गंगा की स्वच्छता बनाये रखने के लिए प्लास्टिक का कम करें उपयोग: डबराल..
दो दिवसीय पंचायत स्तरीय गंगा दूत प्रशिक्षण कार्यक्रम संपंन
रुद्रप्रयाग। नेहरू युवा केंद्र के तत्वाधान में नमामि गंगे कार्यक्रम में युवाओं की सहभागिता परियोजना के अन्तर्गत दो दिवसीय पंचायत स्तरीय गंगा दूत प्रशिक्षण कार्यक्रम संपंन हो गया है। समापन अवसर पर जिला युवा अधिकारी राहुल डबराल ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य गंगा दूतों को परियोजना के उद्देश्यों, महत्वपूर्ण क्षेत्रों के बारे में जानकारी एवं प्रशिक्षण प्रदान करना तथा उन्हें स्वेच्छा से उनके संबंधित गांवों में परियोजना से संबंधित गतिविधियों एवं शैक्षिक गतिविधियों को करने के लिए प्रेरित करना है।
कार्यक्रम के सत्र में जिला युवा अधिकारी ने सभी प्रतिभागियों को प्लास्टिक का कम से कम उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया। रुद्रप्रयाग क्रिकेट एसोसिएशन के जिला क्रिकेट कोच प्रशांत बिष्ट ने सभी युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि जैसे वह दैनिक जीवन में खुद को स्वस्थ एवं स्वच्छ रखते हैं। वैसे ही वह गंगा की स्वच्छता को भी बनाए रखें। इस दौरान प्रतिभागियों के मध्य स्लोगन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें सभी ने गंगा नदी पर अपने विचारों को व्यक्त किया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय युवा स्वयं सेवक विजयपाल ने प्रतिभागियों के मध्य योग भी करवाया
। पर्यावरणविद् देव राघवेन्द्र सिंह चैधरी उर्फ बद्री ने बच्चों के मध्य संवाद किया। उन्होंने कहा कि हमारा जीवन पर्यावरण के बिना संभंव नहीं है। उन्होंने कहा कि हमारे मध्य तीन मुख्य समस्या है। पहला ग्लोबल वार्मिंग, द्वितीय जलवायु परिवर्तन, तृतीय मृदा कटान। उन्होंने कहा कि आप बहुत सौभाग्यशाली है कि आप उतराखण्ड के निवासी हैं और आपका दायित्व है कि आप नदियों को स्वच्छ रखें। उन्होने यह भी बताया कि उत्तराखण्ड में पौधांे की 905 प्रजातियां पाई जाती हैं तथा भारत सरकार ने एक जुलाई से सिंगल यूज प्लास्टिक को बैन कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि नदियों की स्वच्छता बनाए रखने के लिए धरातल पर कार्य करने की जरूरत है।
कार्यक्रम के अंत में जिला परियोजना अधिकारी अभिलाषा पंवार ने सभी प्रतिभागियों को गंगा को स्वच्छ रखने के साथ ही यह जानकारी समाज के सभी वर्गोे तक पहंुचाने की अपील की। इस मौके पर लेखालिपिक एवं कार्यक्रम सहायक कविता जुगरान, राष्ट्रीय युवा स्वयंसेवक विजयपाल, सुमित नेगी, राजेन्द्र कुमार, मयंक, यूथ क्लब अध्यक्ष अंकित उछोली, अक्षय कुमार आदि मौजूद थे।
26/11 जैसे हमले की साजिश- मुंबई पुलिस को मिली मुंबई में आतंकी हमले की धमकी
देश-विदेश: मायानगरी मुंबई को एक बार फिर से दहलाने की साजिश रची जा रही है। इस संबंध में मुंबई पुलिस के व्हाट्सएप पर एक धमकी भरा मैसेज आया है। इस मैसेज में कहा गया हैं कि मुंबई को उड़ाने की पूरी तैयारी है। कभी भी हमला किया जा सकता है। धमकी देने वाले का कहना है कि यह हमला 26/11 हमले जैसा होगा। इस मैसेज के बाद मुंबई पुलिस अलर्ट मोड में आ गई है।
कहा गया है कि मैसेज भेजने वाले की पड़ताल की जा रही है। प्राथमिक जांच में पता चला है कि यह मैसेज पाकिस्तान के नंबर से आया है। मैसेज में कहा गया है कि मेरी जांच करोगे तो लोकेशन पाकिस्तान दिखाएगी, लेकिन धमाका मुंबई में होगा। धमकी देने वाले ने मैसेज में लिखा है कि भारत में इस हमले को छह लोग अंजाम देंगे।
देहरादून सहित इन 4 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट..
