इमरजेंसी’ से सामने आया मिलिंद सोमन का पहला लुक..
देश-विदेश: बॉलीवुड क्वीन कंगना रणौत इन दिनों अपनी बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘इमरजेंसी’ को लेकर चर्चा में बनी हुई हैं। अभिनेत्री की यह फिल्म देश की अब तक की सबसे बड़ी राजनीतिक घटना ‘इमरजेंसी’ पर आधारित है, जिसके चलते फिल्म किसी न किसी वजह से लाइमलाइट में बनी हुई है। ‘इमरजेंसी’ रिलीज से पहले ही धमाल मचा रही है। फिल्म में कंगना तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के किरदार में नजर आने वाली हैं। इसके साथ ही फिल्म में बॉलीवुड के कईं और दिग्गज कलाकार भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आने वाले हैं। जहां पिछले दिनों फिल्म से महिमा चौधरी का लुक सामने आया था, वहीं अब अभिनेता मिलिंद सोमन के लुक और रोल का भी खुलासा हो गया है।
अभी कुछ ही देर पहले अभिनेत्री कंगना रणौत ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल पर मिलिंद सोमन का फर्स्ट लुक साझा किया। फिटनेस फ्रीक अभिनेता मिलिंद सोमन ‘इमरजेंसी’ में फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ का अहम किरदार निभाते नजर आएंगे। 3 अप्रैल, 1914 को पंजाब के अमृतसर में जन्में सैम भारतीय सेना का एक अहम हिस्सा थे और उनकी ख्याति भारत के साथ-साथ पड़ोसी देश पाकिस्तान तक फैली थी। मिलिंद के लुक की बात करें तो वह फील्ड मार्शल सैम के रूप में जंच रहे हैं। बदन पर भारतीय सेना की वर्दी, सिर पर टोपी और बड़ी-बड़ी मूछों के साथ मिलिंद इसमें कभी न देखे अंदाज में नजर आ रहे हैं। उनका किरदार फिल्म में बेहद ही दमदार होने वाला है।
कंगना रणौत ने मिलिंद सोमन का फर्स्ट पोस्टर साझा करते हुए लिखा है, ‘मैं आपके सामने मिलिंद सोमन को सैम मानेकशॉ के किरदार में पेश करती हूं। भारत-पाक युद्ध के दौरान भारत की सीमाओं को बचाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सैम, जिनकी सेवा उनकी ईमानदारी के रूप में प्रतिष्ठित थी। आपातकाल में आकर्षक युद्ध नायक और एक दूरदर्शी नेता।’
मिलिंद सोमन से कंगना ने फिल्म से अभिनेत्री महिमा चौधरी, अभिनेता श्रेयस तलपड़े और अनुपम खेर के लुक को रिविल कर चुकी हैं। आपको बता दें महिमा चौधरी ‘इमजेंसी’ में गांधी-नेहरू परिवार की करीबी भारतीय सांस्कृतिक कार्यकर्ता और लेखिका पुपुल जयकर की भूमिका निभाते हुए नजर आएंगी। इसके साथ ही श्रेयस तलपड़े भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी और अनुपम खेर जय प्रकाश नारायण के दमदार रोल निभाते दिखाई देंगे। कंगना की इस फिल्म की शूटिंग पूरे जोरों शोरों पर चल रही है और यह फिल्म अगले साल 25 जून, 2023 को रिलीज की जाएगी।
भूपेंद्र सिंह चौधरी बने भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष..
देश-विदेश: भाजपा ने लोकसभा चुनाव 2024 का एलान करते हुए यूपी भाजपा के अध्यक्ष की घोषणा कर दी है। वर्तमान सरकार में पंचायती राज मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी को यह पद दिया गया है। इसके साथ पहली बार ऐसा हुआ है जब एक जाट नेता को कमान दी गई है। भाजपा के ‘एक व्यक्ति एक पद’ के अनुशासन के अनुसार, अध्यक्ष पद के लिए नाम घोषित होने के बाद चौधरी को मंत्री पद से इस्तीफा देना होगा। 54 वर्षीय भूपेंद्र चौधरी 2016 में पहली बार विधान परिषद सदस्य चुने गए थे। 2017 में प्रदेश में सरकार बनने पर उन्हें पंचायती राज विभाग का राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार बनाया गया था।
आपको बता दे कि भाजपा के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी का कहना हैं कि पार्टी और कार्यकर्ताओं की अपेक्षाओं के अनुसार काम करूंगा। भाजपा को आगे ले जाने के लिए काम करेंगे। उनका कहना हैं कि भाजपा के असंख्य कार्यकर्ता हमेशा चुनाव के मोड़ में रहते है। उन्होंने कहा कि बहुत से ऐसे कार्यकर्ता थे जो मुझसे अच्छा काम कर सकते थे लेकिन पार्टी ने उन्हें मौका दिया है नेतृत्व की अपेक्षाओं के अनुसार काम करेंगे। उन्होंने कहा कि पिछले चार चुनाव से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अपार सफलता मिली है।
कार्यकर्ताओं ने मेहनत से अच्छे परिणाम दिए है। मोदी के नेतृत्व में सफलता के इस क्रम को लगातार जारी रखेंगें। उन्होंने कहा कि यूपी में बूथ स्तर तक भाजपा का संगठन खड़ा है। 2024 में सभी 80 सीटों पर पार्टी की जीत होगी। 2019 में मंत्रिमंडल फेरबदल में चौधरी को कैबिनेट मंत्री बनाया गया। योगी आदित्यनाथ सरकार 2.0 में चौधरी को पुनः कैबिनेट मंत्री बनाते हुए पंचायती राज विभाग की जिम्मेदारी दी गई। चौधरी हाल ही में पुनः विधान परिषद सदस्य निर्वाचित हुए हैं।
राज्य आंदोलनकारी दिवंगत अवतार सिंह राणा के 77 वें जन्मदिन पर किया फल वितरण..
