मृतक तिपन्ना तलाक देने को तैयार नहीं था, पत्नी हसीना ने करवाया कत्ल
ठाणे। महाराष्ट्र के ठाणे जिले में वैवाहिक विवाद ने एक दिल दहला देने वाली वारदात का रूप ले लिया। तलाक को लेकर चल रहे तनाव के बीच एक महिला ने अपने पति की हत्या की साजिश रच डाली। पुलिस को मुंबई–नासिक राजमार्ग के पास झाड़ियों में एक जला हुआ और सड़ा हुआ शव मिला, जिसकी पहचान बाद में कर्नाटक के बेल्लारी निवासी तिपन्ना के रूप में हुई। मामले की जांच आगे बढ़ी तो पुलिस ने पत्नी सहित चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया।
जांच में खुलासा हुआ कि तिपन्ना और उसकी पत्नी हसीना महबूब शेख के बीच लंबे समय से घरेलू विवाद चल रहा था, जिसके चलते दोनों अलग-अलग रह रहे थे। हसीना तलाक चाहती थी, लेकिन तिपन्ना इसके लिए तैयार नहीं था। इसी विवाद ने हत्या का रूप ले लिया।
भाई और साथियों के साथ रची साजिश
पुलिस के अनुसार, आरोपी महिला ने अपने भाई फैयाज जाकिर हुसैन शेख (35) और उसके दो साथियों के साथ मिलकर पति की हत्या की योजना बनाई। 17 नवंबर को ये तीनों तिपन्ना को घुमाने के बहाने शाहपुर के पास एक जंगली इलाके में ले गए, जहां उसकी हत्या कर दी गई। आरोपियों ने सबूत मिटाने के लिए शव को जलाने की कोशिश की और बाद में उसे राजमार्ग के किनारे फेंक दिया।
25 नवंबर को शव मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और सुरागों के आधार पर आरोपियों तक पहुँची। पूछताछ के दौरान फैयाज ने स्वीकार किया कि उसने बहन के कहने पर ही हत्या को अंजाम दिया।
शाहपुर पुलिस ने हसीना, उसके भाई और दो साथियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 103(1) (हत्या) और 238 (साक्ष्य नष्ट करने) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब वारदात की हर कड़ी की गहन जांच कर रही है।
खेल मंत्री रेखा आर्या ने शेर सिंह कार्की मेमोरियल खेल प्रतियोगिता का किया शुभारंभ
पिथौरागढ़। शुक्रवार को खेल मंत्री रेखा आर्या ने पिथौरागढ़ के मुवानी में शेर सिंह कार्की मेमोरियल खेल प्रतियोगिता का शुभारंभ किया। इस प्रतियोगिता में जनपद के सभी हिस्सों से ग्रामीण अंचल की टीमें हिस्सा ले रही हैं। प्रतियोगिता का उद्घाटन करते हुए मुख्य अतिथि खेल मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि प्रदेश के दूर दराज के क्षेत्र में भी अब खेल सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है। प्रदेश सरकार का लक्ष्य यह है कि उत्तराखंड के हर गांव से राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तर के चैंपियन निकलें, तभी उत्तराखंड को खेल भूमि के रूप में पहचान दिलाने का हमारा सपना साकार हो सकेगा।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में खेल संस्कृति विकसित करने के लिए प्रदेश सरकार ने बहुत सारे ऐसे कदम उठाए हैं जिनसे खिलाड़ियों का भविष्य सुरक्षित होगा और हमारे युवा खेल को करियर के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित होंगे। खेल मंत्री रेखा आर्या कहा कि एथलेटिक्स में ज्यादातर चैंपियन ग्रामीण अंचल से ही निकलते हैं और यह प्रतियोगिता भी इसी दिशा में एक बड़ा कदम है।
खेल मंत्री ने कहा कि 2030 में कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी भारत को मिली है और सरकार यह प्रयास करेगी की मेजबानी में देवभूमि उत्तराखंड की भी कुछ ना कुछ भागीदारी जरूर रहे। कार्यक्रम में भाजपा जिला अध्यक्ष गिरीश जोशी, जिला पंचायत अध्यक्ष जितेंद्र प्रसाद, विद्यालय प्रबंधक रणजीत सिंह, सुरेश सुयाल, धीरज सिंह बिष्ट, पूर्ण चंद्र जोशी, मुकुल कांडपाल, उप जिलाधिकारी खुशबू, कुंदन सिंह पुजारा आदि उपस्थित रहे।
खेल मैदान का निरीक्षण किया
