शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के दिए निर्देश
देहरादून। विद्यालयी शिक्षा विभाग के विभिन्न कार्यालयों एवं विद्यालयों में लम्बे समय से रिक्त पड़े 2364 चतुर्थ श्रेणी कार्मिकों के पदों पर शीघ्र भर्ती की जायेगी। इन सभी पदों को आउटसोर्स के माध्यम से भरा जायेगा, जिसमें स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी जायेगी। कार्मिकों की शीघ्र तैनाती के लिये विभागीय अधिकारियों भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दे दिये गये हैं।
विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने मीडिया को जारी बयान में बताया कि राज्य सरकार शिक्षा विभाग में बुनियादी ढ़ांचे के साथ ही मानव संसाधन उपलब्ध कराने में जुटी है। इसी कड़ी में सरकार ने विभाग के विभिन्न कार्यालयों व विद्यालयों में सृजित चतुर्थ श्रेणी कार्मिकों के 2364 रिक्त पदों (मृत संवर्ग) को आउटसोर्स के पदों में परिवर्तित करने की मंजूरी दे दी है, जिसका शासनादेश भी जारी कर दिया गया है। जिसके तहत महानिदेशालय कार्यालय, निदेशालय माध्यमिक शिक्षा, प्राथमिक शिक्षा एवं अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण सहित एससीईआरटी, बोर्ड कार्यालय रामनगर, मण्डलीय अपर निदेशक कार्यालय माध्यमिक/प्राथमिक (गढ़वाल व कुमाऊं), समस्त डायट, मुख्य शिक्षा अधिकारी व जिला शिक्षा अधिकारी मध्यमिक व बेसिक कार्यालय में कुल 334 चतुर्थ श्रेणी के पदों को आउटसोर्स में परिवर्तित कर दिया है।
इसी प्रकार 1000 छात्र संख्या से अधिक प्रत्येक इंटर कॉलेज में परिचारक के 2, स्वच्छक/सह चौकीदार के 1 पद को आउटसोर्स के पदों में परिवर्तित किया गया है। जबकि 500 से 1000 छात्र संख्या वाले इंटर कॉलेजों में 1-1 परिचारक व चौकीदार, 500 छात्र संख्या से नीचे इंटर कॉलेजों व हाईस्कूलों में 1-1 चौकीदार के पद आटसोर्स के लिये स्वीकृत किये गये हैं। जबकि ऐसे नवीन उच्चीकृत विद्यालय जिनमें चतुर्थ श्रेणी व स्वच्छक के पद सृजित नहीं है वहां भी चौकीदार का 1 पद आउटसोर्स के तहत स्वीकृत किया गया है। इस प्रकार राजकीय विद्यालयों में चतुर्थ श्रेणी के 2023 पदों को आउटसोर्सिंग के पदों में परिवर्तित कर दिया गया है। विभगाय मंत्री ने बताया कि चतुर्थ श्रेणी के कुल 2364 पदों को शीघ्र ही आउटसोर्स के माध्यम से भरा जायेगा, जिसमें स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी जायेगा। आउटसोर्स से तैनात कार्मिकों को प्रत्येक माह 15,000 रूपये मानदेय दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि चतुर्थ श्रेणी कार्मिकों की नियुक्ति में राज्य में प्रचलित आरक्षण नियमों का पूर्णतः पालन सुनिश्चित किया जायेगा, जिसके निर्देश विभागीय अधिकारियों को दे दिये गये हैं।
आज की तेज़-तर्रार जिंदगी में स्वास्थ्य संबंधी खतरों में लगातार वृद्धि हो रही है। खासकर फेफड़ों की समस्याएं अब युवाओं में भी आम होती जा रही हैं। वायु प्रदूषण, धूम्रपान, संक्रमण और अस्वस्थ जीवनशैली ने फेफड़ों को कमजोर कर दिया है। इसके चलते अस्थमा, फेफड़ों में संक्रमण और पल्मोनरी फाइब्रोसिस जैसी गंभीर बीमारियां बढ़ रही हैं।
हाल के अध्ययनों में विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि पल्मोनरी फाइब्रोसिस का समय पर इलाज न करवाना न केवल फेफड़ों की कार्यक्षमता को प्रभावित करता है, बल्कि आंखों की रोशनी पर भी गंभीर असर डाल सकता है।
पल्मोनरी फाइब्रोसिस क्या है?
