सरकार के फैसले को हाईकोर्ट में झटका
देहरादून। उत्तराखंड में शराब के दाम बढ़ाने के राज्य सरकार के फैसले को बड़ा झटका लगा है। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने सरकार द्वारा जारी मूल्य वृद्धि के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति रवीन्द्र मैठाणी और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ में हुई, जहां अदालत ने प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ता के तर्कों को सुनते हुए अंतरिम राहत प्रदान की।
यह मामला शराब निर्माता कंपनी मैसर्स इंडियन ग्लाइकोल्स लिमिटेड की ओर से दायर याचिका के बाद न्यायालय के समक्ष आया। याचिका में कंपनी ने राज्य सरकार के 28 नवंबर को जारी उस नोटिफिकेशन को चुनौती दी, जिसके जरिए प्रदेश में शराब के दामों में वृद्धि की गई थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि आबकारी वर्ष के बीच में शराब की कीमतों में बढ़ोतरी नियमों के विपरीत है।
कंपनी ने दलील दी कि आबकारी नीति से जुड़े नियमों में संशोधन केवल नोटिफिकेशन के माध्यम से नहीं किया जा सकता। इसके लिए निर्धारित विधिक प्रक्रिया अपनाना आवश्यक है, जिसमें नियमावली में औपचारिक संशोधन शामिल होता है। याचिका में यह भी कहा गया कि बिना प्रक्रिया पूरी किए कीमतों में वृद्धि करना व्यापारिक अधिकारों का उल्लंघन है।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से अदालत में यह तर्क रखा गया कि सरकार को जनहित और राजस्व कारणों से शराब के दामों में संशोधन करने का अधिकार है। सरकार ने अपने फैसले को नीतिगत निर्णय बताते हुए उसे वैध ठहराने का प्रयास किया।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उच्च न्यायालय ने सरकार के 28 नवंबर के नोटिफिकेशन पर रोक लगाते हुए अगली सुनवाई तक दाम बढ़ोतरी को लागू न करने के निर्देश दिए हैं। अदालत के इस आदेश से फिलहाल प्रदेश में शराब के पुराने दाम ही प्रभावी रहेंगे।
मनसा देवी मंदिर के पास रेलवे फाटक के समीप हुआ हादसा
ऋषिकेश। ऋषिकेश में देर रात एक भीषण सड़क हादसे में चार लोगों की जान चली गई। मनसा देवी मंदिर के पास रेलवे फाटक के समीप तेज रफ्तार कार सड़क किनारे खड़े ट्रक से टकराकर उसके नीचे जा घुसी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और उसमें सवार सभी लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। सूचना मिलते ही पुलिस और राहत दल मौके पर पहुंचे और कड़ी मशक्कत के बाद शवों को बाहर निकाला गया।
पुलिस के अनुसार यह हादसा रात करीब 10:30 बजे हुआ, जब एक कार हरिद्वार से ऋषिकेश की ओर आ रही थी। बताया जा रहा है कि कार तेज गति में थी और रास्ते में कई वाहनों को ओवरटेक कर रही थी। इसी दौरान अचानक वाहन चालक ने नियंत्रण खो दिया और कार सड़क किनारे खड़े ट्रक से टकरा गई। टक्कर के बाद कार ट्रक के नीचे फंस गई, जिससे भीतर बैठे लोगों को बाहर निकालने में काफी समय लगा।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे से ठीक पहले चालक ने किसी जानवर को बचाने के प्रयास में कार को मोड़ा, जिससे वाहन असंतुलित हो गया। सूचना पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर ट्रक और कार को अलग करने के लिए क्रेन की मदद ली। वाहन को काटकर शवों को बाहर निकाला गया।
कोतवाली प्रभारी केसी भट्ट ने बताया कि कार के नंबर के आधार पर वाहन स्वामी की पहचान सोनू कुमार निवासी चंद्रेश्वर मार्ग, ऋषिकेश के रूप में की गई है। उनसे संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन रिसीव नहीं हो सका। प्रारंभिक जांच में दो मृतकों की पहचान धीरज जायसवाल (30) निवासी चंद्रेश्वर नगर, ऋषिकेश और हरिओम (22) निवासी गुमानीवाला, ऋषिकेश के रूप में हुई है। शेष दो मृतकों की पहचान की जा रही थी।
पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजते हुए दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक तौर पर अत्यधिक गति और लापरवाही को हादसे का मुख्य कारण माना जा रहा है।
शहरी विकास, स्मार्ट सिटी और पर्यावरणीय प्रबंधन की व्यावहारिक समझ के लिए 14 से 26 दिसंबर तक देश के प्रमुख शहरों का दौरा
देहरादून। एटीआई नैनीताल द्वारा आवास अनुभाग में नवनियुक्त कनिष्ठ अभियंताओं को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। विभागीय कार्यों में गुणवत्ता, नवाचार और आधुनिक तकनीकों के समावेश के उद्देश्य से कनिष्ठ अभियंताओं के लिए 14 दिसंबर से 26 दिसंबर 2025 तक एक व्यापक राष्ट्रीय अध्ययन भ्रमण (स्टडी टूर) का आयोजन किया गया है। यह अध्ययन भ्रमण देश के प्रमुख शहरी केंद्रों देहरादून, शिमला, चंडीगढ़, नोएडा एवं दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है। इस अध्ययन भ्रमण का मुख्य उद्देश्य अभियंताओं को शहरी नियोजन, आवासीय विकास, स्मार्ट सिटी परियोजनाओं, अपशिष्ट प्रबंधन, सीवेज ट्रीटमेंट, ढलान स्थिरता, पार्किंग समाधान, सार्वजनिक स्थलों के प्रबंधन तथा सतत विकास मॉडल से व्यावहारिक रूप से अवगत कराना है।
अभियंताओं का सहस्रधारा क्षेत्र में विकसित सिटी फॉरेस्ट पार्क का भ्रमण
अध्ययन भ्रमण की शुरुआत देहरादून से हुई। अध्ययन भ्रमण के प्रथम चरण में अभियंताओं को मसूरी–देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा सहस्रधारा क्षेत्र में विकसित सिटी फॉरेस्ट पार्क का भ्रमण कराया गया। इस दौरान अभियंताओं ने पार्क की योजना, लैंडस्केप डिज़ाइन, हरित विकास मॉडल, पर्यावरण संरक्षण से जुड़े उपायों तथा नागरिक सुविधाओं के प्रबंधन का विस्तार से अध्ययन किया। भ्रमण के दौरान अभियंताओं ने पार्क में भ्रमण हेतु आए विभिन्न विद्यालयों के छात्र–छात्राओं, शिक्षकों एवं उनके परिजनों से संवाद स्थापित कर सिटी फॉरेस्ट को लेकर उनकी प्रतिक्रिया और अनुभव भी जाने। आम नागरिकों से प्राप्त फीडबैक के माध्यम से अभियंताओं को यह समझने का अवसर मिला कि किस प्रकार सार्वजनिक हरित स्थलों को नागरिकों की आवश्यकताओं और पर्यावरणीय संतुलन के अनुरूप विकसित किया जा सकता है। यह अनुभव अभियंताओं के लिए अत्यंत उपयोगी एवं सीखप्रद रहा।
इसके साथ ही अभियंता देहरादून के अन्य क्षेत्रों का भ्रमण कर इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC), आईटीडीए, स्मार्ट सिटी परियोजनाओं, शहरी निगरानी प्रणाली, सार्वजनिक पार्कों की लैंडस्केपिंग, मटेरियल रिकवरी सेंटर एवं विरासत स्थलों के पुनर्विकास कार्यों का अध्ययन करेंगे। इसके पश्चात अभियंताओं का दल शिमला पहुंचेगा। शिमला में हिमाचल प्रदेश हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (HIMUDA) द्वारा संचालित पहाड़ी क्षेत्रों की आवासीय योजनाओं, ढलान आधारित निर्माण तकनीक, शहरी गतिशीलता, संरचित पार्किंग, हेरिटेज पब्लिक स्पेस तथा शहरी प्रशासन से जुड़े नवाचारों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया जाएगा।
अगले चरण में अध्ययन भ्रमण चंडीगढ़ में आयोजित होगा, जहां अभियंता पिंक मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी, आरडीएफ प्लांट, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिशन वेस्ट प्लांट, कैपिटल कॉम्प्लेक्स, रॉक गार्डन, सुखना लेक एवं सिटीवाइड डेटा इंटीग्रेशन से जुड़े आईसीसीसी का अध्ययन करेंगे। अध्ययन भ्रमण के अंतिम चरण में अभियंता नोएडा और दिल्ली में आधुनिक कार्यालय भवनों, वेटलैंड आधारित अपशिष्ट प्रबंधन, निजी आवासीय परियोजनाओं, बड़े सार्वजनिक स्थलों, रोबोटिक पार्किंग प्रणाली तथा अक्षरधाम मंदिर जैसे उच्च जन-आवागमन वाले स्थलों के प्रबंधन मॉडल को समझेंगे। अध्ययन भ्रमण का समापन 26 दिसंबर 2025 को होगा। विभाग का विश्वास है कि यह पहल भविष्य में उत्तराखंड को एक सुव्यवस्थित, स्मार्ट और पर्यावरण-संतुलित राज्य के रूप में विकसित करने में सहायक सिद्ध होगी।
उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी का बयान
अध्ययन भ्रमण के संबंध में उपाध्यक्ष मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण { एमडीडीए } बंशीधर तिवारी ने कहा कि आज के समय में शहरी विकास केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह स्मार्ट तकनीक, पर्यावरणीय संतुलन और नागरिक सुविधाओं के समन्वय का विषय बन चुका है। इस अध्ययन भ्रमण के माध्यम से हमारे कनिष्ठ अभियंता देश के अग्रणी शहरों में अपनाए जा रहे आधुनिक मॉडल को प्रत्यक्ष रूप से समझेंगे, जिससे उत्तराखंड में योजनाओं के क्रियान्वयन की गुणवत्ता और प्रभावशीलता में उल्लेखनीय सुधार आएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि उत्तराखंड में टिकाऊ, सुरक्षित और नागरिक-केंद्रित शहरी विकास को बढ़ावा दिया जाए और इस दिशा में अभियंताओं का प्रशिक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है।
सचिव मोहन सिंह बर्निया का बयान
वहीं सचिव मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण { एमडीडीए } मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि यह अध्ययन भ्रमण कनिष्ठ अभियंताओं की तकनीकी क्षमता, योजना निर्माण कौशल और नवाचार को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। विभिन्न राज्यों की श्रेष्ठ प्रथाओं को समझकर अभियंता उन्हें उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप लागू कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि इस भ्रमण से अभियंताओं को अपशिष्ट प्रबंधन, सीवेज ट्रीटमेंट, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, पहाड़ी क्षेत्रों में सुरक्षित निर्माण एवं आधुनिक पार्किंग समाधान जैसे विषयों पर व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा, जिसका सीधा लाभ राज्य की आवासीय एवं शहरी परियोजनाओं को मिलेगा।
देहरादून। सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी से आज उनके कैंप कार्यालय में उपनल कर्मचारी महासंघ के पदाधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की।
प्रतिनिधिमंडल ने सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी को अवगत कराया कि राज्य सरकार के अधीन विभाग/संस्था में 12 वर्ष या उससे अधिक की निरंतर सेवा पूर्ण करने वाले उपनल कार्मिकों को न्यूनतम वेतनमान एवं महंगाई भत्ता, समान कार्य-समान वेतन और नो-वर्क नो-पे प्रकरण का शीघ्र जियो जारी करने की मांग की।
मंत्री गणेश जोशी ने प्रतिनिधि मंडल को सकारात्मक आश्वासन देते हुए शीघ्र कार्यवाही का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार उपनल कर्मियों के हितों को लेकर संवेदनशील है और उनके कल्याण हेतु हरसंभव प्रयास कर रही है।
इस अवसर पर उपनल कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष विनोद गोदियाल, महामंत्री विनय प्रसाद सहित अन्य पदाधिकारीगण उपस्थित रहे।
नितिन नवीन के नवनियुक्त होने पर डॉ. नरेश बंसल ने हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं
देहरादून/नई दिल्ली। भाजपा राष्ट्रीय सहकोषाध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद डॉ. नरेश बंसल ने मंगलवार को भाजपा के राष्ट्रीय कार्यालय में नव नियुक्त भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान डॉ. बंसल ने उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं।
भेंट के अवसर पर डॉ. नरेश बंसल ने नितिन नवीन को मिठाई खिलाकर सम्मानित किया और उनके उज्ज्वल कार्यकाल की कामना की। दोनों नेताओं के बीच इस दौरान विभिन्न समसामयिक और संगठनात्मक विषयों पर भी चर्चा हुई।
डॉ. बंसल ने विश्वास जताया कि नितिन नवीन के नेतृत्व में पार्टी संगठन को नई दिशा और मजबूती मिलेगी।
