सोशल मीडिया पर अभद्र, आपत्तिजनक और मर्यादाहीन भाषा का प्रयोग चिंताजनक, महिला अस्मिता और नई पीढी पर गलत असर की संभावना- कुसुम कण्डवाल
देहरादून। सोशल मीडिया पर बढ़ रही अभद्रता, आपत्तिजनक और अमर्यादित भाषा को लेकर महिला आयोग की अध्यक्ष ने चिन्ता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि आज भारत की बेटियाँ राजनीति, न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका सहित समाज के प्रत्येक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दे रही हैं। यह केवल महिला सशक्तिकरण का प्रमाण नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का भी परिचायक है। महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से नीति–निर्माण अधिक संवेदनशील, समावेशी और समाजोन्मुख बन रहा है।
महिला आयोग का स्पष्ट मत है कि सभ्रांत, शिक्षित और संस्कारवान परिवारों के युवक–युवतियों को राजनीति एवं सार्वजनिक जीवन में आगे आना चाहिए। राजनीति केवल सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण का दायित्व है। जब योग्य और नैतिक युवा राजनीति में प्रवेश करते हैं, तभी लोकतांत्रिक संस्थाएँ सुदृढ़ होती हैं।
उन्होंने कहा कि आयोग के लिए यह गहरी चिंता का विषय है कि वर्तमान समय में सोशल मीडिया जैसे मंचों पर महिला हो या पुरुष—कुछ तत्व अभद्र, आपत्तिजनक और मर्यादाहीन भाषा का प्रयोग कर रहे हैं। विशेष रूप से महिलाओं के संदर्भ में की जाने वाली अशोभनीय टिप्पणियाँ न केवल उनकी गरिमा व अस्मिता को ठेस पहुँचाती हैं, बल्कि राजनीति और सार्वजनिक जीवन में उनकी सहभागिता को भी हतोत्साहित करती हैं।
महिला आयोग यह मानता है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र का मूल आधार है, किंतु यह स्वतंत्रता किसी की प्रतिष्ठा, गरिमा और अधिकारों के उल्लंघन का माध्यम नहीं बन सकती। तथ्यहीन आरोप, व्यक्तिगत चरित्र हनन और उत्तेजक भाषा समाज में असहिष्णुता और अविश्वास को जन्म देती है, जिसका सीधा प्रभाव हमारी आने वाली पीढ़ियों पर पड़ता है।
विशेष रूप से यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारी बेटी जो अब हमारे बीच नहीं है मृतक अंकिता भंडारी जैसी बेटी के नाम का उपयोग कर, सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर राजनीतिक बयानबाजी की जा रही है। उसके नाम का उपयोग कर के जबरन तुच्छ राजनीतिकरण किया जा रहा है। महिला आयोग यह स्पष्ट करना चाहता है कि न्यायालय इस प्रकरण में अपनी संवैधानिक भूमिका का निर्वहन कर रहा है। यदि किसी के पास कोई भी तथ्य या साक्ष्य हैं, तो उन्हें विधिसम्मत रूप से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए। पीड़िता के नाम पर की जा रही बयानबाजी उसकी स्मृति और गरिमा के भी विरुद्ध है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं और नेताओं का आपसी संवाद, मुलाकातें एवं औपचारिक शिष्टाचार सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। किसी विशेष परिस्थिति में इन प्रक्रियाओं को तोड़–मरोड़कर प्रस्तुत करना सभ्य व शालीन महिलाओं की गरिमा या न्यायालय की न्याय प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न लगाना पूर्णतः अनुचित है।
महिला आयोग की अध्यक्ष ने डीजीपी उत्तराखण्ड से फोन पर वार्ता के क्रम में यह कहा है कि सोशल मीडिया पर फैल रही आपत्तिजनक, अभद्र, भ्रामक और अश्लील सामग्री पर तत्काल संज्ञान लिया जाए तथा घटिया मानसिकता के साथ महिलाओं व पीड़िताओं के नाम का राजनीतिकरण करने वाले मामलों में संलिप्त लोगों की पहचान कर उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने मामले में संज्ञान लेते हुए डीजीपी उत्तराखण्ड दीपम सेठ से फोन पर वार्ता के क्रम में यह कहा कि महिला आयोग की यह दृढ़ अपेक्षा है कि:
● सोशल मीडिया पर महिलाओं के विरुद्ध अपमानजनक, अश्लील या भ्रामक सामग्री पर तत्काल संज्ञान लिया जाए।
● ऐसी सामग्री के प्रसार में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
● राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन अपने कार्यकर्ताओं को मर्यादित भाषा और जिम्मेदार आचरण के लिए प्रेरित करें।
