सरकार पत्रकारों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील- सीएम
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को उत्तरांचल प्रेस क्लब की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी को शपथ दिलाई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलवाई।
मुख्यमंत्री ने सभी नव-निर्वाचित पदाधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उत्तरांचल प्रेस क्लब, प्रदेश की लोकतांत्रिक चेतना का सशक्त मंच है। उत्तरांचल प्रेस क्लब ने हमेशा अपनी गरिमा, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को बनाए रखा है। उन्होंने कहा पत्रकारिता, लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है। यह सरकारों को उत्तरदायी, समाज को जागरूक और आम नागरिक को सजग करता है। स्वतंत्र, जागरूक और जिम्मेदार पत्रकारिता, सरकार और जनता के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल युग में, सोशल मीडिया के माध्यम से फेक न्यूज़ और भ्रामक सूचनाएँ तेज़ी से फैल रही हैं, ऐसे में पत्रकारों की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है। सही तथ्यों के साथ निष्पक्ष और जिम्मेदार रिपोर्टिंग ही समाज को भ्रम से बचा सकती है। मुख्यमंत्री ने कहा उत्तराखंड के पत्रकारों ने हर चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में साहस के साथ अपना काम किया है। उन्होंने कहा पत्रकारों की कलम में वह शक्ति है, जो समस्याओं को उजागर करने के साथ-साथ समाधान का मार्ग भी प्रशस्त करती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पत्रकारों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील है। पत्रकारों की सुरक्षा, स्वास्थ्य बीमा, आकस्मिक सहायता एवं आवासीय योजनाओं को लेकर कई कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा मान्यता प्राप्त पत्रकारों को शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ प्राथमिकता के साथ दिया जा रहा है। वरिष्ठ पत्रकार सम्मान योजना के अंतर्गत अनेक वरिष्ठ पत्रकारों को सम्मानित किया गया है। पत्रकार पेंशन में वृद्धि के साथ-साथ, विभिन्न जिलों से देहरादून आने वाले पत्रकारों के लिए सूचना विभाग के माध्यम से आवासीय व्यवस्था सुनिश्चित करने के भी प्रयास किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तरांचल प्रेस क्लब के भवन निर्माण के मुद्दे को उन्होंने स्वतः ही कैबिनेट में रखा। जिसपर कैबिनेट ने अपनी मंजूरी प्रदान की है। उन्होंने कहा जल्द ही यह भवन एक मॉडल भवन के रूप में बनेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री पत्रकार पेंशन योजना के अंतर्गत पत्रकार कल्याण कोष का बजट 5 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये किया गया है। उन्होंने कहा उत्तराखंड प्रत्येक क्षेत्र की भांति जनसंचार के क्षेत्र में भी अपनी एक नई पहचान स्थापित करेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मीडिया सेंटरों के आधुनिकीकरण और प्रेस क्लबों के सशक्तिकरण पर कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा 2026-27 के सामान्य बजट में भी मीडिया सेंटरों को लेकर प्रावधान किए जाएंगे। उन्होंने कहा इससे आने वाले समय में अन्य जिलों में भी पत्रकारों को अच्छी सुविधाएं मिल सकेंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड राज्य के प्रति उनका भी ऋण और उत्तरदायित्व है। उन्होंने कहा वो स्वयं भी सामान्य परिस्थितियों से उठकर राज्य के मुख्यमंत्री बने हैं। वो अपने कर्तव्य का निर्वाह करते रहेंगे। उन्होंने कहा राज्य सरकार ने अपनी कर्तव्यों का निर्वहन पहले भी किया है और आगे भी करते रहेंगे।
