मुंबई: बॉलीवुड के चर्चित अभिनेता आशुतोष राणा, जो अपनी दमदार अदाकारी और विलेन के किरदारों के लिए जाने जाते हैं, इन दिनों मंच पर रावण का रूप धरकर दर्शकों को मोहित कर रहे हैं। नाटक ‘हमारे राम’ में रावण की भूमिका निभा रहे आशुतोष राणा इस नाटक को केवल एक प्रस्तुति नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव मानते हैं।
आशुतोष राणा ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, “अगर हम भगवान राम की इस कथा को अपने जीवन में उतार लें, तो जीवन की सारी समस्याएं समाप्त हो सकती हैं। राम किसी को मारने के लिए नहीं, बल्कि तारने के लिए इस धरती पर अवतरित हुए थे। यह नाटक सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि एक आत्मिक यात्रा है।”
14 महीनों में 261 शो, अब दुबई में प्रस्तुति की तैयारी
आशुतोष राणा ने यह भी बताया कि महज 14 महीनों में नाटक ‘हमारे राम’ का 261वां शो जयपुर में किया गया, और अब तक यह नाटक देश के 15 राज्यों में मंचित हो चुका है। उन्होंने कहा, “हमारे लिए यह गर्व का विषय है कि दर्शक इसे दो, तीन और यहां तक कि चार बार देखने आ रहे हैं। इससे बड़ा कलाकार के लिए क्या आशीर्वाद हो सकता है?”राणा ने कहा कि एक अभिनेता के तौर पर रावण का किरदार निभाना हमेशा से उनकी चाह रही है, और इस मंचीय प्रस्तुति ने उन्हें वह अवसर दिया।
‘हमारे राम’ की स्टारकास्ट और राणा का अगला फिल्मी सफर
‘हमारे राम’ में आशुतोष राणा के साथ अभिनेता राहुल भुचर, दानिश अख्तर, तरुण खन्ना, हरलीन कौर और करण शर्मा भी प्रमुख भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं। आशुतोष राणा का फिल्मी करियर भी लगातार सक्रिय है। वे ‘पठान’, ‘वॉर’, ‘हम्प्टी शर्मा की दुल्हनिया’, ‘धड़क’, ‘सिम्बा’ और ‘राज’ जैसी चर्चित फिल्मों में अपनी अदाकारी का लोहा मनवा चुके हैं। आने वाले समय में वे अयान मुखर्जी की एक्शन थ्रिलर ‘वॉर 2’ में ऋतिक रोशन और जूनियर एनटीआर के साथ नजर आएंगे। इसके अलावा वह फिल्म ‘हीर एक्सप्रेस’ में भी दिखाई देंगे, जो 8 अगस्त को रिलीज़ हो रही है।
नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) ने शुक्रवार को विपक्षी दलों के INDIA गठबंधन से औपचारिक रूप से अलग होने का ऐलान कर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। पार्टी ने स्पष्ट किया कि वह अब इस गठबंधन का हिस्सा नहीं है और कांग्रेस की भूमिका पर सीधा सवाल खड़ा किया है।
AAP दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने बयान में कहा, “हमारा सभी विपक्षी दलों से समन्वय है, चाहे वह तृणमूल कांग्रेस हो या समाजवादी पार्टी। लेकिन हम अब कांग्रेस के नेतृत्व वाले INDIA गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं।” उन्होंने हेमंत सोरेन और एमके स्टालिन की पार्टियों के साथ अच्छे संबंधों का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर नेतृत्व को लेकर निशाना साधा।
AAP की इस घोषणा पर कांग्रेस ने भी तीखा पलटवार किया है। कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने AAP की मंशा पर सवाल खड़े करते हुए कहा, “हमने पहले ही संदेह जताया था कि AAP की नीयत गठबंधन को लेकर स्पष्ट नहीं है। वे केवल राजनीतिक सुविधा के लिए INDIA गठबंधन में शामिल हुए थे। उनका असली मकसद सत्ता भोगना है और वे वही करते हैं जो भाजपा चाहती है।”
संदीप दीक्षित ने AAP पर ‘लक्ष्मी जी की सेवा’ करने और नैतिक राजनीति से भटकने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी विपक्ष की एकजुटता के बजाय सिर्फ व्यक्तिगत और राजनीतिक लाभ के लिए काम कर रही है।
AAP और कांग्रेस के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव अब खुलकर सामने आ गया है, जिससे आगामी चुनावी समीकरणों पर भी असर पड़ सकता है।
देहरादून: उत्तराखंड में मॉनसून एक बार फिर रौद्र रूप में नजर आ रहा है। राज्य के पर्वतीय जिलों में रविवार और सोमवार को भारी से भारी वर्षा की चेतावनी जारी की गई है। मौसम विज्ञान केंद्र ने नैनीताल, चंपावत, ऊधमसिंह नगर और पौड़ी जिलों के कुछ हिस्सों के लिए ऑरेंज अलर्ट और देहरादून, टिहरी, बागेश्वर, पिथौरागढ़, हरिद्वार, उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग और अल्मोड़ा के लिए येलो अलर्ट जारी किया है।
पूर्वानुमान के अनुसार, इन क्षेत्रों में तेज बिजली चमकने और 40–50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी संभावना है। मौसम विभाग ने आगामी कुछ दिनों में भी भारी बारिश को लेकर सावधानी बरतने की अपील की है।
भारी बारिश के चलते प्रदेश में कई क्षेत्रों में भूस्खलन और मलबा गिरने की घटनाएं सामने आई हैं। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेशभर में 39 सड़कें बाधित हैं, जिनमें से 34 सड़कें ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ी हैं। प्रशासन द्वारा लगातार सड़कों को खोलने का कार्य युद्धस्तर पर किया जा रहा है, लेकिन लगातार बारिश राहत कार्यों में बाधा बन रही है।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि अनावश्यक यात्रा से बचें और पहाड़ी क्षेत्रों में अत्यधिक सतर्कता बरतें। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमों को अलर्ट मोड पर रखा गया है।
उत्तरकाशी: इस बार के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों को अपने मताधिकार से वंचित रहना पड़ेगा। निर्वाचन आयोग की ओर से पंचायत चुनाव के दौरान मतदान ड्यूटी में लगे कर्मचारियों को वोट देने की अनुमति देने संबंधी कोई गाइडलाइन जारी नहीं की गई है, जिससे शिक्षक संघ और अन्य कर्मचारी संगठनों में नाराजगी है।
उत्तरकाशी जिले में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारियों के तहत 3395 कर्मचारियों की ड्यूटी विभिन्न मतदान केंद्रों पर लगाई गई है। इसके अतिरिक्त 20 जोनल मजिस्ट्रेट, 76 सेक्टर मजिस्ट्रेट और 50 प्रभारी अधिकारी भी चुनावी प्रक्रिया के संचालन के लिए नियुक्त किए गए हैं। लेकिन इन सभी कर्मचारियों को अपने मत का प्रयोग करने का अवसर नहीं मिलेगा।
राजकीय शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष अतोल महर ने इस पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि लोकसभा, विधानसभा और नगर निकाय चुनावों में चुनाव ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों के लिए पोस्टल बैलेट की व्यवस्था की जाती है, लेकिन पंचायत चुनाव में इस प्रकार की कोई भी प्रक्रिया नहीं अपनाई गई।
उन्होंने कहा, “अधिकांश कर्मचारी ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं, जहां उनका नाम वोटर लिस्ट में दर्ज है। यदि वे अपने मत का प्रयोग नहीं कर पा रहे हैं, तो न सिर्फ उनके अधिकार का हनन हो रहा है, बल्कि संबंधित ग्राम पंचायतों के मतदान प्रतिशत पर भी असर पड़ेगा।”
शिक्षक संघ और अन्य कर्मचारी संगठनों ने मांग की है कि भविष्य में पंचायत चुनाव के दौरान भी अन्य चुनावों की तरह पोस्टल बैलेट या वैकल्पिक मतदान व्यवस्था लागू की जाए, ताकि कर्मचारी अपने लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित न रहें।