● राजनीति के लिए महिला अधिकारों का दुरूपयोग करते हुए सोशल मीडिया या सार्वजनिक मंचो पर अमर्यादित व अशोभनीय टिप्पणी करना भी अन्य जरूरतमंद पीड़िताओं को भी संशय के घेरे में लाता है।
उन्होंने राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों से भी अपील की कि वे अपने कार्यकर्ताओं को मर्यादित भाषा, संयमित आचरण और जिम्मेदार व्यवहार के लिए प्रेरित करें। ताकि आनेवाली पीढ़ी पर इसका नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
उन्होंने कहा कि आयोग का मानना है कि संस्कारयुक्त, शालीन और तथ्यपरक राजनीति ही सशक्त भारत की आधारशिला है। जब महिलाएँ और युवा सम्मान, सुरक्षा और विश्वास के वातावरण में सार्वजनिक जीवन में आगे बढ़ेंगे, तभी हमारा लोकतंत्र वास्तव में समावेशी और मजबूत बन सकेगा।
अनिल बलूनी ने जताया केंद्र का आभार, कहा—युवाओं को मिलेगी नई दिशा
देहरादून/चमोली। केंद्रीय खेल मंत्रालय ने ज्योतिर्मठ में सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक के निर्माण को स्वीकृति प्रदान करते हुए 9.5 करोड़ रुपये की धनराशि भी जारी कर दी है। यह परियोजना क्षेत्र के युवाओं और खिलाड़ियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आधुनिक खेल सुविधाएं उपलब्ध होने से स्थानीय प्रतिभाओं को बेहतर प्रशिक्षण का अवसर मिलेगा और वे राज्य व राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार हो सकेंगे।
ज्योतिर्मठ सहित पूरे गढ़वाल क्षेत्र में इस निर्णय का स्वागत किया जा रहा है। पौड़ी सांसद अनिल बलूनी ने केंद्र सरकार का आभार जताते हुए कहा कि यह पहल खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के साथ-साथ युवाओं को सकारात्मक दिशा प्रदान करेगी।
अरावली विवाद पर भूपेंद्र यादव का पलटवार, कांग्रेस के आरोप किए खारिज
नई दिल्ली। अरावली पर्वतमाला को लेकर चल रहे सियासी विवाद के बीच केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कांग्रेस के आरोपों पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहाड़ियों की परिभाषा में बदलाव से अरावली का कोई हिस्सा संरक्षण से बाहर नहीं होगा और कांग्रेस द्वारा फैलाया जा रहा भ्रम तथ्यों से परे है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर इसलिए असहज है क्योंकि केंद्र सरकार ने गुजरात से लेकर दिल्ली तक पूरी अरावली पर्वतमाला में खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी वैज्ञानिक या आधिकारिक अध्ययन में यह साबित नहीं होता कि नई परिभाषा से अरावली के 90 प्रतिशत हिस्से को नुकसान पहुंचेगा।
दरअसल, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया था कि पर्वतीय श्रृंखलाओं की परिभाषा में बदलाव से अरावली क्षेत्र का बड़ा हिस्सा संरक्षण के दायरे से बाहर चला जाएगा, जिससे खनन और अन्य गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए भूपेंद्र यादव ने कहा कि भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) के किसी भी अध्ययन में ऐसे दावों की पुष्टि नहीं होती है।
भूपेंद्र यादव ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि अगर विपक्ष पर्यावरण संरक्षण को लेकर वास्तव में गंभीर होता, तो उसे यह भी बताना चाहिए कि अरावली क्षेत्र को सबसे ज्यादा नुकसान किसके शासनकाल में हुआ। उन्होंने कांग्रेस नेताओं से सवाल किया कि वे अपने ही दल के वरिष्ठ नेताओं से अरावली के क्षरण को लेकर जवाब क्यों नहीं मांगते।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार अरावली पर्वतमाला को संरक्षित और पुनर्जीवित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान इस क्षेत्र में अवैध खनन और अंधाधुंध गतिविधियों से भारी नुकसान हुआ, जिसकी भरपाई अब की जा रही है।
गौरतलब है कि हाल ही में पहाड़ियों की नई परिभाषा तय की गई है, जिसके अनुसार किसी क्षेत्र को पहाड़ी तब माना जाएगा जब उसकी ऊंचाई आसपास के भूभाग से कम से कम 100 मीटर अधिक हो। वहीं, अरावली पर्वतमाला को दो या उससे अधिक ऐसी पहाड़ियों के समूह के रूप में परिभाषित किया गया है, जो 500 मीटर के दायरे में स्थित हों। विवाद बढ़ने के बाद केंद्र सरकार ने राज्यों को निर्देश जारी करते हुए अरावली क्षेत्र में नए खनन पट्टों पर पूरी तरह रोक लगाने का आदेश दिया है।