उत्तराखंड: प्रदेश में मौसम विभाग ने एक बार फिर बारिश का अलर्ट जारी किया है। राज्य के देहरादून सहित चार जिलों में अगले चौबीस घंटे के भीतर कहीं-कहीं भारी बारिश के आसार हैं। ऐसे में मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है। कुछ इलाकों में बिजली गिरने की भी आशंका है। जिसके चलते नदियों, नालों के किनारे बसे लोगों के साथ ही भूस्खलन संभावित इलाकों में लोगों को सावधान रहने की जरूरत है।
इस संबंध में राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग को रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। रिपोर्टस की माने तो शुक्रवार सुबह से राजधानी देहरादून और आसपास के इलाकों में मौसम खराब बना रहा। हालांकि बाद में धूप खिल आई। अगले चौबीस घंटे में देहरादून, नैनीताल, चंपावत, ऊधमसिंह नगर में भारी बारिश की संभावना है।
भारी बारिश को देखते हुए मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है। इसके साथ ही पर्वतीय क्षेत्रों में कहीं-कहीं बिजली गिरने के साथ ही गरज के साथ तेज बौछार की संभावना जताई है। वहीं प्रदेश में बारिश के बाद मलबा आने से 102 मार्ग जगह-जगह बाधित हो गए हैं।
दिव्यांग व्यक्ति 30 सितम्बर तक कृत्रिम अंग करें प्राप्त..
वयोश्री योजना का लाभ जनपद के पात्र वृद्ध व दिव्यांगजनों को दिलाए जाने के लिए विकासखंड स्तर पर समाज कल्याण विभाग द्वारा शिविर आयोजित किए गए थे। इसके बाद चिन्हित पात्र लाभार्थियों को अगस्त्यमुनि क्रीड़ा मैदान में कृत्रिम अंग वितरित किए गए, लेकिन कतिपय वृद्धजन, दिव्यांग व्यक्ति कृत्रिम अंग प्राप्त करने के लिए उपस्थित नहीं हो पाए। ऐसे पात्र लाभार्थी 30 सितंबर तक कृत्रिम अंग प्राप्त कर सकते हैं।
जिला समाज कल्याण अधिकारी सुनीता अरोड़ा ने जानकारी देते हुए अवगत कराया कि भारत सरकार की वयोश्री योजना के तहत जनपद के पात्र वृद्ध व दिव्यांगजन व्यक्तियों को नित्य जीवन सहायक कृत्रिम उपकरण उपलब्ध कराए जाने के लिए विकासखंड जखोली में बीते वर्ष 16 नवंबर, अगस्त्यमुनि में 17 तथा विकास खंड ऊखीमठ में 18 नवंबर को स्वास्थ्य परीक्षण शिविर आयोजित किए गए थे। इसके बाद चिन्हित पात्र लाभार्थियों को 26 मई 2022 को अगस्त्यमुनि क्रीड़ा मैदान में उपकरण वितरण शिविर में आवश्यकता के अनुसार कृत्रिम अंग (समायोजक छड़ी, एल्वो बैसाखी, बैसाखी, टेट्रापोड, ट्राईपोड, फोल्डिंग वाकर, नजर का चश्मा, कान की मशीन, व्हील चेयर, कृत्रिम दोत आदि ) वितरित किए गए।
उन्होंने कहा कि उक्त शिविर में कतिपय वृद्ध व दिव्यांगजन उपस्थित नहीं हो सके। उन्होंने ऐसे चिन्हित पात्र लाभार्थियों को खंड विकास अधिकारी कार्यालय अगस्त्यमुनि से 30 सितंबर तक किसी भी कार्य दिवस में रसीद व आधार कार्ड के साथ कृत्रिम अंग प्राप्त करने की अपील की है। साथ ही कहा कि उक्त निर्धारित तिथि तक कृत्रिम अंग प्राप्त नहीं करने पर ऐसा मान लिया जाएगा कि उन्हें कृत्रिम अंग की आवश्यकता नहीं है तथा उक्त कृत्रिम अंग को किसी अन्य पात्र लाभार्थी को दिया जाएगा।
बताया कि चिन्हित पात्र लाभार्थियों को कान की मशीन स्थाई पते पर पंजीकृत डाक के माध्यम से प्रेषित की जा रही है। कृत्रिम अंग प्राप्त करने के लिए मोबाइल नंबर 7895852130 व 9557949276 पर संपर्क किया जा सकता है।
रेलवे ट्रैक पर संगीत सुन रहा था युवक, ट्रेन की चपेट में आने से हुई मौत..
