वन्यजीव हमले में पिछले साल में 68 मौतें और 488 लोग घायल हुए
देहरादून। राज्य में मानव और वन्यजीवों के बीच टकराव की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। बीते वर्ष भालू के हमलों ने चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि राज्य गठन के बाद पहली बार भालू के हमलों में सबसे अधिक लोगों की जान गई। आमतौर पर तेंदुए और बाघ के हमलों की घटनाएं सुर्खियों में रहती हैं, लेकिन वर्ष 2025 में भालू के हमलों में अपेक्षाकृत अधिक लोग घायल और हताहत हुए हैं।
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में वन्यजीवों के हमलों में कुल 68 लोगों की मौत हुई, जबकि 488 लोग घायल हुए। इनमें भालू के हमलों से आठ लोगों की मृत्यु दर्ज की गई, जो वर्ष 2000 के बाद अब तक का सबसे अधिक आंकड़ा है। इसी अवधि में भालू के हमलों में 108 लोग घायल हुए, जबकि तेंदुओं के हमलों में 102 लोग घायल हुए हैं।
तेंदुआ, बाघ और सर्पदंश से भी गईं कई जानें
तेंदुओं के हमलों का भय भी बना रहा। वर्ष 2025 में तेंदुओं के हमलों में 19 लोगों की असमय मृत्यु हुई। वहीं बाघ के हमलों में 12 लोगों की जान गई और पांच लोग घायल हुए। इसके अलावा सर्पदंश की घटनाओं में 18 लोगों की मौत और 122 लोगों के घायल होने की पुष्टि हुई है।
इस संबंध में प्रमुख वन संरक्षक रंजन मिश्रा का कहना है कि मानव–वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए विभाग निरंतर प्रयास कर रहा है। उन्होंने बताया कि आगामी मानसून के दौरान उन वन प्रभागों में, जहां भालू की मौजूदगी अधिक है, उनके प्राकृतिक भोजन से जुड़ी प्रजातियों का रोपण किया जाएगा, ताकि भालू आबादी वाले क्षेत्रों की ओर कम आएं। इसके साथ ही सुरक्षा और निगरानी से जुड़े अन्य कदम भी उठाए जा रहे हैं।
रेस्क्यू और सुरक्षा के लिए मिलेंगे 11 करोड़ रुपये
मानव–वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण और रेस्क्यू ऑपरेशन को मजबूत करने के लिए वन विभाग को आपदा प्रबंधन विभाग से 11 करोड़ रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी। इस राशि से ट्रैंक्यूलाइज गन, रेस्क्यू उपकरण और अन्य आवश्यक संसाधनों की खरीद की जाएगी।
पिछले पांच वर्षों में वन्यजीव हमलों का आंकड़ा
2020: 67 मौतें, 324 घायल
2021: 71 मौतें, 361 घायल
2022: 82 मौतें, 325 घायल
2023: 66 मौतें, 325 घायल
2024: 84 मौतें, 512 घायल
2025: 68 मौतें, 488 घायल
बढ़ते आंकड़े इस बात की ओर इशारा करते हैं कि मानव–वन्यजीव संघर्ष राज्य के लिए एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है, जिससे निपटने के लिए दीर्घकालिक और ठोस रणनीति की आवश्यकता है।
रायपुर–डालनवाला क्षेत्र में दो पार्कों का ₹90 लाख की लागत से जीर्णोद्धार एवं निर्माण कार्य प्रारंभ
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के हरित विकास, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक सुविधाओं के विस्तार के संकल्प को धरातल पर उतारते हुए मसूरी–देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा राजधानी देहरादून के रायपुर विधानसभा क्षेत्र में दो महत्वपूर्ण पार्कों के निर्माण एवं जीर्णोद्धार की दिशा में ठोस पहल की गई है। लगभग ₹90 लाख की लागत से इन दोनों पार्कों को आधुनिक, पर्यावरण–अनुकूल एवं जनोपयोगी स्वरूप दिया जा रहा है।
