प्रधानमंत्री ने विशाखापत्तनम से लेकर हिमालय तक योग की व्यापकता का किया उल्लेख
पीएम मोदी ने गिनाई सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की उपलब्धियां
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 123वें संस्करण में देशवासियों से संवाद करते हुए योग दिवस की वैश्विक सफलता, आपातकाल की भयावह यादें, सामाजिक सुरक्षा के बढ़ते दायरे, देशभर में चल रहे सांस्कृतिक और खेल आयोजनों की चर्चा की। इसके अलावा उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए आम नागरिकों की प्रेरणादायक पहल और पूर्वोत्तर भारत की खासियतों को भी उजागर किया।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की भव्य झलकियां
प्रधानमंत्री ने बताया कि इस बार योग दिवस की भव्यता देश के हर कोने और दुनिया के कई देशों में देखने को मिली। विशाखापत्तनम में तीन लाख लोगों ने एकसाथ योग किया, वहीं 2000 से अधिक आदिवासी छात्रों ने 108 मिनट तक सूर्य नमस्कार किए। हिमालय की ऊंचाइयों से लेकर नौसेना के जहाजों तक योग के प्रति समर्पण दिखा।
आपातकाल की काली छाया और लोकतंत्र की जीत
पीएम मोदी ने आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ पर उस दौर को याद किया जब संविधान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचला गया। उन्होंने कहा कि लाखों लोगों ने संघर्ष कर लोकतंत्र को पुनर्जीवित किया, और वह दौर देश के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा।
सामाजिक सुरक्षा में जबरदस्त विस्तार
प्रधानमंत्री ने बताया कि आज भारत के 95 करोड़ नागरिक किसी न किसी सामाजिक सुरक्षा योजना से लाभान्वित हो रहे हैं, जबकि 2015 में यह संख्या सिर्फ 25 करोड़ थी। उन्होंने इसे ‘समावेशी विकास’ की दिशा में बड़ा कदम बताया।
बोडोलैंड में खेल के माध्यम से बदलाव
असम के बोडोलैंड में आयोजित CEM Cup फुटबॉल टूर्नामेंट में 70 हजार खिलाड़ियों की भागीदारी को पीएम ने सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक बताया। उन्होंने खिलाड़ियों को नई पीढ़ी की प्रेरणा बताया, जो अब देश के मंच पर अपनी पहचान बना रहे हैं।
पूर्वोत्तर और पर्यावरण पर विशेष फोकस
मेघालय के ‘एरी सिल्क’ को जीआई टैग मिलने को सांस्कृतिक धरोहर की मान्यता बताया गया। वहीं, ‘सिंदूर वन’ और पुणे के रमेश खरमाले जैसे लोगों के प्रयासों को पर्यावरण के लिए प्रेरणास्रोत बताया गया, जो समाज को स्वेच्छा से हरियाली की ओर मोड़ रहे हैं।
तीर्थ यात्राओं की आध्यात्मिक और सामाजिक भूमिका
प्रधानमंत्री ने धार्मिक यात्राओं को सेवा, अनुशासन और एकता का प्रतीक बताया। उन्होंने रथयात्रा जैसे आयोजनों में लगे सेवा कार्यकर्ताओं की सराहना की और उन्हें शुभकामनाएं दीं।
वैश्विक स्तर पर भारत की सांस्कृतिक पहल
भगवान बुद्ध के अवशेषों को वियतनाम भेजने की घटना को उन्होंने भारत और वियतनाम के सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि भारत की यह पहल दुनियाभर में सम्मान और विश्वास बढ़ा रही है।
डॉक्टरों और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को सलाम
पीएम मोदी ने 1 जुलाई को मनाए जाने वाले डॉक्टर दिवस और सीए दिवस पर इन पेशों से जुड़े लोगों का आभार जताया और उन्हें समाज के मजबूत स्तंभ बताया।
“देश के लिए बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता” — गणेश जोशी
देहरादून। सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने देहरादून के हाथीबड़कला में अमर शहीद मेजर भूपेन्द्र कण्डारी की पुण्यतिथि पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। इस दौरान उन्होंने शहीद के पिता गजेंद्र कंडारी को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित भी किया।
शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि उत्तराखंड वीरों और देशभक्तों की भूमि है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा शहीदों को सामाजिक सम्मान दिलाने के लिए अभूतपूर्व प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के इतिहास में पहली बार 1734 शहीदों के आंगन से पवित्र माटी एकत्र कर सैन्यधाम में लाई गई, साथ ही 28 पवित्र नदियों का जल भी एकत्र किया गया। उन्होंने कहा कि सैन्यधाम का निर्माण अंतिम चरण में है और जल्द ही इसका लोकार्पण किया जाएगा।

मंत्री जोशी ने यह भी कहा कि अब शहीदों की स्मृति में स्मारक और द्वारों का निर्माण सैनिक कल्याण विभाग द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने क्षेत्र में अपने निजी मद से अमर शहीद मेजर भूपेन्द्र कण्डारी की मूर्ति स्थापित करने की घोषणा करते हुए इसके लिए उपयुक्त स्थान चिह्नित कर निर्माण का भरोसा दिलाया।
शहीद के पिता गजेंद्र सिंह कंडारी ने बताया कि शहीद मेजर कण्डारी राजपूताना राईफल्स में थे और वर्ष 2003 में राजौरी में आंतवादियों से एक मुठभेड़ के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए। शहीद को भारत सरकार द्वारा मरणोपरंत सेना मेडल से सम्मानित किया गया।
इस दौरान मेजर जनरल (सेनि) सम्मी सभरवाल, पार्षद भूपेंद्र कठेत, शहीद के पिता गजेंद्र कंडारी, शहीद के भाई शैलेंद्र सिंह कंडारी, राहुल राणा, अशोक गुप्ता सहित कई क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।
संविधान पर संघ के बयान के बीच थरूर बोले– अब बदल चुका है RSS
थरूर के बयान से पार्टी के भीतर उठे सवाल
नई दिल्ली। देश में संविधान को लेकर छिड़ी राजनीतिक बहस के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर के ताज़ा बयान ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा को जन्म दे दिया है। थरूर ने कहा है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) अब पहले जैसे नहीं रहे और संभवतः वे अपनी पुरानी विचारधारा से आगे बढ़ चुके हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब कांग्रेस और विपक्षी दल लगातार आरएसएस-बीजेपी पर संविधान की मूल आत्मा से छेड़छाड़ के आरोप लगा रहे हैं।
सेक्युलर और सोशलिस्ट शब्दों को हटाने पर बवाल
हाल ही में आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने संविधान की प्रस्तावना से ‘सेक्युलर’ और ‘सोशलिस्ट’ जैसे शब्दों को हटाने की पैरवी की थी। इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज हो गई। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर निशाना साधते हुए कहा कि आरएसएस और बीजेपी ‘संविधान नहीं, मनुस्मृति चाहते हैं’ और वे बहुजन व वंचित वर्गों से उनके अधिकार छीनना चाहते हैं।
थरूर की टिप्पणी: संतुलन या विचलन?
राहुल गांधी के तीखे बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए शशि थरूर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि राहुल गांधी एक ऐतिहासिक तथ्य की ओर इशारा कर रहे थे। थरूर ने कहा, “संविधान निर्माण के समय गोलवलकर जैसे नेताओं ने मनुस्मृति की झलक न होने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया था, लेकिन मेरा मानना है कि आरएसएस अब उस सोच से आगे निकल चुका है। हालांकि उनकी मौजूदा सोच क्या है, यह वही स्पष्ट कर सकते हैं।”
पार्टी के भीतर मतभेद की आहट
थरूर की टिप्पणी कांग्रेस के भीतर ही असहमति का कारण बन गई है। पार्टी सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि जब आरएसएस खुद संविधान के मूल शब्दों को हटाने की बात कर रहा है, तब थरूर का रुख भ्रम पैदा करने वाला है। उन्होंने तंज भरे लहजे में कहा, “थरूर जी का सम्मान है, लेकिन यह बयान सियासी बहानेबाज़ी की तरह लगता है, जो मुद्दे को भटका सकता है।”
राजनीतिक रणनीति पर उठे सवाल
