
- प्रहलाद सबनानी
आर्थिक मामलों के जानकार और बैंकिंग सेवा के पूर्व अधिकारी
कोरोना महामारी के समय पूरे विश्व में ही लाखों लोगों के रोज़गार पर विपरीत प्रभाव पड़ा। भारत भी इससे अछूता नहीं रह सका और हमारे देश में भी कई लोगों के रोज़गार पर असर पड़ा। हालांकि, छोटी अवधि के लिए इस समस्या को हल करने के उद्देश्य से कोरोना महामारी के दौरान, लगभग 80 करोड़ लोगों को 8 महीनों तक मुफ़्त अनाज, दालें एवं अन्य खाद्य सामग्री उपलब्ध करायी गईं थी। साथ ही, करोड़ों परिवारों को मुफ़्त गैस सिलेंडर उपलब्ध कराए गए एवं जन धन योजना के अंतर्गत खोले गए करोड़ों महिलाओं के खातों में प्रतिमाह 500 रुपए केंद्र सरकार द्वारा जमा किए जाते रहे। करोड़ों किसानों के खातों में भी इस दौरान रुपए 6000 जमा किए गए थे। परंतु, बेरोज़गारी की समस्या का लम्बी अवधि के लिए समाधान निकालना बहुत आवश्यक प्रतीत होता है।
कोरोना महामारी के चलते वित्तीय वर्ष 2020-21 में केंद्र सरकार की अर्थप्राप्ति में बहुत कमी रही है। जबकि ख़र्चों में कोई कमी नहीं आने दी गई ताकि इस महामारी के दौर में जनता को किसी प्रकार की तकलीफ़ महसूस न हो। देश में तरलता के प्रवाह को लगातार बनाए रखा गया तथा आत्म निर्भर भारत पैकेज को लागू करते हुए इसके अंतर्गत अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों की भरपूर मदद की गई। आत्म निर्भर भारत पैकेज के अंतर्गत, भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा किए गए उपायों सहित, कुल मिलाकर 27.1 लाख करोड़ रुपए का वित्तीय प्रभाव रहा है, यह सकल घरेलू उत्पाद का 13 प्रतिशत है।
विगत दिवस वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए संसद में बजट पेश किया। यह बजट कई विपरीत परिस्थितियों में पेश किया गया है। इस लिहाज़ से यह बजट भी अपने आप में विशेष बजट ही कहा जाएगा। इस बजट के माध्यम से भरपूर प्रयास किया गया है कि देश में रोज़गार के अधिक से अधिक नए अवसर सृजित किए जा सकें। सबसे पहले तो वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए 5.54 लाख करोड़ रुपए के पूंजीगत ख़र्चों का प्रावधान किया गया है। जबकि वित्तीय वर्ष 2020-21 में 4.12 लाख करोड़ रुपए के पूंजीगत ख़र्चों का प्रावधान किया गया था। इस प्रकार वित्तीय वर्ष 2021-22 में पूंजीगत ख़र्चों में 34.46 प्रतिशत की वृद्धि दृष्टीगोचर होगी। इसका सीधा सीधा परिणाम देश में रोज़गार के नए अवसरों के सृजित होने के रूप में देखने को मिलेगा।
वित्तीय वर्ष 2020-21 में किए गए 13 वायदों पर तेज़ी से काम हो रहा है। अगले वित्तीय वर्ष 2021-22 में कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्र चुने गए हैं, जिन पर विशेष ध्यान केंद्रित कर तेज़ी से काम किया जाएगा। इन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शामिल हैं स्वास्थ्य सेवाएं, स्वच्छ जल की व्यवस्था, स्वच्छ भारत, अधोसंरचना का विकास, गैस की उपलब्धता, आदि।
कोरोना महामारी के दौर में देश में स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता मिली है और यह ज़रूरी भी है कि अब देश में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार किया जाए। अतः प्रधानमंत्री आत्म निर्भर स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत प्राथमिक एवं माध्यमिक स्वास्थ्य देखभाल अधोसंरचना को और भी मज़बूत करने के उद्देश्य से अगले 6 वर्षों के दौरान 64,180 करोड़ रुपए ख़र्च करने का प्रावधान किया गया है। हालांकि स्वास्थ्य योजनाओं पर वित्तीय वर्ष 2021-22 में कुल मिलाकर 223,846 करोड़ रुपए ख़र्च करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, इस मद पर किए जाने वाले कुल ख़र्च में 137 प्रतिशत की बढ़ोतरी दृष्टिगोचर है।
कोरोना वायरस महामारी को रोकने हेतु तैयार की गई वैक्सीन के लिए 35,000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। यदि आवश्यकता होगी तो और फ़ंड भी उपलब्ध कराया जाएगा। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के साथ ही ग्रामीण एवं शहरी इलाक़ों में समस्त परिवारों को स्वच्छ पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इस मद पर अगले 5 वर्षों के दौरान 2.87 लाख करोड़ रुपए ख़र्च किए जाने का प्रावधान किया गया है। इस कार्य को गति देने के उद्देश्य से शीघ्र ही शहरी जल जीवन मिशन भी प्रारम्भ किया जा रहा है।
