स्वास्थ्य सचिव के निर्देश पर चला विशेष अभियान, क्रॉस-डिस्ट्रिक्ट निरीक्षण से बढ़ी सख्ती, नियमों का उल्लंघन करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा
देहरादून। प्रदेश में नशीली दवाओं के अवैध कारोबार के खिलाफ सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा अभियान छेड़ दिया है। सचिव स्वास्थ्य व आयुक्त, खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग सचिन कुर्वे के स्पष्ट निर्देशों के क्रम में प्रदेशभर में औषधि निरीक्षण की विशेष कार्रवाई चल रही है। इसी अभियान के तहत कुमाऊँ मंडल में बड़ी छापेमारी कर नशे के कारोबार पर करारा प्रहार किया गया। स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने थाना पुलभट्टा क्षेत्र, जनपद उधम सिंह नगर में एक मेडिकल स्टोर पर कार्रवाई करते हुए भारी मात्रा में प्रतिबंधित दवाएं बरामद कीं। यह कार्रवाई स्पेशल ऑपरेशन टास्क फोर्स (SOTF) कुमाऊँ परिक्षेत्र और औषधि विभाग की संयुक्त टीम द्वारा की गई।
मेडिकल स्टोर से मिला नशीली दवाओं का जखीरा
मुखबिर की सूचना पर की गई छापेमारी में SK मेडिकल स्टोर से प्रतिबंधित ट्रामाडोल (Tramadol) और अल्प्राजोलम (Alprazolam) की कुल 20,142 टैबलेट्स और 50 ट्रामाडोल इंजेक्शन बरामद किए गए। ये दवाएं चिकित्सकीय उपयोग के लिए निर्धारित हैं, लेकिन बिना वैध पर्चे के इनकी बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित है। मौके पर मौजूद स्टोर संचालक शकूर खान पुत्र सब्बीर खान, निवासी शक्तिफार्म रोड, ग्राम सेदोरा, चौकी बरा, थाना पुलभट्टा के खिलाफ थाना पुलभट्टा में धारा 8/22 एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि इतनी बड़ी मात्रा में दवाएं कहां से लाई गईं और किन-किन लोगों तक सप्लाई की जानी थीं।
क्रॉस-डिस्ट्रिक्ट निरीक्षण से बढ़ी सख्ती
स्वास्थ्य विभाग ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इस बार निरीक्षण प्रणाली में बड़ा बदलाव किया है। अपर आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन द्वारा औषधि निरीक्षकों के तीन विशेष दल गठित किए गए हैं। इन दलों को अपने गृह जनपद से बाहर तैनात कर क्रॉस-डिस्ट्रिक्ट निरीक्षण की जिम्मेदारी दी गई है। इस व्यवस्था का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर किसी भी प्रकार की मिलीभगत की आशंका को समाप्त करना और निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करना है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में प्रदेशभर में औचक निरीक्षण जारी रहेंगे।
युवाओं को बचाने की मुहिम
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, ट्रामाडोल और अल्प्राजोलम जैसी दवाओं का दुरुपयोग युवाओं में तेजी से बढ़ा है। इन दवाओं का सेवन नशे के रूप में किया जा रहा है, जिससे स्वास्थ्य पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ रहे हैं। सरकार का मानना है कि मेडिकल स्टोरों के माध्यम से हो रही अवैध बिक्री पर रोक लगाना बेहद जरूरी है। कुमाऊँ में हुई यह कार्रवाई इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है। पुलिस और औषधि विभाग की संयुक्त कार्रवाई से साफ संकेत गया है कि अब नियमों का उल्लंघन करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
नशे के नेटवर्क पर बड़ी चोट
कुमाऊँ में हुई इस कार्रवाई को नशे के नेटवर्क पर बड़ी चोट माना जा रहा है। जिस तरह से स्वास्थ्य विभाग और पुलिस ने समन्वय बनाकर कार्रवाई की है, उससे साफ है कि सरकार अब नशे के अवैध कारोबार को जड़ से खत्म करने के मूड में है। प्रदेशभर में चल रहे इस अभियान से न केवल अवैध दवा कारोबारियों में हड़कंप है, बल्कि आम जनता में भी भरोसा जगा है कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।
स्वास्थ्य सचिव एवं आयुक्त सचिन कुर्वे का बयान
स्वास्थ्य सचिव एवं आयुक्त, खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग सचिन कुर्वे ने कहा कि प्रदेश में नशीली दवाओं के अवैध कारोबार के खिलाफ सरकार ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। ट्रामाडोल और अल्प्राजोलम जैसी दवाओं का दुरुपयोग युवाओं को नशे की ओर धकेल रहा है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पारदर्शिता के लिए क्रॉस-डिस्ट्रिक्ट निरीक्षण व्यवस्था लागू की गई है और विशेष दल लगातार औचक जांच कर रहे हैं। नियमों का उल्लंघन करने वाले मेडिकल स्टोर संचालकों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा।
अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी का बयान
अपर आयुक्त खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ताजबर सिंह जग्गी ने कहा कि स्वास्थ्य सचिव के स्पष्ट निर्देश हैं कि प्रदेश में नशीली दवाओं के अवैध कारोबार पर पूरी तरह रोक लगाई जाए। इसके लिए तीन विशेष दल बनाए गए हैं, जो अलग-अलग जिलों में निरीक्षण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ट्रामाडोल और अल्प्राजोलम जैसी दवाओं की बिना पर्चे बिक्री गंभीर अपराध है और युवाओं को नशे की गिरफ्त में धकेलती है। विभाग ऐसे मेडिकल स्टोरों की पहचान कर रहा है जो नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। आगे भी औचक निरीक्षण जारी रहेंगे और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सहकारी मेलों में वितरित किया गया 21 करोड़ से अधिक का ब्याज मुक्त ऋण
