मुख्यमंत्री धामी ने मुख्यमंत्री चैम्पियनशिप ट्रॉफी 2025-26 के समापन समारोह में किया प्रतिभाग
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को ननूरखेड़ा, देहरादून में मुख्यमंत्री चैम्पियनशिप ट्रॉफी 2025-26 के समापन समारोह में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने देहरादून जनपद को विजेता ट्रॉफी एवं 05 लाख रुपये का चेक प्रदान किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह भव्य समापन केवल एक प्रतियोगिता का अंत नहीं है, बल्कि उत्तराखंड के उज्ज्वल खेल भविष्य की नई शुरुआत है। खेल आयोजन आज हमारे गाँव-गाँव, न्याय पंचायतों और दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं को पहचान देने का एक सशक्त माध्यम बन चुका है। उत्तराखंड में खेल प्रतियोगिताएं अब जनचेतना का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड अब देवभूमि के साथ-साथ खेलभूमि भी बन चुका है। इस आयोजन में 11 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे खिलाड़ियों के खातों में भेजी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में आज भारत खेल जगत में नई ऊँचाइयों को छू रहा है। ‘खेलो इंडिया’ और ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ जैसे अभियानों के माध्यम से देश में खेलों की संस्कृति को नई ऊर्जा मिली है। देश में फिटनेस एक जन आंदोलन बन चुकी है। हमारी युवा पीढ़ी खेलों के प्रति नए उत्साह और समर्पण के साथ आगे बढ़ रही है। आज भारत ओलंपिक, पैरालंपिक, एशियाई खेलों और कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ऐतिहासिक प्रदर्शन कर रहा है। हमारे खिलाड़ियों ने रिकॉर्ड संख्या में पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया है और कई खेलों में भारत ने विश्व पटल पर अपनी मजबूत पहचान स्थापित की है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में खेलों को नई प्राथमिकता मिली है। खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, संसाधन और सम्मान मिला है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में खेलों को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दे रही है। उत्तराखंड को देवभूमि के साथ खेलभूमि के रूप में स्थापित करने की दिशा में राज्य सरकार निरंतर आगे बढ़ी है। 38वें राष्ट्रीय खेलों का सफल और भव्य आयोजन इसका सशक्त प्रमाण बना है, जिसने उत्तराखंड का मान पूरे देश में बढ़ाया है। इन खेलों में हमारे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों ने 103 पदक जीतकर पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर 7वाँ स्थान हासिल किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड आधुनिक और विश्वस्तरीय खेल इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान बना रहा है। हमारे स्टेडियम, प्रशिक्षण केंद्र और सुविधाएँ अब राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की मेजबानी के लिए भी सक्षम हो चुकी हैं। सरकार द्वारा राज्य में स्पोर्ट्स लेगेसी प्लान पर कार्य किया जा रहा है, जिसके तहत प्रदेश के आठ प्रमुख शहरों में 23 खेल अकादमियाँ स्थापित की जाएँगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की नई खेल नीति में खिलाड़ियों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए अनेक प्रावधान किए गए हैं। हल्द्वानी में प्रदेश की पहली स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी बनाई जा रही है। इसमें खिलाड़ी आधुनिक कोचिंग, खेल विज्ञान और उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे। मुख्यमंत्री खिलाड़ी प्रोत्साहन योजना और मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना के माध्यम से युवा खिलाड़ियों को मासिक छात्रवृत्ति के साथ-साथ खेल उपकरण खरीदने के लिए आर्थिक सहायता भी प्रदान की जा रही है। सरकार खिलाड़ियों के साथ-साथ उन्हें तैयार करने वाले प्रशिक्षकों का भी पूरा ध्यान रख रही है। उनके मानदेय और प्रोत्साहन राशि में बढ़ोतरी की गई है, ताकि वे और बेहतर ढंग से नई प्रतिभाओं को आगे बढ़ा सकें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को सम्मान देने के लिए “उत्तराखंड खेल रत्न”, “द्रोणाचार्य पुरस्कार” और “हिमालय खेल रत्न” जैसे सम्मान भी दिए जा रहे हैं, जिससे खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों की मेहनत को सही पहचान मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष से खेल महाकुंभ तथा अन्य राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को सरकारी सेवाओं में आवेदन करने पर 4 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया जाएगा।