स्वच्छ भारत स्वस्थ भारत के नारे को साकार करने के उद्देश से “शहरी स्वच्छ भारत मिशन 2” को भी प्रारम्भ किया जा रहा है। इसके लिए 1.42 लाख करोड़ रुपए ख़र्च करने की योजना बनाई गई है।
देश में अधोसंरचना को एक लेवल और आगे ले जाने के लिए नए- नए सड़क मार्ग विकसित करने के साथ ही सड़क, रेलवे व पोर्ट को आपस में जोड़ने का प्रयास भी किया जा रहा है। देश के अंदर ही नदियों को जल मार्ग के रूप में विकसित किए जाने के भी प्रयास किए जा रहे हैं क्योंकि जल मार्ग यातायात का एक बहुत ही सुगम एवं सस्ता साधन है। अतः देश में अधोसंरचना विकसित करने के उद्देश्य से रोड मंत्रालय को वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिये रुपए 1.18 लाख करोड़ रुपए का आबंटन किया गया है। वित्तीय वर्ष 2020-21 में राष्ट्रीय राजमार्ग के 13,000 किलोमीटर रोड बनाए जाने के लिए टेंडर पास किए गए थे। इसके अतिरिक्त वित्तीय वर्ष 2021-22 में भी राष्ट्रीय राजमार्ग के 8500 किलोमीटर नए रोड का निर्माण किए जाने का प्रावधान किया गया है।
इसी प्रकार, रेलवे मंत्रालय को भी वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए 1.1 लाख करोड़ रुपए का आबंटन किया गया है। दिसम्बर 2023 के अंत तक देश में रेलवे की समस्त ब्रॉड गेज लाइन का 100 प्रतिशत विद्युतीकरण कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा और 27 नगरों में मेट्रो रेल लाइन उपलब्ध करा दी जाएगी। देश में कुछ पोर्ट्स का निजीकरण किए जाने की योजना भी बनाई गई है।
100 नए शहरों में गैस वितरण, पाइप लाइन के ज़रिए किए जाने की योजना है। साथ ही, उज्जवला योजना के अंतर्गत 1 करोड़ गैस के नए कनेक्शन योग्य परिवारों को उपलब्ध कराए जायेंगे। राष्ट्रीय अधोसंरचना पाइप लाइन को तेज़ी से विकसित करने के उद्देश्य से वित्तीय विकास संस्था के माध्यम से राज्य एवं केन्द्र उपक्रमों को पूंजी उपलब्ध करायी जाएगी।
अधोसंरचना को विकसित करने के लिए किए जा रहे भारी भरकम ख़र्च के चलते देश में न केवल रोज़गार के नए अवसर सृजित होंगे बल्कि इससे अन्य कई उत्पादों जैसे सीमेंट, स्टील, आदि की मांग में भी वृद्धि होगी जिसके कारण अन्य कई उद्योग भी तेज़ी से विकास करते नज़र आएंगे।
भारत में बीमा के क्षेत्र में अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाक़ी है क्योंकि देश का बहुत बड़ा वर्ग बीमा के कवरेज से बाहर है। अतः बीमा क्षेत्र को तेज़ी से विकसित करने के उद्देश्य से बीमा कम्पनियों में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए विदेशी निवेश की सीमा को 49 प्रतिशत से बढ़कर 74 प्रतिशत किया जा रहा है, इसके लिए बीमा क़ानून में ज़रूरी संशोधन भी किया जा रहा है।
देश में सरकारी क्षेत्र के बैंकों को विभिन्न समस्याओं से बाहर निकालने के उद्देश्य से हालांकि सरकारी क्षेत्र की बैंकों में पिछले 5 वर्षों के दौरान 3.16 लाख करोड़ रुपए की पूंजी सरकार द्वारा उपलब्ध करायी गई है। फिर भी, वित्तीय वर्ष 2021-22 में सरकारी क्षेत्र के बैकों को 20,000 करोड़ रुपए की अतिरिक्त पूंजी उपलब्ध करायी जाएगी। सरकारी क्षेत्र की बैंकों में दबाव में आई आस्तियों के लिए विशेष आस्ती प्रबंधन कम्पनियों की स्थापना किए जाने की योजना है। इससे इन बैंकों की ग़ैर निष्पादनकारी आस्तियों में कमी की जा सकेगी।
75 वर्ष से अधिक की आयु के बुज़ुर्गों को, जिनकी आय केवल पेंशन एवं ब्याज की मदों से होती है, अब आय कर विवरणी फ़ाइल करने की आवश्यकता नहीं होगी। यह देश के बुज़ुर्गों के लिए एक विशेष तोहफ़ा माना जा रहा है।