विश्लेषकों के अनुसार, थरूर ने जहां एक ओर ऐतिहासिक सच्चाई को स्वीकार किया, वहीं सीधे तौर पर आरएसएस-बीजेपी पर हमला करने से बचने की कोशिश की। कांग्रेस की आक्रामक रणनीति के बीच थरूर का यह ‘मध्यमार्गी रुख’ पार्टी के समन्वय और संदेश रणनीति पर सवाल खड़े करता है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि कांग्रेस नेतृत्व इस आंतरिक विरोधाभास को कैसे सुलझाता है और बीजेपी इस बयान को राजनीतिक हथियार के तौर पर कैसे भुनाती है।
सीएम धामी ने लिया संज्ञान, राहत-बचाव कार्य तेज करने के निर्देश
उत्तरकाशी। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में शनिवार देर रात कुदरत का कहर देखने को मिला। यमुनोत्री हाईवे पर पालीगाड़-ओजरी डाबरकोट के बीच सिलाई बैंड के पास बादल फटने से भारी तबाही मची। एक निर्माणाधीन होटल स्थल पर तेज सैलाब के चलते मजदूरों के टेंट बह गए, जिससे कई श्रमिक लापता हो गए हैं।
प्रशासन और एसडीआरएफ की टीमों ने घटनास्थल पर पहुंचकर राहत-बचाव अभियान शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों से तत्काल रिपोर्ट लेते हुए राहत कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।
घटना की जानकारी
यह हादसा रात करीब 12 बजे हुआ। बड़कोट थानाध्यक्ष दीपक कठेत ने बताया कि हाईवे पर निर्माण कार्य में लगे मजदूर टेंटों में सो रहे थे, जब अचानक पानी और मलबे का तेज बहाव आया। शुरुआती सूचना के मुताबिक 19 मजदूरों में से 9 लापता हैं, जिनमें 5 नेपाली मूल के, 3 देहरादून और 1 उत्तर प्रदेश से हैं। 10 मजदूरों को रेस्क्यू कर सुरक्षित पालीगाड़ लाया गया।
मुख्यमंत्री धामी की निगरानी में राहत कार्य
सीएम धामी ने ट्वीट कर हादसे पर दुख जताते हुए कहा कि सभी संबंधित एजेंसियां राहत कार्य में लगी हैं और वे खुद लगातार निगरानी कर रहे हैं। आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि पुलिस और सेना के जवान भी राहत कार्य में जुटे हैं। फिलहाल लगभग 45 लोग राहत टीम के साथ रास्ते में हैं और घटनास्थल पर पहुंचने का प्रयास जारी है।
यमुनोत्री हाईवे पर कई स्थानों पर यातायात अवरुद्ध
बादल फटने की वजह से यमुनोत्री हाईवे सिलाई बैंड समेत कई स्थानों पर अवरुद्ध हो गया है। ओजरी क्षेत्र में सड़क पूरी तरह बह गई है, वहीं खेतों में मलबा भर गया है। स्यानाचट्टी में कुपड़ा-कुंशाला पुल को भी खतरा बना हुआ है। यमुना नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे स्थानीय लोग दहशत में हैं।
यमुना नदी का बहाव थमा, बनी झील
स्याना चट्टी के पास कुपड़ा कुनसाला मोटर मार्ग पर भारी मलबा और बोल्डर गिरने से यमुना नदी का बहाव रुक गया है, जिससे वहां झील बनने लगी है। स्थानीय निवासी जयपाल सिंह रावत ने बताया कि होटल की सीढ़ियों तक पानी पहुंच गया है और हालात भयावह बने हुए हैं।
खेल मंत्री रेखा आर्या ने अधिकारियों के साथ ली समीक्षा बैठक
देहरादून। प्रदेश के पहले खेल विश्वविद्यालय मानसखंड स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी में पहले साल 6 कोर्स के साथ शुरुआत करने की तैयारी की जा रही है। खेल निदेशालय में विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक में खेल मंत्री रेखा आर्या ने यूनिवर्सिटी समेत अन्य योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की।
बैठक में खेल मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि देश की चुनिंदा 5 – 6 स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के कोर्स और सिलेबस का अध्ययन कर बेस्ट करियर ओरिएंटेड कोर्स चुने जाएं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि आगामी खेल दिवस 29 अगस्त पर यूनिवर्सिटी के शिलान्यास की सभी तैयारियां कर लें। शुरुआत में यूनिवर्सिटी में खेल सचिव कुलपति, खेल निदेशक कुलसचिव और खेल विभाग के वित्त नियंत्रक वित्त विश्वविद्यालय के वित्त नियंत्रक की जिम्मेदारी संभालेंगे।