इसी क्रम में आज रायपुर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत सामुदायिक भवन के समीप, एमडीडीए कॉलोनी, चंद्र रोड, डालनवाला, देहरादून में प्रस्तावित पार्क का विधिवत शिलान्यास रायपुर विधायक माननीय उमेश शर्मा ‘काऊ’ द्वारा किया गया। शिलान्यास कार्यक्रम में क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, स्थानीय पदाधिकारी, एमडीडीए के अधिकारी, कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। यह पार्क न केवल क्षेत्रवासियों के लिए हरियाली और सुकून का केंद्र बनेगा, बल्कि बच्चों, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए स्वास्थ्य, मनोरंजन एवं सामाजिक गतिविधियों का साझा मंच भी प्रदान करेगा।
एमडीडीए द्वारा बताया गया कि इसके अतिरिक्त नेहरू कॉलोनी क्षेत्र का पार्क पहले ही पूर्ण रूप से तैयार कर लिया गया है। इस पार्क में नागरिक सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए फुटपाथ निर्माण, व्यापक प्लांटेशन, स्टेज का निर्माण, पेंटिंग वर्क, तथा मैदान में उच्च गुणवत्ता की घास लगाई गई है। पार्क के सौंदर्यीकरण के साथ-साथ इसे पर्यावरणीय दृष्टि से भी सुदृढ़ बनाया गया है, ताकि शहरी क्षेत्र में हरित आवरण को बढ़ावा मिल सके।इस पार्क को इस प्रकार डिजाइन किया जा रहा है कि यह हर आयु वर्ग के लोगों की आवश्यकताओं को पूरा कर सके।

रायपुर विधायक माननीय उमेश शर्मा ‘काऊ’ का बयान
रायपुर विधायक उमेश शर्मा ‘काऊ’ ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड में विकास के साथ–साथ पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। रायपुर विधानसभा क्षेत्र में पार्कों का निर्माण और जीर्णोद्धार उसी सोच का परिणाम है। शहरी जीवन में हरियाली, स्वच्छ वातावरण और सार्वजनिक स्थलों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। एमडीडीए द्वारा किए जा रहे ये कार्य न केवल क्षेत्र की सुंदरता बढ़ाएंगे, बल्कि आम नागरिकों के स्वास्थ्य और सामाजिक जीवन को भी बेहतर बनाएंगे। मैं उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी सहित एमडीडीए की पूरी टीम को इस सराहनीय पहल के लिए बधाई देता हूं और आशा करता हूं कि भविष्य में भी ऐसे जनहितकारी कार्य निरंतर होते रहेंगे।
एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी का बयान
एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि प्राधिकरण मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के हरित विकास विजन के अनुरूप शहरी क्षेत्रों में पर्यावरण–अनुकूल अधोसंरचना विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। पार्कों का निर्माण केवल सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि नागरिकों को स्वस्थ जीवनशैली के लिए प्रेरित करने का माध्यम है। रायपुर विधानसभा क्षेत्र में विकसित किए जा रहे ये पार्क आधुनिक सुविधाओं से युक्त होंगे और आने वाले वर्षों में शहरी हरियाली को मजबूत आधार प्रदान करेंगे।
एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया का बयान
एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि पार्कों के निर्माण एवं जीर्णोद्धार कार्यों में गुणवत्ता, समयबद्धता और पारदर्शिता का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। नेहरू कॉलोनी पार्क का कार्य पूर्ण हो चुका है और डालनवाला पार्क का निर्माण भी निर्धारित समय में पूरा किया जाएगा। हमारा लक्ष्य नागरिकों को सुरक्षित, स्वच्छ और सुंदर सार्वजनिक स्थल उपलब्ध कराना है। एमडीडीए द्वारा किए जा रहे ये कार्य स्पष्ट रूप से यह दर्शाते हैं कि राज्य सरकार और विकास प्राधिकरण मिलकर राजधानी देहरादून को हरित, स्वच्छ और नागरिक– अनुकूल शहर बनाने की दिशा में निरंतर प्रयासरत हैं। भविष्य में भी ऐसे अनेक जनहितकारी परियोजनाओं के माध्यम से शहरी विकास को नई दिशा दी जाएगी।