खेल मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि 23 नवम्बर 2025 से न्याय पंचायत स्तर से शुरू हुई खेल प्रतियोगिताओं का समापन 18 फरवरी 2026 को मुख्यमंत्री चैम्पियनशिप ट्रॉफी के साथ किया जा रहा है। इसमें हर खिलाड़ी और जनप्रतिनिधि को जोड़ा गया। इसमें 01 लाख 62 हजार से अधिक खिलाड़ियों ने प्रतिभाग किया। उन्होंने कहा कि इस आयोजन में 26 खेल स्पर्धाएँ शामिल की गईं। आगामी राष्ट्रीय खेलों, राष्ट्रमंडल खेलों और 2036 के ओलंपिक खेलों के लिए इस तरह के आयोजन खेल प्रतिभाओं को आगे लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।
इस अवसर पर विधायक उमेश शर्मा काऊ, विशेष प्रमुख सचिव खेल अमित सिन्हा, खेल निदेशक डॉ. आशीष चौहान, जिलाधिकारी देहरादून सविन बंसल, मुख्य विकास अधिकारी देहरादून अभिनव शाह एवं खेल विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री ने खाटू श्याम धाम में पूजा-अर्चना कर प्रदेश की खुशहाली की कामना की
विकासनगर। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को विकासनगर, देहरादून में खाटू श्याम धाम में प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने श्री खाटू श्याम धाम में पूजा-अर्चना कर प्रदेश में खुशहाली की कामना की।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बाबा खाटू श्याम के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव पर सभी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि बाबा खाटू श्याम की महिमा अपरंपार है। उन्होंने कहा कि बाबा खाटू श्याम आस्था के आराध्य होने के साथ हर टूटे हुए मन को संबल देने वाले हारे के सहारे हैं। जो भी सच्चे मन से बाबा को पुकारता है, बाबा उसकी झोली कृपा से भर देते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा श्याम के भजन-कीर्तन, प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव और धार्मिक आयोजनों में उमड़ती श्रद्धालुओं की अपार भीड़ इस बात का जीवंत प्रमाण है कि बाबा हर हृदय में विराजमान हैं। यह दिव्य प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव श्रद्धालुओं के लिए सदैव अविस्मरणीय रहेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा श्याम की कृपा से वे राज्य के मुख्य सेवक के रूप में प्रदेश की जनता की सेवा कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने अपना संकल्प दोहराते हुए कहा कि जनता के विश्वास और स्नेह को सदैव बनाए रखते हुए वे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से राज्य की सेवा करते रहेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए कौशल के साथ समर्पण भी आवश्यक है। यदि हम किसी कार्य को समर्पित भाव से करेंगे तो उसमें निश्चित ही सफलता प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि हमारे जीवन में जो कुछ भी होता है, वह भगवान की कृपा से होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाबा केदारनाथ धाम से 21वीं सदी के तीसरे दशक को उत्तराखंड का दशक बताया था, जिस पर राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही है।
इस अवसर पर विधायक मुन्ना सिंह चौहान, भाजपा जिला अध्यक्ष मीता सिंह, नगर पालिका अध्यक्ष नीरू देवी, कुलदीप कुमार एवं अन्य लोग मौजूद रहे।
देहरादून जनपद ने जीती पहली मुख्यमंत्री चैंपियनशिप ट्रॉफी
मुख्यमंत्री और खेल मंत्री ने ट्रॉफी व 5 लाख का चेक देकर किया सम्मानित
देहरादून। ननूरखेड़ा मिनी स्टेडियम में मुख्यमंत्री चैंपियनशिप ट्रॉफी 2025-26 के राज्य स्तरीय मुकाबले में देहरादून जनपद की टीम विजेता बनी है। विजेता टीम को प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने ट्रॉफी एवं 5 लाख रुपये का चेक देकर सम्मानित किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इस वर्ष प्रतियोगिता को नए प्रारूप में आयोजित किया गया, जो न्याय पंचायत स्तर से शुरू होकर विधानसभा और संसदीय क्षेत्र स्तर होते हुए राज्य स्तर तक पहुंची। उन्होंने कहा कि इस पहल से प्रदेश को नए चैंपियन मिले हैं और ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाओं को बड़ा मंच मिला है। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि पदक विजेता खिलाड़ियों को सरकारी नौकरियों में 4 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलेगा, जिससे युवाओं का मनोबल बढ़ेगा।