उत्तराखंड: इयरफोन लगाकर रेलवे ट्रैक पर संगीत सुन रहा युवक ट्रेन की चपेट में आ गया। युवक की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने युवक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। घटना अजबपुर रेलवे फाटक के पास की है। इंस्पेक्टर नेहरू कॉलोनी मुकेश त्यागी का कहना हैं कि बुधवार को एक युवक के ट्रेन की चपेट में आने की सूचना मिली थी। मौके पर जाकर देखा तो युवक वहां पर लहूलुहान हालत में पड़ा था।
युवक की पहचान मजर (22) निवासी मच्छी बाजार, नजीबाबाद, जिला बिजनौर के रूप में हुई। पता चला कि वह अपने परिचित के साथ अजबपुर क्षेत्र में आया था। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना हैं कि युवक ने इयरफोन लगाए हुए थे। यही कारण रहा कि वह ट्रेन की आवाज को नहीं सुन पाया। मजर रायपुर क्षेत्र के भगत सिंह कॉलोनी में रहता था। यहां वह सेटरिंग का काम करता था।
उत्तराखंड में हुई भर्ती घोटालों की सीबीआई जांच की मांग..
उत्तराखंड: प्रदेश में उत्तराखंड क्रांति दल ने अब तक हुई भर्ती घोटालों की सीबीआई जांच की मांग की है। दल ने सख्त नकल विरोधी कानून बनाने की भी मांग प्रमुखता से उठाई। रुद्रप्रयाग मुख्यालय में पत्रकारों से वार्ता करते हुए उत्तराखंड क्रांति दल के युवा नेता मोहित डिमरी ने अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि आयोग के अधिकारियों और कर्मचारियों की संलिप्तता से ही घोटाले हुए हैं। इसमें बड़े-बड़े मगरमच्छ पकड़ से बाहर हैं।
अभी सिर्फ छोटी-छोटी मछलियां ही पकड़ में आई हैं। इस खेल के पीछे बड़े अधिकारी और सफेदपोश शामिल हैं। जिला पंचायत सदस्य हाकम सिंह के तार जिन बड़े लोगों से जुड़े हैं, उनका पर्दाफाश जरूरी है। हाकम सिंह सिर्फ प्यादा है, इसके पीछे कई और मास्टरमाइंड हैं। पूर्व में भी भर्ती घोटालों की जांच हुई, लेकिन किसी को भी आज तक सजा नहीं हुई। युवा नेता मोहित डिमरी ने इस पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार ने इसी वर्ष भर्ती परीक्षाओं में धांधली रोकने के लिए नकल विरोधी कानून बनाया है। इसी तरह का कानून उत्तराखंड सरकार को भी बनाना चाहिए।
उन्होंने यह भी मांग की है कि अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने जिन आठ भर्ती परीक्षाओ पर रोक लगा दी है, उनकी प्रक्रिया जल्द पूरी की जाय। उन्होंने कहा कि परीक्षा और नियमों में बदलाव की भी जरूरत है। ऑफलाइन के साथ ही ऑनलाइन परीक्षा आयोजित की जाय। उत्तराखंड क्रांति दल के कार्यकारी अध्यक्ष बुद्धिबल्लभ ममगाई ने कहा कि उत्तराखंड बनने के बाद से अब तक हुई कोई भी भर्ती परीक्षा विवादों से नहीं बच पाई है। हर भर्ती परीक्षा में न सिर्फ घपले सामने आए, बल्कि इन घपलों के कारण भर्ती लटकने के साथ कई बार निरस्त भी हो गईं।