सर्द मौसम में ठंड महसूस होना आम बात है, लेकिन कई बार ऐसा देखा जाता है कि समान माहौल में बैठे लोगों में कुछ को असहनीय ठंड लगती है, जबकि बाकी सामान्य महसूस करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इसका कारण केवल मौसम नहीं बल्कि शरीर के भीतर होने वाले पोषण असंतुलन और मेटाबॉलिक बदलाव भी हो सकते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि मानव शरीर अपने तापमान को संतुलित रखने के लिए रक्त संचार, हार्मोन और ऊर्जा उत्पादन की प्रणाली पर निर्भर करता है। जब शरीर में आवश्यक विटामिन और मिनरल्स की कमी हो जाती है, तो यह संतुलन बिगड़ने लगता है। नतीजतन शरीर पर्याप्त गर्मी उत्पन्न नहीं कर पाता और व्यक्ति को बार-बार ठंड लगने लगती है।
डॉक्टरों के मुताबिक, आयरन की कमी इस समस्या की सबसे आम वजहों में से एक है। आयरन की कमी से हीमोग्लोबिन घटता है, जिससे शरीर के अंगों तक ऑक्सीजन कम पहुंचती है और हाथ-पैर ठंडे रहने लगते हैं। वहीं विटामिन बी12 की कमी नसों को प्रभावित करती है, जिससे झुनझुनी और ठंडक का अहसास बढ़ जाता है।
इसके अलावा थायरॉइड हार्मोन असंतुलन, कम कैलोरी डाइट, लगातार खाली पेट रहना और अत्यधिक मानसिक तनाव भी शरीर की गर्मी बनाए रखने की क्षमता को कमजोर कर देते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों को ठंड अधिक महसूस होती है।
ठंड से तुरंत राहत पाने के लिए हल्की शारीरिक गतिविधि जैसे टहलना या स्ट्रेचिंग फायदेमंद मानी जाती है। इससे रक्त प्रवाह बढ़ता है और शरीर जल्दी गर्म होता है। साथ ही गुनगुना पानी, हर्बल चाय या सूप पीने से भी आंतरिक तापमान में सुधार आता है।
पोषण विशेषज्ञ सर्दियों में गुड़, तिल, मूंगफली, बाजरा, खजूर, अदरक और लहसुन जैसे खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल करने की सलाह देते हैं। ये खाद्य पदार्थ शरीर में ऊर्जा उत्पादन बढ़ाते हैं और रक्त संचार को बेहतर बनाते हैं।
यदि पर्याप्त भोजन और जीवनशैली सुधार के बावजूद अत्यधिक ठंड लगने की समस्या बनी रहती है, तो चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है। समय रहते ब्लड टेस्ट कराने से आयरन, बी12 या अन्य पोषक तत्वों की कमी का पता लगाया जा सकता है।
विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि बार-बार ठंड लगना किसी अंदरूनी स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकता है, इसलिए इसे हल्के में न लें। संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, नियमित योग और तनाव मुक्त जीवनशैली अपनाकर शरीर की प्राकृतिक गर्मी बनाए रखने की क्षमता को मजबूत किया जा सकता है।
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय से समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत चलाई जा रही विभिन्न पेंशन योजनाओं के लाभार्थियों के बैंक खातों में डी.बी.टी. प्रणाली के माध्यम से दिसंबर माह की पेंशन किश्त का भुगतान किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 09 लाख 43 हजार 964 लाभार्थियों के खातों में कुल 140 करोड़ 26 लाख 97 हजार रुपये की राशि ऑनलाइन जारी की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार समाज के कमजोर वर्गों, वृद्धजनों, विधवाओं, दिव्यांगजनों एवं निराश्रितों के सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तीकरण के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पारदर्शी शासन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सभी प्रकार के भुगतान अब डी.बी.टी. प्रणाली से सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में किए जा रहे हैं, जिससे समयबद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है।