ग्राफिक एरा इंस्टीट्यूट की पहल, ग्रामीण क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवा का लक्ष्य
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरूवार को “ग्रामीण गढ़वाल समग्र स्वास्थ्य सेवा परियोजना” के अंतर्गत मोबाइल मेडिकल यूनिट वाहनों का फ्लैग‑ऑफ किया। यह परियोजना ग्राफिक एरा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एवं हॉस्पिटल, देहरादून ने मुख्यमंत्री की प्रेरणा से शुरु की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प है कि लोग भौगोलिक और आर्थिक कारणों से स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित न रहे। इस पहल से दूरस्थ गांवों तक समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा पहुंचाना आसान होगा। दूरस्थ एवं दुर्गम ग्रामीण इलाकों में प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा, निःशुल्क जांच, परामर्श एवं दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कराने की दिशा में यह अच्छा प्रयास है।
इस परियोजना का प्रथम चरण जनपद चमोली एवं टिहरी गढ़वाल में आरंभ किया गया है। जहां दो पूर्णतः सुसज्जित मोबाइल मेडिकल यूनिट्स को तैनात किया गया है। इसके माध्यम से सामान्य चिकित्सा, 29 से अधिक निशुल्क पैथोलॉजी जांच, निःशुल्क दवा वितरण, नेत्र जांच, स्वास्थ्य परामर्श एवं रेफरल सेवाएं प्रदान की जायेंगी। हर मोबाइल यूनिट में डॉक्टर मौजूद रहेंगे l ये यूनिट गांव, कस्बों, स्कूलों और बाजारों में निर्धारित समय पर जाकर चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराएंगी l इसके लिए जनपदों के अधिकारियों से सामंजस्य रखा जाएगा l
इस अवसर पर ग्राफिक एरा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एवं हॉस्पिटल के चेयरमैन कमल घनसाला, डॉ. पुनीत त्यागी डॉ. एस.एल. जेठानी, मेजर जनरल (रिटा) ओ.पी सोनी एवं डॉ. सुभाष गुप्ता मौजूद थे।
बंद निकासी गेट खुला, आईएसबीटी में मरम्मत और पार्किंग व्यवस्था तेज
देहरादून। आईएसबीटी (अंतर्राज्यीय बस टर्मिनल) क्षेत्र की अव्यवस्थाओं को दूर करने के लिए जिला प्रशासन ने सुधार कार्यों की शुरुआत कर दी है। जिलाधिकारी सविन बंसल द्वारा हाल ही में किए गए निरीक्षण के दौरान सामने आई खामियों के बाद संबंधित विभागों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे, जिनके अनुपालन में अब व्यवस्थाएं सुदृढ़ की जा रही हैं।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने आईएसबीटी का निकासी गेट बंद होने, अव्यवस्थित पार्किंग और सड़क किनारे अतिक्रमण को गंभीरता से लिया था। इसके बाद निकासी गेट को खोलने के साथ ही उसकी मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया गया है। साथ ही फ्लाईओवर के नीचे व्यवस्थित पार्किंग विकसित करने का काम भी प्रगति पर है।
यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाने के उद्देश्य से सड़क किनारे उपलब्ध खाली भूमि पर पार्किंग के लिए टाइल बिछाने का कार्य प्रारंभ किया गया है, ताकि अनियंत्रित पार्किंग पर रोक लगाई जा सके। इसके अलावा क्षेत्र में क्रॉसओवर निर्माण का कार्य भी शुरू हो गया है, जिससे ट्रैफिक का दबाव कम होने की उम्मीद है।
जिलाधिकारी के निर्देशों के तहत सड़क किनारे किए गए अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई भी संबंधित विभागों द्वारा सुनिश्चित की जा रही है। इसके साथ ही फ्लाईओवर के नीचे कलर-कोड आधारित पार्किंग व्यवस्था विकसित करने और आईएसबीटी के निकासी गेट को शीघ्र चालू करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि यात्रियों और आम नागरिकों को सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने अधिकारियों को सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर गुणवत्ता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि निर्माण कार्यों के दौरान यात्रियों और यातायात को न्यूनतम असुविधा हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाए। जिला प्रशासन की ओर से आईएसबीटी क्षेत्र को सुव्यवस्थित, सुरक्षित और यात्री-अनुकूल बनाने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है।