उत्तरांचल प्रेस क्लब के नवनिर्वाचित अध्यक्ष अजय सिंह राणा ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हमेशा पत्रकारों के कल्याण के लिए तत्पर रहते हैं। उन्होंने कहा पत्रकार, पत्रकारिता के साथ अन्य क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने उत्तरांचल प्रेस क्लब के भवन निर्माण को लेकर कैबिनेट में हुए फैसले के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री ने नवनिर्वाचित अध्यक्ष अजय सिंह राणा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष गजेन्द्र सिंह नेगी, कनिष्ठ उपाध्यक्ष सोबन सिंह गुसाई, महामंत्री योगेश सेमवाल, संयुक्त मंत्री शिवेश शर्मा, श्रीमती मीना नेगी, कोषाध्यक्ष मनीष डंगवाल, सम्प्रेक्षक विजय जोशी एवं कार्यकारिणी सदस्य वीरेन्द्र डंगवाल ‘पार्थ’, मनमोहन लखेड़ा, श्रीमती रश्मि खत्री, सुलोचना पयाल, मनोज सिंह जयाड़ा, हरीश थपलियाल, मनबर सिंह रावत, ओम प्रकाश जोशी, हिमांशु जोशी को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलवाई।
इस अवसर पर विधायक खजान दास, मेयर सौरभ थपलियाल, दायित्वधारी डॉ. देवेंद्र भसीन, महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी, एवं अन्य लोग मौजूद रहे।
आरटीआई अधिनियम के तहत सराहनीय कार्य करने वाले लोक सूचना तथा अपीलीय अधिकारियों को मुख्यमंत्री ने किया सम्मानित
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को सचिवालय में आरटीआई अधिनियम (सूचना का अधिकार कानून) के लागू होने के 20 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित कार्यक्रम में आरटीआई अधिनियम के तहत सराहनीय कार्य करने वाले 5 लोक सूचना अधिकारियों तथा 5 अपीलीय अधिकारियों को सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री ने जिन अधिकारियों को सम्मानित किया उनमें जिलाधिकारी बागेश्वर श्रीमती आकांक्षा कोंडे (तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी हरिद्वार), अभिनव शाह मुख्य विकास अधिकारी देहरादून, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक टिहरी आयुष अग्रवाल, लोक सेवा आयोग उत्तराखण्ड के उपसचिव डॉ. प्रशांत, उप निदेशक प्रारंभिक शिक्षा एस.एस. चौहान, उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अनु सचिव राजन नैथानी, प्रभारी निरीक्षक कोतवाली, पिथौरागढ़ ललित मोहन जोशी, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी रामनगर वन प्रभाग श्रीमती कमला शर्मा, सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा, से मुख्य प्रशासनिक अधिकारी से लियाकत अली खान और जिला विकास अधिकारी हरिद्वार वेद प्रकाश शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम भारतीय लोकतंत्र की आत्मा है और पारदर्शी शासन व्यवस्था की आधारशिला है। इस अधिनियम ने शासन और नागरिकों के बीच विश्वास, पारदर्शिता और जवाबदेही का एक नया अध्याय खोला है। उन्होंने कहा कि इस क़ानून ने प्रत्येक नागरिक को शासन की नीतियों, निर्णयों और कार्यप्रणाली को समझने, प्रश्न पूछने और जवाबदेही सुनिश्चित करने का अधिकार प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की शासन व्यवस्था में सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही की नई कार्यसंस्कृति विकसित हुई है। उन्होंने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस, ई-ऑफिस, ऑनलाइन पोर्टल, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर और जन-सुनवाई जैसे माध्यमों ने शासन और जनता के बीच संबंध को और मजबूत बनाया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार पारदर्शी, उत्तरदायी और जनोन्मुखी शासन व्यवस्था की दिशा में सतत कार्य कर रही है। राज्य में प्रशासनिक प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण किया गया है और अधिकांश सरकारी सेवाएं अब ऑनलाइन उपलब्ध हैं, जिससे नागरिकों को जानकारी और सेवाओं की उपलब्धता में सुगमता आई है। मुख्यमंत्री ने आरटीआई ऑनलाइन पोर्टल और आयोग की हाइब्रिड सुनवाई व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि इससे न्याय प्रक्रिया और भी सुलभ हुई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि अब तक राज्य सूचना आयोग में 13 लाख से अधिक आरटीआई आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से अधिकांश का सफलतापूर्वक निस्तारण किया जा चुका है। वर्तमान में केवल 700 प्रकरण लंबित हैं, जो आयोग की दक्षता