बैठक में खेल मंत्री ने नेशनल गेम्स के पदक विजेताओं को आउट ऑफ टर्न जॉब देने के लिए अधिसंख्य पद जल्द सृजित करने की कार्रवाई तेजी से पूरी करने का निर्देश दिया। इसके अलावा उन्होंने अधिकारियों से कहा कि खिलाड़ियों के लिए भोजन भत्ता ₹250 से बढ़कर साई के समान करने का प्रस्ताव जल्द तैयार करें। बैठक में इसके साथ ही लिगसी प्लान, गर्ल्स स्पोर्ट्स कॉलेज लोहाघाट और रुद्रपुर शूटिंग रेंज की देखरेख के लिए उत्तराखंड पुलिस के साथ एमओयू करने पर भी चर्चा की गई।
बैठक में प्रमुख विशेष खेल सचिव अमित सिन्हा, खेल निदेशक आशीष चौहान, अजय अग्रवाल, उपनिदेशक शक्ति सिंह, महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज के प्राचार्य राजेश मंमगाई आदि मौजूद रहे।
देहरादून। प्रदेश के पंचायतीराज मंत्री सतपाल महाराज ने कहा है कि उत्तराखंड के 12 जनपदों में होने वाले पंचायत चुनाव पर लगी रोक को नैनीताल हाई कोर्ट द्वारा हटाने के साथ ही राज्य निर्वाचन आयोग ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की नई तारीख घोषित कर दी है। चुनाव को लेकर सरकार की पहले से ही पूरी तैयारी है।
प्रदेश के पंचायतीराज मंत्री सतपाल महाराज ने कहा है कि उत्तराखंड के 12 जनपदों में होने वाले पंचायत चुनाव पर लगी नैनीताल हाई कोर्ट की रोक हटने के साथ ही राज्य निर्वाचन आयोग ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की नई तारीखें घोषित कर दी हैं। नये चुनाव शेड्यूल के तहत 02 जुलाई से नामांकन प्रक्रिया शुरू कर दी जायेगी और 24 व 28 जुलाई 2025 को दो चरणों में मतदान सम्पन्न होगा और चुनाव परिणाम 31 जुलाई 2025 को घोषित कर दिया जाएगा।
पंचायतीराज मंत्री महाराज ने कहा कि राज्य में पंचायत चुनाव को लेकर सरकार ने पहले से ही तैयारियां पूरी कर ली थी। पूर्व में घोषित चुनाव तिथियों के बाद हाईकोर्ट में याचिका डाली गयी थी। जिसमें इस याचिका के माध्यम से सरकार द्वारा 9 और 11 जून को जारी नियमावली और परिपत्र को चुनौती दी गई थी।
सरकार द्वारा जारी नियमावली में राज्य के अब तक के आरक्षण रोस्टर को शून्य माना गया और आरक्षण का नया रोस्टर जारी किया गया था जिसे पहली बार वर्तमान चुनाव से लागू माना गया। लेकिन आरक्षण को लेकर जो पेंच फंसा था अब उसका समाधान हो गया है।
उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव में अवरोध खड़ा करने के लिए हाईकोर्ट को याचिका कर्ताओं ने गलत जानकारी दी थी कि सरकार ने आरक्षण की नई रोटेशन प्रणाली के लिए गज़ट नोटिफिकेशन जारी नहीं किया
जबकि राज्य सरकार द्वारा 14 जून 2025 को गज़ट नोटिफिकेशन कर दिया गया था। “कम्युनिकेशन गैप” के कारण अदालत को समय पर सूचना नहीं मिल पाई थी।
इकोलॉजी, इकॉनमी और टेक्नोलॉजी में संतुलन पर राज्य सरकार का फोकस
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को ओएनजीसी कम्युनिटी सेंटर, देहरादून में आयोजित ऑल इण्डिया ऑइल सैक्टर मीट कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार इकॉनमी, इकोलॉजी और टेक्नोलॉजी में समन्वय के साथ ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने का कार्य कर रही है। राज्य में मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना से स्वच्छ और हरित ऊर्जा को बढ़ावा दिया रहा है। प्रदेश में टिहरी, कोटेश्वर, पीपलकोटी, लखवाड़, विष्णुगाड़ जैसी जल विद्युत परियोजनाएं उत्तराखंड को ऊर्जा हब में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। राज्य में जियो थर्मल के क्षेत्र में अनेकों संभावना है, जिस पर राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा प्राकृतिक संसाधन किसी भी राष्ट्र को आगे ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ईंधन, राष्ट्र