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि प्रदेश सरकार खिलाड़ियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा आउट ऑफ टर्न नौकरी और सरकारी सेवाओं में आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण निर्णय पहले ही लिए जा चुके हैं। अब प्रदेश में अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाएं और आधारभूत ढांचा विकसित किया गया है, जिससे देवभूमि उत्तराखंड खेल भूमि के रूप में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
खेल मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि बीते 4 साल में प्रदेश सरकार ने पदक विजेता खिलाड़ियों के लिए आउट ऑफ टर्न नौकरी, सरकारी नौकरियों में 4% रिजर्वेशन, युवा खिलाड़ियों को छात्रवृत्ति, प्रदेश का पहला खेल विश्वविद्यालय और लोहाघाट में गर्ल्स स्पोर्ट्स कॉलेज स्थापित करने जैसे फैसले लिए हैं। कुल मिलाकर 4 साल का यह समय प्रदेश के खिलाड़ियों के लिए स्वर्णिम काल कहा जा सकता है।
खेल मंत्री रेखा आर्या ने आगामी 39वें राष्ट्रीय खेलों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्रतियोगिता खिलाड़ियों के लिए बड़ी तैयारी का मंच है। साथ ही वर्ष 2030 में भारत में प्रस्तावित कॉमनवेल्थ गेम्स और 2036 में संभावित ओलंपिक मेजबानी को ध्यान में रखते हुए खिलाड़ियों को अभी से तैयारी करनी होगी।
कार्यक्रम में विधायक उमेश शर्मा काऊ, विशेष प्रमुख खेल सचिव अमित सिन्हा, खेल निदेशक आशीष चौहान, अपर निदेशक अजय अग्रवाल तथा जिलाधिकारी देहरादून सविन बंसल सहित प्रदेश के सभी जनपदों से आए हजारों खिलाड़ी उपस्थित रहे।
धमकी भरा ई-मेल मिलने से कोर्ट में मचा हड़कंप
देहरादून। दून जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद कोर्ट परिसर में हड़कंप मच गया। धमकी भरा ई-मेल जिला जज कार्यालय को प्राप्त होते ही सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गईं। सूचना मिलते ही एसएसपी सिटी प्रमेंद्र डोबाल पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और तत्काल एहतियाती कार्रवाई शुरू की गई।
सुरक्षा कारणों से सभी न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं और कर्मचारियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया, जबकि पूरे कोर्ट परिसर को खाली कराकर चारों ओर बैरिकेडिंग कर दी गई। पुलिस और बम निरोधक दस्ते ने परिसर की सघन तलाशी ली।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जिस ई-मेल के जरिए धमकी दी गई, उसके पीछे किसी पाकिस्तानी संगठन का नाम इस्तेमाल किए जाने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि पुलिस और खुफिया एजेंसियां सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच कर रही हैं। धमकी की खबर फैलते ही कोर्ट परिसर और आसपास के इलाकों में अफरातफरी का माहौल बन गया।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनमोहन कंडवाल ने बताया कि जिला जज कार्यालय को धमकी भरा मेल मिला है और पुलिस टीम मामले की जांच में जुटी हुई है।
गौरतलब है कि हाल के दिनों में उत्तराखंड के कई जिलों में बम से उड़ाने की धमकियां मिल चुकी हैं। इससे पहले हरिद्वार, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, टिहरी और नैनीताल के जिला न्यायालयों को भी इसी तरह की धमकियां मिली थीं। हालांकि अब तक की जांच में कहीं भी कोई संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई है।
पुलिस इसे असामाजिक तत्वों की शरारत मानकर भी जांच कर रही है। फिलहाल एहतियात के तौर पर सभी मामलों की गहन जांच जारी है और सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया गया है।
अनियमितता की शिकायत पर डीएम ने संयुक्त मजिस्ट्रेट से करवाई जांच, दवा माफियाओं पर जिला प्रशासन का वार
