मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने सीएम राहत कोष से आशा कार्यकत्रियों को एक-एक हजार रूपए की प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही शादियों में 25 लोगों से अधिक को अनुमति नहीं होगी।
यह निर्देश मुख्यमंत्री ने शनिवार को सचिवालय में कोविड -19 को लेकर एक बैठक में दिए। बैठक में शासन के उच्च अधिकारियों के अलावा वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से सभी जिलों के जिलाधिकारी भी जुड़े हुए थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बाजार खुलने के समय को जिलाधिकारी अपने अनुसार घटा सकते हैं। उन्होंने डोर-टू-डोर सर्वे के भी निर्देश दिए।
इसके साथ ही 104, सीएम हेल्पलाइन व पुलिस विभाग के कॉल सेंटर में फोन लाईनों की संख्या बढ़ाने को कहा। उन्होंने कहा कि कॉल सेंटर और हेल्पलाईन पूरी तरह से सक्रिय रहें और बेड, इंजेक्शन सम्बंधी जानकारी भी अपडेट रखें।
उन्होंने कहा कि ऑक्सीजन के सिलेंडरों की संख्या बढ़ाने के लिये हर सम्भव कोशिश की जाए। इसमें विभिन्न संगठनों, उद्योगों की सहायता भी ली जा सकती है। कोविड अस्पतालों में भर्ती मरीजों को भोजन, पानी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने में कोई ढिलाई न हो। इसके साथ ही छोटे- छोटे स्थानों में भी सेनेटाइजेशन का काम किया जाए, जहां संक्रमण की अधिक सम्भावनाएं हैं ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड टेस्ट की रिपोर्ट में समय न लगे। टेस्ट होते ही तुरंत सभी को कोविड किट दिया जाए। ई-संजीवनी पोर्टल को और प्रभावी बनाते हुए प्रचारित किया जाए ताकि जन सामान्य उसका अधिक लाभ उठा सके। होम आइसोलेशन में रहने वालों को मालूम होना चाहिए कि उन्हें किन बातों का ध्यान रखना है।
सीएम ने कहा कि सरकारी व निजी अस्पतालों में कोविड मरीजों की व्यवस्था को लगातार क्रास चैक करवाया जाए। संबंधित मरीजों और उनके परिजनों से इसका फीड बैक लिया जाए।
मुख्यमंत्री ने कोविड मरीज़ों हेतु एम्बुलेंस की दरें निर्धारित करने और ओवररेटिंग जैसी शिकायतों को दूर करने के लिए कहा। दवाओं की कालाबाजारी को रोकने के लिए 147 एसटीएफ टीमें बनाई गई हैं।
बैठक में अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, अपर मुख्य सचिव मनीषा पंवार, डीजीपी अशोक कुमार, सचिव अमित नेगी, शैलेश बगोली, डाॅ पंकज कुमार पाण्डेय, सूचना महानिदेशक रणबीर सिंह चौहान सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

- सुयश त्यागी
स्वतंत्र पत्रकार व लेखक
सोशल मीडिया का उदय कुछ लोगों के लिए सिर्फ मनोरंजन का एक साधन हो सकता है, पर जब हम वैश्विक पटल पर इसका प्रभाव देखेंगे तो किसी भी लोकतांत्रिक देश के संविधान में दी हुई अभिव्यक्ति की आजादी की कल्पना के वास्तविक स्वरूप इसके उदय के बाद ही बल मिला है। आज हर व्यक्ति के पास समाज के समक्ष अपनी बात रखने की एक ताकत है, एक आवाज है और ना जाने कब उसकी आवाज, एक सामूहिक आवाज का रूप बन जाये, उसकी कल्पना करना भी मुश्किल है।
देश में कई प्रतिभाशाली लोगों को सोशल मीडिया के माध्यम एक ऐसा मंच मिला है, जिसके चलते उनमें छुपी रचनात्मकता व सृजनशीलता का समाज से परिचय हुआ है। आज समाज में ऐसे ही होनहार कई सोशल मीडिया सेलेब्स ने अपना एक खास स्थान बना रखा है। आज एक वर्ग ऐसा भी है, जो ना ही कोई न्यूज़ देखता और ना ही कोई अखबार पढ़ता है पर इन सोशल मीडिया की जानी-मानी हस्तियों से अनेक प्लेटफार्म पर देश भर की गतिविधियों की जानकारी प्राप्त कर लेता है। यहां तक देश के कई पीड़ितों को सोशल मीडिया पर आंदोलन खड़े करने से ही परिणाम मिले हैं।
कभी एक दौर हुआ करता था, जब टी.वी और अखबार पर आने वाली सभी खबरों को सच माना जाता था। किसी भी व्यक्ति के पास उस पर विश्वास करने के अलावा कोई विकल्प ना था। उसकी प्रमाणिकता जांचने का कोई माध्यम ही ना था। पर आज हर व्यक्ति के पास सही-गलत तय करने की एक ताकत है और यही निष्पक्ष ताकत कभी-कभी देश में बड़े सकारात्मक बदलाव लेकर आती है।
हाल हीं में सोशल मीडिया पर एक खबर चली। भारत के लोगों को वैक्सीन उपलब्ध नही हो रही और सरकार विदेशों में निर्यात कर रही है। वास्तव में आधा सत्य कभी-कभी झूठ से भी अधिक घातक होता है और इस वाकये पर कई पोस्ट आपने जरूर देखी होगी, किसी ना किसी व्यक्ति ने अज्ञानवश या अपने तय एजेंडा तहत ये पोस्ट की ही होगी, जो आपके फ़ेसबुक, ट्विटर या इंस्टाग्राम से होकर एक ना एक बार जरूर गुजरी होगी। हम क्यों खबरों को ऊपरी सतह पर ही परखकर सत्य मान लेते है, आखिर गूगल पर फैक्ट चेक करने में समय ही कितना लगता है ? हम एकाउंट से गलत खबर चला देंगे पर थोड़ा समय निकालकर उसकी प्रमाणिकता नही देखेंगे।