इस संबंध में पूछे जाने पर मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) एस.एल. सेमवाल ने स्पष्ट किया कि निर्वाचन आयोग की ओर से पंचायत चुनावों के लिए मतदानकर्मियों के मताधिकार के प्रयोग हेतु कोई दिशा-निर्देश नहीं जारी किए गए हैं।
हालांकि इस मुद्दे ने राज्यभर में चर्चा को जन्म दे दिया है और संभावना है कि यह विषय आगामी पंचायत चुनावों में नीति निर्धारण का हिस्सा बन सकता है।
देहरादून- इस मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह का स्वागत करते हुए कहा कि हम उत्तराखंड ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट में एक लाख करोड़ रूपए से अधिक की सफलतापूर्वक ग्राउंडिंग का उत्सव मना रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्सव केवल आर्थिक निवेश नहीं, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध संभावनाओं, उद्यमिता की भावना और जन भागीदारी पर आधारित समावेशी विकास का प्रतिबिंब है, जो राज्य को आत्मनिर्भरता और औद्योगिक समृद्धि की नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा। 1342 करोड़ रुपए से अधिक की लागत की विभिन्न महत्वपूर्ण परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्लोबल इनवेस्टर्स समिट 2023 के अंतर्गत 3.56 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश समझौतों में से 1 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने में सफलता प्राप्त हुई है। उत्तराखंड निवेश, नवाचार और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहा है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के प्रधानमंत्री के संकल्प को साकार करने के लिए देश में योजनाबद्ध तरीके से कार्य किये जा रहे हैं। भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित हो चुका है। ’’वोकल फॉर लोकल’’, ’’मेक इन इंडिया’’, ’’स्किल इंडिया’’ और ’’स्टार्टअप इंडिया’’ जैसी पहलों के माध्यम से देश आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम वाला देश बन गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में औद्योगिक विकास की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। राज्य में औद्योगिक नीति, लॉजिस्टिक नीति, स्टार्टअप नीति, एमएसएमई नीति सहित 30 से अधिक नीतियों को लागू कर राज्य में उद्योगों को बेहतर माहौल उपलब्ध कराया जा रहा है। स्टार्टअप के लिए 200 करोड़ रुपए के वेंचर फंड की स्थापना की गई है। राज्य में निवेश प्रोत्साहन के लिये ’’निवेश मित्र’’ की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। काशीपुर में अरोमा पार्क, सितारगंज में प्लास्टिक पार्क, काशीपुर में इलैक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग क्लस्टर, पंतनगर में मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक पार्क की स्थापना की है। करीब 13 सौ करोड़ रूपए की लागत से खुरपिया में स्थापित होने वाली इंडस्ट्रियल स्मार्ट सिटी भी उत्तराखंड के औद्योगिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में उत्तराखंड को एचीवर्स तथा स्टार्टअप रैंकिंग में लीडर्स की श्रेणी प्राप्त हुई है। प्रदेश में 260 से अधिक व्यावसायिक सेवाओं में ऑनलाइन सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा कि उत्तराखंड निवेशकों के मध्य, विश्वसनीय, प्रतिस्पर्धात्मक और भविष्य के लिए तैयार गंतव्य के रूप में अपनी जगह बनाने में कामयाब रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य निवेशकों को शांतिप्रिय वातावरण के साथ ही कुशल प्रशासन के जरिए हर संभव सहयोग देने के लिए तैयार है।