का प्रमाण हैं। मुख्यमंत्री ने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों की निष्ठा, पारदर्शिता और संवेदनशीलता की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने नागरिक अधिकारों की रक्षा में प्रशंसनीय भूमिका निभाई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सूचना का अधिकार जितना महत्वपूर्ण है, उतनी ही इसके उपयोग में जिम्मेदारी भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में इस अधिनियम का दुरुपयोग देखा गया है, जिस पर रोक लगाने के लिए जनजागरूकता बढ़ाना समय की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक विभाग उन सूचनाओं को अपनी वेबसाइट पर नियमित रूप से प्रदर्शित करे जिनकी बार-बार मांग की जाती है, ताकि नागरिकों को स्वतः जानकारी मिल सके और पारदर्शिता बढ़े।
इस अवसर पर मुख्य सूचना आयुक्त श्रीमती राधा रतूड़ी, राज्य सूचना आयुक्त देवन्द्र कुमार आर्य, दलीप सिंह कुंवर, कुशलानन्द, उत्तराखण्ड अवस्थापन अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष विश्वास डाबर मौजूद थे।
आपदा प्रबंधन सामूहिक जिम्मेदारी, सभी विभाग समन्वित रूप से करें कार्य -मुख्यमंत्री
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को सर्वे ऑफ इंडिया ऑडिटोरियम, हाथीबड़कला में ‘शीतलहर पूर्व तैयारी’ विषय पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने शीतलहर, बाढ़, मॉक अभ्यास, हवाई यातायात सहायता की एस.ओ.पी., आपदा प्रबंधन विभाग के नववर्ष कैलेंडर 2026 एवं आपदा प्रबंधन हस्तपुस्तिका का विमोचन किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने युवा आपदा मित्रों एवं वर्ष 2025 में आपदा के दौरान राहत एवं बचाव में सराहनीय कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित भी किया। आपदा प्रबंधन के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया द्वारा उपलब्ध कराए गए चार वाहनों का भी मुख्यमंत्री ने फ्लैग ऑफ किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आपदा प्रबंधन किसी एक विभाग की नहीं, बल्कि समस्त प्रशासन, स्थानीय निकायों, स्वयंसेवी संगठनों और आम जनता की सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में देश में आपदा जोखिम न्यूनीकरण को एक प्रमुख एजेंडा बनाया गया है। उत्तराखंड सरकार भी उन्हीं के मार्गदर्शन में आपदा प्रबंधन में आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर विशेष जोर दे रही है। राज्य में ड्रोन सर्विलांस, जीआईएस मैपिंग, सैटेलाइट मॉनिटरिंग एवं अर्ली वार्निंग सिस्टम को सुदृढ़ बनाया जा रहा है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेंसर लगाने, डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम एवं आधुनिक रैपिड रिस्पॉन्स टीमों के गठन जैसे कदमों से आपदा जोखिम को घटाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्य में हिमस्खलन (एवलांच) एक गंभीर प्राकृतिक जोखिम है। राज्य के कई क्षेत्र हिमस्खलन की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माने जाते हैं। इन क्षेत्रों में पर्यटन, तीर्थाटन एवं पर्वतारोहण गतिविधियों को सुरक्षित बनाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि सरकार पूर्व चेतावनी प्रणाली को मजबूत करने, आधुनिक तकनीक के अधिकतम उपयोग, प्रशिक्षित रेस्क्यू बलों की तैनाती तथा सुरक्षित पर्यटन प्रोटोकॉल को और प्रभावी बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। शीतलहर और अत्यधिक हिमपात से उत्पन्न चुनौतियों से प्रभावी रूप से निपटने के लिए भी राज्य में कई ठोस और व्यावहारिक कदम उठाए गए हैं। सभी जिलों को अर्ली वार्निंग सिस्टम से जोड़ा गया है और अलाव, रैन बसेरों तथा कंबलों की पर्याप्त व्यवस्था के निर्देश भी जिलाधिकारियों को दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मौसम विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय प्रशासन आपस में बेहतर तालमेल बनाए रखें और अर्ली वार्निंग सिस्टम को और अधिक सुदृढ़ करते हुए शीतलहर तथा हिमपात