उत्तराखंड के सभी उद्योगों में अगस्त तक लगेंगे स्मार्ट मीटर, URC ने दिए निर्देश..
उत्तराखंड: एलटी और एचटी श्रेणी के सभी उद्योगों में इसी वर्ष अगस्त तक स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (URC) ने इस संबंध में ऊर्जा निगम को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। स्मार्ट मीटर लगने से बिजली की वास्तविक खपत का मासिक आकलन आसानी से हो सकेगा, जिससे बिलिंग में पारदर्शिता आएगी और उपभोक्ताओं को सटीक जानकारी मिल सकेगी। यह कदम राज्य में बिजली व्यवस्था को और अधिक आधुनिक और कुशल बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने यूपीसीएल को निर्देश दिए हैं कि राज्य के सभी एचटी उपभोक्ताओं के लिए 30 जून तक स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य पूरा किया जाए। वहीं यूपीसीएल, पिटकुल और यूजेवीएनएल के सभी अधिकारियों व कर्मचारियों के आवासों पर भी इसी तारीख तक मीटर लगाने होंगे।आयोग के अध्यक्ष एमएल प्रसाद और विधि सदस्य अनुराग शर्मा ने यह जानकारी टैरिफ आदेश के माध्यम से दी। एलटी उपभोक्ताओं को 31 अगस्त तक और सभी सरकारी कार्यालयों व आवासों को 30 सितंबर तक स्मार्ट मीटर से लैस करने की समय सीमा तय की गई है। स्मार्ट मीटर से बिजली की खपत का वास्तविक आंकड़ा हर माह मिल सकेगा, जिससे पारदर्शिता और कुशलता बढ़ेगी।
समय के हिसाब से खपत का डाटा दें..
नियामक आयोग ने अपने आदेश में कहा है कि यूपीसीएल टाइम ब्लॉक के हिसाब से स्मार्ट मीटर से बिजली खपत का डाटा उपलब्ध कराएं। ताकि ये देखा जा सके कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली खपत और राजस्व पर इसका क्या असर पड़ा।
बिजली बिल माफ करेगा यूपीसीएल..
वर्षों से लंबित बिजली बिलों को यूपीसीएल माफ करेगा। नियामक आयोग ने इसके लिए यूपीसीएल को इस वित्तीय वर्ष तक का समय दिया है। अब यूपीसीएल प्रबंधन को ऐसे सभी बिलों की छंटनी करनी होगी, जिनका बिल माफ किया जाएगा। ऐसे तमाम उपभोक्ता हैं, जो कि लंबे समय से गायब हैं। खासतौर से ऐसे उपभोक्ता हैं जो कि यूपी से बंटवारे से हिस्से में आए थे लेकिन यूपीसीएल उन्हें तलाश करने में विफल रहा है।
चारधाम यात्रा में बढ़ेगी महिलाओं की भागीदारी, धूप-प्रसाद से होगी आत्मनिर्भरता की नई शुरुआत..
उत्तराखंड: 30 अप्रैल से शुरू हो रही चारधाम यात्रा इस बार कई मायनों में खास रहने वाली है। श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड संख्या की उम्मीद के साथ-साथ राज्य सरकार ने महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को भी सशक्त बनाने का फैसला लिया है। विशेष रूप से यमुनोत्री धाम, खरसाली (शीतकालीन प्रवास) और अन्य यात्रा पड़ावों पर स्थानीय महिला समूहों द्वारा तैयार किए गए धूप, अगरबत्ती और प्रसाद को श्रद्धालुओं तक पहुंचाया जाएगा। इसके लिए जगह-जगह आउटलेट बनाए जाएंगे, जिससे महिलाओं को बाजार उपलब्ध हो सके और उन्हें स्वरोजगार का अवसर मिल सके। इस पहल का मकसद न केवल स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना भी है। यह कदम चारधाम यात्रा को सामाजिक और आर्थिक रूप से अधिक समावेशी बनाने की दिशा में एक अहम प्रयास माना जा रहा है।
चारधाम यात्रा को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने ग्रामोत्थान परियोजना के तहत महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक नई पहल शुरू की है। खरसाली में “मां यमुना ग्राम संगठन” की महिलाओं के लिए 12 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया है, जिसमें उन्हें घरेलू धूप, अगरबत्ती और पारंपरिक प्रसाद बनाने का हुनर सिखाया जा रहा है। इस प्रशिक्षण की खास बात यह है कि इसमें स्थानीय स्तर पर उत्पादित सामग्रियों का उपयोग किया जा रहा है. जैसे चौलाई के लड्डू, केदार पाती, जटामांसी, गूगल, बुरांश, गेंदा फूल और गाय का गोबर। ये न केवल धार्मिक महत्व रखते हैं बल्कि स्वास्थ्यवर्धक भी हैं। योजना के तहत तैयार उत्पादों को चारधाम यात्रा के दौरान यात्रा मार्गों पर स्थापित विशेष बिक्री केंद्रों पर श्रद्धालुओं को उपलब्ध कराया जाएगा। इससे महिलाओं को आर्थिक आत्मनिर्भरता का रास्ता मिलेगा और यात्रियों को शुद्ध, स्थानीय उत्पादों का लाभ भी। यह पहल नारी शक्ति को धर्म, संस्कृति और आत्मनिर्भरता से जोड़ने का एक सराहनीय प्रयास है।