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने निर्माणाधीन खेल मैदान का निरीक्षण किया। उन्होंने कार्यदायी संस्था के अधिकारियों से कहा कि पूर्ण गुणवत्ता के साथ निश्चित समय अवधि में इस खेल मैदान को तैयार करें। यह काम इस वर्ष के अंत तक पूरा हो जाना चाहिए। खेल मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिभाओं को निखार कर राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में यह खेल मैदान बड़ी भूमिका निभाएंगे।
भारत–श्रीलंका साझेदारी के तहत पुनर्वास और पुनर्निर्माण पर हुई महत्वपूर्ण बातचीत
कोलंबो। श्रीलंका में चक्रवाती तूफान दित्वाह ने भीषण तबाही मचाते हुए भारी जन–धन की हानि की है। ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक 486 लोगों की मौत, 341 लोग लापता, और हजारों परिवार विस्थापित हो गए हैं। तूफान के बाद आई भीषण बाढ़ और लगातार हो रहे भूस्खलन ने राहत-बचाव कार्यों को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। इस गंभीर स्थिति के बीच भारत ने मानवीय आधार पर तत्काल सहायता बढ़ाते हुए श्रीलंका के पुनर्निर्माण प्रयासों में सहयोग देने की घोषणा की है।
भारत की मदद पर चर्चा
श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त संतोष झा ने शुक्रवार को आवास और निर्माण मंत्री सुसील रानासिंघे से मुलाकात कर तूफान से हुई तबाही, राहत कार्यों की प्रगति और आगे की आवश्यकताओं पर विस्तृत चर्चा की। उच्चायुक्त ने बताया कि भारत श्रीलंका के पुनर्वास और पुनर्निर्माण अभियानों में हर संभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।
उच्चायुक्त संतोष झा ने एक्स (X) पर साझा पोस्ट में कहा कि चर्चा के दौरान दोनों देशों के बीच आवास निर्माण और पुनर्निर्माण क्षेत्र में विकास सहयोग को मजबूत करने के विकल्पों पर भी विचार किया गया।
भीषण तबाही के आँकड़े
श्रीलंका के आपदा प्रबंधन विभाग की शुक्रवार सुबह जारी रिपोर्ट के अनुसार:
486 लोगों की मौत
341 लोग लापता
2,303 घर पूरी तरह ध्वस्त
52,489 घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त
तूफान की मार से प्रभावित क्षेत्रों में अभी भी जलभराव, भूस्खलन और सड़क संपर्क बाधित होने की स्थिति बनी हुई है।
भारत का राहत अभियान जारी
भारत, ऑपरेशन सागर बंधु के तहत श्रीलंका के लिए बड़े पैमाने पर मानवीय सहायता भेज रहा है। इसमें हवाई, समुद्री और जमीनी मार्गों से राहत सामग्री, चिकित्सा सहायता, खाद्य पैकेट, पानी और अन्य आवश्यक संसाधन पहुंचाए जा रहे हैं। भारतीय टीमों द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल राहत और पुनर्वास कार्यों को तेज़ी से संचालित किया जा रहा है।
नए विषयों से बढ़ेगा युवाओं का दायरा, मजबूत होगी स्वास्थ्य सेवाएँ, पैरामेडिकल तथा Allied Health शिक्षा में आएगी एकरूपता, पंजीकरण एवं लाइसेंसिंग प्रक्रिया होगी सरल और पारदर्शी
हमारा लक्ष्य है कि उत्तराखंड गुणवत्ता–आधारित स्वास्थ्य शिक्षा और हेल्थकेयर स्किल डेवलपमेंट का मॉडल बनकर उभरे- डॉ. आर. राजेश कुमार
देहरादून। उत्तराखंड में स्वास्थ्य शिक्षा को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप आधुनिक, पारदर्शी और रोजगारोन्मुख बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के स्पष्ट निर्देशों और दूरदर्शी नेतृत्व और स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय सहबद्ध और स्वास्थ्य देखरेख वृत्ति आयोग अधिनियम–2021 (National Commission for Allied and Healthcare Professions Act – 2021) के तहत उत्तराखंड राज्य सहबद्ध एवं स्वास्थ्य देखरेख परिषद के गठन की प्रक्रिया को तेजी देने हेतु सचिवालय में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने की।