देहरादून। जनता दर्शन में सामने आई शिकायत पर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। बीते माह 4 दिसंबर 2025 को जिलाधिकारी सविन बंसल की अध्यक्षता में आयोजित जनता दर्शन में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) रायपुर स्थित प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र को लेकर गंभीर शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में केंद्र पर दवाओं की अनुपलब्धता और केंद्र संचालक द्वारा पास ही निजी मेडिकल स्टोर चलाए जाने का आरोप लगाया गया था।
शिकायत के संज्ञान में आने के बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर संयुक्त मजिस्ट्रेट राहुल कुमार और वरिष्ठ औषधि निरीक्षक की संयुक्त टीम ने मौके पर जांच की। जांच में कई गंभीर अनियमितताएं उजागर हुईं।
जांच के दौरान पाया गया कि जन औषधि केंद्र के संचालक बलवीर सिंह रावत द्वारा सीएचसी परिसर के भीतर जन औषधि केंद्र और लगभग 25 मीटर की दूरी पर ‘मै० रावत मेडिकोज’ नाम से निजी मेडिकल स्टोर का संचालन किया जा रहा था, जिससे स्पष्ट रूप से हितों के टकराव की स्थिति बनी। इसके अलावा जन औषधि केंद्र में दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पीएमबीआई के आधिकारिक सॉफ्टवेयर का उपयोग नहीं किया जा रहा था और बिलिंग कार्य मैनुअल तरीके से किया जा रहा था।
जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि दवाओं की मांग और आपूर्ति की प्रक्रिया नियमानुसार पोर्टल के माध्यम से न होकर अनौपचारिक रूप से व्हाट्सएप के जरिए की जा रही थी। दवाओं की कमी दूर करने के लिए निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया, जिसके चलते मरीजों को सस्ती जन औषधि दवाओं के बजाय बाहर स्थित निजी मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदने को मजबूर होना पड़ा। इससे निजी लाभ की स्थिति भी उजागर हुई।
इसके साथ ही स्टॉक रजिस्टर और इन्वेंट्री का रख-रखाव भी अव्यवस्थित पाया गया। लाइसेंस निर्गमन और नवीनीकरण से जुड़े दस्तावेजों में भी कई विसंगतियां मिलीं, जिनमें एक ही रेफ्रिजरेटर बिल का दोबारा उपयोग, एसी की कार्यशील स्थिति को लेकर गलत घोषणा और किरायानामा अवधि समाप्त होने के बाद अद्यतन अनुबंध अपलोड न किया जाना शामिल है।
इन सभी अनियमितताओं के आधार पर वरिष्ठ औषधि निरीक्षक ने जनहित में सीएचसी रायपुर स्थित प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र और निकटवर्ती निजी मेडिकल स्टोर ‘मै० रावत मेडिकोज’ के औषधि विक्रय लाइसेंस निरस्त किए जाने की संस्तुति की है।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आम जनता को सस्ती और सुलभ दवाएं उपलब्ध कराना उसकी प्राथमिकता है और इस दिशा में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
समय पर किताबें मिलने से पढ़ाई होगी आसान और सुचारु
देहरादून। राज्य में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम पहल। पहली बार नया शिक्षा सत्र शुरू होने से पहले ही छात्र-छात्राओं को मुफ्त पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराने की तैयारी है। डॉ. मुकुल सती के अनुसार विभाग का लक्ष्य है कि 28 मार्च तक सभी स्कूलों में किताबों की आपूर्ति सुनिश्चित कर दी जाए।
अब तक हर वर्ष सरकारी और अशासकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों को मुफ्त किताबें देने की व्यवस्था तो रही है, लेकिन अधिकांश मामलों में किताबें समय पर नहीं पहुंच पाती थीं। कई बार कक्षा 1 से 12 तक के छात्र-छात्राओं को शिक्षा सत्र शुरू होने के छह से सात महीने बाद तक भी पुस्तकों का इंतजार करना पड़ता था, जिससे पढ़ाई प्रभावित होती थी। इस बार शिक्षा विभाग ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए सत्र शुरू होने से पहले ही किताबें पहुंचाने की ठोस योजना बनाई है।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक के अनुसार कक्षा 1 से 8 तक के 6 लाख 29 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं के लिए करीब 43 लाख 78 हजार पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी। वहीं कक्षा 9 से 12 तक के 3 लाख 44 हजार से अधिक विद्यार्थियों के लिए लगभग 38 लाख 67 हजार किताबों की व्यवस्था की गई है।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि समय पर किताबें मिलने से न केवल छात्रों की पढ़ाई सुचारु रूप से शुरू हो सकेगी, बल्कि शिक्षकों को भी पाठ्यक्रम को तय समयसीमा में पूरा करने में सुविधा मिलेगी।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया ‘AI भारत विस्तार’ योजना का शुभारंभ
