना सिर्फ 10-15 मिनट योगाभ्यास करने से लिवर की सफाई, पाचन में सुधार और शरीर को ऊर्जा मिलती है।
1. भुजंगासन (Cobra Pose)
भुजंगासन करने से लिवर की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं और खून का संचार तेज होता है। इससे लिवर पर जमा टॉक्सिन बाहर निकलते हैं और पाचन बेहतर होता है। यह पेट की अतिरिक्त चर्बी कम करने, रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाने और फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने के लिए भी लाभकारी है।
2. धनुरासन (Bow Pose)
इस आसन में शरीर धनुष जैसा दिखाई देता है। इसे करने से पेट और लिवर पर हल्का दबाव पड़ता है, जिससे पाचन और लिवर की कार्यक्षमता में सुधार होता है। यह लिवर को डिटॉक्स करने और फैट कम करने में मददगार है। साथ ही पैंक्रियाज को टोन करता है। रोजाना 15–20 सेकंड के 2 सेट करना पर्याप्त है।
3. अर्ध मत्स्येन्द्रासन (Half Spinal Twist Pose)
यह आसन लिवर और पाचन तंत्र के लिए बेहद फायदेमंद है। इससे शरीर में जमी अशुद्धियां बाहर निकलती हैं और इंसुलिन का स्राव संतुलित होता है। नियमित अभ्यास से लिवर और किडनी की कार्यक्षमता भी बढ़ती है। इसे सुबह खाली पेट करना सबसे उत्तम माना जाता है।
4. कपालभाति प्राणायाम
कपालभाति लिवर की शुद्धि के लिए बहुत असरदार प्राणायाम है। इससे रक्त शुद्ध होता है और लिवर की कोशिकाएं सक्रिय होती हैं। यह पेट की चर्बी कम करने, वजन नियंत्रित रखने और पाचन को दुरुस्त करने में मदद करता है।
संतुलित आहार, पर्याप्त पानी और इन योगासनों का नियमित अभ्यास लिवर को स्वस्थ और सक्रिय बनाए रखता है।
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एक दर्जन से अधिक बहुमंजिला इमारतों समेत दर्जनों निर्माण सील
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सख्त निर्देशों पर उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी की अगुवाई में मसूरी- देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने अवैध प्लॉटिंग और नियम विरुद्ध निर्माण के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्यवाही को अंजाम दिया है। बीते एक माह के भीतर प्राधिकरण ने लगभग 150 बीघा अवैध प्लॉटिंग को ध्वस्त कर दिया और ऋषिकेश सहित विभिन्न स्थानों पर एक दर्जन से अधिक बहुमंजिला इमारतों समेत दर्जनों निर्माणों को सील किया है।
कहाँ-कहाँ हुई बड़ी कार्रवाई
डोईवाला के झाबरावाला में 18 बीघा, रानीपोखरी के डांडी गांव में 10 से 12 बीघा, भानियावाला के बक्सारवाला में 25 बीघा और देहरादून के हरिद्वार रोड (साईं मंदिर के निकट) में 40 बीघा अवैध प्लॉटिंग को ध्वस्त किया गया। इसके अतिरिक्त शीशमबाड़ा क्षेत्र में 10 बीघा और रूपनगर बद्रीपुर में 5 बीघा अवैध प्लॉटिंग को भी गिराया गया। माजरी ग्रांट, हरिद्वार रोड, नेहरू कॉलोनी, सहस्त्रधारा रोड और शिमला बाईपास हिन्दुवाला क्षेत्र में कई अवैध निर्माणों पर सीलिंग की कार्यवाही की गई। सबसे बड़ी कार्रवाई ऋषिकेश में देखने को मिली, जहाँ निर्मल बाग, वीरभद्र रोड, गली नंबर 10–11, कोयल ग्रांट और प्राधिकरण क्षेत्र के अन्य हिस्सों में एक दर्जन से अधिक बहुमंजिला इमारतों को सील किया गया।
एमडीडीए की जीरो टॉलरेंस की नीति
एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मंशा स्पष्ट है। प्रदेश में अवैध प्लॉटिंग और नियम विरुद्ध निर्माण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होंगे और यह कार्रवाई इसी नीति का हिस्सा है। उन्होंने दोहराया कि आज की कार्रवाई आख़िरी कदम नहीं है, बल्कि यह सिलसिला आगे भी लगातार जारी रहेगा। प्राधिकरण हर उस जगह पहुँचेगा जहाँ मानकों के विरुद्ध ढांचा खड़ा किया गया है।
