उत्तराखंड में माध्यमिक स्तर पर 559 विद्यालयों को क्लस्टर विद्यालयों के रूप में विकसित किया जाएगा..
उत्तराखंड: मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने शुक्रवार को सचिवालय में शिक्षा विभाग के साथ क्लस्टर विद्यालय के सम्बन्ध में बैठक ली। मुख्य सचिव ने कहा कि प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा के अंतर्गत संचालित क्लस्टर विद्यालय शिक्षण अधिगम को गुणवत्तापरक एवं रूचिकर बनाने के उद्देश्य से पठन-पाठन से सम्बन्धित मूलभूत सुविधायें विकसित कर उत्कृष्ट शिक्षा केन्द्र के रूप में विकसित किए जाएंगे।
मुख्य सचिव का कहना हैं कि इन क्लस्टर विद्यालयों में समुचित मात्रा में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक स्कूल के लिए आने वाले समय में अधिकतम छात्र संख्या के अनुरूप मास्टर प्लान तैयार किया जाए। क्लस्टर स्कूल में समुचित अध्यापक, कक्षाकक्ष, पुस्तकालय, कम्प्यूटर लैब और अन्य प्रयोगशालाओं आदि की पूर्ण व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने कहा कि क्लस्टर विद्यालयों में छात्रों के लिए आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराए जाने हेतु जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समिति का गठन कर उन्हें छात्रों को आवागमन का किराया किस रूप में देना है इसके लिए भी अधिकृत किया जाए। इस समिति में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में परिवहन विभाग, लोक निर्माण विभाग, जिला शिक्षा अधिकारी, पुलिस अधीक्षक आदि सम्बन्धित सभी विभागों का प्रतिनिधित्व रखा जाए।
ऐसे स्कूल, जो अत्यधिक दूर हैं और बच्चे इतने दूर आना जाना नहीं कर सकते, के लिए आवासीय स्कूलों की व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि आवासीय स्कूलों को पर्वतीय जनपदों के छोटे शहरों में खोला जा सकता है। ऐसे में उन आवासीय विद्यालयों में शिक्षकों को अपने परिवार के साथ रहने में सुविधा होगी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जनपद में एक नहीं बल्कि 5 से 7 आवासीय विद्यालय होने चाहिए। वर्तमान में संचालित आवासीय विद्यालयों में हॉस्टल की सुविधा को और बढ़ाया जाए। मुख्य सचिव ने कहा कि बच्चों को अच्छी गुणवत्तापरक शिक्षा उपलब्ध हो इसके लिए अच्छे सुझावों को लगातार अपनाने की आवश्यकता है।
सचिव रविनाथ रमन ने कहा कि प्रदेशभर में माध्यमिक स्तर पर कुल 559 विद्यालयों को क्लस्टर विद्यालयों के रूप में विकसित किया जाएगा। इसी प्रकार प्राथमिक में 603 और पूर्व माध्यमिक में 76 विद्यालयों को चिन्हित किया गया है। सभी विद्यालयों के लिए डीपीआर तैयार की जा रही है। इस अवसर पर महानिदेशक माध्यमिक एवं प्राथमिक शिक्षा बंशीधर तिवारी, अपर सचिव शिक्षा योगेन्द्र यादव सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
उत्तराखंड में अगले चार दिन भारी, जानें कहां होगी बारिश-बर्फबारी..
उत्तराखंड: प्रदेश में जहां गुरूवार को अचानक बदले मौसम के बाद बिजली गिरने और बारिश-बर्फबारी की खबरे सामने आई है । वहीं मौसम विभाग ने एक बार फिर अलर्ट जारी कर दिया है। प्रदेश के कई जिलों के लिए अगले चार दिन भारी बताए जा रहे है। कई जिलों के लिए यलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
मौसम विभाग ने 28 और 29 अप्रैल को यलो अलर्ट जारी किया है। बताया जा रहा है कि 28 अप्रैल को राज्य के उत्तरकाशी ,रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर तथा पिथौरागढ़ जनपदों में कहीं-कहीं अपरान्ह और शाम के समय गर्जन के साथ आकाशीय बिजली चमकने तथा ओलावृष्टि होने की संभावना है। तो वहीं 29 अप्रैल को राज्य में कहीं-कहीं गर्जन के साथ आकाशीय बिजली चमकने ओलावृष्टि होने तथा झोंकेदार हवाएं 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा चल सकती है।
वहीं ये भी बताया जा रहा है कि प्रदेश में 30 अप्रैल और 1 मई के लिए मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इस दौरान राज्य के जनपदों में कहीं-कहीं गर्जन के साथ आकाशीय बिजली गिरने,ओलावृष्टि होने तथा तेज बौछार के साथ झक्कड़ 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा से बढ़कर 70 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चलने का मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है। इसके अलावा उच्च हिमालई क्षेत्रों में हिमपात की भी संभावना जताई गई है।
एयर एंबुलेंस सेवा के लिए एम्स और पिनाकल कंपनी में हुआ एमओयू..
उत्तराखंड: एयर एंबुलेंस सेवा शुरू करने के लिए एम्स ऋषिकेश और पिनाकल कंपनी के बीच एमओयू किया गया है। आपातकालीन और ट्रामा सेवाओं के लिए मई में एम्स से एयर एंबुलेंस सेवा संचालित होगी। पवन हंस की ओर से मेरठ में एयर एंबुलेंस को तैयार किया जा रहा है। हेलीकॉप्ट मिलते ही एम्स प्रशासन सेवा शुरू करने के लिए पूरी तैयारियां कर ली है।
आपातकालीन व ट्रामा सेवा के लिए गंभीर मरीजों को तत्काल एम्स पहुंचाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से पहली बार एयर एंबुलेंस सेवा शुरू की जाएगी। गुरुवार को एम्स ऋषिकेश और पिनाकल कंपनी के बीच एयर एंबुलेंस संचालित करने के लिए एमओयू किया है। इसके बाद पिनाकल कंपनी की ओर से उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण के सीईओ सी. रविशंकर से भी एमओयू पर हस्ताक्षर कराए गए।
एम्स ऋषिकेश की निदेशक डॉ. मीनू सिंह का कहना हैं कि एयर एंबुलेंस के लिए पिनाकल कंपनी की ओर से सेवा दी जाएगी जबकि पवन हंस एयर एंबुलेंस के लिए हेलिकॉप्टर उपलब्ध कराएगा। इसके लिए पवन हंस ने हेलीकॉप्ट खरीदा है। इसे मेरठ में एयर एंबुलेंस के हिसाब से तैयार किया जा रहा है। हेलीकॉप्टर उपलब्ध होते ही सेवा शुरू की जाएगी। इसके लिए एम्स प्रशासन पूरी तरह से तैयार है। मई महीने में एयर एंबुलेंस का संचालन शुरू हो जाएगा।
एक महीने में 50 ट्रिप निर्धारित..
एयर एंबुलेंस सेवा के लिए एक महीने में 50 ट्रिप निर्धारित किए गए हैं। आपात और ट्रामा सेवा के लिए किसी मरीज को तत्काल एयर एंबुलेंस की जरूरत है। यह एम्स ऋषिकेश के डॉक्टरों की टीम तय करेगी। टेलीमेडिसिन के माध्यम से मरीज की स्थिति को देखा जाएगा।
सूडान में फंसे भारतीयों की निकासी के लिए ऑपरेशन कावेरी..
देश-विदेश: अफ्रीकी देश सूडान इस वक्त भयंकर विद्रोहों का सामना कर रहा हैं। सूडान में सेना और अर्ध सैनिकों के बीच जारी संघर्ष रुकने का नाम नहीं ले रहा है। हालात दिन-ब-दिन खराब होते जा रहे हैं। सूडान के संघर्ष में 427 लोगों की मौत हो गई है और 3,700 से ज्यादा लोग घायल हो गए हैं। सूडान में हमलावरों ने बायोलॉजिकल लैब पर भी कब्ज़ा कर लिया हैं। ऐसे में भारत ने सूडान से अपने नागरिकों को निकालने के लिए ऑपरेशन कावेरी अभियान लॉन्च कर दिया है। सुडान उत्तर पूर्वी अफ्रीका का सबसे बड़ा देश है, जिसकी कुल आबादी लगभग साढ़े चार करोड़. और सुडान की सीमाएं कुल सात देशों से लगती हैं, जिनमें Egypt, Libya, चाड और साउथ सुडान जैसे देश प्रमुख हैं। 2011 में सुडान के अलग होने के बाद भी वहां की सत्ता पर नियंत्रण के लिए सुडान बार बार जलता रहा, और इस बार भी वहां कुछ नया नहीं हो रहा है।
हालांकि, दोनों बलों ने 72 घटों का एक युद्धविराम घोषित किया है। इस बीच, भारत हिंसाग्रस्त देश से अपने लोगों की निकासी के लिए ऑपरेशन कावेरी चला रहा है। इसके तहत सूडान में फंसे ढाई सौ से अधिक भारतीय सूडान से निकाले जा चुके हैं। इसके लिए वायुसेना और नौसेना की मदद ली जा रही है। विदेश मंत्रालय के अनुसार भारतीय वायुसेना के दो ट्रांसपोर्ट विमान C-130J सऊदी अरब के जेद्दाह में स्टैंडबाय पर हैं
ऑपरेशन कावेरी क्या है?
सूडान में करीब 10 दिन से चल रहे संघर्ष के बीच दोनों पक्ष संघर्ष विराम को सहमत हुए। 72 घंटे का ये संघर्ष विराम 24 अप्रैल की आधी रात से शुरू हुआ। इस बीच, भारत ने अपने लोगों को वहां से सुरक्षित निकालने के लिए ‘ऑपरेशन कावेरी’ शुरू किया है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि ऑपरेशन कावेरी के तहत C-130 की दो फ्लाइट क्रमशः 121 और 135 यात्रियों को लेकर सऊदी अरब में जेद्दाह में लैंड की हैं। ये लोग जल्द ही भारत पहुंचेंगे। इससे पहले, ये लोग पोर्ट सूडान से जेद्दा के लिए आईएनएस सुमेधा से पहुंचाए गए थे।
हिंसाग्रस्त देश से भारतीयों को निकालने के लिए ऑपरेशन का नाम ‘कावेरी’ रखा गया है। कोच्चि में सोमवार को युवम कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, ‘सूडान में गृहयुद्ध की वजह से हमारे कई लोग वहां फंस गए हैं। इसलिए हमने उन्हें सुरक्षित लाने के लिए ‘ऑपरेशन कावेरी’ शुरू किया है। इसकी देखरेख केरल के बेटे और हमारी सरकार के मंत्री मुरलीधरन कर रहे हैं।’
कावेरी दक्षिण भारत की एक प्रमुख नदी है जो मुख्यतः तमिलनाडु और कर्नाटक में बहती है। केंद्र द्वारा इस ऑपरेशन के नामकरण पर एक सूत्र ने कहा, ‘नदियां बाधाओं के बावजूद अपने गंतव्य तक पहुंचती हैं। यह एक मां की तरह है जो यह सुनिश्चित करेगी कि वह अपने बच्चों को सुरक्षित वापस लाएगी।’ इससे पहले, यूक्रेन में भी फंसे लोगों को निकालने के लिए चलाए गए अभियान का नाम पवित्र नदी ‘गंगा’ के नाम पर रखा गया था।
भारत ने कब-कब संकट के बीच अभियान चलाए हैं?
1. ऑपरेशन गंगा (2022): पिछले साल 24 फरवरी को रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद, भारत ने ‘ऑपरेशन गंगा’ शुरू किया था। इसके तहत एक हजार से अधिक भारतीयों को वापस लाया गया था। भारतीय वायु सेना के सी-17 विमानों को भेजकर और दूतावास के कर्मियों को कीव के ट्रेन टर्मिनलों पर भेजकर लोगों को निकाला था।
2. ऑपरेशन देवी शक्ति (2021): भारत ने 2021 में ‘ऑपरेशन देवी शक्ति’ के तहत अफगानिस्तान से सैकड़ों भारतीयों को निकाला था। यह अभियान अफगानिस्तान में 2021 में तालिबान के कब्जे के बाद चलाया गया था, जहां सैकड़ों भारतीय फंसे रह गए थे।
3. ऑपरेशन वंदे भारत (2021): भारत ने ‘वंदे भारत मिशन’ की शुरुआत उन भारतीय नागरिकों की स्वदेश वापसी के लिए की, दुनियाभर में कोरोना महामारी शुरू होने के बाद विदेश में फंसे हुए थे। 30 अप्रैल 2021 तक, ऑपरेशन के विभिन्न चरणों के माध्यम से लगभग 60 लाख भारतीयों को वापस लाया गया।
4. ऑपरेशन समुद्र सेतु (2020): कोरोना महामारी के दौरान विदेश में रह रहे भारतीयों को देश लाने के लिए 5 मई 2020 को एक नौसैनिक अभियान ‘ऑपरेशन समुद्र सेतु’ शुरू किया गया था। 3,992 भारतीय नागरिकों को समुद्र के रास्ते देश वापस लाया गया। 55 दिनों से अधिक समय तक चले मिशन में भारतीय नौसेना के जहाजों ने 23,000 किलोमीटर से अधिक की यात्रा की थी।
5. ऑपरेशन मैत्री (2015): भारत ने 2015 के नेपाल भूकंप के बाद ‘ऑपरेशन मैत्री’ शुरू कर दिया था। सैन्य और निजी विमानों का उपयोग करके सेना-वायु सेना के एक संयुक्त अभियान के तहत 5,000 से अधिक भारतीयों को नेपाल से देश लाया गया था। इस दौरान, भारतीय सेना ने अमेरिका, ब्रिटेन, रूस और जर्मनी से 170 विदेशी नागरिकों को भी सुरक्षित बाहर निकाला था।
6. ऑपरेशन राहत (2015): 2015 में यमन में गृह युद्ध शुरू हो गया था। बाद में सऊदी अरब के नो-फ्लाई जोन घोषणा की वजह से हजारों भारतीय फंस गए और यमन की विमानन यात्रा भी रुक गई। भारत ने शुरू में समुद्र के रास्ते अपने नागरिकों को निकालने का विकल्प चुना। अगले कुछ हफ्तों में, भारत ने यमन में फंसे 4,640 भारतीयों के अलावा 41 से अधिक देशों से 960 विदेशी नागरिकों को बचाया।
7. ऑपरेशन सेफ होमकमिंग (2011): भारत ने युद्धग्रस्त लीबिया में फंसे अपने नागरिकों को बचाने के लिए 2011 में ‘ऑपरेशन होमकमिंग’ शुरू किया था। इसके तहत लीबिया से 15,400 भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी कराई गई थी।
8. ऑपरेशन सुकून (2006): जुलाई 2006 में, इस्राइल और लेबनान के बीच युद्ध छिड़ने के बाद, भारत सरकार ने अपने फंसे हुए नागरिकों को निकालने के लिए ‘ऑपरेशन सुकून’ लॉन्च किया। नौसैनिक बचाव अभियान में जुलाई-अगस्त 2006 के बीच 2,280 व्यक्तियों को निकाला गया था। इनमें कुछ नेपाली और श्रीलंकाई नागरिक भी शामिल थे।
भारी बर्फबारी के बीच खुले बद्रीनाथ धाम के कपाट, जयकारों के बीच नाचने लगे श्रद्धालु..
उत्तराखंड: बर्फबारी और कड़ाके की ठंड के बीच भू-बैकुंठ बद्रीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुल गए हैं। वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ आज गुरुवार सुबह 7 बजकर 10 मिनट पर बद्रीनाथ धाम के कपाट खोल दिए गए हैं। कपाट खुलने के इस पावन मौके पर अखंड ज्योति के दर्शन करने के लिए सैकड़ों श्रद्धालु धाम पहुंचे तो यात्रा पड़ावों पर चहल-पहल भी शुरू हो गई है।
कपाट खुलने के दौरान हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा हुई तो वहीं परिसर में सेना की मधुर धुन पर यात्री भी थिरके। बद्रीनाथ के सिंह द्वार से यात्रियों के दर्शन शुरू हो गए हैं। कपाट खुलने के दौरान धाम में करीब 20 हजार तीर्थयात्री पहुंचे। कपाटोद्घाटन के लिए टिहरी राजा के प्रतिनिधि के रूप में माधव प्रसाद नौटियाल भी धाम में मौजूद रहे।
वहीं बद्रीनाथ यात्रा को लेकर तीर्थयात्रियों में भी उत्साह और उल्लास का माहौल है। यात्रा पड़ावों पर जगह-जगह तीर्थयात्रियों का जमावड़ा लगना शुरू हो गया है। बद्रीनाथ में तीर्थयात्रियों और स्थानीय श्रद्धालुओं के करीब 400 वाहन पहुंच गए हैं। बद्रीनाथ के साथ ही धाम में स्थित प्राचीन मठ-मंदिरों को भी गेंदे के फूलों से सजाया गया है।
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माणा में ग्रामीणों की चहल-पहल शुरू..