मुख्यमंत्री ने समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये कि वृद्धावस्था पेंशन के लिए 60 साल की आयु होते ही राज्य के जो लोग पात्रता की श्रेणी में आ रहे हों, उनका 59 साल की आयु से ही चिन्हीकरण कर लिया जाय, ताकि पात्रता की श्रेणी में आने पर उन्हें शीघ्र पेंशन का भुगतान किया जा उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि समाज के प्रत्येक पात्र लाभार्थी को किसी भी प्रकार की कठिनाई के बिना योजनाओं का लाभ मिले। उन्होंने निर्देश दिए कि पेंशन योजनाओं के अंतर्गत कोई भी पात्र व्यक्ति वंचित न रहे, इसके लिए नियमित सत्यापन एवं निगरानी की प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जनहित की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है।
इस असवर पर निदेशक समाज कल्याण डॉ. संदीप तिवारी, अपर सचिव प्रकाश चन्द्र एवं समाज कल्याण विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।
जिलाधिकारी ने (के०जी०बी०वी०)त्यूनी खेल मैदान लिए DMF से रु० 10.00 लाख स्वीकृत; 6 लाख की प्रथम किस्त जारी
मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन एवं जिला प्रशासन के सतत प्रयासों से आधुनिकता की ओर अग्रसर जिले की शिक्षा व्यवस्था
देहरादून- जिलाधिकारी सविन बंसल ने कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (के०जी०बी०वी०) टाईप-I, त्यूनी, विकासखण्ड चकराता में खेल मैदान के समतलीकरण हेतु जिला खनिज फाउंडेशन न्यास (DMF) से कुल रु० 10.00 लाख की धनराशि स्वीकृत करते हुए प्रथम किस्त के रूप में रु० 6.00 लाख की धनराशि निर्गत की है।
जिला प्रशासन देहरादून द्वारा जनपद में शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण को प्राथमिकता देते हुए व्यापक स्तर पर सुधारात्मक कार्य किए जा रहे हैं, जिनकी स्वयं जिलाधिकारी द्वारा नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है।

माननीय मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन एवं जिलाधिकारी के सतत प्रयासों से जिले में शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष फोकस किया जा रहा है जिससे जनमानस को स्वास्थ्य तथा छात्र छात्राओं को सुरक्षित शिक्षा के माहौल के साथ ही खेल मैदान उपलब्ध होगा, जिससे उनके शारीरिक एवं सर्वांगीण विकास को बल मिलेगा।
उल्लेखनीय है कि जनपद में प्रोजेक्ट उत्कर्ष के अंतर्गत मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप सरकारी विद्यालयों को निजी विद्यालयों की भांति आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जा रहा है, जिसकी नियमित मॉनिटरिंग स्वयं जिलाधिकारी द्वारा की जा रही है
जिला विकास अधिकारी द्वारा कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, त्यूनी में पूर्व में निर्मित खेल मैदान के समतलीकरण हेतु प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था। बजट के अभाव में मैदान का समतलीकरण नहीं हो पाने के कारण मैदान उबड़-खाबड़ हो गया था तथा वर्षा ऋतु में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो रही थी, जिससे छात्राओं को खेल गतिविधियों के संचालन में अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।
खण्ड विकास अधिकारी, विकासखण्ड चकराता द्वारा खेल मैदान के समतलीकरण हेतु रु० 9.40 लाख की अनुमानित लागत प्रस्तुत की गई, जिसे जिलाधिकारी के निर्देशानुसार जिला खनिज फाउंडेशन न्यास की शासी परिषद के समक्ष परीक्षण एवं संस्तुति हेतु प्रस्तुत किया गया।

