विभागीय मंत्री डॉ. रावत के निर्देश पर शासन ने की त्वरित कार्यवाही
विश्वविद्यालय स्तर से संचालित होंगी प्रवेश एवं परीक्षा सहित अन्य गतिविधियां
देहरादून- भारत सरकार द्वारा तैयार उच्च शिक्षा के एकीकृत समर्थ पोर्टल के संचालन का अधिकार राज्य विश्वविद्यालयों को पूर्ण रूप से सौंप दिया गया है। इस संबंध में शासन द्वारा आदेश जारी कर दिया गया है। अब राज्य विश्वविद्यालय अपने-अपने स्तर पर छात्र-छात्राओं के प्रवेश, परीक्षा व अन्य शैक्षिक गतिविधियां सम्पादित कर सकेंगे। जिसकी जिम्मेदारी संबंधित विश्वविद्यालय के कुलपति व कुलसचिव को सौंपी गई है।
सूबे के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के निर्देशों के उपंरात समर्थ पोर्टल के संचालन की सम्पूर्ण जिम्मेदारी तत्काल प्रभाव से राज्य विश्वविद्यालयों कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल, श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय, टिहरी तथा सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा को सौंप दी गई है। अब राज्य विश्वविद्यालय सम्बद्ध राजकीय महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालय परिसरों में स्नातक एवं स्नातकोत्तर कक्षाओं में प्रवेश एवं परीक्षा से लेकर विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियां अपने स्तर से संचालित कर सकेंगे। अभी तक समर्थ पोर्टल का संचालन शासन स्तर पर राज्य समर्थ टीम (एनईपी-पीएमयू) के द्वारा किया जा रहा था लेकिन इससे छात्र-छात्राओं को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। शासन स्तर से जारी आदेश के तहत सभी राज्य विश्वविद्यालय के द्वारा समर्थ पोर्टल के सभी मॉडयूल के संचालन को समयबद्ध कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी। पोर्टल संबंधी संचालन की सारी जिम्मेदारी संबंधित विश्वविद्यालय के कुलपति व कुलसचिव की होगी, जो किसी भी प्रकार से अन्य को हस्तगत नहीं की जायेगी। प्रत्येक माह पोर्टल की समीक्षा की जायेगी जिसकी रिपोर्ट शासन को आवश्यक रूप से सौंपी जायेगी। छात्र-छात्राओं के प्रवेश हेतु पोर्टल खोलने से पहले विश्वविद्यालय सात दिन पहले इसकी सूचना अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड करेगा साथ ही सामाचार पत्रों व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया माध्यामों के जरिये इसका प्रचार-प्रसार भी करेगा। इसके अलावा इस संबंध में शासन को भी अवगत कराया जायेगा। उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में समर्थ पोर्टल का ही प्रयोग किया जायेगा। विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में पूर्व से संचालित समस्त ईआरपी/पोर्टल का डाटा 31 मार्च 2026 तक समर्थ पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड किया जायेगा इसके उपरांत समर्थ पोर्टल के अतिरिक्त किसी भी दशा में कोई भी ईआरपी/पोर्टल का संचालन नहीं की जायेगी और न ही इस संबंध में कोई भुगतान किया जायेगा।
शासन स्तर से जारी आदेश के तहत सभी राजकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों को अपना एकेडमिक कैलेण्डर तैयार कर उसे आगामी 31 मई 2026 तक अपनी कार्यपरिषद से अनिवार्य रूप से अनुमोदित कराना होगा तदोपरांत आगामी सत्र के प्रवेश, परीक्षा एवं अन्य प्रक्रियाएं सम्पादित की जायेगी। विश्वविद्यालय द्वारा प्रत्येक सेमेस्टर में प्रवेश के उपरांत छात्र-छात्राओं की कक्षाओं का संचालन 90 दिवस तथा 75 फीसदी उपस्थिति अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जायेगी, जिसका डाटा समर्थ पोर्टल पर अपलोड़ करना अनिवार्य होगा। जबकि निजी विश्वविद्यालयों में समर्थ मॉड्यूल लागू होने तक छात्रों की उपस्थिति संबंधित ईआरपी पर अपलोड़ की जायेगी, जिसकी जानकारी शासन को उपलब्ध कराई जायेगी। छात्रों की उपस्थिति व कक्षाओं के संचालन मानक पूर्ण न होने की दशा में छात्रों को किसी भी दशा में परीक्षा में बैठने की अनुमति कतई भी नहीं दी जायेगी। उक्त आदेशों को सुनिश्चित करने के लिये संबंधित विश्वविद्यालयों के कुलपति, कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक, संबंधित संस्थान के प्राचार्य/निदेशक एवं उच्च शिक्षा निदेशक जिम्मेदार होंगे।