यमुनोत्री धाम और आस-पास के क्षेत्रों में महिलाएं न केवल धूप, अगरबत्ती और प्रसाद तैयार कर रही हैं, बल्कि अब उन्होंने गेंदा फूल की खेती भी शुरू कर दी है। करीब 10 नाली भूमि पर की जा रही यह खेती यात्रा के दौरान मंदिरों में चढ़ावे और प्रसाद सामग्री के लिए इस्तेमाल की जाएगी। जिला परियोजना प्रबंधक कपिल उपाध्याय का कहना हैं कि इस साल जिला प्रशासन की ओर से महिला समूहों को अलग-अलग जगहों पर आउटलेट के लिए स्थान भी मुहैया कराया गया है। इन आउटलेट्स के ज़रिए स्थानीय महिलाओं द्वारा तैयार किए गए उत्पाद श्रद्धालुओं तक पहुंचाए जाएंगे। इस पहल का मकसद न केवल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है, बल्कि श्रद्धालुओं को भी शुद्ध, पारंपरिक और स्थानीय उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। धार्मिक यात्रा को स्थानीय अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण से जोड़ने की यह कोशिश वाकई सराहनीय है।
देवबंद-रुड़की नई रेल लाइन को मिली मंजूरी, सीएम धामी बोले- उत्तराखंड में विकास की रफ्तार को मिलेगी नई गति..
उत्तराखंड: दिल्ली-देहरादून के बीच यात्रा करने वालों यात्रियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। देवबंद से रुड़की के बीच प्रस्तावित नई रेलवे लाइन परियोजना को रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) से मंजूरी मिल गई है। इस 29.55 किलोमीटर लंबे रेल खंड के शुरू होने से दिल्ली से देहरादून की दूरी करीब 40 किलोमीटर घट जाएगी, जिससे सफर और तेज़ व सुविधाजनक हो जाएगा। इस रेल मार्ग पर हाल ही में 122 किमी प्रति घंटे की स्पीड से सफल ट्रायल भी किया गया है, जो इस बात का संकेत है कि जल्द ही इस रूट पर तेज रफ्तार ट्रेनें दौड़ती नजर आएंगी।
देवबंद-रुड़की नई रेल लाइन परियोजना को मिली मंजूरी पर सीएम पुष्कर सिंह धामी ने इसे उत्तराखंड के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। सीएम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त किया। सीएम का कहना हैं कि यह परियोजना न केवल उत्तराखंड के लोगों के लिए आवागमन को सरल बनाएगी, बल्कि यह राज्य में पर्यटन, रोजगार और व्यापार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी। इस परियोजना से राज्य में विकास के नए रास्ते खुलेंगे। साथ ही देहरादून से दिल्ली की दूरी घटेगी, जिससे आमजन को लाभ होगा। रेलवे कनेक्टिविटी से स्थानीय व्यापार और टूरिज्म सेक्टर को भी बूस्ट मिलेगा। इस रेल परियोजना को मंजूरी मिलना एक संकेत है कि केंद्र सरकार उत्तराखंड को तेज़ी से विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। आने वाले समय में इसका असर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और जीवनशैली दोनों पर देखने को मिलेगा। सीएम ने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में देश के इंफ्रास्ट्रक्चर में अभूतपूर्व विकास हो रहा है। उत्तराखंड में रेलवे नेटवर्क को मजबूत करना हमारी प्राथमिकता रही है और देवबंद-रुड़की रेल लाइन उसी दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
चारधाम यात्रा से पहले जीएमवीएन को 7 करोड़ की बुकिंग, ग्रीन यात्रा को भी मिलेगा बढ़ावा..
उत्तराखंड: चारधाम यात्रा को लेकर उत्तराखंड में तैयारियां जोरों पर हैं और श्रद्धालुओं का उत्साह भी चरम पर है। यात्रा शुरू होने से पहले ही गढ़वाल मंडल विकास निगम (GMVN) को अब तक 7 करोड़ रुपये से अधिक की बुकिंग मिल चुकी है। यह आंकड़ा पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक है, जिससे संकेत मिल रहे हैं कि इस बार की यात्रा अब तक के सभी रिकॉर्ड तोड़ सकती है। इस बार की यात्रा को खास बनाने के लिए GMVN “ग्रीन यात्रा” को भी प्रमोट कर रहा है। इसके तहत प्लास्टिक के उपयोग को कम करने, स्वच्छता बनाए रखने और पर्यावरण संरक्षण पर विशेष फोकस किया जा रहा है। निगम पर्यावरण के अनुकूल यात्रा अनुभव देने के लिए स्थानीय प्रशासन और अन्य विभागों के साथ मिलकर कार्य कर रहा है।
चारधाम यात्रा उत्तराखंड के व्यवसायियों के लिए जहां एक बड़ा आर्थिक स्रोत बनकर सामने आती है, वहीं गढ़वाल मंडल विकास निगम (GMVN) के लिए भी यह यात्रा हर साल नया उत्साह और रिकॉर्ड लेकर आती है। यात्रा शुरू होने से पहले ही GMVN को अपने गेस्ट हाउस, ट्रैवल सेवाएं और अन्य सुविधाओं के लिए 7 करोड़ रुपये से अधिक की एडवांस बुकिंग मिल चुकी है।GMVN ने इस बार यात्रियों के लिए सुविधाओं को और बेहतर बनाने की दिशा में कई कदम उठाए हैं। सभी गेस्ट हाउसों की मरम्मत, साफ-सफाई और डिजिटल बुकिंग व्यवस्था को अधिक सहज बनाया गया है। यात्रा मार्ग पर GMVN की ट्रैवल और लॉजिंग सेवाओं को यात्रियों की पहली पसंद माना जा रहा है। चारधाम यात्रा के दौरान GMVN की गतिविधियों से जुड़े स्थानीय व्यवसायियों, होटल मालिकों, ड्राइवरों और गाइड्स को भी प्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलता है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।
गढ़वाल मंडल विकास निगम के प्रबंध निदेशक विशाल मिश्रा का कहना हैं कि निगम चारधाम यात्रा के लिए पूरी तरह से तैयार है। निगम के सभी गेस्ट हाउसों को यात्रा से पहले दुरुस्त कर दिया गया है। जहां पर भी रिपेयर आदि की जरूरत थी, वो सारे काम पूरे कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि निगम स्टाफ को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि यात्रा शुरू होने से पहले एक फाइनल इंस्पेक्शन कर दिया जाए।
GMVN के गेस्ट हाउस में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए मिलेगी चार्जिंग की सुविधा..
जीएमवीएन एमडी विशाल मिश्रा ने कहा कि चारधाम यात्रा रोड पर मौजूद जीएमवीएन के तकरीबन 21 गेस्ट हाउस में इलेक्ट्रिक गाड़ियों को सुविधा प्रदान करने के लिए इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए गए हैं। इसके साथ ही एडवांस बुकिंग करने वाले और आने वाले तमाम तीर्थयात्री व पर्यटकों को पर्यावरण के प्रति जागरूक रखने के लिए व्हाट्सएप के माध्यम से कुछ जानकारियां साझा की गई है। जिसमें बताया गया है कि उन्हें चारधाम यात्रा के दौरान क्या करना है और क्या नहीं करना है? जिसमें पहाड़ों में कूड़े और अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता आदि शामिल हैं।
क्या सेवाएं देता है GMVN?
गढ़वाल मंडल विकास निगम उत्तराखंड पर्यटन विभाग के अंतर्गत आने वाला एक सरकारी निगम है, जो कि चारधाम यात्रा पर आने वाले यात्रियों के अलावा उत्तराखंड आने वाले तमाम पर्यटकों को गेस्ट हाउस, ट्रैवल पैकेज के साथ ही अलग-अलग डेस्टिनेशन आधारित इंटीग्रेटेड पैकेज ऑफर करता है। गढ़वाल मंडल विकास निगम बेहद पुराना एक राजकीय निगम है। इसलिए यह अन्य निजी ट्रैवल एजेंसियों से ज्यादा विश्वसनीय है तो वहीं इनके गेस्ट हाउस उत्तराखंड के तमाम खूबसूरत स्थान पर मौजूद हैं। खास बात ये है कि जीएमवीएन के गेस्ट हाउस में उत्तराखंड के स्थानीय व्यंजन और संस्कृति की झलक देखने को मिल जाती है।
केदारनाथ यात्रा में गैर हिंदुओं की नो एंट्री का ऐलान, ट्रेड यूनियन के फैसले पर प्रशासन सख्त..
