रेवंत रेड्डी बोले– जनता का धन पिछली सरकार ने लूटा
हैदराबाद। तेलंगाना की महत्वाकांक्षी कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना में हुई अनियमितताओं की जांच अब सीबीआई करेगी। न्यायमूर्ति पिनाकी घोष आयोग की रिपोर्ट पर विधानसभा में हुई लंबी बहस के बाद मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने इसकी आधिकारिक घोषणा की।
विधानसभा में कालेश्वरम परियोजना पर आयोग की रिपोर्ट को लेकर गरमागरम चर्चा हुई। इस दौरान मुख्यमंत्री रेड्डी ने कहा कि परियोजना से जुड़े मामलों में अंतरराज्यीय मुद्दे, कई केंद्रीय एजेंसियां और वित्तीय संस्थान शामिल हैं, इसलिए इसकी जांच सीबीआई को सौंपना जरूरी है।
रेड्डी ने बताया कि राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (एनडीएसए) और न्यायिक आयोग की रिपोर्टों ने भी परियोजना की गहन जांच की आवश्यकता बताई है। रिपोर्ट में डिजाइन, निर्माण और गुणवत्ता नियंत्रण में गंभीर खामियां सामने आई हैं, जिनके चलते मेदिगड्डा बैराज विफल हुआ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना के लिए अब तक 49,835 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है, जिसमें 29,956 करोड़ रुपये ब्याज और 19,879 करोड़ रुपये मूलधन शामिल है। पिछली बीआरएस सरकार ने ऊंची ब्याज दरों पर ऋण लेकर राज्य की वित्तीय स्थिति को कमजोर किया। हालांकि मौजूदा सरकार ने केंद्र से बातचीत कर 26,000 करोड़ रुपये का ऋण पुनर्गठन कराया है।
रेड्डी ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने जानबूझकर बैराज का स्थान बदलकर सार्वजनिक धन की लूट की। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव को परियोजना में हुई अनियमितताओं का सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है।
वहीं, बीआरएस ने इस रिपोर्ट को राजनीतिक साजिश बताते हुए विधानसभा से वॉकआउट कर दिया। पूर्व मंत्री टी. हरीश राव ने आरोप लगाया कि आयोग ने जांच प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया और पार्टी नेताओं को पक्ष रखने का अवसर भी नहीं दिया। उन्होंने कहा कि यह रिपोर्ट पंचायत चुनावों से पहले राजनीतिक फायदे के लिए लाई गई है।
नई दिल्ली: विश्वप्रसिद्ध पुरी रथ यात्रा के रथों के तीन पहिए अब संसद परिसर में स्थापित किए जाएंगे। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) ने बताया कि यह प्रस्ताव लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के सामने पुरी यात्रा के दौरान रखा गया था, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया।
एसजेटीए के प्रमुख प्रशासक अरविंद के मुताबिक, तीनों पहिए भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और भगवान बलभद्र के रथों से निकाले जाएंगे। भगवान जगन्नाथ के रथ का नाम नंदीघोष, देवी सुभद्रा का रथ दर्पदलन और भगवान बलभद्र का रथ तालध्वज है। इन रथों से प्रत्येक रथ का एक पहिया दिल्ली भेजा जाएगा, जो संसद में स्थापित किया जाएगा।
संसद में संस्कृति का दूसरा प्रतीक
दो साल पहले 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में स्पीकर की कुर्सी के बगल में सेंगोल स्थापित किया था। रथ यात्रा के पहिए लगाने के बाद यह संसद परिसर में स्थापित होने वाला संस्कृति से जुड़ा दूसरा प्रतीक होगा।
सेंगोल को अंग्रेजों ने 14 अगस्त 1947 की रात पंडित नेहरू को सत्ता हस्तांतरण के प्रतीक के रूप में सौंपा था। 1960 से पहले इसे आनंद भवन में रखा गया था और 1978 से यह इलाहाबाद म्यूजियम में रखा गया।
रक्षा मंत्री बोले – आत्मनिर्भरता अब विकल्प नहीं, बल्कि समय की जरूरत
नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि बदलते वैश्विक हालात और बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच भारत और अधिक रणनीतिक रूप से मजबूत, आत्मनिर्भर और लचीला बनकर उभरेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि चाहे महामारी हो, आतंकवाद या क्षेत्रीय संघर्ष – मौजूदा सदी ने हर स्तर पर चुनौतियाँ खड़ी की हैं, और इन परिस्थितियों ने आत्मनिर्भर भारत की आवश्यकता को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है।
