सिनेमाघरों में एक साथ 6 नई फिल्में रिलीज़ हुई हैं। इनमें से कुछ फिल्मों ने पहले दिन ठीक-ठाक कमाई भी की है, लेकिन मलयालम फिल्म ‘लोका चैप्टर 1’ की रफ्तार पर इसका जरा भी असर नहीं पड़ा। 30 से 40 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने लगातार अच्छे कलेक्शन के दम पर बॉक्स ऑफिस पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। खास बात यह है कि वीकडेज़ में भी फिल्म रोज़ाना 7 करोड़ रुपये से ज्यादा का बिज़नेस कर रही है।
फिल्म की कमाई का ग्राफ
फिल्म ने पहले दिन 2.7 करोड़ रुपये की ओपनिंग ली थी। दूसरे दिन इसका कलेक्शन बढ़कर 4 करोड़ रुपये पहुंचा। वीकेंड पर फिल्म ने शानदार उछाल दर्ज की—शनिवार को 7.6 करोड़ और रविवार को 10.1 करोड़ रुपये कमाए। इसके बाद हफ्तेभर में फिल्म लगातार 7 करोड़ से ऊपर कमाई करती रही। पहले हफ्ते का कुल कारोबार 54.7 करोड़ रुपये रहा।
टोटल कलेक्शन
नौवें दिन तक ‘लोका चैप्टर 1’ का टोटल बॉक्स ऑफिस कलेक्शन 61.09 करोड़ रुपये हो गया है। वहीं, इसी अवधि में रिलीज़ हुई मोहनलाल की फिल्म ‘हृदयपूर्वम’ महज 22.66 करोड़ रुपये तक ही सिमट गई, जबकि दर्शकों की पहली पसंद ‘लोका चैप्टर 1’ बनी रही।
नई फिल्मों के बीच भी कायम है पकड़
कल रिलीज़ हुई ‘द बंगाल फाइल्स’, ‘बागी 4’, ‘द कंज्यूरिंग’, ‘उफ्फ ये सिय्यापा’ और ‘दिल मद्रासी’ जैसी फिल्मों ने पहले दिन ठीक-ठाक बिज़नेस किया। लेकिन इनका असर ‘लोका चैप्टर 1’ की कमाई पर नहीं पड़ा। यह फिल्म लगातार अपने दमदार प्रदर्शन से बॉक्स ऑफिस पर टिके रहने में सफल हो रही है।
फिल्म की कहानी और स्टारकास्ट
‘लोका चैप्टर 1’ में कल्याणी प्रियदर्शन, टोविनो थॉमस, नास्लेन के गफूर और सैंडी अहम किरदार निभा रहे हैं। फिल्म का निर्देशन डोमिनिक अरुण ने किया है, जबकि इसे दुलकर सलमान ने प्रोड्यूस किया है। कहानी एक रहस्यमयी लड़की ‘चंद्रा’ के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने दुश्मनों को सबक सिखाती है।
(साभार)
शाम 7 बजे से रात 1 बजे तक टेलिस्कोप से देख सकेंगे चंद्रग्रहण
देहरादून। झाझरा स्थित उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) 7 सितंबर को आमजन के लिए अद्भुत खगोलीय दृश्य ब्लड मून (पूर्ण चंद्रग्रहण) का अवलोकन कराने जा रहा है। इस अवसर पर शाम 7 बजे से रात 1 बजे तक यूकॉस्ट परिसर में टेलिस्कोप की मदद से लोग चंद्रग्रहण के हर चरण को नजदीक से देख पाएंगे।
यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने कहा कि यह केवल खगोल विज्ञान की घटना नहीं, बल्कि हमारे और ब्रह्मांड के बीच गहरे संबंध को अनुभव करने का अवसर है। इस कार्यक्रम में वैज्ञानिकों के साथ आमजन, परिवार और बच्चे भी शामिल होकर सुरक्षित तरीके से चंद्रग्रहण को समझ और अनुभव कर सकेंगे।
कार्यक्रम के समन्वयक एवं आंचलिक विज्ञान केंद्र देहरादून के प्रभारी डॉ. ओमप्रकाश नौटियाल ने बताया कि पूर्ण चंद्रग्रहण के दौरान चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की छाया में होता है। हालांकि वह अदृश्य नहीं होता, बल्कि पृथ्वी के वायुमंडल से छनकर पहुंचने वाली लाल–नारंगी रोशनी की वजह से लालिमा लिए चमकने लगता है, जिसे ही ब्लड मून कहा जाता है।
उन्होंने बताया कि चंद्रग्रहण को नंगी आंखों से भी देखा जा सकता है। यूकॉस्ट की विशेषज्ञ टीम न केवल इसके वैज्ञानिक पहलुओं की जानकारी देगी बल्कि प्राचीन पौराणिक कथाओं से जुड़े रोचक तथ्यों पर भी प्रकाश डालेगी। मुख्य ग्रहण अवधि रात 9 बजे से 1 बजे तक रहेगी।