उत्तराखंड: उत्तराखंड के प्रमुख तीर्थ स्थल केदारनाथ धाम के कपाट आगामी दो मई को खुलने जा रहे हैं, लेकिन उससे पहले यात्रा को लेकर एक विवाद खड़ा हो गया है। एक स्थानीय ट्रेड यूनियन ने यह कहकर विवाद को जन्म दे दिया है कि इस बार की यात्रा को विशेष समुदाय से मुक्त रखा जाएगा। साथ ही उन्होंने यात्रियों से गैर-हिंदू दुकानदारों से सामान न खरीदने की अपील की है। यह बयान सोशल मीडिया व स्थानीय स्तर पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिस पर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए संविधान विरोधी करार दिया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि धार्मिक यात्रा को किसी भी धर्म या समुदाय से जोड़कर भेदभाव नहीं किया जा सकता। साथ ही चेतावनी दी गई है कि अगर ऐसा कोई कार्य हुआ तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और शांति व भाईचारे के साथ यात्रा करें।
ट्रेड यूनियन का कहना है कि वे पिछले कई वर्षों से स्थानीय लोगों के हक और रोजगार की लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन हर बार बाहरी व्यापारियों को ही प्राथमिकता दी जाती है। यही कारण है कि इस बार यात्रा से पहले ही उन्होंने विशेष समुदाय और बाहरी राज्यों से आए व्यापारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। ट्रेड यूनियन ने कहा कि बाहरी प्रदेशों से आए लोग केदारनाथ की यात्रा में घोड़े-खच्चर से लेकर सब्जी, राशन, कपड़े और रेस्टोरेंट का व्यापार कर रहे हैं, जिस कारण स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं मिल पाता हैं।
वहीं इस बार ट्रेड यूनियन ने पुनर्निर्माण कार्यों से लेकर राशन, सब्जी ढुलान को लेकर 18 लोगों को अधिकृत किया है। अगर वो सामान ढुलान में कोई दिक्कतें करते हैं तो उन पर एक लाख का जुर्माना भी लगाया जाएगा। ट्रेड यूनियन के अध्यक्ष गोविंद सिंह रावत एवं संरक्षक अवतार सिंह नेगी ने कहा कि केदारनाथ धाम की यात्रा में विशेष समुदाय के लोग हर प्रकार का व्यवसाय कर रहे हैं। राशन, घोड़े-खच्चर, सब्जी और पुनर्निर्माण सामग्री का ढुलान किया जा रहा है।
उनका कहना है कि उत्तरकाशी, टिहरी, पौड़ी, चमोली और रुद्रप्रयाग जिलों की पशु गणना करीब 23 हजार से ज्यादा है। ऐसे में इन्हीं जिलों के घोड़े-खच्चरों का संचालन किया जाए। बाहरी प्रदेशों से आने वाले घोड़े-खच्चर गर्मी से होकर आ रहे हैं, जिससे उनमें हॉर्स फ्लू (इक्वाइन इन्फ्लूएंजा) बीमारी होने खतरा बना हुआ है, जिससे वो यहां के पशुओं को भी बीमार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था के केंद्र केदारनाथ धाम में विशेष समुदाय की नो इंट्री होनी जरूरी है। साथ कहा कि साल 2008-09 में भी बाहरी प्रदेशों से आए घोड़े-खच्चरों के कारण इक्वाइन इन्फ्लूएंजा फैला था। इसीलिए बाहरी प्रदेशों से आने वाले घोड़े-खच्चरों पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाया जाए, नहीं तो बाबा केदार की यात्रा चरमरा जाएगी।
केदारनाथ यात्रा से पहले स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने और बाहरी लोगों की भागीदारी पर अंकुश लगाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। इसके तहत ट्रेड यूनियन ने ‘सामग्री ढुलान समिति’ का गठन किया है, जिसकी अध्यक्षता अनूप गोस्वामी को सौंपी गई है। यह समिति केदारनाथ यात्रा के दौरान पूजा सामग्री, तीर्थ पुरोहित समाज से जुड़ी वस्तुएं, व्यापार संघ से संबंधित सामान और पुनर्निर्माण सामग्री की ढुलाई की पूरी व्यवस्था देखेगी। इस समिति के जरिए केवल स्थानीय युवाओं को ही इस कार्य में शामिल किया जाएगा, जिनकी संख्या 18 बताई गई है, और इन्हें ट्रेड यूनियन की ओर से अधिकृत