के विकास के साथ ही हमारी दैनिक आवश्यकताओ को भी पूरा करता है। देश में कच्चे तेल का कुल उत्पादन का 70 प्रतिशत और प्राकृतिक गैस उत्पादन का 84 प्रतिशत योगदान देकर ओएनजीसी भारत की ऊर्जा सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आत्मनिर्भर और विकसित भारत का संकल्प हमारे सामने रखा है। देश 2047 में विकसित भारत बनने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए पेट्रोलियम भंडार की स्थापना की गई है। ग्रीन हाइड्रोजन के साथ सौर ऊर्जा को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। ऊर्जा के कई वैकल्पिक स्रोतों पर कार्य किया जा रहा है। इन सभी प्रयासों ने भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में सक्षम बनाया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तेल एवं प्राकृतिक गैस के क्षेत्र में अनेक कार्य किए गए हैं। वन नेशन, वन ग्रिड के अंतर्गत गैस पाईप लाईनों का विस्तार किया जा रहा है। गैस वितरण प्रणाली को विस्तार देकर पहले से सुविधाजनक बनाया गया है। बायो सीएनजी प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं। उज्ज्वला गैस योजना जैसी योजनाओं ने समाज में क्रांति लाने का काम किया है। तेल उत्पादन के लिए कई नीतियां भी लागू की गई है। भारत ने विदेशों में भी तेल एवं प्राकृतिक क्षेत्र में निवेश को बढ़ाया है। उन्होंने कहा ओएनजीसी ने उत्तराखंड कई ऐसे कार्य किए हैं, जिसका लाभ राज्य को मिल रहा है।
इस अवसर पर अध्यक्ष भारतीय मजदूर संघ हिरान्मय पंड्या, अनुपम, गोपाल जोशी, नीरज शर्मा, पवन कुमार, देवेंद्र बिष्ट , सुमित सिंघल एवं अन्य लोग मौजूद रहे।
दो चरणों में होगा मतदान
पहले चरण का मतदान 24 जुलाई और दूसरे चरण का 28 जुलाई को, मतगणना 31 जुलाई को होगी
देहरादून। प्रदेश में लंबे इंतजार के बाद त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सरकार ने चुनाव को लेकर अधिसूचना जारी कर दी है, जिसके अनुसार दो चरणों में मतदान कराया जाएगा।
अधिसूचना के अनुसार, पहले चरण का मतदान 24 जुलाई को तथा दूसरे चरण का मतदान 28 जुलाई को होगा। 31 जुलाई को मतगणना की जाएगी।
इस बार पंचायत चुनाव 89 विकासखंडों और 7,499 ग्राम पंचायतों में कराए जाएंगे। कुल 12 जिलों में 66,418 पदों के लिए यह चुनाव होंगे। अनुमान है कि इन चुनावों में 47 लाख से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।
राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी जिलों को तैयारियां समय से पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। सुरक्षा व्यवस्था और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए व्यापक योजना बनाई जा रही है।

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत अपनी माताजी श्रीमती बिशना देवी के साथ पौधारोपण किया। मुख्यमंत्री के सुपुत्र दिवाकर ने भी इस अवसर पर पौधा लगाया। इस पहल का उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति को अपनी माँ के सम्मान में एक पेड़ लगाने के लिए प्रेरित करना है, ताकि भावनात्मक जुड़ाव के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन बनाया जा सके।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि “माँ जीवन की पहली गुरु होती हैं और पर्यावरण हमें जीवन देता है। माँ और प्रकृति दोनों की सेवा करना हमारा कर्तव्य है। यह अभियान समाज में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भी संदेश देता। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की जनता से अपील की कि वे अपनी माताओं के नाम से एक पौधा अवश्य लगाएँ और उसका संरक्षण स्वयं करें।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. के सुधांशु, प्रमुख वन संरक्षक समीर सिन्हा और अपर सचिव बंशीधर तिवारी मौजूद थे।