श्रद्धांजलि देते हुए दिवंगत आंदोलनकारी को किया याद..
रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड क्रांति दल के वरिष्ठ नेता और राज्य आंदोलनकारी अवतार सिंह राणा की 77वीं जयंती पर उनके कार्यों को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस मौके पर जिला चिकित्सालय में सीएमएस डाॅ आरएस पाल की देख-रेख में मरीजों को फल वितरित किए गए।
उक्रांद के युवा नेता मोहित डिमरी के नेतृत्व में दल, सामाजिक कार्यकर्ताओं और उत्तराखंड राज्य आंदोलन में योगदान देने वाले लोगों ने राज्य आंदोलनकारी अवतार सिंह राणा के जन्म दिवस को सद्भावना दिवस के रूप में मनाया। उन्होंने उत्तराखंड आंदोलन में जीवन खपा देने वाले कार्यकर्ताओं का भावपूर्ण स्मरण किया और कहा कि इन लोगों के त्याग, संघर्ष और बलिदान से ही उत्तराखंड राज्य प्राप्त हुआ। राज्य बनने के 22 वर्षों बाद भी कई सपने अधूरे हैं, इसके लिए सतत कार्य और संघर्ष करने की जरूरत है।
उत्तराखंड क्रांति दल, पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष राय सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड क्रांति दल के कार्यकर्ताओं के त्याग, बलिदान से ही राज्य निर्माण संभव हो पाया। अब राज्य की राजधानी गैरसैंण, मूल निवास, जंगली जानवरों के आतंक से छुटकारा, स्थानीय संसाधनों पर मूल लोगों का पहला अधिकार आदि मुद्दों पर कार्य करने की आवश्यकता है।
राणा के अनन्य सहयोगी रहे पत्रकार अनसूया प्रसाद मलासी ने बताया कि राज्य आंदोलन में जनपद के संघर्षशील दिवंगत विभूतियों के कार्यों और योगदान को लिपिबद्ध किया जाएगा। इससे अगली पीढ़ी इन महापुरुषों के जीवन संघर्ष को याद करे और उनसे सीख ले सके। उन्होंने कहा कि अवतार सिंह राणा की स्मृति को संजोये रखने के लिए निरंतर कार्य किया जाएगा।
उक्रांद के वरिष्ठ नेता सुंदर सिंह राणा ने कहा कि स्वर्गीय राणा का जीवन संघर्ष से भरा रहा है। रंगमंच के कलाकार से लेकर पहाड़ तक लगातार वे संघर्ष करते रहे। बाद में उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए। उनके चित्र पर अनिल भट्ट, हर्षवर्धन सिंह राणा, कुलदीप सिंह राणा आदि ने माल्यार्पण कर पुष्पांजलि अर्पित की।
जयवीर शेरगिल का कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा..
देश-विदेश: कांग्रेस नेता जयवीर शेरगिल ने कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद से इस्तीफा दे दिया है। शेरगिल ने सोनिया गांधी को लिखे अपने इस्तीफे में लिखा, “मुझे यह कहते हुए दुख हो रहा है कि निर्णय लेना अब जनता और देश के हित में नहीं है, बल्कि उन लोगों के स्वार्थ से प्रभावित है जो चाटुकारिता में लिप्त हैं।” और लगातार वास्तविक दुनिया की उपेक्षा कर रहा है।
इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि पार्टी राष्ट्र और लोगों के व्यक्तिगत हितों को प्राथमिकता देती है।जबकि सार्वजनिक और राष्ट्रीय हितों की अनदेखी की जा रही है। शेरगिल ने अपने पत्र में कहा कि प्राथमिक कारण यह है कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वर्तमान निर्णय निर्माताओं की विचारधारा और दूरदृष्टि अब युवाओं और आधुनिक भारत की आकांक्षाओं के अनुरूप नहीं है।
पेशे से वकील शेरगिल कांग्रेस के युवा नेताओं के जाने माने सदस्य थे। वह पंजाब का रहने वाला हैं। शेरगिल का इस्तीफा तब आया है जब लगातार युवा कांग्रेस के नेताओं ने संगठन से अपने प्रस्थान की घोषणा की है। पार्टी छोड़ने वाले प्रमुख कांग्रेस नेताओं में ज्योतिरादित्य सिंधिया और जितिन प्रसाद भी शामिल हैं, जो अब भाजपा सरकार में अहम पदों पर हैं।
कोरोना के सक्रिय केस घटकर 96 हजार हुए, 24 घंटे में 36 मौतें..