किया गया है। इन अधिकृत युवाओं के साइन बोर्ड भी केदारनाथ मार्ग के विभिन्न स्थानों पर लगाए गए हैं, ताकि यात्रियों और व्यापारियों को स्पष्ट जानकारी मिल सके कि केवल इन्हीं के जरिए सामग्री ढुलान किया जा सकता है। ट्रेड यूनियन के इस निर्णय को क्षेत्रीय विधायक, पर्यटन मंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री की सहमति भी प्राप्त हो चुकी है। यह कदम जहां एक ओर स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की पहल के रूप में देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर बाहरी प्रदेशों और विशेष समुदाय से आने वाले लोगों की भागीदारी पर रोक को लेकर विवाद भी खड़ा हो सकता है।
उत्तराखंड को रेल कनेक्टिविटी में नया आयाम, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे परियोजना का तेजी से निर्माण..
उत्तराखंड: उत्तराखंड में 125 किलोमीटर लंबी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे परियोजना अब तेजी से आकार ले रही है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य उत्तराखंड के दुर्गम हिमालयी क्षेत्रों को रेल के माध्यम से जोड़ना है, जिससे राज्य में यातायात और आर्थिक गतिविधियां बेहतर होंगी। अब तक इस परियोजना के तहत 11 मुख्य सुरंगों और 8 बड़े पुलों का निर्माण पूरी तरह से समाप्त हो चुका है। इसके साथ ही शेष कार्य तीव्र गति से चल रहा है और उम्मीद की जा रही है कि इस परियोजना का काम जल्द ही पूरा होगा। यह परियोजना न केवल क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देगी, बल्कि इससे पर्यटन और स्थानीय व्यापार को भी लाभ होगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत 1996 में तत्कालीन रेल मंत्री सतपाल महाराज द्वारा सर्वेक्षण के साथ हुई थी। 2011 में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा आधारशिला रखी गई, लेकिन राजनीतिक मतभेदों के कारण कार्य में देरी हुई।
गढ़वाल रीजन में रेलवे निर्माण का कार्य शुरू किया गया..
2015 में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने इसे प्राथमिकता देते हुए निर्माण कार्य तेज किया। 2018 में वीरभद्र रेलवे स्टेशन से योग नगरी ऋषिकेश तक पहले ब्लॉक सेक्शन का काम शुरू हुआ और 2020 में पूरा हुआ। पहाड़ में सुरंग और पुल निर्माण के लिये डिजाइन अनुबंध 2019 में किये गये। इसके बाद गढ़वाल रीजन में रेलवे निर्माण का कार्य शुरू किया गया।
2015 में केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में इस परियोजना को प्राथमिकता देते हुए इसके निर्माण कार्य को तेज किया। 2018 में वीरभद्र रेलवे स्टेशन से योग नगरी ऋषिकेश तक पहले ब्लॉक सेक्शन का काम शुरू हुआ, जो 2020 में पूरा हुआ। इसके बाद पहाड़ी क्षेत्र में सुरंगों और पुलों के निर्माण के लिए डिजाइन अनुबंध 2019 में किए गए थे। इसके परिणामस्वरूप गढ़वाल रीजन में रेलवे निर्माण कार्य का शुभारंभ हुआ। इस परियोजना का लक्ष्य केवल राज्य के दुर्गम क्षेत्रों को जोड़ना नहीं है, बल्कि पर्यटन, व्यापार, और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार के अवसर प्रदान करना भी है। इस परियोजना में कुल 35 पुलों में से 19 प्रमुख पुलों का निर्माण किया जाना है, जिनमें से 8 पहले ही तैयार हो चुके हैं। यह लाइन ऋषिकेश (385 मीटर ऊँचाई) से शुरू होकर कर्णप्रयाग (825 मीटर ऊँचाई) तक जाएगी और इसमें 12 नए स्टेशन बनेंगे। जिनमें योग नगरी ऋषिकेश पहला रेलवे स्टेशन बन चुका है अब मुनिकी रेती, शिवपुरी, मंजिलगाँव, सकनी, देवप्रयाग, कीर्तिनगर, श्रीनगर, धारी देवी, घोलतीर, गौचर, और कर्णप्रयाग शामिल हैं।
सीएम धामी ने उच्च शिक्षा की समीक्षा बैठक में दिए अहम निर्देश..