डॉ. नौटियाल ने प्रतिभागियों से अनुरोध किया कि वे हल्के गरम कपड़े साथ लाएं और समय से पहुंचकर अच्छी जगह चुनें। यदि कैमरा है तो ट्राइपॉड का उपयोग कर लालिमा लिए चंद्रमा के सुंदर दृश्य को कैद किया जा सकता है। इच्छुक लोग कार्यक्रम में निःशुल्क भाग लेने के लिए यूकॉस्ट की वेबसाइट पर पंजीकरण कर सकते हैं।
वायु सेना प्रमुख बोले—तीनों सेनाओं का समन्वय हमारी सबसे बड़ी ताकत
ओटीए से 155 भारतीय कैडेट बने अधिकारी, विदेशी कैडेटों ने भी पूरा किया प्रशिक्षण
चेन्नई। वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने शनिवार को अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी (ओटीए) में आयोजित पासिंग आउट परेड में भाग लेते हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता और तीनों सेनाओं के बीच हुए असाधारण समन्वय की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन ने वायु सेना, नौसेना और थल सेना के बीच एकजुटता, तालमेल और बेहतर एकीकरण की मिसाल पेश की है।
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने शॉर्ट सर्विस कमीशन से पास आउट हुए युवा अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि जैसे-जैसे आप अपने सैन्य करियर में आगे बढ़ेंगे, आपको इस सहयोग और एकजुटता की भावना को हमेशा आगे बढ़ाना होगा। उन्होंने इस मौके पर प्रशिक्षण पूरा करने वाले कैडेटों की मेहनत और अनुशासन की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना भी की।
गौरतलब है कि इस वर्ष अप्रैल में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया था। इस दौरान पाकिस्तान और पीओजेके में आतंकी ढांचों को सटीक हमलों से ध्वस्त किया गया। पाकिस्तानी सेनाओं के जवाबी प्रयासों को भी भारतीय बलों ने नाकाम कर दिया था।
कार्यक्रम में कुल 130 पुरुष और 25 महिला कैडेट भारतीय सेना के विभिन्न अंगों में कमीशन प्राप्त कर अधिकारी बने। इसके साथ ही 21 विदेशी कैडेटों (जिसमें 12 महिला कैडेट शामिल हैं) ने भी अपना प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया, जो अंतरराष्ट्रीय सहयोग और मित्रता को नई दिशा देता है।
एयर चीफ मार्शल सिंह ने नव-नियुक्त अधिकारियों को संदेश देते हुए कहा—”हमेशा अपनी वर्दी को गर्व से पहनें, नेतृत्व की जिम्मेदारी निभाएं और सबसे पहले एक अच्छे इंसान बनने का प्रयास करें।”
डिले पेमेंट सरचार्ज पर सख्ती, आयोग बोला– सरकार और उपभोक्ता सभी पर समान नियम लागू
देहरादून। प्रदेश के उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (यूआरसीसी) ने यूपीसीएल की पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है, जिससे बिजली महंगी नहीं होगी। यूपीसीएल ने आयोग से 674.77 करोड़ रुपये की कैरिंग कॉस्ट की मांग की थी, जिसे आयोग ने आधारहीन बताते हुए अस्वीकार कर दिया।
आयोग ने स्पष्ट किया कि यूपीसीएल द्वारा जिन मदों पर अतिरिक्त खर्च दर्शाया गया है, उनका कोई औचित्य नहीं है। याचिका में कंपनी ने 129.09 करोड़ रुपये के डिले पेमेंट सरचार्ज (डीपीएस) को टैरिफ से बाहर रखने का आग्रह किया था, लेकिन आयोग ने कहा कि चाहे सरकार हो या उपभोक्ता—सभी पर समान नियम लागू होते हैं। इसलिए डीपीएस को टैरिफ का हिस्सा माना जाएगा।
भविष्य की चुनौतियों की ओर इशारा करते हुए आयोग ने यूपीसीएल के तीन वर्षीय बिजनेस प्लान में लाइन लॉस को लेकर सख्ती दिखाई है। निगम ने 2025-26 में 13.50 प्रतिशत, 2026-27 में 13.21 प्रतिशत और 2027-28 में 12.95 प्रतिशत नुकसान का अनुमान लगाया था, जबकि आयोग ने इन्हें घटाकर क्रमशः 12.75, 12.25 और 11.75 प्रतिशत मंजूर किया है। यानी यूपीसीएल को आने वाले तीन साल में नुकसान को कम कर 11.75 प्रतिशत तक लाना होगा।