आम जनता को किया जा रहा जागरूक
प्राधिकरण आम जनता को भी लगातार जागरूक कर रहा है कि वह भू-माफियाओं के झांसे में न आएँ। किसी भी प्लॉट या निर्माण की वैधता की पुष्टि प्राधिकरण से अवश्य करें। बिना एमडीडीए से अनुमति की प्लॉटिंग या निर्माण आम जनमानस के लिए भविष्य में न केवल आर्थिक नुकसान बल्कि कानूनी संकट भी खड़ा कर सकते हैं।
योजनाबद्ध विकास पर जोर
एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी का कहना है कि उत्तराखंड की खूबसूरती और योजनाबद्ध विकास को बचाने के लिए कठोर फैसले लेना बेहद आवश्यक है। अवैध निर्माण न केवल पर्यावरण और भूगोल को नुकसान पहुँचाते हैं बल्कि प्रदेश की पहचान और भविष्य के लिए भी खतरा हैं। यही कारण है कि मुख्यमंत्री धामी ने साफ निर्देश दिए हैं कि कानून तोड़ने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
बुलडोज़र बना सख्ती का प्रतीक
बुलडोज़र और पुलिस बल की मौजूदगी में की गई इन कार्रवाइयों ने अवैध निर्माण और प्लॉटिंग माफियाओं को कड़ा संदेश दिया है। वहीं स्थानीय लोगों का मानना है कि सरकार का यह कदम सही दिशा में है क्योंकि अवैध गतिविधियों से बुनियादी ढाँचा और संसाधन बुरी तरह प्रभावित हो रहे थे।
एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने यह भी स्पष्ट किया है कि देहरादून जनपद प्राधिकरण क्षेत्रांगर्त हुई यह कार्रवाई प्रदेशभर में यह संदेश देती है कि उत्तराखंड अब अवैध प्लॉटिंग और नियमविरुद्ध निर्माण के खिलाफ पूरी तरह एक्शन मोड में है।
सेना में तैनाती के दौरान की यादों को किया ताजा, डेल्टा कम्पनी के बैरिक और मैस पहुंचे गणेश जोशी
रिकॉर्ड कक्ष सहित हथियारों के प्रशिक्षण केंद्र भी पहुंचे सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी, एके47 से चलाई गोली
लैंसडाउन। गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर में दो दिवसी भ्रमण के दौरान सुबे के सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने वार मेमोरियल पर पुष्पचक्र अर्पित कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उन्होंने गढ़वाल राइफल्स के म्यूजियम का अवलोकन किया और वहाँ प्रदर्शित वीर सैनिकों के शौर्य एवं बलिदान की गाथाओं को नमन किया।
सैनिक कल्याण मंत्री 1976 को आर्मी में भर्ती हुए और 14वीं गढ़वाल राइफल्स की डेल्टा कम्पनी की यादों को ताजा करने के लिए उन्होंने डेल्टा कम्पनी के बैरिक और मैस का दौरा किया। जहां पर सैनिक कल्याण मंत्री ने जवानों के साथ भोजन किया और बैरिक जाकर सैन्य अधिकारियों से विस्तार से जानकारी ली।

इस दौरान उन्होंने रिकॉर्ड कक्ष का निरीक्षण भी किया, जहां अपना नाम देखकर उनकी पुरानी सैन्य सेवाओं की यादें ताजा की। इसके अलावा उन्होंने हथियारों के प्रशिक्षण केंद्र का अवलोकन भी किया। इस दौरान उन्होंने भुल्ली सशक्तिकरण केंद्र का भी दौरा किया, जहाँ सैन्य अधिकारियों और सैनिकों के परिवार द्वारा तैयार किए गए उत्पादों का अवलोकन किया। इसके साथ ही सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कोटद्वार में सूबेदार मेजर शैलेन्द्र मोहन बिष्ट से भी भेंट की। इस दौरान उन्होंने कोटद्वार स्थित छावनी परिषद का भी अवलोकन किया और परिषद से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी प्राप्त की।
कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि यही से उन्होंने 13 नवम्बर 1976 को एक राईफलमैन के एक रूप में भारतीय सेना में ज्वाइन हुए थे। उन्होंने कहा कि गढ़वाल राइफल्स का इतिहास शौर्य, पराक्रम और अनुशासन का प्रतीक है। देवभूमि उत्तराखंड सदैव से देशभक्ति और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना से ओत-प्रोत रही है। यहाँ के वीर सैनिकों ने अपने अदम्य साहस और बलिदान से देश का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार सैनिकों, शहीदों के परिजनों और पूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। मंत्री ने उपस्थित सैन्य अधिकारियों का आभार जताते हुए कहा कि शौर्यभूमि लैंसडाउन का हर पत्थर गढ़वाल राइफल्स की गौरवशाली परंपरा की गाथा कहता है।
निरीक्षण के दौरान गढ़वाल राइफल रेजीमेंट सेंटर के कमांडेंट ब्रिगेडियर विनोद सिंह नेगी, डेल्टा कम्पनी के कम्पनी कमांडर, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल (सेनि) वीपी भट्ट सहित सेना के अधिकारी उपस्थित रहे।
बॉलीवुड के चर्चित कोर्टरूम ड्रामा सीक्वल ‘जॉली एलएलबी 3’ का ट्रेलर रिलीज हो चुका है और इसके साथ ही दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ गई है। अक्षय कुमार और अरशद वारसी पहली बार एक ही फ्रेम में जॉली के रूप में नज़र आ रहे हैं। फिल्म के ट्रेलर ने साफ कर दिया है कि इस बार कहानी सिर्फ कोर्ट और कॉमेडी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि किसानों की जमीनी लड़ाई और उनके दर्द को भी बड़े पर्दे पर उतारा जाएगा।
3 मिनट 5 सेकंड लंबे ट्रेलर में दिखाया गया है कि कैसे एक शक्तिशाली उद्योगपति किसानों की जमीन हड़पने की कोशिश करता है। किसान अपनी लड़ाई लेकर जॉली यानी अरशद वारसी के पास पहुंचते हैं। लेकिन ट्विस्ट तब आता है, जब दूसरी ओर उसी उद्योगपति का केस लड़ने के लिए अक्षय कुमार खड़े हो जाते हैं। इस बार कोर्ट में जॉली बनाम जॉली की भिड़ंत देखने को मिलेगी, जहां एक तरफ सामाजिक न्याय और किसानों की आवाज़ है तो दूसरी तरफ ताकतवर लॉबी।
फिल्म में गजराज राव इस बार विलेन के तौर पर बिल्कुल अलग अंदाज़ में दिख रहे हैं। वहीं, हुमा कुरैशी और अमृता राव अपने-अपने पुराने किरदारों में नजर आएंगी। इसके अलावा सीमा बिस्वास और संजय मिश्रा जैसे कलाकार भी फिल्म की कहानी को गहराई देंगे।
निर्देशक सुभाष कपूर की यह फिल्म 19 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। खास बात यह है कि पहली बार दोनों जॉली—मेरठ वाले (अरशद वारसी) और कानपुर वाले (अक्षय कुमार)—एक साथ कोर्ट रूम में आमने-सामने होंगे। कॉमेडी, इमोशन और सामाजिक मुद्दों का मिश्रण यह फिल्म दर्शकों के लिए एक अलग ही अनुभव देने वाली है।
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दहशत में ग्रामीण, राहत शिविर में पहुंचे 60 से ज्यादा लोग
चमोली। चमोली जिले के ब्लॉक के अनुसूचित बाहुल्य गांव पूर्णा में भू-धंसाव और जमीन से रिस रहे पानी ने लोगों की नींद उड़ा दी है। गांव के करीब 15 घरों में बड़ी दरारें पड़ गई हैं, जो धूप और बारिश के चलते लगातार चौड़ी हो रही हैं। हालात बिगड़ने पर अधिकांश परिवार अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर चले गए हैं।
पूर्णा ही नहीं, बल्कि ल्वाणी, धरातल्ला और मोपाटा के बाद अब यह आपदा सेलखोला गांव तक पहुंच गई है। यहां भी आठ घरों में दरारें आ चुकी हैं, जिससे लोग रात के अंधेरे में घर छोड़कर होटलों या रिश्तेदारों के यहां शरण लेने को मजबूर हो गए। प्रभावित परिवार मजदूरी पर निर्भर हैं, जिनके घरों के साथ-साथ गोशालाएं भी धंसाव की चपेट में आ गई हैं।