वैक्सीन के विषय में बात करें, तो अभी हाल ही में भारत के विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने एक साक्षात्कार में बताया वैश्विक स्तर पर देशों के बीच अनेक करार होते है और देशों के बीच का व्यापार वैश्विक बाजार की शर्तों पर होता है ना कि घरेलू शर्तों। वैक्सीन बनाने के लिए लगने वाला कच्चा माल कई देशों से लिया जा रहा, उसके तहत उत्पादन के बाद उन्हें कुछ वैक्सीन देने का करार हुआ था, जिसके तहत ये निर्यात हुए है। अगर हम करार तोड़ेंगे तो विदेशों से आने वाला कच्चा माल रुक जाएगा और वैक्सीन के उत्पादन के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।
पहले जब वैक्सीन लगवाने लोग आ नही रहे थे। उत्पादन लगातार बढ़ रहा था तब एक-दो देशों को वैक्सीन दी भी गई। पर जब से भारत के लोगों में वैक्सीन लगवाने के लिए जागरूकता आई है, लगभग पूरा उत्पादन भारत में ही लगाया जा रहा है। ऐसी भ्रामक खबरे चलाने वाला यह वही वर्ग है जो कुछ समय पूर्व देश में वैक्सीन के कारगर ना होने का आरोप लगा रहा था। जगह-जगह प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जनता से वैक्सीन ना लगवाने का आग्रह कर रहा था और आज फिर करार के तहत हो रहे निर्यात पर प्रश्न उठाकर भारत की छवि धूमिल कर रहा है। यह वही वर्ग है जिसने समाजवाद और साम्यवाद का चोला ओढ़कर उद्योगों और मशीनों का विरोध कर सालों तक भारत को सुविधा और तकनीक विहीन रखा और आज ऑक्सीजन की आपूर्ति कर रहे उद्योगों पर भी मनमानी का दोषरोपण कर राजनीति का निष्कृष्ट रूप प्रस्तुत कर रहा है।
भारत की जनता को फिजूल के मुद्दों पर उलझाकर देश में एक नकारात्मक वातावरण बनाना ही इनका एक मात्र लक्ष्य है। ये वर्ग आपको अपने वर्षों तक रहे कार्यकाल पर सवाल नही करने देगा। वह यह नही बताएगा आजादी के इतने वर्ष बाद भी स्वास्थ्य और शिक्षा की बात करने वाले दल ने कितने एम्स और शैक्षिक संस्थान खोले। वह यह भी नही बताएगा कि अफजल की फांसी से लेकर बाटला हाउस एनकाउन्टर पर आंसू बहाने की जगह अगर समय रहते देश की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर ही गंभीरता से ध्यान दिया जाता तो शायद आज ये हालात ना होते। वर्तमान में महाराष्ट्र में सौ करोड़ की मासिक वसूली का प्रसंग हो या फिर 2014 के पहले हो रहे लाखों करोड़ों के घोटालों का, आपको ये वर्ग बस जातीय ध्रुवीकरण व सामाजिक तुष्टिकरण का ही गलत स्वरूप दिखाता रहेगा और देश व समाज को विभिन्न वर्गों में बांटने का प्रयास करता रहेगा।
हाल ही में एक जाने माने पत्रकार ने अपने सोशल मीडिया एकाउंट से एक टेंट के नीचे लेटे कुछ मरीजों की फोटो साझा की, जिन्हें बॉटल व ऑक्सीजन लगी हुई थी। उस पर हेडिंग दी गुजरात का स्वास्थ्य मॉडल। उनकी उसी पोस्ट पर एक दूसरे पत्रकार ने पूछा आखिर गुजरात के किस जिले की खबर है? उन्होंने जवाब दिया – जिला तापी गुजरात। कुछ देर बाद दूसरे पत्रकार ने उस चित्र से जुड़ा एक वीडियो शेयर किया और उस पर लिखा – ये मेरे द्वारा की हुई रिपोर्टिंग है और ये तस्वीर नवापूर महाराष्ट्र से है, ना कि गुजरात से। अपनी किरकिरी होते देख मजबूरन पत्रकार महोदय को अपनी पोस्ट हटानी पड़ी।
ऐसे एजेंडा आधारित प्रसंगों को देख आज सोशल मीडिया की बढ़ती ताकत के साथ उसके दुरुपयोग की भी अधिक चिंता है। देश के प्रत्येक नागरिक का जागरूक व टेक्नोलॉजी से यूजर फ्रेंडली होना आज डिजिटल दुनिया के युग में एक बड़ी जिम्मेदारी है। इस बढ़ती जिम्मेदारी के साथ हमारा देश आज एक महामारी से भी गुजर रहा है। ऐसे में जब व्यक्ति घरों में बंद हो, करने को कोई काम ना हो, हर तरफ दहशत का मौहाल हो, तो जाहिर सी बात है, यही उसका मनोरंजन का अंतिम व आसान विकल्प होगा। ऐसे में फेक न्यूज़ की मंडियां भी अपने जोरों पर है। कब वहां से कोई फेक न्यूज़ पढ़कर वो अपने परिचितों को भेज दे, उसे कुछ खबर ही नही होती।
आज देश की अधिकांश जनता इन भ्रामक खबरों के चलते कोरोना एक्सपर्ट भी बन बैठी है, जो कभी-कभी अपने घर पर ही किसी कोरोना से पीड़ित मरीज का व्हाट्सएप्प के माध्यम से प्राप्त जानकारी के आधार पर ही उपचार शुरू कर देती हैं। इन नादानियों से आज हमें स्वयं भी बचना है व समाज को भी बचाना है। सभी राज्य व केंद्र की सरकार व अनेक सामाजिक संस्थाओं द्वारा विशषज्ञों के नंबर लगातार जारी किये जा रहे हैं। बिना सोचे समझे और डॉक्टर के परामर्श के बिना हमें किसी भी प्रकार के प्रयोग से बचना चाहिए और शासन द्वारा जारी किये गए निर्देशों का ही पूर्ण रूप से पालन कर देश व समाज की भलाई में अपना योगदान देना चाहिए।