बयान
समर्थ पोर्टल के संचालन का अधिकार राज्य विश्वविद्यालयों को दे दिया गया है। जिसका लाभ छात्र-छात्राओं को मिलेगा। इसके अलावा उच्च शिक्षण संस्थानों में एकेडमिक कैलेण्डर लागू कर प्रत्येक सेमेस्टर में छात्र-छात्राओं की 75 फीसदी उपस्थिति व 90 दिवस कक्षाओं का संचालन अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जायेगा। जिसका रिकार्ड समर्थ पोर्टल पर अपलोड़ किया जायेगा। – डॉ. धन सिंह रावत, उच्च शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड ।
दिल्ली में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति की बैठक
ट्रेनों से हाथियों की मौत पर सांसद त्रिवेन्द्र रावत की चिंता, रेल–वन समन्वय मजबूत करने की मांग
देहरादून/ नई दिल्ली। केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में दिल्ली में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में समिति के सदस्य, हरिद्वार सांसद एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने हिस्सा लिया।
बैठक के दौरान सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने उत्तराखंड सहित हिमालयी क्षेत्रों में “मानव–पशु संघर्ष” को एक गंभीर एवं ज्वलंत मुद्दा बताते हुए कहा कि जंगली पशुओं का आबादी वाले क्षेत्रों की ओर बढ़ता पलायन चिंता का विषय है। उन्होंने आग्रह किया कि संवेदनशील क्षेत्रों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कर उन मूल कारणों की पहचान की जाए, जिनके चलते मानव–पशु संघर्ष की घटनाएँ बढ़ रही हैं, ताकि स्थायी और व्यवहारिक समाधान सुनिश्चित किए जा सकें।
सांसद रावत ने हरिद्वार क्षेत्र में ट्रेनों से हाथियों की मृत्यु की घटनाओं पर विशेष चिंता व्यक्त करते हुए रेल–वन समन्वय, चेतावनी तंत्र, गति नियंत्रण एवं संरचनात्मक उपायों को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही उन्होंने लच्छीवाला में एलिफैंट कॉरिडोर से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करते हुए वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए प्रभावी संरक्षण उपाय अपनाने का आग्रह किया।
इस दौरान मानव–पशु संघर्ष की चुनौती से निपटने हेतु समन्वित नीति, स्थानीय सहभागिता और तकनीकी हस्तक्षेप पर व्यापक विचार–विमर्श किया गया।
बैठक में समिति के अन्य सदस्यगण एवं संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
सीरीज में 2-1 से आगे टीम इंडिया
नई दिल्ली। लखनऊ में घने कोहरे के कारण चौथा टी20 मुकाबला रद्द होने के साथ ही भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच पांच मैचों की टी20 सीरीज निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। अब यह तय हो गया है कि भारतीय टीम यह सीरीज नहीं हारेगी। शुक्रवार को खेले जाने वाले पांचवें और आखिरी टी20 में भारत 2-1 की बढ़त के साथ मैदान में उतरेगा, जबकि दक्षिण अफ्रीका की कोशिश सीरीज बराबर करने की होगी।
अजेय लय बरकरार रखने के इरादे से उतरेगा भारत
टी20 विश्व कप 2024 जीतने के बाद से भारतीय टीम का इस फॉर्मेट में प्रदर्शन बेहद शानदार रहा है। इस दौरान भारत ने न केवल कोई टी20 सीरीज गंवाई है और न ही किसी टूर्नामेंट में उसे हार का सामना करना पड़ा है। भारत अब तक छह टी20 सीरीज और एशिया कप अपने नाम कर चुका है और उसकी नजर लगातार सातवीं टी20 सीरीज जीतने पर टिकी है। वर्ष 2023 से भारत टी20 क्रिकेट में अजेय बना हुआ है, जिसमें उसने एशियाई खेलों, विश्व कप और एशिया कप समेत नौ सीरीज जीती हैं, जबकि एकमात्र सीरीज 2023-24 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ ड्रॉ रही थी।