कृषि मंत्री गणेश जोशी बोले—AI से खेती बनेगी स्मार्ट, सटीक और समयबद्ध जानकारी मिलेगी
देहरादून। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राजस्थान से मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के साथ “AI भारत विस्तार (BHARAT VISTAAR)” योजना का शुभारंभ किया। इस अवसर पर प्रदेश के कृषि मंत्री गणेश जोशी सर्किट हाउस, देहरादून से वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में जुड़े। कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्रियों एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
इस अवसर पर कृषि मंत्री गणेश जोशी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “भारत विस्तार” योजना देशभर के किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए राजस्थान के जयपुर से प्रारंभ की गई एक महत्वपूर्ण पहल है।
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि इस योजना के माध्यम से कृषि एवं औद्यानिकी फसलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका महत्वपूर्ण है, जिससे किसानों को सटीक और समयबद्ध जानकारी प्राप्त हो सकेगी। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किसानों को एक ही स्थान पर फसलों की आवश्यकताओं, मंडीभाव, सिंचाई का समय, उन्नत बीज, फसल बीमा तथा अन्य कृषि संबंधी जानकारी उपलब्ध होगी।
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि “AI भारत विस्तार” के माध्यम से किसान भाई अपने मोबाइल से 155261 नंबर डायल कर फसलों से संबंधित आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इससे किसानों को घर बैठे विशेषज्ञ परामर्श और मार्गदर्शन उपलब्ध होगा।
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का भी आभार जताते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों के कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह प्लेटफॉर्म खेती को समृद्ध, सशक्त और सरल बनाएगा तथा किसानों को एक क्लिक पर समाधान उपलब्ध कराएगा। उन्होंने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के किसानों की आय दोगुनी करने और विकसित भारत के संकल्प को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
इस अवसर पर निरंजन डोभाल, निदेशक उद्यान सुंदर लाल सेमवाल, महेंद्र पाल, नरेंद्र यादव, रतन कुमार सहित बड़ी संख्या में कृषकगण उपस्थित रहे।
देहरादून-हरिद्वार-ऋषिकेश में आधुनिक ट्रांजिट नेटवर्क पर मंथन, ई0-बी0आर0टी0एस0, पीआरटी और रोपवे परियोजनाओं की उच्चस्तरीय समीक्षा
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के क्रम में प्रदेश की शहरी परिवहन व्यवस्था को आधुनिक, सुगम और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में उत्तराखण्ड ई0-बी0आर0टी0एस0 की विभिन्न परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें देहरादून और हरिद्वार सहित ऋषिकेश क्षेत्र की बहुप्रतीक्षित परियोजनाओं की प्रगति पर गंभीर मंथन हुआ। बैठक में उत्तराखण्ड मैट्रो रेल कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक बृजेश कुमार मिश्रा सहित निगम के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया और विभिन्न परियोजनाओं की अद्यतन स्थिति का प्रस्तुतीकरण किया। सचिव ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार शहरी ट्रांसपोर्ट सिस्टम को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
त्रिवेणी घाट-नीलकंठ रोपवे को मिली अहम स्वीकृति
बैठक में जानकारी दी गई कि त्रिवेणी घाट से नीलकंठ मंदिर तक प्रस्तावित रोपवे परियोजना को आवश्यक एनओसी/अनुमोदन प्राप्त हो चुका है। निगम द्वारा स्टेज-1 फॉरेस्ट क्लीयरेंस हेतु आवेदन भी कर दिया गया है। यह परियोजना न केवल श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ाएगी बल्कि पर्वतीय यातायात दबाव को कम करने में भी सहायक होगी। सचिव ने 30 वर्ष के कंसेशन पीरियड को भविष्य की परियोजनाओं में बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार करने के निर्देश दिए, ताकि निजी निवेश आकर्षित किया जा सके और परियोजना की वित्तीय व्यवहार्यता मजबूत हो।
हरिद्वार में इंटीग्रेटेड रोपवे और पी0आर0टी0 सिस्टम
