पुलिस-प्रशासन अलर्ट मोड़ पर, प्रभावितों को हरसंभव मदद का भरोसा
चमोली। नंदानगर के बैंड बाजार क्षेत्र में भू-धंसाव की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। रविवार रात कुंवर कॉलोनी में नरेंद्र सिंह और गोविंद सिंह के मकान भी धंसकर क्षतिग्रस्त हो गए। अब तक सात भवन पूरी तरह जमींदोज हो चुके हैं, जबकि 16 अन्य भवन खतरे की जद में बताए जा रहे हैं।
प्रभावित क्षेत्र से पानी की निकासी के लिए जल संस्थान और तहसील प्रशासन की टीम ने चार इंच के रबड़ पाइप से लगभग 400 मीटर दूरी तक अस्थायी लाइन डाली है। जल संस्थान के जेई यशपाल नेगी के अनुसार जमीन से करीब दो इंच पानी का रिसाव लगातार हो रहा था, जो अब साफ नज़र आ रहा है।
प्रशासन ने दो बरातघरों को राहत शिविर में तब्दील किया है, हालांकि कई परिवार अपने सामान के साथ वहां टिक नहीं पा रहे। ऐसे में 18 परिवार किराये के मकानों में चले गए हैं। पांच पर्यावरण मित्र राहत शिविर में तैनात किए गए हैं। नायब तहसीलदार राकेश देवली ने बताया कि प्रभावितों को पशुओं के लिए टिन की चादर, तिरपाल और चारा उपलब्ध कराया जा रहा है।
पुलिस-प्रशासन अलर्ट पर
एसपी सर्वेश पंवार और सीओ मदन सिंह बिष्ट ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर लोगों से मुलाकात की। उन्होंने पुलिसकर्मियों को प्रभावित परिवारों की हरसंभव मदद करने और भारी बारिश की स्थिति में लोगों को सतर्क करने के निर्देश दिए।
मुआवजे की घोषणा
थराली विधायक भूपाल राम टम्टा ने भरोसा दिलाया कि नंदानगर के आपदा प्रभावितों को भी थराली की तर्ज पर मुआवजा मिलेगा। इस संबंध में उनकी मुख्यमंत्री से बात हो चुकी है। विधायक ने बताया कि थराली में नौ आपदा प्रभावित परिवारों को 5-5 लाख रुपये की सहायता राशि दी जा चुकी है। नंदानगर के प्रभावित परिवारों को भी इसी तर्ज पर राहत दी जाएगी।
खटीमा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को आईआईटी कानपुर के सहयोग से हेमवती नन्दन बहुगुणा राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, खटीमा में ‘‘साथी केंद्र’’ का शुभारम्भ किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी देश का सामाजिक और आर्थिक विकास उसकी शिक्षा की गुणवत्ता पर निर्भर करता है। इसी उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2020 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से देश की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक स्तर पर सुधार लाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया। उन्होंने कहा कि आज इस नीति के माध्यम से विद्यार्थियों को रोजगारपरक शिक्षा के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करने में भी सहायता मिल रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में देश के समस्त विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और समान अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वर्ष 2023 में साथी प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके माध्यम से, आज आईआईटी और आईआईएससी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के प्रोफेसर ऑनलाइन क्लासेज द्वारा विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवा रहे हैं। आज यह प्रोजेक्ट इंजीनियरिंग, मेडिकल, बैंकिंग, रेलवे और क्लैट जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं के लिए दूरस्थ क्षेत्रों और निर्धन परिवारों के विद्यार्थियों सहित अन्य सभी विद्यार्थियों को मार्गदर्शन प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस केन्द्र में 80 छात्रों को ऑफलाइन कोचिंग और मेंटरिंग की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सुविधा का सीधा लाभ खटीमा और आसपास के ग्रामीण अंचलों के सभी प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं को मिलेगा। उन्होंने कहा कि आज देशभर में 15 लाख से अधिक विद्यार्थी “प्रोजेक्ट साथी” से लाभान्वित हो चुके हैं। हमारे राज्य में भी अब तक लगभग 29 हजार विद्यार्थी इस पहल का हिस्सा बन चुके हैं और पिछले वर्ष 500 से अधिक