देहरादून। अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के उपलक्ष्य में प्रदेशभर में आयोजित सहकारिता मेलों में राज्य सरकार द्वारा किसानों, काश्तकारों, युवा उद्यमियों व महिला स्वयं सहायता समूहों को पशुपालन, मछली पालन, फूलों की खेती जैसी अन्य गतिविधियों के लिए 21 करोड़ से अधिक का ब्याज मुक्त ऋण वितरित किया गया। इसके अतिरिक्त मेलों में 500 से अधिक महिला स्वयं सहायता समूहों ने अपने उत्पादों का विक्रय कर अच्छा मुनाफा कमाया है।
सूबे के सहकारिता मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने मीडिया को जारी एक बयान में बताया कि अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 के तहत स्थानीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने एवं ग्रामीण आर्थिकी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा प्रदेशभर में सहकारिता मेलों का आयोजन किया जा रहा है। डाॅ. रावत ने बताया कि सहकारिता विभाग के माध्यम से विशेष थीमों पर आधारित इन मेलों का 11 जनपदों में सफल आयोजन किया जा चुका है, जबकि टिहरी जनपद में मेला आयोजित किया गया है। इन मेलों में किसानों, काश्तकारों, कारीगरों एवं महिला स्वयं सहायता समूहों को बाजार उपलब्ध कराया गया है। इसके अलावा मेलों में विभागीय योजनाओं का लाभ आम लोगों का पहुंचाया जा रहा है। डाॅ. रावत ने बताया कि मेलों के माध्यम से अब तक 1038 किसानों व 147 महिला स्वयं सहायता समूहों को रुपये 21 करोड़ से अधिक ब्याज मुक्त ऋण वितरित किया जा चुका है, जिसमें अल्मोड़ा जनपद में 174 लाख का ब्याज मुक्त ऋण किसानों व महिला स्वयं सहायता समूहों को वितरित किया गया। इसी प्रकार बागेश्वर में 115 लाख, पिथौरागढ़ में 211 लाख, चम्पावत 81, नैनीताल 107 लाख, चमोली 155 लाख, रूद्रप्रयाग 177 लाख, पौड़ी 583 लाख, हरिद्वार 71 लाख, देहरादून 98 लाख तथा उत्तरकाशी जनपद में किसानों व महिला स्वयं सहायता समूहों को 56 लाख का ब्याज मुक्त ऋण वितरित किया गया है। टिहरी जनपद में आयोजित मेले में अब तक 270 लाख का ऋण वितरित किया जा चुका है। विभाग द्वारा वितरित किये जा रहे ब्याज मुक्त ऋण प्रदेश के किसानों, काश्तकारों, कारीगरों, युवाओं, महिला स्वयं सहायता समूहों के कृषि विकास, स्वरोजगार, लघु उद्यम एवं आजीविका संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
डाॅ. रावत ने बताया कि सहकारी मेलों में महिला स्वयं सहायता समूहों को सीधा बाजार मिला है। अब तक आयोजित मेलों में 500 से अधिक महिला समूहों ने अपने उत्पादों हस्तशिल्प, स्थानीय खाद्य सामग्री, जैविक उत्पाद सहित पारंपरिक वस्त्रों का विक्रय किया है जिनसे उनको खास मुनाफा हुआ है। डाॅ. रावत ने बताया कि सहकारिता मेलों से महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिला है और महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। उन्होंने कहा कि सहकारिता मेले किसानों, महिलाओं एवं ग्रामीण उद्यमियों के आर्थिक सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम बनकर उभरे हैं। इन आयोजनों ने सहकारिता के मूल सिद्धांतों सहभागिता, आत्मनिर्भरता और सामूहिक विकास को जमीनी स्तर पर मजबूती प्रदान की है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के माध्यम से सहकारिता को रोजगार सृजन, वित्तीय समावेशन एवं समावेशी विकास का मजबूत आधार बनाया जाएगा।
श्री बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी की अध्यक्षता में यात्रा पूर्व तैयारियों की समीक्षा बैठक
देहरादून। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ( बीकेटीसी )अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने आगामी श्री बदरीनाथ तथा श्री केदारनाथ धाम यात्रा पूर्व तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। केनाल रोड स्थित बीकेटीसी कार्यालय सभागार में समीक्षा बैठक का समापन हो गया। देर शाम तक चली समीक्षा बैठक में बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि मंदिर समिति की बजट बैठक जल्द आयोजित होगी जिसमें तीर्थयात्रियों की सुविधाओं यात्रा पूर्व व्यवस्थाओं हेतु बजट प्रावधान किये जायेंगे।श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा इंतजामों पर विस्तार से चर्चा हुई । बीकेटीसी अध्यक्ष ने अधिकारियों को समयबद्ध ढंग से सभी कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। समीक्षा बैठक से पहले वरिष्ठ तीर्थ पुरोहित तथा बीकेटीसी सदस्य दिवंगत श्रीनिवास पोस्ती श्रद्धांजलि दी गयी तथा दो मिनट का मौन रखा गया।
समीक्षा बैठक में बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि चारधाम यात्रा का शुभारंभ 19 अप्रैल अक्षय तृतीया से हो रहा है परंपराअनुसार इसी दिन श्री यमुनोत्री तथा श्री गंगोत्री धाम के कपाट खुलते है।इस यात्रा वर्ष श्री केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल तथा श्री बदरीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खुल रहे है इससे पहले श्री बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति का कार्यालय आईएसबीटी ऋषिकेश के समीप पर्यटन विभाग के रजिस्ट्रेशन भवन में स्थापित हो जायेगा।
