बिहार एसआईआर विवाद पर भाजपा का पलटवार, कांग्रेस और राहुल गांधी पर संविधान विरोधी रवैये का लगाया आरोप
धर्मेंद्र प्रधान बोले – विपक्ष मुद्दों की बजाय अराजकता फैलाने में जुटा
नई दिल्ली। बिहार एसआईआर मामले पर विपक्ष के चुनाव आयोग मार्च को लेकर भाजपा ने कड़ा जवाब दिया है। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर संविधान विरोधी रवैये का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को बहाना बनाकर झूठ फैलाने और अराजकता पैदा करने की कोशिश कर रहा है।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि एसआईआर देश में पहली बार नहीं हो रहा है, यह पहले भी कई बार हो चुका है। उनके अनुसार, कांग्रेस और विपक्ष जानबूझकर ईवीएम, महाराष्ट्र और हरियाणा चुनावों को लेकर भ्रम फैला रहे हैं ताकि देश में अस्थिरता का माहौल बनाया जा सके। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वे सड़क पर प्रदर्शन करने के बजाय संसद में मुद्दे उठाएं।
प्रधान ने आरोप लगाया कि कांग्रेस बार-बार चुनाव प्रक्रिया पर संदेह पैदा करती है और हार के डर से जनभावनाओं को भड़काती है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरनाक है।
सांसद रविशंकर प्रसाद ने भी राहुल गांधी पर हमला करते हुए कहा कि वह बार-बार आरोप लगाते हैं, लेकिन सबूत पेश नहीं करते। उन्होंने पेगासस, राफेल और अन्य मामलों का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि क्या कभी उन्होंने अपने दावों का प्रमाण दिया है? उनके अनुसार, यह सब केवल चुनावी हार की खीझ है।
पहले आर्थराइटिस (Arthritis) को केवल उम्र बढ़ने के साथ होने वाली समस्या माना जाता था, लेकिन अब यह कम उम्र के लोगों में भी तेजी से बढ़ रही है। सुबह उठते ही जोड़ों में जकड़न, सीढ़ियां चढ़ते समय घुटनों में दर्द, या उंगलियों में सूजन—अगर आप इन लक्षणों को नज़रअंदाज कर रहे हैं, तो यह आर्थराइटिस के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। समय रहते ध्यान न देने पर यह गंभीर समस्या का रूप ले सकती है।
शोध बताते हैं कि महिलाओं में आर्थराइटिस का खतरा पुरुषों की तुलना में कहीं अधिक है। यह केवल उम्र या कैल्शियम की कमी का नतीजा नहीं है, बल्कि हार्मोनल बदलाव, इम्यून सिस्टम की गड़बड़ी और अनहेल्दी लाइफस्टाइल भी इसका बड़ा कारण बन सकते हैं।
महिलाओं में खतरा क्यों ज्यादा?
हार्मोनल बदलाव: अमेरिकन कॉलेज ऑफ रूमेटोलॉजी के अनुसार, एस्ट्रोजन हार्मोन हड्डियों और जोड़ों की सुरक्षा करता है। मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन का स्तर गिरने से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, जिससे आर्थराइटिस का खतरा बढ़ जाता है।
ऑटोइम्यून डिजीज का असर: नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की रिपोर्ट के मुताबिक, रुमेटाइड आर्थराइटिस महिलाओं में पुरुषों से 2-3 गुना ज्यादा पाया जाता है।
गर्भावस्था और वजन: गर्भावस्था के दौरान बढ़ा वजन और पेल्विक हड्डियों पर दबाव आगे चलकर घुटनों और कूल्हों को प्रभावित कर सकता है।
जोखिम क्यों बढ़ रहा है?
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 40 की उम्र के बाद 60% महिलाओं में घुटनों के ऑस्टियोआर्थराइटिस के लक्षण दिखने लगते हैं। भारत में 70% महिलाएं विटामिन डी की कमी से जूझ रही हैं, जो जोड़ों की सेहत को और बिगाड़ देती है।
किन्हें ज्यादा सतर्क रहना चाहिए?
