नई ग्रामीण रोजगार योजना पर सियासी घमासान, केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस पर साधा निशाना
नई पहल ग्रामीण क्षेत्रों में काम के अधिकार को कमजोर नहीं, बल्कि पहले से अधिक सशक्त बनाएगी- केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री
नई दिल्ली। केंद्र सरकार की प्रस्तावित नई ग्रामीण रोजगार योजना को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और सांसद राहुल गांधी पर तीखा हमला करते हुए कहा कि विपक्ष ‘VB-G RAM G’ (विकसित भारत–रोजगार आजीविका मिशन) को लेकर जनता के बीच भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह नई पहल ग्रामीण क्षेत्रों में काम के अधिकार को कमजोर नहीं, बल्कि पहले से अधिक सशक्त बनाएगी।
देश की हर पंचायत में लागू होगी योजना
एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विपक्ष यह गलत धारणा फैला रहा है कि नई योजना के तहत रोजगार सीमित पंचायतों तक ही रहेगा। उन्होंने दो टूक कहा कि ‘VB-G RAM G’ योजना देश की सभी पंचायतों में लागू की जाएगी। मंत्री ने यह भी कहा कि काम के अधिकार को खत्म किए जाने का दावा पूरी तरह निराधार और भ्रामक है। गौरतलब है कि कांग्रेस ने मनरेगा को समाप्त किए जाने के विरोध में 10 जनवरी से ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ के तहत 45 दिन का देशव्यापी अभियान शुरू किया है।
रोजगार के दिनों में बढ़ोतरी का दावा
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार ने कागजों में नहीं, बल्कि धरातल पर काम के अधिकार को मजबूत किया है। उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था के तहत अब 100 दिनों के बजाय 125 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही, काम न मिलने की स्थिति में 15 दिनों के भीतर बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान भी किया गया है।
राज्यों पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा
शिवराज सिंह चौहान ने यूपीए और मौजूदा सरकार की तुलना करते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने मनरेगा पर लगभग दो लाख करोड़ रुपये खर्च किए थे, जबकि वर्तमान सरकार ने ग्रामीण रोजगार पर करीब नौ लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं। उन्होंने बताया कि नई योजना को अगले छह महीनों में लागू किया जाएगा और तब तक मनरेगा जारी रहेगी। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि इस योजना से राज्यों पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। केंद्र सरकार पहले से अधिक संसाधन उपलब्ध करा रही है, जबकि राज्यों का निवेश ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में सहायक होगा।
पीएम मोदी ने संविधान सदन में 28वीं कॉमनवेल्थ स्पीकर्स कॉन्फ्रेंस का किया उद्घाटन
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में 28वीं कॉमनवेल्थ स्पीकर्स एंड प्रेसिडिंग ऑफिसर्स कॉन्फ्रेंस (CSPOC) 2026 का औपचारिक उद्घाटन किया। इस अवसर पर लोकतंत्र, संसदीय व्यवस्था और वैश्विक सहयोग को लेकर भारत की भूमिका को रेखांकित किया गया। कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह उपस्थित रहे।
अपने उद्घाटन संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय लोकतंत्र की समावेशिता और महिला नेतृत्व की मजबूती पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत की राष्ट्रपति देश की प्रथम नागरिक हैं और दिल्ली की मुख्यमंत्री भी एक महिला हैं, जो यह दर्शाता है कि भारत में महिलाएं न केवल लोकतंत्र का हिस्सा हैं, बल्कि नेतृत्व की अग्रिम पंक्ति में भी खड़ी हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि 2024 के आम चुनाव मानव इतिहास का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक अभ्यास रहे, जिसमें करीब 98 करोड़ मतदाता पंजीकृत थे और महिलाओं की भागीदारी ऐतिहासिक रही।