हरिद्वार शहर में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड रोपवे परियोजना (डी0डी0यू0 पार्किंग-चण्डी देवी-मनसा देवी एवं मल्टीमॉडल हब) की डी0एफ0सी कराये जाने हेतु अनुरोध बैठक में किया गया। सचिव ने 18.02.2026 की तिथि डी0एफ0सी प्रक्रिया के लिए निर्धारित करते हुए निर्देश दिया कि परियोजना की फिजिबिलिटी रिपोर्ट को पी0पी0पी0 सेल से वेटिंग कराया जाए।
हरिद्वार शहर में पी0आर0टी परियोजना के अंतर्गत चार कॉरिडोर प्रस्तावित हैं-
1- सीतापुर से भारत माता मंदिर
2- सिटी अस्पताल से दक्ष मंदिर
3- लालतारा चौक से भूपतवाला
4- गणेशपुरम से डीएवी पब्लिक स्कूल
इस परियोजना में 21 स्टेशन प्रस्तावित हैं तथा कुल लंबाई 20.73 किमी होगी। यह योजना विशेष रूप से तीर्थ सीजन के दौरान यातायात प्रबंधन में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।
देहरादून में ई-बीआरटीएस- 31.52 किमी का मेगा कॉरिडोर
देहरादून शहर में प्रस्तावित ई-बी0आर0टी0एस0 परियोजना के अंतर्गत दो कॉरिडोर प्रस्तावित हैं। प्रथम कॉरिडोर आईएसबीटी से रायपुर तक होगा, जिसमें 35 स्टेशन प्रस्तावित हैं और कुल लंबाई 31.52 किमी होगी। बैठक के उपरांत सचिव ने निगम अधिकारियों के साथ प्रथम कॉरिडोर का संयुक्त स्थलीय निरीक्षण भी किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजधानी की बढ़ती आबादी और ट्रैफिक दबाव को देखते हुए इस परियोजना को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कॉरिडोर शहर के मुख्य आवागमन मार्गों को कवर करेगा और सार्वजनिक परिवहन को नई दिशा देगा।
देहरादून पी0आर0टी0 के तीन कॉरिडोर देहरादून में पी0आर0टी0 परियोजना के अंतर्गत तीन प्रमुख कॉरिडोर प्रस्तावित हैं-
1- क्लेमेंटटाउन से बल्लूपुर चौक
2- पंडितवाड़ी से रेलवे स्टेशन
3- गांधी पार्क से आईएसबीटी पार्क
निगम द्वारा इन कॉरिडोर की डीपीआर तैयार कर अनुमोदन के अनुरूप कार्रवाई किए जाने का अनुरोध किया गया। सचिव ने निर्देश दिया कि परियोजना को ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (ज्व्क्) मॉडल से जोड़ा जाए, जिससे शहरी विस्तार सुनियोजित ढंग से हो सके।
17 स्टेशन का संयुक्त स्थलीय निरीक्षण
बैठक के उपरांत सचिव द्वारा निगम के अधिकारियों के साथ प्रथम कॉरिडोर (आईएसबीटी से मसूरी डायवर्जन, कुल 17 स्टेशन) का संयुक्त स्थलीय निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान प्रस्तावित आईएसबीटी स्टेशन की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की गई, जिसमें अवगत कराया गया कि स्टेशन निर्माण हेतु 0.64 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता होगी। संबंधित भूमि का स्वामित्व मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण के अधीन है। इस पर प्रबंध निदेशक ने परियोजना में शामिल विभिन्न शासकीय भूमि को शीघ्र निगम को हस्तांतरित किए जाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया, ताकि निर्माण कार्य समयबद्ध रूप से प्रारंभ हो सके।
पार्किंग पॉलिसी और समन्वित विकास पर जोर
बैठक में सचिव ने उत्तराखण्ड की कार पार्किंग पॉलिसी-2022 का गहन अध्ययन कर भविष्य की सभी शहरी परिवहन परियोजनाओं में समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए। उनका मानना है कि बिना पार्किंग प्रबंधन के कोई भी ट्रांजिट सिस्टम प्रभावी नहीं हो सकता। सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि त्रिवेणी-नीलकंठ रोपवे और हरिद्वार रोपवे परियोजनाएं एडवांस स्टेज में हैं, इसलिए इन्हें प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र क्रियान्वित किया जाए। बैठक में उत्तराखण्ड मैट्रो रेल कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक बृजेश कुमार मिश्रा, निदेशक (वित्त) संजीव मेहता, महाप्रबंधक (सिविल) संजय जी0 पाठक, संयुक्त महाप्रबंधक (एचआर) कृष्णा नन्द शर्मा, संयुक्त महाप्रबंधक (एस0एण्ड0टी0) अजय बाबू, संयुक्त महाप्रबंधक (विद्युत) सौरभ शेखर, संयुक्त महाप्रबंधक (सिविल) जयनन्दन सिन्हा, उप-महाप्रबंधक (सिविल) गुरूलाल सिंह, सेक्शन इंजीनियर सर्वेश कुमार तथा सेक्शन इंजीनियर अशोक डोभाल उपस्थित रहे।
शहरी परिवहन के नए युग की शुरुआत
आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक ने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि उत्तराखण्ड में शहरी परिवहन के क्षेत्र में व्यापक बदलाव की तैयारी है। ई0-बी0आर0टी0एस0, पीआरटी और रोपवे परियोजनाओं को एकीकृत दृष्टिकोण से आगे बढ़ाने की रणनीति तैयार की जा रही है। यदि निर्धारित समयसीमा में ये परियोजनाएं धरातल पर उतरती हैं, तो देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश क्षेत्र में यातायात प्रबंधन, पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। धामी सरकार की यह पहल प्रदेश को आधुनिक ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के मानचित्र पर सशक्त रूप से स्थापित कर सकती है।
