लखीमपुर खीरी निवासी युवक की कुल्हाल नहर में डूबकर मौत
देहरादून। जनपद देहरादून के कुल्हाल क्षेत्र में नहर में डूबे युवक का शव रेस्क्यू टीम ने बरामद कर लिया है। यह घटना 21 जनवरी 2026 की सायं उस समय सामने आई, जब पुलिस चौकी कुल्हाल को नहर में एक व्यक्ति के डूबने की सूचना मिली।
सूचना मिलते ही अपर उप निरीक्षक आशिक अली के नेतृत्व में रेस्क्यू टीम तत्काल मौके के लिए रवाना हुई। घटनास्थल पर पहुंचकर टीम ने रात के समय ही कुल्हाल नहर में सर्च एवं रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया, लेकिन अंधेरा, तेज जल प्रवाह और प्रतिकूल परिस्थितियों के चलते व्यापक तलाशी संभव नहीं हो सकी। इसके बाद सर्च अभियान को अगले दिन पुनः चलाने का निर्णय लिया गया।
22 जनवरी की सुबह रेस्क्यू टीम ने फिर से घटनास्थल पर पहुंचकर सघन तलाशी अभियान शुरू किया। इस दौरान नहर से एक युवक का शव बरामद किया गया। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के लिए शव को जिला पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया।
बरामद शव की पहचान आरिफ अली (25 वर्ष) पुत्र मुन्ना, निवासी गोला गोकर्ण नाथ, जनपद लखीमपुर खीरी (उत्तर प्रदेश) के रूप में हुई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और घटना के कारणों का पता लगाया जा रहा है।
आयुष्मान योजना से ₹3400 करोड़ का मुफ्त उपचार, लाखों परिवारों को मिली राहत
देहरादून। उत्तराखंड में अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए वास्तविक संजीवनी साबित हो रही है। राज्य में अब तक 17 लाख से अधिक मरीजों को इस योजना के तहत निःशुल्क इलाज मिल चुका है, जबकि जरूरतमंदों के उपचार पर ₹3400 करोड़ से अधिक की राशि खर्च की जा चुकी है।
राज्य सरकार ने 25 दिसंबर 2018 को प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अनुरूप अटल आयुष्मान योजना लागू की थी। इसके तहत प्रत्येक परिवार को प्रतिवर्ष ₹5 लाख तक का निःशुल्क स्वास्थ्य सुरक्षा कवर दिया जा रहा है। अब तक करीब 61 लाख लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं।
योजना का सबसे बड़ा लाभ गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को मिल रहा है, जिन्हें महंगे इलाज के कारण अक्सर उपचार से वंचित रहना पड़ता था। अब वे बिना आर्थिक चिंता के इलाज करा पा रहे हैं।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि जिन परिवारों में 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के बुजुर्ग हैं, उन्हें परिवार के ₹5 लाख के कवर के अतिरिक्त बुजुर्गों के लिए अलग से ₹5 लाख तक की निःशुल्क उपचार सुविधा दी जा रही है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनकल्याणकारी सोच का परिणाम है।
उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में 279 सरकारी और 222 निजी अस्पताल आयुष्मान योजना से सूचीबद्ध हैं, जबकि देशभर में 31 हजार से अधिक अस्पताल इस योजना से जुड़े हुए हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि किसी अस्पताल द्वारा आयुष्मान इलाज के दौरान मरीज से भुगतान की मांग की जाती है तो इसकी शिकायत प्राधिकरण में की जा सकती है।
महंगे इलाज भी निःशुल्क, लाखों मरीजों को मिला जीवनदान
अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना ने राज्य में महंगे और जटिल इलाज को आमजन की पहुंच में ला दिया है। योजना के तहत अब तक लाखों मरीजों को बिना किसी आर्थिक बोझ के उपचार मिला है। खासकर डायलिसिस, हृदय रोग, कैंसर, न्यूरोसर्जरी, नेत्र रोग और जोड़ों के प्रत्यारोपण जैसे खर्चीले इलाज आयुष्मान के माध्यम से निःशुल्क कराए जा रहे हैं।