देश-विदेश: देश में कोरोना के नए मामलों व सक्रिय केस की संख्या में लगातार उतार चढ़ाव जारी है। बीते 24 घंटे में कोरोना संक्रमण के 10,649 नए मामले सामने आए। इस दौरान 36 लोगों की मौत हुई। वहीं, सक्रिय केस की संख्या घटकर 96,442 हो गई है। अब देश में संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर 4,43,68,195 हो गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के बुधवार सुबह आठ बजे जारी आंकड़ों के अनुसार कुल मृतक संख्या बढ़कर 5,27,452 हो गई। बुधवार को सामने आए मौतों के 36 मामलों में चार वो लोग भी शामिल हैं, जिनके नाम केरल ने अब मृतकों की सूची में जोड़े हैं। पिछले 24 घंटे में सक्रिय केस में 64 मामलों की कमी आई है। मरीजों के ठीक होने की राष्ट्रीय दर 98.59 फीसदी है।
शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए धन की नहीं होगी कमी..
डीएम ने किया राबाइंका एवं महाविद्यालय अगस्त्यमुनि का औचक निरीक्षण..
रुद्रप्रयाग। छात्र-छात्राओं के उज्जवल भविष्य को लेकर उन्हें गुणवत्ता शिक्षा मुहैया कराने के लिए जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने राजकीय बालिका इंटरमीडिएट काॅलेज एवं राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय अगस्त्यमुनि का औचक निरीक्षण कर शिक्षा की गुणवत्ता व व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
राबाइंकाॅ के निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने प्रभारी प्रधानाचार्य को निर्देश दिए कि शिक्षा की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं होनी चाहिए।
इसके लिए सभी छात्राओं को बेहतर से बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराई जाए। इस दिशा में सभी शिक्षकों को कड़ी मेहनत एवं परिश्रम करने की आवश्यकता है, जिससे कि शिक्षा की गुणवत्ता और बेहतर हो सके। जिसके लिए सभी को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने की जरूरत है। जिलाधिकारी ने विद्यालय परिसर सहित बायो, कैमिस्ट्री व कंप्यूटर लैब का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने कक्षा 9वीं में अध्यनरत छात्राओं से फीड बैक लेते हुए उनके पसंदीदा विषयों से संबंधित सवाल पूछते हुए उनको कैरियर संबंधी टिप्स भी दिए।
उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में सफलता पाने के लिए कठिन परिश्रम व आत्मविश्वास का होना आवश्यक है। तभी हम लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं। उन्होंने छात्राओं से कहा कि पठन-पाठन के साथ उन्हें व्यवहारिक ज्ञान का होना भी आवश्यक है। पहली बार जिलाधिकारी को अपने बीच पाकर छात्राएं काफी उत्साहित दिखी। जिलाधिकारी ने प्रभारी प्रधानाचार्य को निर्देश दिए कि यदि विद्यालय में किसी उपकरण एवं सामग्री की आवश्यकता है तो उसके लिए प्रस्ताव उपलब्ध कराने को कहा, ताकि इसके लिए तत्काल धनराशि निर्गत कराई जा सके। उन्होंने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए धन की कहीं कमी नहीं होने दी जाएगी।
जिलाधिकारी ने शिक्षा सहित विद्यालय परिसर की साफ-सफाई, शौचालय, कक्षा आदि व्यवस्थाओं का जायजा लिया। प्रभारी प्रधानाचार्य ने विद्यालय में गैर सरकारी संगठन गेल इंडिया द्वारा किए गए कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि संस्था ने विद्यालय में 25 सेट फर्नीचर देने के साथ ही प्रोजेक्टर उपलब्ध कराया है। इसके साथ ही विद्यालय में पेंटिंग का कार्य भी संस्था द्वारा किया गया है।
इस दौरान जिलाधिकारी ने राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय का निरीक्षण कर छात्र-छात्राओं को उपलब्ध कराई जा रही शिक्षा की गुणवत्ता के साथ व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया। जिलाधिकारी ने प्राचार्य से कहा कि बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं के विषयों की पुस्तकें भी उपलब्ध कराई जाएं, जिससे कि शिक्षा के साथ-साथ उन्हें विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियों के अवसर भी उपलब्ध हो सकें।
उन्होंने कहा कि महाविद्यालय में विभिन्न प्रयोगशालाओं में यदि किसी प्रकार के उपकरणों एवं फर्नीचर की आवश्यकता है, तो उसके लिए प्रस्ताव उपलब्ध कराने को कहा। ताकि इसके लिए धनराशि उपलब्ध कराई जा सके। निरीक्षण के दौरान मुख्य शिक्षा अधिकारी यशवंत सिंह चैधरी, प्राचार्य डाॅ. पुष्पा नेगी, प्रभारी प्रधानाचार्य जीजीआईसी रागिनी नेगी, डाॅ. जितेंद्र सिंह, सहित लक्ष्मी रावत, माहेश्वरी रावत, कुसुम रावत, अनीता जगवाण, संगीता राणा आदि अध्यापिकाएं उपस्थित रहीं।
मुंबई के बड़े होटल में बम की सूचना से हड़कंप..
