क्या आपने हाल ही में गर्दन के पीछे एक उभरा हुआ हिस्सा महसूस किया है? यह ‘बफेलो हंप’ या ‘कूबड़’ कहलाता है, जो शरीर की गलत मुद्रा, लंबे समय तक झुककर मोबाइल या लैपटॉप देखने, पीठ झुकाकर बैठने और मानसिक तनाव जैसे कारणों से धीरे-धीरे विकसित हो सकता है। हालांकि यह समस्या गंभीर दिख सकती है, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है। नियमित योग अभ्यास के जरिए इसे काफी हद तक ठीक किया जा सकता है। दवाओं या सर्जरी का सहारा लेने से पहले योग का यह प्राकृतिक उपाय जरूर आज़माएं — यह न केवल गर्दन और रीढ़ की संरचना को बेहतर बनाता है, बल्कि मानसिक रूप से भी सुकून देता है।
योगासन जो गर्दन के कूबड़ को दूर करने में मददगार हैं:
1. भुजंगासन (Cobra Pose)
इस आसन में शरीर की आकृति सांप जैसी बनती है। यह रीढ़ की हड्डी को मजबूत और लचीला बनाता है।
पेट के बल लेटें, हथेलियां कंधों के पास रखें और सांस भरते हुए छाती को ऊपर उठाएं। सिर को ऊपर रखते हुए कुछ सेकंड रुकें। यह पीठ और गर्दन की मांसपेशियों का तनाव कम करता है और सही पोस्चर को बढ़ावा देता है।
2. मार्जरी आसन (Cat-Cow Pose)
यह सरल लेकिन प्रभावशाली योगाभ्यास पीठ की लचक बढ़ाने और गर्दन की अकड़न को दूर करने में मदद करता है।
घुटनों और हथेलियों के बल आकर सांस लेते हुए पीठ को नीचे और सिर को ऊपर करें, फिर सांस छोड़ते हुए पीठ को ऊपर और सिर को नीचे झुकाएं। इसे 8-10 बार दोहराएं।
3. वज्रासन में गर्दन घुमाना (Neck Rotation in Vajrasana)
वज्रासन में बैठकर गर्दन को धीरे-धीरे दाएं-बाएं और ऊपर-नीचे घुमाएं। यह आसन गर्दन की जकड़न को दूर करता है, मांसपेशियों को मजबूत बनाता है और ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर करता है।
4. ताड़ासन (Mountain Pose)
शरीर की मुद्रा को सुधारने और संतुलन बनाए रखने में यह आसन बहुत फायदेमंद है।
सीधे खड़े होकर दोनों हाथ ऊपर उठाएं और एड़ियों के बल खड़े हो जाएं। पूरी बॉडी को ऊपर की ओर स्ट्रेच करें। यह रीढ़ और गर्दन की प्राकृतिक सीध को पुनः स्थापित करता है।
5. शवासन में योग निद्रा (Yogic Sleep in Shavasana)
तनाव और थकान को दूर करने के लिए शवासन में योग निद्रा सर्वोत्तम है।
पीठ के बल लेटें, आंखें बंद करें और सांस पर ध्यान केंद्रित करें। यह अभ्यास शरीर को गहराई से आराम देता है, तनाव को कम करता है और पोस्चर सुधारने में सहायक होता है।
निष्कर्ष:
गर्दन के पीछे बनने वाला यह उभार केवल शारीरिक नहीं, बल्कि जीवनशैली से जुड़ी एक चेतावनी भी हो सकता है। योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करके न सिर्फ इससे राहत पाई जा सकती है, बल्कि मानसिक शांति और आत्मविश्वास भी प्राप्त किया जा सकता है।
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जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद चुनाव आयोग ने जारी किया शेड्यूल, 7 अगस्त से होगी प्रक्रिया शुरू