कोरोना महामारी के चलते केंद्र सरकार की कुल आय में आई भारी कमी के कारण वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए 9.5 प्रतिशत का राजकोषीय घाटा होने का अनुमान लगाया गया है। परंतु, वित्तीय वर्ष 2021-22 में इसे घटाकर 6.8 प्रतिशत पर लाया जाएगा एवं वित्तीय वर्ष 2022-23 में इसे 5.5 प्रतिशत तक नीचे लाया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2021-22 में सरकार द्वारा विभिन मदों पर ख़र्चों के लिए किए गए प्रावधानों के चलते बाज़ार से 12 लाख करोड़ रुपए का सकल उधार लिया जाएगा। साथ ही, 1.75 करोड़ रुपए का पूंजी विनिवेश भी किया जाएगा ताकि देश की जनता के लिए किए जा रहे विकास कार्यों पर किसी भी प्रकार की आंच नहीं आए।
कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए संसद में प्रस्तुत किए गए बजट में यह प्रयास किया गया है कि देश में किस प्रकार रोज़गार के अधिक से अधिक नए अवसर सृजित किए जाएं।
वर्ष 2013 की भीषण आपदा में बुरी तरह से तहस-नहस हुए विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम में पुनर्निर्माण कार्य तेजी पर हैं। धाम में लगभग 180 करोड़ रूपये के काम पूरे होने को हैं। केदारनाथ में द्धितीय चरण में 128 करोड़ रूपये के निर्माण कार्य भी जल्द शुरू किए जाएंगे। केदार पुरी में आदि शंकराचार्य की मूर्ति बनकर तैयार हो गई है और शंकराचार्य की समाधि का कार्य भी जल्द पूर्ण हो जाएगा। धाम में श्रद्धालुओं को ध्यान लगाने के लिए तीन गुफाओं का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। इसके अलावा सरस्वती घाट भी बन कर तैयार हो चुका है।
मंगलवार को मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत द्वारा राजधानी देहरादून में आयोजित समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने यह जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने केदारनाथ व बद्रीनाथ के पुनर्निर्माण कार्यों की समीक्षा के दौरान अधिकारियों से निर्माण कार्यों की प्रगति की विस्तार से जानकारी ली को निर्देश दिए कि कार्यों को निर्धारित समयावधि में पूर्ण करने के साथ ही गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने कहा कि बर्फवारी के कारण जो कार्य बाधित हुए उन कार्यों में तेजी लाएं।
मुख्यमंत्री ने आगामी समय में केदारनाथ व बद्रीनाथ के कपाट खुलने से पूर्व श्रद्धालुओं की सुविधा के दृष्टिगत महत्वपूर्ण प्रकृति के सभी कार्य पूर्ण करने को कहा। उन्होंने कहा कि यात्रियों की सुविधा के लिए बैठने, पेयजल एवं शेड की भी उचित व्यवस्था हो। जन सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए मन्दिर के आस-पास सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की जाय।
प्रदेश के पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर ने जानकारी दी कि केदारनाथ में पुनर्निर्माण कार्यों में प्रथम चरण में मंडप से संबधित कार्य 85 प्रतिशत काम हो चुके हैं। आगामी15 अप्रैल तक यह कार्य पूर्ण हो जाएंगे। बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि बद्रीनाथ धाम में प्रथम चरण में 245 करोड़ रूपये के कार्यों का प्लान तैयार हो चुका है। यात्रा सीजन को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण प्रकृति के कार्यों को पहले प्राथमिकता दी जाएगी।
बैठक में पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज, मुख्य सचिव ओमप्रकाश, प्रमुख सचिव आनन्द वर्द्धन, गढ़वाल कमिश्नर रविनाथ रमन, अपर सचिव आशीष चौहान, आर. राजेश कुमार एवं संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
15 वें वित्त आयोग द्वारा उत्तराखण्ड को कुल 89,845 करोड़ रूपए की संस्तुति की गई है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने इस पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, 15 वें वित्त आयोग के अध्यक्ष एनके सिंह और आयोग के सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे उत्तराखण्ड को विकास योजनाएं संचालित करने में काफी मदद मिलेगी। राज्य को प्रधानमन्त्री और केन्द्र सरकार का सदैव सहयोग मिलता रहा है। आयोग ने राज्य के पक्ष को समझा और अपनी महत्वपूर्ण संस्तुतियां दी हैं।