कप्तान सूर्यकुमार यादव पर रहेंगी निगाहें
अंतिम मुकाबले में एक बार फिर कप्तान सूर्यकुमार यादव से बड़ी पारी की उम्मीद होगी। हालांकि उनकी मौजूदा फॉर्म टीम प्रबंधन के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। इस साल टी20 में खेले गए 20 मैचों की 18 पारियों में सूर्यकुमार एक भी अर्धशतक नहीं जड़ सके हैं और उनका औसत 14.20 रहा है। वहीं लखनऊ टी20 से पहले पैर के अंगूठे में चोटिल हुए शुभमन गिल के अंतिम मुकाबले में खेलने को लेकर भी संशय बना हुआ है। टीम प्रबंधन कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं है।
बुमराह की वापसी से गेंदबाजी को मजबूती
तीसरे टी20 में अनुपस्थित रहे जसप्रीत बुमराह अंतिम मैच के लिए उपलब्ध हैं, जिससे भारतीय गेंदबाजी आक्रमण को मजबूती मिलने की उम्मीद है। अर्शदीप सिंह लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि युवा तेज गेंदबाज हर्षित राणा ने भी अपनी छाप छोड़ी है।
संजू सैमसन को मिल सकता है मौका
यदि शुभमन गिल फिट नहीं हो पाते हैं, तो शीर्ष क्रम में संजू सैमसन को मौका मिल सकता है। सैमसन ने सलामी बल्लेबाज के रूप में बेहतर प्रदर्शन किया है, जबकि मध्यक्रम में वह अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर सके हैं। आगामी टी20 विश्व कप को देखते हुए टीम प्रबंधन उनके विकल्प को परखने पर विचार कर सकता है।
दक्षिण अफ्रीका के बल्लेबाजों पर दबाव
दूसरी ओर, दक्षिण अफ्रीका के बल्लेबाजों का प्रदर्शन सीरीज में अब तक निराशाजनक रहा है। सीरीज ड्रॉ कराने के लिए उसके बल्लेबाजों को अंतिम मुकाबले में अपना सर्वश्रेष्ठ खेल दिखाना होगा। ओपनर रीजा हेंड्रिक्स की लगातार असफलता के चलते कप्तान एडिन मार्करम को एक बार फिर ओपनिंग में उतारने पर विचार किया जा सकता है। वहीं डेवाल्ड ब्रेविस से भी बड़ी पारी की उम्मीद रहेगी, जो अभी तक प्रभाव नहीं छोड़ सके हैं।
अब सबकी निगाहें अंतिम मुकाबले पर
भारत जहां अपनी अजेय टी20 लय को बरकरार रखने के इरादे से उतरेगा, वहीं दक्षिण अफ्रीका के लिए यह मुकाबला प्रतिष्ठा और बराबरी की लड़ाई बन चुका है। ऐसे में दोनों टीमों के बीच अंतिम टी20 रोमांचक होने की पूरी उम्मीद है।
मैच से जुड़ी जरूरी जानकारी
भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच चौथा टी20 मुकाबला 19 दिसंबर को खेला जाएगा। यह मैच शाम 7 बजे से शुरू होगा, जबकि टॉस शाम 6:30 बजे होगा। मुकाबले का सीधा प्रसारण स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क पर किया जाएगा, वहीं जियोहॉटस्टार ऐप पर लाइव स्ट्रीमिंग उपलब्ध रहेगी।
ग्रामीण आजीविका बढ़ाने के लिए राज्य सरकार कर रही है ठोस प्रयास
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास में ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग, उत्तराखण्ड की 10वीं बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि पलायन की समस्या राज्य के लिए एक बड़ी चुनौती रही है, लेकिन पिछले चार–पाँच वर्षों में रिवर्स पलायन को प्रोत्साहित करने की दिशा में राज्य सरकार ने कई महत्त्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की आजीविका के साधन बढ़ाने के लिए अनेक योजनाएँ लागू की गई हैं। इन योजनाओं के अंतर्गत ऋण लेने पर पात्र लाभार्थियों को अनुदान (सब्सिडी) भी प्रदान की जा रही है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिल रही है।
प्रवासी पंचायतों और वेडिंग डेस्टिनेशन विकास पर विशेष बल
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्यभर में प्रवासी पंचायतों का आयोजन किया जाए, जिनमें देश एवं विदेश में कार्यरत प्रवासियों को आमंत्रित किया जाए। उन्हें राज्य सरकार की रिवर्स पलायन से जुड़ी पहलों की जानकारी दी जाए और उनके सुझाव भी प्राप्त किए जाएँ।