आयोग ने यह भी बताया कि पिछले तीन वर्षों में यूपीसीएल का वास्तविक नुकसान तय लक्ष्य से अधिक रहा है। 2021-22 में लक्ष्य 13.75 के मुकाबले 14.70 प्रतिशत, 2022-23 में 13.50 के मुकाबले 16.39 प्रतिशत और 2023-24 में 13.25 के मुकाबले 15.63 प्रतिशत नुकसान दर्ज किया गया।
पांच अगस्त को हुई जनसुनवाई में भी विभिन्न हितधारकों ने इस याचिका का विरोध किया था। आयोग ने माना कि यूपीसीएल की याचिका में कोई नया तथ्य या पुनर्विचार का वैध आधार नहीं है।
2023-24 में नुकसान बना यूपीसीएल के लिए बड़ी चुनौती
शहर प्रतिशत नुकसान
गदरपुर 30.58
जसपुर 27.00
जोशीमठ 53.92
खटीमा 53.00
लक्सर 27.00
लंढौरा 69.40
मंगलौर 47.62
सितारगंज 27.25
बैंक की प्रगति, प्रदर्शन और भविष्य की कार्ययोजना पर हुई चर्चा
देहरादून। सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने उत्तराखंड राज्य सहकारी बैंक, लीड बैंक व अन्य बैंकों के अधिकारियों, प्रबंधकों, महाप्रबंधकों, जिला प्रबंधकों और प्रबंध निदेशक के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में बैंक की प्रगति, प्रदर्शन और भविष्य की कार्ययोजना पर चर्चा हुई।
5,000 खाते और 30 करोड़ डिपॉजिट का लक्ष्य
मंत्री ने निर्देश दिए कि प्रत्येक शाखा कम से कम 5,000 नए खाते खोले और 30 करोड़ रुपये का डिपॉजिट सुनिश्चित करे। लक्ष्यों में लापरवाही बरतने वाले प्रबंधकों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
1 अक्टूबर से ऑनलाइन सदस्यता अभियान
उन्होंने घोषणा की कि 1 अक्टूबर से व्यापक ऑनलाइन सदस्यता अभियान शुरू होगा, जिसमें एक लाख नए सदस्यों को जोड़ा जाएगा।
सामाजिक जिम्मेदारी और योगदान
बैंक को सामाजिक कार्यों में भी योगदान देने के लिए कहा गया, जैसे स्कूल निर्माण और अस्पतालों में एंबुलेंस उपलब्ध कराना।
उत्कृष्ट और कमजोर शाखाओं की समीक्षा
उत्तरकाशी शाखा के प्रबंधक इंद्रजीत सिंह ने बताया कि उनकी शाखा ने 100% एनपीए वसूली कर 36 लाख से अधिक का लाभ कमाया है। काशीपुर शाखा के प्रबंधक मनोज बिष्ट ने भी शाखा के लाभ अर्जित करने की जानकारी दी। वहीं, हरिद्वार, गोपेश्वर, खटीमा और बाजपुर की हानि में चल रही शाखाओं पर नाराजगी जताई गई और सुधार के निर्देश दिए गए।
खर्च और एनपीए नियंत्रण पर फोकस
प्रबंध निदेशक प्रदीप मेहरोत्रा ने खर्चों में कमी, सुरक्षित ऋण वितरण, डिपॉजिट वृद्धि और एनपीए पर नियंत्रण की आवश्यकता बताई।
नई शाखाओं व स्थानांतरण पर निर्णय
मंत्री ने अनुपयुक्त स्थानों पर संचालित शाखाओं के स्थानांतरण के लिए कमेटी बनाने के निर्देश दिए।
सहकारिता को सशक्त बनाने का संकल्प
डॉ. रावत ने कहा कि राज्य सहकारी बैंक को और अधिक सशक्त बनाने के लिए टीम वर्क और समर्पण जरूरी है। उन्होंने देहरादून स्थित बैंक की कॉर्पोरेट शाखा का नाम बदलने की भी बात कही, क्योंकि यह वर्तमान में ‘कॉर्पोरेट’ नाम के अनुरूप कार्य नहीं कर रही।
बैठक में जिला सहकारी बैंक टिहरी एवं हरिद्वार के पूर्व अध्यक्ष सुभाष रमोला व प्रदीप चौधरी, अपर निबंधक ईरा उप्रेती, प्रबंध निदेशक प्रदीप मेहरोत्रा, जीएम आकांक्षा कंडारी व सुरेश नपच्याल, डीजीएम नाबार्ड भूपेंद्र कुमावत सहित सभी जनपदों के शाखा प्रबंधक मौजूद रहे।
आपदा चेतावनी के लिए लगाए गए सायरन 16 किमी तक पहुंचाएंगे आवाज, शहरवासियों को मिलेगा समय पर अलर्ट