उन्होंने कहा कि पीएमजीएसवाई में बड़ी राशि मिलने से सड़क से वंचित रह गए गांवों को सड़कों से जोड़ा जा सकेगा। आपदा प्रबंधन में भी पर्याप्त धनराशि की संस्तुति की गई है। निश्चित रूप से इससे राज्य में आपदा प्रबंधन को और मजबूत करने में सहायता मिलेगी। राज्य में पंचायती राज संस्थाओं के सुदृढ़ीकरण में भी मदद मिलेगी।
गौरतलब है कि 15 वें वित्त आयोग द्वारा उत्तराखण्ड को कुल 89,845 करोड़ रूपए की संस्तुति की गई है। इसमें 47,234 करोङ रूपए की राशि केन्द्रीय करों में राज्य का हिस्सा है। केंद्रीय करों में राज्य के हिस्से में 1.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
केंद्रीय बजट की मुख्यमंत्री ने की सराहना
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने केंद्रीय बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि विपरीत परिस्थितियों में बहुत ही समावेशी बजट प्रस्तुत किया गया है। प्रधानमंत्री मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को धन्यवाद देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट में प्रधानमंत्री की मजबूत इच्छाशक्ति दिखाई देती है।
उन्होंने कहा कि मुख्यतः 6 स्तम्भों पर आधारित इस बजट में आधारभूत संरचना के विकास, रोजगार सृजन के साथ ही गांवों और किसानों का ख्याल रखा गया है। इस बजट को सभी देशवासियों की आकांक्षाओं का बजट कह सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट से स्वस्थ और सुरक्षित भारत की परिकल्पना पूर्ण होगी। हेल्थ केयर में 137 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। यह बजट आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करेगा।

- प्रहलाद सबनानी
सेवानिवृत्त उप महाप्रबंधक, भारतीय स्टेट बैंक
पूरे विश्व में फैली कोरोना महामारी के चलते सभी देशों में तुलनात्मक रूप से राजस्व संग्रहण में बहुत कमी आई है। भारत में भी यही स्थिति देखने में आई है और करों की वसूली एवं अन्य स्त्रोतों से आय वित्तीय वर्ष 2020-21 में वर्ष 2019-20 की तुलना में बहुत कम रही है। हालांकि कोरोना महामारी के बाद, अब जब आर्थिक विकास दर में पुनः वृद्धि दृष्टिगोचर है तब करों की वसूली में भी सुधार देखने में आ रहा है। माह दिसम्बर 2020 में जीएसटी संग्रहण रिकार्ड स्तर पर, रुपए 1.15 लाख करोड़ रुपए का हुआ है। माह अक्टोबर 2020 एवं नवम्बर 2020 में भी यह एक लाख करोड़ रुपए से अधिक का रहा था।
कोरोना महामारी के चलते राजस्व के संग्रहण में आई कमी के चलते केंद्र सरकार ने आवश्यक ख़र्चों विशेष रूप से ग़रीब वर्ग एवं किसानों को सहायता पहुंचाने के लिए होने वाले ख़र्च में कोई कमी नहीं आने दी है। बल्कि, पूंजीगत ख़र्चों को तो पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ाया ही है ताकि देश की अर्थव्यवस्था को बल मिल सके एवं रोज़गार के अधिक अवसर निर्मित हो सकें, जिसकी कि आज देश में बहुत अधिक आवश्यकता है। वित्तीय वर्ष 2020-21 में माह दिसम्बर 2020 को समाप्त अवधि तक 499 डीबीटी योजनाओं पर 2.21 लाख करोड़ रुपए ख़र्च किए गए हैं। विपरीत परिस्थितियों में आर्थिक विकास को गति देने के लिए सरकारी ख़र्चों को बढ़ाने की बहुत ज़रूरत है।
माह अप्रेल 2020 से नवम्बर 2020 को समाप्त अवधि में केंद्र सरकार का कुल व्यय 19,06,358 करोड़ रुपए रहा है जबकि वित्तीय वर्ष 2019-20 की इसी अवधि के दौरान यह 18,20,057 करोड़ रुपए रहा था। इसी प्रकार पूंजीगत ख़र्चे भी वित्तीय वर्ष 2020-21 में नवम्बर 2020 तक 2,41,158 करोड़ रुपए के रहे हैं जो वित्तीय वर्ष 2019-20 में इसी अवधि का दौरान 2,13,842 करोड़ रुपए के रहे थे। वित्तीय वर्ष 2020-21 में केंद्र सरकार के कुल राजस्व की वसूली 830,851 करोड़ रुपए की रही है जबकि कुल ख़र्चे 19,06,358 करोड़ रुपए के किए गए हैं। इस प्रकार कम राजस्व वसूली का ख़र्चों पर किसी भी तरह से असर आने नहीं दिया गया है। ऐसा कोरोना महामारी जैसी विशेष विषम परिस्थितियों के चलते ही किया गया है ताकि देश की जनता को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो सके एवं देश के विकास को गति मिल सके। विशेष रूप से देश में जब निजी निवेश भी गति नहीं पकड़ पा रहा हो, तो केंद्र सरकार को तो आगे आना ही होगा।