मेनोपॉज के बाद की महिलाएं
गर्भवती या हाल ही में मां बनी महिलाएं
जिनके परिवार में आर्थराइटिस का इतिहास है
मोटापा या अधिक वजन वाली महिलाएं
आर्थराइटिस से बचाव के आसान उपाय
पौष्टिक आहार लें: दूध, दही, पनीर, हरी सब्जियां, ओमेगा-3 फैटी एसिड (मछली, अखरोट, अलसी के बीज) और एंटी-इंफ्लेमेटरी फूड्स (हल्दी, अदरक, लहसुन) का सेवन करें।
नियमित व्यायाम करें: योग, वॉकिंग, साइकिलिंग और तैराकी जोड़ों की लचीलापन बनाए रखते हैं।
वजन नियंत्रित रखें: अधिक वजन घुटनों पर दबाव डालता है, इसे कम करना जरूरी है।
हड्डियों की जांच कराएं: मेनोपॉज के बाद नियमित रूप से डॉक्टर से हड्डियों और जोड़ों की सेहत की जांच कराएं।
थोड़ी सी सतर्कता और सही जीवनशैली अपनाकर महिलाएं न केवल आर्थराइटिस के खतरे को कम कर सकती हैं, बल्कि लंबे समय तक जोड़ों को मजबूत और स्वस्थ भी रख सकती हैं।
(साभार)
महज तीन दिन में खड़ा हुआ नया पुल
गंगोत्री। गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर लिमच्यागाड में आपदा से क्षतिग्रस्त पुल के स्थान पर वैली ब्रिज का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। युद्धस्तर पर कार्य कर तीन दिनों की अल्प अवधि में पुल बना दिए जाने से गंगोत्री मार्ग पर अब डबरानी पुल तक सड़क मार्ग सुचारू हो गया है और इससे आगे क्षतिग्रस्त सड़क का तेजी से पुनर्निर्माण करने की राह भी प्रशस्त हो गई है।
गत दिनों हुई अतिवृष्टि के कारण गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग अनेक स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गया था और गंगनानी से आगे लिमच्यागाड़ पर बना 30 मीटर लंबाई का पुल आपदा के दौरान बह गया। जिसके फलस्वरूप सीमांत टकनौर क्षेत्र की लाइफलाइन कही जाने वाली इस सड़क पर यातायात पूरी तरह से बाधित हो गया था।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा आपदा के तुरंत बाद मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव तथा पुनर्निर्माण कार्यों को युद्धस्तर पर संचालित करने के निर्देश दिए गए थे। मुख्यमंत्री निरंतर इन कार्यों की प्रगति की समीक्षा कर रहे हैं। मुख्यमंत्री की निगरानी व निर्देशन में राज्य व केंद्र सरकार के अनेक विभागों व एजेंसियों द्वारा रेस्क्यू एवं राहत अभियान बेहतर समन्वय और पूरी तेजी के साथ संचालित किया जा रहा है। इसके साथ ही आपदा प्रभावित क्षेत्र में यथाशीघ्र सामान्य स्थिति बहाल करने हेतु दिन रात काम किया जा रहा है। जिसके परिणामस्वरूप आपदा प्रभावित क्षेत्र में संचार सुविधा, बिजली और पेयजल की आपूर्ति को बहाल किया जा चुका है।
भटवाड़ी सहित अन्य जगहों पर क्षतिग्रस्त सड़क को बहाल करने के बाद सीमा सड़क संगठन ने लोनिवि के सहयोग से दिनरात जुट कर लिमच्यागाड मे वैली ब्रिज बनाने का चुनौतीपूर्ण कार्य को पूरा कर लिया है।
गंगोत्री मार्ग पर अब डबरानी पुल तक सड़क संपर्क बहाल हो जाने के फलस्वरूप इससे आगे के हिस्सों में क्षतिग्रस्त सड़क के पुनर्निर्माण का कार्य तेजी से पूरे हो सकेंगे । इससे राहत एवं पुनर्वास कार्यों को और अधिक प्रभावी एवं तीव्र गति से संचालित किया जा सकेगा।
सीएम धामी ने जताया आभार
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुख्यमंत्री आवास में बैंक ऑफ बड़ौदा के प्रतिनिधि मंडल ने भेंट की। इस दौरान बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा उत्तरकाशी जिले के धराली एवं हर्षिल क्षेत्र में आई आपदा के राहत कार्यों के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष में ₹ 1 करोड़ की धनराशि का योगदान दिया। मुख्यमंत्री ने बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा दिए सहयोग के लिए बैंक प्रबंधन का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर अपर सचिव मनमोहन मेंनाली, ऑफ बड़ौदा के जी.एम प्रतीक अग्निहोत्री, डीजीएम एस.पी.एस तोमर , रीजनल हेड अरविंद जोशी मौजूद रहे।