नई दिल्ली। भारत के अगले उपराष्ट्रपति के चुनाव की तारीख तय हो गई है। चुनाव आयोग ने शुक्रवार को घोषणा की कि उपराष्ट्रपति पद के लिए मतदान 9 सितंबर को होगा और इसी दिन नतीजे भी घोषित कर दिए जाएंगे। 7 अगस्त को चुनाव की अधिसूचना जारी होगी और नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 21 अगस्त रखी गई है। वर्तमान में यह पद जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद खाली पड़ा है।
जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जबकि उनके कार्यकाल का अभी दो साल से भी अधिक समय बाकी था। उन्होंने अपने त्यागपत्र में लिखा कि चिकित्सकीय सलाह को ध्यान में रखते हुए वे तत्काल प्रभाव से उपराष्ट्रपति पद छोड़ रहे हैं। उनके इस्तीफे के दो दिन बाद ही निर्वाचन आयोग ने चुनावी प्रक्रिया शुरू कर दी थी।
भारत के संविधान के अनुच्छेद 66(1) के अनुसार, उपराष्ट्रपति का चुनाव लोकसभा और राज्यसभा के निर्वाचित तथा राज्यसभा के मनोनीत सदस्यों द्वारा किया जाता है। मतदान गुप्त होता है और यह एकल संक्रमणीय मत प्रणाली के आधार पर संपन्न होता है। निर्वाचन आयोग इस चुनाव के लिए अद्यतन मतदाता सूची तैयार करता है, जिसमें सभी पात्र सांसदों को वर्णमाला क्रम में सूचीबद्ध किया गया है।
इस बार नए उपराष्ट्रपति को पूरा पांच साल का कार्यकाल मिलेगा, न कि पूर्ववर्ती का शेष कार्यकाल।
राजनीतिक समीकरण की स्थिति:
दोनों सदनों की कुल प्रभावी सदस्य संख्या 782 है और उपराष्ट्रपति बनने के लिए किसी भी उम्मीदवार को 391 मतों की आवश्यकता होगी। इस चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को स्पष्ट बढ़त नजर आ रही है। लोकसभा में राजग को 542 में से 293 सदस्यों का समर्थन प्राप्त है, जबकि राज्यसभा में 129 सदस्यों का समर्थन है। यदि सभी समर्थक सदस्य मतदान करते हैं, तो कुल 422 वोट राजग के पक्ष में हो सकते हैं।
राज्यसभा की पांच सीटें वर्तमान में रिक्त हैं — जिनमें से चार जम्मू-कश्मीर से और एक पंजाब से है, जो आम आदमी पार्टी के नेता संजीव अरोड़ा के इस्तीफे के बाद खाली हुई।
गणेश जोशी ने दिए सख्त निर्देश: कार्यक्रम की सभी तैयारियां समय पर हों पूरी
देहरादून। प्रदेश के कृषि मंत्री गणेश जोशी ने आज गढ़ी कैंट स्थित हरवंश कपूर मेमोरियल हॉल का दौरा कर आगामी 02 अगस्त को आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा लिया। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पीएम किसान सम्मान निधि की 20वीं किश्त के वितरण के उपलक्ष्य में आयोजित किया जाएगा।
निरीक्षण के दौरान मंत्री जोशी ने कार्यक्रम से संबंधित सभी व्यवस्थाएं समय पर पूर्ण करने के निर्देश अधिकारियों को दिए। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी उत्तर प्रदेश के बनारस स्थित बनोली गांव से इस किस्त का वितरण करेंगे, जिसे देशभर में लाइव प्रसारित किया जाएगा।
कृषि मंत्री ने बताया कि देहरादून के गढ़ी कैंट में स्थित हरवंश कपूर मेमोरियल हॉल में राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित होगा, जबकि जिला, ब्लॉक, ग्राम पंचायत स्तर एवं कृषि विज्ञान केंद्रों सहित केंद्रीय कृषि संस्थानों में भी यह कार्यक्रम एक साथ आयोजित किया जाएगा। सभी आयोजन स्थलों को टू-वे वीडियो कनेक्शन से जोड़ा जाएगा, जिससे किसान सीधे प्रधानमंत्री से संवाद भी कर सकेंगे।