पल्मोनरी फाइब्रोसिस एक प्रगतिशील फेफड़ों की बीमारी है, जिसमें फेफड़ों में स्कार्स बनने लगते हैं। दुनिया भर में लगभग 3 से 5 मिलियन लोग इससे प्रभावित हैं। यह रोग आमतौर पर वृद्धों में देखा जाता है, लेकिन अब धीरे-धीरे युवाओं में भी इसके मामले बढ़ रहे हैं।
इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस (IPF) युवाओं में देखने को मिलता है। इस बीमारी का पूर्ण इलाज संभव नहीं है, लेकिन दवाओं और उपचार से जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाई जा सकती है।
फेफड़ों की बीमारी का आंखों पर असर
विशेषज्ञ बताते हैं कि पल्मोनरी फाइब्रोसिस से पीड़ित लोगों में फेफड़ों की कार्यक्षमता कम होने के कारण रक्त में ऑक्सीजन की कमी हो सकती है। ऑक्सीजन की कमी रेटिना और ऑप्टिक नर्व को प्रभावित करती है, जिससे दृष्टि में बदलाव और गंभीर मामलों में अंधापन तक का खतरा बढ़ सकता है।
इसलिए पल्मोनरी फाइब्रोसिस वाले मरीजों के लिए नियमित नेत्र परीक्षण बहुत जरूरी है। समय पर जांच और इलाज से आंखों की जटिलताओं को कम किया जा सकता है।
डॉक्टर क्या कहते हैं?
डॉक्टरों के अनुसार, पल्मोनरी फाइब्रोसिस में धुंधली दृष्टि, दृष्टि में बदलाव या रेटिना की क्षति जैसी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं। शरीर में ऑक्सीजन की कमी से आंखों की रक्त वाहिकाओं पर असर पड़ता है, जिससे आंखों की स्थिति बिगड़ सकती है।
इलाज में आमतौर पर कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स का उपयोग किया जाता है, लेकिन इसका इस्तेमाल मोतियाबिंद का जोखिम भी बढ़ा सकता है। इसलिए डॉक्टर मरीजों को नियमित निगरानी और सावधानी बरतने की सलाह देते हैं।
ब्रिटेन के ऑप्टिकल एक्सप्रेस के निदेशक डॉ. स्टीफन हन्नान कहते हैं कि पल्मोनरी फाइब्रोसिस वाले लोगों को अपनी आंखों की रक्षा के लिए समय-समय पर नेत्र जांच करानी चाहिए। साथ ही ऑक्सीजन स्तर की निगरानी, हाइड्रेशन और डॉक्टर्स की सलाह अनुसार आई ड्रॉप्स का उपयोग भी मददगार साबित होता है।
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पीएनबी में खाते खुलते ही उपनल कर्मियों को मिलेंगी अतिरिक्त बैंकिंग सुविधाएं
देहरादून। उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) में कार्यरत उपनल कर्मचारियों को अब 50 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा कवर मिलेगा। इस सुविधा के लिए उपनल और पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के बीच हुए समझौते के तहत सभी कर्मचारियों के वेतन खाते पीएनबी में खोले जा रहे हैं। बैंक कर्मचारियों को बीमा के साथ-साथ कई अतिरिक्त सुविधाएं भी उपलब्ध कराएगा।
पिछले साल सितंबर में हुए इस अनुबंध के अनुसार, उपनल कर्मचारियों के पीएनबी खाते में वेतन आने पर उन्हें दुर्घटना बीमा समेत विभिन्न लाभ दिए जाएंगे। किसी कर्मचारी की असामयिक मृत्यु होने पर उसके आश्रितों को बीमा की पूरी राशि प्रदान की जाएगी। इसके अलावा, खातेधारक कर्मचारियों को सालाना 40 से 100 तक चेक लीफ नि:शुल्क मिलेंगी। साथ ही, वे सालभर में 2 से 5 आरटीजीएस, एनईएफटी या डिमांड ड्राफ्ट निशुल्क करवा सकेंगे। मकान, वाहन या पर्सनल लोन पर बैंक प्रोसेसिंग शुल्क में 50 प्रतिशत तक की छूट और विशेष ऑफरों के तहत 100 प्रतिशत तक की छूट भी दी जाएगी।
खाते पीएनबी में खुलने के बाद कर्मचारियों को नियमित रूप से माहवार वेतन मिलेगा। हालांकि, अगर लगातार दो महीने से अधिक वेतन अग्रिम दिया गया तो तीसरे माह से कर्मचारी बीमा जैसी सुविधाओं से वंचित हो सकते हैं। वहीं, उपनल के माध्यम से कार्यरत पूर्व सैनिकों को भी पेंशन खाते पीएनबी में स्थानांतरित कराने पर ‘रक्षक प्लस योजना’ के तहत पेंशन बीमा लाभ मिलेगा।