विद्यार्थियों ने इस प्लेटफॉर्म की मदद से विभिन्न परीक्षाओं में सफलता प्राप्त की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 द्वारा प्रदेश के विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और बिग डेटा जैसे कोर्स संचालित करने की पहल की जा रही है। साइंस सिटी, एस्ट्रो पार्क आदि का निर्माण कर राज्य में वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा देने की दिशा में भी कार्य किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महाविद्यालयों में इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के साथ ही 9 नए महाविद्यालयों की स्थापना की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। “मुख्यमंत्री शोध प्रोत्साहन योजना“ के माध्यम से, राज्य के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में कार्यरत प्राध्यापकों को 18 लाख रुपये तक का शोध अनुदान प्रदान किया जा रहा है। उत्कृष्ट शोध पत्र प्रकाशन हेतु राज्य सरकार द्वारा प्रोत्साहन पुरस्कार भी प्रदान किया जा रहा है।
इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, सांसद अजय भट्ट, नगर पालिका अध्यक्ष रमेश चंद जोशी, दर्जा राज्य मंत्री डॉ. अनिल कपूर डब्बू, सचिव उच्च शिक्षा डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, निदेशक उच्च शिक्षा डॉ. बी. एन. खाली, निदेशक आईआईटी कानपुर मनिंदर अग्रवाल, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मणिकांत मिश्रा, निदेशक उच्च शिक्षा डॉ बी0 एन0 खाली, निदेशक आईआईटी कानपुर मनिंदर अग्रवाल, प्राचार्य डॉ. पंकज कुमार सहित अनेक जनप्रतिनिधि, शिक्षकगण एवं विद्यार्थी मौजूद थे।
इम्फाल। मणिपुर पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए हथियारों की तस्करी में लिप्त चार उग्रवादियों को गिरफ्तार किया है। इनमें से दो उग्रवादी प्रतिबंधित संगठन आरामबाई टेंगोल (एटी) से जुड़े बताए जा रहे हैं। पुलिस ने इनके पास से अत्याधुनिक हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद किया है।
इंफाल पश्चिम जिले में हुई कार्रवाई के दौरान एटी संगठन से जुड़े दो उग्रवादियों को पकड़ा गया। पुलिस के अनुसार आरोपियों की पहचान लैशराम तोंडोम्बा सिंह (27) और तोरंगबाम अमरजीत मैतेई (20) के रूप में हुई है। दोनों थौबल जिले के लामडिंग ममांग लेइकाई के रहने वाले हैं। इनके पास से सात एचके33 राइफलें, दो एम4ए1 कार्बाइन, दो पिस्तौल, 40 मैगजीन और 100 से अधिक कारतूस बरामद किए गए। अदालत ने दोनों आरोपियों को नौ दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है।
पुलिस ने बताया कि कुकी संगठनों ने आरामबाई टेंगोल पर राज्य में जातीय हिंसा को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है।
इसी क्रम में पुलिस ने अलग-अलग अभियानों में पीआरईपीएके (पीआरओ) संगठन के दो और उग्रवादियों को भी गिरफ्तार किया है। ये गिरफ्तारियां इंफाल पूर्व के ताखेल अवांग लेइकाई और इंफाल पश्चिम जिले से की गईं। कार्रवाई के दौरान तीन ग्रेनेड, 53 कारतूस और आईईडी जैसी संदिग्ध सामग्री भी बरामद हुई है।
गौरतलब है कि मई 2023 से मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच जारी जातीय हिंसा में अब तक 260 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोग विस्थापित होकर राहत शिविरों में रह रहे हैं।
आजकल जोड़ो का दर्द केवल बुज़ुर्गों तक सीमित नहीं रह गया है। बदलती लाइफस्टाइल, लंबे समय तक कंप्यूटर या मोबाइल पर काम करना, और असंतुलित खानपान की वजह से युवा भी इस परेशानी का सामना कर रहे हैं। दवाइयाँ अस्थायी राहत तो देती हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं। ऐसे में योग सबसे असरदार उपाय साबित हो सकता है। योगासन न सिर्फ जोड़ों के दर्द को कम करते हैं, बल्कि हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत और लचीला भी बनाते हैं।
अगर आप जोड़ो के दर्द से लंबे समय तक राहत पाना चाहते हैं, तो दवाइयों पर निर्भर होने की बजाय योगासन को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। शुरुआत धीरे-धीरे करें और किसी योग्य योग शिक्षक की मार्गदर्शन में आसनों को सही तरीके से अपनाएं। नियमित अभ्यास से न केवल दर्द कम होगा, बल्कि शरीर चुस्त, सक्रिय और ऊर्जावान भी बनेगा।