देश में युद्धपोत निर्माण का संकल्प
राजनाथ सिंह ने एक मीडिया कार्यक्रम में कहा कि आत्मनिर्भरता अब विकल्प नहीं, बल्कि समय की मांग है। उन्होंने बताया कि भारत अब अपने ही देश में युद्धपोतों का निर्माण कर रहा है और नौसेना ने यह ठाना है कि भविष्य में किसी भी विदेशी देश से युद्धपोत नहीं खरीदे जाएंगे।
स्वदेशी रक्षा प्रणाली पर जोर
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत के रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता के प्रयासों को सराहा जाना चाहिए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि स्वदेशी “सुदर्शन चक्र” रक्षा प्रणाली जल्द ही वास्तविकता बन जाएगी। साथ ही, विकसित देशों की संरक्षणवादी नीतियों पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर वैश्विक स्तर पर “युद्ध जैसी स्थिति” पैदा कर रहा है।
भारत के लिए राष्ट्रीय हित सर्वोपरि
अमेरिका-भारत व्यापार समझौते के संदर्भ में राजनाथ सिंह ने कहा कि बाहरी दबाव चाहे कितना भी क्यों न हो, भारत अपने किसानों और छोटे उद्यमियों के हितों से समझौता नहीं करेगा। उन्होंने साफ कहा कि भारत किसी भी देश को अपना शत्रु नहीं मानता, लेकिन राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।
13 अरब डॉलर से अधिक निवेश, मेक इन इंडिया से मेक फॉर द वर्ल्ड की ओर बढ़ा कदम
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री इशिबा के नेतृत्व में भारत-जापान संबंधों का नया दौर शुरू हुआ है। दोनों देशों की साझेदारी अब केवल ‘मेक इन इंडिया’ तक सीमित नहीं रही, बल्कि ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रही है। बीते दो वर्षों में हुए 170 से अधिक समझौते और 13 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश इस भरोसे और मजबूत साझेदारी का प्रमाण हैं।
भारत के उद्योगों में जापानी विश्वास
जापान का निवेश भारत के कई अहम क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है—इस्पात, ऑटोमोबाइल, नवीकरणीय ऊर्जा, एयरोस्पेस और सेमीकंडक्टर जैसे सेक्टरों में बड़े प्रोजेक्ट शुरू हो चुके हैं। निप्पॉन स्टील ने गुजरात व आंध्र प्रदेश में संयंत्र विस्तार की योजना बनाई है। वहीं, सुजुकी और टोयोटा भारत के अलग-अलग राज्यों में नए प्लांट्स लगाकर उत्पादन क्षमता बढ़ा रहे हैं। इससे लाखों रोजगार के अवसर पैदा होंगे और भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने में मदद मिलेगी।
वैश्विक निर्यात का नया केंद्र
भारत-जापान के संयुक्त उपक्रम अब घरेलू उत्पादन को वैश्विक बाजार में उतारने की तैयारी कर रहे हैं। भारत में निर्मित हाइब्रिड और ईवी वाहन अफ्रीका, दक्षिण-पूर्व एशिया और मध्य-पूर्व जैसे बाजारों में निर्यात होंगे। यह कदम भारत को “विनिर्माण हब” बनाने की दिशा में अहम साबित होगा।
लघु उद्योगों और किसानों को सीधा लाभ
भारत-जापान सहयोग का सबसे बड़ा फायदा लघु और मध्यम उद्यमों (SMEs) और किसानों को मिल रहा है। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और जापानी कंपनियों के साथ मिलकर देश में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित किया जा रहा है, जिसमें भारतीय SMEs को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बनने का अवसर मिलेगा।
इसी तरह, सोजित्ज कॉरपोरेशन और इंडियन ऑयल की साझेदारी से 30 बायोगैस संयंत्र स्थापित होंगे, जहां किसान कृषि अवशेष बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकेंगे।
रक्षा और रणनीतिक सहयोग
बढ़ते क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए भारत और जापान ने सैन्य सहयोग को भी नई दिशा दी है। तीनों सेनाओं के बीच संयुक्त अभ्यास बढ़ाए जाएंगे और आधुनिक तकनीक आधारित सैन्य उपकरण विकसित किए जाएंगे। साथ ही, दोनों देशों ने खुफिया जानकारी साझा करने और आतंकवाद व संगठित अपराधों से मिलकर निपटने का भी संकल्प लिया।
सतत विकास और पर्यावरण पर जोर
ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी दोनों देशों ने साझेदारी बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके लिए संयुक्त क्रेडिट तंत्र पर सहमति बनी है, जो स्वच्छ ऊर्जा और हरित विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।