राहत शिविर और प्रशासन की पहल
प्रशासन ने जीएमवीएन के पर्यटन आवास गृह में राहत शिविर बनाया है, जहां फिलहाल 60 से अधिक लोग रात गुजार रहे हैं। ग्राम प्रधान सीमा देवी और कनिष्ठ उपप्रमुख पिंकी देवी ने प्रशासन से त्वरित मदद और गांव का भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराने की मांग की है।
विधायक और प्रशासन मौके पर
क्षेत्रीय विधायक भूपाल राम टम्टा और एसडीएम पंकज भट्ट ने पूर्णा और सेलखोला गांव का दौरा कर प्रभावितों को हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। विधायक ने पूर्णा गांव के लिए 16 राशन किट वितरित किए और प्रशासन को सभी प्रभावित गांवों में राहत शिविर स्थापित करने के निर्देश दिए। साथ ही पानी की धारा को डायवर्ट करने और भू-धंसाव की वैज्ञानिक जांच कराने की बात कही।
एनडीए उम्मीदवार ने विपक्षी बी. सुदर्शन रेड्डी को 152 वोटों से दी मात
नई दिल्ली। भारत को नया उपराष्ट्रपति मिल गया है। एनडीए के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन ने चुनाव में जीत दर्ज कर ली। उन्होंने विपक्षी गठबंधन इंडिया के प्रत्याशी बी. सुदर्शन रेड्डी को बड़े अंतर से हराया। राधाकृष्णन को 452 वोट मिले, जबकि रेड्डी 300 वोटों पर सिमट गए। अब राधाकृष्णन देश के 15वें उपराष्ट्रपति के तौर पर शपथ ग्रहण करेंगे। यह पद जुलाई से खाली पड़ा था, जब पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने इस्तीफा दिया था।
उपराष्ट्रपति का पद भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में बेहद अहम माना जाता है। यह देश का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद है। उपराष्ट्रपति का कार्यकाल पाँच वर्षों का होता है, लेकिन नए उत्तराधिकारी के पद ग्रहण करने तक वे पद पर बने रहते हैं।
संविधान में यह स्पष्ट उल्लेख नहीं है कि यदि किसी कारण (जैसे इस्तीफा, मृत्यु) से कार्यकाल समाप्त होने से पहले पद रिक्त हो जाए या उपराष्ट्रपति अस्थायी रूप से राष्ट्रपति का कार्यभार संभालें, तो उनकी जिम्मेदारियों का निर्वहन कौन करेगा।
नई जिम्मेदारियों के साथ सीपी राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति पद से जुड़ी कई सुविधाएँ और वेतन-भत्ते भी मिलेंगे। उपराष्ट्रपति राज्यसभा के सभापति भी होते हैं, इसलिए उनकी भूमिका केवल औपचारिक नहीं बल्कि संसदीय कार्यप्रणाली को दिशा देने वाली होती है।
देहरादून। प्रदेश में प्रांतीय रक्षक दल स्वयंसेवकों को अब साल भर में कुल 12 दिन का मानदेय सहित अवकाश मिल सकेगा । इस बारे में आदेश जारी कर दिया गया है।
विभागीय मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि चार धाम यात्रा व अन्य सभी महत्वपूर्ण आयोजनों में पीआरडी स्वयंसेवकों की उत्तम सेवा को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।
रेखा आर्या ने बताया कि ऐसे स्वयंसेवक जिनके द्वारा कम से कम 365 दिन की ड्यूटी कर ली गई हो और जो कार्ययोजित हों, उन्हें प्रत्येक 30 दिनों की ड्यूटी पर 1 दिन का आकस्मिक अवकाश मानदेय के साथ मिल सकेगा।
इस आकस्मिक अवकाश की मंजूरी ड्यूटी और तैनाती स्थल से संबंधित कार्यालय, संस्थान या निगम के सक्षम अधिकारी द्वारा दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि जनवरी से जून माह तक कुल 6 माह की अवधि में अधिकतम 6 आकस्मिक अवकाश मान्य होंगे। यदि 6 माह की अवधि के पश्चात कोई आकस्मिक अवकाश बचता है तो उसे आगे नहीं जोड़ा जाएगा। इसी तरह साल के बाकी 6 महीनों के लिए भी 6 आकस्मिक अवकाश मान्य होंगे
पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज बोले – उत्तराखंड यात्रा का जीएसटी यहीं कटे, तभी राज्य को होगा लाभ
देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड एक ऐसा स्थान है जहां के विभिन्न पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों पर वर्षभर सबसे अधिक यात्री आते हैं। टूर ऑपरेटर और ट्रैवल एजेंसियों के कार्यालय राजधानी दिल्ली में खुले हैं और वहीं वह जीएसटी भी काटते हैं। जब यात्रा उत्तराखंड की है तो जीएसटी भी उत्तराखंड में कटनी चाहिए। इसलिए टूर ऑपरेटर और ट्रैवल एजेंसियों को उत्तराखंड की यात्रा पर आने वाले यात्रियों के लिए अपने कार्यालय उत्तराखंड में भी खोलने चाहिए ताकि उत्तराखंड को जीएसटी का लाभ मिल सके।
उक्त बात प्रदेश के पर्यटन, धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने उत्तराखंड टूरिज्म रिप्रेजेंटेटिवस (उत्तरा) एसोसिएशन एवं उत्तराखण्ड पर्यटन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में एक स्थानीय होटल में आयोजित उत्तरा सम्मेलन में प्रतिभाग करने आये टूर ऑपरेटर, पर्यटन क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विशेषज्ञों, उद्यमियों और संगठनों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कही। Tour Operator: The Force Behind सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि उन्होंने आयोजनकर्ताओं को बधाई देते हुए कहा कि उत्तराखण्ड, जिसे हम देवभूमि कहते हैं, केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह रोमांच, साहसिक पर्यटन, वेलनेस मेडिकल पर्यटन और प्राकृतिक सौंदर्य की दृष्टि से भी अपार संभावनाएँ समेटे हुए है। इसलिए आज जब हम इस आयोजन के अवसर पर पर्यटन के भविष्य की चर्चा कर रहे हैं, तो हमें यह भी स्मरण रखना चाहिए कि पर्यटन केवल अर्थव्यवस्था का माध्यम नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति, हमारी परंपराओं और हमारी धरोहर को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का भी एक सशक्त माध्यम है।
पर्यटन मंत्री महाराज ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड एक ऐसा स्थान है जहां के विभिन्न पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों पर वर्षभर सबसे अधिक यात्री आते हैं। टूर ऑपरेटर और ट्रैवल एजेंसियों के कार्यालय राजधानी दिल्ली में खुले हैं और वहीं वह जीएसटी भी काटते हैं। जब यात्रा उत्तराखंड की है तो जीएसटी भी उत्तराखंड में कटनी चाहिए। इसलिए टूर ऑपरेटर और ट्रैवल एजेंसियों को उत्तराखंड की यात्रा पर आने वाले यात्रियों के लिए अपने कार्यालय उत्तराखंड में भी खोलने चाहिए ताकि उत्तराखंड को जीएसटी का लाभ मिल सके और हमारी सरकार टूर ऑपरेटर्स की जो भी समस्याएं हैं उनका समाधान कर उन्हें लाभ दे सके। उन्होंने कहा Tour Operator: The Force Behind न केवल समयानुकूल है आयोजन है बल्कि यह हमें यह भी याद दिलाता है कि किसी भी पर्यटन गंतव्य की सफलता में टूर ऑपरेटरों की भूमिका अति महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि सभी टूर ऑपरेटर हमारे राज्य के पर्यटन ब्रांड एम्बेसडर हैं, जो हर पर्यटक को उत्तराखण्ड की असली छवि दिखाने के साथ-साथ उन्हें गंतव्य तक पहुंचाने का काम करते हैं।
