धर्म - संस्कृति

अब घर बैठे मंगा सकते हैं बद्रीनाथ धाम का प्रसाद, ई-कॉमर्स कंपनी अमेज़न पर उपलब्ध है प्रसाद

कोरोना काल में बद्रीनाथ धाम के दर्शन नहीं कर सकने वाले श्रद्धालुओं के लिए अच्छी खबर है। उत्तराखंड सरकार ने श्रद्धालुओं को उनके घर तक भगवान का प्रसाद पहुंचाने की व्यवस्था की है। ई-कॉमर्स कम्पनी अमेज़न के माध्यम से देश-विदेश के श्रद्धालु ऑनलाइन बद्रीनाथ धाम का प्रसाद मंगा सकते हैं।

श्रद्धालुओं को घर तक बद्रीनाथ धाम का प्रसाद पहुंचाने के लिए स्थानीय जिला प्रशासन ने ई-कॉमर्स कंपनी अमेज़न से करार किया है। अमेज़न पर बदरीनाथ प्रसाद बॉक्स के नाम से प्रसाद उपलब्ध है। 

एक सरकारी विज्ञप्ति के मुताबिक अमेज़न के माध्यम से पंच बदरी प्रसाद बॉक्स में पवित्र पौराणिक सरस्वती नदी का जल, सुगन्धित बदरीश तुलसी, हर्बल धूप, बदरी गाय का घी उपलब्ध कराया जाएगा।

बद्रीनाथ धाम के प्रसाद में शामिल बदरी तुलसी को देवी लक्ष्मी का एक रूप माना जाता है। बद्रीनाथ मंदिर में दैनिक पूजा-आरती के समय इसे भगवान विष्णु को अर्पित किया जाता है। पवित्र सरस्वती नदी जो केवल बद्रीनाथ धाम में माणा गांव के निकट भीम पुल के पास दिखती है और इसके बाद अलकनंदा नदी में विलीन हो जाती है। इस नदी का पवित्र जल भी प्रसाद के साथ वितरित किया जायेगा।

इसके साथ ही बद्री सिक्का, जो श्री बद्रीनाथ जी का शिलालेख है, प्रसाद में शामिल है। प्रसाद बॉक्स में स्थानीय स्वयं सहायता समूहों द्वारा प्राकृतिक सामग्री के उपयोग से निर्मित सुगन्धित हर्बल धूप और उच्च हिमालयी क्षेत्रों में उगाए गए डेमस्क गुलाब के फूलों का शुद्व गुलाब जल भी उपलब्ध कराया जा रहा है।

चमोली की जिलाधिकारी स्वाति एस भदोरिया ने कहा कि बदरीनाथ प्रसाद को रंगीन सुन्दर डिजायन किए जूट के बैग और बाॅक्स में बेहतरीन पैकिंग की गई है।

बीते वर्ष स्थानीय लोगों को स्वरोजगार से जोड़ने की मंशा से स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से प्रसाद वितरण की योजना शुरू की गई थी। इसमें स्वयं सहायता समूहों द्वारा उत्पादित चौलाई के लड्डू और स्थानीय काश्तकारों द्वारा तैयार गुलाब जल, हर्बल धूप, बदरीश तुलसी, सरस्वती नदी का जल सहित अन्य वस्तुएं प्रसाद के रूप में बदरीनाथ धाम में स्टाॅल लगाकर बेचा जा रहा था।

मगर कोरोना संकट के चलते इस वर्ष बद्रीनाथ धाम की यात्रा ना के बराबर है। इस कारण जहाॅ श्रद्धालुओं को बदरीनाथ का प्रसाद नही मिल पा रहा है, वहीं स्वयं सहायता समूहों और काश्तकारों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसको देखते हुए जिला प्रशासन ने प्रसाद की ऑनलाइन बिक्री की योजना तैयार की और ऑनलाइन मार्केटिंग कंपनी अमेज़न से करार किया। 

Share Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *