विभागीय आपदा प्रबंधन योजना बनाने की डेडलाइन तय, 28 फरवरी तक का दिया समय
देहरादून। सेंदाई फ्रेमवर्क (2015-2030) के लक्ष्यों की समयबद्ध प्राप्ति सुनिश्चित करने के लिए सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने राज्य के सभी रेखीय विभागों को अपने-अपने विभागीय आपदा प्रबंधन प्लान को 28 फरवरी तक अनिवार्य रूप से अंतिम रूप देने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि आपदा प्रबंधन योजनाएं केवल औपचारिक दस्तावेज न रहकर विभागीय कार्यप्रणाली का अभिन्न हिस्सा बननी चाहिए, ताकि आपदा के समय त्वरित, समन्वित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन योजना में सेंडई फ्रेमवर्क के अंतर्गत आपदा जोखिम न्यूनीकरण, तैयारी, प्रतिक्रिया और पुनर्बहाली से जुड़े लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सभी विभागों को अपने-अपने दायित्वों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करना होगा। योजनाओं में यह स्पष्ट रूप से अंकित होना चाहिए कि आपदा से पहले, आपदा के दौरान और आपदा के बाद विभाग की भूमिका क्या होगी तथा किस अधिकारी और इकाई द्वारा कौन-सा कार्य किया जाएगा।
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान सचिव सुमन ने निर्देश दिए कि प्लान में विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों एवं आम जनमानस के क्षमता विकास को विशेष प्राथमिकता दी जाए। इसके लिए प्रत्येक विभाग वार्षिक प्रशिक्षण कैलेंडर तैयार करे, जिसमें यह स्पष्ट रूप से दर्शाया जाए कि किस माह में कौन-सा प्रशिक्षण, अभ्यास या जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस वार्षिक कैलेंडर को विभागीय आपदा प्रबंधन प्लान का अनिवार्य भाग बनाया जाए, ताकि तैयारी एक सतत प्रक्रिया के रूप में चलती रहे।
उन्होंने सभी विभागों को अपने-अपने विभाग में उपलब्ध मानव संसाधनों, मशीनरी, उपकरणों एवं तकनीकी संसाधनों की विस्तृत सूची तैयार कर इन संसाधनों की जीआईएस आधारित मैपिंग करने तथा इसे प्लान में शामिल करने के निर्देश दिए ताकि आपदा के समय संसाधनों की त्वरित पहचान और उपयोग संभव हो सके। साथ ही भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नए एवं अत्याधुनिक उपकरणों की खरीद की योजना को भी विभागीय प्लान में सम्मिलित करने के निर्देश दिए गए।
समीक्षा के दौरान विभागों द्वारा आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई के लिए योजना, संकट के समय निर्णय एवं समन्वय की प्रक्रिया, सूचना एवं संचार की योजना, राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारी, आपदा के बाद पुनर्बहाली एवं पुनर्निर्माण की व्यवस्था, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, भविष्य में होने वाले नुकसान को कम करने के उपाय, स्थानीय समुदाय की सहभागिता तथा नुकसान के आकलन और जोखिम मूल्यांकन से संबंधित व्यवस्थाओं के बारे जानकारी दी गई। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने बताया कि विभागीय आपदा प्रबंधन प्लान विभाग को आपदा के समय स्पष्ट दिशा, तय जिम्मेदारी और पूर्व-निर्धारित कार्यप्रणाली उपलब्ध कराने में उपयोगी सिद्ध होगा।
उन्होंने बताया कि विभागीय आपदा प्रबंधन योजना के माध्यम से विभागीय संसाधनों का बेहतर उपयोग, अंतर-विभागीय समन्वय, त्वरित निर्णय प्रक्रिया तथा प्रभावी राहत एवं पुनर्वास सुनिश्चित किया जा सकता है। साथ ही यह योजना विकास कार्यों में आपदा जोखिम न्यूनीकरण को मुख्यधारा में लाने और बिल्ड बैक बेटर की अवधारणा को लागू करने में भी सहायक होगी। बैठक में स्वास्थ्य एवं शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा स्कूल आपदा प्रबंधन प्लान तथा हॉस्पिटल आपदा प्रबंधन प्लान के संबंध में भी जानकारी दी गई।