वाले क्षेत्रों में समय पर चेतावनी और आवश्यक तैयारियाँ सुनिश्चित करें। शीतलहर के दौरान हाइपोथर्मिया, जुकाम, फ्लू, निमोनिया जैसी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए सभी जिला अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और मोबाइल मेडिकल टीमों को सक्रिय रखना होगा। विशेष रूप से सीमांत और ऊँचाई वाले क्षेत्रों में आवश्यक दवाइयों, हीटिंग उपकरणों एवं प्राथमिक उपचार सामग्री की आपूर्ति सुनिश्चित करनी होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए ‘युवा आपदा मित्र’ एवं ‘आपदा सखी’ जैसी पहल को और सशक्त बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की कि इस कार्यशाला के माध्यम से शीत ऋतु के दौरान होने वाली संभावित चुनौतियों से निपटने की तैयारियों की समीक्षा तथा विभागों के मध्य समन्वय को मजबूत किया जाएगा।
मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने कहा कि राज्य में आपदा प्रबंधन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की दिशा में यह एक सराहनीय पहल है। उन्होंने कहा कि शीतलहर धीरे-धीरे अपना प्रभाव दिखाती है, परंतु इसका असर भयावह होता है। यह आमजन की स्वास्थ्य सेवाओं और विशेष रूप से संवेदनशील लोगों के जनजीवन को प्रभावित करती है। शीतलहर प्रबंधन को हमें केवल मौसमी प्रबंधन की चुनौती के रूप में नहीं, बल्कि एक प्रशासनिक और सामाजिक दायित्व के रूप में देखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में राज्य में आपदा प्रबंधन को सशक्त, संगठित और नीति-आधारित स्वरूप देने की दिशा में निरंतर कार्य किए जा रहे हैं।
इस अवसर पर राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य राजेन्द्र सिंह, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष विनय रोहिला, सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन,आनंद स्वरूप, आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (क्रियान्वयन) राजकुमार नेगी, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो. ओबैदुल्लाह अंसारी एवं आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारी उपस्थित थे।
हिमालयी राज्यों में कृषि एवं ग्रामीण विकास से संबंधित विभिन्न विषयों पर हुई चर्चा
गुवाहाटी/देहरादून। प्रदेश के कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने गुवाहाटी में वस्त्र मंत्रियों के राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान आज असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से भेंट की। इस अवसर पर दोनों नेताओं के बीच हिमालयी राज्यों में कृषि एवं ग्रामीण विकास से संबंधित विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई
भेंट के दौरान कृषि मंत्री गणेश जोशी ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को उत्तराखंड की सांस्कृतिक एवं धार्मिक परंपराओं के प्रतीक स्वरूप शॉल एवं बद्रीनाथ धाम का पावन प्रसाद भेंट किया। असम के मुख्यमंत्री ने इस सद्भावपूर्ण भेंट के लिए कृषि मंत्री गणेश जोशी का आभार भी व्यक्त किया।
23 दिन में 16 हजार से अधिक शिकायतों का निस्तारण
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा संचालित ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ कार्यक्रम राज्य में सुशासन, संवेदनशील प्रशासन और जनसेवा की सशक्त मिसाल बनकर उभरा है। 23 दिन पूर्व 17 दिसंबर से शुरू हुए इस कार्यक्रम के तहत अब तक उत्तराखंड के सभी 13 जनपदों में कुल 300 से अधिक शिविर आयोजित किए जा चुके हैं, जिनका उद्देश्य शासन को सीधे जनता के द्वार तक पहुँचाकर आमजन की समस्याओं का त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना है।
इन शिविरों के माध्यम से प्रशासन और नागरिकों के बीच सीधा संवाद स्थापित हुआ है, जिससे वर्षों से लंबित मामलों के समाधान के साथ-साथ जनता का शासन पर विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है। अब तक आयोजित शिविरों में 1,97,522 नागरिकों ने सहभागिता कर अपनी समस्याएं, सुझाव और आवश्यकताएं संबंधित अधिकारियों के समक्ष रखीं।
कार्यक्रम के दौरान आमजन से 22,645 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 16,000 से अधिक शिकायतों का निस्तारण मौके पर अथवा निर्धारित समयसीमा के भीतर कर दिया गया है, जबकि शेष शिकायतों पर भी नियमानुसार कार्रवाई प्रगति पर है। यह आंकड़े राज्य सरकार की तत्परता, जवाबदेही और कार्यसंस्कृति में आए सकारात्मक परिवर्तन को दर्शाते हैं।
इसके अतिरिक्त, शिविरों में विभिन्न प्रमाण पत्रों के लिए 31,070 आवेदन प्राप्त किए गए, जिससे नागरिकों को कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर से राहत मिली है। वहीं, प्रदेश सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से 1,11,326 व्यक्तियों को प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित किया गया, जिससे सामाजिक सुरक्षा, आर्थिक सहायता और आजीविका से जुड़े प्रयासों को नई गति मिली है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशानुसार यह कार्यक्रम केवल शिकायत निवारण तक सीमित न रहकर, पात्र लाभार्थियों को योजनाओं से जोड़ने, प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने, समयबद्ध सेवाएं सुनिश्चित करने और सुशासन को जमीनी स्तर पर सशक्त करने का एक प्रभावी मंच बन रहा है।
राज्य सरकार का संकल्प है कि इस अभियान को निरंतर और व्यापक रूप से आगे बढ़ाया जाए, ताकि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक शासन की योजनाओं और सेवाओं की सीधी पहुंच सुनिश्चित हो सके तथा उत्तराखंड में पारदर्शी, जवाबदेह और जनकेंद्रित शासन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके।
कई जिलों में घने कोहरे का येलो अलर्ट जारी
देहरादून। उत्तराखंड में लंबे समय से बारिश और बर्फबारी न होने का असर अब मौसम पर साफ दिखाई देने लगा है। प्रदेश में सूखी ठंड ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। पहाड़ी क्षेत्रों में शीतलहर और पाले का प्रकोप बना हुआ है, जबकि मैदानी जिलों में घना कोहरा जनजीवन को प्रभावित कर रहा है।
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार 9 जनवरी को भी देहरादून, ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार के साथ नैनीताल, चंपावत और पौड़ी जिलों में घने कोहरे का येलो अलर्ट जारी किया गया है। हालांकि पर्वतीय इलाकों में दिन के समय धूप निकलने से कुछ हद तक राहत मिल रही है, लेकिन सूखी ठंड से फिलहाल निजात मिलने के आसार कम हैं। मौसम विभाग का अनुमान है कि 14 जनवरी तक प्रदेश में मौसम शुष्क बना रह सकता है।
गुरुवार के मौसम आंकड़ों के मुताबिक दिन में धूप खिलने के कारण अधिकतम तापमान सामान्य के आसपास दर्ज किया गया, जबकि रात के समय न्यूनतम तापमान में गिरावट देखी गई। राजधानी देहरादून में दिन का अधिकतम तापमान सामान्य से करीब दो डिग्री अधिक 21.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान सामान्य से दो डिग्री कम 4.4 डिग्री सेल्सियस रहा। प्रदेश के अन्य जिलों में भी तापमान का रुख कुछ इसी तरह बना रहा।
पर्यावरण संरक्षण के लिए बहुगुणा का योगदान आज भी प्रेरणास्रोत- सीएम धामी
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने शासकीय आवास पर प्रसिद्ध पर्यावरणविद, चिपको आंदोलन के प्रणेता और पद्म विभूषण से सम्मानित स्वर्गीय सुन्दरलाल बहुगुणा की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि स्व. सुन्दरलाल बहुगुणा का जीवन प्रकृति संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और सतत विकास के लिए समर्पित रहा। चिपको आंदोलन के माध्यम से उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का रूप दिया, जिसकी गूंज देश-विदेश तक पहुंची। उन्होंने कहा कि बहुगुणा जी के विचार और संघर्ष आज भी समाज को प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों का बोध कराते हैं।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि पर्यावरण संरक्षण को लेकर बहुगुणा जी द्वारा दिखाया गया मार्ग आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है और राज्य सरकार उनके सिद्धांतों को आत्मसात करते हुए विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