इस मौके पर पतंजलि समूह के संस्थापक बाबा रामदेव ने कहा कि उत्तराखंड राज्य भारत माता का मुकुट है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रकृति और पर्यावरण के साथ आगे बढ़ने का प्रयास कर रही है। उत्तराखंड ने वेलनेस की र्स्वश्रेष्ठ नीति घोषित की है। राज्य सौर ऊर्जा, हाइड्रो पावर के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है। बाबा रामदेव ने समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए भी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की प्रशंसा की।
यूपीईएस शिक्षण संस्थान के अध्यक्ष डॉ सुनील राय ने कहा कि उत्तराखंड के ज्यादातर शिक्षण संस्थान, किसी ना किसी संस्था से मान्यता प्राप्त हैं, इससे यहां शिक्षण की गुणवत्ता का पता चलता है। उन्होंने कहा कि उनका संस्थान, उत्तराखंड सरकार के साथ मिलकर राज्य के विकास में योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में अब कनेक्टिविटी काफी सुधर गई है, इससे यहां निवेश के अवसर और भी लाभप्रद हो जाते हैं। राज्य में 10 से अधिक रिसर्च संस्थान होने से भी, शिक्षण संस्थानों को इसका फायदा मिलता है।
नैनी पेपर्स के प्रबंध निदेशक पवन अग्रवाल ने कहा कि उनकी कंपनी अपना नया अत्याधुनिक प्लांट से उत्पादन शुरु कर चुकी है, जिससे 300 नए रोजगारों का सृजन हुआ है। उन्होंने कहा कि वो गन्ने की खोई से कागज बना रहे हैं, साथ ही प्लांट में इस्तेमाल होने वाली लकड़ी भी शत प्रतिशत कृषि उपज है। कृषि उपज के रूप में पेड़ उगाने से ना सिर्फ पर्यावरण को फायदा पहुंच रहा है, बल्कि किसानों की भी आय बढ़ रही है।
समारोह में विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी, केंद्रीय मंत्री अजय टम्टा, सांसद अजय भट्ट, महेंद्र भट्ट, विधायक शिव अरोड़ा, पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक सहित राज्य सरकार के कई मंत्री और विधायक उपस्थित हुए। इससे पहले सांस्कृतिक टीमों ने मंगलगान के जरिए अतिथियों का स्वागत किया। इस मौके पर गृह मंत्री ने विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण शिलान्यास करने के साथ ही प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।
केन्द्रीय गृह मंत्री द्वारा कुल 1342.84 करोड़ रूपये की योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया जिसमें 1263.5 करोड़ के 16 योजनाओं का शिलान्यास और 79.34 करोड़ की 04 योजनाओं का लोकार्पण किया गया।
लोकार्पण
01. उत्तराखण्ड गृह विभाग जिला कारागार पिथौरागढ़ (लागत रू0 34.49 करोड़)
02. तकनीकी शिक्षा विभाग जनपद चम्पावत के अन्तर्गत राजकीय पॉलीटेक्निक चम्पावत का भवन (लागत रू0 18.00 करोड़)
03. तकनीकी शिक्षा विभाग उत्तराखण्ड जनपद चम्पावत के अन्तर्गत राजकीय पॉलीटेक्निक टनकपुर का भवन (लागत रू0 16.00 करोड़)
04. उत्तराखण्ड गृह विभाग उत्तराखण्ड के अन्तर्गत पुलिस विभाग के आवासीय भवनों (लागत रू0 10.85 करोड़)
शिलान्यास
01. उत्तराखण्ड शहरी विकास विभाग केन्द्रपोषित योजना के अन्तर्गत हल्द्वानी नगर में प्रशासनिक भवन सहित बस टर्मिनल सम्बन्धित विकास कार्य (लागत रू0 378.35 करोड़)
02. उत्तराखण्ड शहरी विकास विभाग केन्द्रपोषित योजना के अन्तर्गत हल्द्वानी नगर में वर्षाजल प्रबन्धन प्रणाली एवं सड़क निर्माण सम्बन्धित विकास कार्य (लागत रू0 217.82 करोड़)