आंकड़ों के अनुसार, डायलिसिस के 2.67 लाख से अधिक मामलों में 177 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए गए हैं। हृदय रोगों के इलाज में 39 हजार से अधिक मरीजों को लाभ मिला, जिस पर 345 करोड़ रुपये से अधिक की राशि व्यय हुई। कैंसर के 79 हजार से ज्यादा मरीजों का कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी और सर्जरी के माध्यम से इलाज किया गया, जिस पर 221 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुए।इसके अलावा न्यूरोसर्जरी के 11 हजार से अधिक मामलों में करीब 59 करोड़ रुपये, नेत्र रोगों की सर्जरी में 119 करोड़ रुपये, प्रसूति एवं स्त्री रोग उपचार में 60 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की गई है। हिप और नी रिप्लेसमेंट जैसे महंगे ऑपरेशन भी आयुष्मान योजना के तहत निःशुल्क किए गए, जिससे सैकड़ों परिवारों को बड़ी राहत मिली।यह योजना न केवल मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध करा रही है, बल्कि बीमारी के कारण परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक दबाव को भी कम कर रही है। आयुष्मान योजना आज लाखों जरूरतमंदों के लिए जीवनदान साबित हो रही है।
“आयुष्मान योजना ने गरीबों को बीमारी के साथ-साथ आर्थिक चिंता से भी मुक्त किया है। यह योजना न केवल इलाज देती है, बल्कि परिवारों का मनोबल भी बचाती है।”
— डॉ. धन सिंह रावत, स्वास्थ्य मंत्री
एमडीडीए अवैध गतिविधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रहा है- बंशीधर तिवारी
देहरादून – मसूरी–देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा प्राधिकरण क्षेत्रान्तर्गत किए जा रहे अवैध निर्माणों एवं अवैध प्लॉटिंग के विरुद्ध सख्त कार्रवाई लगातार जारी है। एमडीडीए द्वारा नियमों का उल्लंघन कर की जा रही अवैध गतिविधियों पर निरंतर निगरानी रखते हुए सीलिंग एवं ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में प्राधिकरण क्षेत्र में चिन्हित अवैध प्लॉटिंग पर नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। एमडीडीए की टीम द्वारा देहरादून के निकट हरभजवाला पुल क्षेत्र में हितबद्ध व्यक्ति/भू-स्वामी द्वारा लगभग 08 बीघा भूमि में की जा रही अवैध प्लॉटिंग को ध्वस्त किया गया। बिना स्वीकृति विकसित की जा रही इस प्लॉटिंग को विकास प्राधिकरण के नियमों के विपरीत पाया गया, जिस पर तत्काल कार्रवाई करते हुए जेसीबी के माध्यम से ध्वस्तीकरण किया गया।
इसके अतिरिक्त अरुण चौहान द्वारा तुन्तोवाला रोड, मेहुवाला माफी क्षेत्र में लगभग 04 से 05 बीघा भूमि पर की जा रही अवैध प्लॉटिंग पर भी एमडीडीए द्वारा कार्रवाई की गई। संबंधित स्थल पर बिना लेआउट स्वीकृति एवं आवश्यक अनुमति के प्लॉट काटे जा रहे थे। अवैध प्लॉटिंग न केवल शहरी नियोजन को प्रभावित करती है, बल्कि भविष्य में आम नागरिकों को भी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसी को देखते हुए प्राधिकरण द्वारा ऐसी गतिविधियों के विरुद्ध सख्त नीति अपनाई गई है। आमजन से अपील की गई है कि वे किसी भी भूमि या प्लॉट को खरीदने से पहले संबंधित विकास प्राधिकरण से उसकी वैधता की पुष्टि अवश्य करें।