जब समाज के अंतिम व्यक्ति तक वित्तीय साधन पहुँचते हैं, तभी पूरा देश आर्थिक रूप से आगे बढ़ता है- पीएम मोदी
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री जनधन योजना (PMJDY) के 11 साल पूरे होने पर इसे “देश में वित्तीय समावेशन की क्रांति” बताया। उन्होंने कहा कि जब समाज के अंतिम व्यक्ति तक वित्तीय साधन पहुँचते हैं, तभी पूरा देश आर्थिक रूप से आगे बढ़ता है। सोशल मीडिया पोस्ट में पीएम मोदी ने लिखा कि यह योजना लोगों को सम्मान के साथ अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने और अपना भाग्य खुद बनाने का अवसर देती है।
प्रधानमंत्री ने माइगोव द्वारा साझा किए गए एक पोस्ट का हवाला देते हुए बताया कि कैसे यह योजना जीवन बदलने वाली साबित हुई है। योजना ने बैंकिंग, बचत, महिला सशक्तिकरण और पारदर्शी डीबीटी हस्तांतरण जैसे क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। इसके माध्यम से ग्रामीण और गरीब परिवारों को वित्तीय दुनिया से जोड़कर उन्हें राष्ट्र के विकास में भागीदार बनाया गया है।
माइगोव के एक अन्य पोस्ट में कहा गया कि 11 साल पहले पीएम मोदी ने यह वादा किया था कि कोई भी गरीब परिवार बैंकिंग प्रणाली से बाहर नहीं रहेगा। जनधन योजना केवल खातों तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह सम्मान के साथ बचत करने, किसानों और ग्रामीणों को सीधे लाभ पहुँचाने और उन्हें देश के विकास में भागीदार बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि पिछले 11 वर्षों में 56 करोड़ से अधिक जनधन खाते खोले गए हैं। इन खातों में कुल जमा राशि 2.68 लाख करोड़ रुपये है। डिजिटल लेनदेन को आसान बनाने के लिए 38 करोड़ से अधिक मुफ्त रूपे कार्ड जारी किए गए। योजना के तहत 67% खाते ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में खोले गए, जबकि 56% खाते महिलाओं के हैं।
पीएम मोदी के दृष्टिकोण ने वित्तीय समावेशन को वास्तविकता में बदलकर हर घर में आशा और आत्मविश्वास जगाया। यह योजना 28 अगस्त 2014 को राष्ट्रीय मिशन के रूप में शुरू की गई थी, जिसमें प्रत्येक परिवार के लिए बैंकिंग खाता, वित्तीय साक्षरता, ऋण, बीमा और पेंशन जैसी सुविधाओं तक सार्वभौमिक पहुंच सुनिश्चित की गई।
पीएम जनधन योजना देश की वित्तीय यात्रा में हमेशा एक महत्वपूर्ण बदलाव लाने वाली योजना के रूप में याद रखी जाएगी।
ममता ने टीएमसीपी कार्यकर्ताओं को दी बधाई, बताया तृणमूल परिवार का मजबूत स्तंभ
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तृणमूल छात्र परिषद (टीएमसीपी) के स्थापना दिवस पर युवाओं को अन्याय के खिलाफ डटकर खड़े होने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जीवन में चाहे कैसी भी परिस्थिति हो, अन्याय से समझौता नहीं करना चाहिए। ममता बनर्जी ने इस अवसर पर टीएमसीपी से जुड़े पुराने और नए कार्यकर्ताओं को बधाई देते हुए उन्हें सामाजिक न्याय और प्रगति की लड़ाई का अहम हिस्सा बताया।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि टीएमसीपी, तृणमूल परिवार का एक मजबूत स्तंभ है और बंगाल को और आगे बढ़ाने में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने संदेश दिया—“सिर ऊंचा रखकर जीना और अन्याय के खिलाफ हर लड़ाई में मुझे अपने साथ पाओगे।” ममता बनर्जी गुरुवार दोपहर कोलकाता के मेयो रोड पर आयोजित स्थापना दिवस की भव्य रैली को संबोधित करेंगी।
इसी अवसर पर तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भी युवाओं की भूमिका को सराहा। उन्होंने कहा कि टीएमसीपी एक ऐसा मंच है, जहां छात्र और युवा अपनी आवाज बुलंद कर सकते हैं और समाज में बदलाव लाने में योगदान दे सकते हैं। अभिषेक बनर्जी ने सभी कार्यकर्ताओं को उनकी प्रतिबद्धता के लिए धन्यवाद देते हुए कहा—“युवाओं की ऊर्जा और सपनों से ही बंगाल की प्रगति का रास्ता मजबूत होता है। जय बांग्ला।”
गुमनाम दलों को मिले भारी फंड पर कांग्रेस नेता ने पूछा– यह पैसा आया कहां से और गया कहां?
नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने गुजरात की कुछ राजनीतिक पार्टियों को मिले भारी-भरकम चंदे को लेकर सवाल उठाए हैं। राहुल गांधी ने एक मीडिया रिपोर्ट साझा करते हुए आरोप लगाया कि जिन दलों का नाम तक लोगों ने नहीं सुना, उन्हें हजारों करोड़ रुपये का फंड मिला है, लेकिन उनका चुनावी प्रदर्शन बेहद नगण्य रहा।
लोकसभा में विपक्ष के नेता गांधी ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा कि इन गुमनाम दलों ने 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव तथा 2022 के विधानसभा चुनाव में कुल 43 उम्मीदवार खड़े किए, जिन्हें मिलकर महज 54,000 से अधिक वोट हासिल हुए। वहीं, इनकी चुनावी रिपोर्ट में खर्च करीब 39 लाख रुपये दर्ज है, जबकि ऑडिट रिपोर्ट में 3,500 करोड़ रुपये का हिसाब-किताब सामने आता है।
राहुल गांधी ने चुनाव आयोग को घेरते हुए कहा कि आखिर इन पार्टियों को 4,300 करोड़ रुपये का चंदा कहां से मिला और यह पैसा खर्च कहां हुआ? उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि क्या चुनाव आयोग इसकी जांच करेगा या फिर केवल हलफनामा मांगकर मामले को टाल देगा?
गौरतलब है कि राहुल गांधी हाल ही में मतदाता सूची में गड़बड़ी का मुद्दा भी उठा चुके हैं। उस वक्त चुनाव आयोग ने उन्हें शपथपत्र देकर सबूत पेश करने या माफी मांगने को कहा था। अब एक बार फिर कांग्रेस नेता ने आयोग की भूमिका पर सवाल खड़े कर सियासी हलचल बढ़ा दी है।
25% अतिरिक्त टैरिफ से भारत के निर्यात पर संकट
नई दिल्ली। अमेरिका ने बुधवार से भारत पर 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लागू कर दिया है, जो मुख्य रूप से कपड़ा, हीरे-जेवरात, चमड़ा, समुद्री उत्पाद और इंजीनियरिंग सामान के निर्यात को प्रभावित करेगा। इस कदम के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का ‘मेगा’ फॉर्मूला अब भारत के लिए ‘महा सिरदर्द’ बन गया है।
कांग्रेस के संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि अमेरिकी टैरिफ का असर श्रम-प्रधान निर्यात क्षेत्रों पर सीधे पड़ेगा। उन्होंने यह भी बताया कि 24 घंटे पहले अमेरिकी वाणिज्य सचिव ने एच1बी वीजा प्रणाली पर बयान दिया, जिसका सबसे बड़ा लाभ भारतीय आईटी पेशेवरों को मिलता है।
रमेश ने मोदी द्वारा फरवरी में दिए गए ‘मागा + मिगा = मेगा’ फॉर्मूले का जिक्र करते हुए कहा कि अब वही ‘मोदी-निर्मित मेगा’ भारत के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति बन गया है। उस समय मोदी ने अमेरिका दौरे के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप के साथ प्रेस कांफ्रेंस में इसे एक नई साझेदारी के रूप में पेश किया था।
अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने सोमवार को मसौदा आदेश जारी किया, जिसमें कहा गया कि यह बढ़ा हुआ टैरिफ 27 अगस्त, 2025 से अमेरिकी बाजार में आयात होने वाले भारतीय उत्पादों पर लागू होगा। 7 अगस्त को ट्रंप ने भारत पर 25 फीसदी जवाबी टैरिफ की घोषणा की थी, जिसे रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण बढ़ाकर 50 फीसदी कर दिया गया।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को कहा कि वह किसानों, पशुपालकों और लघु उद्योगों के हितों से समझौता नहीं करेंगे और बढ़ते दबाव का सामना करेंगे।
प्रशासन हाई अलर्ट पर, लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया, स्कूल-कॉलेज बंद
जम्मू। जम्मू-कश्मीर में लगातार हो रही भारी बारिश ने तबाही मचा दी है। रियासी जिले में माता वैष्णो देवी धाम की ओर जाने वाले मार्ग पर भूस्खलन में 30 श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 20 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। अर्द्धकुंवारी के पास हुआ यह हादसा यात्रा मार्ग को बुरी तरह प्रभावित कर गया है। सेना और प्रशासन की टीमें राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं और आशंका है कि मलबे में और भी लोग दबे हो सकते हैं।