इस बार बद्रीनाथ हाईवे पर कंचन गंगा और रड़ांग बैंड में हिमखंड पिघल गए हैं। यहां अलकनंदा के किनारे कुछ जगहों पर ही बर्फ जमी है। बद्रीनाथ धाम के आंतरिक मार्गों पर अभी भी बर्फ है, जिसे नगर पंचायत बद्रीनाथ के पर्यावरण मित्रों की ओर से साफ किया जा रहा है।
वर्ष 2013 की आपदा में बह चुके लामबगड़ बाजार में भी दुकानें खुलने लगी हैं। देश के प्रथम गांव माणा में भी ग्रामीणों की चहल-पहल होने लगी है। बुधवार को बद्रीनाथ धाम पहुंंचे अधिकांश श्रद्धालु माणा गांव पहुंचे। बद्रीनाथ में आर्मी हेलीपैड से मंदिर परिसर तक साफ-सफाई का काम भी पूरा हो गया है।
जानिए मनरेगा योजना के लिए बजट घटाने के आरोप कितने सही..
देश-विदेश: केंद्र सरकार ने 2005 में जब मनरेगा योजना की शुरुआत की थी, यह असंगठित श्रमिकों के बीच बहुत लोकप्रिय हुई थी। अपने घर के आसपास काम के अवसर पाने के कारण श्रमिकों में इसे लेकर बहुत उत्साह देखा गया। आरोप यहां तक हैं कि शहरों और पंजाब जैसे राज्यों में काम करने के लिए श्रमिकों की कमी होने लगी, क्योंकि श्रमिकों ने अपने घरों के आसपास अपेक्षाकृत कम पारिश्रमिक में भी काम करने को ज्यादा बेहतर समझा।
लेकिन समय के साथ परिस्थितियां बदल रही हैं और एक बार फिर रोजगार की तलाश में श्रमिक शहरों की ओर रुख करने लगे हैं। संभवतः यही कारण है कि मनरेगा योजना के अंतर्गत आवेदन करने वाले श्रमिकों की संख्या में तेजी से गिरावट आ रही है।
राष्ट्रीय स्तर पर मनरेगा योजना के अंतर्गत रजिस्टर्ड श्रमिकों में से केवल आधे श्रमिक ही सक्रिय रह गए हैं। कई राज्य आवंटित धनराशि का उपयोग तक नहीं कर पा रहे हैं। इसके कारण सरकार ने इसके लिए आवंटित धनराशि को कम कर दिया। आरोप है कि मनरेगा योजना के कम लोकप्रिय होने के पीछे मुख्य वजह इसके फंड का सही तरीके से अमल में न लाया भी है। श्रमिकों की शिकायत है कि 15 दिन में पारिश्रमिक मिल जाने के बाद भी उन्हें समय से पारिश्रमिक नहीं मिल रहा है।
श्रमिकों की कितनी संख्या सक्रिय..
द महात्मा गांधी नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी एक्ट 2005 की आधिकारिक वेबसाइट पर दर्ज आंकड़ों के अनुसार देश में कुल 27.74 करोड़ श्रमिकों ने इस योजना के अंतर्गत रजिस्ट्रेशन कराया है। लेकिन इस समय केवल 14.26 करोड़ श्रमिक ही सक्रिय हैं। यह कुल श्रमिकों की लगभग आधी संख्या है। राज्यों के स्तर पर भी लगभग यही अनुपात देखने को मिलता है। उत्तर प्रदेश में कुल 2.87 करोड़ रजिस्टर्ड श्रमिकों में 1.50 करोड़ सक्रिय हैं, तो पश्चिम बंगाल के 2.61 करोड़ श्रमिकों में 1.39 करोड़ श्रमिक सक्रिय हैं।
बिहार, मध्यप्रदेश और राजस्थान भी मनरेगा के अंतर्गत रजिस्ट्रेशन कराने वाले श्रमिकों के मामले में सबसे आगे हैं, लेकिन इन राज्यों में भी सक्रिय श्रमिकों की संख्या लगभग आधी ही है। चूंकि, जब श्रमिकों के पास बाजार में अन्यत्र काम उपलब्ध नहीं होता है, तब वे इसके अंतर्गत कार्य करने के लिए आवेदन करते हैं, सक्रिय श्रमिकों की संख्या घटती-बढ़ती रहती है।
श्रमिकों का प्रदर्शन
असंगठित कामगार कर्मचारी कांग्रेस (KKC) के नेशनल कोऑर्डिनेटर प्रबल प्रताप शाही का कहना हैं कि देश भर से आए हजारों मनरेगा श्रमिकों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर 25 अप्रैल को प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार मनरेगा योजना के अंतर्गत आर्थिक सहायता कम कर रही है। श्रमिकों को केवल 25-30 दिन का औसतन काम दिया जा रहा है। उनका आरोप है कि सरकार इस योजना को धीरे-धीरे बंद करना चाहती है।