भर्ती परीक्षाओं में लगातार घपलों से राज्य का युवा खुद को ठगा सा महसूस कर रहा है। उत्तराखंड में परीक्षाओं की विश्वसनीयता सवालों के घेरे में है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में आउटसोर्सिंग एजेंसी को खत्म कर विभागीय नियुक्ति दी जाय।
यूकेडी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष भगत चौहान ने कहा कि आज सिर्फ उन्हें नौकरियां मिल रही हैं, जिनकी पहुँच है। एक योग्य आदमी को नौकरी मिलना बहुत मुश्किल हो गया है। राज्य बनने के बाद पटवारी भर्ती, दरोगा भर्ती, ऊर्जा निगम, ग्राम पंचायत विकास अधिकारी, दरोगा रैंकर्स, फार्मासिस्ट, कॉपरेटिव बैंक, वन आरक्षी सहित अन्य कई पदों पर भर्ती घोटाले हुए हैं।
इन मामलों की जांच ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है। ऐसे में सरकार की मंशा भी सवालों के घेरे में है। यूकेडी के पूर्व युवा जिलाध्यक्ष दिनेश बर्तवाल और नगर अध्यक्ष बिपिन पंवार ने कहा कि जब तक उत्तराखंड के युवाओं को न्याय नहीं मिलेगा, यूकेडी चैन से नहीं बैठेगी। लाखों की संख्या में बेरोजगार धक्के खा रहे हैं। उनके भविष्य के साथ सरकार खिलवाड़ कर रही है।
38 साल बाद सियाचिन में मिला शहीद चंद्रशेखर का शव..
उत्तराखंड: सियाचिन ग्लेशियर में हिमस्खलन में दबकर शहीद हुए लांसनायक चंद्रशेखर हर्बोला का पार्थिव शरीर 38 साल बाद मिला है। पार्थिव शरीर मिलने की सूचना से परिजनों के जख्म एक बार फिर हरे हो गए। प्रशासन के अनुसार शहीद का पार्थिव शरीर मंगलवार को हल्द्वानी पहुंचने की संभावना थी, लेकिन खराब मौसम की वजह से शव नहीं पहुंच पाया।
मूल रूप से उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के रानीखेत तहसील अंतर्गत बिन्ता हाथीखुर गांव निवासी लांसनायक चंद्रशेखर हर्बोला 1971 में कुमाऊं रेजिमेंट में भर्ती हुए थे। मई 1984 को बटालियन लीडर लेफ्टिनेंट पीएस पुंडीर के नेतृत्व में 19 जवानों का दल ऑपरेशन मेघदूत के लिए निकला था। 29 मई को भारी हिमस्खलन से पूरी बटालियन दब गई थी, जिसके बाद उन्हें शहीद घोषित कर दिया गया था। उस समय लांसनायक चंद्रशेखर की उम्र 28 साल थी। शनिवार रात शहीद की पत्नी शांति देवी को फोन से जानकारी मिली कि शहीद लांसनायक चंद्रशेखर का पार्थिव शरीर ग्लेशियर से बरामद हुआ है।
सूचना मिलने पर रविवार को एसडीएम मनीष कुमार सिंह और तहसीलदार संजय कुमार समेत प्रशासन की टीम रामपुर रोड डहरिया स्थित सरस्वती विहार में उनके घर पहुंची। एसडीएम ने शोक संवेदना व्यक्त करते हुए परिजनों को ढांढस बंधाया।
सहायक सैनिक कल्याण अधिकारी पुष्कर भंडारी का कहना हैं कि शहीद का पार्थिव शरीर आज हल्द्वानी पहुंचेगा। कहा कि शहीद का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ रानीबाग स्थित चित्रशिला घाट पर किया जाएगा। अंतिम संस्कार को लेकर तैयारियां कर ली गईं हैं।
उत्तराखंड में अब टीएचडीसी बनाएगा आठ नई पनबिजली परियोजनाएं..