बैठक में यूएसडीएमए के वित्त नियंत्रक अभिषेक कुमार आनंद, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो0 ओबैदुल्लाह अंसारी, डाॅ पीडी माथुर, डाॅ. बिमलेश जोशी, यूजेवीएनएल के ईई मनोज रावत, शहरी विकास के सहायक निदेशक विनोद कुमार, डिप्टी डायरेक्टर सोनिका पंत, पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डाॅ. सुनील कुमार अवस्थी, डाॅ अशोक कुमार, शिक्षा विभाग से रचना रावत, विमल असवाल, राजेश लाम्बा, नवीन सिंघल, एसई पिटकुल बीएस पांगती के साथ ही विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
विभागों को माॅक ड्रिल कराने के निर्देश
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने निर्देश दिए कि सभी विभाग नियमित रूप से आपदा के दौरान अपने-अपने विभाग से संबंधित कार्यों को लेकर मॉक अभ्यास आयोजित करें, जिससे आपदा के समय विभागीय मानव संसाधन, उपकरणों, संचार व्यवस्था एवं समन्वय क्षमता का वास्तविक परीक्षण हो सके। मॉक अभ्यास के दौरान सामने आने वाली कमियों को दूर किया जाए ताकि आपदा की स्थिति में प्रभावी रूप से राहत एवं बचाव कार्य संचालित किए जा सकें।
आपदा प्रबंधन प्लान में ये रहेंगे शामिल
* राज्य एवं विभाग से संबंधित आपदा जोखिम एवं संवेदनशीलता विश्लेषण
* रोकथाम एवं न्यूनीकरण के उपाय
* तैयारी एवं प्रतिक्रिया योजना
* उपलब्ध मानव, मशीनरी एवं तकनीकी संसाधनों का विवरण
* इमरजेंसी एक्शन प्लान एवं एसओपी
* अर्ली वार्निंग एवं सूचना प्रसारण व्यवस्था
* राहत, पुनर्वास, रिकवरी एवं रिकंस्ट्रक्शन योजना
* डैमेज एंड लॉस असेसमेंट की प्रक्रिया
* क्षमता विकास एवं वार्षिक प्रशिक्षण कैलेंडर
* बिल्ड बैक बेटर एवं विकास योजनाओं में आपदा जोखिम न्यूनीकरण का समावेशन
हरिद्वार–रुड़की महायोजना- 2041 के प्रारूप पर समीक्षा, शहरी विकास को मिलेगी नई दिशा
देहरादून। उत्तराखंड में नियोजित, संतुलित एवं सतत शहरी विकास को गति देने के उद्देश्य से आवास विभाग द्वारा लगातार ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित अमृत 1.0 योजना के अंतर्गत प्रस्तावित हरिद्वार एवं रुड़की महायोजना–2041 के प्रारूप पर नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
भविष्य के शहरों का रोडमैप
बैठक में हरिद्वार एवं रुड़की क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास को दृष्टिगत रखते हुए महायोजना के विभिन्न प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा की गई। इसमें भूमि उपयोग, आवासीय एवं औद्योगिक क्षेत्रों का संतुलित विकास, यातायात प्रबंधन, आधारभूत सुविधाओं का विस्तार, पर्यावरण संरक्षण तथा सार्वजनिक सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं को प्राथमिकता दी गई। शशि मोहन श्रीवास्तव, चीफ टॉउन एंड कन्ट्री प्लॉनर ने इस योजना की बावत सभी महत्वपूर्ण जानकारी सचिव आवास डॉ आर राजेश कुमार से साझा की। शशि मोहन श्रीवास्तव द्वारा महायोजना के प्रारूप की विस्तृत प्रस्तुति देते हुए अब तक की गई कार्यवाही और आगामी चरणों की जानकारी दी गई।
सार्वजनिक सहभागिता को मिला विशेष महत्व
उल्लेखनीय है कि हरिद्वार एवं रुड़की महायोजना–2041 के प्रारूप पर सार्वजनिक सुनवाई की प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न की जा चुकी है। इस प्रक्रिया के अंतर्गत हरिद्वार महायोजना के लिए लगभग 350 तथा रुड़की महायोजना के लिए लगभग 550 सुझाव एवं आपत्तियां प्राप्त हुई हैं। बैठक के दौरान इन सभी आपत्तियों एवं सुझावों पर बिंदुवार चर्चा करते हुए उनके निस्तारण की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने पर मंथन किया गया। आवास सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जनता से प्राप्त प्रत्येक सुझाव का गंभीरता, पारदर्शिता एवं नियमानुसार परीक्षण किया जाए, ताकि महायोजना जनअपेक्षाओं के अनुरूप और व्यावहारिक बन सके।
नियोजित विकास से सशक्त होगा हरिद्वार–रुड़की क्षेत्र
आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने बैठक के दौरान कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार उत्तराखंड के शहरों को आधुनिक, सुव्यवस्थित और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हरिद्वार एवं रुड़की महायोजना–2041 का उद्देश्य केवल भौतिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पर्यावरण संरक्षण, बेहतर यातायात व्यवस्था, सुदृढ़ आधारभूत ढांचा और नागरिकों को उच्च जीवन स्तर प्रदान करना भी शामिल है। सार्वजनिक सुनवाई के माध्यम से प्राप्त सुझावों एवं आपत्तियों को गंभीरता से लिया गया है, ताकि महायोजना वास्तविक जरूरतों को प्रतिबिंबित कर सके। अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण करते हुए महायोजना को शीघ्र अंतिम रूप दिया जाए, जिससे क्षेत्र के नियोजित एवं सतत विकास को नई गति मिल सके।
शीघ्र अनुमोदन की दिशा में कार्रवाई
बैठक के अंत में आवास सचिव द्वारा नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि महायोजना–2041 को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में समयबद्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि इसे शीघ्र शासन स्तर पर अनुमोदन हेतु प्रस्तुत किया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि महायोजना का प्रभावी क्रियान्वयन आने वाले वर्षों में हरिद्वार एवं रुड़की को आधुनिक शहरी केंद्र के रूप में विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
बैठक में नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
सोशल मीडिया की चकाचौंध में खो रही नई पीढ़ी और बिखर रहे संस्कार, महिला आयोग की अध्यक्ष ने माता-पिता को किया आगाह
स्क्रीन की चमक से रिश्ते नहीं चमकते- कुसुम कंडवाल
सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से संपर्क बढ़ा रहा साइबर अपराध और अनैतिक रिश्तों का जाल- कुसुम कंडवाल
देहरादून। आधुनिकता की दौड़ में सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव अब समाज के लिए एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। उत्तराखंड राज्य महिला आयोग ने सोशल मीडिया के माध्यम से समाज में बढ़ते दुष्प्रभावों और बिखरते पारिवारिक ताने-बाने पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी और बच्चे सोशल मीडिया की चकाचौंध में अपनी वास्तविक राह से भटक रहे हैं। आयोग ने इस समस्या की मुख्य जड़ ‘पारिवारिक समन्वय की कमी’ को माना है। उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने समाज में सोशल मीडिया के बढ़ते घातक प्रभावों और उससे उपजी गंभीर समस्याओं पर संज्ञान लिया है।
उन्होंने अनुभव के आधार पर विश्लेषण के साथ भयावह पहलू पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर अनजान लोगों के संपर्क में आने से महिलाएं और बेटियां लगातार साइबर अपराध और अनैतिक रिश्तों के जाल में फंस रही हैं। ‘डिजिटल फ्रेंडशिप’ के नाम पर बन रहे ये अवैध रिश्ते न केवल वैवाहिक जीवन को तबाह कर रहे हैं, बल्कि मासूम जिंदगियों को भी गलत रास्ते पर ले जा रहे हैं।
आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी और बच्चे सोशल मीडिया की आभासी दुनिया में इस कदर फंस गए हैं कि उनका अपने परिवार, अपनी संस्कृति और संस्कारों से नाता पूरी तरह टूटता जा रहा है। घर के बुजुर्गों और माता-पिता के साथ बच्चों का रिश्ता अब नाममात्र का रह गया है क्योंकि बच्चे मोबाइल की चकाचौंध में अपनी एक अलग ही काल्पनिक दुनिया बना लेते हैं और उसे ही अपना सब कुछ मान बैठते हैं।
उन्होंने कहा कि संस्कारों से यही कटाव बेटियों और महिलाओं के भटकने की मुख्य कड़ी बन रहा है। सोशल मीडिया के मायाजाल में फंसकर लड़कियां धीरे-धीरे परिवार से भावनात्मक रूप से कट जाती हैं और इस दलदल में धंसती चली जाती हैं। विशेष रूप से जो लड़कियां घर से बाहर पढ़ाई या नौकरी के लिए दूसरे शहरों में रह रही हैं, वे अक्सर अनजान लोगों के संपर्क में आकर बिना सोचे-समझे ‘लिव-इन’ जैसे रिश्तों में बंध रही हैं। आयोग ने चेतावनी दी है कि ऐसे रिश्तों के परिणाम प्रायः दुखद और असफल होते हैं, जो न केवल एक जीवन को बर्बाद करते हैं बल्कि पूरे परिवार को मानसिक और सामाजिक पीड़ा देते हैं।