आइए जानते हैं 5 योगासन जो जोड़ो के दर्द को कम करने में सबसे प्रभावी हैं:
1. वज्रासन
वज्रासन पाचन सुधारने और सूजन कम करने में मदद करता है। यह आसन घुटनों और पैरों की मांसपेशियों को मजबूत करता है और रक्त संचार बेहतर बनाता है। रोजाना 5–10 मिनट तक अभ्यास करने से जोड़ो की जकड़न कम होती है।
2. त्रिकोणासन
त्रिकोणासन हड्डियों को मजबूत बनाने और शरीर को लचीला रखने में असरदार है। यह कमर, घुटनों और टखनों की मांसपेशियों को सक्रिय करता है। लगातार अभ्यास से जोड़ो में अकड़न कम होती है और हड्डियों की मजबूती बढ़ती है।
3. सेतुबंधासन
सेतुबंधासन कमर और घुटनों के दर्द में राहत देता है। पीठ के बल लेटकर यह आसन नसों में रक्त प्रवाह बढ़ाता है और जोड़ो पर दबाव कम करता है। पुराने घुटनों या कमर के दर्द से छुटकारा पाने में यह बेहद उपयोगी है।
4. भुजंगासन
भुजंगासन पीठ और कमर की मांसपेशियों को मजबूत करता है और दर्द कम करता है। यह आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है और जोड़ो की तकलीफ के साथ-साथ पीठ के दर्द में भी राहत देता है।
5. ताड़ासन
ताड़ासन पूरे शरीर की स्ट्रेचिंग करता है और रक्त संचार को बढ़ाता है। यह आसन हड्डियों पर दबाव कम करता है और शरीर को संतुलित बनाता है। लंबे समय तक खड़े रहने या पैरों में दर्द होने वाले लोगों के लिए यह विशेष रूप से फायदेमंद है।
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भारी बारिश और भूस्खलन की चेतावनी के चलते प्रशासन ने यात्रियों की सुरक्षा के लिए लिया निर्णय
देहरादून। उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश के चलते सरकार ने चारधाम और हेमकुंड साहिब यात्रा को 5 सितंबर 2025 तक स्थगित कर दिया है। गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडेय ने बताया कि प्रदेश में कई स्थानों पर भूस्खलन और मलबा आने से मार्ग बाधित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार इन मार्गों को प्राथमिकता के आधार पर खोल रही है, लेकिन यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को देखते हुए फिलहाल यात्रा स्थगित की गई है। कमिश्नर ने यात्रियों से अपील की है कि वे प्रतिकूल मौसम की स्थिति को देखते हुए यात्रा पर न निकलें और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें।
गढ़वाल कमिश्नर ने यह भी बताया कि मौसम सामान्य होने और मार्ग पूरी तरह सुरक्षित पाए जाने के बाद ही यात्राएं पुनः प्रारम्भ की जाएंगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन द्वारा सड़क मार्गों की निगरानी, सफाई और यात्रियों की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। यात्रियों से अनुरोध किया गया है कि वे धैर्य बनाए रखें और यात्रा संबंधी अद्यतन जानकारी के लिए प्रशासनिक नियंत्रण कक्ष से संपर्क करते रहें।
कुनार और नंगरहार में कई गांव तबाह, राहत कार्य जारी
काबुल। पूर्वी अफगानिस्तान में पाकिस्तान की सीमा के पास आए शक्तिशाली भूकंप ने कई गांवों को तहस-नहस कर दिया है। हादसे में अब तक 620 से अधिक लोगों की मौत और 1,300 से ज्यादा घायल होने की पुष्टि हुई है। बचाव और राहत कार्य जारी हैं और मृतकों तथा घायलों की संख्या बढ़ने की आशंका है।
तालिबान सरकार के प्रवक्ता के अनुसार, कुनार और नंगरहार प्रांतों में भूकंप से भारी नुकसान हुआ है। गृह मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल मतीन कानी ने बताया कि कुनार में 610 लोग मारे गए और 1,300 घायल हुए। नंगरहार में भी दर्जनों लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हुए हैं।
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार भूकंप की तीव्रता 6.0 थी और इसका केंद्र जलालाबाद से 27 किलोमीटर पूर्व-उत्तर-पूर्व में आठ किलोमीटर गहराई में था। विशेषज्ञों के अनुसार, कम गहराई वाले भूकंप अक्सर अधिक नुकसान पहुंचाते हैं।