प्रबल प्रताप शाही ने कहा कि मनरेगा योजना कोरोना काल में श्रमिकों के लिए वरदान की तरह साबित हुई। शहरों से घरों को लौटे श्रमिकों ने इसके माध्यम से धन कमाया और अपना परिवार चलाने में सफलता पाई। 2020-21 की महामारी के दौरान इस योजना के लिए 1,11,500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। वर्ष 2021-22 के लिए 73,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे और यह 20-21 के संशोधित अनुमान 1,11,500 करोड़ रुपये से 34.5 फीसदी कम था। अनुमान है कि इस योजना से करीब 15 करोड़ परिवार जुड़े हुए हैं। आरोप है कि फंड की भारी कटौती के कारण इन परिवारों को 100 दिन का अधिकार नहीं मिल पा रहा है। मौजूदा बजट पूरे साल में औसतन 26 दिन का ही काम दे सकता है।
मनरेगा श्रमिकों की तीन मांगें..
1- मनरेगा श्रमिकों का दैनिक पारिश्रमिक बढ़ाकर 450 रुपये प्रतिदिन किया जाए।
2- मनरेगा श्रमिकों को वर्ष भर में 100 दिन के स्थान पर 150 दिन न्यूनतम कार्य करने की अनुमति दी जाए।
3- मनरेगा योजना के अंतर्गत केंद्र द्वारा स्वीकृत धनराशि 60 हजार करोड़ रुपये से बढ़ाकर तीन लाख करोड़ किया जाए।
सहायता कम नहीं हुई- भाजपा
आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ और भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने कहा कि सच्चाई यह है कि पिछले वर्ष के बजट अनुमान की तुलना में सरकार ने इस योजना के लिए ज्यादा धन आवंटित किया है। कोविड काल में इस योजना के लिए अतिरिक्त 34 हजार करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई थी। चूंकि, यह एक आपातकालीन सहायता थी, कोरोना काल के बाद इसे बंद कर दिया गया। लेकिन यह कहना सही नहीं है कि इस योजना के अंतर्गत आर्थिक सहायता कम की गई।
केंद्र सरकार ने मनरेगा योजना का लाभ लेने के लिए श्रमिकों के लिए बायोमेट्रिक पहचान अनिवार्य कर दिया है। श्रमिकों का पैसा सीधे उनके खातों में डालने की सुविधा दी गई है। इससे फर्जी श्रमिकों की संख्या में तेजी से कमी आई है। फर्जीवाड़ा कर श्रमिकों के नाम पर पैसा लेने वाले अनेक लोगों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की गई है और कई लोगों को जेल जाना पड़ा है। इससे भी श्रमिकों की कुल दिखने वाली संख्या में कमी आई है, जबकि इसका लाभ असली और इसके हकदार श्रमिकों को मिल रहा है।
अब काम की स्कीमें छांटेगी प्रदेश सरकार, एक तरह की स्कीमें होंगी मर्ज..
उत्तराखंड: राज्य के विकास की गति को नियोजित ढंग से गति देने के लिए प्रदेश सरकार अब अपनी उन योजनाओं को बंद करेगी, जो किसी काम की नहीं हैं या अव्यावहारिक हैं। एक ही तरह की योजनाओं को मर्ज कर उन्हें ज्यादा प्रभावी बनाया जाएगा। काम की योजनाएं छांटने का यह बीड़ा नियोजन विभाग ने उठाया है।
विभाग ने इस कार्य के लिए केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय की स्वायत्त संस्था राष्ट्रीय वित्त प्रबंधन संस्थान का सहयोग लिया है। अपर सचिव नियोजन रोहित मीणा के नेतृत्व में एक टीम इस कार्य को अंजाम देगी। सोमवार को सचिवालय में संस्थान के अधिकारियों के साथ बैठक में इसकी रूपरेखा तैयार की गई। इस कवायद के बाद योजनाओं की निगरानी, अनुश्रवण और उनके प्रभावी क्रियान्वयन में आसानी होगी और पात्रों को इनका अधिकतम लाभ मिल सकेगा।
विभागों में 2500 छोटी बड़ी योजनाएं..