बैठक की शुरुआत में स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय और आपदा–संवेदनशील राज्य में आधुनिक, प्रशिक्षित और प्रमाणित allied health workforce का विकास अत्यंत आवश्यक है। परिषद के गठन से न केवल शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता बढ़ेगी बल्कि देशभर में प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने में उत्तराखंड अग्रणी भूमिका निभाएगा।
परिषद गठन पर विस्तृत चर्चा, चयन समिति के गठन का निर्णय
बैठक में परिषद के गठन, उसकी संरचना, भविष्य की आवश्यकताओं और कार्य प्रणालियों पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। यह तय किया गया कि परिषद के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति के लिए “तलाश–सह–चयन समिति” बनाई जाएगी, जो निर्धारित योग्यताओं और अनुभवों के आधार पर नामों का चयन करेगी। स्वास्थ्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परिषद के सुचारू संचालन के लिए प्रारंभिक बजट, कार्यालय संरचना, तकनीकी सहायता और मानव संसाधन की उपलब्धता तुरंत सुनिश्चित की जाए, ताकि परिषद अपने दायित्वों का निर्वहन शीघ्र आरंभ कर सके।
वर्तमान में राज्य में पैरामेडिकल शिक्षा उत्तराखंड पैरामेडिकल अधिनियम–2009 और स्टेट मेडिकल फैकल्टी के माध्यम से संचालित होती है। यहाँ स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर 22 विषयों के पाठ्यक्रम चल रहे हैं। राष्ट्रीय अधिनियम लागू होने के बाद इन सभी पाठ्यक्रमों को और अधिक मानकीकृत, रोजगारोन्मुख, और कौशल आधारित बनाया जाएगा। नए अधिनियम में कुल 10 श्रेणियों में 56 प्रकार की स्वास्थ्य सेवाओं को मान्यता दी गई है। इससे विद्यार्थियों को न सिर्फ व्यापक करियर अवसर प्राप्त होंगे, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग्यता को उच्च पहचान मिलेगी।
मजबूत होगी स्वास्थ्य सेवाएँ
बैठक में विशेषज्ञों ने बताया कि अधिनियम के तहत कई नए और महत्वपूर्ण विषय शामिल होंगे—
पोषण विज्ञान, स्वास्थ्य सूचना प्रबंधन, क्लिनिकल साइकोलॉजी, डायलिसिस तकनीशियन, एनेस्थीसिया एवं ऑपरेशन थिएटर तकनीशियन, आपातकालीन चिकित्सा तकनीशियन आदि।
इन विषयों के शामिल होने से राज्य के युवाओं को विस्तृत करियर विकल्प, निजी और सरकारी क्षेत्र में बेहतर प्लेसमेंट, तथा शोध और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं में अवसर मिलेंगे। अधिकारियों ने कहा कि यह कदम उत्तराखंड को स्वास्थ्य शिक्षा और allied health services के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करेगा और भविष्य में राज्य एक “हेल्थ एजुकेशन हब” के रूप में स्थापित होगा।
उत्तराखंड सरकार स्वास्थ्य शिक्षा को सुदृढ़, सुगठित और राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य सहबद्ध एवं स्वास्थ्य देखरेख परिषद का गठन हमारे लिए परिवर्तनकारी कदम साबित होगा। इससे पैरामेडिकल तथा allied health शिक्षा में एकरूपता आएगी, पाठ्यक्रमों का मानकीकरण होगा और पंजीकरण एवं लाइसेंसिंग प्रक्रिया बेहद सरल और पारदर्शी बनेगी। नए अधिनियम के तहत कई उभरते विषय और विशेषज्ञताएँ शामिल होंगी, जिससे युवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने का अवसर मिलेगा। हमारा लक्ष्य है कि उत्तराखंड गुणवत्ता–आधारित स्वास्थ्य शिक्षा और हेल्थकेयर स्किल डेवलपमेंट का मॉडल राज्य बनकर उभरे।
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार
सर्दियों का मौसम अस्थमा से पीड़ित लोगों के लिए हर साल नई चुनौतियां लेकर आता है। तापमान गिरते ही अस्थमा के अटैक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार ठंडी और शुष्क हवा सांस की नलियों को संकुचित कर देती है, जिससे उनमें सूजन बढ़ने लगती है। इसके अलावा जीवनशैली से जुड़ी कुछ सामान्य गलतियां भी अस्थमा को गंभीर रूप से ट्रिगर करती हैं।