ध्वस्तीकरण की यह कार्रवाई संयुक्त सचिव गौरव चटवाल के आदेशों के अनुपालन में सहायक अभियंता विजय सिंह रावत, अवर अभियंता अभिजीत सिंह थलवाल तथा सुपरवाइजर सहित प्राधिकरण की प्रवर्तन टीम की मौजूदगी में गई। कार्रवाई के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई थीं। भविष्य में भी अवैध निर्माणों और प्लॉटिंग के विरुद्ध इसी प्रकार सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ किसी भी स्तर पर कोई ढील नहीं दी जाएगी।
उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी का बयान
मसूरी–देहरादून विकास प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध निर्माण और अवैध प्लॉटिंग के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। प्राधिकरण का उद्देश्य शहरी विकास को नियोजित और सुरक्षित बनाना है। अवैध प्लॉटिंग से न केवल शहर का स्वरूप बिगड़ता है, बल्कि आम नागरिकों की मेहनत की कमाई भी जोखिम में पड़ जाती है। एमडीडीए अवैध गतिविधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रहा है। हम सभी नागरिकों से अपील करते हैं कि किसी भी प्रकार की भूमि खरीदने से पहले उसकी वैधता की जांच अवश्य करें। भविष्य में भी नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी और किसी को भी कानून से ऊपर नहीं माना जाएगा।
सचिव एमडीडीए मोहन सिंह बर्निया का बयान
प्राधिकरण द्वारा अवैध प्लॉटिंग एवं निर्माण पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जा रही है। आज की कार्रवाई भी उसी क्रम में की गई है। एमडीडीए का प्रयास है कि क्षेत्र में नियोजित विकास सुनिश्चित हो और आमजन को किसी प्रकार की परेशानी न हो। सभी निर्माण कार्य प्राधिकरण की स्वीकृति के बाद ही किए जाएं, यह सुनिश्चित करना भू-स्वामियों की जिम्मेदारी है। अवैध गतिविधियों के विरुद्ध भविष्य में भी नियमित अभियान जारी रहेगा।
आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने ली प्राधिकरण की समीक्षा बैठक, विकास कार्यों में तेजी लाने के दिए निर्देश
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के तहत प्रदेश में आवास एवं नगर विकास से जुड़ी योजनाओं को गति देने के उद्देश्य से आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने पदभार ग्रहण करने के बाद “मसूरी–देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए)” की पहली समीक्षा बैठक ली। सचिवालय स्थित अपने कक्ष में आयोजित इस बैठक में उन्होंने प्राधिकरण की विभिन्न योजनाओं, निर्माणाधीन परियोजनाओं और विकास कार्यों की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की और अधिकारियों को समयबद्ध, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
चल रही परियोजनाओं की गहन समीक्षा
समीक्षा बैठक में मसूरी–देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) की सभी गतिमान परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। इसमें पार्किंग निर्माण, पार्कों का विकास, आवासीय योजनाएं, बाजार पुनर्विकास और अन्य शहरी विकास से जुड़े कार्य शामिल रहे। आवास सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी परियोजनाओं को तय समयसीमा के भीतर पूर्ण किया जाए और निर्माण गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाए। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों की गति के साथ-साथ गुणवत्ता और पारदर्शिता सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
मानचित्र स्वीकृति प्रक्रिया होगी और अधिक सरल व त्वरित