प्रधानमंत्री ने सेंट्रल हॉल के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यही वह स्थान है जहां स्वतंत्रता से पहले संविधान सभा की बैठकें हुईं और आजादी के बाद दशकों तक यहीं से देश के भविष्य से जुड़े अहम फैसले लिए गए। अब इस ऐतिहासिक धरोहर को संविधान सदन के रूप में लोकतंत्र को समर्पित किया गया है।
कॉमनवेल्थ देशों के साथ भारत के सहयोग पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कॉमनवेल्थ की कुल आबादी का लगभग आधा हिस्सा भारत में निवास करता है और भारत का प्रयास रहा है कि वह स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन, आर्थिक विकास और नवाचार जैसे क्षेत्रों में साझा लक्ष्यों की प्राप्ति में सक्रिय योगदान दे। उन्होंने कहा कि भारत अपने अनुभवों से सीखने के साथ-साथ उन्हें अन्य साझेदार देशों के साथ साझा करने में भी विश्वास रखता है, विशेष रूप से वैश्विक दक्षिण के लिए नए अवसरों के निर्माण में।
प्रधानमंत्री मोदी ने संसदीय लोकतंत्र में स्पीकर की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि स्पीकर का दायित्व केवल सदन का संचालन करना नहीं, बल्कि निष्पक्षता, धैर्य और संतुलन के साथ हर सदस्य को अपनी बात रखने का अवसर देना भी है। उन्होंने कहा कि यह चौथा अवसर है जब भारत इस प्रतिष्ठित सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है और इस बार सम्मेलन का मुख्य विषय “संसदीय लोकतंत्र की प्रभावी डिलीवरी” रखा गया है।
प्रधानमंत्री ने भारत को लोकतंत्र की जननी बताते हुए कहा कि सहमति, संवाद और विचार-विमर्श की परंपरा भारत की प्राचीन सभ्यता का हिस्सा रही है। उन्होंने कहा कि तमाम शंकाओं के बावजूद भारत ने यह सिद्ध किया है कि विविधता लोकतंत्र की कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी ताकत है। लोकतांत्रिक संस्थाओं ने देश को स्थिरता, गति और विकास का मजबूत आधार दिया है।
आर्थिक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। डिजिटल भुगतान प्रणाली यूपीआई, वैक्सीन उत्पादन और इस्पात निर्माण जैसे क्षेत्रों में भारत ने वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है।
इस सम्मेलन की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला कर रहे हैं। इसमें 42 कॉमनवेल्थ देशों के 61 स्पीकर्स और प्रेसिडिंग ऑफिसर्स सहित अर्ध-स्वायत्त संसदों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, नाइजीरिया, दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका और मलेशिया सहित कई देशों के प्रतिनिधि सम्मेलन में शामिल हुए हैं।
सम्मेलन के दौरान संसद की बदलती भूमिका, तकनीकी नवाचार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग, सोशल मीडिया का प्रभाव, नागरिक भागीदारी बढ़ाने की रणनीतियों और सांसदों की सुरक्षा व कल्याण जैसे विषयों पर गहन चर्चा की जाएगी। 14 से 16 जनवरी तक चलने वाला यह सम्मेलन अब तक का सबसे बड़ा CSPOC माना जा रहा है, जिसकी पिछली बैठक जनवरी 2024 में युगांडा में आयोजित हुई थी।
16 जनवरी को आएंगे नतीजे, महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा होगी तय
मुंबई। महाराष्ट्र में लंबे इंतजार के बाद नगर निकाय चुनावों की तस्वीर साफ हो गई है। बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) समेत राज्य के 29 नगर निगमों में तीन साल की देरी से चुनाव कराए जा रहे हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं और राजनीतिक दलों ने भी उम्मीदवारों की घोषणा के साथ चुनावी रणनीति को अंतिम रूप दे दिया है। अब प्रदेश की सियासत की दिशा तय करने वाले इस अहम चुनाव पर सबकी नजरें टिकी हैं।
एक चरण में होगा मतदान