अस्थमा मरीजों की सांस नलियां पहले से ही अत्यंत संवेदनशील होती हैं, ऐसे में हल्का सा ट्रिगर भी तीव्र प्रतिक्रिया उत्पन्न कर सकता है। चिकित्सकों का कहना है कि सर्दियों में इन छोटी-छोटी आदतों पर ध्यान न देने से अस्थमा अनियंत्रित हो सकता है, जो लंबे समय में फेफड़ों को स्थायी क्षति पहुंचाने तक का जोखिम पैदा करता है।
प्रदूषण और संक्रमण बन रहे मुख्य कारक
सर्दियों के महीनों में वायु प्रदूषण तेजी से बढ़ता है, जो अस्थमा के प्रमुख ट्रिगर्स में से एक है। विशेषज्ञों के अनुसार उच्च AQI में बिना मास्क के बाहर निकलना, घर के अंदर धूपबत्ती या मच्छर कॉइल का उपयोग करना फेफड़ों में सीधे सूजन बढ़ाता है। वहीं सर्दी-ज़ुकाम और फ्लू जैसे वायरल संक्रमण भी अस्थमा को गंभीर कर देते हैं।
अचानक तापमान परिवर्तन से बढ़ता जोखिम
ठंड में गर्म कमरे से सीधे बाहर निकलना या बहुत गर्म पानी से नहाकर तुरंत ठंडी हवा में जाना सांस नलियों को झटका देता है, जिससे अटैक का खतरा बढ़ जाता है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि बाहर निकलते समय नाक और मुंह को स्कार्फ या मास्क से ढकना जरूरी है।
इन्हेलर और दवाओं में अनियमितता से स्थिति बिगड़ती है
अस्थमा से पीड़ित कई लोग लक्षणों में सुधार महसूस होते ही निवारक इन्हेलर या नियमित दवाओं का उपयोग कम कर देते हैं। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि ऐसा करने से फेफड़ों की सूजन फिर से बढ़ सकती है और मामूली प्रदूषण या ठंड भी गंभीर अटैक का कारण बन सकती है।
कम पानी पीना और व्यायाम की कमी भी हानिकारक
सर्दियों में पानी का सेवन कम होने से डिहाइड्रेशन होता है, जिससे बलगम गाढ़ा होकर सांस की नलियों में जमने लगता है। घर के अंदर हल्का व्यायाम, योग या वॉक न करने से फेफड़ों की क्षमता भी प्रभावित होती है।
नोट: यह रिपोर्ट मेडिकल रिसर्च और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर तैयार की गई है।
(साभार)
न्यायालय ने विवादित प्रश्न हटाकर संशोधित परिणाम व नई मेरिट सूची जारी करने का दिया आदेश
नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य सिविल प्रवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा–2025 की प्रस्तावित मुख्य परीक्षा पर फिलहाल रोक लगा दी है। छह और नौ दिसंबर को होने वाली यह परीक्षा, प्रारंभिक परीक्षा में पूछे गए गलत प्रश्नों को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के बाद स्थगित की गई है। अदालत ने लोक सेवा आयोग को निर्देश दिया है कि वह विवादित प्रश्न को हटाकर संशोधित परिणाम और नई मेरिट सूची जारी करे।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति आलोक महरा की खंडपीठ ने की। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि सामान्य अध्ययन का एक प्रश्न गलत पाया गया है, इसलिए इसे प्रीलिम्स से हटाकर परिणाम दोबारा जारी किया जाए। न्यायालय ने आयोग को यह भी निर्देश दिया कि वर्ष 2022 के रेगुलेशन के अनुसार नई मेरिट सूची तैयार की जाए।
याचिका कुलदीप कुमार सहित अनेक अभ्यर्थियों द्वारा दायर की गई थी, जिन्होंने प्रारंभिक परीक्षा के प्रश्नों की शुद्धता पर सवाल उठाए थे। यह परीक्षा डिप्टी कलेक्टर, पुलिस उपाधीक्षक, वित्त अधिकारी, सहायक आयुक्त राज्य कर सहित 120 से अधिक पदों के लिए आयोजित की गई थी। आठ अक्टूबर को जारी परिणाम में लगभग 1200 अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित किया गया था।
याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि प्रारंभिक परीक्षा में सामान्य अध्ययन का एक प्रश्न गलत तरीके से तैयार किया गया था, जिससे परीक्षा परिणाम प्रभावित हुआ। इसी बिंदु पर लोक सेवा आयोग ने भी न्यायालय में स्वीकार किया कि एक प्रश्न त्रुटिपूर्ण था और उसे हटाया जाना चाहिए। कोर्ट ने इस आधार पर मुख्य परीक्षा पर अस्थायी रोक लगा दी है। अब संशोधित प्रीलिम्स परिणाम और मेरिट सूची जारी होने के बाद आगे की परीक्षा प्रक्रिया तय की जाएगी।
विवादित प्रश्नों पर हाईकोर्ट का निर्देश
याचिकाकर्ताओं ने कुल चार प्रश्नों को गलत बताया था। कोर्ट ने आदेश दिया कि प्रश्न संख्या 70 को सीधे हटाया जाए, जबकि अन्य तीन प्रश्नों की जांच एक विशेषज्ञ समिति (एक्सपर्ट कमेटी) द्वारा की जाएगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक विवादित प्रश्नों की जांच पूरी नहीं होती और मेरिट सूची शुद्ध तरीके से दोबारा तय नहीं की जाती, तब तक मुख्य परीक्षा आयोजित करना उचित नहीं होगा।
तेलुगु सुपरस्टार नंदमुरी बालकृष्ण की बहुचर्चित फिल्म ‘अखंडा 2’ की रिलीज़ को लेकर देर रात बड़ा अपडेट सामने आया। आज यानी 5 दिसंबर को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली फिल्म के प्रीमियर शो पहले ही रद्द कर दिए गए थे, और अब मेकर्स ने आधिकारिक रूप से घोषणा की है कि फिल्म की रिलीज़ भी अनिश्चितकाल के लिए टाल दी गई है। अचानक किए गए इस फैसले से फैंस के बीच निराशा साफ दिखाई दे रही है।
देर रात एक्स पर जारी किए गए बयान में प्रोडक्शन टीम ने कहा कि अनिवार्य परिस्थितियों के चलते फिल्म निर्धारित तारीख पर रिलीज़ नहीं की जा सकती। पोस्ट में लिखा गया—
“भारी मन से सूचित करना पड़ रहा है कि ‘अखंडा 2’ अपनी तय रिलीज़ डेट पर नहीं आ पाएगी। हम समझते हैं कि इससे दर्शकों को कितनी निराशा होगी, लेकिन हम समस्या के समाधान के लिए लगातार प्रयासरत हैं। जल्द ही सकारात्मक अपडेट साझा किया जाएगा।”
प्रीमियर शो रद्द होने के बाद बढ़ी चिंता
फिल्म के प्रीमियर शो तकनीकी समस्याओं के कारण रद्द कर दिए गए थे। मेकर्स ने बयान जारी करते हुए कहा था कि उन्होंने आयोजन बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन कुछ स्थितियां नियंत्रण से बाहर थीं। प्रीमियर कैंसिल होने के कुछ घंटे बाद ही रिलीज़ डेट टलने का ऐलान होने से फैंस और अधिक असमंजस में पड़ गए।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद स्थगित हुई रिलीज़
रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म की रिलीज़ मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश के बाद रोकी गई है। यह रोक इरोस इंटरनेशनल मीडिया लिमिटेड की उस अपील के चलते लगी है, जो एक पुराने मध्यस्थता मामले से जुड़ी है। इस विवाद में इरोस के पक्ष में आए फैसले के तहत लगभग 28 करोड़ रुपये और 14 प्रतिशत ब्याज का भुगतान किया जाना था। कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद फिल्म की स्क्रीनिंग पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई।
‘अखंडा’ के सीक्वल का इंतजार जारी
‘अखंडा 2’ निर्देशक बोयापति श्रीनु की वर्ष 2021 की सुपरहिट फिल्म ‘अखंडा’ का सीक्वल है। फिल्म में बालकृष्ण के साथ संयुक्ता, आधी पिनिशेट्टी और हर्षाली मल्होत्रा अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। हाल ही में जारी ट्रेलर को दर्शकों से मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली थी।
फिलहाल मेकर्स ने नई रिलीज़ डेट का ऐलान नहीं किया है और फैंस आधिकारिक अपडेट का इंतजार कर रहे हैं।
(साभार)
चंपावत के शेरा घाट में हुई जीप दुर्घटनाग्रस्त, पांच लोग घायल
चंपावत। गंगोलीहाट क्षेत्र में देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया, जिसमें बारातियों से भरी जीप के खाई में गिरने से एक महिला समेत पांच लोगों की मौत हो गई। वहीं पांच अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा शेरा घाट के पास लगभग ढाई बजे हुआ, जब पाटी चंपावत से लौट रही बाराती जीप अचानक अनियंत्रित होकर नीचे जा गिरी।
