उत्तराखंड सरकार का बड़ा फैसला, छात्रों को अब मुफ्त में मिलेंगी नोटबुक..
उत्तराखंड: राज्य सरकार ने राज्य के छात्रों के हित में एक बड़ा निर्णय लिया है। अब प्रदेश के राजकीय और सहायता प्राप्त अशासकीय विद्यालयों में कक्षा 1 से 12वीं तक के सभी विद्यार्थियों को निशुल्क नोटबुक (कॉपी) भी उपलब्ध कराई जाएगी। यह निर्णय हाल ही में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया, जिसमें शिक्षा विभाग के इस प्रस्ताव को कैबिनेट की स्वीकृति मिल गई। योजना को आगामी शैक्षणिक सत्र 2025-26 से लागू किया जाएगा। लगभग 10 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं को इस योजना से होगा सीधा लाभ। राज्य सरकार की यह योजना “गेम चेंजर” मानी जा रही है, जिससे छात्रों को पढ़ाई के लिए जरूरी संसाधन बिना आर्थिक बोझ के मिलेंगे।
उत्तराखंड सरकार कक्षा 1 से 12वीं तक के विद्यार्थियों को निशुल्क पुस्तक और ड्रेस उपलब्ध करा रही है. ऐसे में अब उन्हें निशुल्क कॉपियां भी उपलब्ध कराई जाएगी। धामी मंत्रिमंडल की ओर से लिए गए निर्णय के अनुसार, कक्षा 1 से कक्षा 2 के विद्यार्थियों को 100 पेजों का एक नोटबुक दिया जाएगा। इसी तरह कक्षा 3 से कक्षा 5 तक के विद्यार्थियों को 100 पेजों का तीन नोटबुक, कक्षा 6 से कक्षा 8 तक के विद्यार्थियों को 100 पेजों का पांच नोटबुक और कक्षा 9 से कक्षा 12 तक के विद्यार्थियों को 120 पेजों का पांच नोटबुक दिया जाएगा।
उत्तराखंड सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में एक “गेम चेंजर” योजना की घोषणा की है। आगामी शैक्षणिक सत्र 2025-26 से प्रदेश के राजकीय और सहायता प्राप्त अशासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा 1 से 12वीं तक के सभी छात्र-छात्राओं को हर वर्ष निशुल्क नोटबुक (कॉपी) उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही विद्यार्थियों को नोटबुक खरीदने के लिए DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के ज़रिए राशि सीधे उनके खातों में दी जाएगी। करीब 10 लाख से अधिक विद्यार्थी इस योजना से लाभान्वित होंगे। शिक्षा विभाग इस योजना पर लंबे समय से काम कर रहा था। अब जब मंत्रिमंडल ने प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है, तो इसके क्रियान्वयन की प्रक्रिया में तेजी लाई जा रही है।
वेद-पुराण की शिक्षा का नया केंद्र, दून विश्वविद्यालय में शुरू होगा हिंदू स्टडीज सेंटर..
उत्तराखंड: उत्तराखंड की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को वैश्विक स्तर पर मजबूती देने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने घोषणा की है कि दून विश्वविद्यालय में जल्द ही ‘सेंटर फॉर हिंदू स्टडीज’ की स्थापना की जाएगी। यह केंद्र हिंदू सभ्यता, संस्कृति, साहित्य और दर्शन पर केंद्रित शिक्षण व शोध कार्यों का प्रमुख केंद्र बनेगा। इस का उद्देश्य छात्रों को हिंदू दर्शन, वेद, उपनिषद, पुराण, स्मृतियां और इतिहास पर गहन अध्ययन और शोध कराना होगा।
सीएम धामी का कहना हैं कि दून विश्वविद्यालय में बनने वाला सेंटर फॉर हिंदू स्टडीज पूरी तरह शोध और अध्यात्म को समर्पित होगा। इसमें वैदिक साहित्य, भारतीय दर्शन, संस्कृति, योग, आयुर्वेद, कला और शास्त्रों पर आधुनिक और पारंपरिक दोनों पद्धतियों से अध्ययन कराया जाएगा। सीएम ने कहा कि उत्तराखंड पहला राज्य है जिसने समान नागरिक संहिता (UCC) लागू किया है। इसके ज़रिए हमने जाति, धर्म और लिंग के आधार पर होने वाले कानूनी भेदभाव को खत्म कर दिया है।
सीएम धामी ने की विदेश नीति की सराहना..