नई दिल्ली में बाबा खड़क सिंह मार्ग पर बने 184 टाइप-7 फ्लैट्स सांसदों को मिलेंगे आधुनिक सुविधाओं के साथ
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज नई दिल्ली स्थित बाबा खड़क सिंह मार्ग पर बने 184 नए टाइप-7 बहुमंजिला फ्लैट्स का उद्घाटन किया। सुबह 10 बजे आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने सिंदूर का पौधा भी लगाया।
यह आधुनिक परिसर सांसदों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है, जहां प्रत्येक फ्लैट लगभग 5,000 वर्ग फुट का है और इसमें कार्यालय व स्टाफ के लिए अलग से स्थान है। परियोजना जीआरआईएचए 3-स्टार रेटिंग, राष्ट्रीय भवन संहिता 2016 और भूकंपरोधी मानकों के अनुरूप है।
परिसर में हरित प्रौद्योगिकी, ऊर्जा संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन और अपशिष्ट प्रबंधन की सुविधाएं शामिल हैं। एल्युमीनियम शटरिंग के साथ मोनोलिथिक कंक्रीट निर्माण तकनीक से यह परियोजना समय पर पूरी हुई। दिव्यांगजनों के अनुकूल डिज़ाइन और सुदृढ़ सुरक्षा तंत्र इसकी विशेषताएं हैं।
सांसदों के लिए अनुकूल आवास की कमी को देखते हुए ऊर्ध्वाधर आवास विकास के रूप में इसे तैयार किया गया है, जिसमें सामुदायिक केंद्र और कर्मचारियों के आवास भी शामिल हैं।
भूस्खलन से सड़क पर 15 फीट ऊंचा मलबे का टीला बना
रुद्रप्रयाग। ऋषिकेश-बदरीनाथ और रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड हाईवे को जोड़ने वाला रैंतोली-जवाड़ी बाईपास भारी भूस्खलन की चपेट में आ गया। जगतोली से करीब एक किलोमीटर आगे पहाड़ी से गिरे टनों मलबे और पेड़-पौधों ने सड़क को पूरी तरह ढक दिया, जिससे दोतरफा यातायात बंद कर दिया गया।
भूस्खलन इतना विशाल था कि सड़क पर 10 से 15 फीट ऊंचा मलबे का टीला बन गया और आशंका है कि करीब 25 से 30 मीटर सड़क को गंभीर क्षति पहुंची है। राहत की बात यह रही कि समय रहते वाहन चालकों ने दोनों ओर 40-50 मीटर पहले ही गाड़ियां रोक दीं, जिससे किसी प्रकार का जानमाल का नुकसान नहीं हुआ।
राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण खंड लोनिवि रुद्रप्रयाग के अधिशासी अभियंता ओंकार पांडे के अनुसार, मलबा हटाने में चार से पांच दिन का समय लग सकता है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि फिलहाल यातायात पूरी तरह से अवरुद्ध है और बहाली कार्य तेज़ी से चल रहा है।
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को रा.प्र. विद्यालय, भोगपुर में राज्य के 13 जिलों के 13 आदर्श संस्कृत ग्रामों का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार भविष्य में इन सभी आदर्श संस्कृत ग्रामों में संस्कृत भवनों के निर्माण के साथ ही राजकीय प्राथमिक संस्कृत विद्यालयों की भी स्थापना करेगी।
मुख्यमंत्री ने देहरादून में भोगपुर गांव, टिहरी गढवाल के मुखेम गांव, उत्तरकाशी के कोटगाँव, रुद्रप्रयाग के बैंजी गांव, चमोली के डिम्मर गांव, पौड़ी गढ़वाल के गोदा गांव, पिथौरागढ के उर्ग गांव, अल्मोड़ा के जैंती पाण्डेकोटा गांव, बागेश्वर के शेरी गांव, चम्पावत के खर्ककार्की गांव, हरिद्वार के नूरपुर पंजनहेडी गांव , नैनीताल के पाण्डे गाँव एवं ऊधमसिंहनगर के नगला तराई गांव को आदर्श संस्कृत ग्रामों के रूप में उनका शुभारंभ किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न संस्कृति ग्रामों के लोगों से वर्चुअल माध्यम से संवाद भी किया।