डिफ्यूज करने के लिए पांच करोड़ रुपये की मांग..
देश-विदेश: मुंबई के एक होटल में उस समय हड़कंप मच गया जब एक अज्ञात व्यक्ति ने फोन कर बताया कि होटल में चार जगहों पर बम रखे हैं। इतना ही नहीं अज्ञात कॉलर ने बम डिफ्यूज करने के लिए पांच करोड़ रुपए की मांग भी की हैं। वहीं कॉल के तुरंत बाद सहार थाने में इसकी सूचना दी गई जिसके बाद पुलिस ने धारा 336, 507 के तहत मामला दर्ज कर लिया। सहार पुलिस थाने के एक अधिकारी का कहना हैं कि प्रारंभिक जांच के अनुसार, यह एक शरारत और एक फर्जी कॉल लग रहा है। उन्होंने कहा कि कई टीमों का गठन किया गया है और फोन करने वाले को पकड़ने के प्रयास जारी हैं।
सिडकुल में बीच सड़क पर मिला दो साल की बच्ची का शव..
उत्तराखंड: हरिद्वार में सिडकुल थाना क्षेत्र में मंगलवार को एक दो साल की बच्ची का शव मिलने की खबर से पुलिस में हड़कंप मच गया। जानकारी के अनुसार, हजारा गांव जाने वाले रास्ते पर बच्ची का शव मिला है। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लिया और पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया है। थाना प्रभारी प्रमोद उनियाल का कहना हैं कि मामले की जांच की जा रही है। वहीं बच्ची का पिता फरार बताया जा रहा है।
रोडवेज बसाेंं में अब QR कोड से मिलेगी टिकट..
गूगल-पे सहित ई-वॉलेट से कर सकेंगे पेमेंट..
उत्तराखंड: उत्तराखंड रोडवेज की बसों में कैशलेस टिकट भुगतान की व्यवस्था लागू हो गई है। अब यात्री अपने मोबाइल फोन पर उपलब्ध गूगल पे, फोन पे, भीम यूपीआई जैसे ई-वॉलेट के माध्यम से भी टिकट का भुगतान कर पाएंगे। टिकट मशीन से क्यूआर कोड स्कैन करके टिकट का भुगतान कर सकेंगे। एंड्रॉइड ई-टिकट मशीनें आने के बाद परिवहन निगम ने अब सभी डिपो की बसों में नई सुविधा शुरू कर दी है।
इससे खुले पैसे रखने सहित कई प्रकार की समस्याओं का समाधान भी होगा। हल्द्वानी डिपो के एआरएम एसएस बिष्ट का कहना हैं कि मुख्यालय से क्यूआर कोड टिकट भुगतान की व्यवस्था लागू करने का आदेश जारी हो गया है। रविवार से सभी टिकट मशीनों में नया फीचर अपडेट हो गया है। कैशलेस भुगतान करने के लिए यात्री अब परिचालक से क्यूआर कोड से भुगतान का विकल्प मांग सकते हैं।
– नरेन्द्र सहगल
वरिष्ठ स्तंभकार
चिर सनातन अखण्ड भारत की सर्वांग स्वतंत्रता के लिए कटिबद्ध राष्ट्रीय स्वयंसेवक के संस्थापक डॉ. हेडगेवार स्वतंत्रता संग्राम के एक ऐसे अज्ञात सेनापति थे, जिन्होंने अपने तथा अपने संगठन के नाम से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में अपना सब कुछ भारत माता के चरणों में अर्पित कर दिया था. बाल्यकाल से लेकर जीवन की अंतिम श्वास तक भारत की स्वतंत्रता के लिए जूझते रहने वाले इस महान स्वतंत्रता सेनानी ने न तो अपनी आत्मकथा लिखी और न ही इतिहास और समाचार पत्रों में अपना तथा अपनी संस्था का नाम प्रकट करवाने का कोई प्रचलित हथकंडा ही अपनाया.