शासी परिषद के अध्यक्ष एवं अन्य सदस्यों द्वारा प्रस्ताव पर अनुमोदन प्रदान करते हुए कुल रु० 10.00 लाख (रुपये दस लाख मात्र) की स्वीकृति दी गई है, जिसमें से 60 प्रतिशत अर्थात रु० 6,00,000/- (रुपये छः लाख मात्र) की धनराशि प्रथम किस्त के रूप में खण्ड विकास अधिकारी, विकासखण्ड चकराता को निर्गत किए जाने हेतु जिला खनिज फाउंडेशन न्यास के निर्धारित बैंक खाते से चैक तैयार किया गया है। शेष 40 प्रतिशत अर्थात रु० 4,00,000/- (रुपये चार लाख मात्र) की धनराशि उपयोगिता प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए जाने एवं तृतीय पक्ष द्वारा जाँच आख्या प्राप्त होने के उपरान्त निर्गत की जाएगी।
जिलाधिकारी की इस पहल से कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, त्यूनी की छात्राओं को सुरक्षित, समतल एवं उपयोगी खेल मैदान उपलब्ध होगा, जिससे उनके शारीरिक, मानसिक एवं सर्वांगीण विकास को बढ़ावा मिलेगा।
इसके अतिरिक्त जिला प्रशासन द्वारा जनपद में प्रोजेक्ट उत्कर्ष के अंतर्गत सरकारी विद्यालयों को निजी विद्यालयों की भांति आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत विद्यालयों में फर्नीचर, एलईडी/स्क्रीन, पेयजल, विद्युत व्यवस्था, पुस्तकालय एवं खेल अवस्थापना सुविधाओं का विकास किया जा रहा है, जिससे छात्र-छात्राओं को बेहतर शैक्षणिक एवं सह-पाठ्यक्रमीय वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।
देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय दिलाने और मामले की पुन: जांच के लिए विभिन्न सामाजिक संगठनों और विपक्षी राजनीतिक दलों के लोगों ने राजधानी में विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री आवास तक मार्च निकालने के लिए परेड ग्राउंड से रैली के रूप में निकले।
संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि उनका प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण है और उनका उद्देश्य केवल मामले में न्याय सुनिश्चित करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि नए तथ्य सामने आने के बाद इस केस की सीबीआई या किसी स्वतंत्र एजेंसी से पुन: जांच आवश्यक हो गई है।
इस अवसर पर पुलिस बल को शहर में तैनात किया गया ताकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो। प्रदर्शनकारी रैली के माध्यम से अपनी मांगें सीधे राज्य सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं।
साथ ही, पिछले एसआईटी जांच में यह स्पष्ट किया गया था कि अभी तक किसी वीआईपी का नाम जांच में सामने नहीं आया है। बावजूद इसके, समाजिक संगठनों और विपक्षी दलों का कहना है कि मामले की गहन और निष्पक्ष जांच अब भी जरूरी है।
कर्नाटक- कर्नाटक के हुबली में एक 13 वर्षीय लड़की के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में पुलिस ने तीन नाबालिग लड़कों के खिलाफ कार्रवाई की है। पुलिस ने बताया कि आरोपियों की उम्र 14 से 15 वर्ष के बीच है और उनके खिलाफ बाल यौन उत्पीड़न संरक्षण अधिनियम (POCSO) तथा किशोर न्याय (देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस के अनुसार, यह मामला पिछले सात से आठ दिनों तक चलने वाली घटनाओं से जुड़ा है। लड़की के माता-पिता दिन के समय घर से बाहर रहते थे, और इसी दौरान आरोपियों ने घटना को अंजाम दिया।
हुबली-धारवाड़ के पुलिस आयुक्त एन. शशिकुमार ने बताया कि तीनों नाबालिगों को हिरासत में ले लिया गया है और आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मामले की गहन जांच जारी है और पीड़िता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी कदम उठाए जा रहे हैं।