विकट स्थिति को देखते हुए कुसुम कंडवाल ने बतौर राज्य महिला आयोग अध्यक्ष अभिभावकों के लिए एक विशेष अपील की है कि माता-पिता अपने बच्चों से नियमित संवाद करें और उनके साथ दोस्ताना व्यवहार रखते हुए उनके दिनभर की गतिविधियों की जानकारी लें। यह अत्यंत आवश्यक है कि समय-समय पर बच्चों के रहन-सहन, उनकी संगत और उनकी बदलती आदतों को बारीकी से परखा जाए। माता-पिता की सक्रिय निगरानी और बच्चों के साथ उनका मजबूत भावनात्मक रिश्ता ही उन्हें इस डिजिटल दलदल से बाहर निकाल सकता है और समाज को पतन की ओर जाने से रोक सकता है।
उन्होंने महिलाओं और बेटियों को कहा कि ”स्क्रीन की चमक से रिश्ते नहीं चमकते, रिश्तों की चमक अपनों के साथ समय बिताने और संवाद से आती है। तकनीक का उपयोग स्वयं की उन्नति के लिए, अपनी संस्कृति और संस्कारों को समझने के लिए करें।”
उन्होंने कहा कि राज्य महिला आयोग इस मामले पर संज्ञान लेते हुए हर प्रकार से हमारी भावी पीढ़ी सहित उनके अभिभावकों एवं परिजनों को भी जागरूक करने का प्रयास करेगा। उन्होंने कहा महिलाओं एवं बेटियों की सुरक्षा के सरकार एव आयोग पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है, परंतु परिवार के लोगों को भी इसमें अपनी अहम भूमिका निभानी होगी। सोशल मीडिया के माध्यम से समाज की मुख्य धारा से जुड़ने के साथ साथ हमें अपने परिवार में समन्वय बनाकर संस्कृति के नैतिक मूल्यों और संस्कारों को सीखना एवं समझना होगा।
ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने काशीपुर में वीबी-जी राम जी बिल–2025 पर आधारित कार्यशाला को किया सम्बोधित
काशीपुर। प्रदेश के ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने काशीपुर में आयोजित विकसित भारत–रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) वीबी-जी राम जी बिल–2025 पर आधारित कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने किसानों एवं स्थानीय लोगों से संवाद कर सरकार की ग्रामीण रोजगार नीति की जानकारी दी।
ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष द्वारा मनरेगा को समाप्त किए जाने की अफवाहों को निराधार कहा है। उन्होंने कहा कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में योजना को और अधिक मजबूत हुई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1989 में जवाहर रोजगार योजना से शुरू होकर समय-समय पर योजना का नाम परिवर्तित किया गया है। ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि अब वीबी-जी राम जी योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को 100 के स्थान पर 125 दिन का गारंटीशुदा रोजगार मिलेगा। उन्होंने कहा कि योजना में सामान्य राज्यों के लिए 60:40 तथा हिमालयी व पूर्वोत्तर राज्यों के लिए 90:10 का केंद्र-राज्य वित्तीय अनुपात निर्धारित किया गया है। मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्यों में रिटेनिंग वॉल को अनुमन्य कार्यों में शामिल किया गया है।
ग्राम्य विकास मंत्री जोशी ने कहा कि कृषि के व्यस्त समय को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार वर्ष में 60 दिन ऐसे निर्धारित कर सकेगी, जब योजना के अंतर्गत कार्य नहीं कराया जाएगा। साथ ही जल जीवन मिशन के तहत बनी परिसंपत्तियों के रखरखाव, स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण, जल संरक्षण, ग्रामीण आधारभूत ढांचे तथा कृषि एवं आजीविका संवर्धन को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने मनरेगा का बजट 86 हजार करोड़ रुपये से बढ़ाकर 95,692 करोड़ रुपये कर दिया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