डॉ. हेडगेवार तो लोकमान्य तिलक, लाला लाजपत राय, बिपिन चंद्र पाल, त्रलोक्यनाथ, सरदार भगत सिंह, वीर सावरकर, सुभाष चंद्र बोस, रासबिहारी बोस, श्याम जी कृष्ण वर्मा जैसे असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों की श्रेणी के महापुरुष थे, जिन्हें स्वाधीनता प्राप्ति के बाद सत्ता पर बैठने वाले शासकों ने पूर्णतया दरकिनार कर स्वतंत्रता संग्राम का पट्टा अपने नाम लिखवा लिया. आजाद हिंद फौज, अभिनव भारत, गदर पार्टी, अनुशीलन समिति, हिंदुस्तान समाजवादी प्रजातांत्रिक सेना, हिन्दू महासभा, आर्य समाज और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसी संस्थाओं के योगदान को धत्ता बताकर स्वतंत्रता संग्राम को एक ही नेता और एक ही दल के खाते में जमा कर देना एक राजनीतिक अनैतिकता और ऐतिहासिक अन्याय नहीं तो और क्या है?
उपरोक्त संदर्भ में सबसे अधिक घोर अन्याय डॉ. हेडगेवार के साथ हुआ, जिसने सशस्त्र क्रांति से लेकर सभी अहिंसक आंदोलनों एवं सत्याग्रहों में न केवल अग्रणी भूमिका ही निभाई, अपितु स्वतंत्रता संग्राम को राष्ट्रीय दिशा देने का भरपूर प्रयास भी किया. डॉ. हेडगेवार की इस महत्वपूर्ण पार्श्व भूमिका को स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भ में समझना वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है. इस ऐतिहासिक सच्चाई से कौन इंकार करेगा कि सन् 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के पश्चात समस्त भारत में तेज गति से हो रहे हिन्दुत्व के जागरण, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के पुर्नस्थापन, चातुर्दिक क्रांतिकारी गतिविधियों, भारतीयों की स्वातंत्र्य प्राप्ति के लिए उत्कट इच्छा को कुचलकर उसे दिशा भ्रमित करने के लिए एक कट्टरपंथी ईसाई नेता ए.ओ. ह्यूम ने 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना की थी.
ये प्रारम्भिक कांग्रेस अंग्रेज हुकूमत का सुरक्षा कवच (सेफ्टी वाल्व) था. अतः अंग्रेजों की इसी कुटिल चाल को विफल करने, भारतीयता को विदेशी और विधर्मी षड्यंत्रों से बचाने और स्वतंत्रता संग्राम को राष्ट्रीय सनातन आधार प्रदान करने के लिए डॉ. हेडगेवार ने 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थी. यह संघ भारत की सनातन राष्ट्रीय पहचान ‘हिन्दुत्व’ का सुरक्षा कवच था और है. राष्ट्र की सर्वांग स्वतंत्रता एवं सर्वांग सुरक्षा के लिए देशभक्त स्वतंत्रता सेनानियों का शक्तिशाली संगठन.
डॉ. हेडगेवार की सबसे बड़ी चिंता यह थी कि सैन्य पौरुष, ज्ञान विज्ञान, अतुलनीय समृद्धि, गौरवशाली संस्कृति इत्यादि सब कुछ होते हुए भी हम परतंत्र क्यों हुए? परतंत्रता के कारणों को जाने बिना स्वतंत्रता प्राप्ति के सभी प्रयासों का परिणाम अच्छा नहीं होगा, यही हुआ भी. सदियों पुराने राष्ट्र का दुखित विभाजन और आधी-अधूरी राजनीतिक स्वतंत्रता.
डॉ. हेडगेवार ने तत्कालीन सभी राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक संस्थाओं एवं आंदोलनों में भागीदारी करने के बाद मंथन में से यह निष्कर्ष निकालकर स्वतंत्रता सेनानियों, नेताओं, संतों महात्माओं सहित सभी भारतवासियों के सामने रखा – ‘‘हमारे समाज और देश का पतन मुस्लिम हमलावरों या अंग्रेजों के कारण नहीं है. अपितु, राष्ट्रीय भावना शिथिल होने पर व्यक्ति और समष्टि के वास्तविक संबंध बिगड़ गये तथा इस प्रकार की असंगठित व्यवस्था के कारण ही एक समय दिग्विजय का डंका दसों दिशाओं में बजाने वाला हिन्दू (भारतीय) समाज सैकड़ों वर्षों से विदेशियों की आसुरिक सत्ता के नीचे पददलित है’’. डॉ. हेडगेवार मानते थे कि भारत के वैभव, पतन, संघर्ष और उत्थान का इतिहास हिन्दुओं के सामाजिक उतार चढ़ाव के साथ जुड़ा हुआ है. अर्थात भारत की परतंत्रता के लिए हिन्दुओं में व्याप्त हो चुका जातिवाद, अंतर्कलह, एक दूसरे को नीचा दिखाने की मनोवृत्ति, असंगठित व्यवस्था और छुआछूत की भयंकर बीमारी इत्यादि ही देश की पतन अवस्था के लिए जिम्मेदार हैं.