समीक्षा बैठक में मानचित्र स्वीकृति प्रक्रिया की भी समीक्षा की गई। आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मानचित्र स्वीकृति प्रणाली को और अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए, ताकि आम नागरिकों और निवेशकों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि तेज और सुगम प्रक्रिया से शहरी विकास को बढ़ावा मिलेगा और अवैध निर्माण की प्रवृत्ति पर भी अंकुश लगेगा।
स्थलीय निरीक्षण कर खुद करेंगे परियोजनाओं की निगरानी
आवास सचिव ने यह भी कहा कि वे स्वयं सभी महत्वपूर्ण और निर्माणाधीन परियोजनाओं का स्थलीय निरीक्षण करेंगे। उन्होंने कहा कि मौके पर जाकर कार्यों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने से समस्याओं की पहचान आसान होती है और समय रहते उनका समाधान किया जा सकता है। इससे परियोजनाओं की गुणवत्ता और समयबद्धता दोनों सुनिश्चित की जा सकेगी।
ऋषिकेश, देहरादून, आढ़त बाजार व इंदिरा मार्केट परियोजनाएं प्राथमिकता में
समीक्षा बैठक में मसूरी–देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ऋषिकेश, देहरादून तहसील क्षेत्र, आढ़त बाजार और इंदिरा मार्केट से जुड़ी परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति की जानकारी ली गई। आवास सचिव ने इन सभी परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बाजारों और सार्वजनिक स्थलों का सुव्यवस्थित विकास न केवल शहर की सुंदरता बढ़ाता है, बल्कि आमजन को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ स्थानीय व्यापार को भी मजबूती देता है।
पार्कों में गंदगी फैलाने वालों पर लगेगी पेनल्टी
आवास सचिव ने मसूरी–देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा विकसित और संचालित पार्कों के रखरखाव पर भी सख्त रुख अपनाया। उन्होंने निर्देश दिए कि पार्कों में गंदगी फैलाने या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों पर पेनल्टी की प्रभावी व्यवस्था लागू की जाए। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा और स्वच्छता सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है और इसमें नागरिकों की सहभागिता भी जरूरी है।
मास्टर प्लान और लैंड पूलिंग नीति पर बनेगी विशेष कार्ययोजना
डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि आवास विभाग सभी विकास प्राधिकरणों के साथ समन्वय बनाकर काम करेगा। प्राधिकरण स्तर पर शासन में लंबित महत्वपूर्ण योजनाओं को प्राथमिकता पर निस्तारित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सभी विकास प्राधिकरणों के साथ माहवार समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी। प्रदेश के कई शहरों के मास्टर प्लान लंबे समय से लंबित हैं, जिन्हें समयबद्ध रूप से पूरा करने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाई जाएगी। साथ ही लैंड पूलिंग नीति के तहत लैंड बैंक बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा, ताकि सरकारी आवासीय योजनाओं के लिए भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।
अधिकारियों ने दी परियोजनाओं की विस्तृत जानकारी
बैठक से पूर्व प्राधिकरण सचिव मोहन सिंह बर्निया ने आवास सचिव का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने प्राधिकरण की प्रमुख योजनाओं और परियोजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। बैठक में वित्त नियंत्रक संजीव कुमार, अधिशासी अभियंता सुनील कुमार, सहायक अभियंता अजय मलिक, सहायक अभियंता सुनील गुप्ता, लेखपाल नजीर अहमद तथा वास्तुविद दृष्टि जैन सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार का बयान