बैठक में आगामी यात्रा के दौरान यात्रियों को धामों में सरल सुगम दर्शन व्यवस्था, पूजा व्यवस्था, मंदिर परिसरों के सौंदर्यीकरण, रंग-रोगन यात्री विश्रामगृहों का रखरखाव आवास, पेयजल, विद्युत आपूर्ति, साफ-सफाई, की व्यवस्थाओं की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। अध्यक्ष ने कहा कि यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए प्रशासन से समन्वय किया जा रहा है। उन्होंने विशेष रूप से धामों में सुरक्षा इंतजाम,दर्शंन व्यवस्था, विश्राम गृहों में तीर्थयात्रियों के लिए उचित आवासीय सुविधा,पार्किंग व्यवस्था और आपदा प्रबंधन पर जोर दिया कहा कि धामों में निर्धारित सीमा के अंतर्गत मोबाइल फोन तथा वीडियो फोटो रील बनाना प्रतिबंधित रहेंगा।
समिति के उपाध्यक्ष विजय कपरवाण सहित सदस्यगण एवं मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल बैठक में उपस्थित रहे। मुख्यकार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल ने बताया कि बीकेटीसी अधिकारियों ने विगत 16 फरवरी को श्री बदरीनाथ धाम पहुंचकर की यात्रा व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
अब तक की गई तैयारियों की जानकारी देते हुए बताया कि यात्रा तैयारियों के अधिकांश कार्य अंतिम चरण में हैं और शेष कार्य शीघ्र पूर्ण कर लिए जाएंगे।
अध्यक्ष ने निर्देश दिए कि मंदिर समिति की वेबसाइट के उच्चीकरण,मंदिर परिसर, दर्शन पंक्ति, पूजा कार्यालय , आनलाइन पूजा बुकिंग व्यवस्था को दुरुस्त कर लिया जाये। मंदिर के निकट प्राथमिक चिकित्सा, सूचना केंद्र और सहायता डेस्क प्रभावी रूप से संचालित किए जाएं। साथ ही धामों में पालीथिन पर प्रभावी रोक रहेगी,स्वच्छता व्यवस्था को प्राथमिकता देते हुए नियमित निरीक्षण सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
बैठक के अंत में अध्यक्ष ने सभी संबंधित अधिकारियों को टीम भावना से कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास जताया कि समुचित तैयारियों से इस वर्ष की यात्रा का शुभारंभ होगा और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
बैठक में बीकेटीसी उपाध्यक्ष विजय कपरवाण, सदस्य महेन्द्र शर्मा, धीरज मोनू पंचभैया, प्रह्लाद पुष्पवान, देवी प्रसाद देवली, राजेंद्र प्रसाद डिमरी, डा. विनीत पोस्ती,नीलम पुरी, दिनेश डोभाल, अधिशासी अभियंता विपिन तिवारी,विधि अधिकारी एस एस बर्त्वाल, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी राजन नैथानी एवं गिरीश चौहान, निजी सचिव प्रमोद नौटियाल, अतुल डिमरी संजय भट्ट आदि मौजूद रहे।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर ऋषिकेश में बहुमंजिला भवन को सील
देहरादून- मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण का प्राधिकरण क्षेत्रों में अवैध निर्माण, अवैध प्लाटिंग के खिलाफ सख्त अभियान जारी है। एमडीडीए ने नियमों की अनदेखी कर की जा रही प्लाटिंग और व्यावसायिक निर्माणों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए कई स्थलों पर ध्वस्तीकरण और सीलिंग की कार्यवाही की। प्राधिकरण का कहना है कि मास्टर प्लान के विपरीत किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और अभियान आगे भी जारी रहेगा।
सेलाकुई में 10 बीघा अवैध प्लाटिंग ध्वस्त
प्राधिकरण की टीम ने शेरपुर क्षेत्र में श्रीराम सेंटेनियल स्कूल के पीछे, नया हाईवे सेलाकुई के निकट लगभग 10 बीघा भूमि पर विकसित की जा रही अवैध प्लाटिंग पर बुलडोजर चलाया। भू-स्वामी श्री प्रवीन विज द्वारा बिना स्वीकृत लेआउट और आवश्यक अनुमति के भूखंडों का विभाजन किया जा रहा था। शिकायतों और निरीक्षण के बाद प्राधिकरण ने मौके पर पहुंचकर प्लाटिंग से जुड़े निर्माण कार्यों को ध्वस्त कर दिया। अधिकारियों ने बताया कि संबंधित पक्ष को पूर्व में नोटिस भी जारी किया गया था।
अवैध व्यावसायिक निर्माण पर सीलिंग
इसी क्षेत्र में सावेज द्वारा किए जा रहे अवैध व्यावसायिक निर्माण को भी सील किया गया। यह निर्माण बिना मानचित्र स्वीकृति और भूमि उपयोग परिवर्तन के किया जा रहा था। कार्रवाई के दौरान सहायक अभियंता सशांक सक्सेना, अवर अभियंता नीतेश राणा, सुपरवाइजर ललित तथा पुलिस बल की मौजूदगी में सीलिंग की प्रक्रिया पूरी की गई। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि व्यावसायिक गतिविधियों के नाम पर अनधिकृत निर्माण कतई स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
ऋषिकेश में बहुमंजिला भवन पर शिकंजा
हरिपुर कला, ऋषिकेश में आदिनाथ अखाड़ा के निकट अशोक मित्तल द्वारा किए जा रहे अवैध बहुमंजिला निर्माण पर भी सीलिंग की कार्रवाई की गई। जांच में पाया गया कि भवन का निर्माण स्वीकृत मानचित्र के बिना किया जा रहा था। सुरक्षा मानकों की अनदेखी को गंभीरता से लेते हुए प्राधिकरण ने तत्काल प्रभाव से निर्माण को सील कर दिया। इस कार्रवाई में सहायक अभियंता अभिषेक भारद्वाज, अवर अभियंता मनीष डिमरी, सुपरवाइजर एवं पुलिस बल उपस्थित रहे।
उपाध्यक्ष का सख्त संदेश