अटल बिहारी वाजपेयी के विचार आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत हैं- मुख्यमंत्री
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री, भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में उनके चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उनको नमन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि वाजपेयी जी कुशल प्रशासक, ओजस्वी वक्ता तथा दूरदृष्टा नेता थे, जिन्होंने राष्ट्र निर्माण को नई दिशा प्रदान की। उनका संपूर्ण जीवन सुशासन, संवेदनशीलता एवं सर्वसमावेशी विकास के प्रति समर्पित रहा। उन्होंने राजनीति को जनसेवा का माध्यम बनाकर लोकहित को सर्वोपरि रखा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वाजपेयी के विचार आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उनकी कार्यशैली से प्रेरणा लेते हुए राज्य सरकार पारदर्शी प्रशासन, त्वरित निर्णय एवं जनहितकारी नीतियों के माध्यम से विकसित उत्तराखंड की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में प्रतिबद्धतापूर्वक कार्य कर रही है।
सेहत के लिए फायदेमंद मानी जाने वाली चीज़ों में चुकंदर का नाम भी ऊपर लिया जाता है। खून की कमी से लेकर कमजोरी दूर करने तक, इसे एक नेचुरल टॉनिक के तौर पर देखा जाता है। लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो हर व्यक्ति के लिए चुकंदर उतना ही सुरक्षित हो, यह जरूरी नहीं। कुछ खास बीमारियों और शारीरिक स्थितियों में इसका सेवन फायदे की जगह नुकसान पहुंचा सकता है। डॉक्टर शालिनी सिंह सोलंकी के अनुसार, चुकंदर में मौजूद ऑक्सलेट, नाइट्रेट और कुछ रासायनिक तत्व कुछ लोगों की सेहत को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं।
डॉक्टर बताती हैं कि चुकंदर में पाए जाने वाले प्यूरिन और नाइट्रेट्स हर शरीर के मेटाबॉलिज्म के अनुकूल नहीं होते। बिना अपनी स्वास्थ्य स्थिति को समझे अगर इसका नियमित या अधिक मात्रा में सेवन किया जाए, तो यह पहले से मौजूद समस्याओं को और बढ़ा सकता है। ऐसे में कुछ लोगों को चुकंदर से दूरी बनाना या बेहद सीमित मात्रा में ही इसका सेवन करना चाहिए।
पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याएं
जिन लोगों को आंतों की संवेदनशीलता, IBS या बार-बार गैस, पेट दर्द और दस्त की शिकायत रहती है, उनके लिए चुकंदर परेशानी बढ़ा सकता है। इसमें मौजूद फाइबर और फ्रुक्टन्स पाचन तंत्र पर दबाव डालते हैं, जिससे पेट में मरोड़ और गैस की समस्या हो सकती है। वहीं एसिडिटी या GERD से पीड़ित लोगों में यह सीने में जलन और बेचैनी को बढ़ा सकता है।
किडनी स्टोन और गुर्दे की कमजोरी
किडनी स्टोन की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए चुकंदर का सेवन जोखिम भरा माना जाता है। इसमें ऑक्सलेट की मात्रा अधिक होती है, जो पथरी बनने की प्रक्रिया को तेज कर सकती है। इसके अलावा जिन लोगों की किडनी कमजोर है या ठीक से फिल्टर नहीं कर पा रही, उनके लिए चुकंदर में मौजूद पोटेशियम शरीर में असंतुलन पैदा कर सकता है और किडनी पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।
लो ब्लड प्रेशर और यूरिक एसिड की समस्या
चुकंदर में प्राकृतिक नाइट्रेट्स होते हैं, जो रक्त नलिकाओं को फैलाकर ब्लड प्रेशर को कम करते हैं। पहले से लो बीपी वाले लोगों में यह अचानक चक्कर, कमजोरी या थकान की वजह बन सकता है। वहीं हाई यूरिक एसिड और गाउट के मरीजों को भी इससे सावधान रहना चाहिए, क्योंकि चुकंदर में मौजूद प्यूरिन यूरिक एसिड के स्तर को बढ़ाकर जोड़ों में दर्द और सूजन बढ़ा सकता है।
डायबिटीज के मरीजों के लिए सावधानी जरूरी
मधुमेह के रोगियों के लिए भी चुकंदर पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। इसमें प्राकृतिक शर्करा की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक होती है। खासकर खाली पेट चुकंदर का जूस पीने से ब्लड शुगर लेवल तेजी से बढ़ सकता है। इसलिए डायबिटीज के मरीजों को इसका सेवन डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए।
डॉ. शालिनी सिंह सोलंकी का कहना है कि इन विशेष परिस्थितियों में बिना चिकित्सकीय परामर्श के चुकंदर का सेवन लाभ के बजाय नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए किसी भी सुपरफूड को अपनी डाइट में शामिल करने से पहले अपनी सेहत और जरूरतों को समझना बेहद जरूरी है।
नोट: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी पर आधारित है। किसी भी आहार में बदलाव से पहले विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।
(साभार)
डॉ. रावत ने कहा- पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का व्यक्तित्व और कृतित्व आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा
पौड़ी। भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर डॉ. धन सिंह रावत ने पौड़ी में उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धापूर्वक नमन किया। इस मौके पर उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी के योगदान को स्मरण करते हुए उन्हें राष्ट्रनिर्माण को समर्पित एक महान युगपुरुष बताया।
डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी केवल एक कुशल राजनेता ही नहीं थे, बल्कि उनके विचार, आदर्श और ओजस्वी नेतृत्व ने देश को नई दिशा देने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि अटल जी का जीवन राष्ट्रसेवा, सुशासन और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति समर्पण का प्रतीक रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का व्यक्तित्व और कृतित्व आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा। इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे।
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पेशावर कांड के नायक वीर चन्द्र सिंह ‘गढ़वाली’ की जयंती पर मुख्यमंत्री आवास में उनके चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर उनका भावपूर्ण स्मरण किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने देश की आज़ादी के लिए आंदोलनरत निहत्थी जनता पर गोली चलाने के आदेश को अस्वीकार कर अद्वितीय देशभक्ति, साहस एवं नैतिक दृढ़ता का परिचय दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की आज़ादी के संघर्ष में ‘पेशावर कांड’ एक महत्वपूर्ण पड़ाव रहा है। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में यह घटना मील का पत्थर सिद्ध हुई, जिसने स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा और क्रांतिकारी आधार प्रदान किया।
अब तक प्रदेशभर में आयोजित 113 शिविरों में 56 हजार से अधिक लोग कर चुके हैं भागीदारी
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान के तहत जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। इस दौरान उन्होंने अभियान को जनता से सीधे जुड़ने का प्रभावी माध्यम बताते हुए इसे पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ संचालित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने बताया कि अब तक प्रदेशभर में आयोजित 113 शिविरों में 56 हजार से अधिक लोग भागीदारी कर चुके हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य केवल औपचारिकता निभाना नहीं, बल्कि शासन की योजनाओं और सुविधाओं को सीधे आमजन तक पहुंचाना है। यह अभियान त्वरित समाधान, संवेदनशील प्रशासन और जनविश्वास को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शिविरों के आयोजन में यदि कहीं बजट की समस्या हो तो उसे तुरंत संज्ञान में लाया जाए, ताकि कार्यक्रम की गति प्रभावित न हो।

सीएम धामी ने विशेष रूप से दिव्यांगजन और कमजोर वर्गों तक अभियान की जानकारी पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि शिविर केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि वास्तव में आम जनता के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित हों। मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों से भी अपील की कि वे निरीक्षण की भूमिका से आगे बढ़कर सेवा और सहभागिता की भावना के साथ मैदान में सक्रिय भूमिका निभाएं।
बैठक में राज्यसभा सांसद एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, प्रदेश संगठन महामंत्री अजय कुमार, प्रदेश सरकार के सभी कैबिनेट मंत्री, सांसद, विधायक तथा भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी और दायित्वधारी मौजूद रहे।