मुख्यमंत्री ने आयोग के सदस्यों से अन्य राज्यों में जाकर रिवर्स पलायन के लिए राज्य सरकार द्वारा किए गए कार्यों की जानकारी देने के साथ ही पलायन रोकने और रिवर्स पलायन से जुड़े नवाचारों का अध्ययन करने के निर्देश भी दिए।
उन्होंने कहा कि त्रियुगीनारायण की तर्ज पर राज्य के 25 नए स्थलों को वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जाए। इन स्थलों में सभी मूलभूत सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाए। पर्वतीय क्षेत्रों के विकास के लिए लघु उद्योगों के संवर्धन पर भी बल दिया गया।
रिवर्स पलायन की दिशा में उत्साहजनक परिणाम
ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग के उपाध्यक्ष डॉ॰ एस.एस. नेगी ने बताया कि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में अब रिवर्स पलायन का रुझान देखने को मिल रहा है। अब तक लगभग 6282 व्यक्ति वापस अपने गाँवों में लौटे हैं। इनमें देश के भीतर और विदेशों से लौटे लोग भी शामिल हैं। अधिकतर लोग पर्यटन एवं लघु उद्योग के क्षेत्र में कार्यरत हैं और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
बैठक में आयोग के सदस्यों ने रिवर्स पलायन को और गति देने के लिए कई रचनात्मक सुझाव प्रस्तुत किए।
बैठक में सचिव विनय शंकर पाण्डेय, धीराज गर्ब्याल, डॉ॰ श्रीधर बाबू अद्दांकी, सी. रविशंकर, अपर सचिव श्रीमती अनुराधा पाल, डॉ॰ मेहरबान सिंह बिष्ट, चन्द्र सिंह धर्मशक्तू, संतोष बडोनी, सुरेश जोशी, ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग के सदस्य अनिल सिंह शाही, दिनेश रावत, सुरेश सुयाल, राम प्रकाश पैन्यूली एवं श्रीमती रंजना रावत उपस्थित रहे।
‘सहकारिता से शहरी-ग्रामीण एकता’ की थीम पर आयोजित होगा सहकारिता मेला
देहरादून। देहरादून में 20 से 28 दिसंबर 2025 तक रेंजर्स ग्राउंड में सहकारिता मेले का भव्य आयोजन किया जाएगा। मेला प्रतिदिन प्रातः 11 बजे से रात्रि 09 बजे तक आमजन के लिए खुला रहेगा। इस मेले की थीम “सहकारिता से शहरी ग्रामीण एकता” निर्धारित की गई है। मेले को लेकर रेंजर्स ग्राउंड में तैयारियां पूरी हो गई है।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने मेले के सफल आयोजन के लिए जिला स्तर पर मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय कार्यान्वयन समिति का गठन किया गया है। समिति द्वारा विभिन्न विभागों को उनके दायित्व सौंपे गए हैं, ताकि मेला सुव्यवस्थित एवं प्रभावी ढंग से आयोजित किया जा सके।
मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र महासंघ द्वारा वर्ष 2025 को अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष घोषित किए जाने के उपलक्ष्य में उत्तराखंड सरकार के सहकारिता विभाग द्वारा राज्य के सभी जनपदों में थीम आधारित सहकारिता मेलों के आयोजन का निर्णय लिया गया है। इन मेलों का उद्देश्य सहकारिता की मूल भावना को स्थानीय स्तर पर साकार करना, राज्य की अर्थव्यवस्था में सहकारिता विभाग के योगदान को रेखांकित करना तथा सहकारिता से जुड़े सभी संस्थानों को एक साझा मंच प्रदान करना है।

सहकारिता मेले में विभिन्न विभागों, सहकारी समितियों एवं स्वयं सहायता समूहों द्वारा स्थानीय उत्पादों के आकर्षक एवं विशिष्ट स्टॉल लगाए जाएंगे। मेले में जनपद की सभी स्थानीय सहकारी समितियों, संस्थाओं, स्वयं सहायता समूहों, किसानों एवं काश्तकारों को प्रतिभाग के लिए आमंत्रित किया गया है।