कुनार आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने कहा कि नूर गुल, सोकी, वातपुर, मनोगी और चापादारे जिलों में कम से कम 250 लोगों की मौत हुई और 500 अन्य घायल हुए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी बताया कि कई गांव पूरी तरह तबाह हो चुके हैं और राहत कार्य जारी है।
जलालाबाद, जो पाकिस्तान की सीमा के पास स्थित एक व्यस्त व्यापारिक शहर है, इस आपदा से गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है। शहर की अधिकांश इमारतें कम ऊँचाई वाली हैं और बाहरी इलाके में मिट्टी और लकड़ी के घर हैं, जो भूकंप में आसानी से क्षतिग्रस्त हो जाते हैं।
इससे पहले, 7 अक्टूबर 2023 को भी 6.3 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसमें तालिबान सरकार के अनुसार लगभग 4,000 लोगों की मौत हुई थी। संयुक्त राष्ट्र ने इस संख्या को लगभग 1,500 बताया था।
शहीद आंदोलनकारियों के आश्रितों को किया सम्मानित
खटीमा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को खटीमा में उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन के दौरान शहीद हुए आन्दोलनकारियों की स्मृति में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।
इस अवसर पर उन्होंने शहीद राज्य आन्दोलनकारियों को श्रद्धा सुमन अर्पित किये और उनके आश्रित्रों तथा राज्य आन्दोलनकारियों को सम्मानित भी किया।
मुख्यमत्री ने कहा कि आज का दिन उत्तराखंड राज्य आन्दोलन के दौरान खटीमा गोलीकांड में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले अमर बलिदानियों भगवान सिंह सिरौला , प्रताप सिंह , रामपाल, सलीम अहमद, गोपीचंद, धर्मानन्द भट्ट और परमजीत सिंह को स्मरण करने का दिन है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का हर नागरिक इन सभी वीर सपूतों का सदैव ऋणी रहेगा। राज्य आन्दोलन के अपने अनुभवों को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कि इस घटना ने लोगों को उत्तराखंड के अधिकारों की लड़ाई को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। हम सभी मिलकर उनके सपनों के उत्तराखंड का निर्माण करें, यही उनके लिए हमारी सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार राज्य आंदोलनकारियों के आदर्शों और उनके सपनों को साकार करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। राज्य आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों के लिए राज्य सरकार की नौकरियों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण लागू किया है। शहीद आंदोलनकारियों के परिवारों के लिए 3 हजार रुपये मासिक पेंशन की सुविधा भी शुरू की है, साथ ही घायल और जेल गए आंदोलनकारियों को 6000 रुपये और सक्रिय आंदोलनकारियों को 4500 रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जा रही है। नए कानून के अंतर्गत चिह्नित आंदोलनकारियों की परित्यक्ता, विधवा और तलाकशुदा पुत्रियों को भी इस आरक्षण का लाभ मिल सकेगा। चिन्हित राज्य आंदोलनकारियों को पहचान पत्र जारी करने के साथ ही 93 आंदोलनकारियों को राजकीय सेवा में सेवायोजित भी किया है। आंदोलनकारियों को सरकारी बसों में निःशुल्क यात्रा की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के आंदोलन में नारी शक्ति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है, उन्होंने आंदोलन में बढ़ चढ़कर भाग लिया। राज्य निर्माण में मातृशक्ति की भूमिका को देखते हुए ही राज्य सरकार ने राज्य की महिलाओं के लिए सरकारी नौकरी में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण लागू किया गया है। राज्य के समग्र विकास के साथ ही प्रदेश के हित में कई ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं। उत्तराखंड ने देश में सबसे पहले “समान नागरिक संहिता” को लागू किया है। देश का सबसे प्रभावी नकल विरोधी कानून लागू किया है, जिसके बाद लगभग 24 हजार से अधिक युवाओं ने सरकारी नौकरियां पाने में सफलता प्राप्त की है।