भारत सरकार ने देश में रेमेडिसविर की कमी को दूर करने के लिए दूसरे देशों से इस महत्वपूर्ण दवा का आयात शुरू किया है। इसके तहत शुक्रवार को रेमेडिसविर की 75,000 शीशियों की पहली खेप भारत पहुंचेगी।
केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में जानकारी गई है कि भारत सरकार के स्वामित्व वाली कंपनी एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड ने अमेरिका के मेसर्स गिलियड साइंसेज इंक और मिस्र की मेसर्स ईवीए फार्मा को रेमेडिसविर की 4,50,000 शीशियां बनाने का ऑर्डर दिया है। अमेरिका से अगले एक या दो दिनों में 75,000 से 1,00,000 शीशियां भारत पहुंचेगी। इसके अलावा 15 मई से पहले एक लाख शीशियों की आपूर्ति की जाएगी। साथ ही ईवीए फार्मा शुरुआत में लगभग 10,000 शीशियों की आपूर्ति करेगी, जिसके बाद हर 15 दिन या जुलाई तक 50,000 शीशियां मिलेंगी।
https://twitter.com/DVSadanandGowda/status/1388069953547374594
सरकार ने देश में भी रेमेडिसविर की उत्पादन क्षमता को बढ़ा दिया है। 27 अप्रैल तक सात लाइसेंस प्राप्त घरेलू निर्माताओं की उत्पादन क्षमता प्रति माह 38 लाख शीशियों से बढ़कर 1.03 करोड़ शीशियों प्रति माह हो गई। पिछले सात दिनों में दवा कंपनियों द्वारा देश भर में कुल 13.73 लाख शीशियों की आपूर्ति की गई है। दैनिक आपूर्ति 11 अप्रैल को 67,900 शीशियों से बढ़कर 28 अप्रैल को 2.09 लाख शीशियों तक पहुंच गई है। गृह मंत्रालय द्वारा रेमेडिसविर आपूर्ति को सुचारू रूप से करने के लिए राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को एडवाजरी जारी की गई थी।
सरकार ने भारत में इसकी उपलब्धता बढ़ाने के लिए रेमेडिसविर के निर्यात पर भी रोक लगा दी। आम लोगों के बीच इंजेक्शन की लाभप्रदता सुनिश्चित करने के लिए, एनपीपीए ने इस माह 17 अप्रैल को संशोधित अधिकतम खुदरा मूल्य जारी किया, जिससे सभी प्रमुख ब्रांडों की लागत 3500 रुपये प्रति शीशी से नीचे आ गई।
रेमेडिसविर के उत्पादन तेजी से बढ़ाने और उपलब्धता को आसानी से सुनिश्चित बनाने के लिए, राजस्व विभाग ने 20 अप्रैल को अधिसूचना जारी कर रेमेडिसविर इंजेक्शन पर सीमा शुल्क की पूरी तरह से खत्म करने का ऐलान किया था। इसके साथ ही रेमेडिसविर के निर्माण में इस्तेमाल किए जाने वाले एपीआई और बीटा साइक्लोडोडेक्सट्रिन पर भी यह छूट दी गई थी। सीमा शुल्क में यह छूट इस वर्ष 31 अक्टूबर तक लागू रहेगी।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसस) के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा कि कोरोना के क्रूर प्रहार से देश के कई हिस्से प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि इस महामारी से निपटने में समाज के सभी लोगों का सहयोग आवश्यक है। कोरोना के प्रकोप पर शासन-प्रशासन व समाज के समन्वित प्रयास से ही भारत विजय प्राप्त करेगा।
आंबेकर ने नयी दिल्ली में डिजिटल माध्यम से आयोजित प्रेस वार्ता में संघ तथा सेवा भारती द्वारा चलाए जा रहे सेवा कार्यों के संबंध में जानकारी दी और कहा कि हमेशा की तरह संघ व सेवाभारती सहित अन्य संगठन व संस्थाएं प्रभावित क्षेत्रों व परिवारों में राहत पहुंचाने के काम में जुटे हैं। संघ की पहल पर आवश्यकता के अनुसार अभी बारह प्रकार के कार्य प्राथमिकता से प्रारंभ हुए हैं।
उन्होंने कहा कि कोविड के संभावित लोगों हेतु आइसोलेशन केंद्र व पॉज़िटिव रोगियों हेतु कोविड केअर (सेवा) केंद्र, सरकारी कोविड केंद्र व अस्पतालों में सहायता, सहायता हेतु दूरभाष (हेल्पलाइन नंबर), रक्तदान, प्लाज्मादान, अंतिम संस्कार के कार्य, आयुर्वेदिक काढ़ा वितरण, समुपदेशन (काउंसलिंग), ऑक्सीजन आपूर्ति व एम्बुलेंस सेवा, भोजन, राशन व मास्क तथा टीकाकरण अभियान व जागरूकता जैसे आवश्यक कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर तत्काल कई प्रांतों में स्वयंसेवकों द्वारा प्रारंभ किया गया है। स्थानीय प्रशासन की भी हर संभव सहायता की जा रही है ताकि सभी मिलकर इस चुनौती पर विजय प्राप्त कर सकें।