मेले के दौरान प्रत्येक दिवस विषय विशेषज्ञों द्वारा पैनल चर्चाएं, तकनीकी सत्र, निर्यात परामर्श, उत्पाद पैकेजिंग एवं ब्रांडिंग, प्रशिक्षण सत्र, युवा उद्यमिता संवाद, स्टार्टअप एवं तकनीकी समाधान, किसान गोष्ठी, श्वेत क्रांति एवं दुग्ध क्रांति, डिजिटल साक्षरता, फूड स्टॉल, ई-कॉमर्स, वित्तीय समावेशन तथा महिला सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त विभिन्न प्रतियोगिता, मनोरंजन, झूले एवं मेले में उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति को दर्शाते रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए जाएंगे, जो आगंतुकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगे।
सहकारिता मेला न केवल सहकारिता आंदोलन को नई दिशा देगा, बल्कि शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के बीच आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक समन्वय को भी मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
सर्दी का मौसम आते ही खानपान की आदतों में बड़ा बदलाव देखने को मिलता है। ठंड से बचने के लिए जहां लोग गर्म कपड़ों की कई परतें पहनते हैं, वहीं इस मौसम में भूख भी सामान्य से अधिक लगने लगती है। विशेषज्ञों के अनुसार, ठंड के कारण शरीर को अपना तापमान बनाए रखने के लिए ज्यादा ऊर्जा खर्च करनी पड़ती है, जिससे मेटाबॉलिज्म तेज होता है और बार-बार खाने की इच्छा होती है।
सर्दियों में क्यों बढ़ जाती है खाने की चाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि सर्दियों में दिन छोटे और रातें लंबी होने से हार्मोनल संतुलन प्रभावित होता है। सेरोटोनिन और मेलाटोनिन जैसे हार्मोन में बदलाव के कारण लोगों में सुस्ती और ‘विंटर ब्लूज’ की स्थिति पैदा हो जाती है। इससे निपटने के लिए अधिकांश लोग हाई कैलोरी, तले-भुने और मीठे खाद्य पदार्थों की ओर आकर्षित हो जाते हैं, जिन्हें आमतौर पर ‘कम्फर्ट फूड’ कहा जाता है।
ओवरईटिंग बन सकती है गंभीर बीमारियों की वजह
हालांकि स्वाद और राहत के चक्कर में की गई ओवरईटिंग सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। यदि इस आदत पर समय रहते नियंत्रण न किया जाए, तो वजन तेजी से बढ़ता है और कई गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है, जो आगे चलकर लंबे समय तक परेशान कर सकती हैं।
मेटाबॉलिक सिंड्रोम का बढ़ता खतरा
सर्दियों में शारीरिक गतिविधियां कम हो जाती हैं और कैलोरी का सेवन बढ़ जाता है। इसका सीधा असर वजन पर पड़ता है। पेट के आसपास चर्बी बढ़ने से मेटाबॉलिक सिंड्रोम की आशंका बढ़ जाती है, जिससे फैटी लीवर, जोड़ों में दर्द और चलने-फिरने में परेशानी जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
दिल और कोलेस्ट्रॉल पर पड़ता है असर
अधिक तला-भुना और मीठा खाने से शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) का स्तर बढ़ जाता है। सर्दियों में नसें पहले से ही संकुचित रहती हैं, ऐसे में बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल धमनियों में रुकावट पैदा कर सकता है। इससे हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। दिल के मरीजों के लिए सर्दियों की ओवरईटिंग खासतौर पर जोखिम भरी मानी जाती है।
डायबिटीज का भी बढ़ सकता है जोखिम
विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार ज्यादा मात्रा में कार्बोहाइड्रेट और शुगर लेने से शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस विकसित हो सकता है। लगातार इंसुलिन स्पाइक होने से ब्लड शुगर अनियंत्रित हो जाता है, जिससे टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। सर्दियों में कई लोगों में शुगर लेवल अचानक बढ़ने के पीछे यही कारण माना जाता है।
सर्दियों में ओवरईटिंग से कैसे बचें
स्वास्थ्य विशेषज्ञ सर्दियों में संतुलित खानपान पर विशेष ध्यान देने की सलाह देते हैं।
डाइट में सूप, सलाद और हरी सब्जियों को शामिल करें, जिससे पेट लंबे समय तक भरा रहे।
पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, क्योंकि कई बार प्यास को भूख समझ लिया जाता है।
भोजन धीरे-धीरे और अच्छी तरह चबाकर करें, ताकि दिमाग को समय पर पेट भरने का संकेत मिल सके।