वैसे देश में अब परिस्थितियां तेज़ी से बदल रही हैं और आर्थिक विकास दर तेज़ी से वापिस पटरी पर आती दिख रही है। जैसे जैसे आर्थिक विकास दर की रफ़्तार बढ़ेगी वैसे वैसे केंद्र सरकार के राजस्व में भी तेज़ गति से वृद्धि होगी। साथ ही, कोरोना महामारी जैसी विषम परिस्थितियों के कारण विनिवेश के लक्ष्य भी हासिल नहीं किये जा सके और अब जब शेयर बाज़ार में तेज़ी दिखाई पड़ रही है और शेयर बाज़ार नित नई रिकार्ड ऊंचाईयों को छू रहा है। ऐसे में, केंद्र सरकार के लिए विनिवेश के लक्ष्य हासिल करना भी थोड़ा आसान होता दिखाई दे रहा है।
कुछ क्षेत्रों में विकास दर को हासिल करने में अभी और समय लगेगा जैसे टुरिज़म, एवीएशन एवं होटेल उद्योग आदि क्योंकि इन क्षेत्रों को अभी तक पूरे तौर पर खोला भी नहीं गया है। अतः केंद्र सरकार को इन क्षेत्रों सहित अन्य कई क्षेत्रों में प्रोत्साहन/सहायता कार्यक्रम चालू रखने होंगे, केंद्र सरकार ऐसा कर भी रही है।
कोरोना महामारी के कारण देश में बरोज़गारी की दर में भी इज़ाफ़ा हुआ है। इस मुद्दे को गम्भीरता एवं शीघ्रता से सुलझाने का प्रयास केंद्र सरकार कर रही है। विशेष रूप से हॉस्पिटैलिटी एवं ट्रैवल के क्षेत्रों को धीरे धीरे खोला जा रहा है ताकि इन क्षेत्रों में रोज़गार के अवसर एक बार पुनः कोरोना महामारी के काल के पहिले के स्तर को प्राप्त कर सकें। अभी तक ये क्षेत्र 50 प्रतिशत से कुछ अधिक खुल पाए हैं। ये थोड़े जोखिम भरे क्षेत्र हैं क्योंकि इन क्षेत्रों को पूरे तौर पर खोलने से कोरोना महामारी के वापिस फैलने का ख़तरा हो सकता है।
हालांकि केंद्रीय बजट में बजटीय घाटे की एक सीमा निर्धारित की गई है जिसका पालन केंद्र सरकार को करना होता है परंतु कोरोना महामारी जैसी विशेष परिस्थितियों के चलते इस सीमा का पालन किया जाना अब बहुत मुश्किल हीं नहीं बल्कि असम्भव भी होगा। अतः वित्तीय वर्ष 2021-22 के केंद्रीय बजट के लिए इस सीमा के पालन में छूट लेते हुए इसे बढ़ाया जाना चाहिए। बजटीय घाटे में यदि वृद्धि भी होती है तो देश की अर्थव्यवस्था पर कोई विपरीत प्रभाव पड़ने वाला नहीं हैं क्योंकि एक तो यह ख़र्चा पूंजीगत मदों पर अधिक किया जा रहा है, दूसरे अब देश में ब्याज की दरें काफ़ी कम हो गई हैं अतः केंद्र सरकार को बाज़ार से लिए जा रहे ऋणों पर कम ब्याज देना पड़ रहा है। साथ ही, यदि यह राशि पूंजीगत मदों पर ख़र्च की जा रही है तो इससे एक तो संपतियों का निर्माण होगा, दूसरे रोज़गार के नए अवसर निर्मित होंगे, तीसरे उत्पादों की मांग बढ़ेगी और इस तरह आर्थिक विकास का पहिया तेज़ी से घूमने लगेगा और केंद्र सरकार के राजस्व में वृद्धि करने में भी सहायक सिद्ध होगा। हां, निर्माण के क्षेत्र में, कृषि के क्षेत्र में एवं अधोसंरचना को विकसित करने के लिए, पूँजीगत ख़र्चे अधिक मात्रा में किए जाने चाहिए क्योंकि इन क्षेत्रों में तुलनात्मक रूप से रोज़गार के अधिक अवसर निर्मित होते हैं।
केंद्र सरकार ने पिछले 6 महीनों के दौरान कई क़दम उठाए हैं और उसका असर नवम्बर एवं दिसम्बर माह के राजस्व संग्रहण में दिखने भी लगा है। कोरोना महामारी के दौरान, दरअसल पूंजीगत ख़र्चे निजी क्षेत्र एवं सरकारी क्षेत्र, दोनों ही क्षेत्रों में कम हो गए थे। परंतु अब जब केंद्र सरकार ने अपने ख़र्चों में बढ़ौतरी करनी शुरू कर दी है तो आशा की जा रही है कि निजी क्षेत्र भी सरकार के साथ क़दम से क़दम मिलाकर चलेगा एवं अपने पूंजीगत ख़र्चों को बढ़ाएगा। विदेशी निवेशक भी अब आगे आ रहे हैं एवं उन्होंने नैशनल हाईवेज़ के प्रोजेक्ट्स में 10,000 करोड़ रुपए का निवेश किया है। इस तरह के प्रोजेक्ट की आस्तियों का मुद्रीकरण (Monetise) किया जा रहा है ताकि निवेश बढ़ाया जा सके। पूंजीगत ख़र्चों को हर हालात में बढ़ाया जा रहा है। एयरपोर्ट्स का निजीकरण किया जा रहा है इससे भी राजस्व की प्राप्ति केंद्र सरकार को होगी।