इस अवसर पर स्थानीय विधायक त्रिलोक सिंह चीमा, राज्यमंत्री विनय रोहिला,राज्यमंत्री मंजीत राजू, मेयर दीपक बाली, जिलाध्यक्ष मनोज पाल, ब्लॉक प्रमुख चंद्र प्रथा, गुरविंदर चंडोक, मंडल अध्यक्ष अर्जुन, बृजेश पाल, जसपाल जस्सी, जिला महामंत्री अमित नारंग सहित कई लोग उपस्थित रहे।
जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ पर उठे तीखे सवाल
देहरादून। कारगी कूड़ा डंपिंग यार्ड के विरोध में उत्तराखंड महिला कांग्रेस ने देहरादून नगर निगम कार्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला के नेतृत्व में हुए इस धरना-प्रदर्शन में डंपिंग यार्ड के स्थानांतरण और वैज्ञानिक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की मांग प्रमुखता से उठाई गई।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने कारगी डंपिंग यार्ड से एकत्र किया गया प्रतीकात्मक कूड़ा नगर निगम परिसर में रखकर स्थानीय लोगों की दुर्दशा को उजागर किया। महिला कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जिस गंदगी और दुर्गंध में क्षेत्रवासी रहने को मजबूर हैं, उसकी जिम्मेदारी से नगर निगम नहीं बच सकता।
महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मेयर को ज्ञापन सौंपने के लिए करीब तीन घंटे तक प्रतीक्षा की, लेकिन नगर निगम कार्यालय में मौजूद होने के बावजूद मेयर ज्ञापन लेने बाहर नहीं आए। इसे लेकर प्रदर्शनकारियों ने जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही पर सवाल खड़े किए। बाद में नगर आयुक्त नमामि बंसल ने मौके पर पहुंचकर ज्ञापन लिया और शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद धरना-प्रदर्शन स्थगित कर दिया गया।
इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला ने कहा कि कई दिनों तक कूड़े को जमा कर पहाड़ की तरह खड़ा कर दिया जाता है, जिससे आम जनता बीमारियों के खतरे में जीने को मजबूर है। उन्होंने आरोप लगाया कि कारगी डंपिंग यार्ड घनी आबादी वाले रिहायशी क्षेत्र के बीच स्थित है, जहां महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग लगातार दुर्गंध, प्रदूषण और स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं। यह ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2016 का उल्लंघन होने के साथ-साथ नागरिकों के स्वच्छ पर्यावरण और स्वस्थ जीवन के अधिकार पर भी सीधा प्रहार है।
महिला कांग्रेस ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही डंपिंग यार्ड के स्थानांतरण और वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी नगर निगम प्रशासन की होगी।
प्रदर्शन में उर्मिला थापा, निधि नेगी, नजमा खान, इंदु थापा, अरविंद शर्मा, अभिनव थापर, बबलू पंवार, नरेश सकलानी, हेमंत उप्रेती, गौरव रावत, नंदू, प्रशांत नेगी सहित कई कांग्रेस कार्यकर्ता और स्थानीय निवासी मौजूद रहे।
भराड़ीसैंण गैरसैंण विधानसभा में सजी उत्तराखंड की लोककला, स्थानीय कलाकारों को मिला सम्मान और प्रोत्साहन- ऋतु खण्डूडी भूषण
गैरसैंण। उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण, गैरसैंण स्थित विधानसभा भवन अब केवल लोकतांत्रिक विमर्श का केंद्र ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध लोककला, संस्कृति और परंपराओं का जीवंत प्रतीक भी बनता जा रहा है। विधानसभा अध्यक्ष उत्तराखंड श्रीमती ऋतु खण्डूडी भूषण की पहल पर विधानसभा परिसर में राज्य की स्थानीय कला एवं कलाकारों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विभिन्न लोक-सांस्कृतिक विषयों पर आधारित पेंटिंग्स एवं रम्माण के पारंपरिक मुखौटे स्थापित किए गए हैं।