जम्मू-कश्मीर में चार दिन से जारी भारी बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। रियासी जिले के अर्द्धकुंवारी गुफा मंदिर के पास इंद्रप्रस्थ भोजनालय के नजदीक भूस्खलन होने से त्रिकुटा पहाड़ी का बड़ा हिस्सा मलबे में तब्दील हो गया। हादसे के बाद श्री माता वैष्णो देवी यात्रा को रोक दिया गया है।
लगातार बारिश से जम्मू संभाग में नदियां उफान पर हैं, पुल और सड़कों को नुकसान पहुंचा है। जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग भूस्खलन से बंद हो गया है, जबकि 18 ट्रेनें और दो हवाई सेवाएं भी रद्द करनी पड़ी हैं।
जम्मू शहर में तवी नदी का जलस्तर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। कई पुलों पर आवाजाही रोक दी गई है। कठुआ, सांबा और उधमपुर जिलों में बाढ़ जैसी स्थिति है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है।
मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे में और भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। प्रशासन ने स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए हैं और रात नौ बजे के बाद आम लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया गया है।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हालात की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को हाई अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। वहीं उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने श्रद्धालुओं की मौत पर शोक जताते हुए कहा कि प्रभावितों को हर संभव मदद उपलब्ध कराई जाएगी।
टीडीएस प्लांट से भारत बनेगा वैश्विक ईवी हब, 100 देशों को होंगे एक्सपोर्ट
अहमदाबाद। गुजरात दौरे के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अहमदाबाद पहुंचे, जहां उन्हें सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उन्होंने टीडीएस लिथियम-आयन बैटरी प्लांट में हाइब्रिड बैटरी इलेक्ट्रोड के स्थानीय उत्पादन की शुरुआत की। यह प्लांट तोशिबा, डेंसो और सुजुकी के संयुक्त उद्यम के रूप में विकसित किया गया है।
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी के साथ सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष तोशीहिरो सुजुकी और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल भी मौजूद रहे। संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि अब भारत में बने इलेक्ट्रिक वाहन दुनिया के दर्जनों देशों में ‘मेड इन इंडिया’ की पहचान के साथ दौड़ेंगे। उन्होंने इसे “मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड” अभियान की दिशा में एक बड़ी छलांग बताया।
प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत से बने इलेक्ट्रिक व्हीकल्स अब 100 देशों को निर्यात किए जाएंगे और साथ ही हाइब्रिड बैटरी इलेक्ट्रोड मैन्युफैक्चरिंग की शुरुआत भारत की तकनीकी प्रगति का प्रमाण है। उन्होंने इस अवसर को भारत-जापान दोस्ती के नए आयाम से भी जोड़ा और सुजुकी कंपनी सहित दोनों देशों के नागरिकों को बधाई दी।
मोदी ने याद दिलाया कि वर्ष 2012 में जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब मारुति सुजुकी को हंसलपुर में जमीन आवंटित की गई थी। उसी विजन का परिणाम आज आत्मनिर्भर भारत और ‘मेक इन इंडिया’ के बड़े संकल्प के रूप में सामने आ रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की ताकत उसके लोकतंत्र, सकारात्मक जनसांख्यिकीय लाभ और कुशल कार्यबल में निहित है। यही कारण है कि भारत निवेश और उत्पादन के लिए दुनिया का पसंदीदा गंतव्य बन रहा है। उन्होंने कहा कि आज जब जापानी कंपनी सुजुकी भारत में गाड़ियां बना रही है और उन्हें वापस जापान एक्सपोर्ट कर रही है, तो यह दोनों देशों की गहरी साझेदारी और भारत पर वैश्विक भरोसे का प्रतीक है।