उत्तराखंड: प्रदेश में जल्द आठ नई पनबिजली परियोजनाएं शुरू होने जा रही हैं। इनसे करीब तीन हजार मेगावाट बिजली उत्पादन होगा। इनमें से चार परियोजनाएं कुमाऊं व चार गढ़वाल मंडल में बनाई जाएंगी। इन परियोजनाओं के लिए ऊर्जा मंत्रालय से सैद्धांतिक सहमित मिल चुकी है। अक्तूबर माह से नई परियोजनाओं पर काम शुरू होने की उम्मीद है।
टीएचडीसी के अध्यक्ष एवं एमडी राजीव कुमार विश्नोई का कहना हैं कि उत्तराखंड में हाइड्रो प्रोजेक्ट के जरिये कुल करीब दस हजार मेगावाट बिजली उत्पादन संभव है। आठ परियोजनाएं ऐसी चिह्नित की गई हैं, जिनसे तीन हजार मेगावाट बिजली बन सकती है।
इनमें कुमाऊं की धौली व काली गंगा क्षेत्र में चार और गढ़वाल में यमुना वैली में चार परियोजनाएं बनेंगी। परियोजनाओं का काम नई कंपनी करेगी। इस कंपनी का गठन एक माह में होने की उम्मीद है। इसमें टीएचडीसी की हिस्सेदारी 74% और राज्य सरकार का हिस्सा 26% होगा। टीएचडीसी हाइड्रो प्रोजेक्ट की तकनीक भी सरकार को देगा। नई परियोजनाओं पर उत्तराखंड सरकार भी गंभीर है।
परियोजनाओं पर करीब बीस हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे। विश्नोई का कहना हैं कि इस समय देश में थर्मल पावर से करीब 60%, वैकल्पिक ऊर्जा से 30% व हाइड्रो से लगभग 10% बिजली बन रही है। इसके चलते हाइड्रो को लेकर राज्य में बड़ी संभावना है। जल विद्युत परियोजनाओं का काम उत्तराखंड में अब टीएचडीसी ही करेगा।
महाराष्ट्र सरकार ने की लोगों से आज सुबह 11 बजे राष्ट्रगान गाने की अपील
देश-विदेश: महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के लोगों से अपील की है कि वे स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होने के उत्सव के हिस्से के रूप में आज सुबह 11 बजे राष्ट्रगान गाएं। जानकारी के अनुसार राज्य भर में सुबह 11 बजे से 11:01 बजे के बीच राष्ट्रगान गाने को कहा गया है।पिछले सप्ताह जारी एक सरकारी आदेश में कहा गया है कि सभी राज्य सरकार के विभागों, विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के लिए भागीदारी अनिवार्य है। इसके साथ ही आम नागरिकों से भी इस अभियान में हिस्सा लेने की उम्मीद की जाती है।
आदेश में कहा गया है कि यह केंद्र सरकार के स्वराज महोत्सव का हिस्सा है। इसमें निजी प्रतिष्ठानों, व्यापारियों और यहां तक कि केंद्र सरकार के अंतर्गत आने वाले विभागों सहित अन्य सरकारी विभागों के भी भाग लेने की उम्मीद है। आदेश में कहा गया है कि छात्रों से खुले मैदान में राष्ट्रगान गाने के लिए इकट्ठा हो सकते हैं। इससे पहले महाराष्ट्र के सांस्कृतिक मामलों के मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने कहा था कि देश अमृत महोत्सव (स्वतंत्रता की 75 वीं वर्षगांठ) मना रहा है और इसलिए राज्य सरकार के सभी अधिकारियों को अगले साल 26 जनवरी तक कार्यालयों में फोन कॉल लगाते समय नमस्ते के बजाय वंदे मातरम कहना होगा।
हालांकि, इसके अगले दिन ही उन्हें यू-टर्न लेना पड़ा। जिसके बाद उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के अधिकारियों के लिए फोन कॉल उठाते समय वंदे मातरम कहना अनिवार्य नहीं है। फोन कॉल के दौरान राष्ट्रवाद को दर्शाने वाले किसी भी समान शब्द का इस्तेमाल किया जा सकता है। इस मुद्दे पर विपक्षी दलों की आलोचना का सामना करने के बाद उनका यह बयान सामने आया।

- प्रह्लाद सबनानी
वरिष्ठ स्तंभकार
अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने घोषणा की है कि वे प्रदेश के 6 जिलों सीतापुर, लखीमपुर, पीलीभीत, बरेली, शाहजहांपुर एवं फर्रुखाबाद के 5 तीर्थस्थलों को आपस में जोड़ने हेतु 500 किलोमीटर से भी लम्बा श्री परशुराम तीर्थ सर्किट बनाने जा रहे हैं। ये पांचों तीर्थ स्थल, नैमिष धाम, महर्षि दधीचि स्थल मिश्रिख, गोला गोकर्णनाथ, गोमती उद्गम, पूर्णागिरी मां के मंदिर के बॉर्डर से बाबा नीब करोरी धाम और जलालाबाद परशुराम की जन्मस्थली, हिंदुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं।
इसी प्रकार दक्षिण भारत की शैली में वृंदावन के ‘रंगजी’ मंदिर के आसपास के क्षेत्र का सौंदर्यीकरण कर उसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना को पूर्ण करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद ने 16.20 करोड़ रुपये की कार्ययोजना बनाई है। इस दिव्यदेश मंदिर का निर्माण वर्ष 1833 में शुरू हुआ था। भगवान नारायण के लोक को ‘दिव्यदेश’ की संज्ञा दी जाती है। दिव्यदेश की पहचान पांच प्रमुख स्तंभों से होती है। इसमें गरुड़ स्तंभ, गोपुरम, पुष्करणी, पुष्प उद्यान और गोशाला होती है। ऐसे 107 दिव्यदेश भारत में और एक नेपाल में स्थित हैं।
अयोध्या में भी भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण कार्य जोर शोर से चल रहा है। 5 अगस्त 2020 को शुरु हुए श्रीराम मंदिर के निर्माण कार्य का लगभग एक तिहाई काम सम्पन्न हो चुका है। अब श्रीराम मंदिर के गर्भगृह का निर्माण कार्य शुरू हुआ है। मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ ने गर्भगृह की पहली शिला रखते हुए कहा कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर ‘राष्ट्र मंदिर’ का रूप ले लेगा। 1100 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से बनने वाले इस श्रीराम मंदिर के निर्माण में अभी तक 192 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। श्रीराम जन्मभूमि परिसर से कुछ दूरी पर दक्षिण भारत के द्रविड़ शैली में भव्य श्रीरामलला देवस्थानम मंदिर भी बनाया जा रहा है।
पूर्व में केंद्र सरकार ने भी देश के 12 शहरों को “हृदय” योजना के अंतर्गत भारत के विरासत शहरों के तौर पर विकसित करने की घोषणा की है। ये शहर हैं, अमृतसर, द्वारका, गया, कामाख्या, कांचीपुरम, केदारनाथ, मथुरा, पुरी, वाराणसी, वेल्लांकनी, अमरावती एवं अजमेर। हृदय योजना के अंतर्गत इन शहरों का सौंदर्यीकरण किया जा रहा है, ताकि इन शहरों की पुरानी विरासत को पुनर्विकसित कर पुनर्जीवित किया जा सके। इस हेतु देश में 15 धार्मिक सर्किट भी विकसित किये जा रहे हैं। जिनमें शामिल हैं, हिमालय सर्किट, नोर्थ ईस्ट सर्किट, कृष्ण सर्किट, बुद्धिस्ट सर्किट, कोस्टल सर्किट, डेजर्ट सर्किट, ट्राइबल सर्किट, वाइल्ड लाइफ सर्किट, रुरल सर्किट, स्पीरीचुअल सर्किट, रामायण सर्किट, हेरीटेज सर्किट, तीर्थंकर सर्किट एवं सूफी सर्किट। “हृदय” योजना को लागू करने के बाद से केंद्र सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने कई परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान कर दी है। इनमें से अधिकतर परियोजनाओं पर काम भी प्रारम्भ हो चुका है। इन सभी योजनाओं का चयन सम्बंधित राज्य सरकारों की राय के आधार पर किया गया है।