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति की सराहना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक पृथ्वी – एक परिवार – एक भविष्य की भावना को पूरी दुनिया में पहुंचाया है। चाहे कोविड वैक्सीन वितरण हो या म्यांमार में भूकंप राहत, भारत ने हर मौके पर मानवता को प्राथमिकता दी है।
कैंसर मरीजों के लिए राहत की खबर, एम्स में PET-CT और PACS सुविधा शुरू होने को तैयार..
उत्तराखंड: एम्स ऋषिकेश के पांचवें दीक्षांत समारोह के बाद संस्थान में कई अत्याधुनिक चिकित्सा सेवाएं शुरू होने जा रही हैं। इनमें सबसे खास है पीईटी-सीटी मशीन, जो विशेष रूप से कैंसर की शुरुआती और सटीक पहचान में मददगार होगी। यह तकनीक पारंपरिक एमआरआई की तुलना में अधिक कारगर और तेज मानी जाती है। पॉज़िट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी (PET) और कम्प्यूटेड टोमोग्राफी (CT) को मिलाकर तैयार यह मशीन शरीर में कैंसर कोशिकाओं की सक्रियता को पहचानने में सक्षम है। यह तकनीक कैंसर की स्टेजिंग, ट्रीटमेंट प्लानिंग और रिकरेंस मॉनिटरिंग में अहम भूमिका निभाती है। अब कैंसर मरीजों को जांच के लिए दिल्ली या दूसरे बड़े शहरों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा।
मंगलवार को दीक्षांत समारोह के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा एम्स के एयरोमेडिकल सेवाओं का दौरा करेंगे। इसके साथ ही ट्रॉमा सेंटर में पिक्चर आर्काइविंग एंड कम्युनिकेशन सिस्टम (पीएसीएस) का उद्घाटन करेंगे। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री पीईटी सीटी सुविधा और उन्नत बाल चिकित्सा हेतु नवनिर्मित सेंटर फॉर एडवांस्ड पीडियाट्रिक्स का भी लोकार्पण भी करेंगे। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री धामी आयुष भवन में एकीकृत चिकित्सा विभाग, आयुष एकीकृत कल्याण पथ और योग स्टूडियो का भी उद्घाटन करेंगे।
पीईटी सीटी, सिर्फ कैंसर से प्रभावित कोशिक को करती है टारगेट..
अब एम्स ऋषिकेश में प्रारंभिक चरण में ही कैंसर रोग की पहचान हो सकेगी। मंगलवार से यहां पीईटी सीटी मशीन (पॉजिट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी और कम्प्यूटरीकृत टोमोग्राफी) से कैंसर रोग की जांच व उपचार हो सकेगी। उक्त अत्याधुनिक मशीन को लगाने और खरीदने की परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड मुंबई से एम्स प्रशासन को अनुमति मिल चुकी थी। इस मशीन से कैंसर के रोगियों की जांच व उपचार करने वाला एम्स उत्तराखंड का पहला सरकारी चिकित्सा संस्थान होगा। अभी तक यहां कैंसर रोगियों की जांच के लिए एमआरआई व सीटी स्कैन का सहारा लिया जाता है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि एमआरआई व सीटी स्कैन की जांच में 40 से 45 फीसदी मरीजों में प्रारंभिक चरण में कैंसर का पता नहीं लग पाता है। पीईटी सीटी मशीन प्रारंभिक चरण में कैंसर का पता लगाने में मदद करता है। इस मशीन से एमआरआई की अपेक्षा कैंसर की जांच व पहचान जल्दी होती है। साथ ही यह उपचार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस मशीन से उपचार का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह मशीन उपचार के दौरान केवल उसी कोशिका को टारगेट करती है, जो कैंसर से प्रभावित है। अन्य अंगों या कोशिकाओं पर यह कोई प्रभाव नहीं डालती है। जिससे इसके दुष्परिणाम नहीं होते हैं। जबकि कैंसर के अन्य उपचार विधियों में प्रभवित अंगों के साथ ही अन्य अंग या कोशिकाएं प्रभावित होती हैं।
क्या है पैक्स..