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के तहत आवास एवं नगर विकास विभाग प्रदेश के सभी विकास प्राधिकरणों के साथ समन्वय बनाकर कार्य करेगा। हमारी प्राथमिकता है कि सभी विकास योजनाएं समयबद्ध, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरी हों। मानचित्र स्वीकृति प्रक्रिया को सरल किया जाएगा और लंबित मास्टर प्लान व लैंड पूलिंग नीति पर विशेष कार्ययोजना बनाकर तेजी से अमल किया जाएगा।
दर्द से विश्वास तक का सफ़र- नारी निकेतन में संवरती ज़िंदगियाँ
देहरादून नारी निकेतन में 178 महिलाओं और 44 बच्चों को मिल रहा सुरक्षित व सम्मानजनक जीवन
देहरादून। देहरादून के केदारपुरम क्षेत्र में स्थित राजकीय नारी निकेतन, बालिका निकेतन, बाल गृह एवं शिशु सदन आज सिर्फ एक सरकारी परिसर नहीं, बल्कि बेसहारा महिलाओं और अनाथ बच्चों के लिए सुरक्षा, सम्मान और नई शुरुआत का सशक्त केंद्र बनकर उभर रहा है। बाहर से साधारण दिखने वाला यह परिसर भीतर से संवेदनशील प्रशासन और मानवीय प्रयासों की जीवंत मिसाल पेश करता है।
मुख्यमंत्री की प्रेरणा और जिला प्रशासन के संकल्प से इन संस्थानों को ऐसा सुरक्षित आश्रय बनाया गया है, जहां परित्यक्त और शोषित महिलाएं तथा बच्चे न केवल छत पाते हैं, बल्कि आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर भी प्राप्त कर रहे हैं। यहां रहने वालों के लिए नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, संतुलित पोषण, स्वच्छ वातावरण और स्नेहपूर्ण देखभाल सुनिश्चित की जा रही है, जिससे उनके शारीरिक और मानसिक घावों पर मरहम लग सके।
जिलाधिकारी सविन बंसल के सतत प्रयासों से बुजुर्ग महिलाओं के लिए 30 बेड का अतिरिक्त भवन लगभग तैयार हो चुका है। यह भवन जीवन के अंतिम पड़ाव पर अकेली रह गई महिलाओं के लिए सम्मान और सुकून का ठिकाना बनेगा। प्रशासन द्वारा निकेतन की व्यवस्थाओं की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है, ताकि किसी भी महिला या बच्चे को असुरक्षा या उपेक्षा का अनुभव न हो।
जिला योजना एवं खनिज न्यास मद से बजट की व्यवस्था कर परिसर के आधारभूत ढांचे को मजबूत किया गया है। सीवर लाइन, डोरमेट्री, आवास, स्वच्छता और अन्य आवश्यक सुविधाओं का विस्तार किया गया है। वर्तमान में नारी निकेतन में 178 बेसहारा, परित्यक्त एवं शोषित महिलाएं रह रही हैं, जबकि बालिका निकेतन में 21 बालिकाएं और बाल गृह एवं शिशु सदन में 23 बच्चे निवासरत हैं। इन सभी को शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विशेष देखभाल प्रदान की जा रही है।
बालक एवं बालिका निकेतन में बच्चों को औपचारिक शिक्षा के साथ-साथ कंप्यूटर शिक्षा भी दी जा रही है। वहीं नारी निकेतन की महिलाओं को सिलाई, कढ़ाई-बुनाई, ऊनी वस्त्र निर्माण और क्राफ्ट डिजाइन जैसे आजीविकापरक प्रशिक्षण प्रदान किए जा रहे हैं। संगीत, योग और वाद्य यंत्र प्रशिक्षण के माध्यम से उनके मानसिक और शारीरिक सशक्तिकरण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
बालिका निकेतन में बालिकाओं के सर्वांगीण विकास के लिए खेल मैदान का निर्माण कराया जा रहा है, जहां खो-खो, कबड्डी, बैडमिंटन और योग जैसी गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को और मजबूत करने के लिए दो अतिरिक्त होमगार्ड, दो नर्सों की तैनाती तथा डॉक्टरों की नियमित विजिट सुनिश्चित की गई है।