प्राधिकरण के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि अवैध निर्माण और प्लाटिंग के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई गई है। उन्होंने बताया कि कई मामलों में नोटिस के बावजूद नियमों का पालन नहीं किया गया, जिसके चलते कठोर कदम उठाने पड़े। उनका कहना है कि सुनियोजित शहरी विकास और नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी भूखंड या भवन की खरीद से पहले उसकी विधिक स्थिति की पुष्टि अवश्य करें।
नियमित निगरानी और आगे भी अभियान
सचिव मोहन सिंह बर्निया ने बताया कि प्राधिकरण क्षेत्र में निरंतर निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है। संदिग्ध निर्माण गतिविधियों की सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंचकर जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी ऐसे अभियानों को और तेज किया जाएगा ताकि मास्टर प्लान के अनुरूप सुव्यवस्थित विकास सुनिश्चित किया जा सके।
प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि अवैध कॉलोनियों और अनधिकृत निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाएगी।
पौड़ी। जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी कार्यालय, पौड़ी गढ़वाल के तत्वावधान में विकास भवन सभागार, पौड़ी में सतत विकास लक्ष्यों, डाटा इकोसिस्टम, पीएम गतिशक्ति तथा विजन-2047 विषयों पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन मुख्य विकास अधिकारी गिरीश गुणवंत अध्यक्षता में किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य जनपद स्तर पर सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु विभागीय समन्वय, डाटा आधारित योजना निर्माण तथा दीर्घकालिक विकास रणनीति को सुदृढ़ करना रहा।
कार्यशाला में जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी राम सलोने द्वारा संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित 17 सतत विकास लक्ष्यों एवं वर्ष 2047 तक निर्धारित विजन को प्राप्त करने की रणनीति पर विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया गया। उन्होंने बताया कि इन लक्ष्यों को ग्राम पंचायत विकास योजनाओं में समाहित करते हुए स्थानीय स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना आवश्यक है, जिससे समग्र एवं समावेशी विकास को गति मिल सके।
मुख्य विकास अधिकारी ने जनपद के समक्ष उपस्थित प्रमुख चुनौतियों जैसे स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभता, पलायन की समस्या, कृषि भूमि की चकबंदी व्यवस्था, ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, वनाग्नि की घटनाएं तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर विस्तार से विचार व्यक्त किए। उन्होंने इन चुनौतियों के समाधान के लिए विभिन्न विभागों, पंचायतीराज संस्थाओं तथा स्वयंसेवी संगठनों के मध्य बेहतर समन्वय एवं सहभागिता पर बल दिया।
सीपीपीजीजी सेल से आए विशेषज्ञों सैरन जैकब, कैलाश रावत एवं तपन घोष द्वारा पीपीटी के माध्यम से सतत विकास लक्ष्य, पीएम गतिशक्ति तथा विजन-2047 के महत्व एवं तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने विशेष रूप से जनपद की उन सूचकांकों पर ध्यान आकर्षित किया, जिनमें रैंकिंग अपेक्षाकृत कम है, जैसे कुपोषण एवं टीकाकरण, तथा इनमें शत-प्रतिशत प्रगति सुनिश्चित करने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने की आवश्यकता बताई।
जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी ने कार्यशाला में प्रतिभागियों से अपील की कि वे सतत विकास लक्ष्यों को जनजागरुकता अभियान के रूप में ग्राम पंचायत स्तर तक पहुंचाते हुए स्थानीय विकास योजनाओं में उनका प्रभावी समावेश सुनिश्चित करें।
इस अवसर पर जिला पंचायत राज अधिकारी जितेंद्र कुमार, पीएम स्वजल दीपक रावत, पीएम उरेडा सहित जनपद एवं विकासखंड स्तर के अधिकारियों के साथ साथ विभागीय स्तर पर अपर सांख्यिकीय अधिकारी रणजीत सिंह रावत एवं सीमा बिनान, सहायक सांख्यिकी अधिकारी शुभम काम्बोज एवं दर्पण गर्ग, वरिष्ठ सहायक दिगम्बर सिंह कठैत तथा जीआईएस/पीएम गतिशक्ति से संबंधित कार्मिक भी उपस्थित रहे।
पेयजल समस्याओं पर जिलाधिकारी का एक्शन प्लान, रूट कॉज एनालिसिस से स्थायी समाधान और जवाबदेही तय
पेयजल योजनाओं की परत-दर-परत जांच के निर्देश, डीएम ने अधिकारियों को प्रोएक्टिव मोड में किया सक्रिय
फील्ड स्तर पर जवाबदेही तय, कनिष्ठ अभियंताओं को नियमित निरीक्षण और त्वरित कार्रवाई के निर्देश
हर योजना की जिम्मेदारी होगी तय, डीएम ने विभागवार गांवों का विवरण साझा करने के दिए निर्देश
पौड़ी। जल जीवन मिशन एवं पेयजल से संबंधित शिकायतों की विस्तृत समीक्षा बैठक आज जिला मुख्यालय स्थित एनआईसी कक्ष में जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न जनसुनवाई मंचों जनता दरबार, ‘जन जन की सरकार’ कार्यक्रम तथा तहसील दिवस में प्राप्त पेयजल शिकायतों की विभागवार समीक्षा करते हुए उनके त्वरित एवं स्थायी समाधान के लिए अधिकारियों को स्पष्ट एवं समयबद्ध निर्देश दिए गए।
जिलाधिकारी ने कहा कि इस बैठक का उद्देश्य आमजन की पेयजल संबंधी समस्याओं का केवल निस्तारण करना ही नहीं, बल्कि उनके मूल कारणों को चिन्हित कर स्थायी समाधान सुनिश्चित करना भी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी तथा प्रत्येक शिकायत का गंभीरता से विश्लेषण किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि बैठक में प्राप्त शिकायतों में से कुछ प्रमुख मामलों को केस स्टडी के रूप में लेते हुए उनके मूल कारणों का विस्तृत विश्लेषण किया गया, ताकि प्रणालीगत कमियों की पहचान कर प्रभावी सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया से विभाग को प्रोएक्टिव मोड में कार्य करने में मदद मिलेगी और भविष्य में इस प्रकार की समस्याओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सकेगा, जिससे आमजन को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण पेयजल सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।
जिलाधिकारी ने कनिष्ठ अभियंताओं को पेयजल योजनाओं का निरीक्षण करने के निर्देश दिये तथा प्राप्त शिकायतों पर कार्रवाई करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि गांवों में पानी की आपूर्ति से संबंधित किसी भी समस्या की सूचना फिटर द्वारा तत्काल कनिष्ठ अभियंता को दी जाए और लीकेज, वाल्व, वितरण प्रणाली एवं इंटेक चैंबर से संबंधित समस्याओं का तत्काल समाधान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही सभी फिटर के संपर्क नंबर पंचायत भवनों में चस्पा किए जाएं, ताकि आमजन सीधे संपर्क कर सकें। उन्होंने कहा कि जहां कोई कार्मिक तैनात नहीं है, ऐसे स्थानों की सूची तैयार कर आवश्यक तैनाती सुनिश्चित की जाए।
जिलाधिकारी ने जल संस्थान, जल निगम एवं जल जीवन मिशन के सभी अधिशासी अभियंताओं को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने कार्यक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांवों की विस्तृत सूची तैयार कर आपस में साझा करें, ताकि योजनाओं के क्रियान्वयन में बेहतर समन्वय स्थापित हो सके और किसी भी कार्य का अनावश्यक दोहराव न हो। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया से यह स्पष्ट रूप से निर्धारित किया जा सकेगा कि किस विभाग के अंतर्गत कौन-सी पेयजल योजना संचालित हो रही है। इससे न केवल योजनाओं की जिम्मेदारी सुनिश्चित होगी, बल्कि उनकी नियमित एवं प्रभावी निगरानी भी संभव हो सकेगी, जिससे पेयजल व्यवस्था को अधिक सुव्यवस्थित एवं जवाबदेह बनाया जा सके।
टाटरी गांव की पेयजल समस्या की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया ने निर्देश दिए कि किसी भी गांव का कोई भी परिवार पेयजल सुविधा से वंचित नहीं रहना चाहिए तथा सभी गांवों में शत-प्रतिशत घरों तक नल कनेक्शन देकर पूर्ण संतृप्ति सुनिश्चित की जाए। बैठक में यह भी सामने आया कि कुछ गांवों में अभी कुछ कनेक्शन छूटे हुए हैं, जिस पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि इसका विस्तृत विश्लेषण करते हुए स्वागत संज्ञान लें और 15 दिन के भीतर आवश्यक कार्यवाही कर सभी छूटे हुए परिवारों को पेयजल सुविधा से आच्छादित करना सुनिश्चित करें।
बैठक में यह भी सामने आया कि कुछ स्थानों पर पेयजल स्रोतों में पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो रहा है, जिससे आपूर्ति प्रभावित हो रही है। इस पर जिलाधिकारी ने सभी डिवीजनों को निर्देशित किया कि ऐसी पेयजल योजनाओं का डीपीआर के अनुरूप पुनः सर्वे कराकर 15 दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें। साथ ही उन्होंने निर्देश दिए कि जहां स्रोत में पानी की कमी है, वहां वैकल्पिक स्रोतों का चिन्हीकरण, स्रोत संवर्द्धन, रिचार्ज कार्य, आवश्यकता अनुसार पंपिंग व्यवस्था अथवा योजना के पुनर्गठन जैसे ठोस समाधान प्रस्तावित कर शीघ्र कार्यवाही सुनिश्चित की जाए, ताकि प्रभावित क्षेत्रों में नियमित पेयजल आपूर्ति बहाल की जा सके। साथ ही पुराने लंबित मामलों को चिन्हित कर उनका प्राथमिकता के आधार पर त्वरित निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने नगर क्षेत्रों में लीकेज जैसी समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए विशेष मरम्मत दल गठित करने के निर्देश दिए, जो एक घंटे के भीतर मौके पर पहुंचकर समस्या का समाधान करें।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जिन स्थानों पर पेयजल योजनाओं से संबंधित समस्याएं सामने आ रही हैं, वहां संबंधित ठेकेदारों से समन्वय स्थापित कर संवाद के माध्यम से शीघ्र समाधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि योजनाओं का लाभ आमजन तक प्रभावी रूप से पहुंच सके। साथ ही उन्होंने वित्त विभाग, अभियंताओं एवं जल संस्थान के अधिकारियों की एक संयुक्त समिति गठित करने के निर्देश दिए, जो जमीनी स्तर पर निरीक्षण करते हुए डीपीआर एवं माप पुस्तिका (एमबी) के अनुरूप कार्यों का भौतिक सत्यापन करेगी। उन्होंने बताया कि समिति यह सुनिश्चित करेगी कि स्वीकृत मानकों के अनुसार कार्य वास्तविक रूप से संपादित हुए हैं या नहीं, जिससे योजनाओं में गुणवत्ता, पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