पिक्चर आर्काइविंग एंड कम्युनिकेशन सिस्टम (पैक्स) एक मेडिकल इमेजिंग तकनीक है जो चिकित्सा छवियों को संग्रहीत, एक्सेस और वितरित करने के लिए एक केंद्रीकृत सिस्टम प्रदान करती है। यह सिस्टम अलग-अलग इमेजिंग उपकरणों (जैसे एक्स-रे, सीटी स्कैन, एमआरआई, अल्ट्रासाउंड) से छवियों को प्राप्त करता है और उन्हें एक सुरक्षित और सुलभ तरीके से संग्रहीत करता है।
हर साल फीस में उछाल, लेकिन शिक्षक रह गए बेहाल, ये है निजी स्कूलों का हाल..
उत्तराखंड: प्रदेश के निजी स्कूल एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह है शिक्षकों को मिलने वाला कम वेतन, जबकि दूसरी ओर अभिभावकों से बढ़ी हुई फीस और गैरज़रूरी चार्ज के नाम पर मोटी रकम वसूली जा रही है। सवाल उठता है कि जिन स्कूलों में लाखों रुपये की फीस ली जाती है, वहीं शिक्षकों की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर क्यों है? अभिभावकों का कहना है कि वे हर महीने भारी-भरकम फीस भरते हैं, जिसमें ट्यूशन फीस, स्मार्ट क्लास चार्ज, डेवलपमेंट फीस और एडमिनिस्ट्रेशन फीस जैसी कई मदें शामिल होती हैं। इसके बावजूद शिक्षकों को मानदेय के नाम पर न्यूनतम वेतन से भी कम राशि दी जाती है। बात करें प्राथमिक कक्षाओं की तो कई स्कूलों में शिक्षकों को 5 से 8 हजार रुपये प्रति माह तक पर काम कराया जा रहा है। वहीं उच्च कक्षाओं के शिक्षक भी मुश्किल से 15 से 20 हजार के दायरे में सिमटे हुए हैं। इससे उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ रहा है। शिक्षक संगठनों और कुछ अभिभावक संघों ने इस पर नाराजगी जताते हुए सरकार से सख्त कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि स्कूल भारी-भरकम फीस वसूल रहे हैं, तो उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि शिक्षकों को सम्मानजनक वेतन मिले
अभिभावकों से अक्सर तर्क दिया जाता है कि स्कूल फीस इसलिए बढ़ाते हैं क्योंकि हर साल शिक्षकों की तनख्वाह भी बढ़ाई जाती है. लेकिन जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है। आज भी प्रदेश के सैकड़ों निजी स्कूलों में शिक्षक और कर्मचारी बेहद कम वेतन में काम करने को मजबूर हैं। दिलचस्प बात ये है कि सरकार ने पहले ही इस पर एक स्पष्ट आदेश जारी कर रखा है। आपको बता दे कि 26 जून 2007 को तत्कालीन शिक्षा सचिव डीके कोटिया ने निर्देश दिए थे कि राज्य के आईसीएसई और सीबीएसई स्कूलों को शिक्षकों और कर्मियों को वेतन और भत्ते उसी स्तर पर देने होंगे, जैसे सरकार सहायता प्राप्त स्कूलों में देती है। लेकिन आज भी ये आदेश शिक्षा विभाग की फाइलों में धूल फांक रहा है।
स्कूल प्रबंधन अपने हिसाब से तय करता है शिक्षकों का वेतन..
2018 में सीबीएसई ने अपने एफिलिएशन बायलॉज के अध्याय-5 में साफ कर दिया था कि निजी स्कूलों को अपने स्टाफ को सरकार द्वारा तय मानकों के अनुरूप वेतन देना होगा। इस आदेश के बाद भी अधिकांश स्कूल प्रबंधन अपने हिसाब से शिक्षकों का वेतन तय करते हैं। जिसकी न कोई तय नीति है, न पारदर्शिता।
चारधाम यात्रा में पहली बार तैनात होंगे पीजी डॉक्टर, तीर्थयात्रियों को मिलेगा मजबूत स्वास्थ्य सुरक्षा कवच..