उत्तराखंड: सीएम पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को सचिवालय में उच्च शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक की। इस बैठक में सीएम ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि राज्य में उच्च शिक्षा का स्तर केवल डिग्री तक सीमित न रह जाए, बल्कि इसे युवाओं को सीधे रोजगार से जोड़ने वाली दिशा में विकसित किया जाए। सीएम धामी का कहना हैं कि राज्य के उच्च शिक्षा संस्थानों को इस दिशा में काम करना होगा ताकि युवाओं को न केवल उच्च शिक्षा मिले, बल्कि वे पढ़ाई के बाद रोजगार के लिए भी तैयार हों। इसके लिए उन्होंने शिक्षा प्रणाली में व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को शामिल करने की बात की, ताकि युवा बेहतर कैरियर विकल्प चुन सकें और राज्य में रोजगार की स्थिति भी मजबूत हो।
सीएम धामी ने गुरुवार को उच्च शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में एक अहम निर्देश दिया। उन्होंने अधिकारियों को कहा कि विदेशों में मानव संसाधन की बढ़ती मांग के अनुरूप उत्तराखंड के युवाओं को प्रशिक्षित किया जाए। इसके लिए उन्हें विदेशी भाषाओं का ज्ञान और कौशल प्रशिक्षण भी दिया जाए, ताकि उत्तराखंड का युवा वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा में खड़ा हो सके। राज्य को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए युवाओं को विभिन्न भाषाओं और तकनीकी कौशल में प्रशिक्षित किया जाना चाहिए। इसके साथ ही, उन्होंने अधिकारियों को यह निर्देश भी दिए कि विदेशी दूतावासों से संपर्क स्थापित किया जाए और विभिन्न देशों की मांग के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किए जाएं।
प्रोफेसर को दिया जाए तकनीक आधारित प्रशिक्षण..
बैठक में सीएम धामी ने यह भी कहा कि उच्च शिक्षा को गुणवत्तापरक बनाने के लिए प्रोफेसर को आधुनिक तकनीक आधारित प्रशिक्षण दिया जाए। शिक्षण को रोचक बनाने के लिए टूल्स, डिजिटल सामग्री और सहायक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की लाइब्रेरी में पर्याप्त किताबें हों और प्रयोगशालाओं में सभी आवश्यक उपकरण मौजूद रहें, यह भी सुनिश्चित किया जाए।
सीएम ने राज्य सरकार की भारत दर्शन योजना का ज़िक्र करते हुए कहा कि मेधावी छात्रों को देश के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों का भ्रमण कराया जाए ताकि वे उच्चतर शैक्षणिक व व्यावसायिक अवसरों से परिचित हो सकें। सीएम ने नैक ग्रेडिंग सिस्टम के तहत राज्य के अधिकतम कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को लाने के निर्देश भी दिए और कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप उच्च शिक्षा को तेजी से अपग्रेड किया जाए।
चारधाम यात्रा में तीर्थयात्रियों को मिलेगा रियल-टाइम अपडेट,मदद के लिए एक्टिव होगा कंट्रोल रूम..
उत्तराखंड: चारधाम यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं को इस बार बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। बुधवार को डीजीपी दीपम सेठ ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर यात्रा तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में बताया गया कि तीर्थयात्रियों को मोबाइल पर यात्रा से जुड़ी सभी गतिविधियों का रियल-टाइम अपडेट उपलब्ध कराया जाएगा। इस अपडेट में यातायात व्यवस्था, मौसम, मार्ग की स्थिति और भीड़ नियंत्रण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी शामिल रहेगी। इससे श्रद्धालु अपनी यात्रा को और अधिक सुरक्षित व व्यवस्थित बना सकेंगे। पुलिस विभाग यात्रा मार्गों पर सुरक्षा, संचार और सुविधा व्यवस्थाओं को मजबूत करने में जुटा है ताकि यात्रा अनुभव को बेहतर बनाया जा सके।
ये जानकारियां भी दीं
– गढ़वाल रेंज कार्यालय में स्थापित चारधाम कंट्रोल रूम को जल्द शुरू करने के निर्देश दिए।
– यात्रा मार्गों की ट्रैफिक योजना, भीड़ नियंत्रण, पार्किंग और सुरक्षा व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जाए।
– उत्तराखंड पुलिस मोबाइल एप में रियल-टाइम अपडेट, इमरजेंसी हेल्पलाइन और रूट अपडेट जैसी सेवाएं सक्रिय की जाएं।
केदारनाथ यात्रा- शटल सेवा में टैक्सी-मैक्सी चालकों के लिए ग्रीन कार्ड अनिवार्य..