इसलिए देश को स्वतंत्र करने एवं बाद में स्वतंत्रता को सुरक्षित रखने के लिए देश के बहुसंख्यक प्राचीन राष्ट्रीय समाज हिन्दू को संगठित, शक्तिशाली, चरित्रवान, स्वदेशी, स्वाभिमानी बनाना अति आवश्यक है. डॉ. हेडगेवार के इसी चिंतन ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को जन्म दिया. अद्भुत कार्यपद्धति की सर्वोत्तम विशेषता यही है कि उन्होंने हिन्दू संगठन और स्वतंत्रता संग्राम में भागीदारी के दोनों मुख्य काम एक साथ करने में सफलता प्राप्त की.
डॉ. हेडगेवार द्वारा प्रदत हिन्दुत्व की कल्पना और अवधारणा में सभी भारतवासी शामिल हैं. जो भी भारतवर्ष को अपनी मातृभूमि, पितृभूमि और पुण्य भूमि मानता है, वह व्यक्ति हिन्दू ही है. हिन्दुत्व किसी जाति मजहब का परिचायक न होकर भारत की सनातन काल से चली आ रही राष्ट्रीय जीवन व्यवस्था है. देश के भूगोल और संस्कृति की पहचान है हिन्दुत्व. कथित रूप से कहे जाने वाले अल्पसंख्यक समाज इसी राष्ट्रीय पहचान का अभिन्न हिस्सा हैं. इसलिए हिन्दुत्व ही वह आधार है, जिस पर सभी भारतवासियों की एकता सम्भव है.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना किसी विशेष मजहब, जाति या दल के विरोध में नहीं हुई. भारत को स्वतंत्र करवाना और स्वतंत्रता को सुरक्षित रखना संघ का एकमात्र लक्ष्य था और आज भी है. संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवार ने बाल्यकाल से ही अंग्रेजी साम्राज्य का विद्रोह शुरू कर दिया था. उनके बचपन की तीन घटनाएं उनके द्वारा भविष्य में स्थापित होने वाले शक्तिशाली संगठन और उसके महान उद्देश्य का शिलान्यास थीं. बाल केशव हेडगेवार द्वारा स्कूल में महारानी विक्टोरिया के जन्मदिन पर बंटने वाली मिठाई को यह कहकर कूड़ेदान में फैंक दिया गया – ‘‘मैंने अंग्रेजी साम्राज्य को कूड़ेदान में फेंक दिया है, विदेशी राजा के जन्मदिन पर बांटी गई मिठाई को मैं नहीं खा सकता’’. नागपुर के सीताबर्डी किले पर लगे यूनियन जैक (अंग्रेजों का झंडा) के स्थान पर भगवा ध्वज लहराने के लिए घर के एक कमरे में ही अपने बाल सखाओं के साथ सुरंग खोदने का काम शुरु कर देना.
नागपुर के नीलसिटी हाई स्कूल में पढ़ते समय वंदे मातरम गीत पर लगे प्रतिबंध को तोड़कर सभी कक्षाओं में बच्चों द्वारा वंदे मातरम के उद्घोष करवाना, आदि घटनाएं उनके भीतर जन्म ले चुके अंग्रेज विरोध तथा स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए प्रत्येक प्रकार का बलिदान करने की दृढ़ता को दर्शाता है. वंदेमातरम गायन पर लगे प्रतिबंध को तोड़ने की सजा मिली ‘स्कूल से निष्काष्न’. किसी तरह पुणे में जाकर विद्यालय की शिक्षा पूरी की. तत्पश्चात उस समय के राष्ट्रीय नेताओं की योजना तथा व्यवस्थानुसार कलकत्ता के नेशनल मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लिया. उद्देश्य था – उस समय के सबसे बड़े क्रांतिकारी संगठन ‘अनुशीलन समिति’ का सदस्य बनकर देश भर के सभी क्रांतिकारियों से संबंध स्थापित कर लेना. वे इस महान कार्य में सफल हुए और 6 वर्ष के बाद डॉक्टरी की डिग्री और सशस्त्र क्रांति का प्रशिक्षण व अनुभव लेकर नागपुर लौट आए. परन्तु डॉक्टरी का व्यवसाय नहीं किया और न ही विवाह किया. अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया.
1915 में प्रथम विश्व युद्ध के बादल मंडराने लगे थे. डॉ. हेडगेवार ने इस अवसर पर पूरे देश में विप्लव करके अंग्रेजों को उखाड़ फैंकने की योजना पर कार्य किया. देश भर में क्रांतिकारियों को तैयार करने, प्रत्येक स्थान पर हथियार भेजने एवं क्रांति का बिगुल बजाने की तैयारी हो गई. परन्तु उस समय के कांग्रेस नेताओं का साथ न मिलने से यह योजना साकार नहीं हो सकी. तो भी देश की स्वतंत्रता के लिए गहन चिंतन और परिश्रम जारी रहा. सभी मार्गों का अनुभव लेने, उनमें भागीदारी करने और उनके संचालन के लिए वे सदैव तत्पर रहते थे. डॉ. हेडगेवार कांग्रेस के अमृतसर अधिवेशन में भी गए, उन्हें मध्यप्रदेश कांग्रेस का सह-सचिव का पद भी सौंपा गया. नागपुर में सम्पन्न हुए कांग्रेस के अखिल भारतीय अधिवेशन में मुख्य व्यवस्थापकों में भी थे. उन्होंने इस अधिवेशन में पूर्ण स्वतंत्रता का प्रस्ताव भी रखा था जो पारित नहीं हो पाया.