स्वाद और पोषण के बीच संतुलन बनाए रखें, ताकि सेहत के साथ सर्दियों का आनंद भी लिया जा सके।
नोट: यह खबर विभिन्न मेडिकल रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों की राय के आधार पर तैयार की गई है।
(साभार)
प्रदेश में सब्जी और फूलों के बड़े क्लस्टर विकसित होंगे, किसानों की आय बढ़ाने पर जोर
देहरादून। कृषि मंत्री गणेश जोशी ने देहरादून में प्रदेश के सभी जनपदों के मुख्य विकास अधिकारियों, मुख्य कृषि अधिकारियों और मुख्य उद्यान अधिकारियों के साथ बैठक कर नाबार्ड द्वारा वित्त पोषित प्रदेशव्यापी क्लस्टर आधारित पॉलीहाउस योजना की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और तय समयसीमा में लक्ष्यों को पूरा करने पर विशेष जोर दिया गया।
बैठक के दौरान मंत्री गणेश जोशी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी जिलों में उपयुक्त क्लस्टरों का चयन कर किसानों को चिन्हित किया जाए और सब्जी व फूलों की कम से कम दो फसलों के बड़े क्लस्टर विकसित किए जाएं। उन्होंने कहा कि निर्धारित लक्ष्यों के अनुसार शीघ्र पॉलीहाउस स्थापित किए जाएं और जिला स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
इसके साथ ही मंत्री ने जायका परियोजना, कीवी मिशन, एप्पल मिशन और ड्रैगन फ्रूट मिशन के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार कर योजनाबद्ध तरीके से कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने पीएमएफएमई योजना के अंतर्गत स्टोरेज की स्थापना और अधिक से अधिक फूड प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित कर किसानों को मूल्य संवर्धन से जोड़ने पर भी बल दिया।
गणेश जोशी ने कहा कि राज्य सरकार नीतिगत सुधारों के माध्यम से प्रदेश में कृषि और उद्यानिकी को प्रोत्साहित कर रही है। सरकार का उद्देश्य आधुनिक तकनीकों और योजनाओं के जरिए किसानों की आय में वृद्धि करना है, जिसके लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
निवेशकों को राहत की उम्मीद, पीएसीएल मामले में अब तक 5,602 करोड़ की संपत्तियां जब्त
नई दिल्ली। पीएसीएल (पर्ल्स एग्रोटेक कॉरपोरेशन लिमिटेड) से जुड़े बहुचर्चित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। एजेंसी ने पंजाब के लुधियाना में हजारों करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को जब्त कर निवेश घोटाले पर शिकंजा और कस दिया है। यह कदम उन लाखों निवेशकों के लिए अहम माना जा रहा है, जो वर्षों से अपनी फंसी हुई रकम वापस मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
लुधियाना में 3,436 करोड़ से ज्यादा की संपत्तियां जब्त
ईडी के दिल्ली जोनल कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत लुधियाना जिले में पीएसीएल के नाम दर्ज 169 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। जांच में सामने आया है कि इन संपत्तियों की खरीद निवेशकों से जुटाई गई रकम से की गई थी। जब्त की गई संपत्तियों का कुल बाजार मूल्य 3,436.56 करोड़ रुपये आंका गया है।
सीबीआई की एफआईआर के आधार पर आगे बढ़ी जांच
यह कार्रवाई केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर की गई है। सीबीआई ने पीएसीएल और पीजीएफ लिमिटेड के संस्थापक दिवंगत निर्मल सिंह भंगू सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी की धाराओं में मामला दर्ज किया था। आरोप है कि कंपनी ने सुनियोजित तरीके से निवेशकों को गुमराह कर उनकी धनराशि का दुरुपयोग किया।
निवेश योजनाओं की आड़ में हजारों करोड़ की ठगी
ईडी की जांच में सामने आया है कि पीएसीएल ने सामूहिक निवेश योजनाओं के नाम पर देशभर से करीब 48 हजार करोड़ रुपये जुटाए। सुरक्षित निवेश और अधिक मुनाफे का लालच देकर लाखों लोगों को योजनाओं से जोड़ा गया, लेकिन बाद में यह राशि निजी संपत्तियां खरीदने और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों में खर्च कर दी गई।