उत्तराखंड: आगामी 2 मई से शुरू हो रही केदारनाथ यात्रा के दौरान शटल सेवा के तहत चलने वाले सभी टैक्सी-मैक्सी चालकों के लिए ग्रीन कार्ड अनिवार्य कर दिया गया है। ग्रीन कार्ड के बिना किसी भी वाहन का पंजीकरण नहीं किया जाएगा। परिवहन विभाग ने जिले में संचालित सभी टैक्सी-मैक्सी यूनियनों से वाहनों की जानकारी मांगी है, ताकि उनका संचालन रोटेशन सिस्टम के आधार पर किया जा सके। इसका उद्देश्य यह है कि अधिक से अधिक स्थानीय चालकों को रोजगार का अवसर मिले और यात्रा व्यवस्था भी सुव्यवस्थित बनी रहे।
गौरीकुंड राजमार्ग पर सोनप्रयाग से गौरीकुंड तक संचालित शटल सेवा को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए परिवहन विभाग ने नई कार्ययोजना तैयार की है। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी कुलवंत सिंह चौहान का कहना हैं कि इस बार शटल सेवा के संचालन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से जिले की सभी टैक्सी-मैक्सी यूनियनों से वाहनों की जानकारी मांगी गई है। इन वाहनों का संचालन रोटेशन प्रणाली के तहत किया जाएगा, ताकि हर चालक को रोजगार का अवसर मिल सके।
इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि शटल सेवा में भाग लेने वाले सभी वाहन चालकों के लिए ‘ग्रीन कार्ड’ अनिवार्य कर दिया गया है। बिना ग्रीन कार्ड के किसी भी वाहन का पंजीकरण नहीं होगा और उसे सेवा में शामिल नहीं किया जाएगा। परिवहन विभाग का लक्ष्य है कि केदारनाथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित आवागमन की सुविधा मिले, साथ ही स्थानीय चालकों को अधिकतम रोजगार भी सुनिश्चित किया जा सके। यात्रा के पहले चरण में रोटेशन व्यवस्था एक-एक सप्ताह के लिए होगी। यात्रियों को शटल सेवा से एक तरफा 50 रुपये सवारी किराया देना होगा। रोटेशन के तहत सभी को काम मिल सकेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में वाहनों का संचालन होता रहेगा।
उत्तराखंड में 1 मई से अनिवार्य होगी बायोमेट्रिक उपस्थिति, संपत्ति विवरण भी अब होगा जरूरी..
उत्तराखंड: सरकारी विभागों में अब कर्मचारियों की उपस्थिति और नैतिक जवाबदेही को और सख्ती से लागू किया जाएगा। मंगलवार को मुख्य सचिव आनंद वर्धन की अध्यक्षता में सचिव समिति की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। 1 मई 2025 से सभी विभागों में अधिकारियों व कर्मचारियों की उपस्थिति बायोमेट्रिक प्रणाली से ही दर्ज होगी। सभी विभागों को बायोमेट्रिक मशीनें और व्यवस्था तत्काल सुनिश्चित करने के निर्देश। सरकारी विभागों में अधिकारी और कर्मचारी अब मनमाने तरीके से ना तो आ सकेंगे और ना ही जा सकेंगे। इसके लिए सभी विभागों में बायोमेट्रिक की सुविधा को व्यवस्थित कर लिया जाए। इसके साथ ही सीएस ने सभी अधिकारियों को इस बाबत निर्देश दिए हैं कि सालाना अपने अचल संपत्तियों की जानकारी देना अनिवार्य होगा।क्योंकि प्रमोशन के समय यह देखा जाएगा कि कार्मिक की ओर से अचल संपत्ति का विवरण दिया गया है या नहीं।
बैठक के दौरान सीएस ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि विभागों की ओर से जनहित और राज्यहित में महत्त्वपूर्ण और प्राथमिकता वाली योजनाओं की सूची तैयार कर लें ।जिससे जनहित से जुड़ी योजनाओं के लिए धनराशि की व्यवस्था की जा सके। साथ ही उन योजनाओं की स्वीकृति के लिए भी कार्रवाई की जा सके ।सीएस ने सभी विभागीय अधिकारियों को इस बाबत निर्देश दिए हैं कि योजनाओं की सूची नियोजन विभाग और मुख्य सचिव कार्यालय को उपलब्ध कराए। मुख्य सचिव ने एक करोड़ से अधिक लागत की परियोजनाओं की समीक्षा पीएम गतिशक्ति पोर्टल के जरिए किए जाने के भी निर्देश दिए हैं। इसके लिए सभी विभागों को आवश्यक तैयारी किए जाने की बात कही है। भविष्य में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में होने वाली ईएफसी पीएम गतिशक्ति पोर्टल के जरिए की जाएगी। विभागीय सचिवगणों से भी विभागीय ईएफसी पीएम गतिशक्ति पोर्टल के जरिए कराए जाने के निर्देश दिए हैं।
ई-डीपीआर तैयार करने के निर्देश..