इन कलाकृतियों में नंदा राजजात यात्रा, छोलिया नृत्य, रम्माण उत्सव, पारंपरिक वाद्य यंत्र, ऐपन कला तथा रम्माण के मुखौटे सहित उत्तराखंड की विशिष्ट सांस्कृतिक विरासत को अत्यंत सजीव और प्रभावशाली रूप में उकेरा गया है। यह सभी कलाकृतियाँ राज्य के स्थानीय कलाकारों द्वारा निर्मित हैं, जिससे उन्हें न केवल एक प्रतिष्ठित मंच मिला है, बल्कि उनकी कला को सम्मान और पहचान भी प्राप्त हुई है। उल्लेखनीय है कि गत वर्ष देहरादून स्थित विधानसभा भवन में भी स्थानीय महिलाओं द्वारा सुंदर ऐपन कला का सृजन किया गया था, जिसे सभी वर्गों द्वारा व्यापक रूप से सराहा गया।
इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी भूषण ने कहा कि उत्तराखंड की लोककला और संस्कृति हमारी पहचान और विरासत का आधार है। कलाकारों को प्रोत्साहन देना तथा उनकी कला को सार्वजनिक और गरिमामय स्थलों पर स्थान देना संस्कृति संरक्षण की दिशा में एक आवश्यक और सार्थक प्रयास है। उन्होंने कहा कि एक महिला होने के नाते उनका कला, संस्कृति और रचनात्मक अभिव्यक्ति से विशेष जुड़ाव है और वे चाहती हैं कि उत्तराखंड की परंपराएँ आने वाली पीढ़ियों तक जीवंत रूप में पहुँचे।
पेंटिंग तैयार करने वाले कलाकारों मुकुल बड़ूनी, ज्योति जोशी सहित अन्य कलाकारों ने विधानसभा अध्यक्ष का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पहली बार उन्हें अपनी कला को इतने प्रतिष्ठित मंच पर प्रदर्शित करने का अवसर मिला है, जिससे उनका मनोबल बढ़ा है और भविष्य में और बेहतर कार्य करने की प्रेरणा मिली है। कलाकारों ने यह भी बताया कि उनके द्वारा निर्मित कलाकृतियाँ एवं उपहारों को विधानसभा अध्यक्ष द्वारा देश के विभिन्न गणमान्य व्यक्तियों को भेंट किया जाता रहा है। उन्होंने ऐपन कला से सुसज्जित शॉल, पेंटिंग एवं अन्य स्मृति-चिन्ह देश की राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, लोकसभा अध्यक्ष सहित अनेक विशिष्ट व्यक्तियों को भेंट कर उत्तराखंड की कला और संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है।
इस अवसर पर भराड़ीसैंण गैरसैंण में कार्यरत वाहन प्रभारी शेखर पंत ने विधानसभा अध्यक्ष को परिसर में चल रहे विभिन्न विकासात्मक एवं व्यवस्थागत कार्यों की जानकारी दी तथा बताया कि विधानसभा क्षेत्र में अधोसंरचना, आवागमन एवं नागरिक सुविधाओं के विस्तार हेतु निरंतर कार्य किए जा रहे हैं।
यह पहल न केवल उत्तराखंड की लोकसंस्कृति को सहेजने का प्रयास है, बल्कि स्थानीय कलाकारों के सम्मान, आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक स्वाभिमान को सशक्त करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।
पैराग्लाइडिंग चैंपियनशिप ने कपकोट को दिलाई पर्यटन मानचित्र पर खास जगह
राष्ट्रीय स्तर के आयोजन से कपकोट में साहसिक पर्यटन को मिला नया प्रोत्साहन
बागेश्वर। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के उत्तराखंड में साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के विज़न के अनुरूप, सुदूर पर्वतीय क्षेत्र कपकोट अब एडवेंचर टूरिज्म के राष्ट्रीय मानचित्र पर मजबूती से उभर रहा है।
फरवरी 5 से प्रारंभ बागेश्वर जनपद में आयोजित पांच दिवसीय राष्ट्रीय एक्युरेसी पैराग्लाइडिंग प्रतियोगिता ने इस शांत ग्रामीण अंचल को देशभर के रोमांच प्रेमियों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना दिया है।
जालेख की पहाड़ियों से उड़ान भरते रंग-बिरंगे पैराग्लाइडरों से सजा कपकोट का आसमान पूरे आयोजन के दौरान उत्सव का अहसास कराता रहा। देश के विभिन्न राज्यों से आए 92 पायलटों ने इस प्रतियोगिता में पंजीकरण कराया, जिनमें से 78 प्रतिभागियों ने अपने कौशल का प्रदर्शन किया। हजारों स्थानीय दर्शकों और पर्यटकों की उपस्थिति ने यह सिद्ध कर दिया कि कपकोट में साहसिक खेलों के प्रति जबरदस्त उत्साह है।
प्रतियोगिता का शुभारंभ जिलाधिकारी आकांक्षा कोंडे और क्षेत्रीय विधायक सुरेश गड़िया द्वारा किया गया। जिलाधिकारी ने इसे बागेश्वर के लिए ऐतिहासिक पहल बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलता है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था सशक्त होती है और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होते हैं।