इसी प्रकार, पर्यटन मंत्रालय ने “प्रसाद” नामक एक विशेष योजना को प्रारम्भ किया है। जिसके अंतर्गत 15 राज्यों में धार्मिक स्थलों पर 24 परियोजनाओं के माध्यम से बुनियादी ढांचे को विकसित करने के उद्देश्य से पर्यटन मंत्रालय द्वारा वित्त की व्यवस्था की जाती है। “प्रसाद” योजना के अंतर्गत रोड, रेल एवं जलमार्ग के माध्यम से परिवहन की व्यवस्था विकसित की जा रही है। इन चुने हुए धार्मिक स्थलों पर बैंकों के एटीएम का जाल बिछाया गया है। वाहनों के पार्किंग की व्यवस्था, पीने के पानी की व्यवस्था, रेस्ट रूम का निर्माण, वेटिंग रूम का निर्माण, फर्स्ट-एड के अंतर्गत दवाईयों की व्यवस्था, बिजली की व्यवस्था, दूरसंचार के साधनों की व्यवस्था, आदि की जा रही है। इन विभिन्न परियोजनाओं को निजी एवं सरकारी क्षेत्र में, पीपीपी मॉडल के अंतर्गत, संयुक्त रूप से चलाने के प्रयास किये जा रहे है। इस योजना को सफल बनाने के लिए केंद्र सरकार एवं विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा भी प्रयास किए जा रहे हैं।
केंद्र सरकार एवं उत्तर प्रदेश सरकार भारत में धार्मिक स्थलों को विकसित करने में एकाएक इतनी दिलचस्पी क्यों लेने लगीं हैं? इसका उत्तर दरअसल इस तथ्य में छुपा है कि भारत में यात्रा एवं पर्यटन उद्योग 8 करोड़ व्यक्तियों को प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से रोजगार प्रदान कर रहा है एवं देश के कुल रोजगार में पर्यटन उद्योग की 12 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। भारत में प्राचीन समय से धार्मिक स्थलों की यात्रा, पर्यटन उद्योग में, एक विशेष स्थान रखती है। एक अनुमान के अनुसार, देश के पर्यटन में धार्मिक यात्राओं की हिस्सेदारी 60 से 70 प्रतिशत के बीच रहती है। देश के पर्यटन उद्योग में लगभग 19 प्रतिशत की वृद्धि दर अर्जित की जा रही है जबकि वैश्विक स्तर पर पर्यटन उद्योग केवल 5 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज कर रहा है। भारत में पर्यटन उद्योग लगभग 23,400 करोड़ अमेरिकी डॉलर की आय अर्जित कर रहा है। देश में पर्यटन उद्योग में 87 प्रतिशत हिस्सा देशी पर्यटन का है जबकि शेष 13 प्रतिशत हिस्सा विदेशी पर्यटन का है। अतः भारत में रोजगार के नए अवसर निर्मित करने के उद्देश्य से केंद्र एवं उत्तर प्रदेश सरकार धार्मिक स्थलों को विकसित करने हेतु प्रयास कर रही हैं।
पर्यटन उद्योग में कई प्रकार की आर्थिक गतिविधियों का समावेश रहता है। यथा, अतिथि सत्कार, परिवहन, यात्रा इंतजाम, होटल आदि। इस क्षेत्र में व्यापारियों, शिल्पकारों, दस्तकारों, संगीतकारों, कलाकारों, होटेल, वेटर, कूली, परिवहन एवं टूर आपरेटर आदि को भी रोजगार के अवसर प्राप्त होते हैं। उक्त कारणों में चलते हाल ही के समय में भारत में पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार के चार मंत्रालय – पर्यटन मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय, रेल्वे मंत्रालय एवं परिवहन मंत्रालय, आपस में तारतम्य बनाते
हुए मिलकर कार्य कर रहे हैं। इन चारों मंत्रालयों के संयुक्त प्रयासों से देश में धार्मिक यात्राओं को आसान बना दिया गया है। परिवहन मंत्रालय द्वारा विभिन्न तीर्थ स्थलों पर आसानी से पहुंचने हेतु मार्गों को विकसित किया गया है एवं बुनियादी ढांचे को भी विकसित किया जा रहा है। जिसके चलते देश के नागरिकों द्वारा धार्मिक यात्राएं करने की मात्रा में काफी उच्छाल देखने में आ रहा है।
भारतीय रेल ने कई विशेष सर्किट मार्ग पर विशेष रेलगाड़ियों को चलाने का अभियान भी प्रारम्भ किया है। नवम्बर 2018 से श्री रामायण एक्सप्रेस नामक विशेष रेलगाड़ी प्रारम्भ की गई है। यह रेल भारत एवं श्रीलंका में प्रभु श्रीराम से सम्बंधित महत्वपूर्ण स्थानों के मार्ग के बीच चलायी जा रही है। यह रेल प्रभु श्रीराम के जन्म स्थान अयोध्या से प्रारम्भ होती है एवं रेल के मार्ग में पड़ने वाले प्रभु श्रीराम की श्रद्धा के प्रमुख केंद्रों पर रूकती है। साथ ही, यदि श्रद्धा स्थल रेल्वे मार्ग से कुछ दूरी पर स्थित है तो भारतीय रेल श्रद्धालुओं को उक्त स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था भी करती है। इस तरह की कई अन्य विशेष रेलगाड़ियां राजकोट, जयपुर एवं मदुरई आदि स्थानों से भी चलाई जा रही हैं।