महाराज ने कहा कि हमारी सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप कार्य करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में पर्यटन क्षेत्र के सतत विकास और निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। पर्यटन विभाग की योजनाएँ, प्रोत्साहन पैकेज और नई नीतियाँ इस दिशा में ठोस कदम हैं। हमारे प्रयास हैं कि हम राज्य को साहसिक पर्यटन, धार्मिक पर्यटन, मेडिकल पर्यटन, वेलनेस पर्यटन और ग्रामीण पर्यटन का वैश्विक केन्द्र बना सकें। सतत विकास और संकट की तैयारी (*Sustainability & Crisis Preparedness*) आज की प्रमुख आवश्यकताएँ हैं। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि पर्यटन विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को भी समान महत्व मिले।
उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि इस प्रकार के आयोजन संवाद और सहयोग राज्य को एक नई दिशा देंगे। इससे न केवल पर्यटन क्षेत्र की चुनौतियों के समाधान निकलेंगे बल्कि नई संभावनाओं के द्वार भी खुलेंगे और उत्तराखण्ड को पर्यटन के वैश्विक मानचित्र पर एक नई पहचान मिलेगी।
पर्यटन विभाग के एसीईओ बी.एल. राणा, अपर निदेशक पूनम चंद, आईएटीओ के अध्यक्ष पूर्व राजीव मेहरा, एडीटीओआई के अध्यक्ष वेद खन्ना, वैभव काला, प्रशांत मैठाणी, सुनील सिंह राणा सहित अनेक लोग मौजूद थे।
विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी भी रहीं मौजूद
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मैक्स हॉस्पिटल पहुंचे और पूर्व मुख्यमंत्री व वरिष्ठ राजनेता भुवन चंद्र खंडूरी के स्वास्थ्य की जानकारी ली। खंडूरी इन दिनों स्वास्थ्य संबंधी कारणों से उपचाररत हैं।
मुख्यमंत्री ने चिकित्सकों से उनकी स्थिति की जानकारी प्राप्त की और उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की। इस अवसर पर उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी भूषण भी मौजूद रहीं। मुख्यमंत्री ने उनसे भी खंडूरी के उपचार से जुड़ी जानकारी ली।
“हिमालय देश की आत्मा और धरोहर” – सीएम धामी ने दिया प्रकृति संरक्षण का संदेश
देहरादून। मसूरी रोड स्थित एक होटल में मंगलवार को आयोजित “हिमालय बचाओ अभियान-2025” कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हिमालय और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सराहनीय कार्य करने वालों को सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2012 में शुरू हुआ हिमालय बचाओ अभियान अब जन-जन का अभियान बन चुका है। हिमालय देश की आत्मा, संस्कृति और प्रकृति की अनमोल धरोहर है, जिसकी नदियां करोड़ों लोगों को जीवनदायी जल और ऊर्जा प्रदान करती हैं। यहां की दुर्लभ वनस्पतियां और जीव-जंतु पर्यावरण की अहम धरोहर हैं।
उन्होंने कहा कि विकास के साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना जरूरी है। राज्य सरकार वन संरक्षण, जल संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा, पौधारोपण और पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से निरंतर प्रयास कर रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि हिमालयी क्षेत्र में सतत पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है और प्लास्टिक वेस्ट प्रबंधन के लिए डिजिटल डिपॉजिट रिफंड सिस्टम लागू किया गया है, जिससे अब तक 72 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आई है।
उन्होंने कहा कि हिमालय संरक्षण के लिए और व्यापक प्रयास जरूरी हैं। यहां के लोगों की परंपराएं और पारंपरिक ज्ञान प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने का मार्ग दिखाते हैं। जब प्रत्येक व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी समझेगा, तभी हिमालय को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सकेगा।