उत्तराखंड: चारधाम यात्रा को लेकर इस बार राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) की अनुमति के बाद यात्रा मार्गों पर पहली बार पीजी (पोस्ट ग्रेजुएट) डॉक्टरों की तैनाती की जा रही है। इस कदम से यात्रा में शामिल लाखों श्रद्धालुओं को बेहतर और विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। NMC की घोषणा के बाद देशभर के मेडिकल कॉलेजों से पीजी डॉक्टर यात्रा में स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए संपर्क कर रहे हैं। उत्तराखंड शासन ने स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता देते हुए इस प्रस्ताव को मंजूरी दी है। बता दे कि अब तक चारधाम यात्रा के दौरान अधिकतर जगहों पर प्राथमिक उपचार या सामान्य चिकित्सा सेवा ही उपलब्ध होती थी। लेकिन इस बार विशेषज्ञ डॉक्टरों की मौजूदगी से जटिल और आकस्मिक स्थितियों से भी प्रभावी तरीके से निपटा जा सकेगा। राज्य सरकार की मंशा है कि केदारनाथ, बद्रीनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री जैसे उच्च हिमालयी क्षेत्रों में यात्रा के दौरान स्वास्थ्य सेवाएं पहले से कहीं अधिक सशक्त और भरोसेमंद हों। देश के अलग-अलग राज्यों से पीजी डॉक्टर इस सेवा के लिए आगे आ रहे हैं। यह न केवल श्रद्धालुओं के लिए लाभदायक होगा, बल्कि पीजी डॉक्टरों को वास्तविक परिस्थितियों में कार्य अनुभव भी मिलेगा। यह व्यवस्था मेडिकल शिक्षा और सामाजिक सेवा दोनों के लिहाज़ से एक मिसाल बनने जा रही है।
एमडी, एमएस व डीएनबी पीजी डॉक्टर चारधाम यात्रा में सेवा देकर डिस्ट्रिक्ट रेजीडेंसी प्रोग्राम (डीआरपी) प्रमाणपत्र प्राप्त कर सकेंगे। एनएमसी ने स्पष्ट किया है कि यात्रा के दौरान दी गई सेवाएं क्लीनिकल रोटेशन या डीआरपी के तहत मान्य होंगी। डॉक्टरों को इसके लिए अलग से तीन माह की ट्रेनिंग नहीं करनी पड़ेगी।
तीर्थयात्रियों को विशेषज्ञ सेवाएं मिलेगी..
प्रदेश सरकार ने चारधाम यात्रा में तीर्थयात्रियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए एनएमसी से पीजी डॉक्टरों की स्वैच्छिक तैनाती की अनुमति मांगी थी। एनएमसी की मंजूरी के बाद अब देश भर के मेडिकल कॉलेजों से पीजी कर रहे डॉक्टरों से यात्रा में सेवाएं देने के लिए सकारात्मक प्रक्रिया मिल रही है।स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार का कहना हैं कि पीजी डॉक्टरों की यात्रा में तैनाती के निर्णय से तीर्थयात्रियों को विशेषज्ञ सेवाएं मिलेगी। इसके साथ ही प्रशिक्षु डॉक्टरों को उच्च हिमालयी चिकित्सा और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने का व्यावहारिक अनुभव भी मिलेगा।
उत्तराखंड में नई शराब दुकानों पर रोक, सीएम धामी ने दिए कड़े निर्देश..
उत्तराखंड: अब फिलहाल उत्तराखंड में नई शराब की दुकानें नहीं खुलेंगी। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने इस संबंध में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में नई मदिरा दुकानों के खुलने को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं, जिस पर संज्ञान लेते हुए यह निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार शराब दुकानों को लेकर जनभावनाओं और सामाजिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए फिलहाल नई दुकानें खोलने की प्रक्रिया को स्थगित करने के आदेश दिए गए हैं। सीएम धामी ने मुख्य सचिव को निर्देशित किया कि वे इस संबंध में तत्काल प्रभाव से कार्यवाही सुनिश्चित करें, ताकि जनता की चिंताओं का समाधान हो सके और भविष्य में इस विषय पर कोई भी निर्णय सार्वजनिक हित को ध्यान में रखकर लिया जा सके। हाल ही में प्रदेश के कई जिलों से यह शिकायतें सामने आई थीं कि नई शराब की दुकानें धार्मिक स्थलों, रिहायशी इलाकों और स्कूलों के पास खोली जा रही हैं, जिससे सामाजिक विरोध भी बढ़ रहा था। इन परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने यह निर्णय लिया।
बता दें कि नई आबकारी नीति के तहत सरकार ने पहले ही धार्मिक स्थलों के आसपास शराब की दुकानों पर प्रतिबंध लगा दिया है। मुख्यमंत्री ने भी निर्देश दिए थे कि शिक्षण संस्थाओं और धार्मिक स्थलों के आसपास मदिरा की दुकानें नहीं खोली जाएं। सीएम धामी ने भी पहले स्पष्ट निर्देश दिए थे कि इन संवेदनशील क्षेत्रों के आस-पास शराब की दुकानें किसी भी स्थिति में नहीं खोली जाएं।
सूत्रों के अनुसार हाल ही में कई जिलों में जिलाधिकारियों के समक्ष शराब की नई दुकानों को लेकर दर्ज की गई आपत्तियों की संख्या बढ़ी है। लोगों ने धार्मिक स्थलों, स्कूलों और रिहायशी इलाकों के पास शराब की दुकानें खोले जाने पर नाराजगी जताई थी। इन जनप्रतिनिधित्वों को गंभीरता से लेते हुए मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि सभी जिलाधिकारी स्थानीय स्तर पर आपत्तियों की समीक्षा करें और नई दुकानों के संबंध में किसी भी निर्णय से पहले जनभावनाओं को प्राथमिकता दें।
चारधाम यात्रा में विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं देंगी निजी मेडिकल संस्थाएं, सरकार ने शुरू की तैयारी..