समन्वय और समयबद्धता पर दिया जोर, दस्तावेजों के सत्यापन और अतिक्रमण पर सख्ती के दिए निर्देश
विकास के साथ ही नवाचार पर भी ध्यान दें अधिकारी : मुख्यमंत्री
देहरादून- मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राजपुर रोड स्थित वन मुख्यालय के मंथन सभागार में देहरादून जनपद के विकास कार्यों की समीक्षा की। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि सड़कों से जुड़े निर्माण कार्यों के दौरान बिजली, पानी, गैस की भूमिगत लाईन सहित अन्य जो भी कार्य होने हैं, उन्हें संबंधित विभाग आपसी समन्वय कर निर्धारित समयावधि के अन्दर कार्य पूर्ण करें। सभी विभाग वर्षभर में प्रस्तावित कार्यों को सूचीबद्ध कर कार्य करें। उन्होंने जिलाधिकारी देहरादून को निर्देश दिये कि इसके लिए ठोस कार्ययोजना बनाकर समय निर्धारित करते हुए ही कार्य करने की अनुमति दी जाए। साथ ही आंतरिक सड़कों के रख-रखाव पर भी विशेष ध्यान दिया जाए।
मुख्यमंत्री ने बैठक में अधिकारियों को सख्त निर्देश दिये कि आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड, परिवार रजिस्टर, बिजली के बिल और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों के सत्यापन की कार्यवाही नियमित की जाए। जिन लोगों के गलत तरीके से दस्तावेज बने हैं, उनको निरस्त करने की कार्यवाही निरंतर की जाए और गलत प्रमाण पत्र जारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जाए। उन्होंने जिला प्रशासन, वन विभाग, एमडीडीए, एवं नगर निगम अतिक्रमण हटाने की भी निरंतर कार्रवाई किए जाने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने बैठक में नियमित कार्यों के साथ-साथ नवाचार आधारित विकास कार्यों को भी प्राथमिकता देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सड़क एवं कॉरिडोर के विस्तार व सुधार कार्यों से देहरादून की कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जिससे शहर में पर्यटकों एवं आमजन की आवाजाही बढ़ेगी। भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विकास योजनाओं को और गति देने की आवश्यकता है। इसके लिए जनप्रतिनिधियों के विचार-विमर्श कर योजनाओं पर कार्य किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार‘ कार्यक्रम के माध्यम से जन समस्याओं का मौके पर समाधान किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि जो लोग जिन योजनाओं के तहत पात्रता की श्रेणी में हैं, उन्हें योजनाओं का लाभ अवश्य मिले। मुख्यमंत्री ने कहा कि पारदर्शिता, समयबद्धता और जनहित सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, इन लक्ष्यों की पूर्ति के लिए सभी विभाग पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करें। शीतकाल को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने महिलाओं एवं बुजुर्गों के प्रति विशेष संवेदनशीलता बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नगर निगम के रैन बसेरों में सभी आवश्यक सुविधाओं के साथ ही प्रमुख चौक-चौराहों पर ठंड से बचाव के लिए अलाव की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान पुलिस को यातायात प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने, रात्रिकालीन गश्त बढ़ाने, नशा मुक्ति अभियान के तहत नियमित जागरूकता के साथ ही रैण्डम चैकिंग करने के निर्देश भी दिये।
कैबिनेट मंत्री एवं जनपद के प्रभारी मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि कार्यों में तेजी लाने के लिए सभी विभागों आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। कार्यों की प्राथमिकता तय कर उनको समयबद्ध ढंग से पूर्ण किया जाए। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण की दिशा में और अधिक प्रभावी प्रयास करने होंगे।