पहले दिन से लेकर समापन तक प्रतियोगिता का रोमांच चरम पर रहा। विशेषज्ञों के अनुसार कपकोट का भौगोलिक परिवेश पैराग्लाइडिंग, ट्रैकिंग और अन्य साहसिक खेलों के लिए अत्यंत अनुकूल है। आयोजन के दौरान प्रतिभागियों के लिए तकनीकी प्रशिक्षण और सुरक्षा संबंधी सत्र भी आयोजित किए गए, जिससे प्रतियोगिता का स्तर और अधिक पेशेवर बना।
समापन समारोह में जिलाधिकारी आकांक्षा कोंडे ने स्वयं जालेख से उड़ान भरकर इस रोमांच का अनुभव लिया और कहा कि “कपकोट–बागेश्वर अब एडवेंचर टूरिज्म के नए गंतव्य के रूप में स्थापित हो चुका है। भविष्य में इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे।”
प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर रहे मनीष उप्रेती को ₹1,00,000, द्वितीय स्थान पर रहे मनीष भंडारी को ₹50,000 तथा तृतीय स्थान पर पंकज कुमार को ₹30,000 की पुरस्कार राशि प्रदान की गई। महिला पायलटों को भी विशेष प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित किया गया।
इस आयोजन की सफलता ने स्पष्ट संदेश दिया है—कभी शांत समझा जाने वाला कपकोट अब केवल एक ग्रामीण इलाका नहीं, बल्कि देश का उभरता हुआ साहसिक पर्यटन केंद्र बन चुका है। प्राकृतिक सुंदरता, अनुकूल भौगोलिक परिस्थितियां और स्थानीय प्रशासन की सक्रिय पहल इसे भविष्य का प्रमुख एडवेंचर डेस्टिनेशन बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा रही हैं।
कपकोट ने सचमुच नई उड़ान भर ली है—पर्यटन की, पहचान की और संभावनाओं की।
विद्यालय भवनों के मरम्मत व निर्माण कार्य को 568 लाख की धनराशि मंजूर
विभागीय अधिकारियों को निर्देश, नियत समय पर पूर्ण हो निर्माण कार्य
देहरादून। प्राथमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत जर्जर हो चुके एक दर्जन से अधिक प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों का शीघ्र पुनर्निर्माण किया जायेगा। इन विद्यालयों के भवनों के निर्माण व मरम्मत कार्यों के लिये रू0 568.85 लाख की धनराशि मंजूर कर दी है साथ ही उक्त निर्माण कार्यों के लिये कार्यदायी संस्था भी नामित कर दी गई है। शीघ्र ही इस संबंध में शासन स्तर से आदेश जारी कर दिये जायेंगे।
सूबे के विद्यालयी शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने बताया कि राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिये विभिन्न स्तरों पर लगातार प्रयास कर रही है। विद्यालयों में भौतिक संसाधनों, अवसंरचनात्मक कार्यों से लेकर शिक्षकों की तैनाती कर उन्हें सुविधा सम्पन्न बनाया जा रहा है, ताकि प्राथमिक स्तर पर प्रदेश के नौनिहालों को बेहतर शिक्षा मुहैया हो सके। इसी कड़ी में सरकार ने प्रदेश के विभिन्न जनपदों रूद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, टिहरी, देहरादून व चमोली में जर्जर व क्षतिग्रस्त हो चुके 16 राजकीय प्राथमिक विद्यालयों के पुनर्निर्माण को रू0 568.85 लाख की धनराशि मंजूर कर दी है। जिसमें रूद्रप्रयाग जनपद के अंतर्गत राजकीय प्राथमिक विद्यालय सुराड़ी, छतोड़ा, कमसाल, जसोली, सल्या में विद्यालय भवन के पुनर्निर्माण के लिये 32-32 लाख स्वीकृत किये हैं जबकि राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय पौड़ीखाल में पुनर्निर्माण के लिये 40.30 लाख की धनराशि स्वीकृत की गई है।