उत्तराखंड: चारधाम यात्रा के दौरान यात्रियों की स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर एक अहम कदम उठाया गया है। उत्तराखंड सरकार अब निजी मेडिकल संस्थानों के विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं भी लेगी। इसको लेकर राज्य के स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल कॉलेजों के बीच बातचीत प्रारंभ हो चुकी है। प्रदेश में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। हर साल चारधाम यात्रा में लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की विशेष जरूरत महसूस होती है। ऐसे में विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती से आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को और मज़बूती मिलेगी। बता दे कि बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में यात्रा मार्गों पर बनाए गए स्वास्थ्य शिविरों , बेस अस्पतालों और मोबाइल मेडिकल यूनिट्स में भी विशेषज्ञों की ड्यूटी लगाई जाएगी। स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेजों से संपर्क करना शुरू कर दिया है। जल्दी ही एमओयू (MoU) साइन किए जाएंगे, जिसमें डॉक्टरों की नियुक्ति, ड्यूटी रोटेशन, सेवाओं की अवधि और सुविधा शुल्क आदि तय होंगे।
इस बार यात्रा मार्गों और धामों में निजी मेडिकल संस्थानों के विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं ली जाएंगी। इसकी पुष्टि स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने की है। सरकार की ओर से इस योजना को अमल में लाने के लिए डॉ. रावत की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें राज्य के निजी और सरकारी मेडिकल कॉलेजों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में डॉक्टरों की संख्या, तैनाती स्थल, सेवाओं की अवधि और सहयोगी व्यवस्थाओं पर चर्चा हुई। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार पहले चरण में लगभग 50 विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती के आदेश जारी कर दिए गए हैं। यह डॉक्टर चारों धामों बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के साथ-साथ यात्रा मार्गों पर बनाए गए चिकित्सा शिविरों और मोबाइल मेडिकल यूनिट्स में सेवाएं देंगे। यात्रा मार्गों के साथ चारधामों में दो सौ डॉक्टरों व पैरामेडिकल स्टाफ को रोटेशन के आधार तैनात किया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री डॉॅ. धन सिंह रावत ने कहा कि चारधाम यात्रा में आने वाले यात्रियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।
सचिवालय का ई-ऑफिस अपग्रेड, सुचारू हुई सेवाएं, अब जिलों में पहुंचेगी डिजिटल क्रांति..