उन्होंने बताया कि इंदौर में संघ की पहल पर शासन, निजी अस्पताल, राधा स्वामी संत्संग आदि के सहयोग से दो हज़ार बिस्तर का कोविड केंद्र शासन व समाज के समन्वित कार्य का उत्कृष्ट उदाहरण बन गया है। संघ के स्वयंसेवकों द्वारा अभी 43 प्रमुख शहरों में कोविड सेवा केंद्र चलाए जा रहे हैं तथा अन्य 219 स्थानों पर कोविड अस्पतालों में प्रशासन का सहयोग किया जा रहा है। टीकाकरण हेतु दस हजार से अधिक स्थानों पर जागरूकता अभियान के साथ 2442 टीकाकरण केंद्र अभी तक प्रारंभ किए गए हैं।
एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने बताया कि आवश्यकता के अनुसार प्लाज्मा व रक्तदान में सहयोग किया जा रहा है। कुछ स्थानों पर संभावितों की सूची भी बनी है। दिल्ली में रक्तदाताओं की सूची उपलब्ध है। पूणे में जनजागरण अभियान के माध्यम से 600 लोगों ने प्लाज्मा डोनेट किया, जिससे 1500 लोगों का जीवन बचाने में सहायता मिली। एक अन्य प्रश्न के उत्तर में कहा कि विभिन्न शहरों में बुजुर्गों व अकेले रहने वालों को ध्यान में रखते हुए हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं। इनके माध्यम से जरूरतमंदों को आवश्यक सहायता उपलब्ध करवाई जा रही है।
उन्होंने कहा कि संघ कोरोना की महामारी में दिवंगत सभी को श्रद्धांजलि अर्पित करता है। डॉक्टरों, स्वास्थ्य कर्मियों, ऑक्सीजन आदि सामग्री की आपूर्ति में लगे कर्मचारी, सुरक्षा व स्वच्छता कर्मियों सहित सभी कोरोना योद्धाओं का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि हमारे समाज की संवेदना व सक्रियता अद्भुत है। अपनी जान जोखिम में डालकर संकट की स्थिति में कार्य कर रहे हैं। परिस्थिति भले ही विकट हो, भारत में समाज की शक्ति भी विशाल है।
उत्तराखंड में कोविड के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए राज्य सरकार ने चारधाम यात्रा को स्थगित करने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कहा कि धामों के कपाट निर्धारित समय पर ही खुलेंगे और तीर्थ-पुरोहित मंदिरों में नियमित रूप से पूजा-पाठ करेंगे। लेकिन श्रद्धालुओं की सुरक्षा के मद्देनजर चारधाम यात्रा को स्थगित रखने का निर्णय लिया गया है।
उल्लेखनीय है की प्रदेश में स्थित चारधामों बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री की यात्रा अगले माह 14 मई से शुरू होनी थी। परंपरानुसार 14 मई को गंगोत्री व यमुनोत्री, 17 मई को केदारनाथ तथा 18 मई को बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने हैं। मगर इस बार कोविड की परिस्थितियों के मद्देनजर राज्य सरकार ने चारधामों के कपाट निर्धारित तिथियों पर खोलने की घोषणा के साथ यात्रा पर आम श्रद्धालुओं के लिए प्रतिबंध लगा दिया है।
मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि उत्तराखंड में भी लगातार कोविड के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है। लोगों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल है। राज्य सरकार की ओर से कोविड-19 से लड़ाई के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।
— Uttarakhand DIPR (@DIPR_UK) April 29, 2021
गुरूवार को अपने कैंप कार्यालय में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि चारधाम यात्रा को स्थगित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा की किसी को अनुमति नहीं होगी। केवल तीर्थ पुरोहितों को ही नियमित पूजा-पाठ की अनुमति होगी। स्थानीय लोग भी मंदिरों में पूजा-पाठ के लिए नहीं जा सकेंगे।
उन्होंने कहा कि चारधाम के पट नियमित समय पर ही खुलेंगे और तीर्थ-पुरोहित ही पूजा करेंगे। बाकी देश के लोगों के लिए चारधाम यात्रा अभी बंद है। उन्होंने कहा कि पूरे देश में इस समय कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं। उत्तराखण्ड में भी लगातार कोविड के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे समय में सरकार पूरी तरह से सजग है और इसी क्रम में तय हुआ है कि अभी चारधाम यात्रा को स्थगित रखा जाए। उन्होंने कहा कि लोगों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल है। राज्य सरकार की ओर से कोविड-19 से लड़ाई में हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने गुरुवार को गढ़ी कैंट स्थित कैम्प कार्यालय से 108 सेवा के 132 वाहनों को विभिन्न जिलों के लिए रवाना किया।
प्रदेश सरकार द्वारा यूडीआरपी-एफ के माध्यम से 132 एम्बुलेन्स को स्वास्थ्य महानिदेशालय को फरवरी एवं मार्च माह में उपलब्ध कराया गया था। सरकार द्वारा इन 132 नवीन एम्बुलेंस को 108 के बेड़े में शामिल कर कुंभ मेला 2021 में संचालित किया जा रहा था।