पुलिस ने परिवार के सहयोग से लड़की की सुरक्षा सुनिश्चित की है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आगे की जांच बंद कमरे और विशेषज्ञों की मौजूदगी में की जा रही है।
हालांकि हुबली मामला हाल ही का है, लेकिन यह भारत में बढ़ते बाल यौन अपराधों की चिंता को फिर से उजागर करता है। जनवरी में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में चार वर्षीय बच्ची के साथ हुई हिंसक घटना ने देश में सुरक्षा और जागरूकता की अहमियत को रेखांकित किया था।
आदित्य धर के निर्देशन में बनी फिल्म ‘धुरंधर’ में भले ही कहानी और एक्शन दर्शकों को बांधे हुए हों, लेकिन फिल्म में जिस कलाकार ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरी हैं, वह हैं अक्षय खन्ना। खलनायक की भूमिका निभाते हुए भी अक्षय ने ऐसा प्रभाव छोड़ा है कि उनका किरदार दर्शकों के बीच खासा लोकप्रिय हो गया है।
फिल्म के कलाकार राकेश बेदी ने हाल ही में एक बातचीत के दौरान अक्षय खन्ना के अभिनय की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि अक्षय का किरदार पारंपरिक खतरनाक विलेन से अलग है और उसमें एक अलग तरह की मासूमियत और आकर्षण नजर आता है। इसी वजह से उन्होंने अक्षय को ‘प्यारा खलनायक’ बताया और उनके अंदाज़ की तुलना दिग्गज अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा से की।
अक्षय खन्ना ने फिल्म में रहमान डकैत नाम के किरदार को निभाया है, जो एक खौफनाक गिरोह का सरगना है। हालांकि, उनके इस रोल को खास पहचान दिलाने में फिल्म का एक गाना भी अहम भूमिका निभाता है। फ्लिपराची का चर्चित ट्रैक ‘FA9LA’ उनके किरदार को एक अलग ही स्टाइल और प्रभाव देता है, जिससे रहमान डकैत का व्यक्तित्व और ज्यादा यादगार बन जाता है।
राकेश बेदी के मुताबिक, जब कोई विलेन डरावना होने के साथ-साथ दर्शकों को पसंद आने लगे, तो वह किरदार हीरो से भी ज्यादा प्रभाव छोड़ देता है। उन्होंने कहा कि यही खासियत कभी शत्रुघ्न सिन्हा के विलेन किरदारों में भी देखने को मिलती थी, जिन्हें दर्शक खलनायक होने के बावजूद तालियों से नवाजते थे।
सेट के अनुभव साझा करते हुए राकेश बेदी ने बताया कि अक्षय खन्ना स्वभाव से बेहद शांत और गंभीर हैं। शूटिंग के दौरान वे अक्सर अकेले रहना पसंद करते थे, किताब पढ़ते या फोन में व्यस्त रहते। हालांकि, कैमरे के सामने जाने से पहले दोनों के बीच गहरी और विचारशील बातचीत होती थी, जिसमें थिएटर, अभिनय और सिनेमा जैसे विषय शामिल रहते थे।
‘धुरंधर’ की कहानी हमजा अली मजारी (रणवीर सिंह) के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे पाकिस्तान के लयारी इलाके में एक गुप्त मिशन पर भेजा जाता है। वहीं, रहमान डकैत के रूप में अक्षय खन्ना फिल्म के मुख्य प्रतिद्वंद्वी हैं। राकेश बेदी ने फिल्म में पाकिस्तानी नेता जमील जमाली की भूमिका निभाई है। फिल्म में संजय दत्त, आर. माधवन, सारा अर्जुन और अर्जुन रामपाल भी अहम किरदारों में नजर आते हैं।
निर्माताओं ने ‘धुरंधर’ के दूसरे भाग की भी घोषणा कर दी है, जो 19 मार्च 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगा।
नई दिल्ली- भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (एएफआई) ने जापान में 19 सितंबर से 4 अक्तूबर तक आयोजित होने वाले 20वें एशियाई खेलों के लिए खिलाड़ियों के चयन से जुड़े मानदंड जारी कर दिए हैं। इस बार चयन प्रक्रिया को पहले से अधिक सख्त बनाया गया है, खासतौर पर पुरुषों की 100 मीटर स्प्रिंट और पोल वॉल्ट स्पर्धा में।