डॉ. हेडगेवार ने कांग्रेस के भीतर रहकर अखंड भारत, सर्वांग स्वतंत्रता और शक्तिशाली हिन्दू संगठन की आवश्यकता का वैचारिक आधार तैयार करने का पूरा प्रयास किया था. वे कांग्रेस के मंचों पर अंग्रेजों के विरुद्ध उग्र भाषण देने लगे. ऐसे ही एक उग्र भाषण पर डॉ. हेडगेवार को गिरफ्तार कर लिया गया. उन पर मई 1921 में राजद्रोह का मुकदमा चलाया गया. इसके एकतरफा फैसले में डॉक्टर जी को एक वर्ष के कठोर सश्रम कारावास की सजा दी गई. कारावास में भी पूर्ण स्वतंत्रता का चिंतन चलता रहा. जेल से लौटने के पश्चात भी महात्मा गांधी जी के नेतृत्व में आयोजित होने वाले सभी सत्याग्रहों एवं आंदोलनों में भाग लेते रहे.
डॉ. हेडगेवार ने विजयदशमी 1925 में नागपुर में संघ की स्थापना की. उस समय संघ के स्वयंसेवकों ने एक प्रतिज्ञा लेनी होती थी – ‘मैं अपने राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए तन-मन-धन पूर्वक आजन्म और प्रमाणिकता से प्रयत्नरत रहने का संकल्प लेता हूं.’ डॉ. हेडगेवार ने घोषणा की – ‘हमारा उद्देश्य हिन्दू राष्ट्र की पूर्ण स्वतंत्रता है, संघ का निर्माण इसी महान लक्ष्य को पूर्ण करने के लिए हुआ है.’ जब कांग्रेस ने अपने लाहौर अधिवेशन में पूर्ण स्वाधीनता का प्रस्ताव पारित किया तो डॉ. हेडगेवार ने संघ की सभी शाखाओं पर 26 जनवरी, 1930 को सायंकाल 6 बजे स्वतंत्रता दिवस मनाने का आदेश दिया. सभी शाखाओं के स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश पहनकर नगरों में पथ संचलन निकाले और स्वतंत्रता संग्राम में बढ़चढ़कर भाग लेने की प्रतिज्ञा दोहराई. ध्यान दें कि संघ ऐसी पहली संस्था थी, जिसने सबसे पहले पूर्ण स्वतंत्रता का उद्देश्य रखा था.
1930 से पहले कांग्रेस ने पूर्ण स्वतंत्रता का नाम तक नहीं लिया. यह दल हाथ में कटोरा लेकर अंग्रेजों से आजादी की भीख मांगता रहा. तो भी डॉ. हेडगेवार ने महात्मा गांधी जी के सभी सत्याग्रहों और आंदोलनों में स्वयंसेवकों को भाग लेने की अनुमति दी. गांधी जी के नेतृत्व में आयोजित असहयोग आंदोलन में स्वयं डॉ. हेडगेवार ने 6 हजार से अधिक स्वयंसेवकों के साथ ‘जंगल सत्याग्रह’ में भाग लिया था. उन्हें 9 मास के सश्रम कारावास की सजा हुई थी. इसी प्रकार 1942 में महात्मा गांधी जी के नेतृत्व में सम्पन्न ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन’ में संघ के स्वयंसेवकों ने सरसंघचालक श्री गुरुजी के आदेशानुसार भाग लिया था. इतना ही नहीं कांग्रेस के बड़े-बड़े नेताओं को संघ के कार्यकर्ताओं ने अपने घरों में शरण भी दी थी. उदाहरणार्थ, दिल्ली के उस समय के प्रांत संघचालक हंसराज गुप्त जी के घर में अरुणा आसफ अली और जय प्रकाश नारायण ठहरे थे.
राष्ट्रीय अभिलेखागार में गुप्तचर विभाग की एक रिपोर्ट सुरक्षित रखी हुई है. इस रिपोर्ट में संघ के अनेक कार्यकर्ताओं के नाम भी मिलते हैं, जो १९४२ के भारत छोड़ो आन्दोलन में भागीदारी करने के कारण विभिन्न स्थानों पर हिरासत में लिए गए और जेलों में सजा भुगती. इन रिपोर्टों से यह भी पता चलता है कि विदर्भ के चिमूर आश्थी नामक स्थान पर संघ के कार्यकर्ताओं ने स्वतंत्र सरकार की स्थापना भी कर ली थी. संघ के स्वयंसेवकों ने अंग्रेज पुलिस के अमानवीय अत्याचारों का सामना किया. गुप्तचर विभाग की रिपोर्टों से पता चलता है कि अपनी सरकार स्थापित करने के बाद सरकारी आदेशों से हुए लाठीचार्ज/गोलीबारी में एक दर्जन से ज्यादा स्वयंसेवक बलिदान हुए थे.