सरकार देवभूमि उत्तराखंड की डेमोग्राफी को बचाए रखने के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ निरंतर कार्य कर रही है। प्रदेश में सख्त धर्मांतरण विरोधी और दंगा विरोधी कानूनों लागू किया गया है। 7 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया है। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने उपस्थित जनसमुदाय को हिमालय बचाओ अभियान की शपथ भी दिलाई। उन्होंने कहा कि हिमालय के पर्यावरण की रक्षा करना हम सबकी जिम्मेदारी है।
इस अवसर पर सांसद अजय भट्ट, जिला पंचायत अध्यक्ष अजय मौर्य, विधायक भुवन कापड़ी, नगर पालिका अध्यक्ष रमेश चंद जोशी, दर्जा राज्य मंत्री डॉ.अनिल कपूर डब्बू, सुभाष बर्थवाल, फरजाना बेगम, ब्लॉक प्रमुख सरिता राणा, दान सिंह रावत, नंदन सिंह खड़ायत, जीवन सिंह धामी, गोपाल सिंह राणा, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मणिकांत मिश्रा, उपाध्यक्ष जिला विकास प्राधिकरण जय किशन, डीएफओ हिमांशु बागरी, एडीएम पंकज उपाध्याय सहित अनेक जनप्रतिनिधि, राज्य आंदोलनकारी एवं जनता मौजूद थी।
फिल्म ‘परम सुंदरी’ शुक्रवार, 29 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई और ऋतिक रोशन-जूनियर एनटीआर की ‘वॉर 2’ और सुपरस्टार रजनीकांत की ‘कुली’ जैसी बड़ी फिल्मों के बीच अपनी जगह बनाई। रिलीज के शुरुआती तीन दिनों में फिल्म ने दर्शकों से शानदार रिस्पॉन्स हासिल किया है और बॉक्स ऑफिस पर स्थिर शुरुआत की है।
शानदार ओपनिंग और वीकेंड कलेक्शन
जान्हवी कपूर और सिद्धार्थ मल्होत्रा की रोमांटिक जोड़ी दर्शकों को खूब भा रही है। शुक्रवार को ओपनिंग डे पर फिल्म ने 7.25 करोड़ रुपये कमाए, वहीं शनिवार को यह आंकड़ा बढ़कर 9.25 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। रविवार को भी फिल्म ने दर्शकों का प्यार कायम रखा और 8.84 करोड़ रुपये का कलेक्शन दर्ज किया। अब तक का कुल वीकेंड कलेक्शन 25.34 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
सिनेमाघरों में सोमवार से होगी असली परीक्षा
करीब 40-50 करोड़ रुपये की लागत में बनी ‘परम सुंदरी’ की असली परीक्षा सोमवार से शुरू होगी। फिल्म में सिद्धार्थ मल्होत्रा ने परम और जान्हवी कपूर ने सुंदरी का किरदार निभाया है। कहानी उत्तर और दक्षिण भारत की पृष्ठभूमि से जुड़े प्यार की कहानी पर आधारित है।
रिलीज से पहले की तुलना और फिल्म की प्रतिक्रिया
रिलीज से पहले ‘परम सुंदरी’ को ‘चेन्नई एक्सप्रेस’ की तरह माना जा रहा था, लेकिन फिल्म की कहानी खुद में अलग और रोमांटिक रंग लिए हुए है। जान्हवी और सिद्धार्थ के अलावा फिल्म में संजय कपूर, मनजोत सिंह, अभिषेक बनर्जी और इनायत वर्मा जैसे कलाकारों ने भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं।
(साभार)
16 साल की लंबी जद्दोजहद के बाद 50 हजार से अधिक अर्द्धसैनिक बल कर्मियों को मिलेगा स्वास्थ्य लाभ
हल्द्वानी। लंबे इंतजार के बाद कुमाऊं के अर्द्धसैनिक बलों को बड़ी राहत मिलने जा रही है। हल्द्वानी और नैनीताल में जल्द ही सीजीएचएस (केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना) केंद्र शुरू होंगे। इससे क्षेत्र के करीब 50 हजार सेवारत और सेवानिवृत्त जवानों को आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
पिछले 16 वर्षों से पूर्व केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल कार्मिक संगठन इस मांग को लेकर लगातार प्रयासरत था। संगठन की पहल पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने देशभर में 22 नए सीजीएचएस केंद्र खोलने का निर्णय लिया है, जिनमें हल्द्वानी और नैनीताल भी शामिल हैं। इसके लिए 286 नए पद सृजित किए गए हैं।
नैनीताल के अर्द्धसैनिक बल जिलाध्यक्ष और सेनि. डिप्टी कमांडेंट दरवान सिंह बोहरा ने हाल ही में मंत्रालय को पत्र भेजा था, जिस पर 27 अगस्त को सकारात्मक जवाब मिला। मंत्रालय ने बताया कि भवन का निरीक्षण हो चुका है और जल्द ही दोनों जगह सीजीएचएस केंद्र शुरू किए जाएंगे।
नए अस्पताल में चार डॉक्टर और 13 स्टाफ सदस्य तैनात होंगे। यहां सामान्य से लेकर गंभीर रोगों तक का उपचार मिलेगा। जरूरत पड़ने पर मरीजों को सीजीएचएस से संबद्ध बड़े अस्पतालों में रेफर किया जाएगा, जहां कार्डधारकों को कैशलेस और नि:शुल्क उपचार की सुविधा मिलेगी।
सीजीएचएस क्या है?