हादसे की जानकारी मिलते ही पुलिस व प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और राहत–बचाव कार्य शुरू किया। मृतकों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। घायलों में चार को लोहाघाट अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि एक की गंभीर हालत देखते हुए उसे हायर सेंटर रेफर किया गया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
विभागीय नियमावली के तहत ही होगी नर्सिंग अधिकारियों की भर्ती
देहरादून। चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग में नर्सिंग अधिकारियों की भर्ती को लेकर विपक्ष प्रदेश के युवाओं को गुमराह कर रहा है। जबकि उक्त विभागों में नर्सिंग अधिकारियों की भर्ती उत्तराखंड अधीनस्थ नर्सिंग (अराजपत्रित) सेवा (संशोधन) नियमवाली, 2022 में निहित प्राविधानों के अनुरूप राज्य चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से की जा रही है।
विपक्षी दलों द्वारा लगाये गये आरोपों पर पलटवार करते हुये सूबे के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत कहा कि विपक्षी दलों ने हमेशा प्रदेश के युवाओं को बरगलाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की रोजगारपरक नीतियों से विपक्षी दल परेशान हैं, जिसके चलते वह अब युवाओं को गुमराह करने में जुटे हैं। डॉ. रावत ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के बेराजगार युवाओं को सरकारी नौकरियों में लगातार अवसर दे रही है। जिसे क्रम में स्वास्थ्य विभाग में 103 तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग में 587 पदों पर राज्य चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से नर्सिंग अधिकारियों की भर्ती निकाली गई है। उन्होंने कहा कि नर्सिंग अधिकारियों की भर्ती उत्तराखंड अधीनस्थ नर्सिंग (अराजपत्रित) सेवा (संशोधन) नियमवाली, 2022 में निहित प्राविधानों के अनुरूप पारदर्शी तरीके से की जायेगी। पूर्व में चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभागों में की गई नर्सिंग अधिकारियों की भर्ती के लिये राज्य सरकार ने तत्कालीन आवश्यकताओं व लंबे समय से विभाग में भर्ती न होने उपजी परिस्थितियों तथा युवाओं की मांग पर लिखित परीक्षा में छूट के लिये एकबार शिथिलता प्रदान की गई थी। जिसके तहत लिखित परीक्षा के स्थान पर वर्षवार मेरिट के आधार पर पारदर्शिता से भर्ती की गई। जिसमें प्रदेश के युवाओं का चयन हुआ था न कि बाहरी राज्यों के व्यक्तियों का।डॉ रावत ने बताया कि यह प्रक्रिया सिर्फ एक बार के लिये की गई। जबकि अब आगे की नर्सिंग भर्ती परीक्षा पूर्व की भांति नियमावली के अनुरूप आयोजित की जायेगी। उन्होंने बताया कि युवाओं की मांग पर ही चयन बोर्ड को नई भर्ती का अधियाचन भेजा गया है।
विरोध की बजाय अपने कार्यकाल की उपलब्धि गिनायें विपक्ष- डॉ. रावत
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रावत ने विपक्षी पार्टी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के उस बयान को निराशा एवं हताशा का द्योतक बताया जिसमें वह नर्सिंग अधिकारी भर्ती को लेकर सरकार पर बिना जानकारी के मनगढ़ंत आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों के नेताओं के पास जनता के सामने अपनी उपलब्धि गिनाने के लिये कुछ भी नहीं है लिहाजा विपक्ष सरकार की उपब्धियों से बौखलाकर युवाओं के साथ ही आम जनता को भी गुमराह कर सत्ता पर काबिज होना चाहती है। डॉ. रावत ने कहा कि इतिहास गवाह है कि कोई भी राजनैतिक दल बिना अपनी किसी उपलब्धि के