नागपुर के निकट रामटेक में संघ के नगर कार्यवाह रमाकांत केशव देशपांडे उपाख्य बालासाहब देशपांडे को 1942 “अंग्रेजों भारत छोड़ो” के आन्दोलन में सक्रिय भाग लेने पर मृत्युदंड की सजा सुनाई गयी थी. परन्तु बाद में उन्हें इस सजा से मुक्त कर दिया गया. इन्हीं बालासाहब देशपांडे ने बाद में वनवासी कल्याण आश्रम की स्थापना की थी.
उल्लेखनीय है कि डॉ. हेडगेवार ने द्वितीय महायुद्ध के मंडराते बादलों को भांप कर देश में एक सशक्त क्रांति करने की योजना पर सुभाष चंद्र बोस, वीर सावरकर और त्रलोक्यनाथ चक्रवर्ती के साथ गहन चर्चा की थी. इसी चर्चा में से सेना में नौजवानों की भर्ती, सेना में विद्रोह और आजाद हिंद फौज के गठन का विचार उत्पन्न हुआ था. सारी योजना तैयार हो गई और काम शुरु हो गया. नौजवान योजनाबद्ध फौज में भर्ती हुए और सुभाष चंद्र बोस द्वारा विदेशों में जाकर आजाद हिंद फौज का नेतृत्व संभाल लिया और इधर अभिनव भारत, हिन्दू महासभा, आर्य समाज, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और सभी सशस्त्र क्रांतिकारी संगठनों ने द्वितीय विश्वयुद्ध के समय अंग्रेजों के विरुद्ध क्रांति का बिगुल बजाने के लिए शक्ति अर्जित करनी प्रारम्भ कर दी.
आखिर वह समय आया जब फौज में विद्रोह हुआ और आजाद हिंद फौज भी इम्फाल तक पहुंच गई. अंग्रेजों को भय लगा, इस भयंकर विकट परिस्थिति से निपटने में अपने को असमर्थ पाकर अंग्रेजों ने अपने पहले फैसले को बदलकर 10 महीने पहले ही 15 अगस्त, 1947 को देश के विभाजन की घोषणा कर दी. पहले फैसले के अनुसार विभाजन की तिथि 8 जून, 1948 थी. यह देश का और स्वतंत्रता सेनानियों का दुर्भाग्य ही था कि कांग्रेस के नेताओं ने 1200 वर्षों से चले आ रहे स्वतंत्रता संग्राम और लाखों बलिदानी हुतात्माओं के ‘‘अखण्ड भारत की सर्वांग स्वतंत्रता’’ के उद्देश्य को ध्वस्त करते हुए देश का विभाजन स्वीकार करके आधी-अधूरी आजादी प्राप्त कर ली. यदि एक वर्ष और ठहर जाते तो स्वतंत्रता भी मिलती और भारत का विभाजन भी न होता.
विभाजन के बाद महात्मा गांधी जी ने एक पत्र लिखकर कांग्रेस के नेताओं को सुझाव दिया था कि अब कांग्रेस को समाप्त करके इसे एक सेवादल में परिवर्तित कर दो. महात्मा गांधी जी की इस इच्छा को ठुकरा दिया गया. उधर, संघ के द्वितीय सरसंघचालक माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर ने स्वयंसेवकों को तेज गति से अपनी शक्ति बढ़ाने का आदेश दिया. उन्होंने कहा कि ‘डॉ. हेडगेवार का उद्देश्य पूरा नहीं हुआ, उनका उद्देश्य था अखण्ड भारत की सर्वांग स्वतंत्रता और सर्वांगीण विकास. इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ 1947 के बाद भी सक्रिय रहा. कश्मीर की सुरक्षा के लिए स्वयंसेवकों ने बलिदान दिया. डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने श्रीनगर में जाकर अपनी कुर्बानी दी. स्वयंसेवकों ने हैदराबाद और गोवा की स्वतंत्रता के लिए सत्याग्रह और संघर्ष किया.
यह एक ऐतिहासिक सच्चाई है कि इन सभी संघर्षों में संघ के स्वयंसेवकों ने राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे की छत्रछाया में और तिरंगे की रक्षा के लिए बलिदान दिए हैं. उल्लेखनीय है कि डॉ. हेडगेवार द्वारा स्थापित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का अंतिम उद्देश्य है – परम वैभवशाली अखंड हिन्दू राष्ट्र. परम वैभवशाली अर्थात : सर्वांग स्वतंत्रता, सर्वांग संगठित, सर्वांग विकसित और सर्वांग सुरक्षित राष्ट्र.