परिसर में शौचालय-स्नानागार, डायनिंग एरिया, मंदिर परिसर की ग्रिलिंग, जिम, लॉन्ड्री रूम, रसोई, छत मरम्मत, इन्वर्टर स्थापना सहित कई विकास कार्य पूरे किए गए हैं। बच्चों के लिए पर्याप्त रजाइयों, बेड और गद्दों की भी व्यवस्था की गई है, जिससे उन्हें सुरक्षित और आरामदायक वातावरण मिल सके।
गत दिसंबर में किए गए निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी सविन बंसल ने इन संस्थानों की सभी आवश्यकताओं को प्राथमिकता से पूरा करने का आश्वासन दिया था, जिसका असर अब धरातल पर साफ नजर आने लगा है। प्रशासन की संवेदनशीलता के चलते योजनाएं कागजों से निकलकर जिंदगियों को संवार रही हैं। केदारपुरम का यह निकेतन आज उम्मीद, पुनर्वास और इंसानियत की सशक्त कहानी बन चुका है।
सतपुली में राज्य स्तरीय जलागम महोत्सव 2025-26 का भव्य आयोजन
पौड़ी। नगर पंचायत सतपुली में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना–जलागम विकास घटक के अंतर्गत जलागम महोत्सव 2025-26 का आयोजन कैबिनेट मंत्री एवं चौबट्टाखाल विधायक सतपाल महाराज की अध्यक्षता में भव्य रूप से संपन्न हुआ।
कैबिनेट मंत्री ने विभागीय स्टाॅलों के निरीक्षण के उपरांत बीरोंखाल के मैठाणाघाट, स्यूंसी व फरसाड़ी में बनी जलवायु अनुकूल बारानी कृषि परियोजना यूनिट कार्यालयों का शुभारंभ किया। इस अवसर पर जलागम महोत्सव 2025-26 के अंतर्गत प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना–जलागम विकास घटक 2.0, उत्तराखंड जलवायु अनुकूल बारानी कृषि परियोजना, स्प्रिंग एंड रिवर रिजुवेनेशन अथॉरिटी (सारा), हरित कृषि परियोजना व जैफ-6 परियोजना के अंतर्गत संचालित गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी गयी।
चौबट्टाखाल विधायक एवं जलागम मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि जल संरक्षण और जल संसाधनों का समुचित प्रबंधन उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य के सतत विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। जलागम योजनाओं के माध्यम से वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों का पुनर्जीवन, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार और ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत जलागम विकास घटक से सूखे क्षेत्रों में हरियाली लौट रही है, किसानों की आय बढ़ रही है और गांवों को जल-सुरक्षित बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
सचिव जलागम दिलीप जावलकर ने कहा कि जलागम विकास घटक 2.0 के अंतर्गत वैज्ञानिक, सहभागी और परिणाम- आधारित दृष्टिकोण से योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जलागम परियोजनाओं का उद्देश्य केवल संरचनाएं बनाना नहीं है, बल्कि पानी को रोकना, मिट्टी को बचाना और लोगों की आय में वृद्धि करना है। इन कार्यों से भू-जल स्तर में सुधार, भूमि की उत्पादकता में वृद्धि और प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम में कमी आयी है।
प्रोजेक्ट डायरेक्टर जीईएफ-6 कहकशा नसीम ने कहा कि जलागम परियोजनाओं को जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए डिज़ाइन एवं क्रियान्वित किया जा रहा है। जीईएफ-6, ग्रीन एग्रीकल्चर तथा स्प्रिंग एंड रिवर रिजुवेनेशन परियोजनाओं के माध्यम से सूखते नौले-धारे पुनर्जीवित किए जा रहे हैं, मृदा संरक्षण हो रहा है और पर्यावरण-अनुकूल कृषि को बढ़ावा मिल रहा है। इन प्रयासों से ग्रामीण समुदायों की जलवायु सहनशीलता मजबूत हो रही है।