यूपीसीएल के प्रबंध निदेशक अनिल कुमार ने बताया कि उपनल के पत्र के आधार पर यह प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सभी मुख्य अभियंता, महाप्रबंधक, अधीक्षण अभियंता और अधिशासी अभियंताओं को इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई है।
कर्मचारियों का वेतन आधारित श्रेणीकरण:
10,000 से 25,000 रुपये वेतन वाले: सिल्वर-25 श्रेणी
25,001 से 50,000 रुपये वेतन वाले: गोल्ड-50 श्रेणी
50,001 से 1,00,000 रुपये वेतन वाले: प्रीमियम-100 श्रेणी
1,00,001 से 2,00,000 रुपये वेतन वाले: प्लेटिनम-200 श्रेणी
2,00,001 रुपये से अधिक वेतन वाले: टाइटेनियम श्रेणी
सभी श्रेणियों को दुर्घटना बीमा का लाभ मिलेगा, जबकि बैंकिंग सुविधाओं का वितरण वेतन श्रेणी के अनुसार तय किया गया है।
पेनल्टी शूटआउट में 3-2 से मिली जीत, टूर्नामेंट में हासिल किया तीसरा स्थान
नई दिल्ली। भारतीय पुरुष फुटबॉल टीम ने सीएएफए नेशंस कप में शानदार उपलब्धि हासिल की है। टीम इंडिया ने टूर्नामेंट के तीसरे स्थान के लिए खेले गए मुकाबले में ओमान को पेनल्टी शूटआउट में 3-2 से हराकर इतिहास रच दिया। यह पहली बार है जब भारत ने ओमान को अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में पराजित किया।
मैच के नियमित समय में दोनों टीमें 1-1 की बराबरी पर रहीं। ओमान के लिए यहमादी ने गोल किया, जबकि भारत की ओर से उदांता सिंह ने बराबरी दिलाई। निर्णायक पेनल्टी शूटआउट में भारतीय गोलकीपर गुरप्रीत सिंह संधू के शानदार बचाव ने टीम को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
इस मुकाबले में भारत की ओर से लालियनजुआला छांगटे, राहुल भेके और जितिन एमएस ने पेनल्टी को गोल में बदला, जबकि अनवर अली और उदांता अपने प्रयासों में चूक गए। दूसरी ओर, बेहतर रैंकिंग वाली टीम ओमान अपने शुरुआती मौके गंवा बैठी।
भारत के लिए यह जीत ऐतिहासिक है क्योंकि पिछले 25 साल में ओमान के खिलाफ खेले गए नौ मैचों में से छह में उसे हार का सामना करना पड़ा था। दोनों टीमों का पिछला मुकाबला मार्च 2021 में हुआ था, जो 1-1 से ड्रॉ रहा था। इस बार भारतीय खिलाड़ियों ने दबाव के बावजूद शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास बदल दिया।
15 सितंबर से नई दरों पर होगी सेवा
देहरादून। केदारनाथ धाम जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए हेली सेवा से यात्रा अब पहले से महंगी हो गई है। उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) ने हेलिकॉप्टर सेवाओं के किराये में करीब 46 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर दी है। नई दरें 15 सितंबर से लागू होंगी और इसके लिए टिकट बुकिंग 10 सितंबर से आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर शुरू होगी।
इस साल 2 मई से हेली सेवा की शुरुआत हुई थी, लेकिन शुरुआती चरण में उत्तरकाशी और केदार घाटी में हुई दुर्घटनाओं के कारण सेवाएं रोकनी पड़ी थीं। अब दूसरे चरण में 15 सितंबर से सेवाएं नई एसओपी के तहत दोबारा शुरू की जा रही हैं। गृह सचिव शैलेष बगौली की अध्यक्षता में गठित 10 सदस्यीय समिति ने सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए संचालन के दिशा-निर्देश तय किए हैं।
यूकाडा के सीईओ आशीष चौहान के अनुसार, गुप्तकाशी, फाटा और सिरसी से केदारनाथ के लिए चलने वाली हेली सेवाओं में सीटों और शटल उड़ानों की संख्या सीमित होने के चलते किराये में इजाफा किया गया है।
नई किराया दरें (रुपये में):
गुप्तकाशी से केदारनाथ: पहले 8,532 → अब 12,444
फाटा से केदारनाथ: पहले 6,062 → अब 8,842
सिरसी से केदारनाथ: पहले 6,060 → अब 8,839
टाइगर श्रॉफ और संजय दत्त की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘बागी 4’ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। एक्शन से भरपूर इस फिल्म से दर्शकों को बड़ी उम्मीदें थीं। ट्रेलर देखने के बाद ही फिल्म को लेकर चर्चा तेज हो गई थी, लेकिन शुरुआती रिस्पॉन्स उतना दमदार साबित नहीं हुआ, जितनी उम्मीद की जा रही थी। अब नजर डालते हैं फिल्म की बॉक्स ऑफिस कमाई पर—