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शनिवार को शाम 6 बजे डालनवाला थाने से देहरादून सिटी में लगाए गए 13 आधुनिक लांग रेंज इमरजेंसी सायरन का शुभारंभ करेंगे। इसके बाद शाम 6:30 बजे घंटाघर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री स्मार्ट सिटी के अंतर्गत घंटाघर सौंदर्यीकरण, क्लेक्ट्रेट, कोरोनेशन अस्पताल, गुच्चुपानी व आईएसबीटी में स्थापित 4 हिलांस कैंटीन और बाल भिक्षावृत्ति निवारण कार्यक्रम का लोकार्पण करेंगे।
मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह तैयारियों में जुटा है। शुक्रवार को जिलाधिकारी सविन बंसल और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह ने कार्यक्रम स्थलों का निरीक्षण कर अधिकारियों को व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए।
डीएम ने बताया कि आपातकालीन परिस्थितियों के लिए लगाए गए ये सायरन 8 से 16 किलोमीटर तक की दूरी तक आवाज पहुंचाने में सक्षम हैं। इनका मुख्य उद्देश्य आपदा की स्थिति में लोगों को सचेत करना है। मुख्यमंत्री रिमोट कंट्रोल से सभी 13 सायरनों का एक साथ उद्घाटन करेंगे।
प्रशासन ने लोगों को पहले ही जानकारी दे दी है ताकि सायरन की आवाज सुनकर घबराहट न हो। पहले चरण में 4 स्थानों पर 16 किमी रेंज और 9 स्थानों पर 8 किमी रेंज के सायरन लगाए गए हैं। दूसरे चरण में विकासनगर, डोईवाला, ऋषिकेश और चकराता समेत अन्य क्षेत्रों में भी सायरन लगाए जाएंगे।
घंटाघर कार्यक्रम में मुख्यमंत्री स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत घंटाघर सौंदर्यीकरण का लोकार्पण करेंगे, जिसमें पारंपरिक शैली को बनाए रखते हुए बगीचे, रंगीन फव्वारे और हाई बीम लाइटिंग लगाई गई है।
इसके अलावा, क्लेक्ट्रेट, कोरोनेशन अस्पताल, गुच्चुपानी और आईएसबीटी में आधुनिक हिलांस कैंटीन की शुरुआत होगी, जिन्हें स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से संचालित किया जा रहा है। इन कैंटीनों में हैंडीक्राफ्ट, पहाड़ी उत्पाद और मिलेट व्यंजन उपलब्ध होंगे, जिससे कई लोगों को स्वरोजगार मिला है।
बाल भिक्षावृत्ति निवारण कार्यक्रम के तहत अब तक 56 बच्चों को भीख से मुक्त कर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा गया है। शनिवार को इन सभी योजनाओं को मुख्यमंत्री जनता को समर्पित करेंगे।
इस मौके पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह, मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, अपर जिलाधिकारी केके मिश्रा, सिटी मजिस्ट्रेट प्रत्यूष सिंह सहित कई अधिकारी तैयारियों की निगरानी में जुटे रहे।
अल्मोड़ा जिला पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों ने ली शपथ
अल्मोड़ा। शुक्रवार को अल्मोड़ा जिला पंचायत कार्यालय में नवनिर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्ष हेमा गैडा और जिला पंचायत उपाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह नेगी ने शपथ ग्रहण की। इनके अलावा जनपद में सभी निर्वाचित जिला पंचायत सदस्यों ने भी शपथ ली।
जिला पंचायत कार्यालय में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में जिलाधिकारी आलोक पांडे ने जिला पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके बाद नवनियुक्त जिला पंचायत अध्यक्ष हेमा गैड़ा ने सभी सदस्यों को शपथ ग्रहण कराई।
इस अवसर पर कार्यक्रम की मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में जिला पंचायत की महत्वपूर्ण भूमिका होने वाली है इसलिए नवनिर्वाचित प्रतिनिधि अपने नए दायित्व को पूरी जिम्मेदारी और गंभीरता से निभाएं।