जलागम महोत्सव 2025-26 के माध्यम से जल संरक्षण एवं जल स्रोतों के पुनर्जीवन, कृषि एवं ग्रामीण आजीविका सुदृढ़ीकरण, पर्यावरण संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन के अनुरूप अनुकूलन, तथा जन सहभागिता के माध्यम से स्थानीय विकास पर विशेष जोर दिया गया। कार्यक्रम के तहत वर्षा जल संचयन, स्प्रिंग रिवाइवल, मृदा संरक्षण एवं ग्रीन एग्रीकल्चर को बढ़ावा देने के साथ-साथ किसानों की आय वृद्धि और गांवों को जल-सुरक्षित बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी साझा की गयी। इस अवसर पर जलागम के तहत उत्कृष्ट कृषकों व ग्रामों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में नगर पंचायत अध्यक्ष सतपुली जितेंद्र चौहान, डीएफओ महातिम यादव, संयुक्त निदेशक जलागम अनुज कुमार डिमरी, उप निदेशक, जलागम डॉ. डी.एस. रावत, ब्लॉक प्रमुख पौड़ी अस्मिता नेगी, ब्लॉक प्रमुख कल्जीखाल गीता देवी, जिलाध्यक्ष भाजपा कमल किशोर रावत सहित बड़ी संख्या में लाभार्थी एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
देहरादून। प्रदेश के कृषि मंत्री गणेश जोशी से आज उनके शासकीय आवास पर प्रदेश की न्याय पंचायतों में तैनात कृषि सहायकों के मानदेय में हुई उल्लेखनीय वृद्धि के उपरांत कृषि सहायकों के पदाधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने भेंट की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने कृषि मंत्री गणेश जोशी का फूलों की माला एवं पुष्प गुच्छ भेंट कर उनका आभार जताया।
गौरतलब हो कि कृषि मंत्री गणेश जोशी के निर्देशों के बाद कृषि सहायकों का मानदेय ₹8300 से बढ़ाकर ₹12391 कर दिया गया। इस अवसर पर कृषि मंत्री गणेश जोशी ने सभी को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि कृषि सहायक लंबे समय से मानदेय बढ़ोतरी की मांग कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में हमारी सरकार पूरी संवदेहनशीलता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि अभी उपनल कर्मचारियों को समान वेतन समान कार्य लाभ दिया गया।

कृषि मंत्री गणेश जोशी ने भरोसा जताया कि मानदेय में वृद्धि से कृषि सहायकों को आर्थिक संबल मिलेगा और वे और अधिक उत्साह के साथ किसानों की सेवा कर सकेंगे। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने विभागीय मंत्री को कृषि सहायकों को आकस्मिक अवकाश के संबंध में भी ज्ञापन सौंपा। कृषि मंत्री गणेश सभी को सकारात्मक आश्वासन देते हुए मामले में शीघ्र कार्यवाही का भरोसा दिलाया।
इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष कुशला सेमवाल, प्रदेश उपाध्यक्ष दिनेश प्रसाद उखियाल, प्रदेश सचिव मनोज भट्ट, कोषाध्यक्ष बलिराम भट्ट, जिलाध्यक्ष सुभाष तोमर, मंगला उनियाल, खजान सिंह, दिनेश पयाल, गिरीश थपलियाल, प्रकाश राणा, श्याम सिंह चौहान आदि उपस्थित रहे।
बजट से पहले मुख्य सचिव को पत्र लिखकर दिया सुझाव
देहरादून। प्रदेश की महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने प्रदेश के बजट का 30% महिलाओं के लिए आरक्षित करने का सुझाव दिया है। इस बारे में कैबिनेट मंत्री ने मुख्य सचिव को पत्र लिखा है।
महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि प्रदेश में लगभग दो दशक से जेंडर बजटिंग की व्यवस्था लागू है, लेकिन शुरू में इसमें बजट का कम हिस्सा दिया जाता था। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने पिछले 5 साल में हर बार जेंडर बजट को बढ़ाया है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश की महिलाओं को सही अर्थों में सशक्त बनाने और आर्थिक-सामाजिक रूप से उनके हाथ मजबूत करने के लिए ज्यादा धन की आवश्यकता है। पत्र में उन्होंने लिखा है कि आगामी बजट में महिला केंद्रित योजनाओं के लिए 30% धन आरक्षित किया जाना चाहिए और हर विभाग में इस नीति का अनुपालन भी निश्चित किया जाए।