मुख्यमंत्री ने उत्तरकाशी और पौड़ी में आई आपदा पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार आपदा प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास कार्यों को पूरी संवेदना और तेज गति से करेगी। उन्होंने कहा राज्य सरकार, उत्तराखंड के प्रत्येक जनपद में आदर्श संस्कृत ग्राम की स्थापना कर देववाणी संस्कृत को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य कर रही है। देवभूमि उत्तराखंड सदियों से देववाणी संस्कृत के अध्ययन और शोध का केंद्र रही है।राज्य सरकार का प्रयास है कि देववाणी संस्कृत की पवित्र ज्योति को उत्तराखंड में प्रज्ज्वलित रखा जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा उत्तराखंड पहला राज्य है। जो इस तरह की पहल से देववाणी संस्कृत के संरक्षण एवं संवर्धन पर कार्य कर रहा है। संस्कृत भाषा हमारी संस्कृति, परंपरा, ज्ञान और विज्ञान का मूल आधार है। संस्कृत भाषा के आधार पर ही प्राचीन मानव सभ्यताओं का विकास संभव हो सका है। सनातन संस्कृति में वेदों, ग्रंथों, पुराणों और उपनिषदों की रचना संस्कृत में ही की गई है। संस्कृत भाषा अनादि और अनंत है।
मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए कार्य किया जा रहा है। नई शिक्षा नीति में संस्कृत को आधुनिक और व्यवहारिक भाषा के रूप में स्थापित करने के लिए विशेष प्रयास किए गए हैं। संस्कृत विश्वविद्यालयों को आधुनिक संसाधनों से जोड़ा जा रहा है। संस्कृत साहित्य को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स, ई-संस्कृत शिक्षण प्लेटफॉर्म एवं संस्कृत ऐप्स विकसित किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने लोकसभा की कार्यवाही का अनुवाद संस्कृत भाषा में भी किए जाने की शुरुआत की है।
मुख्यमंत्री ने कहा आदर्श संस्कृत ग्रामों में लोग अपने दैनिक जीवन में संस्कृत का प्रयोग करेंगे जिससे देववाणी पुनः हमारे जीवन में बोलचाल, व्यवहार और संवाद का हिस्सा बन सकेगी। राज्य सरकार प्रदेश के विद्यालयों में संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए विशेष छात्रवृत्ति प्रदान कर रही है। संस्कृत भाषा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को संस्कृत छात्र प्रतिभा सम्मान योजना से सम्मानित किया जा रहा है। संस्कृत के प्रचार – प्रसार के लिए उत्तराखंड संस्कृत अकादमी, हरिद्वार के माध्यम से अखिल भारतीय शोध सम्मेलन, अखिल भारतीय ज्योतिष सम्मेलन, अखिल भारतीय वेद सम्मेलन जैसे विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार ने कई ऐतिहासिक निर्णय भी लिए हैं। देश में सबसे पहले समान नागरिक संहिता को हमारे राज्य में लागू किया गया है। नकल विरोधी कानून लागू होने के बाद लगभग 23 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी मिली है। उत्तराखंड के सांस्कृतिक मूल्यों और डेमोग्राफी को भी संरक्षित रखा जा रहा है। राज्य में ऑपरेशन कालनेमि के माध्यम से सनातन धर्म को बदनाम करने वाले पाखंडियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जा रही है।
कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि संस्कृत भाषा हमारी ऐतिहासिक धरोहर है। उत्तराखंड भारत का पहला राज्य है, जिसने संस्कृत भाषा को अपनी दूसरी आधिकारिक भाषा घोषित किया है। उन्होंने कहा अगले वर्ष से संस्कृत विद्यालयों में एनसीसी, एन.एस.एस का शुभारंभ के साथ ही शिक्षकों की कमी को दूर किया जाएगा। कैबिनेट मंत्री ने संस्कृत विश्वविद्यालय के इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए पूर्व में मुख्यमंत्री द्वारा 75 करोड़ दिए जाने पर भी आभार जताया। उन्होंने कहा कि 13 संस्कृत ग्रामों में संस्कृति भाषा के प्रचार प्रसार के लिए आगे काम किया जाएगा।
इस अवसर पर विधायक बृजभूषण गैरोला, मेयर ऋषिकेश शंभू पासवान, सचिव दीपक कुमार , उत्तराखंड संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दिनेश चंद्र शास्त्री, मधुकेश्वर भट्ट, एवं अन्य लोग मौजूद रहे।