उत्तराखंड: सचिवालय में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए ई-ऑफिस प्रणाली को अब और अधिक सुव्यवस्थित और उन्नत बना दिया गया है। राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) ने सचिवालय का ई-ऑफिस सफलतापूर्वक अपग्रेड कर दिया है, जिससे अब पूरा प्रशासनिक कार्यकाज सुचारू रूप से संचालित हो रहा है। एनआईसी ने पिछले सप्ताह दो दिनों के लिए सचिवालय की ई-ऑफिस सेवाओं को स्थगित कर तकनीकी सुधार किए थे। इस दौरान सभी आवश्यक डेटा और प्रक्रियाओं को नई प्रणाली में सफलतापूर्वक ट्रांसफर किया गया। सचिवालय में अपग्रेडेशन कार्य के सफल होने के बाद, एनआईसी अब आईटीडीए (ITDA) के माध्यम से राज्य के 12 अन्य विभागों/क्षेत्रों में भी ई-ऑफिस अपग्रेडेशन का काम चरणबद्ध ढंग से करने जा रहा है। इससे पूरे प्रदेश में प्रशासनिक प्रक्रियाएं और अधिक पारदर्शी, तेज़ और पेपरलेस होंगी।
अपर सचिव आईटी नितिका खंडेलवाल का कहना हैं कि सचिवालय में ई-ऑफिस अपग्रेडेशन का कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण हो चुका है और अब सभी सेवाएं सामान्य रूप से संचालित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि “नवीनतम वर्जन आने के बाद ई-ऑफिस प्रणाली अब और अधिक सुरक्षित और दक्ष हो गई है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि इससे अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए फाइल प्रोसेसिंग और सूचना आदान-प्रदान की प्रक्रिया और अधिक तेज़, पारदर्शी और निर्बाध हो गई है। अब 12 अन्य विभागों में ई-ऑफिस को अपग्रेड किया जाना है। अपर सचिव खंडेलवाल ने कहा कि चरणबद्ध तरीके से एनआईसी की टीम यहां भी अपग्रेड करने का काम करेगी। जिलों व अन्य कार्यालयों में इसकी अलग से सूचना उपलब्ध कराई जाएगी।
चारधाम यात्रा 30 अप्रैल से होगी प्रारंभ, 15 लाख से अधिक श्रद्धालु करा चुके हैं पंजीकरण..
उत्तराखंड: चारधाम यात्रा का शुभारंभ 30 अप्रैल से होने जा रहा है और इसके लिए देशभर के श्रद्धालुओं में गहरी उत्सुकता देखी जा रही है। बद्रीनाथ , केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धामों के दर्शन के लिए अभी तक 15 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों ने पंजीकरण करा लिया है, जो यात्रा की भव्यता और महत्व को दर्शाता है। चारधाम यात्रा हिंदू धर्म में एक अत्यंत पवित्र तीर्थ यात्रा मानी जाती है। यह यात्रा गंगोत्री से शुरू होकर यमुनोत्री, फिर केदारनाथ और अंत में बद्रीनाथ धाम तक पहुंचती है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु कठिन परिस्थितियों में भी इन पावन स्थलों के दर्शन हेतु उत्तराखंड पहुंचते हैं। चारधाम यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। बता दें अभी तक के रजिस्ट्रेशन के अनुसार इस बार सबसे ज्यादा श्रद्धालु महाराष्ट्र से यात्रा में शामिल होने को बेताब हैं। अब तक महाराष्ट्र राज्य के 2 लाख 57 हजार तीर्थयात्री चारधाम यात्रा के लिए पंजीकरण करा चुके हैं, जिससे महाराष्ट्र पहले स्थान पर बना हुआ है। जबकि उत्तर प्रदेश इस सूची में दूसरे स्थान पर है, जहां से अब तक 1 लाख 84 हजार लोगों ने पंजीकरण कराया है। तीसरे नंबर पर आंध्र प्रदेश है, जहां से 1 लाख 67 हजार तीर्थयात्री यात्रा में शामिल होने जा रहे हैं। वही मध्य प्रदेश से 1 लाख 44 हजार, गुजरात से 1 लाख 40 हजार और राजस्थान से 1 लाख श्रद्धालु अब तक रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं।
बाबा केदार के दर्शन के लिए हुए सबसे अधिक पंजीकरण..
चारधामों की बात करें तो केदारनाथ धाम के लिए अब तक सबसे ज्यादा पंजीकरण हुए हैं। कुल 5 लाख 19 हजार से अधिक श्रद्धालु केदारनाथ धाम के दर्शन को रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं। जबकि बद्रीनाथ धाम के लिए 4 लाख 58 हजार से ज्यादा, गंगोत्री के लिए 2 लाख 75 हजार, यमुनोत्री के लिए 2 लाख 69 हजार और हेमकुंड साहिब के लिए 21 हजार लोगों ने पंजीकरण कराया है। इसके अलावा असम, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, केरल, मणिपुर, मेघालय, तेलंगाना, तमिलनाडु, उड़ीसा जैसे राज्यों से भी भारी संख्या में श्रद्धालु चारधाम यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन करवा रहे हैं।
चारधाम यात्रा के लिए ऑनलाइन पंजीकरण कैसे करें..