बीबीसी की माफी के बाद भी नहीं थमे ट्रंप, अब कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
वॉशिंगटन डीसी। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिटिश सार्वजनिक प्रसारक बीबीसी के खिलाफ बड़ा कानूनी कदम उठाया है। ट्रंप ने बीबीसी पर मानहानि और भ्रामक रिपोर्टिंग का आरोप लगाते हुए 10 अरब अमेरिकी डॉलर के हर्जाने की मांग के साथ मुकदमा दायर किया है। उनका आरोप है कि बीबीसी ने जानबूझकर उनके बयानों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा और 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव को प्रभावित करने का प्रयास किया गया।
फ्लोरिडा में दायर 33 पन्नों की याचिका में ट्रंप ने कहा है कि बीबीसी ने उनके खिलाफ “झूठी, अपमानजनक और दुर्भावनापूर्ण” सामग्री प्रसारित की। मुकदमे में दावा किया गया है कि प्रसारक ने न केवल पत्रकारिता की मर्यादाओं का उल्लंघन किया, बल्कि अनुचित व्यापारिक व्यवहार अपनाते हुए राजनीतिक हस्तक्षेप भी किया।
भाषण की एडिटिंग को लेकर विवाद
ट्रंप का कहना है कि बीबीसी ने 6 जनवरी 2021 को दिए गए उनके भाषण के अलग-अलग हिस्सों को जोड़कर इस तरह पेश किया, जिससे उनके बयान का अर्थ पूरी तरह बदल गया। आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील वाले हिस्से को हटा दिया गया और ऐसे शब्दों को जोड़ दिया गया, जो उन्होंने कहे ही नहीं थे।
पहले माफी, अब मुकदमा
इस विवाद को लेकर ट्रंप पहले भी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दे चुके थे। इसके बाद बीते महीने बीबीसी ने भाषण की एडिटिंग को लेकर ट्रंप से माफी तो मांगी थी, लेकिन मानहानि के आरोपों को खारिज कर दिया था। बीबीसी के अध्यक्ष समीर शाह ने इसे संपादकीय निर्णय में हुई चूक बताया था। इस मामले के सामने आने के बाद बीबीसी के शीर्ष समाचार अधिकारियों ने अपने पद से इस्तीफा भी दे दिया था।
डॉक्यूमेंट्री बनी विवाद की जड़
विवाद की जड़ बीबीसी की एक डॉक्यूमेंट्री है, जो 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से ठीक पहले ‘ट्रंप: ए सेकेंड चांस?’ शीर्षक से प्रसारित की गई थी। इस डॉक्यूमेंट्री में 6 जनवरी 2021 के भाषण के तीन अलग-अलग बयानों को जोड़कर एक ही संदर्भ में दिखाया गया, जबकि वे कथन लगभग एक घंटे के अंतराल में दिए गए थे। इससे ऐसा प्रतीत हुआ कि ट्रंप ने समर्थकों को उग्र कदम उठाने के लिए प्रेरित किया, जबकि शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील वाले अंश को प्रसारण से बाहर रखा गया।
ट्रंप का तीखा बयान
व्हाइट हाउस में बिना सवाल-जवाब के दिए गए बयान में ट्रंप ने कहा कि बीबीसी ने उनके “मुंह में ऐसे शब्द डाल दिए, जो उन्होंने कभी कहे ही नहीं”। उन्होंने कहा कि उन्होंने देशभक्ति और शांति की बात की थी, लेकिन वही हिस्से जानबूझकर नहीं दिखाए गए।
कानूनी चुनौतियां भी संभव
यह मुकदमा फ्लोरिडा की अदालत में दायर किया गया है, क्योंकि ब्रिटेन में मानहानि से जुड़े मामलों की समयसीमा पहले ही समाप्त हो चुकी है। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका में भी इस केस को लेकर चुनौतियां सामने आ सकती हैं, क्योंकि विवादित डॉक्यूमेंट्री वहां आधिकारिक रूप से प्रसारित नहीं की गई थी।
कैमरन ग्रीन बने आईपीएल के तीसरे सबसे महंगे खिलाड़ी
नई दिल्ली। आईपीएल नीलामी के पहले ही सत्र में करोड़ों की बारिश देखने को मिली और सबसे बड़ा नाम बनकर उभरे ऑस्ट्रेलिया के ऑलराउंडर कैमरन ग्रीन। लंबे समय से जिस खिलाड़ी को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा थी, उसने नीलामी में आते ही इतिहास रच दिया। कोलकाता नाइट राइडर्स ने ग्रीन को 25.20 करोड़ रुपये की भारी-भरकम बोली लगाकर अपने खेमे में शामिल किया। महज दो करोड़ रुपये के बेस प्राइस वाले ग्रीन अपने मूल्य से करीब 13 गुना अधिक कीमत पर बिके और आईपीएल इतिहास के तीसरे सबसे महंगे खिलाड़ी बन गए।