अब तक 5,602 करोड़ की संपत्तियां कुर्क
इस मामले में ईडी अब तक भारत और विदेशों में कुल 5,602 करोड़ रुपये से अधिक की चल-अचल संपत्तियों को जब्त कर चुकी है। एजेंसी ने साफ किया है कि जांच अभी जारी है और आने वाले समय में और भी संपत्तियों की पहचान कर कार्रवाई की जा सकती है। ईडी का मुख्य उद्देश्य निवेशकों की अधिकतम राशि की वसूली कर उन्हें वापस दिलाना है।
मृणाल ठाकुर और आदिवी शेष की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘डकैत’ का टीजर आखिरकार दर्शकों के सामने आ गया है। रिलीज होते ही टीजर ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है और फिल्म को लेकर दर्शकों की उत्सुकता और भी बढ़ गई है। रोमांस, एक्शन और सस्पेंस से भरपूर इस टीजर ने फिल्म की कहानी की झलक दिखाते हुए दर्शकों को बांधे रखा है।
1 मिनट 31 सेकंड का टीजर क्या दिखाता है
फिल्म ‘डकैत’ का 1 मिनट 31 सेकंड का टीजर फिलहाल तेलुगु भाषा में जारी किया गया है, जबकि हिंदी दर्शकों को इसके हिंदी वर्जन के लिए थोड़ा इंतजार करना होगा। टीजर की शुरुआत आदिवी शेष के किरदार से होती है, जिसमें वह पहले एक रोमांटिक अंदाज में नजर आते हैं। जैसे-जैसे टीजर आगे बढ़ता है, कहानी का मिजाज बदलता है और रोमांस एक्शन में तब्दील हो जाता है।
टीजर में आदिवी शेष के लवर बॉय से लेकर दमदार एक्शन हीरो तक के ट्रांसफॉर्मेशन को दिखाया गया है। वहीं मृणाल ठाकुर अपनी सादगी और स्क्रीन प्रेजेंस से प्रभाव छोड़ती हैं। टीजर में अनुराग कश्यप, प्रकाश राज और अतुल कुलकर्णी की झलक भी देखने को मिलती है। खास बात यह है कि टीजर के आखिरी सीन में अनुराग कश्यप के किरदार की एंट्री होती है, जिससे साफ हो जाता है कि फिल्म में वह एक अहम निगेटिव भूमिका निभाने वाले हैं।
19 मार्च 2026 को सिनेमाघरों में होगी रिलीज
शनिल देव के निर्देशन में बनी ‘डकैत’ 19 मार्च 2026 को बड़े पर्दे पर दस्तक देने वाली है। इसी दिन ‘धुरंधर’ पार्ट-2 और यश स्टारर ‘टॉक्सिक’ भी रिलीज होने वाली हैं। ऐसे में बॉक्स ऑफिस पर तीन बड़ी फिल्मों के बीच जबरदस्त मुकाबला देखने को मिल सकता है। अब दर्शकों की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या कोई फिल्म अपनी रिलीज डेट में बदलाव करती है या 19 मार्च को बॉक्स ऑफिस पर बड़ा क्लैश देखने को मिलेगा।
(साभार)
उत्तराखंड में अल्पसंख्यकों के शैक्षणिक और आर्थिक सशक्तिकरण पर फोकस, सीएम धामी ने रखी विकास की रूपरेखा
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र, नींबूवाला (देहरादून) में विश्व अल्पसंख्यक अधिकार दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस दौरान उन्होंने अल्पसंख्यक समुदाय के मेधावी छात्रों को सम्मानित किया तथा विभिन्न स्टालों का अवलोकन किया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उपस्थित मुस्लिम महिलाओं ने उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू किए जाने पर मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया। महिलाओं ने कहा कि मुख्यमंत्री एक भाई के रूप में प्रदेश और अल्पसंख्यक समुदाय के हित में कार्य कर रहे हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अल्पसंख्यक समुदाय के कल्याण के लिए निरंतर विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्व अल्पसंख्यक अधिकार दिवस भारत की एकता और अखंडता के संरक्षण हेतु हमारे मौलिक कर्तव्यों को स्मरण करने का अवसर है। भारतीय संस्कृति में सदियों से समानता तथा सभी धर्मों और समुदायों के प्रति सम्मान की परंपरा रही है। विविध संस्कृतियों, भाषाओं और परंपराओं के बावजूद देश में सदैव एकता की भावना बनी रही है। वसुधैव कुटुम्बकम के सिद्धांत को आत्मसात करते हुए भारत ने पूरी दुनिया को एक परिवार के रूप में देखने की परंपरा स्थापित की