इसी प्रकार पिथौरागढ़ जनपद में राजकीय प्राथमिक विद्यालय लास्पासांई में भवन पुनर्निमाण के लिये 39 लाख, गैला में कक्षा-कक्ष व प्राधानाध्यापक कक्ष के निर्माण को 20.47 लाख जबकि मल्ला वल्थी के लिये 20.30 लाख की धनराशि मंजूर की गई है। टिहरी जनपद में राजकीय प्राथमिक विद्यालय तिखोन के लिये 34.86, सौन्दकोटी मल्ली 37.36, मंजूरीडागर 39.94 तथा राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय क्यारी-जमुण्डा के पुनर्निर्माण के लिये 29.59 लाख की धनराशि स्वीकृत की गई है। इसी प्रकार जनपद चमोली में राजकीय प्राथमिक विद्यालय सुभाषनगर के भवन पुनर्निर्माण को 77.11 लाख जबकि देहरादून जिले में राजकीय प्राथमिक विद्यालय बद्रीपुर के भवन पुनर्निर्माण को 33.05 लाख तथा प्राथमिक विद्यालय बापूनगर जाखन के पुनर्निर्माण को 36.87 लाख की धनराशि स्वीकृत की गई है। इसके साथ इन विद्यालयों में निर्माण कार्य के लिये ग्रामीण निर्माण विभाग के साथ ही पेयजल निगम को कार्यदायी संस्था नामित किया गया है। डा. रावत ने बताया कि इन सभी प्राथमिक विद्यालयों में मरम्मत व पुनर्निर्माण कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने के लिये विभागीय अधिकारियों को जरूरी निर्देश दे दिये गये हैं।
डीबीटी के माध्यम से 484 लाभार्थियों को भेजी ₹3.45 करोड़ से अधिक की धनराशि
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यसेवक सदन में मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना का औपचारिक शुभारंभ किया। इस अवसर पर योजना के पहले चरण में राज्य के छह जनपदों की 484 महिलाओं के बैंक खातों में ₹3.45 करोड़ से अधिक की धनराशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से पहली किस्त के रूप में स्थानांतरित की गई।
योजना के तहत पात्र महिलाओं को स्वरोजगार के लिए अधिकतम ₹2 लाख तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इसमें 75 प्रतिशत राशि राज्य सरकार द्वारा दी जाएगी, जबकि 25 प्रतिशत अंशदान लाभार्थी को स्वयं वहन करना होगा। सरकार का उद्देश्य इस योजना के माध्यम से एकल और निराश्रित महिलाओं को रोजगार से जोड़कर एक वर्ष के भीतर आत्मनिर्भर बनाना है।

सरकार की ओर से बताया गया कि इसी माह के अंत तक अथवा मार्च के पहले सप्ताह में योजना के दूसरे चरण के अंतर्गत शेष सात जनपदों की 540 महिलाओं को भी लगभग ₹4 करोड़ की धनराशि डीबीटी के जरिए प्रदान की जाएगी। इससे राज्यभर में बड़ी संख्या में महिलाओं को स्वरोजगार शुरू करने का अवसर मिलेगा।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग द्वारा जारी कैलेंडर का भी विमोचन किया। उन्होंने कहा कि यह योजना महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक सशक्त और दूरगामी कदम है, जिससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और उन्हें समाज में सम्मानजनक पहचान मिलेगी।
इस अवसर पर महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
सोनप्रयाग। रुद्रप्रयाग जनपद के सोनप्रयाग क्षेत्र से एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। रामपुर न्यालसू के जंगल क्षेत्र में घास काटने गई एक महिला की पहाड़ी से गिरकर मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही एसडीआरएफ की टीम ने तत्काल रेस्क्यू अभियान शुरू किया।
एसडीआरएफ को यह सूचना कोतवाली सोनप्रयाग के माध्यम से प्राप्त हुई। इसके बाद एसडीआरएफ पोस्ट सोनप्रयाग से उप निरीक्षक संतोष परिहार के नेतृत्व में रेस्क्यू टीम घटनास्थल के लिए रवाना हुई। टीम सड़क मार्ग से रामपुर पहुंची और इसके बाद मंदाकिनी नदी को पैदल पार कर करीब दो किलोमीटर की खड़ी और दुर्गम पहाड़ी चढ़ाई करते हुए घटनास्थल तक पहुंच बनाई।
रेस्क्यू टीम ने मौके पर पाया कि घास काटते समय पहाड़ी से गिरी महिला गीता देवी (40), पत्नी गजपाल सिंह, निवासी रामपुर न्यालसू की घटनास्थल पर ही मौत हो चुकी थी। क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों के चलते शव को निकालना चुनौतीपूर्ण रहा।
एसडीआरएफ कर्मियों ने विशेष रेस्क्यू उपकरणों की मदद से अत्यंत कठिन और तीव्र ढाल वाले पहाड़ी इलाके से महिला के शव को करीब तीन किलोमीटर पैदल नीचे लाया। इसके बाद शव को आवश्यक कार्रवाई के लिए जिला पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया।