जिलाधिकारी देहरादून सविन बंसल ने जनपद में संचालित विकास कार्यों की प्रगति एवं प्रमुख उपलब्धियों के संबंध में माननीय मुख्यमंत्री को अवगत कराया। उन्होंने बताया कि समान नागरिक संहिता के अंतर्गत जिले में अब तक 61 हजार पंजीकरण किए जा चुके हैं। सीएम हेल्पलाइन पर पंजीकृत 7,662 शिकायतों में से 6,480 का निस्तारण किया जा चुका है, जबकि शेष शिकायतों का समयबद्ध समाधान किया जा रहा है। जनपद में 3,58,536 राशन कार्डों में से 2,81,366 का सत्यापन करते हुए 5,590 कार्ड निरस्त किए गए हैं। इसी प्रकार 12,06,960 आयुष्मान कार्डों में से 1,36,676 का सत्यापन कर 9,428 कार्ड निरस्त किए गए हैं। जिलाधिकारी ने बताया कि जिले में कुल 57 हेक्टेयर अतिक्रमित भूमि में से 47 हेक्टेयर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जा चुका है।
जिलाधिकारी ने बताया कि लोक निर्माण विभाग के चार प्रमुख प्रोजेक्ट सहित रिस्पना एवं बिंदाल एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजनाएं प्रगति पर हैं। साथ ही पांवटा साहिब-बल्लूपुर फ्लाईओवर निर्माण कार्य अंतिम चरण में है तथा दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से जुड़ने वाली चार लेन ग्रीनफील्ड सड़क का निर्माण भी जारी है। जिला चिकित्सालय गांधी शताब्दी में मॉडल टीकाकरण केंद्र, रक्त गरुड़ वाहन सेवा एवं 12 बेडेड एसएनसीयू की स्थापना की गई है। प्रोजेक्ट उत्कर्ष के अंतर्गत सरकारी विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं एवं खेल सामग्री का प्रावधान किया गया है। बाल भिक्षावृत्ति निवारण के तहत 267 बच्चों का रेस्क्यू कर 154 को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा गया है। नंदा-सुनंदा परियोजना के अंतर्गत 93 बालिकाओं को अब तक 33 लाख रुपये की सहायता प्रदान की गई है। शहर के प्रमुख चौक-चौराहों का चौड़ीकरण एवं सौंदर्यीकरण किया गया है तथा परेड ग्राउंड, तिब्बती मार्केट एवं दून अस्पताल में ऑटोमेटिक पार्किंग का निर्माण किया गया है।
बैठक में राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायकगण खजान दास, विनोद चमोली, उमेश शर्मा काऊ, सविता कपूर, बृज भूषण गैरोला, मेयर देहरादून सौरभ थपलियाल, मेयर ऋषिकेश शंभू पासवान, एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी, मुख्य नगर आयुक्त नामामि बंसल, मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, डीएफओ अमित कंवर, सीएमओ डॉ एमके शर्मा, सिटी मजिस्ट्रेट प्रत्यूष सिंह, एसडीएम हरि गिरी, एस.एल.ई.ओ. स्मृता प्रमार, एसडीएम सुश्री कुमकुम जोशी, परियोजना निदेशक डीआरडीए विक्रम सिंह सहित सभी विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
देहरादून। देहरादून जनहित में उत्कृष्ट सेवा कार्यों के लिए देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल को आज जर्नलिस्ट यूनियन ऑफ उत्तराखंड द्वारा सम्मानित किया गया। इस अवसर पर यूनियन की ओर से जिलाधिकारी को शॉल ओढ़ाकर एवं मोमेंटो भेंट कर सम्मानित किया। उनको सम्मानित करते हुए यूनियन के पदाधिकारियों ने कहा कि जिलाधिकारी सविन बंसल एक कुशल, कर्तव्यनिष्ठ एवं दूरदर्शी प्रशासक हैं। जनता के प्रति उनका समर्पण एवं संवेदनशीलता सराहनीय है। उनके द्वारा किए जा रहे जनहितैषी कार्यों से आम जनता में संतोष और विश्वास है। यूनियन के प्रदेश महामंत्री गिरीश पंत ने कहा कि जर्नलिस्ट यूनियन का उद्देश्य पत्रकारिता की मर्यादाओं एवं परंपराओं को बनाए रखना तथा पत्रकारों के हितों एवं अधिकारों को संरक्षण प्रदान करना है।
जिलाधिकारी के सम्मान समारोह में यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष उमाशंकर प्रवीण मेहता, प्रदेश महामंत्री गिरीश पंत, प्रदेश कोषाध्यक्ष ललित बलूनी, जिला कोषाध्यक्ष ज्योति भट्ट, ललित मोहन लखेड़ा, वीरेश रोहिला, अशोक शर्मा, अफरोज खान, समीना एवं आरती वर्मा सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
राष्ट्रीय वस्त्र सम्मेलन में कृषि मंत्री गणेश जोशी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रतिनिधि के रूप में किया प्रतिभाग