आपको राज्य सरकार के विभागों व संस्थाओं में करीब 2500 छोटी-बड़ी योजनाएं संचालित हो रही हैं। इनमें कुछ योजनाएं एक ही तरह की हैं। मिसाल के लिए कृषि व उद्यान विभाग में बड़ा मशरूम व छोटा मशरूम की योजनाएं हैं। शहद उत्पादन की योजना उद्यान में भी है और सहकारिता विभाग में भी। इसी तरह की योजनाओं को छांटा जा रहा है।
छांटने के बाद कम हो जाएंगी स्कीमें..
ढाई हजार बड़ी-छोटी योजनाओं में से काम की योजनाएं छांटकर प्रदेश सरकार इनके लिए बजटीय प्रावधान बढ़ाने की सोच रही है। इससे योजनाओं के ज्यादा पात्रों को लाभ मिल सकेगा। इसके साथ ही केंद्र पोषित व केंद्र सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं से मेल खाने वाली योजनाओं को चुनकर उन्हें ज्यादा बजटीय प्रावधान के जरिये और प्रभावी बनाया जाएगा।
योजनाओं की एक श्रेणी बनेगी..
योजनाओं की श्रेणी वार छंटनी होगी। मसलन सभी विभागों में ऐसी योजनाओं की सूची तैयार होगी, जो रोजगार, स्वरोजगार और आजीविका बढ़ाने में सहयोग करती हैं। उन योजनाओं काे एक जगह रखा जाएगा, जो ऋण और अनुदान वाली हैं। गरीब, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, दिव्यांग, महिला, बाल कल्याण से जुड़ी अलग-अलग विभागों में संचालित हो रही योजनाओं की भी पहचान होगी। इन योजनाओं में उनको छांटा जाएगा जिन्हें एक-दूसरे के साथ मिलाया जा सकता है।
हर विभाग में बनेंगे नोडल अधिकारी..
नियोजन विभाग के सहयोग से राष्ट्रीय वित्त प्रबंधन संस्थान के विशेषज्ञ सभी योजनाओं की समीक्षा करेंगे। हर विभाग से योजनाओं के संबंध में जानकारी के लिए एक नोडल अधिकारी बनाया जाएगा। नोडल अधिकारी अपने विभाग से संबंधित योजनाओं की सूचनाएं एकत्रित करेंगे और उन्हें उपलब्ध कराएंगे।
विभागों में सैकड़ों की संख्या में छोटी-बड़ी योजनाएं हैं। पिछले कुछ वर्षों में नई योजनाएं बनीं हैं और जो पहले से बनी योजनाओं जैसी ही हैं। कुछ योजनाएं अब अप्रासंगिक और अव्यावहारिक हो गई हैं। इनकी समीक्षा की जा रही है। अपर सचिव रोहित मीणा के नेतृत्व में यह काम हो रहा है। इससे योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में मदद मिलेगी। इसके साथ ही ज्यादा से ज्यादा पात्र लोगों को इनका फायदा मिलेगा।
27 अप्रैल को खुलेंगे बद्रीनाथ धाम के कपाट..
उत्तराखंड: बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने की प्रक्रियाओं के तहत आज मंगलवार को जोशीमठ नृसिंह मंदिर से बद्रीनाथ के रावल ईश्वर प्रसाद नंबूदरी, आदि गुरू शंकराचार्य की गद्दी और गाडू घड़ा तेल कलश यात्रा के साथ योगबद्री मंदिर पांडुकेश्वर के लिए रवाना हुए। बुधवार को पांडुकेश्वर से कुबेर जी और उद्घव जी की उत्सव डोली रावल, और शंकराचार्य की गद्दी बद्रीनाथ धाम के लिए रवाना होगी। जिसके बाद 27 अप्रैल को प्रात: 7 बजकर 10 मिनट पर विधि-विधान से भगवान बद्रीनाथ जी के कपाट खोल दिए जाएंगे।
कपाट खुलते ही केदारनाथ धाम पहुंचे सीएम धामी..