केंद्र सरकार ने स्ट्रीटीजिक उद्योग नीति की घोषणा की है। इससे कई क्षेत्रों का निजीकरण करने में आसानी होगी। क्षेत्र निर्धारित कर लिए गए हैं। यह एक बड़ा क़दम है, जो केंद्र सरकार द्वारा उठाया जा रहा है। अपने राजस्व में वृद्धि करने के लिए इसी प्रकार के कई क्रांतिकारी क़दम अब राज्य सरकारों को भी उठाने होंगे। देश के आर्थिक विकास को गति देने के उद्देश्य केंद्र एवं राज्य सरकारों को अब मिलकर काम करना आवश्यक हो गया है।
किसी भी खेल प्रेमी के लिए वह क्षण बड़ा ही गौरवपूर्ण होता है जब जन-गण-मन की धुन पर तिरंगा लहराता है। केंद्र सरकार की ‘खेलो इंडिया अभियान’ के बाद से भारतीय समाज में विभिन्न खेलों के प्रति लोकप्रियता बढ़ी है। यह बात मध्य प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण विभाग के निदेशक पवन कुमार जैन ने कही। अवसर था, भोपाल में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के लेखक डॉ. आशीष द्विवेदी की पुस्तक ‘खेल पत्रकारिता के आयाम’ के विमोचन का। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. केजी सुरेश ने की।
मुख्य अतिथि पवन जैन ने खेल पत्रकारिता और उनकी चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मीडिया रिपोर्टिंग में खेल को समग्र दृष्टि से देखने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि कोरोना संकट के बाद खेल हमारे समाज को नया मार्ग दिखा सकते हैं। उन्होंने मीडिया प्राध्यापक डॉ. आशीष द्विवेदी की पुस्तक ‘खेल पत्रकारिता के आयाम’ को सामाजिक मनोभाव को सकारात्मक मार्गदर्शन करने वाला शोधपूर्ण ग्रंथ बताया। यह एक ऐसी पुस्तक है जो ना सिर्फ खेलों के बारे में हमें बताती है बल्कि यह पुस्तक हमें खेलों तक लेकर जाती है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो.केजी सुरेश ने बताया कि एक खेल प्रेमी ही बेहतर खेल प्रशासक या खेल पत्रकार हो सकता है। खेल के विविध आयामों को समाहित करते हुए यह पुस्तक प्रकाशित हुई है। यह पुस्तक पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए बहुत उपयोगी साबित होगी। उन्होंने कहा कि जीवन में खेल का बहुत महत्व है। प्रत्येक व्यक्ति को किसी न किसी खेल से जुड़ना चाहिए। खेल जीवन में अनुशासन लाता है।
पुस्तक की रचना के संदर्भ में लेखक डॉ.आशीष द्विवेदी ने कहा कि खेल पत्रकारिता के अध्यापन के दौरान ध्यान आया था कि इस विषय पर समग्रता से एक पुस्तक की आवश्यकता है। खेल पत्रकारिता में असीम संभावनाएं हैं।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं वरिष्ठ पत्रकार शिव कुमार विवेक ने पुस्तक के कंटेंट की चर्चा करते हुए कहा कि यह पुस्तक खेल पत्रकारिता के सभी आयाम को समेटती है। उन्होंने कहा कि अब हिंदी समाचार पत्रों में भी खेल के लिए विशेष पन्ने निर्धारित होने लगे हैं, इससे यह परिलक्षित होता है कि खेलों के प्रति वातावरण बेहतर हुआ है।
खेल पत्रकार एवं विशिष्ट अतिथि श्रुति तोमर भदौरिया ने विभिन्न चुनौतियों पर चर्चा करते हुए कहा कि खेलों में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। खेलों में महिलाओं के प्रति सामाजिक दृष्टि और बाजारवादी सोच को उन्होंने चुनौती माना।
कार्यक्रम का संचालन लोकेन्द्र सिंह ने किया और आभार प्रदर्शन कुलसचिव प्रो. अविनाश वाजपेयी ने किया।
उत्तराखंड में सड़क सुविधाओं के विकास और सड़क दुर्घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए त्रिवेंद्र सरकार एक नई पहल करने जा रही है। प्रदेश सरकार ने सभी ब्लॉक मुख्यालयों को डबल लेन सड़क से जोड़ने की योजना बनाई है।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि प्रदेश में विकास खण्ड मुख्यालयों को जोड़ने वाली अधिकांश सड़कें कम चौड़ी हैं। यातायात की सुगमता के लिए कम आबादी वाले विकास खण्डों को जोड़ने वाली सड़कों को डेढ़ लेन तथा अधिक आबादी वाले विकास खण्डों को डबल लेन सड़क से जोड़ा जाएगा। सड़क चौड़ीकरण से इन क्षेत्रों में अवागमन और अधिक सुरक्षित तथा सुविधापूर्ण हो सकेगा और सुदूरवर्ती क्षेत्रों तक आवागमन सुरक्षित होगा। यातायात नियंत्रण एवं सड़क दुर्घटनाओं को रोकने में भी इससे मदद मिलेगी।