महाराष्ट्र में बीएमसी सहित 29 नगर निगमों के लिए 15 जनवरी 2026 को एक ही चरण में मतदान कराया जाएगा। मतदाताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने मतदान दिवस पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। ग्रेटर मुंबई क्षेत्र में सभी मतदान केंद्रों पर सुबह 7:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक वोट डाले जाएंगे। चुनाव परिणाम 16 जनवरी को घोषित किए जाएंगे।
नामांकन से लेकर अंतिम सूची तक पूरी प्रक्रिया संपन्न
नगर निकाय चुनावों के लिए नामांकन प्रक्रिया 23 दिसंबर 2025 से शुरू हुई थी, जो 30 दिसंबर तक चली। उम्मीदवारों को 2 जनवरी 2026 तक नाम वापस लेने का मौका दिया गया। इसके बाद 3 जनवरी को चुनाव मैदान में उतरे प्रत्याशियों की अंतिम सूची जारी की गई। अब सभी दल पूरी ताकत के साथ प्रचार में जुटे हुए हैं।
बीएमसी में 1.03 करोड़ से अधिक मतदाता
देश के सबसे बड़े नगर निगम बीएमसी के 227 वार्डों में 1.03 करोड़ से ज्यादा मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। महाराष्ट्र के कुल 29 नगर निगमों में बीएमसी का राजनीतिक और प्रशासनिक महत्व सबसे अधिक माना जाता है, इसलिए यहां का चुनाव राज्य की राजनीति के लिए बेहद अहम है।
गठबंधनों के बीच कड़ा मुकाबला
बीएमसी चुनाव में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन पूरी मजबूती के साथ मैदान में है। इस गठबंधन में भाजपा और शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) शामिल हैं। भाजपा 137 सीटों पर जबकि शिवसेना 90 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। वहीं, गठबंधन की सहयोगी एनसीपी ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला करते हुए 94 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं।
दूसरी ओर कांग्रेस भी मजबूती से चुनावी मैदान में है। कांग्रेस ने 143 सीटों पर प्रत्याशी उतारे हैं और उसे वंचित बहुजन अघाड़ी का समर्थन प्राप्त है, जिसने 42 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए हैं। कांग्रेस की सहयोगी राष्ट्रीय समाज पक्ष भी छह सीटों पर चुनाव लड़ रही है।
तीसरे मोर्चे की भी ताकत आजमाइश
तीसरे गठबंधन में शिवसेना (उद्धव ठाकरे), एनसीपी (शरद पवार) और मनसे (राज ठाकरे) शामिल हैं। इस गठबंधन में शिवसेना (उद्धव गुट) 150 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि एनसीपी 11 सीटों पर मैदान में है। मनसे शेष सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारकर अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने की कोशिश कर रही है।
कुल मिलाकर, बीएमसी और अन्य नगर निगमों के ये चुनाव न केवल शहरी शासन की दिशा तय करेंगे, बल्कि महाराष्ट्र की भविष्य की राजनीति पर भी गहरा असर डालने वाले साबित होंगे।
सोमनाथ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को सोमनाथ में आयोजित शौर्य यात्रा में सहभागिता कर आस्था, साहस और सांस्कृतिक विरासत के प्रति देश की प्रतिबद्धता का संदेश दिया। यह यात्रा सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अंतर्गत आयोजित चार दिवसीय कार्यक्रमों का प्रमुख आकर्षण रही, जिसका उद्देश्य सदियों से चले आ रहे संघर्ष और श्रद्धा की परंपरा को स्मरण करना है।
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित की और उन वीर योद्धाओं को नमन किया, जिन्होंने विभिन्न कालखंडों में सोमनाथ मंदिर की रक्षा करते हुए बलिदान दिया। उन्होंने मंदिर परिसर में विधिवत पूजा-अर्चना कर देशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की।
फूलों से सजे खुले वाहन में सवार प्रधानमंत्री यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं का अभिवादन स्वीकार करते नजर आए। इस दौरान गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी भी उनके साथ मौजूद रहे। यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री ने डमरू बजाकर उत्साह और सांस्कृतिक ऊर्जा का प्रतीकात्मक संदेश दिया।