विकासखंड पाबौ के ग्राम कलूण में ‘हर घर जल’ योजना के अंतर्गत कार्यों की गुणवत्ता संबंधी शिकायत पर जिलाधिकारी ने कड़ा रुख अपनाते हुए निर्देश दिए कि यदि नई पाइप खरीदी गई हैं तो उनकी भौतिक उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि योजना के द्वितीय चरण का कार्य जिस डिवीजन द्वारा किया गया है, उसकी गुणवत्ता एवं पूर्णता के लिए वही डिवीजन पूर्ण रूप से जिम्मेदार होगी।
जिलाधिकारी ने जिला योजना के अंतर्गत स्वीकृत धनराशि का पूरा विवरण उपलब्ध कराने तथा यह प्रमाणित करने के निर्देश दिए कि संबंधित कार्य जल जीवन मिशन के अंतर्गत शामिल नहीं हैं, ताकि वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित किये जाने के साथ साथ जिम्मेदारी भी तय की जा सके। उन्होंने आपदा से क्षतिग्रस्त पाइपलाइनों तथा अधूरे कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण करने के भी निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने निर्देश दिए कि सभी पंपिंग स्टेशनों पर निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करना संबंधित विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है, ताकि पेयजल आपूर्ति प्रभावित न हो। साथ ही पंपिंग योजनाओं में मुआवजे की मांग के संबंध में अधिकारियों ने अवगत कराया कि पेयजल योजनाओं में मुआवजे का प्रावधान नहीं है, जिस पर जिलाधिकारी ने योजनाओं के नियमों के अनुसार कार्य करने के निर्देश दिए।
जल जीवन मिशन की प्रगति की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि जो योजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं, यदि उनमें कोई तकनीकी या संचालन संबंधी समस्या है तो उनका समाधान सर्वोच्च प्राथमिकता पर किया जाए। उन्होंने ‘रिपोर्टेड’ एवं ‘सर्टिफाइड’ नल कनेक्शनों के बीच अंतर को शीघ्र समाप्त करने के निर्देश दिए, जिससे वास्तविक स्थिति के अनुरूप आंकड़े उपलब्ध हो सकें। जिन योजनाओं की पूर्णता तिथि में देरी हो रही है, उनमें ठेकेदारों के साथ बैठक कर बाधाओं को दूर करते हुए कार्य शीघ्र पूर्ण कराया जाए।
जिलाधिकारी ने थर्ड पार्टी निरीक्षण की गुणवत्ता पर विशेष जोर देते हुए कहा कि निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जाएगा तथा पाइपलाइन का कार्य मानकों के अनुरूप भूमिगत ही होना चाहिए। उन्होंने नियमित रूप से शिकायत प्राप्त होने वाले क्षेत्रों की सूची तैयार कर समस्या के मूल कारणों का स्थायी समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। सभी पेयजल योजनाओं में योजना संबंधी विवरण का बोर्ड अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करने को कहा, जिससे पारदर्शिता बनी रहे। उन्होंने 15 मार्च तक सभी लंबित एटीआर (कार्यवाही प्रतिवेदन) पूर्ण कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
‘कैच द रैन’ अभियान की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जनपद की सभी जल स्रोतों एवं जल संरचनाओं का विवरण पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड किया जाए, जिससे जल संरक्षण एवं जल प्रबंधन की दिशा में प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित की जा सके।
इस अवसर पर संयुक्त मजिस्ट्रेट दीक्षिता जोशी, अधीक्षण अभियंता जल संस्थान प्रवीण सैनी, अर्थ एवं संख्याधिकारी राम सलोने, अधिशासी अभियंता जल निगम पौड़ी नवनीत कटारिया, कोटद्वार आशीष मिश्रा, अधिशासी अभियंता जल संस्थान कोटद्वार अभिषेक वर्मा, अधिशासी अभियंता जल निगम अजय बेलवाल, जल जीवन मिशन कनुप्रिया सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
हरिद्वार। रुड़की में बच्चों के बीच खेला जा रहा क्रिकेट अचानक दर्दनाक हादसे में बदल गया। गंगनहर कोतवाली क्षेत्र के पनियाला गांव स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर पार्क में खेल के दौरान हुई मामूली कहासुनी ने देखते ही देखते हिंसक रूप ले लिया।
बताया जा रहा है कि खेल के दौरान हुए विवाद में एक किशोर ने गुस्से में आकर 12 वर्षीय भानु के सिर पर डंडे से वार कर दिया। चोट इतनी गंभीर थी कि भानु मौके पर ही बेहोश होकर गिर पड़ा। परिजन तुरंत उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
इस घटना के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है और परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। पुलिस ने मृतक के पिता की शिकायत पर आरोपी किशोर के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
वारदात के बाद से आरोपी फरार है, जिसकी तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है। साथ ही पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आखिर एक सामान्य खेल के दौरान शुरू हुआ विवाद इतनी बड़ी घटना में कैसे बदल गया।