ग्रीन के लिए लगी रिकॉर्डतोड़ बोली
कैमरन ग्रीन का नाम जैसे ही नीलामी में पुकारा गया, फ्रेंचाइजियों के बीच होड़ मच गई। शुरुआत में मुंबई इंडियंस और राजस्थान रॉयल्स के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। इसके बाद कोलकाता नाइट राइडर्स ने एंट्री कर बोली को तेजी से ऊपर पहुंचाया। अंत में चेन्नई सुपर किंग्स और केकेआर के बीच सीधी जंग हुई, लेकिन केकेआर ने आखिरी और सबसे बड़ी बोली लगाकर ग्रीन को हासिल कर लिया। इस सौदे के साथ कोलकाता को आंद्रे रसेल के रिटायरमेंट के बाद एक सशक्त ऑलराउंड विकल्प मिल गया है।
नीलामी से पहले ही सबसे बड़ा आकर्षण
नीलामी से पहले ही माना जा रहा था कि कैमरन ग्रीन इस बार के सबसे महंगे खिलाड़ियों में शामिल हो सकते हैं। इससे पहले 2023 सीजन में मुंबई इंडियंस ने उन्हें 17.50 करोड़ रुपये में खरीदा था। अपने डेब्यू सीजन में ग्रीन ने अलग-अलग बल्लेबाजी क्रम पर उतरते हुए 452 रन बनाए थे, जिसमें एक शतक और दो अर्धशतक शामिल थे। उनका स्ट्राइक रेट 160 से ऊपर और औसत 50 के करीब रहा। इसके अलावा आरसीबी के लिए खेले गए 13 मैचों में उन्होंने 255 रन बनाने के साथ 10 विकेट भी झटके थे।
बल्लेबाज के रूप में नाम, लेकिन गेंदबाजी भी तय
नीलामी में ग्रीन का नाम बल्लेबाजों की श्रेणी में दर्ज किया गया था, जिसे लेकर बाद में उन्होंने सफाई भी दी। ग्रीन ने बताया कि यह उनके मैनेजर की तकनीकी भूल थी और वह आईपीएल में गेंदबाजी के लिए पूरी तरह उपलब्ध रहेंगे। चोट से उबरने के बाद वह अब पूरी तरह फिट हैं और दोबारा बतौर ऑलराउंडर मैदान पर उतरने के लिए तैयार हैं।
सर्जरी के बाद शानदार वापसी
26 वर्षीय ग्रीन पीठ की सर्जरी के चलते आईपीएल 2025 सीजन से बाहर रहे थे। इसके बाद उन्होंने जून में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी की और अब उन्हें गेंदबाजी की भी पूरी अनुमति मिल चुकी है। ग्रीन फिलहाल ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच चल रही एशेज सीरीज में गेंदबाजी करते नजर आ रहे हैं, जिससे उनकी फिटनेस पर लगी सभी शंकाएं दूर हो गई हैं।
आईपीएल इतिहास के सबसे महंगे खिलाड़ियों में शामिल
आईपीएल के अब तक के सबसे महंगे खिलाड़ियों की सूची में ऋषभ पंत 27 करोड़ रुपये के साथ शीर्ष पर हैं, जिन्हें लखनऊ सुपर जायंट्स ने खरीदा था। दूसरे स्थान पर 26.75 करोड़ रुपये में बिके श्रेयस अय्यर हैं। वहीं, 25.20 करोड़ रुपये के साथ कैमरन ग्रीन तीसरे स्थान पर पहुंच गए हैं। इस सूची में मिचेल स्टार्क, वेंकटेश अय्यर और हेनरिक क्लासेन जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं।
1971 युद्ध के वीरों को नमन: गांधी पार्क में विजय दिवस समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री धामी
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को विजय दिवस के अवसर पर गांधी पार्क, देहरादून में आयोजित श्रद्धांजलि एवं सम्मान समारोह कार्यक्रम में प्रतिभाग करते हुए शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर वीर बलिदानियों को श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर उन्होंने 1971 के युद्ध के सैनिकों और शहीदों के परिजनों को सम्मानित भी किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि सैनिक कल्याण निदेशालय और जिला सैनिक कल्याण कार्यालय (डीडीहाट, हरबर्टपुर, पिथौरागढ़ एवं हरिद्वार) इन सभी पाँच कार्यालयों में सरकारी वाहन दिए जाएंगे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विजय दिवस की शुभकामनाएं देते हुए सभी वीर बलिदानियों को समस्त प्रदेशवासियों की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे वीर जवानों ने अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान से 1971 के युद्ध में राष्ट्र की अखंडता और स्वाभिमान की रक्षा की। आज भारतीय सेना के शौर्य, त्याग और अटूट राष्ट्रनिष्ठा की गौरवगाथा को स्मरण करने का दिन है, जो हमारे इतिहास के पन्नों पर स्वर्णाक्षरों में अंकित है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 1971 में पाकिस्तान के लगभग 93 हजार सैनिकों ने हमारी सेना के समक्ष आत्मसमर्पण किया। उन्होंने कहा कि इस युद्ध में वीरभूमि उत्तराखंड के 248 बहादुर सपूतों ने भी अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। हमारे प्रदेश के 74 सैनिकों को अपने अदम्य साहस और शौर्य के लिए विभिन्न वीरता पदकों से सम्मानित भी किया गया था। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के लगभग प्रत्येक परिवार का कोई न कोई सदस्य सेना में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जवानों का मनोबल बढ़ाने के साथ ही सेना को अत्याधुनिक तकनीक और हथियारों से सुसज्जित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत रक्षा सामग्री का निर्यात करने वाले शीर्ष देशों की सूची में शामिल हो गया है। ऑपरेशन सिंधु के माध्यम से भारत ने यह सिद्ध कर दिया कि हमारे सैनिकों के साथ-साथ हमारे स्वदेशी हथियार भी किसी से कम नहीं हैं। इस अभियान में भारत में निर्मित आकाश मिसाइल, डिफेंस सिस्टम और ब्रह्मोस मिसाइल जैसे स्वदेशी हथियारों ने पूरे विश्व में भारत का डंका बजा दिया। आज दुश्मन की एक-एक गोली का जवाब गोलों से दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह नया भारत है, जो दुश्मनों की हर नापाक हरकत का करारा जवाब देता है और उन्हें उनके ठिकानों में ही नेस्तनाबूद कर देता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में वीर जवानों के हित में भी कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा रहे हैं। वन रैंक वन पेंशन योजना हो, नेशनल वॉर मेमोरियल का निर्माण, रक्षा बजट में वृद्धि कर सैनिकों की सभी आवश्यकताओं की पूर्ति करना हो, या बॉर्डर पर इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाना—ऐसे अनेक कार्य किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार भी सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए संकल्पित होकर कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने शहीदों के आश्रितों को मिलने वाली अनुग्रह राशि को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये किया है। सेना में परमवीर चक्र से लेकर मेंशन इन डिस्पैच तक सभी वीरता पुरस्कारों से अलंकृत सैनिकों को दी जाने वाली एकमुश्त तथा वार्षिकी राशि में भी अभूतपूर्व वृद्धि की गई है। परमवीर चक्र से अलंकृत सैनिक को मिलने वाली राशि को 50 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.50 करोड़ रुपये किया गया है। अशोक चक्र की राशि 30 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये, महावीर चक्र और कीर्ति चक्र की राशि 20 लाख से बढ़ाकर 35 लाख रुपये तथा वीर चक्र और शौर्य चक्र की एकमुश्त राशि 15 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दी गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बलिदानियों के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी में समायोजित करने का निर्णय लिया गया है। वहीं, सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करने की अवधि भी 2 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष कर दी गई है। प्रदेश में बलिदानियों के आश्रितों को नौकरी पूर्व प्रशिक्षण तथा पुत्री विवाह अनुदान जैसी योजनाएँ भी संचालित की जा रही हैं। राज्य में वीरता पुरस्कार प्राप्त सैनिकों और पूर्व सैनिकों हेतु सरकारी बसों में यात्रा की निःशुल्क व्यवस्था के साथ-साथ सेवारत व पूर्व सैनिकों के लिए 25 लाख रुपये तक की संपत्ति की खरीद पर स्टाम्प ड्यूटी में 25 प्रतिशत की छूट भी प्रदान की जा रही है। देहरादून के गुनियाल गाँव में ‘‘भव्य सैन्य धाम’’ का निर्माण भी किया जा रहा है।
सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि 1971 के युद्ध के दौरान करीब 4 हज़ार सैनिक शहीद हुए थे, जिनमें उत्तराखंड राज्य के 248 शहीद सैनिक शामिल थे। करीब 9 हज़ार सैनिक घायल हुए थे। उत्तराखंड के 74 सैनिकों को वीरता पुरस्कार प्रदान किए गए, जो हमारे राज्य के लिए गौरव की बात है। सैनिकों का सम्मान हर देशवासी का कर्तव्य है। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर सैनिकों के कल्याण के लिए कार्य कर रही हैं। मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में शहीद सैनिकों के परिजनों को मिलने वाली सम्मान राशि को बढ़ाकर ₹50 लाख किया गया है। सैनिकों की हर समस्या का समाधान किया जा रहा है।
इस अवसर पर विधायक खजान दास, विधायक श्रीमती सविता कपूर, सचिव सैनिक कल्याण दीपेन्द्र चौधरी, मेजर जनरल (से.नि.) सम्मी सबरवाल तथा पूर्व सैनिक और वीरांगनाएँ उपस्थित थीं।
राज्यपाल गुरमीत सिंह बोले—1971 की विजय भारत के सैन्य इतिहास का स्वर्णिम अध्याय
देहरादून। विजय दिवस 2025 के अवसर पर लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.), उत्तराखंड के राज्यपाल, मेजर जनरल एम.पी.एस. गिल, जनरल ऑफिसर कमांडिंग, उत्तराखंड सब एरिया, मेजर जनरल रोहन आनंद, एडीजी, एनसीसी उत्तराखंड निदेशालय, ग्रुप कैप्टन ऋषभ शर्मा, रियर एडमिरल पीयूष पौसी, जॉइन्ट चीफ हाइड्रोग्राफर, एनएचओ देहरादून और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। समारोह में देहरादून स्टेशन के सेवारत अधिकारी, जेसीओ और अन्य रैंक के अधिकारी भी उपस्थित थे, जिन्होंने देश के सम्मान के लिए वीर सैनिकों का अनुकरण करने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर राज्यपाल ने उपस्थित सेवारत एवं पूर्व सैनिकों से भेंट कर उनसे संवाद किया तथा राष्ट्र की रक्षा उनके अमूल्य योगदान की सराहना की।
इस अवसर पर राज्यपाल ने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध की ऐतिहासिक, रणनीतिक एवं निर्णायक सैन्य विजय को स्मरण करते हुए कहा कि यह युद्ध भारत के सैन्य इतिहास में स्वर्णिम अध्याय है। भारतीय सशस्त्र बलों ने अद्वितीय शौर्य, साहस और कुशल रणनीति का परिचय देते हुए न केवल दुश्मन के 93 हजार सैनिकों को आत्मसमर्पण के लिए विवश किया, बल्कि पाकिस्तान के विभाजन के साथ एक नए राष्ट्र बांग्लादेश के निर्माण का मार्ग भी प्रशस्त किया।
राज्यपाल ने कहा कि हमारे सशस्त्र बलों की उत्कृष्ट रणनीति, कठोर प्रशिक्षण, सटीक योजना, अनुशासन, समर्पण और राष्ट्र के प्रति अटूट प्रतिबद्धता हम सभी के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शक है। उन्होंने कहा कि 54 वर्ष पूर्व इस युद्ध में शहीद हुए एवं घायल हुए जवानों के परिवारों की देखभाल करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। विजय दिवस पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम सदैव उनके परिवारों के सम्मान, सुरक्षा और कल्याण के लिए तत्पर रहेंगे।
उन्होंने कहा कि आज भारत आधुनिकीकरण, तकनीकी नवाचार, भविष्य के युद्ध कौशल और सैन्य क्षमताओं के क्षेत्र में एक व्यापक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। यह परिवर्तन हमारे सशस्त्र बलों की शक्ति और राष्ट्र की सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ करेगा।
राज्यपाल ने कहा कि विजय दिवस केवल अतीत की विजय को स्मरण करने का दिन नहीं, बल्कि यह आत्ममंथन और संकल्प का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि हमें भविष्य की चुनौतियों तथा आंतरिक एवं बाह्य सुरक्षा आवश्यकताओं के प्रति स्वयं को निरंतर सुदृढ़ और सजग बनाए रखना होगा।