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों को विकास कार्यों के लिए जहां आवश्यक हो वहां उनके पूरे सहयोग और समर्थन का भरोसा दिलाया।
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य ने कहा कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में प्रदेश की जनता ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी का जोर-जोर से समर्थन किया और इसी के चलते प्रदेश के ज्यादातर जनपदों में भाजपा को बड़ी जीत मिली।
इस अवसर पर जागेश्वर विधायक मोहन सिंह महरा, जिला अध्यक्ष महेश नयाल, प्रदेश उपाध्यक्ष कैलाश शर्मा, पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथ चौहान, अल्मोड़ा मेयर अजय वर्मा, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष पार्वती मेहरा, रानीखेत जिला अध्यक्ष घनश्याम भट्ट, जिला पंचायत सदस्य भुवन जोशी, त्रिलोक रावत, नीमा आर्या, हिमानी कुंडू आदि उपस्थित रहे।
10 सेना राइडर्स और 14 नागरिक राइडर्स के साथ यह अभियान शिमला और सुमडो होते हुए लेह तक जाएगा
देहरादून। भारतीय सेना ने आज साहस और रोमांच के प्रतीक स्वरूप ‘सुर्या क्वेस्ट मोटरसाइकिल अभियान’ का शुभारंभ किया। यह अभियान रॉयल एनफील्ड के सहयोग से आयोजित किया गया और इसे लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता, जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, सुर्या कमांड द्वारा ध्वज दिखाकर रवाना किया गया।
इस अभियान में 10 भारतीय सेना के राइडर्स और 14 नागरिक राइडर्स शामिल हैं। ये राइडर्स साहस, एकता और पारस्परिक विश्वास का संदेश लेकर देशभर की यात्रा करेंगे। दल का मार्ग शिमला और सुमडो की सुरम्य घाटियों से होकर लेह तक जाएगा।

भारतीय सेना ने इस पहल के माध्यम से राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने, साहसिक खेलों को बढ़ावा देने और युवाओं में धैर्य, टीमवर्क व सेवा की भावना विकसित करने की प्रतिबद्धता जताई है।
इस अवसर पर मेजर जनरल नवीन महाजन, सेना मेडल, जनरल ऑफिसर कमांडिंग, 14 इन्फैंट्री डिवीजन, ब्रिगेडियर पी.जे. प्रभाकरण, स्टेशन कमांडर क्लेमेंट टाउन, ब्रिगेडियर आर.के. सिंह, ब्रिगेड कमांडर, 14 आर्टी ब्रिगेड, ब्रिगेडियर संदीप मदान सहित कई वरिष्ठ अधिकारी, जेसीओ और सैनिक उपस्थित रहे।
सुर्या क्वेस्ट मोटरसाइकिल अभियान न केवल सेना और राइडर्स की अदम्य भावना का उत्सव है, बल्कि यह भारतीय सेना और राष्ट्र के बीच अटूट बंधन को भी उजागर करता है।
उत्तराखंड के शिक्षा और संस्कृति क्षेत्र में डिजिटल नवाचार को मिलेगा बढ़ावा
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय से हैलो हल्द्वानी 91.2 एफ.एम. सामुदायिक रेडियो मोबाइल एप का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि यह उत्तराखंड के शिक्षा और संस्कृति क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल है। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय ने शिक्षा को दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुँचाने और आधुनिक तकनीक से नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अब सामुदायिक रेडियो हैलो हल्द्वानी एप देश और प्रदेश के प्रत्येक कोने तक पहुँचकर समाज एवं संस्कृति की आवाज़ को और अधिक सशक्त करेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का साधन नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने और आत्मनिर्भरता का आधार है। इसी सोच के तहत प्रदेश के सभी 