देहरादून/गुवाहाटी। प्रदेश के कृषि मंत्री गणेश जोशी ने असम के गुवाहाटी में भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय द्वारा आयोजित दो दिवसीय वस्त्र मंत्रियों के राष्ट्रीय सम्मेलन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रतिनिधि के रूप में केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह के साथ प्रतिभाग किया। भारतीय वस्त्र विकास, विरासत और नवाचार का ताना-बाना विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में देशभर से मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग विशेषज्ञ एवं वस्त्र क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि शामिल हुए। कार्यक्रम में कृषि मंत्री गणेश जोशी ने केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ विभिन्न राज्यों द्वारा लगाए गए स्टालों का अवलोकन भी किया। सम्मेलन के पहले दिन नीतिगत सुधार, नवाचार, निवेश संभावनाओं और रोजगार सृजन जैसे अहम विषयों पर चर्चा हुई। उत्तराखण्ड से प्राप्त प्रस्तावों पर केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय ने सकारात्मक आश्वासन दिया है।
बैठक में कृषि मंत्री गणेश जोशी ने राष्ट्रीय मंच पर उत्तराखंड के वस्त्र, हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्र की व्यापक संभावनाओं को प्रस्तुत किया। उन्होंने केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय को सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि उत्तराखंड और असम जैसे हिमालयी एवं पूर्वाेत्तर राज्य साझा चुनौतियों और अवसरों से जुड़े हुए हैं। कृषि मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मेक इन इंडिया और वोकल फॉर लोकल विजन तथा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड अपने पारंपरिक वस्त्र उद्योग को आधुनिक स्वरूप देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राज्य में लगभग 12 हजार बुनकर एवं 26 हजार हस्तशिल्पी इस क्षेत्र से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं। उत्तराखंड में प्रतिवर्ष लगभग 4,616 कुंटल ऊन का उत्पादन होता है और मेरिनो व अंगोरा ऊन के लिए राज्य की जलवायु अत्यंत अनुकूल है।
मंत्री जोशी ने प्राकृतिक रेशों पर जोर देते हुए कहा कि बिच्छू घास (हिमालयन नेटल) और औद्योगिक भांग के रेशों से वस्त्र निर्माण में उत्तराखंड अग्रणी भूमिका निभा रहा है, जो सस्टेनेबल फैशन का भविष्य है। उन्होंने कहा कि राज्य में उच्च गुणवत्ता वाले बाइवोल्टाइन सिल्क का उत्पादन हो रहा है, जो आयातित रेशम का मजबूत विकल्प बन रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास परिषद के माध्यम से कारीगरों को डिजाइन, प्रशिक्षण और विपणन सहयोग दिया जा रहा है। महिला स्वयं सहायता समूहों को कौशल विकास से जोड़ा गया है तथा ई-मार्टप्लेस, हिमाद्रि एम्पोरियम और विभिन्न मेलों के माध्यम से बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। राज्य के 29 उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है, जिनमें 10 हथकरघा एवं हस्तशिल्प उत्पाद शामिल हैं।
रेशम क्षेत्र की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि उत्तराखंड ने रेशम कीट बीज उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल की है। वर्ष 2025-26 में 7.585 लाख डीएफएल्स का उत्पादन किया गया, जिससे विशेषकर महिला कीटपालकों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और वे लखपति दीदी बनी हैं। पौड़ी के यमकेश्वर में एसपीवी मॉडल पर स्थापित रेशम क्लस्टर को उन्होंने अन्य पर्वतीय राज्यों के लिए आदर्श बताया।
सम्मेलन के दौरान कृषि मंत्री गणेश जोशी ने केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय के समक्ष पहाड़ी राज्यों के लिए मिनी टेक्सटाइल पार्क नीति, ऊन प्रसंस्करण हेतु विशेष पैकेज, बिच्छू घास व हेम्प को राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन में शामिल करने, हथकरघा-हस्तशिल्प उत्पादों पर ट्रांसपोर्ट सब्सिडी तथा उत्तराखंड में निफ्ट के एक्सटेंशन सेंटर की स्थापना सहित पांच महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे।