03. उत्तराखण्ड शहरी विकास विभाग केन्द्रपोषित योजना के अन्तर्गत टनकपुर नगर क्षेत्रान्तर्गत पेयजल आपूर्ति प्रणाली सम्बन्धित विकास कार्य (लागत रू0 171.54 करोड़)
04. महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास निगम उत्तराखण्ड जनपद-ऊधमसिंह नगर में केन्द्र पोषित योजना के अन्तर्गत काम काजी महिला छात्रावास (लागत रू0 126.00 करोड़)
05. उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय, हर्रावाला देहरादून परिसर में राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की स्थापना (लागत रू0 71.58 करोड़)
06. उत्तराखण्ड गृह विभाग 31वीं वाहिनी पीएसी रूद्रपुर जनपद-ऊधमसिंह नगर के अन्तर्गत टाईप-2 के 108 आवासों (लागत रू0 47.79 करोड़)
07. उच्च शिक्षा विभाग उत्तराखण्ड केन्द्र पोषित योजना PM-USHA (MERU) के अन्तर्गत कुमाऊँ विश्वविद्यालय नैनीताल में विभिन्न विभागों के आधुनिकीकरण जीर्णोद्वार, उच्चीकरण एवं अन्य सुविधाओं आदि के निर्माण (लागत रू0 45.68 करोड़)
08. उत्तराखण्ड आवास विभाग जनपद-नैनीताल के अन्तर्गत मेट्रो पोल होटल परिसर (शत्रु सम्पति) में सरफेस पार्किंग (लागत रू0 42.77 करोड़)
09. उत्तराखण्ड गृह विभाग 40वीं वाहिनी पीएसी हरिद्वार के अन्तर्गत टाईप-2 के 108 आवासों (लागत रू0 42.66 करोड़)
10. उत्तराखण्ड गृह विभाग उत्तराखण्ड के अन्तर्गत पुलिस विभाग के आवासीय भवनों (लागत रू0 35.66 करोड़)
11. उत्तराखण्ड गृह विभाग उत्तराखण्ड के अन्तर्गत पुलिस विभाग के अनावासीय भवनों (लागत रू0 26.52 करोड़)
12. उत्तराखण्ड गृह विभाग उत्तराखण्ड के अन्तर्गत पुलिस विभाग के नये कानूनों के क्रियान्वयन हेतु वी०सी० कक्षों (लागत रू0 18.56 करोड़)
13. उत्तराखण्ड गृह विभाग उत्तराखण्ड के अन्तर्गत पुलिस विभाग के अनावासीय भवनों (लागत रू0 14.90 करोड़)
14. उत्तराखण्ड आवास विभाग के अन्तर्गत जनपद-चम्पावत के नगर पालिका परिसर चम्पावत में लकड़ी के टाल के पास की भूमि पर मल्टी लेबल कार पार्किंग एवं कॉपलैक्स (लागत रू0 9.99 करोड़)
15. जिला विकास प्राधिकरण जनपद-ऊधमसिंह नगर के रूद्रपुर शहर के आंतरिक मार्ग के अन्तर्गत एन.एच.-87 में डीडी चौक से इंदिरा चौक तक बांई एवं दायीं ओर सड़क का चौड़ीकरण (लम्बाई 0.900 किमी) कार्य (लागत रू0 8.13 करोड़)
16. जिला विकास प्राधिकरण जनपद-ऊधमसिंह नगर के अन्तर्गत शहर रूद्रपुर में गांधीपार्क का सौन्दर्गीकरण / विकास कार्य (लागत रू0 5.55 करोड़)
ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के दौरान हुए एमओयू और ग्राउंडिंग
ऊर्जा – कुल 1,03,459 करोड़ के 157 एमओयू (रोजगार 8,472) में ग्राउंडिंग 40341 करोड़ रुपए
उद्योग – कुल 78,448 करोड़ के 658 एमओयू, (रोजगार 44,663) में ग्राउंडिंग 34086 करोड़ रुपए
आवास – कुल 41,947 करोड़ के 125 एमओयू, (रोजगार 5,172) में ग्राउंडिंग 10055 करोड़ रुपए
पर्यटन – कुल 47,646 करोड़ के 437 एमओयू, (रोजगार 4694) में ग्राउंडिंग 8635 करोड़ रुपए
उच्च शिक्षा – कुल 6,675 करोड़ के 28 एमओयू, (रोजगार 4428) में ग्राउंडिंग 5116 करोड़ रुपए
अन्य- कुल 79,518 करोड़ के 374 एमओयू, (रोजगार 13898) में ग्राउंडिंग 3292 करोड़ रुपए।
देहरादून: सावन माह में चल रही कांवड़ यात्रा के मद्देनजर देहरादून प्रशासन ने बड़ी एहतियाती कार्रवाई करते हुए 21, 22 और 23 जुलाई को नगर निगम क्षेत्र सहित हाईवे से लगे कई इलाकों के सभी स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया है। इस निर्णय का उद्देश्य कांवड़ यात्रा के दौरान उत्पन्न होने वाले संभावित ट्रैफिक दबाव, सुरक्षा चुनौतियों और आमजन की सुविधा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