देहरादून – धराली (उत्तरकाशी) आपदा से प्रभावित लोगों की मदद के लिए राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है। रविवार को वायुसेना का एक विमान डोईवाला स्थित जौलीग्रांट एयरपोर्ट से आवश्यक राहत सामग्री लेकर धराली के लिए रवाना हुआ।
विमान में खाने-पीने का सामान, दवाइयाँ, कंबल और अन्य आवश्यक वस्तुएँ भेजी गईं, ताकि प्रभावित ग्रामीणों और फंसे हुए तीर्थयात्रियों को समय पर सहायता पहुंचाई जा सके। प्रशासन के अनुसार, मौसम की चुनौतियों के बावजूद राहत अभियान लगातार जारी है।
वायुसेना और एनडीआरएफ की संयुक्त टीमें दुर्गम इलाकों तक सामग्री पहुंचाने में जुटी हैं। इससे पहले, हेलीकॉप्टर के जरिए कई फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया था। जिला प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि सभी प्रभावित परिवारों को जल्द से जल्द आवश्यक मदद उपलब्ध कराई जाएगी।
कोलेस्ट्रॉल की समस्या अब सिर्फ उम्रदराज लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह युवाओं में भी तेजी से बढ़ रही है। ब्लड टेस्ट में बार-बार कोलेस्ट्रॉल लेवल का बढ़ना हृदय रोग, हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ा सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, नियमित जांच और समय रहते सतर्कता ही इस खतरे से बचा सकती है।
गलत खानपान, फास्ट फूड, व्यायाम की कमी, अधिक वजन और तनाव इसके प्रमुख कारण हैं। जिन लोगों के परिवार में पहले से हार्ट की बीमारी रही है या जो लंबे समय तक बैठे-बैठे काम करते हैं, उनमें खतरा और अधिक बढ़ जाता है।
हाई कोलेस्ट्रॉल के संकेत केवल आंतरिक नहीं होते, बल्कि शरीर के कुछ बाहरी बदलाव भी इसकी ओर इशारा कर सकते हैं। हाथ-पैरों या घुटनों के पास पीले रंग के सख्त उभार (टेंडन जैंथोमाटा) इसका एक मुख्य लक्षण हैं। यह त्वचा के नीचे कोलेस्ट्रॉल का जमाव होता है, जो समय के साथ बड़ा और संवेदनशील हो सकता है। इसी तरह आंखों के आसपास पीले उभार या आइरिस के चारों ओर सफेद-भूरे घेरों (कॉर्नियल आर्कस) पर भी ध्यान देना जरूरी है।
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन और अन्य विशेषज्ञ मानते हैं कि 20 साल की उम्र में भी हाई कोलेस्ट्रॉल के लक्षण दिख सकते हैं, हालांकि 40 के बाद खतरा ज्यादा होता है। ऐसे में अपने जोखिम कारकों और पारिवारिक इतिहास को ध्यान में रखते हुए, डॉक्टर की सलाह पर नियमित ब्लड टेस्ट कराना और समय रहते कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करना बेहद जरूरी है।
भारतीय सिनेमा की कालजयी फिल्म शोले का विशेष प्रीमियर 6 सितंबर 2025 को टोरंटो अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (TIFF) में आयोजित किया जाएगा। यह स्क्रीनिंग टोरंटो के प्रतिष्ठित रॉय थॉमसन हॉल में होगी, जहां 1800 दर्शक एक साथ इस ऐतिहासिक फिल्म का आनंद ले सकेंगे।
सिप्पी फिल्म्स और एक फाउंडेशन के सहयोग से फिल्म को 4K क्वालिटी में पुनर्स्थापित किया गया है, ताकि नई पीढ़ी भी इसे बड़े पर्दे पर अनुभव कर सके। 1975 में रिलीज हुई इस ब्लॉकबस्टर ने उस समय बॉक्स ऑफिस के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए थे और यह अब भी दुनिया भर में 25 करोड़ से अधिक दर्शकों के साथ सबसे ज्यादा देखी जाने वाली भारतीय फिल्म है।
रमेश सिप्पी के निर्देशन में बनी शोले में अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, संजीव कुमार, अमजद खान, जया बच्चन और हेमा मालिनी जैसे दिग्गज कलाकारों ने अभिनय किया। सलीम-जावेद द्वारा लिखी गई इस एक्शन-एडवेंचर फिल्म में वीरू और जय, दो अपराधी, सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी ठाकुर बलदेव सिंह के कहने पर कुख्यात डाकू गब्बर सिंह को पकड़ने निकलते हैं। बसंती और राधा के किरदार हेमा मालिनी और जया बच्चन ने निभाए, जबकि संगीत आरडी बर्मन ने दिया।