13 जनपदों में उच्च शिक्षा एवं कौशल विकास केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे युवा न केवल शिक्षा प्राप्त करेंगे, बल्कि रोजगारपरक कौशल भी सीख सकेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब विश्वविद्यालय और कौशल विकास केंद्र मिलकर कार्य करेंगे तो उत्तराखंड के युवा नौकरी खोजने वाले नहीं बल्कि नौकरी देने वाले बनेंगे, और यह प्रयास प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने में राज्य की अहम भूमिका सुनिश्चित करेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने देहरादून में उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय का एक प्रमुख केंद्र स्थिपित करने का निर्णय लिया है। यह केंद्र न केवल शिक्षा एवं प्रशिक्षण का हब होगा, बल्कि शोध, नवाचार और डिजिटल शिक्षा का भी प्रमुख केंद्र बनेगा।
उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी ने विश्वविद्यालय की विभिन्न गतिविधियों से अवगत कराया और आपदा राहत के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष हेतु विश्वविद्यसलय की ओर से 01 लाख 49 हजार का चेक मुख्यमंत्री को प्रदान किया।
इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, महानिदेशक यूकॉस्ट प्रो. दुर्गेश पंत, कुलसचिव उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय श्री खेमराज भट्ट और विश्वविद्यालय के अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।
किडनी स्टोन यानी गुर्दे में पथरी एक गंभीर और बहुत दर्दनाक स्वास्थ्य समस्या है, जो किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है। यह छोटे-छोटे कठोर पत्थर शरीर में मौजूद खनिज और नमक के जमाव से बनते हैं। जब ये स्टोन किडनी से मूत्र मार्ग में प्रवेश करते हैं, तो तेज दर्द और कई अन्य स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकते हैं। अक्सर लोग पेट या पीठ में होने वाले दर्द को सामान्य गैस या अपच समझकर अनदेखा कर देते हैं, लेकिन अगर दर्द लगातार या बहुत तेज हो, तो यह किडनी स्टोन का संकेत हो सकता है।
किडनी स्टोन के प्रमुख कारण:
कम पानी पीना
असंतुलित खान-पान
अनुवांशिक कारण
समय पर पहचान और इलाज बहुत जरूरी है, क्योंकि इसे नजरअंदाज करने पर किडनी को स्थायी नुकसान हो सकता है।
किडनी स्टोन के आम लक्षण
1. पीठ या पेट में तेज दर्द
किडनी स्टोन का सबसे आम लक्षण पीठ के निचले हिस्से या पेट के किनारे में अचानक और तीव्र दर्द होना है। यह दर्द कमर से पेट और जांघों तक फैल सकता है। इतना तेज होता है कि व्यक्ति आराम से बैठ या लेट नहीं पाता।
2. पेशाब में बदलाव
पेशाब का रंग गहरा होना, खून आना, बार-बार पेशाब आना या पेशाब के दौरान जलन होना किडनी स्टोन के संकेत हो सकते हैं।
3. उल्टी और मतली
किडनी में दर्द पाचन तंत्र को भी प्रभावित कर सकता है, जिससे मतली और उल्टी की शिकायत हो सकती है। अक्सर इसे गैस या पेट की समस्या समझ लिया जाता है, लेकिन यह स्टोन का संकेत भी हो सकता है।
बचाव और इलाज
किडनी स्टोन से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका पर्याप्त मात्रा में पानी पीना है—दिन में कम से कम 8-10 गिलास। इसके अलावा, अधिक नमक और ऑक्सालेट (जैसे पालक, चुकंदर) वाले खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें। यदि किसी में ऊपर बताए गए लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। डॉक्टर अल्ट्रासाउंड या एक्स-रे के जरिए स्टोन की पुष्टि कर सही इलाज सुझा सकते हैं।
(साभार)