शौर्य यात्रा में गुजरात पुलिस की माउंटेड यूनिट विशेष आकर्षण रही। काठियावाड़ी और मारवाड़ी नस्ल के 108 प्रशिक्षित घोड़ों ने यात्रा को भव्य स्वरूप दिया। अधिकारियों के अनुसार, इन घोड़ों को आठ माह तक विशेष प्रशिक्षण दिया गया था ताकि वे इस ऐतिहासिक आयोजन का हिस्सा बन सकें।
यात्रा के मार्ग में साधु-संतों, श्रद्धालुओं और स्कूली बच्चों ने प्रधानमंत्री का स्वागत किया। खेड़ा जिले के ब्रह्मर्षि संस्कृत महाविद्यालय के लगभग 350 विद्यार्थियों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया। छात्रों ने शंख और डमरू बजाते हुए यात्रा का नेतृत्व किया, जिससे वातावरण भक्तिमय और उत्साहपूर्ण हो गया।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के तहत आयोजित यह शौर्य यात्रा इतिहास, संस्कृति और राष्ट्रीय आत्मगौरव का प्रतीक बनकर उभरी, जिसमें परंपरा और वर्तमान का अनूठा संगम देखने को मिला।
‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग’ में एनएसए डोभाल का युवाओं को संदेश
नई दिल्ली। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने कहा है कि भारत के विकसित राष्ट्र बनने की यात्रा अब निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है। ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग’ के उद्घाटन सत्र में युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश इतनी मजबूत बुनियाद पर खड़ा हो चुका है कि इसकी प्रगति की दिशा अब स्थायी हो गई है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे निर्णय लेने की क्षमता, आत्मविश्वास और राष्ट्रीय चेतना के साथ देश निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं।
युवाओं से सीधा संवाद, अनुभव साझा किए
कार्यक्रम के दौरान एनएसए डोभाल ने अपने जीवन अनुभव साझा करते हुए कहा कि पीढ़ियों के बीच का अंतर बड़ा जरूर है, लेकिन देश के भविष्य को लेकर सोच समान होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वतंत्रता-पूर्व भारत को भी देखा है और आज के भारत को भी, जहां परिवर्तन की गति अभूतपूर्व है। उनके अनुसार, आज का भारत आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।
निर्णय क्षमता को बताया सफलता की कुंजी
डोभाल ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन और राष्ट्र निर्माण दोनों में फैसलों की भूमिका सबसे अहम होती है। उन्होंने कहा कि भारत का विकसित राष्ट्र बनना तय है, लेकिन यह तभी संभव है जब युवा वर्ग जिम्मेदारी के साथ निर्णय ले और चुनौतियों का सामना करने से पीछे न हटे।
राष्ट्रीय सुरक्षा और शक्ति पर जोर
एनएसए ने वैश्विक हालात का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया में जारी संघर्ष इस बात का प्रमाण हैं कि शक्ति और आत्मविश्वास के बिना स्वतंत्रता सुरक्षित नहीं रह सकती। उन्होंने कहा कि सशक्त राष्ट्र ही अपने हितों की रक्षा कर पाते हैं। उनके मुताबिक, नेतृत्व की स्पष्ट दृष्टि और दृढ़ संकल्प देश को आगे बढ़ाने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
इतिहास से सीख लेकर भविष्य निर्माण की अपील
डोभाल ने ‘विश्व अर्थव्यवस्था का इतिहास’ पुस्तक का हवाला देते हुए कहा कि भारत और चीन लंबे समय तक वैश्विक अर्थव्यवस्था के केंद्र में रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने अतीत में विज्ञान, व्यापार और ज्ञान के क्षेत्र में विश्व का नेतृत्व किया, लेकिन समय के साथ गिरावट भी आई। ऐसे में इतिहास से सीख लेते हुए निरंतर प्रयास और राष्ट्रवादी सोच के साथ आगे बढ़ना जरूरी है।
बलिदानों को याद कर युवाओं को संदेश
एनएसए ने स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानों को याद करते हुए कहा कि आजादी ऐसे ही नहीं मिली। भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस और महात्मा गांधी जैसे महान व्यक्तित्वों के संघर्ष ने आज के भारत की नींव रखी। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे इन मूल्यों को अपनाकर एक सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण में योगदान दें।