जिला प्रशासन द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि देहरादून नगर निगम क्षेत्र के साथ-साथ हरिपुर, रायवाला, प्रतीत नगर, श्यामपुर तथा राष्ट्रीय राजमार्ग (हाइवे) के आस-पास स्थित सभी सरकारी, गैर-सरकारी और निजी विद्यालयों में तीन दिनों के लिए अवकाश रहेगा। यह आदेश अपर जिलाधिकारी/मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जनपद आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, देहरादून द्वारा जारी किया गया है।
कांवड़ यात्रा के दौरान भारी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार से गंगाजल लेकर विभिन्न शिवालयों की ओर प्रस्थान करते हैं, जिससे देहरादून जिले की सीमाओं से गुजरने वाले मार्गों पर अत्यधिक भीड़ व यातायात जाम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। खासकर राष्ट्रीय राजमार्ग और शहर से सटे क्षेत्रों में सुरक्षा और यातायात व्यवस्था बनाए रखना बड़ी चुनौती बन जाता है।
प्रशासन ने यह निर्णय छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया है, ताकि कांवड़ यात्रा के दौरान स्कूल आने-जाने में किसी भी प्रकार की असुविधा या जोखिम से बचा जा सके।
स्थानीय पुलिस व प्रशासन द्वारा यात्रा मार्गों पर यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष प्लान तैयार किया गया है। साथ ही लोगों से भी अपील की गई है कि वे यात्रा के दिनों में अनावश्यक रूप से इन मार्गों का उपयोग न करें।
निवेश गंतव्य के रूप में उबर कर सामने आ रहा है उत्तराखंड
देहरादून। प्रदेश के लोक निर्माण, पर्यटन, पंचायतीराज, सिंचाई, ग्रामीण निर्माण, जलागम, धर्मस्व एवं संस्कृति, मंत्री सतपाल महाराज ने कहा है कि गृहमंत्री अमित शाह द्वारा रुद्रपुर में आयोजित उत्तराखण्ड निवेश उत्सव में प्रतिभाग करने से राज्य को औद्योगिक दृष्टि से विशेष बल मिलेगा। इस पहल से स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलने के साथ-साथ दुनिया के बड़े-बड़े उद्योग घराने अब उत्तराखंड का रुख करेंगे और यहां की आर्थिकी के विस्तार को नया आयाम मिलेगा।
कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने गृहमंत्री अमित शाह के देवभूमि उत्तराखंड आगमन पर प्रदेश वासियों की ओर से उनका अभिनंदन और स्वागत करते हुए कहा कि दिसंबर 2023 में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान उत्तराखंड में 44,000 करोड़ रुपये की निवेश परियोजनाओं को शुरू करने वाला पहला राज्य है जो असाधारण तैयारी और निष्पादन क्षमताओं का प्रदर्शन करता है। इसके बाद मार्च 2024 में दूसरे ग्राउंड ब्रेकिंग समारोह का सफल आयोजन किया गया, इस दौरान विनिर्माण, आवास, पर्यटन और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में 27,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त परियोजनाओं को शुरू किया गया, जिससे निवेशकों का विश्वास और मजबूत हुआ है।
उन्होंने कहा कि एक लाख करोड़ रुपये से अधिक के संचयी ग्राउंडिंग का जश्न मनाने और निवेशकों की अकांक्षाओं को पूरा करने के लिए उत्तराखंड की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाने के लिए, “उत्तराखंड निवेश उत्सव 2025” का आयोजन माननीय मंत्रियों, सरकारी अधिकारियों, उद्योग जगत के नेताओं और प्रमुख हितधारकों की भागीदारी के साथ किया जा रहा है।