यह केंद्र सरकार की स्वास्थ्य बीमा योजना है, जिसमें कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और उनके आश्रितों को ओपीडी, इनडोर उपचार, विशेषज्ञ परामर्श, दवाओं की प्रतिपूर्ति और परिवार कल्याण सेवाओं का लाभ मिलता है।
कार्ड शुल्क (एकमुश्त राशि):
सिपाही व हवलदार : ₹30,000
सब इंस्पेक्टर : ₹54,000
इंस्पेक्टर से डिप्टी कमांडेंट : ₹78,000
डिप्टी कमांडेंट से ऊपर अधिकारी : ₹1,20,000
अभी तक कुमाऊं के हजारों जवानों को इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा था। हल्द्वानी और नैनीताल में केंद्र खुलने से पूरे क्षेत्र को राहत मिलेगी। संगठन अब कोशिश कर रहा है कि भविष्य में यह सुविधा दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों तक भी पहुंचाई जा सके।
रेवंत रेड्डी बोले– जनता का धन पिछली सरकार ने लूटा
हैदराबाद। तेलंगाना की महत्वाकांक्षी कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना में हुई अनियमितताओं की जांच अब सीबीआई करेगी। न्यायमूर्ति पिनाकी घोष आयोग की रिपोर्ट पर विधानसभा में हुई लंबी बहस के बाद मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने इसकी आधिकारिक घोषणा की।
विधानसभा में कालेश्वरम परियोजना पर आयोग की रिपोर्ट को लेकर गरमागरम चर्चा हुई। इस दौरान मुख्यमंत्री रेड्डी ने कहा कि परियोजना से जुड़े मामलों में अंतरराज्यीय मुद्दे, कई केंद्रीय एजेंसियां और वित्तीय संस्थान शामिल हैं, इसलिए इसकी जांच सीबीआई को सौंपना जरूरी है।
रेड्डी ने बताया कि राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (एनडीएसए) और न्यायिक आयोग की रिपोर्टों ने भी परियोजना की गहन जांच की आवश्यकता बताई है। रिपोर्ट में डिजाइन, निर्माण और गुणवत्ता नियंत्रण में गंभीर खामियां सामने आई हैं, जिनके चलते मेदिगड्डा बैराज विफल हुआ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना के लिए अब तक 49,835 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है, जिसमें 29,956 करोड़ रुपये ब्याज और 19,879 करोड़ रुपये मूलधन शामिल है। पिछली बीआरएस सरकार ने ऊंची ब्याज दरों पर ऋण लेकर राज्य की वित्तीय स्थिति को कमजोर किया। हालांकि मौजूदा सरकार ने केंद्र से बातचीत कर 26,000 करोड़ रुपये का ऋण पुनर्गठन कराया है।
रेड्डी ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने जानबूझकर बैराज का स्थान बदलकर सार्वजनिक धन की लूट की। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव को परियोजना में हुई अनियमितताओं का सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है।
वहीं, बीआरएस ने इस रिपोर्ट को राजनीतिक साजिश बताते हुए विधानसभा से वॉकआउट कर दिया। पूर्व मंत्री टी. हरीश राव ने आरोप लगाया कि आयोग ने जांच प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया और पार्टी नेताओं को पक्ष रखने का अवसर भी नहीं दिया। उन्होंने कहा कि यह रिपोर्ट पंचायत चुनावों से पहले राजनीतिक फायदे के लिए लाई गई है।