एएफआई चयन समिति के अध्यक्ष आदिल सुमारीवाला के अनुसार, इन दोनों स्पर्धाओं में एशियाड टीम में जगह बनाने के लिए खिलाड़ियों को राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ना अनिवार्य होगा। महासंघ का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी प्रदर्शन सुनिश्चित करना है।
उन्होंने बताया कि मिश्रित 4×100 मीटर रिले और मैराथन वॉक जैसे नए शामिल किए गए इवेंट्स के लिए क्वालिफाइंग मानक फिलहाल तय नहीं किए गए हैं। इन स्पर्धाओं के मानदंड एशियाई रिले चैंपियनशिप और वर्ल्ड रिले प्रतियोगिता के बाद घोषित किए जाएंगे।
नई चयन नीति के तहत एथलीटों को राज्य स्तरीय चैंपियनशिप में भाग लेना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, चयन के लिए कम से कम तीन प्रतियोगिताओं—दो अंतर-राज्य प्रतियोगिताएं और एक राष्ट्रीय ओपन प्रतियोगिता—में हिस्सा लेना जरूरी होगा। खिलाड़ियों को शुरुआती दो स्पर्धाओं में मानक के करीब प्रदर्शन करना होगा, जबकि अंतिम प्रतियोगिता में निर्धारित मानक हासिल करना अनिवार्य रहेगा।
भाला फेंक के ओलंपिक और विश्व चैंपियन नीरज चोपड़ा को लेकर भी महासंघ ने स्थिति स्पष्ट की है। चयन समिति ने बताया कि नीरज और उनके कोच जैन जेलेज्नी 2026 के लिए प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं का कार्यक्रम तैयार कर चुके हैं। चोट से उबर रहे नीरज ने हालिया विश्व चैंपियनशिप में चोट के बावजूद हिस्सा लिया था।
एएफआई ने यह भी स्पष्ट किया कि एशियाई खेलों की तैयारी के लिए तीन घरेलू टूर्नामेंटों में भाग लेना सभी खिलाड़ियों के लिए अनिवार्य है, हालांकि विशेष परिस्थितियों में छूट दी जा सकती है। नीरज चोपड़ा को पहले भी डायमंड लीग जैसी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के कारण ऐसी छूट मिल चुकी है। अंतिम फैसला चयन समिति के विवेक पर निर्भर करेगा।
देहरादून समेत छह जिलों में घने कोहरे की चेतावनी, गंगोत्री में माइनस 12 डिग्री तक पहुंचा तापमान
देहरादून – उत्तराखंड में मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है। प्रदेश के मैदानी इलाकों में घना कोहरा छाए रहने से शीत दिवस जैसी परिस्थितियां बन गई हैं। मौसम विज्ञान केंद्र ने देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर, नैनीताल, चंपावत और पौड़ी जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी करते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
पहाड़ी क्षेत्रों में हाल ही में हुई हल्की बर्फबारी का असर अब मैदानी इलाकों तक पहुंच गया है। ठंडी हवाओं और कोहरे के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे ठंड का प्रकोप बढ़ गया है। सुबह के समय कई स्थानों पर दृश्यता बेहद कम रही, जिससे सड़क यातायात भी प्रभावित हुआ।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण प्रदेश के मौसम में यह बदलाव देखने को मिल रहा है। आने वाले दिनों में ठंड और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
वहीं, गंगोत्री धाम क्षेत्र में अभी तक ताजा बर्फबारी नहीं हुई है, लेकिन भीषण ठंड ने जनजीवन को जकड़ लिया है। यहां तापमान शून्य से नीचे पहुंचकर माइनस 11 से 12 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया जा रहा है। कड़ाके की ठंड के चलते छोटी-बड़ी नदियां और जलधाराएं जम गई हैं।
भागीरथी नदी में पानी का बहाव बेहद कम हो गया है, जबकि केदार गंगा, ऋषिकुर नाला, पागल नाला और चीड़बासा नाला पूरी तरह बर्फ की चपेट में हैं। गंगोत्री में पेयजल की व्यवस्था बर्फ को आग से पिघलाकर की जा रही है।
कठिन मौसम के बावजूद गंगोत्री धाम में करीब 25 साधु-संत तपस्या में लीन हैं, जो विषम परिस्थितियों में भी आस्था और साधना की मिसाल पेश कर रहे हैं।