मुख्यमंत्री ने अपने कैम्प कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में इन वाहनों को झंडी दिखाकर 13 जनपदों के लिए रवाना किया। 132 एम्बुलेंस में 36 एडवांस लाइफ सपोर्ट एवं 96 बेसिक लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस हैं।
इनमें अल्मोड़ा को 10, बागेश्वर को 5, चमोली को 9, चंपावत को 5, देहरादून को 13, हरिद्वार को 20, नैनीताल को 10, पौड़ी को 11, पिथौरागढ़ को 9, रुद्रप्रयाग को 5, टिहरी को 9, उधमसिंहनगर को 17 व उत्तरकाशी को 9 एम्बुलेंस उपलब्ध कराई गई हैं।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता को चाहिए कि वे कोविड गाइड लाइन का पूरी तरह से पालन करें। मास्क लगाने के साथ ही दो गज की दूरी का पालन करें और समय-समय पर हाथों को साबुन से धोते रहें। उन्होंने कहा कि बीमारी के लक्षण आते ही सजग रहने की जरूरत है और कोविड अनुरूप व्यवहार अपनाकर अपना इलाज कराएं।
तीरथ ने कहा कि प्रदेश में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन का उत्पादन हो रहा है। जिस किसी अस्पताल को ऑक्सीजन की आवश्यकता हो रही है वहां तत्काल ऑक्सीजन उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि इसके लिए नोडल अधिकारी भी नामित कर दिए गए हैं। जनता को किसी तरह की कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश को दो दिन पहले 7500 रेमिडीसीवीर इंजेक्शन की आपूर्ति हो चुकी है और इससे पहले भी 3500 रेमिडीसीवीर इंजेक्शन की आपूर्ति हुई थी। सरकार पूरी तरह से हालातों पर नजर बनाए हुए है। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी भी मौजूद रहे।

- Raj Shekhar Joshi
Recent days and weeks have characterized China’s assertive actions and behaviour at global stage as a superpower resting speculations on being held as a source of Corona virus or multinationals pulling out of China. This is happening at a time when India is in muddied waters of second wave of Covid 19. This may partly explain for China showing no hurry to pull its troops back from Ladakh border or shrugging off Indian policy actions on limiting Chinese investments.
Chinese economy, the world’s second-largest, grew by 18.3 % in Q1 2021 on base of $ 16 trillion annual GDP though on lower base effect. Chinese economy is set to surpass US by 2026-2028 which is minimum 5 years earlier than anticipated. US economy grew by 8.3% in Q1 2021 on base of $ 22 trillion annual GDP with no signs of slowness.
Immediately post the $ 1.9 trillion coronavirus bailout bill, President Biden launched a $ 2.2 trillion proposal to shore up crumbling U.S. infrastructure. The bill could accelerate the US economy and set a global battle with China over resources.
China has confidently tamed its erstwhile digital poster boy Alibaba group, with $ 2.8 billion fine for distorting Chinese digital and financial markets and ironically inviting gratitude from Alibaba in return. Chinese regulators warned leading 34 internet companies to play by rules including Tencent, ByteDance, Baidu, JD.com, Meituan, Pinduoduo and Kuaishou.
Chatter of resentment against Communist party or Xi Jinping’s authoritarian streaks has vastly reduced. Hongkong celebrated its first national security education day on 15th April to imbibe patriotism in school children and general populace and Chinese airplanes roam in Taiwan airspace with impunity. Clearly, world has yet to understand China better but that’s for another column.
China is asserting global leadership in another strategic humanity challenge on Climate change. Xi didn’t meet John Kerry, U.S. climate envoy while he was in China last week compared to his reception in India. At same time, Xi spoke to Macron and Merkel, his French and German counterparts in a virtual summit on Climate matters receiving compliments on Chinese steps on climate reduction. US seems keen to have Xi joining the 22-23 April climate summit called by President Biden than the other way round. China loomed large in Biden’s meeting with the Japanese PM Yoshihide Suga last week in White House on almost every aspect from economy, human rights, semiconductors and others.