मंत्री जोशी ने प्रदेश के किसानों से अपील की कि वे इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेकर अपनी सहभागिता दर्ज कराएं।
इस अवसर पर अपर निदेशक कृषि परमाराम सहित कृषि विभाग के अधिकारी एवं पार्टी कई कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
कॉमेडी और मनोरंजन से भरपूर फिल्म ‘हाउसफुल 5’ अब आपके लिए ओटीटी पर फ्री में उपलब्ध है। 6 जून 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज होने के बाद इस फिल्म ने जबरदस्त कमाई की थी, और अब दर्शकों को इसे देखने के लिए किसी अतिरिक्त शुल्क की जरूरत नहीं है। फिल्म के निर्माताओं ने खुद इसकी घोषणा करते हुए बताया है कि अब यह फिल्म प्राइम वीडियो पर मुफ्त में देखी जा सकती है।
अब फ्री में देखें ‘हाउसफुल 5’
2025 की सबसे चर्चित कॉमेडी फिल्म ‘हाउसफुल 5’ अब ओटीटी प्लेटफॉर्म अमेजन प्राइम वीडियो पर बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के उपलब्ध है। पहले दर्शकों को इसे देखने के लिए ₹349 का किराया देना पड़ता था, लेकिन अब यह फिल्म प्राइम सब्सक्रिप्शन के तहत मुफ्त में देखी जा सकती है। निर्माताओं ने एक प्रमोशनल वीडियो के जरिए यह खबर साझा की, जिसमें फिल्म की स्टारकास्ट ने दर्शकों को यह खुशखबरी दी।
कमाई में रहा मजबूत प्रदर्शन
हालांकि फिल्म को समीक्षकों से मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर इसकी कमाई काफी प्रभावशाली रही। फिल्म ने रिलीज़ के पहले ही दिन ₹24 करोड़ की कमाई की थी और अब तक इसका कलेक्शन ₹183.3 करोड़ पहुंच चुका है। लगभग ₹240 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने थिएटर और ओटीटी राइट्स से करीब ₹90 करोड़ की वसूली की, जिससे लागत निकालने में कामयाब रही।
स्टार कास्ट और निर्देशन
फिल्म का निर्देशन तरुण मनसुखानी ने किया है और इसे साजिद नाडियाडवाला ने प्रोड्यूस किया है। फिल्म में अक्षय कुमार, रितेश देशमुख, अभिषेक बच्चन, संजय दत्त, जैकी श्रॉफ, जैकलीन फर्नांडीज, नाना पाटेकर, और जॉनी लीवर जैसे कई दिग्गज कलाकार नजर आते हैं। दिलचस्प बात यह है कि फिल्म के दो संस्करण बनाए गए हैं, जिनमें अलग-अलग घटनाक्रम और अपराधी दर्शाए गए हैं, और अब ये दोनों वर्जन मुफ्त में देखे जा सकते हैं।
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राज्य की सहमति के बाद जल्द शुरु होगा रेललाइन पर काम
देहरादून। टनकपुर – बागेश्वर रेललाइन पर जल्द काम शुरु हो सकता है। केंद्र सरकार ने इस परियोजना पर काम शुरु करने के लिए राज्य सरकार से औपचारिक तौर पर सहमति देने को कहा है। राज्य सरकार जल्द इस दिशा में अधिकारिक पत्र केंद्र सरकार को भेजने जा रही है।
प्रस्तावित टनकपुर- बागेश्वर रेललाइन को कुमांउ क्षेत्र में रेल नेटवर्क विस्तार की दिशा में गेम चेंजर प्रोजेक्ट के रूप में देखा रहा है। करीब 170 किमी लंबी इस परियोजना के लिए फाइनल सर्वे का काम पूरा हो चुका है। अब अगले चरण में परियोजना पर राज्य सरकार से विचार विमर्श होना है।काम शुरु करने से पहले केंद्र सरकार ने राज्य से औपचारिक सहमति प्रदान करने को कहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सचिव को इस दिशा में शीघ्र औपचारिकताएं पूरी करते हुए कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं। इस तरह टनकपुर – बागेश्वर रेललाइन का धरातल पर उतरने का रास्ता साफ हो रहा है।