सत्तापक्ष की आलोचना करके अपने मकसद में कामयाब नहीं हुआ है। उन्होंने विपक्षी दलों को ललकारते हुये कहा कि अगर वह सही मायने में उत्तराखंड की जनता के हितैषी हैं तो पृथक राज्य गठन के बाद कांग्रेस सरकार द्वारा किये गये कार्यों को जनता के समक्ष रख कर स्वस्थ राजनीति का उदाहरण पेश करें। डॉ. रावत ने कहा कि प्रदेश की जनता काफी समझदार और शिक्षित है जो भती-भांति जानती है कि कौन राजनीतिक दल उनका हितैषी है। उन्होंने कहा कि विपक्ष सरकार के जनकल्याणकारी नितियों व विकास कार्यों से घबरा गया है ऐसे में झूटे आरोप लगाना विपक्ष की नियति बन गई है।
देहरादून। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध प्लॉटिंग और निर्माणों के खिलाफ चलाया जा रहा सख्त अभियान लगातार जारी है। राजधानी के विकास को व्यवस्थित, सुरक्षित और नियमानुसार बनाए रखने के उद्देश्य से एमडीडीए रोजाना विभिन्न क्षेत्रों में निरीक्षण और कार्रवाई कर रहा है। अवैध कॉलोनाइज़र और नियमों को दरकिनार कर भूमि का दुरुपयोग कर रहे व्यक्तियों पर कार्रवाई की जा रही है, ताकि भविष्य में प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध और असंगठित विकास न बढ़ सके। एमडीडीए का यह अभियान न केवल शहर के सुनियोजित विकास को दिशा दे रहा है, बल्कि आम नागरिकों के हितों और सुरक्षा को भी सुनिश्चित कर रहा है।
विकासनगर, शिमला बाईपास सहित कई क्षेत्रों में बड़ी कार्रवाई
मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण क्षेत्रान्तर्गत विकसित नगर, शिमला बाईपास और आसपास के ग्रामीण इलाकों में अवैध प्लॉटिंग पर एमडीडीए की टीम ने कार्रवाई जारी रखी। होरोवाला रोड, छरबा, देहरादून में मदन सिंह नेगी द्वारा लगभग 04-05 बीघा भूमि पर की जा रही अवैध प्लॉटिंग का ध्वस्तीकरण किया गया। टीम में अवर अभियंता सिद्धार्थ सेमवाल, अमन पाल, सुपरवाइज़र तथा पुलिस बल मौके पर मौजूद रहे।
शेरपुर सेलाकुई में 20 बीघा प्लॉटिंग पर ध्वस्तीकरण
बीते दिन बुधवार को प्राधिकरण क्षेत्रान्तर्गत शेरपुर सेलाकुई, देहरादून में की जा रही बड़ी अवैध प्लॉटिंग पर भी निर्णायक कार्रवाई हुई। नवीन गुप्ता व अन्य द्वारा लगभग 20 बीघा भूमि में की गई अनधिकृत प्लॉटिंग को ध्वस्त किया गया। कार्रवाई के दौरान अवर अभियंता नितेश राणा और सुपरवाइज़र मौके पर उपस्थित रहे तथा संपूर्ण कार्रवाई शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई।
उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी का बयान- एमडीडीए का उद्देश्य देहरादून और आसपास के क्षेत्रों को नियोजित तरीके से विकसित करना है। अवैध प्लॉटिंग और निर्माण न केवल शहर के स्वरूप को बिगाड़ते हैं, बल्कि नागरिकों के लिए भविष्य में गंभीर समस्याएँ भी पैदा करते हैं, जैसे मूलभूत सुविधाओं का अभाव, सड़क, बिजली, सीवर और जलापूर्ति की दिक्कतें। इसलिए प्राधिकरण द्वारा किसी भी प्रकार के अनधिकृत विकास को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हमने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि चाहे मामला छोटा हो या बड़ा, अवैध गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव से सीलिंग और ध्वस्तीकरण हो। यह अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा और पूरी पारदर्शिता के साथ चलाया जाएगा।
सचिव एमडीडीए मोहन सिंह बर्निया का बयान- एमडीडीए की टीम लगातार मैदानी स्तर पर निगरानी कर रही है। जहां भी अवैध प्लॉटिंग या निर्माण पाया जा रहा है, वहीं मौके पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। हमारा लक्ष्य क्षेत्र में व्यवस्थित, नियमसम्मत और सुरक्षित विकास सुनिश्चित करना है और इसके लिए कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