Climate change technologies like carbon and methane sucking, low energy consumption data centres and electronics etc shall be among most valuable technologies of the future. Increasing reliance on chips shall eventually lead to greater climate impact. The poster child of semiconductor industry and one of developed world’s rainiest places, Taiwan is ironically facing its worst drought in 50 years, shutting off irrigation across tens of thousands of acres and compensating farmers for lost income in order to keep its water guzzling semiconductor industry humming.
President Biden met 20 top business executives on chip industry’s challenges impacting global manufacturing with plans to help them fix the semiconductor shortage with his new $ 2 trillion infrastructure bill which includes $ 50 billion for semi-conductors. US has relied much on Asia specially Taiwan for semiconductors exposing structural and national security vulnerability. Currently, U.S. has only 12% of global semiconductor production capacity, down from 37% in 1990.
Chinse and US global manoeuvring coupled with Russian foreign minister Sergei Lavrov landing in Pakistan after 9 years with chatter of developing strategic trust, China signing $ 350 billion deal with Iran spread over 25 years, impending US withdrawal from Afghanistan and Chinese influence visible in military takeover of Myanmar have material consequences on India’s strategic choices. Unfortunately, this is happening at a time when India is struck with a large second wave of Covid infections distracting national leadership with unpredictable consequences in short to medium term.
As India has felt the need now to support vaccine makers with bold backing, it must also take similar steps in AI, clean tech, blockchain etc in far better coordinated and bold ways. As US didn’t hesitate to block key raw materials for making vaccines while being a global leader, we must act boldly to protect our interests balancing our desire to expand global influence. Many key technology policies like AI, blockchain, comprehensive cyber security, data protection, chip design and manufacturing etc have been in works for long time compared to good progress on PLI on electronic parts manufacturing.
It has led to global companies stealing march over potential homegrown companies for AI solutions using data of millions of farmers which should rather happen with a robust policy framework in place.
Key national strategic technology policies should be decoupled from the general political dynamics and be led by an integrated technology policy leadership. If President Biden can consider US high tech related policies worthy of being in national security and development agenda with bold goals and determination, India can take a leaf from the book. The current government has shown will and capacity to take bold decisions in past with strategic intent and hope they will demonstrate the same will in context of India’s leadership in technology.
(Raj Shekhar Joshi is a former national working committee member of Electronics and Computer Software Export Promotion Council, a business and technology leader and actively engaged in social causes.)
बीते एक वर्ष में कोरोना महामारी ने सभी को प्रभावित किया है। इस दौरान सामाजिक, आर्थिक और मानसिक रूप से देश के प्रत्येक वर्ग पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। हालांकि, समाज का एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है जो लोगों का सहयोग करने के साथ-साथ समाज में सकारात्मकता फैलाने का कार्य भी कर रहा है। लेकिन, जैसे कि हर समाज की सच्चाई है… कुछ ऐसे समूह भी हैं जो विपरीत परिस्थितियों में भी सिर्फ नकारात्मकता परोसते हैं और वर्षों से क्रांतिकारी होने का ढोंग करने वाले लोग अब अपने-अपने बिल में छिपे हुए हैं।
अफजल गुरु की बरसी मनाने और भारत के टुकड़े करने के नारे लगाने के आरोप में देशद्रोह का मुकदमा झेल रहे कम्युनिस्ट पार्टी के नेता कन्हैया कुमार गायब हैं। उनकी ओर से कोरोना के खिलाफ जंग में कोई क्रांतिकारी पहल नहीं दिख रही।
वामपंथी मीडिया द्वारा क्रांतिकारी के रूप में प्रस्तुत किए गए कन्हैया कुमार जब देश में विपत्ति आई तो अपने बिल में जाकर छिप गए हैं। सिर्फ इतना ही नहीं समय-समय पर मुख्यतः केंद्र की सरकार पर तंज कसने वाले कन्हैया कुमार खुद आगे बढ़कर किसी की भी मदद करते हुए नजर नहीं आ रहे।
एक अन्य़ कथित क्रांतिकारी हार्दिक पटेल, जिसके माध्यम से गुजरात में सरकार गिराने के लिए पाटीदार आंदोलन करवाया गया था, वह आज गुजरात कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष हैं। हार्दिक पटेल वर्तमान समय में कहीं पर भी कोरोना वायरस महामारी से लोगों को बचाने के लिए सहयोग का पहल करते हुए दिखाई नहीं दे रहे हैं। हां, सोशल मीडिया पर अवश्य एक्टिव हैं।
अक्सर अपने विवादित ट्वीट के कारण चर्चाओं में रहने वाली स्वरा भास्कर भी वर्तमान संकट के समय गायब हैं। सरकार को तो कोस रही हैं, लेकिन अपने स्तर पर समाज या कुछ लोगों की सहायता को कोई कार्य किया हो तो हमें भी बताएं। जिन्हें सरकार के खिलाफ भड़का रही थीं, या जिनके साथ आंदोलन कर रही थीं, उनकी ही सहायता कर रही हों तो भी बताएं ?