कर्णप्रयाग रेल लाइन 2026 तक तैयार होगी
उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में रेल नेटवर्क विकसित करने पर तेजी से काम हो रहा है। इसी क्रम में ऋषिकेश – कर्णप्रयाग रेललाइन पर युद्धस्तर पर काम चल रहा है, सामरिक महत्व की इस परियोजना का काम 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है। इसी तरह टनकपुर – बागेश्वर रेल लाइन बन जाने के बाद, कर्णप्रयाग – बागेश्वर जैसे दो पर्वतीय शहरों को रेल नेटवर्क से जोड़कर, गढ़वाल- कुमांऊ के बीच रेल सम्पर्क स्थापित किया जा सकता है। साथ ही प्रदेश सरकार के अनुरोध पर केंद्र सरकार ऋषिकेश-उत्तरकाशी और देहरादून – सहारनपुर रेलवे लाइनों की डीपीआर भी तैयार कर रही है। 81 किमी लंबी देहरादून –सहारनपुर शाकुंभरी देवी मंदिर के रास्ते से होकर गुजरेगी। यह रेललाइन सहारनपुर से देहरादून के हर्रावाला रेलवे स्टेशन तक बिछेगी। इसमें 11 किमी लंबी सुरंग भी शामिल है।
बागेश्वर – टनकपुर रेललाइन पर काम शुरु करने के लिए समस्त औपचारिकताएं तेजी से पूरी की जा रही है। इसी तरह ऋषिकेश – उत्तरकाशी और देहरादून – सहारनपुर रेलवे लाइनों की भी फाइनल डीपीआर तैयार की जा रही है। केंद्र सरकार उत्तराखंड में रेल नेटवर्क को मजबूत करने में पूरा सहयोग प्रदान कर रही है।
पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड
सीएम धामी ने राकेश देवली की सेवाओं को बताया अनुकरणीय
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री सुरक्षा में तैनात मुख्य सुरक्षा अधिकारी राकेश देवली को उनकी अधिवर्षता आयु पूर्ण कर सेवानिवृत्त होने पर हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई दी हैं।
मुख्यमंत्री ने देवली के दीर्घकालीन सेवाकाल की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपने दायित्वों का अत्यंत निष्ठा, दक्षता और समर्पण भाव से निर्वहन किया। देवली ने मुख्यमंत्री सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है।
मुख्यमंत्री ने उनके उज्जवल भविष्य, उत्तम स्वास्थ्य एवं सुखद पारिवारिक जीवन की मंगलकामनाएं व्यक्त की।
जवाब दो—जांच समिति और डॉक्टर को कारण बताओ नोटिस
सिस्टम की चूक पर जताई नाराज़गी, जिलाधिकारी को सौंपी विस्तृत जांच
न लापरवाही बर्दाश्त होगी, न रिपोर्टिंग में लीपापोती– स्वास्थ्य सचिव
देहरादून/बागेश्वर। उत्तराखंड में एक डेढ़ साल के बच्चे की मौत ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तक को झकझोर दिया है। गढ़वाल-कुमाऊं के ग्वालदम, बैजनाथ, बागेश्वर, अल्मोड़ा और हल्द्वानी तक उस बच्चे को लेकर परिवार दौड़ा लेकिन डॉक्टर उसका जीवन नहीं बचा सके।इस मामले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक्स पर पोस्ट किया, “बागेश्वर में एक मासूम बच्चे की चिकित्सा में लापरवाही से मृत्यु का समाचार अत्यंत पीड़ादायक और दुर्भाग्यपूर्ण है। जैसा कि अभी तक सूचना प्राप्त हुई है, उनसे प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि कतिपय स्तर पर अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा अपने कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही बरती गई है।”