अंकिता भंडारी केस से उन्नाव तक, राहुल गांधी ने उठाए न्याय के सवाल
नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार और भाजपा शासित राज्यों पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी एक विस्तृत पोस्ट में उन्होंने ‘डबल इंजन सरकार’ की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए भ्रष्टाचार, सत्ता के दुरुपयोग और जनहित की अनदेखी के आरोप लगाए।
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि भाजपा की डबल इंजन सरकारों ने देश के विभिन्न हिस्सों में आम लोगों की जिंदगी मुश्किल में डाल दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि गरीब, मजदूर और मध्यमवर्ग की समस्याओं को नजरअंदाज कर ‘विकास’ के नाम पर केवल वसूली और सत्ता का दुरुपयोग किया जा रहा है। राहुल गांधी के अनुसार, भाजपा की राजनीति में ऊपर से नीचे तक अहंकार और भ्रष्टाचार गहराई से समाया हुआ है।
उत्तराखंड से यूपी तक उठाए सवाल
राहुल गांधी ने उत्तराखंड की अंकिता भंडारी हत्या का जिक्र करते हुए कहा कि यह मामला पूरे देश को झकझोर देने वाला है, लेकिन आज भी यह सवाल बना हुआ है कि सत्ता का संरक्षण किसे बचा रहा है और कानून सबके लिए समान कब होगा। इसके साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश के उन्नाव कांड का हवाला देते हुए कहा कि सत्ता के प्रभाव में अपराधियों को बचाने की कोशिशें होती रही हैं और पीड़ितों को न्याय के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ा।
पानी, पर्यावरण और बुनियादी सुविधाओं पर निशाना
राहुल गांधी ने इंदौर समेत कई राज्यों में दूषित पानी से हो रही मौतों और बीमारियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि गुजरात, हरियाणा और दिल्ली जैसे राज्यों में भी काले और जहरीले पानी की शिकायतें सामने आ रही हैं, जिससे आम जनता का स्वास्थ्य खतरे में है। इसके अलावा राजस्थान की अरावली पर्वतमाला का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन किया जा रहा है, जहां नियमों को ताक पर रखकर पहाड़ और जंगल काटे जा रहे हैं।
भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
कांग्रेस नेता ने सरकारी अस्पतालों, स्कूलों और बुनियादी ढांचे की स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बच्चों की मौतें, सरकारी अस्पतालों में अव्यवस्था, स्कूलों की गिरती इमारतें, पुल और सड़क हादसे महज लापरवाही नहीं बल्कि भ्रष्टाचार का नतीजा हैं। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि ऐसी घटनाओं के बाद सरकार की प्रतिक्रिया केवल औपचारिकताओं तक सीमित रह जाती है।
अपने बयान के अंत में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरते हुए कहा कि भाजपा का ‘डबल इंजन’ आम जनता के लिए नहीं बल्कि चुनिंदा लोगों के फायदे के लिए चल रहा है और यह सरकार विकास नहीं, बल्कि तबाही की रफ्तार बन चुकी है।
राज ठाकरे का बीजेपी पर बड़ा हमला, मुंबई को लेकर जताई साजिश की आशंका
मुंबई। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने भारतीय जनता पार्टी पर कड़ा हमला बोलते हुए केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने की सोच रखने वाली ताकतें आज सत्ता में हैं और यदि नगर निकायों पर भी उनका नियंत्रण हो गया, तो मराठी मानूस के अधिकार और अस्तित्व को गंभीर खतरा पैदा हो जाएगा।
राज ठाकरे और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे का संयुक्त साक्षात्कार का पहला भाग गुरुवार को शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में प्रकाशित हुआ। साक्षात्कार में राज ठाकरे ने कहा कि दोनों चचेरे भाई किसी राजनीतिक मजबूरी के कारण नहीं, बल्कि महाराष्ट्र और मराठी अस्मिता की रक्षा के उद्देश्य से एक मंच पर आए हैं।