ओपनिंग कलेक्शन और वीकेंड परफॉर्मेंस
रिलीज के पहले दिन ‘बागी 4’ ने 12 करोड़ रुपये की ओपनिंग की। दूसरे दिन शनिवार को कलेक्शन गिरकर 9.25 करोड़ रुपये रहा। रविवार को थोड़ी बढ़त मिली और फिल्म ने 10 करोड़ का कारोबार किया।
मंडे टेस्ट का हाल
सोमवार को फिल्म का कलेक्शन और गिर गया। चौथे दिन ‘बागी 4’ ने केवल 2.54 करोड़ रुपये की कमाई की। अब तक फिल्म का कुल कलेक्शन 33.79 करोड़ रुपये पहुंचा है। करीब 200 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म के लिए इतनी धीमी रफ्तार चिंता का विषय मानी जा रही है।
फिल्म की स्टारकास्ट और निर्देशन
निर्देशक ए. हर्षा और लेखक साजिद नाडियाडवाला की इस फिल्म में टाइगर श्रॉफ, संजय दत्त, सोनम बाजवा, हरनाज कौर संधू, श्रेयस तलपड़े, सौरभ सचदेवा और उपेंद्र लिमये अहम भूमिकाओं में हैं। संजय दत्त खलनायक के रूप में दर्शकों का ध्यान खींचने में सफल रहे हैं।
‘बागी’ सीरीज का सफर
पहली ‘बागी’ फिल्म साल 2016 में आई थी, इसके बाद 2018 में ‘बागी 2’ और 2020 में ‘बागी 3’ रिलीज हुईं। तीनों फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन किया था। लेकिन शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि ‘बागी 4’ इस सीरीज की सफलता को दोहराने में अभी तक नाकाम नजर आ रही है।
(साभार)
30 सितंबर तक ऑनलाइन आवेदन करने का मौका
नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 10वीं और 12वीं के प्राइवेट छात्रों के लिए परीक्षा पंजीकरण प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह प्रक्रिया आज से शुरू होकर 30 सितंबर तक चलेगी। छात्र बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट www.cbse.nic.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि पंजीकरण और फीस का भुगतान केवल ऑनलाइन माध्यम से ही किया जाएगा। पांच विषयों के लिए आवेदन शुल्क 1600 रुपये तय किया गया है, जबकि एक विषय के लिए 320 रुपये शुल्क लगेगा। अतिरिक्त विषय या प्रैक्टिकल परीक्षा के लिए भी अलग से शुल्क देना होगा। 30 सितंबर तक आवेदन नहीं करने वाले छात्र 3 अक्टूबर से 11 अक्टूबर तक लेट फीस (2000 रुपये) के साथ पंजीकरण करा पाएंगे।
इस पंजीकरण प्रक्रिया में वे छात्र भी शामिल हो सकेंगे, जो 2020 से 2025 तक की बोर्ड परीक्षा में फेल हुए हैं, कंपार्टमेंट में आए हैं या ‘एसेंशियल रिपीट’ श्रेणी में रखे गए हैं। सीबीएसई ने छात्रों को आवेदन करते समय विषय कोड और व्यक्तिगत विवरण भरने में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है, क्योंकि किसी भी गलती का सीधा असर परीक्षा परिणाम पर पड़ सकता है।
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने संभाली कमान, प्रदेशभर में स्वास्थ्य पखवाड़े की तैयारियों की समीक्षा
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एंव स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत के स्पष्ट निर्देशों पर उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितम्बर से लेकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जन्मदिन 2 अक्टूबर तक पूरे प्रदेश में “स्वास्थ्य पखवाड़ा” आयोजित करने की व्यापक तैयारियां तेज कर दी हैं। इसको लेकर स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने राज्य सचिवालय में विभागीय अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार का लक्ष्य आम जनता तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुँचाना है। स्वास्थ्य पखवाड़े के दौरान प्रदेशभर में मेडिकल कॉलेजों, जिला व उप जिला चिकित्सालयों, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों और उप केन्द्रों में नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे। इन शिविरों में मरीजों को जांच, परामर्श और दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। साथ ही जगह-जगह वृहद रक्तदान शिविर भी आयोजित होंगे, जिनमें आम नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और छात्र-छात्राओं को भी सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया जाएगा।