चारधाम यात्रा के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए सबसे पहले आपको पर्यटन विभाग की वेबसाइट http://registrationandtouristcare.uk.gov.inपर लॉगिन करना होगा। इसके बाद आप रजिस्टर और लॉगिन के आप्शन मिलेंगे। यहां पर क्लिक कर लॉगिन कर लें। लॉगिन करने के बाद आपको अपना फोन नंबर, अपने राज्य का नाम, अपना नाम और अन्य जानकारी देनी होगी। इसे भरने के बाद आप रजिस्टर कर पाएंगे।
ऐसे करें रजिस्ट्रेशन
आप व्हाट्सएप नंबर-8394833833 पर yatra (यात्रा) लिख कर मैसेज करके भी पंजीकरण कर सकते हैं। अगर कोई यात्री इन तरीकों से पंजीकरण नहीं कर पा रहे हैं तो वो पर्यटन विभाग ने टोल फ्री नंबर- 0135-1364 पर कॉल करके भी पंजीकरण करवा सकते हैं। आप स्मार्ट फोन पर touristcareruttarakhand मोबाइल एप से पंजीकरण कर सकते हैं।
ऑफलाइन भी कर सकते हैं चार धाम यात्रा पंजीकरण
चारधाम यात्रा के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करने, मैसेज, टोल फ्री नंबर और मोबाइल एप से पंजीकरण करने के साथ ही आप ऑफलाइन भी पंजीकरण भी कर सकते हैं। आपको बता दें कि आप हरिद्वार और ऋषिकेश में ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। इसके लिए दोनों स्थानों पर काउंटर खोले गए हैं।
चारधाम यात्रा- हर कदम पर निगरानी, यात्रा मार्ग पर 3000 सीसीटीवी कैमरे करेंगे पल–पल की रिकॉर्डिंग..
उत्तराखंड: चारधाम यात्रा के लिए इस बार बड़े पैमाने पर सीसीटीवी कैमरों का कवरेज रहेगा। हर वक्त यात्रा मार्ग और प्रमुख स्थानों पर 3000 कैमरों से निगरानी होगी। ये कैमरे जिला पुलिस कंट्रोल रूम और रेंज कार्यालय में बने चारधाम यात्रा कंट्रोल रूम को लाइव फीड मुहैया कराएंगे। ताकि, भीड़ प्रबंधन और यातायात व्यवस्था को सुचारू रखा जा सके। इसके साथ ही यात्रा मार्ग के प्रमुख पड़ावों पर लोगों को सचेत करने के लिए बूथ आदि की व्यवस्था की जा रही है। आपको बता दें कि इस बार चारधाम यात्रा में पहले की अपेक्षा अलग और अत्याधुनिक इंतजाम पुलिस की ओर से किए जा रहे हैं। पहली बार यात्रा मार्ग को सुपर जोन, जोन और सेक्टर में बांटकर फोर्स तैनात की गई है। यहां पर एक सेक्टर में निर्धारित दूरी पर हर वक्त पुलिसकर्मी गश्त करेंगे।
ये न सिर्फ यातायात प्रबंधन में मदद करेंगे बल्कि यात्रियों से बात कर उनकी समस्याओं को भी सुनेंगे। इसके अलावा चारधाम यात्रा की पूरी व्यवस्थाएं देखने के लिए पहली बार गढ़वाल रेंज कार्यालय में एक कंट्रोल रूम स्थापित किया जा रहा है। इस कंट्रोल रूम में एक एएसपी स्तर का अधिकारी हर वक्त यात्रा मार्ग की गतिविधियों पर नजर रखेंगे। इसी तरह अब पहली बार इतना बड़ा सीसीटीवी कवरेज किया जा रहा है। पुलिस महानिरीक्षक कानून व्यवस्था व पुलिस प्रवक्ता डॉ. नीलेश आनंद भरणे ने कहा कि ये सीसीटीवी कैमरे मंदिर क्षेत्र से लेकर यात्रा के हर मुख्य पड़ाव पर लगाए जा रहे हैं। इनमें विकासनगर, ऋषिकेश, हरिद्वार आदि मुख्य पड़ाव शामिल हैं। इन सभी को लाइव रखा जाएगा।
साथ ही इन्हें जिला पुलिस कंट्रोल रूम और रेंज में चारधाम यात्रा कंट्रोल रूम से जोड़ा जाएगा। हर वक्त की गतिविधियों पर इन कैमरों के माध्यम से पुलिस मुख्यालय से भी नजर रखी जाएगी। इन कैमरों की संख्या 3000 से भी अधिक हो सकती है। यात्रा से पहले सभी कैमरे स्थापित कर दिए जाएंगे।