है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र के साथ सभी समुदायों को आगे बढ़ाया जा रहा है। जन-धन योजना, उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, मुफ्त राशन योजना जैसी अनेक योजनाओं के माध्यम से अल्पसंख्यक समुदाय को मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। साथ ही करतारपुर साहिब कॉरिडोर का निर्माण, लंगर से करों की समाप्ति, जियो पारसी योजना, बौद्ध सर्किट का विकास, जैन अध्ययन केंद्र की स्थापना, हज यात्रा प्रक्रिया को डिजिटल व पारदर्शी बनाना तथा तीन तलाक जैसी कुप्रथा का अंत जैसे ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम के तहत अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में स्कूल, कॉलेज, छात्रावास, आईटीआई, स्वास्थ्य केंद्र और कौशल विकास संस्थान स्थापित किए जा रहे हैं। वक्फ कानूनों में सुधार कर वक्फ संपत्तियों को अधिक पारदर्शी और उत्तरदायी बनाने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए गए हैं, ताकि उनका वास्तविक लाभ समाज के गरीब और जरूरतमंद वर्गों तक पहुंच सके।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु छात्र-छात्राओं को प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। पूर्वदशम एवं दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजनाओं के माध्यम से अल्पसंख्यक विद्यार्थियों को वार्षिक छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है। जनता से किए गए वादे के अनुरूप राज्य में समान नागरिक संहिता लागू कर सामाजिक न्याय और समानता की दिशा में देश को नई दिशा दी गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अल्पसंख्यक क्षेत्रों में आर्थिक एवं शैक्षणिक विकास को गति देने के लिए अल्पसंख्यक विकास निधि की स्थापना की गई है, जिसके अंतर्गत प्रतिवर्ष 4 करोड़ रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई जा रही है। मुख्यमंत्री हुनर योजना के माध्यम से लोगों को रोजगार से जोड़ा जा रहा है। अल्पसंख्यक स्वरोजगार योजना में 25 प्रतिशत सब्सिडी के साथ 10 लाख रुपये तक का ऋण तथा मौलाना आज़ाद एजुकेशन ऋण योजना के तहत 5 लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त शिक्षा ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। पिछले चार वर्षों में इस योजना के अंतर्गत 169 लाभार्थियों को 4 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि वितरित की गई है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश में नया अल्पसंख्यक शिक्षा कानून लागू किया गया है। यह कानून सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध, पारसी और मुस्लिम सभी अल्पसंख्यक समुदायों को शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर प्रदान करेगा। इसके अंतर्गत सभी मदरसों सहित अल्पसंख्यक विद्यालयों में धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा बोर्ड का पाठ्यक्रम भी पढ़ाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि राज्य में धर्मांतरण विरोधी कानून लागू कर सभी धर्मों की स्वायत्तता की रक्षा सुनिश्चित की गई है, ताकि किसी भी प्रकार के दबाव, प्रलोभन या छल से होने वाले धर्मांतरण को रोका जा सके और सामाजिक सौहार्द बना रहे। मुख्यमंत्री ने विश्व अल्पसंख्यक अधिकार दिवस के अवसर पर अल्पसंख्यक समुदाय से आह्वान किया कि वे विश्व के अन्य देशों में हो रहे अत्याचार और भेदभाव के खिलाफ सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी आवाज उठाएं।
कार्यक्रम में अल्पसंख्यक आयोग की उपाध्यक्ष फरजाना बेगम, पद्मश्री डॉ. आर.के. जैन, हेमकुंड साहिब ट्रस्ट अध्यक्ष नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा, वक्फ बोर्ड अध्यक्ष शादाब शम्स सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