गौरतलब है कि उत्तराखंड में जेंडर बजटिंग पिछले 5 वर्षों (2021-22 से 2025-26) में कुल बजट का औसतन 14-16% हिस्सा रहा है 2021-22 में लगभग 12% था, जो 2022-23 में 13.77% पहुंचा। 2023-24 में जेंडर बजट 14% के आसपास रहा, जबकि 2024-25 में 16% आवंटित हुआ। 2025-26 में कुल 1,01,175 करोड़ के बजट में जेंडर बजट का हिस्सा करीब 17% था।
डॉ. नरेश बंसल ने नितिन नबीन को नए दायित्व के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी
देहरादून/नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के नव-नियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से राज्यसभा सांसद डॉ. नरेश बंसल ने शिष्टाचार भेंट कर उन्हें पुष्पगुच्छ भेंट किया और नए दायित्व के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर भाजपा के राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी डॉ. के. लक्ष्मण, राष्ट्रीय सह-चुनाव अधिकारी श्रीमती रेखा वर्मा एवं डॉ. संबित पात्रा भी उपस्थित रहे। सभी नेताओं ने नितिन नवीन को संगठन की कमान संभालने पर शुभेच्छाएं प्रेषित कीं।
डॉ. नरेश बंसल ने अपने संदेश में कहा कि नितिन नबीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किए जाने पर उन्हें हार्दिक बधाई देता हूं। उन्होंने विश्वास जताया कि उनकी ऊर्जा, अनुभव और समर्पण से पार्टी को आने वाले समय में नई मजबूती मिलेगी। डॉ. बंसल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रेरक नेतृत्व में नितिन नबीन भाजपा को सफलता की नई ऊंचाइयों तक ले जाने में सफल होंगे। उन्होंने उनके कार्यकाल की सफलता के लिए मंगलकामनाएं व्यक्त कीं।
अश्वमेध की यज्ञ वेदिकाओं को लेकर हुआ मंथन
देहरादून। अश्वमेध यज्ञ वैदिक धर्म और संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था जो राजाओं द्वारा आयोजित किया जाता था यह राज्य की शक्ति और समृद्धि को बढ़ाने के लिए किया जाता था। उत्तराखंड में भी अश्वमेध यज्ञ होने के अवशेष मिले हैं। हमारा मानना है कि अश्वमेध यज्ञ की जो पूजा की जाति थी वैसी ही पूजा यहां भी की जाये।
उक्त बात प्रदेश के पर्यटन, धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने मुनिस्पिल रोड़ स्थित अपने निजी आवास पर आयोजित पुरातत्व विभाग विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक के पश्चात कही। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के जनपद देहरादून के कालसी हरिपुर में राजा शीलवर्मन ने लगभग 1700 साल पहले चार अश्वमेध यज्ञ किए थे जिसका प्रमाण यहां खुदाई में मिली तीन वेद यज्ञ वेदिकाएं हैं और चौथी वेदिका की खुदाई की जा रही है।
महाराज ने बताया कि उत्तरकाशी जनपद के पुरोला में भी अश्वमेध यज्ञ के अवशेष मिले हैं। यह यज्ञ वेदिकाएं वैदिक धर्म और संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। जिनके संरक्षण के साथ-साथ उन स्थानों पर पूजा अर्चना और अनुष्ठान आदि के विषय में चर्चा की गई।
बैठक में आर्कियोलॉजिकल विभाग के सुप्रीटेंडेंट डा. मोहन चंद्र जोशी, गढ़वाल विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ नागेंद्र रावत, सुनील नेगी, दून विश्वविद्यालय के डा. मानवेंद्र बड़थ्वाल, गुरुकुल महिला महाविद्यालय की असिस्टेंट प्रोफेसर कन्या अर्चना डिमरी आदि उपस्थित थे।