साथ ही अब वैष्णो देवी मंदिर पर पहुंच मार्ग को भी आसान बना दिया गया है। अब जम्मू-उधमपुर-कटरा रेलवे लाइन भी प्रारम्भ कर दी गई है। अब दिल्ली से कटरा तक रेल सेवा उपलब्ध करा दी गई है। कई रेलगाड़ियां अब सीधे कटरा तक पहुंच रही हैं। इससे वैष्णो देवी मंदिर के दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं को बहुत आसानी हो गई है। इसी प्रकार, एक विशेष पर्यटन रेलगाड़ी भारत दर्शन के लिए भी चलायी जा रही है। इस पैकेज टूर में 6 धार्मिक स्थल शामिल किए गए हैं, यथा, बैद्यनाथ, गंगासागर, कोलकत्ता, वाराणसी, प्रयागराज, आदि।
बुद्धिस्ट सर्किट पर भी विशेष रेलगाड़ियां अब चलाई जाने लगी हैं। विशेष पैकेज टूर के अंतर्गत बोद्धगया, नालंदा एवं वाराणसी शहरों के बीच 8 दिन की धार्मिक यात्रा सम्पन कराई जा रही है। भगवान बुद्ध के दर्शनार्थ यात्री विभिन्न देशों यथा जापान, चीन, थाईलैंड एवं श्रीलंका आदि से आते हैं। बुद्धिस्ट सर्किट पर पड़ने वाले अन्य धार्मिक स्थलों के दर्शन भी विदेशों से आए हुए इन यात्रियों को कराए जाते हैं एवं इनके सुख सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाता है। पूरी सुविधाएं रेल्वे विभाग द्वारा प्रदान की जाती हैं।
गुरुद्वारा सर्किट पर पंज तख़्त एक्स्प्रेस नामक रेलगाड़ी चलायी जा रही है। इसके माध्यम से सिख धर्माविलंबियों को इस सर्किट पर पड़ने वाले गुरुद्वारों की यात्रा बहुत ही सहज तरीके से करायी जा रही है। इनमें शामिल हैं, अमृतसर में श्री अकाल तख़्त, श्री आनन्दपुर साहिब में तख़्त केशगड़, भटिंडा में तख़्त श्री दमदमा साहिब, पटना में तख़्त श्री पटना साहिब एवं नांदेड़ में तख़्त श्री हजूर साहिब।
उत्तराखंड में चार धाम – केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री एवं यमुनोत्री – को भी बारहों महीने के लिए रोड के माध्यम से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे है। यह एक विशेष सर्किट के तौर पर विकसित किया जा रहा है।
उक्त विभिन्न सर्किट को विकसित करने के पीछे भारत की जड़ें तलाशने के साथ ही देश में धार्मिक पर्यटन को पंख देने की मंशा भी काम कर रही है। योग एवं आयुर्वेद भी हाल ही के समय में विदेशों में काफी लोकप्रिय हो गया है। अतः इसकी खोज के लिए विदेशों से भी कई पर्यटक भारत में धार्मिक पर्यटन करने के प्रति आकर्षित हो रहे हैं। इससे विदेशी पर्यटन भी देश में तेजी से वृद्धि दर्ज कर रहा है।
केंद्र सरकार के साथ साथ हम नागरिकों का भी कुछ कर्तव्य है कि देश में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हम भी कुछ कार्य करें। जैसे प्रत्येक नागरिक, देश में ही, एक वर्ष में कम से कम दो देशी पर्यटन स्थलों का दौरा अवश्य करे। विदेशों से आ रहे पर्यटकों के आदर सत्कार में कोई कमी न रखें ताकि वे अपने देश में जाकर भारत के सत्कार का गुणगान करे। आज करोड़ों की संख्या में भारतीय, विदेशों में रह रहे हैं। यदि प्रत्येक भारतीय यह प्रण करे की प्रतिवर्ष कम से कम 5 विदेशी पर्यटकों को भारत भ्रमण हेतु प्रेरणा देगा तो एक अनुमान के अनुसार विदेशी पर्यटकों की संख्या को एक वर्ष के अंदर ही दुगना किया जा सकता है।