बाबा केदार से मांगा प्रदेश की सुख समृद्धि का आशीर्वाद..
उत्तराखंड: केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के मौके पर सीएम पुष्कर सिंह धामी ने भी बाबा के द्वार पर शीश नवाया। सीएम धामी को सुबह कपाट खुलने के समय बाबा केदार के धाम पहुंचना था, लेकिन मौसम खराब होने के कारण वे धाम नहीं पहुंच पाए। इसके बाद मौसम ठीक होते ही सीएम केदारनाथ मंदिर पहुंचे और पूजा-अर्चना की। साथ ही प्रदेश की सुख समृद्धि का आशीर्वाद बाबा केदार से मांगा।
तीर्थयात्रियों को मिलेंगी सारी सुविधाएं..
सीएम धामी का कहना हैं कि चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं की मंगलमय यात्रा के लिए प्रदेश सरकार की ओर से सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। सभी श्रद्धालुओं को सुगमता के साथ देव दर्शन की सुविधा मिले। इसकी भी प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। उन्होंने भगवान केदारनाथ से सभी की मनोकामना पूर्ण करने की भी प्रार्थना की है। सीएम ने कहा कि इस बार चारधाम यात्रा में गत वर्ष की अपेक्षा अधिक श्रद्धालु प्रदेश में आकर चारों धामों के दर्शन कर पुण्य के भागी बनेंगे।
उत्तराखंड में तीन जिलों में एवलांच की चेतावनी..
उत्तराखंड: प्रदेश में अगले कुछ दिन मौसम खराब रहने की संभावना जताई जा रही है। पिछले कई दिनों से लोग गरमी और लू से लोग परेशान थे। जिसके चलते सुबह से ही सड़कों पर सन्नाटा छाया रहता था। लोग घरों से निकलने से बचते थे। लेकिन आज राजधानी देहरादून में भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप के बाद खुशनुमा हुए मौसम से लोगों ने राहत की सांस ली है।
उत्तराखंड में अगले 5,7 दिन खराब मौसम होने की बात सामने आई है। इसके साथ ही डीजीआरई चंडीगढ़ की ओर तीन जिलों में एवलांच की चेतावनी जारी की गई है। इसके बाद उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से भी जिलाें को अलर्ट पर रहने के निर्देश जारी किए गए हैं।
मौसम विज्ञान केंद्र ने सोमवार को उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों के ऊंचाई वाले कुछ स्थानों पर हल्की से हल्की बारिश/आंधी/बर्फबारी होने की संभावना जताई है। इसके साथ ही आज प्रदेश के शेष जिलों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है।
मौसम विज्ञान केंद्र ने आगे पूर्वानुमान लगाया है कि 3,500 मीटर और उससे अधिक ऊंचाई वाले स्थानों पर हिमपात होने की संभावना है। मौसम विभाग ने 25 अप्रैल को भी यलो अलर्ट जारी करते हुए उत्तराखंड राज्य के पर्वतीय जनपदों में बिजली चमकने और गरज के साथ बरसात होने की भी संभावना व्यक्त की है तथा उन्होंने लोगों से अपील की है कि बिजली गिरने से जनहानि भी हो सकती है इसलिए बेहद सतर्कता बरतें।
ऊंचाई वाले क्षेत्रों में एवलांच का खतरा- अगले 24 घंटे उत्तराखंड में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में एवलांच का खतरा है। रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी और चमोली को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। NDMA ने 3000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में एवलांच के खतरे की चेतावनी जारी की है।
केदारनाथ धाम में बर्फबारी का अलर्ट- केदारनाथ धाम में अगले कुछ दिनों में बर्फबारी के अलर्ट के मद्देनजर भी जिलों को अलर्ट पर रहने के निर्देश जारी किए है। प्रदेश में मौसम खराब रहने की संभावनाओं की बीच सचिव आपदा प्रबंधन ने संबंधित विभागों को भी निर्देश जारी किए हैं।
डीजीपी अशोक कुमार का कहना हैं कि केदारनाथ धाम में अगले छह से सात दिन तक बर्फबारी की संभावना जताई गई है। इसके लिए रुद्रप्रयाग पुलिस को जिला प्रशासन व संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। बर्फबारी के संबंध में सोशल मीडिया, न्यूज चैनलों, समाचार पत्रों से प्रचार-प्रसार कराने को कहा गया है।