स्वास्थ्य सचिव ने दिए अहम निर्देश
बैठक की अध्यक्षता करते हुए स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एंव स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत के नेतृत्व में प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए लगातार ठोस प्रयास कर रही है। “स्वास्थ्य पखवाड़ा” इसी दिशा में एक बड़ा कदम है, जिसका उद्देश्य न केवल स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ कराना है, बल्कि लोगों को बीमारियों के प्रति जागरूक करना और स्वैच्छिक भागीदारी को बढ़ावा देना भी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि स्वास्थ्य पखवाड़े को सफल बनाने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए और प्रत्येक स्तर पर उसकी मॉनिटरिंग सुनिश्चित हो। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अभियान का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि समाज का हर वर्ग इससे लाभान्वित हो सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि सांसदों, विधायकों, महापौरों, पार्षदों और अन्य जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी इस अभियान में सुनिश्चित की जाए।
प्रदेशभर में लगेंगे 4604 शिविर
बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में कुल 4604 स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाएंगे। इनमें—
अल्मोड़ा – 522
बागेश्वर – 109
चमोली – 206
चम्पावत – 120
देहरादून – 425
हरिद्वार – 367
नैनीताल – 367
पिथौरागढ़ – 679
पौड़ी – 573
रुद्रप्रयाग – 239
टिहरी – 533
ऊधमसिंह नगर– 256
उत्तरकाशी – 208
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि इन शिविरों में गर्भवती महिलाओं, टीबी मरीजों और गंभीर बीमारियों से पीड़ित रोगियों को भी विशेष परामर्श उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही केंद्र व राज्य सरकार द्वारा संचालित सभी स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी लोगों को दी जाएगी।
बैठक में लिए गए प्रमुख निर्णय
1. ब्लड डोनेशन कैंप –
राज्य के प्रत्येक स्वास्थ्य शिविर में वृहद रक्तदान शिविर लगाए जाएंगे। इन शिविरों की फोटोग्राफी और रिपोर्ट शासन को अनिवार्य रूप से भेजी जाएगी, ताकि इसकी निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
2. मेडिकल कॉलेज स्तर पर आयोजन –
सभी मेडिकल कॉलेजों में विशेष रक्तदान शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में मेडिकल छात्रों और चिकित्सकों को भी सक्रिय रूप से जोड़ा जाएगा ताकि युवाओं में स्वैच्छिक रक्तदान की भावना को प्रोत्साहित किया जा सके।
3. हेल्थ डेस्क की स्थापना –
प्रमुख चिकित्सा संस्थानों और जिला अस्पतालों में हेल्थ डेस्क स्थापित किए जाएंगे। यहां आने वाले मरीजों को स्वास्थ्य पखवाड़े से संबंधित जानकारी, सरकारी योजनाओं की जानकारी और नि:शुल्क परामर्श उपलब्ध कराया जाएगा।
4. एसओपी तैयार करना –
स्वास्थ्य विभाग द्वारा शीघ्र ही एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की जाएगी। इसके तहत सभी जिलों और इकाइयों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए जाएंगे, ताकि अभियान के दौरान कोई भ्रम या अव्यवस्था न हो।
5. विशेषज्ञ शिविर –
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) स्तर तक विशेषज्ञ शिविर आयोजित किए जाएंगे। इसमें हृदय रोग, मधुमेह, श्वसन संबंधी रोग, प्रसूति व स्त्री रोग, बाल रोग और अन्य गंभीर बीमारियों के लिए विशेषज्ञ चिकित्सक अपनी सेवाएं देंगे।