1971 के युद्ध में पाकिस्तान पर भारतीय सशस्त्र बलों की ऐतिहासिक जीत को मनाने करने के लिए तथा कर्तव्य की पंक्ति में सर्वोच्च बलिदान देने वाले बहादुर जवानों को श्रद्धांजलि देने के लिए हर साल विजय दिवस मनाया जाता है। दिसंबर 1971 के 16वें दिन, तत्कालीन थल सेना अध्यक्ष जनरल एस एफ एच जे मानेकशों के शक्तिशाली नेतृत्व में भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तानी सेना को करारी शिकस्त दी और बांग्लादेश के रूप में नए देश के गठन के लिए पूर्वी पाकिस्तान की मुक्ति का मार्ग प्रशस्त किया। राष्ट्र अपने सैनिकों के दृढ़ संकल्प और अद्वितीय साहस को प्रणाम करता है जिन्होंने 1971 के युद्ध में इस
अभूतपूर्व जीत को हासिल करने के लिए अपने जीवन का बलिदान दिया।
रसोई में आसानी और सुविधा के नाम पर इस्तेमाल होने वाला एल्युमिनियम फॉयल आज लगभग हर घर का हिस्सा बन चुका है। खाना पैक करना हो, गर्म रखना हो या फिर बेकिंग—हर जगह इसका इस्तेमाल आम है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदत धीरे-धीरे सेहत के लिए खतरा बन सकती है, खासकर तब जब गर्म या खट्टे खाद्य पदार्थ सीधे एल्युमिनियम फॉयल के संपर्क में आते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और विभिन्न शोध रिपोर्ट्स के अनुसार, एल्युमिनियम फॉयल में रखा या पकाया गया भोजन इसके सूक्ष्म कणों को अपने अंदर सोख सकता है। यह समस्या तब और गंभीर हो जाती है जब भोजन गर्म हो या उसमें नींबू, टमाटर, सिरका और मसाले जैसे अम्लीय तत्व मौजूद हों। ऐसे में एल्युमिनियम भोजन के जरिए शरीर में पहुंच जाता है, जो लंबे समय में स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
मस्तिष्क और नर्व सिस्टम पर पड़ सकता है असर
एल्युमिनियम को एक न्यूरोटॉक्सिक तत्व माना जाता है। शरीर में इसकी अधिक मात्रा मस्तिष्क की कोशिकाओं पर असर डाल सकती है। कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों में यह संकेत मिला है कि मस्तिष्क में एल्युमिनियम का जमाव अल्जाइमर जैसी न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों के जोखिम को बढ़ा सकता है। हालांकि इस पर अभी और शोध की जरूरत बताई जाती है, लेकिन खतरे से इनकार नहीं किया जा सकता।
हड्डियों और किडनी के लिए भी नुकसानदेह
अत्यधिक एल्युमिनियम शरीर में कैल्शियम और फॉस्फोरस के अवशोषण को प्रभावित कर सकता है, जिससे हड्डियों का घनत्व कम होने का खतरा रहता है। इसके अलावा, किडनी को शरीर से अतिरिक्त एल्युमिनियम बाहर निकालने का काम करना पड़ता है। लंबे समय तक अधिक मात्रा में एल्युमिनियम जमा होने से किडनी की कार्यक्षमता पर भी दबाव पड़ सकता है।
गर्म और खट्टे खाने से बढ़ता है रिसाव
विशेषज्ञों के अनुसार, एल्युमिनियम का रिसाव तापमान और भोजन की प्रकृति पर निर्भर करता है। गर्म भोजन या अम्लीय खाद्य पदार्थ जब फॉयल में लपेटे जाते हैं या उसमें पकाए जाते हैं, तो एल्युमिनियम के कण तेजी से भोजन में मिल सकते हैं। बार-बार ऐसा करने से शरीर में इसकी मात्रा धीरे-धीरे बढ़ती जाती है।
क्या हैं सुरक्षित विकल्प
सेहत को सुरक्षित रखने के लिए एल्युमिनियम फॉयल के बजाय कांच, सिरेमिक या स्टेनलेस स्टील के बर्तनों का उपयोग बेहतर माना जाता है। यदि फॉयल का इस्तेमाल जरूरी हो, तो उसमें ठंडा और सूखा भोजन ही रखें। अम्लीय खाद्य पदार्थों को सीधे फॉयल में लपेटने से बचें और पहले बटर पेपर या फूड-ग्रेड शीट का इस्तेमाल करें।
नोट: यह लेख विभिन्न मेडिकल स्टडीज़ और विशेषज्ञों की रिपोर्ट्स पर आधारित है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी बदलाव से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।
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