परिवहन नेटवर्क विकसित करने पर फोकस -डॉ आर राजेश कुमार
आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि राज्य सरकार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन के अनुरूप उत्तराखण्ड को आधुनिक, सुरक्षित और सतत शहरी परिवहन व्यवस्था से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि देहरादून और हरिद्वार जैसे तीव्र गति से विकसित हो रहे शहरों में समेकित ट्रांजिट सिस्टम समय की मांग है। रोपवे, पी0आर0टी और ई-बी0आर0टी0एस0 परियोजनाएं न केवल यातायात दबाव कम करेंगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन संवर्धन में भी सहायक होंगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी परियोजनाएं गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ आगे बढ़ाई जाएं। निजी निवेश आकर्षित करने, पीपीपी मॉडल को मजबूत करने और तकनीकी व्यवहार्यता सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया जाएगा। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में उत्तराखण्ड के प्रमुख शहरों में आधुनिक सार्वजनिक परिवहन का सशक्त नेटवर्क विकसित हो।
अवैध निर्माण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं- एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी
देहरादून। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध निर्माणों और अनधिकृत प्लॉटिंग के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में ऋषिकेश और डोईवाला क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर ध्वस्तीकरण एवं सीलिंग की कार्रवाई की गई। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि बिना स्वीकृति के की जा रही किसी भी प्रकार की निर्माण गतिविधि या प्लॉटिंग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई जारी रहेगी
डोईवाला क्षेत्र में कुडकावाला, निकट क्रेशर प्वाइंट पर विकास उनियाल तौसिप द्वारा लगभग 15 से 20 बीघा भूमि पर की जा रही अवैध प्लॉटिंग के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए ध्वस्तीकरण किया गया। मौके पर पहुंची टीम ने अनधिकृत रूप से विकसित किए जा रहे प्लॉटों को ध्वस्त कर दिया और भविष्य में ऐसी गतिविधियों से दूर रहने की चेतावनी दी। इस कार्रवाई में सहायक अभियंता प्रमोद मेहरा, अवर अभियंता स्वाती कोहली, दीपक नौटियाल एवं सुपरवाइजर की टीम मौजूद रही।
वहीं ऋषिकेश क्षेत्र में बनखंडी, लेन नंबर 05, पुराना बस स्टैंड के निकट उर्मिला देवी द्वारा किए जा रहे अवैध निर्माण पर प्राधिकरण ने सीलिंग की कार्रवाई की। बिना मानचित्र स्वीकृति के निर्माण कार्य किया जा रहा था, जिस पर टीम ने तत्काल प्रभाव से निर्माण स्थल को सील कर दिया। इस कार्रवाई में सहायक अभियंता अभिषेक भारद्वाज, अवर अभियंता पूनम सकलानी, सुपरवाइजर एवं पुलिस बल की उपस्थिति में विधिवत कार्रवाई संपन्न की गई। प्राधिकरण ने आमजन से अपील की है कि किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य प्रारंभ करने से पूर्व मानचित्र स्वीकृति अवश्य प्राप्त करें और केवल अधिकृत परियोजनाओं में ही निवेश करें। अवैध प्लॉटिंग या निर्माण में संलिप्त पाए जाने पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
अवैध निर्माण और अनधिकृत प्लॉटिंग किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं- बंशीधर तिवारी
एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध निर्माण और अनधिकृत प्लॉटिंग किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियोजन मानकों के अनुरूप विकास सुनिश्चित करना प्राधिकरण की प्राथमिक जिम्मेदारी है। कई मामलों में देखा गया है कि बिना स्वीकृति के प्लॉटिंग कर आमजन को गुमराह किया जाता है, जिससे बाद में उन्हें आर्थिक और कानूनी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे मामलों में प्राधिकरण न केवल निर्माण ध्वस्त करेगा, बल्कि संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई भी करेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि नियमित रूप से फील्ड निरीक्षण कर अवैध गतिविधियों पर नजर रखें। उपाध्यक्ष ने आम नागरिकों से अपील की कि किसी भी संपत्ति में निवेश से पहले प्राधिकरण से उसकी वैधता की जांच अवश्य करें, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की असुविधा न हो।