इस दुखद मृत्यु पर प्रदेश सरकार ने संज्ञान तो लिया, लेकिन जांच समिति की रिपोर्ट पर खुद स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने असंतोष जताया है। रिपोर्ट में कई अहम बिंदुओं के गायब रहने पर सचिव ने सख्त नाराज़गी जताते हुए इसे “अपूर्ण व असंतोषजनक” करार दिया है। डॉ. आर राजेश कुमार ने जिलाधिकारी बागेश्वर को विस्तृत और निष्पक्ष जांच का जिम्मा सौंपते हुए यह साफ कर दिया है कि अब लापरवाही की परतें जिलास्तर पर खोली जाएंगी और सच सामने लाया जाएगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले को बेहद गंभीर मानते हुए स्वास्थ्य विभाग को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई गई, जिसने अपनी रिपोर्ट सौंपी। लेकिन सचिव डॉ. राजेश कुमार ने रिपोर्ट की समीक्षा के बाद पाया कि—
मरीज की तत्कालिक हालत का उल्लेख नहीं
परिजनों के बयान गायब
रेफरल से पूर्व की गई चिकित्सा प्रक्रिया अधूरी
चिकित्सकीय निर्णयों का कोई ठोस आधार नहीं
सचिव ने इन कमियों को “तथ्यों की अनदेखी और प्रक्रिया की अवहेलना” बताया है।
जवाब दो— जांच समिति और डॉक्टरों को कारण बताओ नोटिस
स्वास्थ्य सचिव ने रिपोर्ट को अधूरी और एकतरफा मानते हुए तीनों जांच अधिकारियों— डॉ. तपन शर्मा, डॉ. अनुपमा हयांकी और डॉ. प्रमोद जंगपांगी— सहित संबंधित बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अकिंत कुमार को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। सभी से सात दिन में संतोषजनक स्पष्टीकरण मांगा गया है।
अब जिलाधिकारी करेंगे नए सिरे से जांच
प्रकरण की संवेदनशीलता को देखते हुए सचिव ने अब जांच की जिम्मेदारी जिलाधिकारी को सौंपी है। उन्हें निर्देशित किया गया है कि दोषियों की पहचान और प्रक्रियागत खामियों की पूरी पड़ताल करें। साथ ही, राज्य स्तर पर स्वतंत्र उच्च स्तरीय समिति के गठन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
“न लापरवाही बर्दाश्त होगी, न रिपोर्टिंग में लीपापोती” – स्वास्थ्य सचिव
डॉ. राजेश कुमार ने दो टूक कहा कि स्वास्थ्य जैसी संवेदनशील सेवाओं में न तो लापरवाही बर्दाश्त की जाएगी, न ही लीपापोती। उन्होंने स्पष्ट किया कि “अब ज़िम्मेदारी तय की जाएगी और भविष्य के लिए व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और उत्तरदायी बनाया जाएगा।”
बागेश्वर की यह घटना सिर्फ एक बालक की मौत नहीं, बल्कि उस सिस्टम पर तमाचा है जो समय पर जांच, इलाज और जवाबदेही देने में बार-बार नाकाम हो रहा है। स्वास्थ्य सचिव की तल्ख़ प्रतिक्रिया एक संकेत है कि शायद अब विभाग को आईना दिखाने का वक्त आ गया है। सवाल यह भी है कि क्या यही रवैया हर मामले में अपनाया जाएगा… या फिर ये भी एक रिपोर्ट फाइल में दफ़्न होकर रह जाएगी?
देहरादून में गोसदनों की व्यवस्था होगी और मजबूत
देहरादून। जनपद में निराश्रित और बेसहारा गोवंश के संरक्षण हेतु जिला प्रशासन ने ठोस कदम उठाए हैं। जिलाधिकारी सविन बंसल की अध्यक्षता में जिला स्तरीय अनुश्रवण समिति की बैठक आयोजित हुई, जिसमें गोवंश के भरण-पोषण, चिकित्सा और निगरानी व्यवस्था को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश दिए गए।
डीएम ने निर्देश दिए कि गोसदनों में सप्ताह में दो बार पशुओं का हेड काउंट अनिवार्य रूप से कराया जाए, जिसकी जिम्मेदारी स्थानीय पशु चिकित्सकों की होगी। पशु कल्याण बोर्ड द्वारा गोसदनों का रैंडम निरीक्षण भी किया जाएगा।
कालसी ब्लॉक के खेरूवा में 150 पशु क्षमता वाले गोसदन के संचालन हेतु 49.98 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है। इसके अलावा छरबा में 22 लाख और प्रेमनगर (आरकेडिया ग्रांट) में 27.03 लाख रुपये के प्रस्तावों को पूर्व में ही मंजूरी मिल चुकी है।
डीएम ने यह भी निर्देश दिए कि गोसदनों में पशुओं की नियमित स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण और उचित उपचार सुनिश्चित किया जाए। साथ ही पशुओं को संतुलित आहार, स्वच्छ पानी और साफ-सुथरी रहने की व्यवस्था भी अनिवार्य रूप से उपलब्ध हो।
नगर निगम देहरादून द्वारा पंजीकृत गौसदनों में गोवंश टैगिंग पूरी न होने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई और निर्देश दिए कि सभी पशुओं की शत-प्रतिशत टैगिंग कर शीघ्र रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. सतीश जोशी ने अवगत कराया कि जनपद में वर्तमान में 10 पंजीकृत गोसदन कार्यरत हैं—सहसपुर में 4, विकासनगर व डोईवाला में 2-2 और चकराता व धर्मपुर में 1-1।
पशु कल्याण बोर्ड की उप निदेशक डॉ. उर्वशी ने जानकारी दी कि गोसदनों की दैनिक मॉनिटरिंग के लिए एक विशेष ऐप तैयार किया गया है, जिसे जल्द ही लॉन्च किया जाएगा।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, उप नगर आयुक्त संतोष कुमार पांडे, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. सतीश जोशी, पशु कल्याण बोर्ड की उप निदेशक डॉ. उर्वशी सहित अनुश्रवण समिति के सभी सदस्य उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने नव-निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों को मॉडर्न गवर्नेंस, वित्तीय प्रबंधन और तकनीकी शिक्षा देने के दिए निर्देश
देहरादून – मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को सचिवालय में पंचायतीराज विभाग की बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए कि नव-निर्वाचित ग्राम प्रधानों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों एवं जिला पंचायत सदस्यों को आधुनिक तकनीकी, वित्तीय प्रबंधन और शासन प्रणाली पर प्रशिक्षण दिया जाए। उन्होंने कहा कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प को पूर्ण करने की दिशा में सबको समेकित प्रयास करने होंगे। गांवों के विकास से ही प्रदेश और देश का विकास संभव है।
मुख्यमंत्री ने राज्य में ‘एकीकृत पंचायत भवनों’ का निर्माण कराने के निर्देश दिए। इन एकीकृत पंचायत भवनों में ग्राम पंचायत विकास अधिकारी, पटवारी, आशा आदि के लिए एक स्थान पर ही व्यवस्था होगी। इनके वहां एक साथ बैठने के लिए रोस्टर भी बनाया जाए। इससे लोगों को सभी सुविधाएं एक ही स्थान पर मिल जाएंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्राम पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों एवं जिला पंचायतों में बजट नियोजन को और बेहतर बनाया जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी ग्राम पंचायतों का सुनियोजित विकास हो। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि पंचायतीराज विभाग यह भी आकलन करे कि आगामी 15 वर्षों में कितना ग्रामीण क्षेत्र शहरी क्षेत्र में परिवर्तित होगा। यह आकलन राज्य के समग्र विकास की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्राम सभाओं के स्थापना दिवस उत्सव के रूप में मनाए जाने के लिए ग्रामवासियों से संवाद किया जाए। इसके लिए नियमित कैलेंडर बनाया जाए। ग्राम स्तर पर होने वाले मेले, मिलन कार्यक्रम, प्रबुद्धजनों की जयंती एवं अन्य विशेष दिनों में भी यह स्थापना दिवस मनाया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि क्षेत्र एवं जिला पंचायत में समेकित एवं संतुलित विकास किया जाए। इसका ध्यान रखा जाए कि कोई क्षेत्र या व्यक्ति विकास योजनाओं से वंचित न रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचायत स्तर पर सभी योजनाओं की रीयल टाइम मॉनिटरिंग हो। पंचायतों में ई-गवर्नेंस को बढ़ावा दिया जाए। सभी पंचायतों के कार्यों का ऑडिट हो और सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में आम जनता की राय एवं भागीदारी को प्राथमिकता दी जाए। प्रत्येक पंचायत स्तर पर शिकायत दर्ज करने और समाधान का एक निश्चित समयबद्ध ढांचा तैयार किया जाए।
इस अवसर पर अवस्थापना अनुश्रवण परिषद उपाध्यक्ष विश्वास डाबर, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव चंद्रेश कुमार यादव, अपर सचिव बंशीधर तिवारी, निदेशक पंचायती राज सुश्री निधि यादव उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री धामी ने समीक्षा बैठक के दौरान दिए निर्देश, पात्र लाभार्थियों को ही मिलेगा आवास योजना का लाभ
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को सचिवालय में आवास विभाग की बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ई.डब्ल्यू.एस (शहरी) आवासों का लाभ जिन लोगों को दिया गया है, उनका पुनः सत्यापन किया जाए। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि योजना का लाभ सिर्फ पात्र लोगों को ही मिले। गलत तरीके से योजना का लाभ लेने वाले और देने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आगे जो भी आवास आवंटन किए जाएं, यह सुनिश्चित किया जाए कि केवल पात्र लोगों को ही मिले।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के अंतर्गत विभिन्न शहरों के मास्टर प्लान के कार्यों में तेजी लाई जाए। मास्टर प्लान के साथ शहरों की धारण क्षमता का आकलन भी किया जाए। नगर क्षेत्रों में जल संरक्षण के साथ ही वृक्षारोपण पर भी ध्यान दिया जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि शहरी क्षेत्रों में प्राधिकरणों द्वारा पारित नक्शों के अनुरूप ही निर्माण कार्य हों। बिल्डिंग और सोसाइटी निर्माण कार्यों में वाटर हार्वेस्टिंग और ग्रीनरी का भी विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि अतिक्रमण हटाने के लिए सख्ती से कार्य किए जाएं। आमजन की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए आवासों के नक्शे निर्धारित समयावधि में पास किए जाएं।
मुख्यमंत्री ने राज्य के दोनों मंडलों में एक-एक नए शहर विकसित किए जाने की दिशा में तेजी से कार्य करने के निर्देश दिए। इन शहरों को स्प्रिचुअल जोन के साथ क्लब किया जाए। मुख्यमंत्री ने राज्य में आवासीय आवश्यकता का मूल्यांकन करते हुए सभी वर्गों के लिए आवास की मांग का आकलन करने, भविष्य की आवश्यकताओं का अनुमान लगाने एवं उसके अनुरूप ठोस कार्ययोजना विकसित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने शहरों में भूमि का समुचित उपयोग, भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों का आवश्यकता अनुसार पुनर्विकास करने के भी निर्देश दिए।
प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि आवास विकास विभाग 8 गेम चेंजर योजनाओं पर कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य में बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए 191 स्थानों पर पार्किंग निर्माण कार्य किए जा रहे हैं, जिनमें 109 मल्टीलेवल, 10 टनल, 63 सर्फेस और 9 ऑटोमेटेड पार्किंग हैं। 48 पार्किंग के निर्माण कार्य पूरे हो चुके हैं, जबकि 47 पर कार्य गतिमान है।
बैठक में अवस्थापना अनुश्रवण परिषद उपाध्यक्ष विश्वास डाबर, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी सीपीपीजीजी मनोज पंत एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