इसके साथ ही उन्होंने सभी विभागों की ओर से तैयार की जाने वाली विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को ई-डीपीआर के रूप में तैयार किए जाने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि इससे योजनाओं को लागू करने में गति आएगी। कुछ राज्यों में ई-डीपीआर बनाए जाने का कार्य किया जा रहा है। एनआईसी के जरिए इसका अध्ययन कराते हुए भविष्य में परियोजनाओं के लिए ई-डीपीआर बनाए जाने के लिए व्यवस्था की जाए। इसके साथ ही सभी विभागीय सचिव को सचिवालय प्रशासन विभाग की ओर से दिए गए निर्देशों के आधार पर साल में कम से कम एक बार अनुभागाों का विस्तृत निरीक्षण करें।
विभाग पोर्टल पर अपलोड करेंगे परिसंपत्ति का विवरण..
इसी तरह का निरीक्षण रोस्टर के आधार पर अपर सचिवों, संयुक्त सचिवों, उप सचिवों और अनुसचिवों को किए जाने के निर्देश दिए हैं। बैठक में सभी अधिकारियों को अपने विभाग से संबंधित तमाम प्रकार के कामों के लिए एनुअल वर्क प्लान बनाए जाने के निर्देश दिए हैं। ताकि सभी प्रकार के विभागीय कार्यों को समय से पूरा किया जा सके और देरी से बचा जा सके। मुख्य सचिव ने सभी विभागों को अपनी-अपनी परिसम्पत्तियों की सूची तैयार कर इसके लिए बनाए गए पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, तमाम विभागों की ओर से अपनी विभागीय परिसम्पत्तियों की सूची पहले गवर्नमेंट एसेट्स इन्वेंटरी (Government Assets Inventory) पर अपलोड किया गया था। लेकिन सभी विभागों को अपनी-अपनी परिसम्पत्तियों की सूची इस पोर्टल पर अपलोड किए जाने के निर्देश दिए गए।
आईएएस देंगे अचल संपत्ति का ब्योरा..
अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों को वार्षिक गोपनीय प्रविष्टि के बारे में जानकारी देते समय अनिवार्य रूप से अचल संपत्ति का विवरण भी देना अनिवार्य होगा। बैठक के दौरान यह संज्ञान में लाया गया कि कई विभागीय अधिकारियों की ओर से समय से अपनी वार्षिक अचल संपत्ति का विवरण अपने विभागों को उपलब्ध नहीं करा रहे हैं। वार्षिक गोपनीय आख्या के बारे में विवरण देते समय अचल संपत्ति का विवरण घोषित किए जाने को अनिवार्य बनाए जाने के लिए व्यवस्था बनाए जाने के निर्देश दिए हैं। पदोन्नति के समय यह देखा जाएगा कि कार्मिक की ओर से अचल संपत्ति का विवरण दिया गया है या नहीं।
बैठक में देहरादून में राज्य संग्रहालय की आवश्यकता बताई गई है। इसके लिए प्रस्ताव जमा किए जाने के निर्देश दिए गए। कोलागढ़ में स्थित हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र का अधिक से अधिक उपयोग किए जाने के लिए कार्ययोजना बनाए जाने के निर्देश दिए हैं। संस्कृति विभाग में पंजीकृत तमाम तरह के सांस्कृतिक दलों की आपस में प्रतियोगिता कराते हुए पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से इनको श्रेणी ए, बी, सी आदि में रखे जाने के निर्देश दिए गए। ताकि आवश्यकतानुसार इनका उपयोग किया जा सके।