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मालसी, देहरादून स्थ्ति एक होटल में हिन्दुस्तान शिखर समागम-उत्तराखण्ड 2026 में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की जनभावनाओं के हिसाब से राज्य सरकार राज्य के विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। पिछले चार सालों में जनअपेक्षाओं के अनुरूप राज्य सरकार ने अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं। राज्य सरकार ने समान नागरिक संहिता, धर्मांतरण विरोधी कानून लागू करने के साथ ही मदरसा बोर्ड को खत्म करने जैसे अभूतपूर्व कदम उठाकर, सनातन की इस पुण्यभूमि को हर तरह से सुरक्षित रखने का प्रयास किया है। सख्त नकल विरोधी कानून और दंगा रोधी कानून लागू करने के साथ ही धार्मिक स्थलों के नाम पर अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाकर उत्तराखंड को एक शांतिप्रिय राज्य के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले हमने राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने की बात कही थी, जिस पर प्रदेश की देवतुल्य जनता का हमें पूरा समर्थन मिला। 2022 में सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट ने राज्य में समान नागरिक संहिता के लिए कमेटी बनाने का निर्णय लिया गया। उत्तराखण्ड देश में यू.सी.सी. लागू करने वाला पहला राज्य बना। मुख्यमंत्री ने 2027 में हरिद्वार में भव्य एवं दिव्य कुंभ का आयोजन किया जायेगा। इस सबंध में वे स्वयं 10 से अधिक बैठक कर चुके हैं। केन्द्र सरकार की ओर से इसके लिए 500 करोड़ की धनराशि भी जारी की जा चुकी है, मुख्यमंत्री ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार भी व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सबका साथ, सबका विश्वास, सबका विकास और सबका प्रयास के मंत्र पर कार्य कर रही है। किसी के साथ भेदभाव की भावना से कार्य नहीं किये जा रहे हैं, लेकिन छद्म तरीकों से देवभूमि की डेमोग्राफी बदलने का प्रयास करने वालों पर भी सरकार सख्ती से कार्रवाई कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नई खनन नीति बनने के बाद से उत्तराखण्ड में पिछले 02 सालों में हर साल 1200 करोड़ से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ, जो पहले 400 करोड़ तक रहता था। खनन क्षेत्र में उत्कृष्ट सुधारों के लिए केन्द्र सरकार ने राज्य को लगातार दो साल विशेष सहायता योजना के तहत 100-100 करोड़ की प्रोत्साहन राशि दी है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने अनेक महानुभावों को उत्तराखण्ड गौरव सम्मान से सम्मानित भी किया।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक खजानदास, हिन्दुस्तान के प्रधान संपादक शशि शेखर एवं अन्य गणमान्य उपस्थित थे।
देहरादून। मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में सचिवालय सभागार में अधिकृत वित्त समिति की बैठक आयोजित की गई।
यूआईडीएफ फंड के अंतर्गत न्यू कैंट मार्ग अपग्रेडेशन को मंजूरी
बैठक में यूआईडीएफ फंड के अंतर्गत न्यू कैंट मार्ग, दिलाराम बाजार से विजय कॉलोनी पुल तक 2 लेन से 3 लेन में उन्नयन हेतु यूटिलिटी शिफ्टिंग (विद्युत लाइनों को यूटिलिटी डक्ट में स्थानांतरित करना) एवं वाटर सप्लाई लाइन शिफ्टिंग के ₹1257.96 लाख के कार्यों को स्वीकृति प्रदान की गई।
पिथौरागढ़ में पेयजल योजना सुदृढ़ीकरण
जनपद पिथौरागढ़ की पिथौरागढ़ शाखा के अंतर्गत घाट पंपिंग पेयजल योजना की जीर्ण-शीर्ण पाइपलाइन, राइजिंग मेन के प्रतिस्थापन एवं पुनर्संरेखण संबंधी ₹1338.53 लाख रू की योजना को अनुमोदन दिया गया।
मसूरी राज्य राजमार्ग पर दो लेन स्टील बॉक्स पुल का निर्माण
मसूरी राज्य राजमार्ग संख्या-1 के कि.मी. 18 पर सहसपुर, जनपद देहरादून में क्षतिग्रस्त एकल लेन पुल के स्थान पर ₹1200.17 लाख रू की लागत से 60 मीटर स्पैन का दो लेन, क्लास-ए लोडिंग स्टील बॉक्स पुल निर्माण को स्वीकृति दी गई।
रामनगर बस टर्मिनल परियोजना पर सख्त रुख
मुख्य सचिव ने पेयजल निगम के रामनगर बस टर्मिनल निर्माण कार्य के पुनरीक्षित आकलन परियोजना में परियोजना के कुल खर्च के मुकाबले फाउंडेशन वर्क व साइट विकास की अधिक लागत पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने HOD, पीडब्ल्यूडी एवं एमडी, पेयजल निगम को प्रारंभिक लागत, विस्तारित लागत, साइट चयन, नींव खर्च एवं कुल व्यय की व्यवहारिकता, प्रासंगिकता, मितव्ययिता और उपयोगिता की जांच हेतु कमेटी गठित करते हुए रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
पब्लिक फंड की मितव्ययिता और सख्त स्क्रूटनी पर जोर
मुख्य सचिव ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि सार्वजनिक धन की मितव्ययिता सर्वोपरि है। केवल कंसलटेंट के प्रस्तावों पर निर्भर न रहते हुए विभाग स्वयं जिम्मेदारीपूर्वक पर्याप्त स्क्रूटनी करें। बिना समुचित जांच के किसी भी प्रस्ताव को हाई पावर कमेटी में प्रस्तुत न किया जाए। उन्होंने दो टूक कहा—कार्य पब्लिक-सेंट्रिक हों।
तेज और पारदर्शी क्रियान्वयन के निर्देश
आज स्वीकृत सभी परियोजनाओं पर शीघ्र, पारदर्शी एवं समयबद्ध अग्रिम कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में सचिव पंकज पांडेय, एस.ए. Adannki, बृजेश संत सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
ISO 1893-2025 के बाद पूरे राज्य को भूकंप जोन-6 मानते हुए नए नियम बनेंगे
देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य की बढ़ती भूकंपीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने भवन निर्माण नियमों को अधिक सुरक्षित और वैज्ञानिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।