भवन निर्माण से पूर्व मानचित्र स्वीकृति लेना अनिवार्य- मोहन सिंह बर्निया
एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने बताया कि अवैध निर्माणों के विरुद्ध अभियान निरंतर जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि ऋषिकेश और डोईवाला क्षेत्रों में की गई कार्रवाई एक चेतावनी है कि नियमों की अनदेखी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। प्राधिकरण की टीमें नियमित रूप से निरीक्षण कर रही हैं और जहां भी अनियमितता पाई जा रही है, तत्काल ध्वस्तीकरण या सीलिंग की कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने लोगों से अपील की कि भवन निर्माण से पूर्व मानचित्र स्वीकृति लेना अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करें।
लाइन से मुक्ति, घर से अपॉइंटमेंट, आभा आईडी को मरीजों ने बताया सुविधाजनक
जनवरी में शुरू डिजिटल व्यवस्था, दून अस्पताल की ओपीडी में दिखा सकारात्मक बदलाव
आभा आईडी से आसान हुई प्रक्रिया, 60-70 प्रतिशत मरीजों ने अपनाया डिजिटल विकल्प
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में डिजिटल इंडिया एवं आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के अंतर्गत जिला प्रशासन द्वारा राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में लागू की गई डिजिटल आभा आईडी प्रणाली मरीजों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रही है। जनवरी माह से संचालित इस व्यवस्था के माध्यम से मरीज घर बैठे आभा आईडी ऐप द्वारा ऑनलाइन पंजीकरण (पर्चा) बना सकते हैं।
दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में ओपीडी मरीजों की आवक को देखते हुए आभा आईडी प्रणाली लंबी कतारों से मुक्ति दिलाने में सहायक बन रही है। इससे न केवल समय की बचत हो रही है, बल्कि पंजीकरण प्रक्रिया भी सरल एवं सुव्यवस्थित हुई है। विगत एक माह में अस्पताल में कुल पंजीकरण का लगभग 60 से 70 प्रतिशत आभा आईडी के माध्यम से किया जा रहा है।
दूर-दराज क्षेत्रों से उपचार हेतु आने वाले मरीजों, विशेषकर महिलाओं एवं वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह व्यवस्था अत्यंत सुविधाजनक सिद्ध हो रही है। आभा आईडी के माध्यम से मरीज सीधे संबंधित ओपीडी तक पहुंच रहे हैं, जिससे अनावश्यक प्रतीक्षा एवं असुविधा से राहत मिल रही है। उल्लेखनीय है कि अस्पताल में आभा आईडी के साथ-साथ पूर्व की भांति ऑफलाइन पंजीकरण प्रक्रिया भी संचालित है, जिससे वे मरीज जो अभी आभा आईडी से जुड़े नहीं हैं, पूर्ववत् उपचार सुविधा प्राप्त कर रहे हैं।
जिला प्रशासन के सहयोग से संचालित यह डिजिटल व्यवस्था न केवल पंजीकरण को सरल बना रही है, बल्कि मरीजों का सम्पूर्ण मेडिकल रिकॉर्ड भी डिजिटल रूप में सुरक्षित कर रही है। इसके परिणामस्वरूप मरीजों को प्रत्येक बार अपनी व्यक्तिगत जानकारी पुनः दर्ज कराने की आवश्यकता नहीं होती। जांच रिपोर्ट एवं दवाइयों का विवरण भी ऐप के माध्यम से सुलभ हो रहा है।
ओपीडी में उपचार कराने आई मरीज संगीता बडोला ने आभा ऐप से मिल रही सुविधा की सराहना करते हुए कहा कि ऑनलाइन पर्चा बनाने की सुविधा से उन्हें समय की बचत हो रही है और वे निर्धारित समय पर उपचार प्राप्त कर पा रही हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री, जिला प्रशासन एवं दून मेडिकल कॉलेज प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. रविंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि राज्य सरकार की यह पहल स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। आभा आईडी के माध्यम से मरीजों की मेडिकल हिस्ट्री डिजिटल रूप में संरक्षित की जा रही है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में ओपीडी मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण ऑनलाइन पंजीकरण व्यवस्था से सुगमता आई है। विगत एक माह से संचालित इस प्रणाली के अंतर्गत प्रतिदिन 60 से 70 प्रतिशत पंजीकरण आभा आईडी के माध्यम से हो रहे हैं, जिससे मरीजों को त्वरित एवं सुगम उपचार सुविधा उपलब्ध हो रही है।