महाराज ने कहा कि “उत्तराखंड निवेश उत्सव 2025” केवल एक आयोजन नहीं है सुधार-प्रदर्शन-परिवर्तन एजेंडे के प्रति उत्तराखंड की प्रतिबद्धता और भारत में तेजी से बढ़ते निवेश गंतव्य के रूप में इसके उभरने का प्रमाण है।
असम-बंगाल के बीच घुसपैठ और भाषा को लेकर सियासी घमासान
गुवाहाटी। असम और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्रियों के बीच सियासी टकराव एक बार फिर गर्मा गया है। इस बार टकराव की वजह बना है घुसपैठ, भाषायी पहचान और एनआरसी जैसे मुद्दों पर बढ़ता तनाव।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने शनिवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि असम की लड़ाई अपने ही लोगों से नहीं, बल्कि सीमा पार से हो रही घुसपैठ के खिलाफ है, जिसने राज्य के जनसंख्या संतुलन को बिगाड़ दिया है। उन्होंने दावा किया कि कई जिलों में हिंदू अब अल्पसंख्यक बनते जा रहे हैं।
सीएम सरमा ने लिखा, “यह कोई राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि कड़वी सच्चाई है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे बाहरी आक्रमण करार दिया है। जब हम अपनी संस्कृति और पहचान की रक्षा करने की कोशिश करते हैं, तब कुछ लोग इसे राजनीति का रंग देने लगते हैं।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि असम सभी भाषाओं और समुदायों का सम्मान करता है, लेकिन सीमाओं और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा करना राज्य की जिम्मेदारी है।
इससे पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ‘बांग्ला भारत की दूसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है और असम में भी इसका बड़ा स्थान है। लेकिन भाजपा असम में बंगाली भाषियों को निशाना बना रही है। यह पूरी तरह से असंवैधानिक और विभाजनकारी है।’ उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार असम में बांग्लाभाषियों को डराने-धमकाने की कोशिश कर रही है, उनकी भाषा और पहचान को खत्म कर रही है। सीएम ममता ने कहा कि वह हर उस नागरिक के साथ हैं जो अपनी भाषा, संस्कृति और लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए लड़ रहा है।
विवाद की जड़ में क्या है?
इस ताजा विवाद की शुरुआत तब हुई जब तृणमूल कांग्रेस से जुड़ी ट्रेड यूनियन INTTUC ने सिलीगुड़ी में एनआरसी के विरोध में प्रदर्शन किया। उनका आरोप था कि भाजपा शासित राज्यों में बंगाली भाषियों को “माइग्रेंट” बताकर परेशान किया जा रहा है। ममता बनर्जी ने संकेत दिया है कि यह मुद्दा जल्द ही बंगाल विधानसभा में गूंज सकता है।
वहीं असम सरकार ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि वह घुसपैठ के खिलाफ संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों के तहत कार्रवाई करती रहेगी।
पोस्टल बैलेट की व्यवस्था नहीं, शिक्षक संघ ने की व्यवस्था की मांग
उत्तरकाशी। उत्तरकाशी में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों को अपने मताधिकार से वंचित रहना पड़ेगा। निर्वाचन आयोग की ओर से इस बार ऐसे कर्मचारियों के लिए पोस्टल बैलेट या किसी वैकल्पिक व्यवस्था का कोई प्रावधान नहीं किया गया है, जिससे शिक्षक संगठनों और कर्मचारी यूनियनों में रोष है।
उत्तरकाशी जनपद में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए नियुक्त किए गए 3395 कर्मचारी, 20 जोनल मजिस्ट्रेट, 76 सेक्टर मजिस्ट्रेट और 50 प्रभारी अधिकारियों को मतदान के दिन ड्यूटी करनी होगी, लेकिन वे स्वयं अपने मत का प्रयोग नहीं कर पाएंगे। निर्वाचन आयोग की ओर से पंचायत चुनाव में मतदान ड्यूटी कर रहे कर्मियों के लिए मताधिकार के उपयोग हेतु कोई दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए हैं।
इस मुद्दे को लेकर राजकीय शिक्षक संघ सहित विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने गहरी नाराजगी जताई है। संघ के जिलाध्यक्ष अतोल महर ने कहा कि विधानसभा, लोकसभा और नगर निकाय चुनावों में पोस्टल बैलेट जैसी व्यवस्था के जरिए ड्यूटी पर लगे कर्मचारी अपने मताधिकार का प्रयोग कर पाते हैं, लेकिन पंचायत चुनाव में यह सुविधा नहीं दी जा रही है।
उन्होंने कहा कि अधिकतर कर्मचारी ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं और उनका नाम वहीं के मतदान क्षेत्रों में दर्ज है। कई गांवों में तो कर्मचारी बड़ी संख्या में हैं, जिनके मतदान से वंचित रहने का सीधा असर वहां के मतदान प्रतिशत पर भी पड़ेगा।
इस संदर्भ में मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) एसएल सेमवाल ने स्पष्ट किया कि निर्वाचन आयोग की ओर से पंचायत चुनाव में ड्यूटी पर लगे कर्मचारियों के मतदान के लिए कोई गाइडलाइन जारी नहीं की गई है।
संगठनों ने मांग की है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक नागरिक को मताधिकार देना अनिवार्य है, इसलिए भविष्य में आयोग को पंचायत चुनाव में भी अन्य चुनावों की भांति वैकल्पिक मतदान व्यवस्था लागू करनी चाहिए।
लोकसभा के बाद विधानसभा में भी बिखरी एमवीए, उद्धव ने बताई अंदरूनी खामियां
मुंबई— महाराष्ट्र में आगामी नगर निकाय चुनाव से पहले महाविकास अघाड़ी (MVA) के भीतर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने गठबंधन की आंतरिक खींचतान और हालिया विधानसभा चुनावों में मिली हार को लेकर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसे ही हालात बने रहे तो “साथ रहने का कोई औचित्य नहीं रह जाएगा।”
गठबंधन की एकता पर उठे सवाल
ठाकरे ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में सीटों के बंटवारे और उम्मीदवार चयन में हुई देरी को एमवीए की सबसे बड़ी कमजोरी बताया। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन मिलने के बावजूद गठबंधन दलों ने आपसी समन्वय पर ध्यान नहीं दिया और चुनाव में दलगत हितों की होड़ ने जनता को भ्रमित किया।
“ऐसे ही चले तो जनता भरोसा खो देगी” – उद्धव ठाकरे
उद्धव ठाकरे ने स्पष्ट कहा कि अगर आगे भी यही रवैया जारी रहा तो जनता का भरोसा टूट जाएगा। उन्होंने बताया कि लोकसभा चुनाव के दौरान शिवसेना (यूबीटी) को कुछ ऐसी सीटें छोड़नी पड़ीं, जहां उसका मजबूत जनाधार था। “सीटों के चयन में हुई खींचतान और उम्मीदवारों को लेकर बनी असहमति ने संगठन की कमजोरी उजागर की,” ठाकरे ने जोड़ा।
“अपनी गलतियां भी माननी होंगी”
ठाकरे ने कहा कि गठबंधन सिर्फ चुनाव आयोग या ईवीएम पर दोष डालकर बच नहीं सकता। उन्होंने ‘लड़की बहन योजना’ जैसे घोषणापत्री वादों को भी हार का कारण बताया और कहा कि इससे मतदाता भ्रमित हुआ। उन्होंने कहा, “हमें आत्ममंथन करना होगा और अपनी गलतियां स्वीकारनी होंगी।”
चुनाव नतीजों की हकीकत
2024 लोकसभा चुनाव में एमवीए ने महाराष्ट्र की 48 में से 30 सीटें जीती थीं, लेकिन विधानसभा चुनाव में बीजेपी, शिंदे गुट और अजित पवार गुट वाली महायुति ने भारी बहुमत हासिल किया। बीजेपी को 132, शिंदे की शिवसेना को 57 और एनसीपी (अजित पवार) को 41 सीटें मिलीं। दूसरी ओर, एमवीए को सिर्फ 46 सीटें ही मिल पाईं — जिसमें ठाकरे गुट को 20, शरद पवार को 16 और कांग्रेस को 10 सीटें मिलीं।