भारतीय मानक ISO 1893-2025 के अनुसार पूरे राज्य के भूकंप जोन छह में शामिल होने के बाद अब बिल्डिंग बायलाॅज में व्यापक संशोधन किया जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन द्वारा वर्तमान बिल्डिंग बायलाॅज की समीक्षा एवं संशोधन हेतु सीएसआईआर-सीबीआरआई रुड़की के निदेशक प्रो. आर. प्रदीप कुमार की अध्यक्षता में 14 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है।
यूएलएमएमसी के निदेशक डाॅ. शांतनु सरकार को समिति का संयोजक बनाया गया है। बता दें कि वर्तमान में उत्तराखण्ड राज्य में बिल्डिंग बायलाॅज भारतीय मानक ब्यूरो के पुराने संस्करण ISO 1893-2002 पर आधारित हैं।
समिति में सीबीआरआई रुड़की, भारतीय मानक ब्यूरो, आईआईटी, ब्रिडकुल, लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग, विकास प्राधिकरणों तथा भू-वैज्ञानिक विशेषज्ञों सहित विभिन्न तकनीकी संस्थानों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है।
समिति वास्तुविदों के साथ ही विभिन्न अभियंताओं से भी विचार-विमर्श करेगी। समिति का उद्देश्य राज्य के मौजूदा बायलाॅज का गहन अध्ययन करते हुए उन्हें वर्तमान भूकंपीय मानकों, जलवायु परिस्थितियों और आधुनिक निर्माण तकनीकों के अनुरूप तैयार करना है।
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा कि उत्तराखण्ड की भौगोलिक परिस्थितियों और बढ़ती भूकंपीय संवेदनशीलता को देखते हुए भवन निर्माण के नियमों में परिवर्तन किया जा रहा है।
राज्य सरकार भवन बायलाॅज को अधिक प्रभावी, व्यावहारिक और आपदा-सुरक्षित बनाने की दिशा में ठोस कदम उठा रही है। इसी कड़ी में विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है। समिति भवन बायलाॅज को अधिक व्यवहारिक, सुरक्षित और आपदा-रोधी बनाने के लिए अपने सुझाव देगी। उन्होंने कहा कि संशोधित नियमों से शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित निर्माण को बढ़ावा मिलेगा और आपदा जोखिम में कमी आएगी।
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल नियमों में बदलाव करना नहीं बल्कि सुरक्षित निर्माण की संस्कृति विकसित करना है।
उन्होंने बताया कि संशोधित बिल्डिंग बायलाॅज में भूकंप-रोधी डिजाइन, भू-तकनीकी जांच, विंड लोड और स्ट्रक्चरल सेफ्टी से जुड़े प्रावधानों को शामिल करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही स्थानीय पारंपरिक निर्माण तकनीकों और जलवायु अनुकूल विकास को भी बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे सतत एवं आपदा-सक्षम विकास सुनिश्चित हो सके।
बता दें कि नए बिल्डिंग बायलाॅज लागू होने से भवनों की संरचनात्मक मजबूती बढ़ेगी, आपदा के दौरान जन-धन की हानि कम होगी और सुरक्षित व टिकाऊ शहरी विकास व निर्माण को नई दिशा मिलेगी। समिति अपनी रिपोर्ट उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण तथा आवास विभाग को सौंपेगी। समिति द्वारा तैयार की जाने वाली रिपोर्ट के आधार पर आवास विभाग द्वारा बायलाॅज में आवश्यक संशोधन एवं कार्यान्वयन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
समिति का कार्यक्षेत्र
उत्तराखण्ड राज्य के वर्तमान बिल्डिंग बायलाॅज की विस्तृत समीक्षा, विश्लेषण एवं मौजूदा तकनीकों का आकलन।
राज्य में मौजूद भूकंप, भूस्खलन और अन्य आपदा जोखिमों को समाहित करते हुए संशोधित बिल्डिंग बायलाॅज का मसौदा तैयार करना।
भूकंप-रोधी डिजाइन, नई निर्माण तकनीकों एवं संरचनात्मक सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों को शामिल करना।
पारंपरिक पहाड़ी निर्माण प्रणालियों को वैज्ञानिक रूप से आधुनिक नियमों में समाहित करना।
पर्यावरण संरक्षण और जलवायु अनुकूल निर्माण के लिए विशेष प्रावधान तैयार करना।
संशोधित नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु कार्ययोजना एवं दिशा-निर्देश प्रस्तुत करना।
इंजीनियरों, योजनाकारों एवं संबंधित विभागों के लिए प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के सुझाव देना।
समिति में ये हैं शामिल
समिति की अध्यक्षता सीएसआईआर-सीबीआरआई, रुड़की के निदेशक प्रो. आर. प्रदीप कुमार करेंगे, जबकि यूएलएमएमसी, देहरादून के निदेशक डॉ. शांतनु सरकार को संयोजक बनाया गया है।
समिति में डॉ. अजय चौरसिया (मुख्य वैज्ञानिक, सीबीआरआई रुड़की), प्रो. महुआ मुखर्जी (वास्तुकला विभाग, आईआईटी रुड़की), सुश्री मधुरिमा माधव (वैज्ञानिक ‘ब्’, भारतीय मानक ब्यूरो, नई दिल्ली), डॉ. पी.के. दास (वरिष्ठ ग्रामीण आवास सलाहकार, यूएनडीपी), आर्किटेक्ट एस.के. नेगी (पूर्व मुख्य वैज्ञानिक, सीबीआरआई शिमला), उत्तराखण्ड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण के नामित प्रतिनिधि, ब्रिडकुल के प्रबंध निदेशक, लोक निर्माण विभाग तथा सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता एवं विभागाध्यक्ष, राज्य के नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के प्रतिनिधि, मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण और हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण के प्रतिनिधियों के साथ-साथ भूकंप विशेषज्ञ धर्मेन्द्र कुशवाहा एवं भू-भौतिक विज्ञानी डॉ. विशाल वत्स सदस्य के रूप में शामिल किए गए हैं।