उन्होंने बताया कहा कि प्रदेश के सभी गांवों को सड़क से जोड़ने का लक्ष्य भी पूर्ण होने वाला है। उन्होंने कहा कि सड़कों का सुदृढ़ीकरण क्षेत्रीय विकास की राह भी प्रशस्त करती है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में देश की राजधानी से राज्य को जोड़ने वाली सड़कों के और अधिक सुदृढ़ीकरण और चारधाम व भारतमाला सड़क परियोजनाओं से राज्य के लोगों को बेहतर सड़क कनेक्टविटी मिलेगी। इसके अलावा ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन के निर्माण से पहाड़ पर रेल यात्रा का राज्यवासियों का वर्षों पुराना सपना तो पूरा होगा ही, साथ ही इससे चारधाम यात्रा में भी नये आयाम जुड़ेंगे।
गणतंत्र दिवस के अवसर नई दिल्ली के राजपथ पर निकली विभिन्न राज्यों की झांकियों में उत्तराखण्ड की ‘केदारखण्ड’ झांकी को तीसरे स्थान के लिये पुरस्कृत किया गया है। नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय रंगशाला शिविर में केंद्रीय युवा मामलों व खेल राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) किरेन रिजिजू ने यह पुरस्कार उत्तराखंड को प्रदान किया।
सूचना व लोकसंपर्क विभाग के उप निदेशक व उत्तराखण्ड के टीम लीडर के.एस. चौहान ने राज्य की ओर से यह पुरस्कार प्राप्त किया। राज्य गठन के बाद उत्तराखण्ड द्वारा अनेक बार गणतंत्र दिवस परेड में प्रतिभाग किया गया। मगर यह पहला अवसर है जब उत्तराखण्ड की झांकी को पुरस्कार के लिए चुना गया है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने इस पर प्रसन्नता व्यक्त की और प्रदेशवासियों समेत सचिव सूचना दिलीप जावलकर, सूचना महानिदेशक डॉ मेहरबान सिंह बिष्ट, टीम लीडर केएस चौहान, झांकी तैयार करने तथा झांकी में सम्मलित सभी कलाकारों को बधाई दी है।
गणतंत्र दिवस परेड-2021 समारोह में उत्तराखण्ड राज्य की झांकी में सम्मिलित होने वाले कलाकारों में झांकी निर्माता सविना जेटली, मोहन चन्द्र पाण्डेय, विशाल कुमार, दीपक सिंह, देवेश पन्त, वरूण कुमार, अजय कुमार, रेनू, नीरू बोरा, दिव्या, नीलम व अंकिता नेगी शामिल थे।
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गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिल्ली में किसानों के अराजक प्रदर्शन के दौरान घायल हुए पुलिसकर्मियों का बुधवार को गृह मंत्री अमित शाह ने हालचाल पूछा। अमित शाह ने दिल्ली के तीरथ राम अस्पताल और सुश्रुत ट्रॉमा सेंटर जाकर घायल पुलिस जवानों से मुलाकात की। घायल जवानों से मुलाकात का ट्विटर पर वीडियो जारी करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि हमें उनके साहस व बहादुरी पर गर्व है।
उल्लेखनीय है कि नए कृषि कानूनों के विरोध में लम्बे समय से आंदोलनरत किसानों ने गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में ट्रैक्टर रैली आयोजित करने की अनुमति मांगी थी। दिल्ली पुलिस ने कुछ शर्तों के साथ रैली को अनुमति दी थी। इन शर्तों में रैली को एक निर्धारित रुट से ले जाना भी शामिल था। मगर आयोजकों ने अनुमति की किसी भी शर्त का पालन नहीं किया। उल्टा प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली में तोड़फोड़, हिंसा व अराजकता का नंगा नाच किया। सरेआम तलवारें लहराई गईं। लाल किले पर तिरंगे का अपमान कर एक अन्य ध्वज फहराया गया।
किसानों के नाम पर हुए इस हिंसक प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने बेहद संयम का परिचय दिया और अराजक तत्वों के मंसूबो को कामयाब नहीं होने दिया। प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस के करीब 400 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे, जिनमें से कुछ गंभीर रूप से घायल हैं। बुधवार को अमित शाह इन घायल जवानों को मिलने अस्पताल पहुंचे।
गृह मंत्री शाह द्वारा ट्विटर पर जारी वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि वे न केवल घायल जवानों की कुशल क्षेम पूछ रहे हैं, अपितु डॉक्टरों से भी बातचीत कर रहे हैं और जवानों के कंधों पर हाथ रख कर उन्हें ढांढस बंधाते भी दिख रहे हैं। शाह ने जवानों के फल भी वितरित किए। शाह ने घायल जवानों से मुलाकात का वीडियो अपने ट्विटर हैंडल पर जारी करते हुए घायल पुलिस कर्मियों के लिए लिखा है कि – ”हमें उनके साहस और बहादुरी पर गर्व है”।