गुजरात से विधायक और एक बड़े क्रांतिकारी जिग्नेश मेवाणी भी जमीन पर कहीं नज़र नहीं आ रहे हैं। इसके विपरीत वे ट्विटर पर क्रांति करते दिखाई दे रहे हैं और ट्विटर के माध्यम से फेक खबरें परोस रहे हैं। मंगलवार को उन्होंने एक ट्वीट किया – ”मोदी जी के जन्मस्थल वडनगर में ऑक्सीजन प्लांट के फेल हो जाने के चलते 8 मरीजों की मौत हो गई। ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटना दोबारा न हो उसे सुनिश्चित करने के बजाय या दोषियों के खिलाफ जांच के आदेश के बजाय रुपाणी सरकार लगी है हकीकत छुपाने में। क्या हो रहा है गुजरात में ? कहां है मोदी जी?”
मेवाणी के ट्वीट के बाद गुजरात के आरोग्य कमिश्नर को आधिकारिक बयान जारी करना पड़ा और स्पष्ट करना पड़ा कि वडनगर के अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट फेल होने की बात पूरी तरह गलत है। वडनगर में इस तरह का कोई भी हादसा नहीं हुआ है, यहां तक कि यहां मरीज की मौत होने की बात भी बेबुनियाद है।
साफ है कि इस तरह की गलत बात सोशल मीडिया में कहे जाने पर लोगों में डर का माहौल पैदा होता है। मगर मेवाणी जैसे कथित क्रांतिकारियों को इससे कोई लेना देना नहीं है। उन्हें तो अपनी क्षुद्र राजनीति से मतलब है।
इनके अलावा भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद रावण व अन्य अनेक कथित क्रांतिकारी-समाजसेवी संकट के समय नजर नहीं आ रहे। जो नजर आ रहे हैं वो अपनी हरकत से बाज नहीं आ रहे और समाज में नकारात्मकता फैलाने का ही काम कर रहे हैं। वामपंथी मीडिया और पत्रकार समूह जिन्हें आने वाले समय का नेतृत्वकर्ता बताते हुए नहीं थकता, जब देश पर विपत्ति आई है तो ये नेतृत्वकर्ता क्रांतिकारी नदारद हैं।
कोविड-19 संक्रमण की वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने मंगलवार को विभिन्न महत्वपूर्ण कार्यों के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष से लगभग 25 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की है। मुख्यमंत्री ने राजधानी देहरादून के निकट सेलाकुई इंडस्ट्रियल एरिया स्थित लिंडे ऑक्सीजन प्लांट का निरीक्षण भी किया। उन्होंने इंडस्ट्रियल एरिया में ऑक्सीजन उत्पादन में आ रही हो दिक्कतों के समाधान का भी भरोसा दिया।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के राजकीय मेडिकल काॅलेजों के चिकित्सालयों की क्षमता में वृद्धि और सुदृढ़ीकरण से संबंधित कार्यों के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष से 10 करोड़ रूपए की स्वीकृति दी है। कोविड महामारी में राज्य में मास्क न पहनने वालों से जुर्माना वसूली के बाद उन्हें चार मास्क निःशुल्क उपलब्ध कराने के लिए पुलिस विभाग को एक करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गई है।
इसके अलावा हौम्योपैथिक चिकित्सा सेवाओं के लिए 1 करोड़ 18 लाख 80 हजार रूपए व आयुर्वेदिक एवं यूनानी सेवाओं विभाग को 4 करोड़ 64 लाख 23 हजार 500 रूपए स्वीकृत किये गए हैं। कोविड के संक्रमण से बचाव व राहत से संबंधित विभिन्न कार्यों के लिए जिलाधिकारी बागेश्वर और जिलाधिकारी रूद्रप्रयाग को 2-2 करोड़ रूपए, जबकि जिलाधिकारी चमोली व जिलाधिकारी ऊधमसिंह नगर को 1-1 करोड़ रूपए उनकी मांग के अनुरूप मुख्यमंत्री राहत कोष से स्वीकृत किए गए हैं।
उधर, सेलाकुई इंडस्ट्रियल एरिया स्थित लिंडे ऑक्सीजन प्लांट के निरीक्षण के दौरान प्लांट के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि इंडस्ट्रियल एरिया में विद्युत आपूर्ति नियमित ना होने के कारण कई बार उनका उत्पादन प्रभावित हो जाता है। इस समस्या के निदान के लिए प्रयास भी किए गए, लेकिन अभी तक समाधान नहीं हो पाया है। इसके अलावा उन्होंने इंडस्ट्रियल एरिया में सड़क के सुधारीकरण की भी मांग उठाई। इस मौके पर लिंडे के पदाधिकारियों ने पहाड़ी क्षेत्रों में मिनी ऑक्सीजन प्लांट लगाने का भी सुझाव दिया।
इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति की समस्या जल्द हल करा दी जाएगी। इसके लिए उन्होंने मौके से ही शासन के उच्च अधिकारियों से भी बातचीत की। उन्होंने कहा कि ऑक्सीजन प्लांट की हर समस्या का निदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में ऑक्सीजन की बहुत आवश्यकता है, ऐसे में ऑक्सीजन प्लांट कंपनियों की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है।