6. अन्य विभागों से समन्वय –
अभियान को सफल बनाने के लिए अन्य विभागों को भी शामिल किया जाएगा। उनकी भूमिका और जिम्मेदारियां तय कर दी जाएंगी, ताकि एक समन्वित प्रयास के माध्यम से स्वास्थ्य पखवाड़े का प्रभाव और अधिक बढ़ सके।
7. फूड एवं ड्रग कंट्रोलर विभाग का सहयोग –
फूड सेफ्टी और ड्रग कंट्रोलर विभाग के सहयोग से दवाओं और अन्य आवश्यक सामग्रियों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
8. प्राइवेट मेडिकल व नर्सिंग कॉलेज का सहयोग –
निजी मेडिकल कॉलेजों, नर्सिंग कॉलेजों और निजी स्वास्थ्य संस्थानों को भी इस अभियान में जोड़ा जाएगा। उनके संसाधनों और मानव बल का उपयोग जनहित में किया जाएगा।
9. विशेषज्ञ चिकित्सकों की ड्यूटी –
मेडिकल कॉलेजों के विशेषज्ञ चिकित्सकों को स्वास्थ्य शिविरों में ड्यूटी दी जाएगी। इससे ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के मरीजों को भी विशेषज्ञ परामर्श और उपचार उपलब्ध हो सकेगा।
10. निक्षय मित्र पहल –
जनप्रतिनिधियों को “निक्षय मित्र” बनाने की पहल की जाएगी। इसके तहत वे न केवल शिविरों का हिस्सा बनेंगे, बल्कि लोगों को अधिक से अधिक संख्या में स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने में मदद करेंगे।
अंत में स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एंव स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत के नेतृत्व में उत्तराखंड की स्वास्थ्य सेवाएं दिन-ब-दिन मजबूत हो रही हैं। “स्वास्थ्य पखवाड़ा” प्रदेश की जनता के लिए न केवल स्वास्थ्य सुविधाओं का अवसर है, बल्कि एक जनजागरण अभियान भी साबित होगा, जो समाज को स्वस्थ उत्तराखंड की दिशा में आगे बढ़ाएगा। समीक्षा बैठक में मिशन निदेशक एनएचएम मनुज गोयल, उपसचिव जसबिन्दर कौर, डॉ जेएस चुफाल, डॉ अमित शुक्ला, डॉ कुलदीप मार्तोलिया, डॉ सौरभ सिंह सिंह मौजूद रहे।
काशीपुर प्रबुद्धजन सम्मेलन में बोले सीएम धामी — “विकसित भारत@2047 के अग्रदूत हैं प्रबुद्ध नागरिक”
काशीपुर। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने काशीपुर में आयोजित प्रबुद्धजन सम्मेलन में भाग लिया। उन्होंने समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रबुद्ध नागरिकों से संवाद स्थापित किया और राज्य सरकार की उपलब्धियों व विकास कार्यों की जानकारी दी।
कार्यक्रम में चिकित्सक, इंजीनियर, शिक्षाविद, अधिवक्ता, उद्यमी, व्यापारी, समाजसेवी और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रबुद्धजन प्रधानमंत्री के “विकसित भारत@2047” के संकल्प को साकार करने वाले अग्रदूत हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश “रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म” की नीति के साथ नई ऊंचाइयां छू रहा है। भारत आज विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और स्टार्टअप, डिजिटल इंडिया तथा आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों से वैश्विक स्तर पर पहचान बना रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखंड भी निवेश और औद्योगिक विकास में अग्रणी बन रहा है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में हुए 3.56 लाख करोड़ के निवेश समझौतों में से लगभग 1 लाख करोड़ के प्रस्ताव धरातल पर उतारे जा चुके हैं। राज्य में नई औद्योगिक नीति, स्टार्टअप नीति और मेगा इंडस्ट्रियल पॉलिसी से निवेशकों को बेहतर माहौल मिला है।
उन्होंने स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए “एक जनपद, दो उत्पाद”, “हाउस ऑफ हिमालयाज”, “स्टेट मिलेट मिशन” और नई पर्यटन नीति जैसी योजनाओं का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने समान नागरिक संहिता, नकल विरोधी कानून और अवैध धर्मांतरण व लैंड जिहाद पर कार्रवाई को राज्यहित में ऐतिहासिक निर्णय बताया।