वित्त मंत्री ने कहा दिल्ली पुलिस का अनुकरणीय संयम
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गृह मंत्री शाह के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए उनके द्वारा घायल जवानों के हालचाल पूछे जाने की सराहना की। अपने ट्वीट में निर्मला ने यह भी कहा कि दिल्ली पुलिस ने अनुकरणीय संयम दिखाया। वित्त मंत्री ने ड्यूटी के दौरान घायल हुए जवानों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना भी की है।
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अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने गणतंत्र दिवस पर सुनियोजित हिंसाचार, राष्ट्रीय धरोहर लालकिला प्रांगण में हुई तोड़फोड़, पुलिस व अर्धसैनिक बलों पर तलवारों, फर्से व लाठियों से लैस भीड़ के संगठित हमले तथा राष्ट्रीय प्रतीकों के अनादर में सम्मिलित अपराधियों पर शीघ्र कार्रवाई की मांग की है।
एक बयान में ABVP ने कहा है कि कथित किसान नेताओं ने वकील प्रशांत भूषण तथा दुष्यंत दवे के माध्यम से उच्चतम न्यायालय में हलफनामा दायर कर आंदोलन के शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित होने का आश्वासन दिया था, लेकिन शुरूआती दौर से ही यह कथित किसान आंदोलन बिल्कुल भी शांतिपूर्ण नहीं रहा। ट्रैक्टरों पर तोड़फोड़ करने वाले यंत्रों को लगाने आदि से इस आंदोलन की सुनियोजित हिंसा के षड्यंत्र का अनुमान लगाया जा सकता है।
किसान आंदोलन की आड़ में जिस प्रकार से लाल किले की प्राचीर से तिरंगा का अपमान कर अन्य पताकाओं और अलगाववादी खालिस्तानी व वामपंथी पार्टियों के झंडे लहराए गए, तथा दिल्ली पुलिस व अर्धसैनिक बलों के जवानों के साथ भीड़ ने भीषण हिंसा की, उसके अलग-अलग वीडियो सार्वजनिक हैं। इन वीडियोज की पड़ताल कर दंगाइयों तथा देशविरोधी तत्त्वों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
ABVP की राष्ट्रीय महामंत्री निधि त्रिपाठी ने कहा, “राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को फेंक उसके अनादर के वीडियो लोगों के बीच सार्वजनिक हो चुके हैं। इसमें कोई दो राय नहीं है कि इस तरह राष्ट्रीय प्रतीकों के अनादर से देश गुस्से में है। इस पूरी हिंसा की निष्पक्ष जांच कर सरकार को अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी। गणतंत्र दिवस जैसे पावन दिन पर अशांति फैलाकर आंदोलन के पीछे की ताकतों की वास्तविकता स्पष्ट है।”
अल्मोड़ा जिले की सल्ट विधानसभा के हरडा में बुधवार को आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने स्थानीय विधायक सुरेंद्र सिंह जीना और उनकी धर्मपत्नी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी।
इस मौके पर उन्होंने कहा कि जनहित के कार्यों व प्रदेश के विकास में सुरेंद्र जीना का योगदान भुलाया नहीं जा सकता। उनके अधूरे कार्यों को राज्य सरकार पूरा करेगी। उन्होंने सल्ट क्षेत्र में जीना की स्मृति में एक स्मारक बनाने समेत क्षेत्र के विकास के लिए कई घोषणाएं कीं।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने कहा कि जीना से सबका बहुत ही सहज और सरल रिश्ता था। जीना का अपने क्षेत्र के लोगों से गहरा लगाव था। कहा कि उनके कहने पर इस क्षेत्र जनहित की 63 विकास योजनाओं की मैंने घोषणाएं की हैं। जिसमें से 42 पूर्ण हो चुकी हैं। बाकी भी जल्द पूरा हो जाएंगी। इस मौके पर उन्होंने राजकीय महाविद्यालय मनीला को सुरेंद्र जीना के नाम पर करने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने मार्चुला को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के लिए एडवेंचर मीट का आयोजन, हरडा में एडवेंचर स्पोर्ट्स सेंटर व जिला सहकारी बैंक की स्थापना, रामगंगा के तट को एंगलिग हब के रूप में विकसित करने आदि कई घोषणाएं की।
कार्यक्रम में प्रदेश के परिवहन मंत्री यशपाल आर्य, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री डॉ धन सिंह रावत, सांसद अजय टम्टा, भाजपा के प्रदेश महामंत्री (संगठन) अजेय कुमार, प्रदेश महामंत्री सुरेश भट्ट आदि उपस्थित थे।