मुख्यमंत्री ने ऑक्सीजन कंपनी में काम कर रहे मजदूरों को भी उनके सहयोग के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा की प्राण वायु का उत्पादन करने वाले मजदूर किसी की जिंदगी बचाने का काम करते हैं। मुख्यमंत्री ने सेलाकुई मैं प्रस्तावित कोविड केयर सेंटर का भी निरीक्षण किया और व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने निर्देश दिए हैं कि वर्तमान परिस्थितियों के मद्देनजर देहरादून , हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर व नैनीताल जिले के जिलाधिकारी विशेष तौर पर विवेकानुसार अपने जनपदों में कर्फ्यू लगाने अथवा अन्य कड़े नियम लागू करने के लिए अधिकृत होगें। परन्तु यह सुनिश्चित कर लिया जाए कि उद्योग, भारवाहन, निर्माण कार्य व अन्य आवश्यक सेवाएं निर्बाध रूप से संचालित रहें।
मुख्यमंत्री ने रविवार को बीजापुर सेफ हाउस में कोविड-19 की आपात बैठक में ये निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कोरोना की चेन को ब्रेक करने के लिए जन जागरूकता बहुत जरूरी है। साथ ही मास्क न पहनने या सोशल डिस्टेंसिंग की अवहेलना करने पर तुरंत कड़ी कार्रवाई की जाए। राज्य की सीमाओं पर और सख्त होने की जरूरत है।
इधर, देहरादून के जिलाधिकारी डॉ.आशीष कुमार श्रीवास्तव ने रविवार को राजधानी के अलावा नगर निगम ऋषिकेश, छावनी परिषद गढ़ी कैंट व क्लेमनटाउन में सोमवार 26 अप्रैल से आगामी 3 मई तक एक सप्ताह के लिए कर्फ्यू के आदेश जारी किये हैं। आदेश में कहा गया है कि कोविड-19 के लगातार बढ़ते संक्रमण को देखते हुए जनहित में यह निर्णय लिया गया है।
इसके साथ ही नैनीताल के जिलाधिकारी ने जनपद के हल्द्वानी नगर निगम, लालकुआं नगर पंचायत और नैनीताल जिले के रामनगर क्षेत्र में भी 27 अप्रैल से 3 मई के बीच कोरोना कर्फ्यू लगाने के आदेश जारी किये हैं।
Uttarakhand | Corona curfew will remain in place in Haldwani Municipal Corporation, Lalkuan Nagar Panchayat, and Ramnagar areas of Nainital district between April 27 and May 3: Nainital district magistrate#COVID19
— ANI (@ANI) April 25, 2021
देहरादून के जिलाधिकारी द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि कोरोना कर्फ्यू 26 अप्रैल शाम 7 बजे से 3 मई प्रातः 5 बजे तक रहेगा। इस दौरान निजी वाहनों के संचालन पर भी पूर्णतः प्रतिबन्ध रहेगा। कोरोना कर्फ्यू की अवधि में निम्नलिखित सेवाओं को सशर्त छूट मिलेगी –
- फल सब्जी की दुकान, डेरी, बेकरी, मीट-मछली, राशन, सरकारी सस्ता गल्ला की दुकानें तथा पशु चारा की दुकानें अपराह्न 4:00 बजे तक ही खुली रह सकेंगी।
- पेट्रोल पंप, गैस आपूर्ति तथा दवा की दुकानें पूरे समय खुली रहेंगी।
- आवश्यक सेवा से जुड़े वाहनों तथा सरकारी वाहनों को केवल ड्यूटी हेतु आवागमन में छूट होगी।
- हवाई जहाज, ट्रेन तथा बस से यात्रा करने वाले व्यक्तियों को आवागमन में छूट होगी।
- शादी और संबंधित समारोह में प्रवेश करने के लिए बैंकेट हाल/सामुदायिक हाल और विवाह समारोह से संबंधित व्यक्तियों/वाहनों की आवाजाही हेतु प्रतिबंधों के साथ छूट रहेगी। समारोह स्थल पर 50 से अधिक व्यक्ति एकत्रित नहीं हो सकेंगे।
- सार्वजनिक हित के निर्माण कार्य के चलते रहेंगे तथा इनसे जुड़े हुए कार्मिक एवं मजदूरों तथा निर्माण सामग्री के वाहनों को आवागमन में छूट रहेगी।
- औद्योगिक इकाइयों तथा उनके वाहन व कार्मिकों को आने-जाने की छूट होगी।
- रेस्टोरेंट्स तथा मिठाई की दुकानों से होम डिलीवरी में छूट रहेगी।
- शव यात्रा से संबंधित वाहनों को छूट रहेगी तथा अंतिम संस्कार में 20 से अधिक व्यक्ति सम्मिलित नहीं हो सकेंगे।
- केंद्र सरकार तथा राज्य सरकार के अधीन समस्त शासकीय तथा अशासकीय कार्यालय (आवश्यक सेवा के कार्य को छोड़कर) बंद रहेंगे।
- मालवाहक वाहनों के आवागमन में छूट रहेगी।
- वास्तविक रूप से चिकित्सालय में उपचार हेतु जाने वाले व्यक्तियों के वाहनों को आवागमन में छूट होगी।
- कोविड जांच व टीकाकरण हेतु निकटवर्ती केंद्र तक आवागमन में छूट रहेगी।
- पोस्ट ऑफिस तथा बैंक यथासमय खुले रहेंगे।
आदेश में कहा गया है कि नियमों का उल्लंघन करने की स्थिति में संबंधित के विरुद्ध आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 व उत्तराखंड एपिडेमिक डिजीज कोविड-19 रेगुलेशन, एपिडेमिक डिजीज एक्ट- 1897 एवं भारतीय दंड संहिता तथा अन्य सुसंगत धाराओं के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी।