नगर निकायों पर नियंत्रण को बताया अहम
साक्षात्कार में राज ठाकरे ने कहा कि राज्य के बाहर से आने वाले लोग अब केवल रोजगार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे अपने अलग राजनीतिक और निर्वाचन क्षेत्र भी बना रहे हैं। उन्होंने इसे मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने की पुरानी सोच से जोड़ते हुए कहा कि यह घाव आज भी भरा नहीं है। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा हालात संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन के दौर जैसे बनते जा रहे हैं।
राज ठाकरे ने स्पष्ट कहा कि यदि भाजपा नगर निगमों पर नियंत्रण कर लेती है, तो मराठी मानूस के पास अपने हक की लड़ाई लड़ने के लिए बहुत कम विकल्प बचेंगे। उन्होंने मुंबई, पुणे, ठाणे, नासिक, मीरा-भायंदर, कल्याण-डोंबिवली और छत्रपति संभाजीनगर जैसे प्रमुख शहरों के नगर निकायों पर नियंत्रण को जरूरी बताया।
राज्य सरकार पर उद्धव ठाकरे का हमला
उद्धव ठाकरे ने राज्य सरकार की विकास नीति पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा विकास की बात तो करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर यह “बिना योजना का विकास” है, जो प्रगति के बजाय नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को खुद यह स्पष्ट नहीं है कि वह क्या चाहती है और सत्ता में बैठे लोग मुंबई और मराठी जनता से कटे हुए हैं।
मादक पदार्थों के मुद्दे पर भी सवाल
राज ठाकरे ने राज्य में बढ़ते मादक पदार्थों के खतरे को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने दावा किया कि नशीली दवाओं के खिलाफ कार्रवाई कमजोर पड़ गई है और तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण नहीं रह गया है। साथ ही उन्होंने राजनीति में धन के बढ़ते प्रभाव और नशे के प्रसार के बीच संबंध की जांच की जरूरत पर जोर दिया।
वन संरक्षण कानून संशोधन पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार को घेरा
नई दिल्ली। कांग्रेस ने वन संरक्षण कानून में वर्ष 2023 में किए गए संशोधनों को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का कहना है कि इन बदलावों के जरिए देश में वन प्रबंधन को धीरे-धीरे निजी हाथों में सौंपने की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जो पर्यावरण सुरक्षा और पारंपरिक वन नीति के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।
कांग्रेस महासचिव और पूर्व केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा 2 जनवरी को जारी एक सर्कुलर का हवाला देते हुए कहा कि सरकार के फैसलों से जंगलों के संरक्षण की मूल भावना कमजोर हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि अगस्त 2023 में वन संरक्षण अधिनियम, 1980 में किए गए संशोधन संसद में जल्दबाजी में पारित कराए गए थे।
जयराम रमेश के अनुसार, संशोधन के तहत न केवल कानून का नाम बदलकर वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम किया गया, बल्कि जंगलों के संचालन और प्रबंधन से जुड़े प्रावधानों में भी बड़े बदलाव किए गए। उन्होंने कहा कि उस समय कांग्रेस ने चेताया था कि इन संशोधनों से निजी संस्थाओं के लिए जंगलों में प्रवेश का रास्ता खुलेगा और अब मंत्रालय का ताजा सर्कुलर उसी दिशा में संकेत दे रहा है।
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि मौजूदा कदम केवल शुरुआत है और आने वाले समय में इससे जंगलों के व्यावसायिक इस्तेमाल को और बढ़ावा मिल सकता है। पार्टी का आरोप है कि इससे पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और स्थानीय समुदायों के हितों पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
मंत्रालय के सर्कुलर के मुताबिक, यदि राज्य सरकारें किसी सरकारी या गैर-सरकारी संस्था के साथ मिलकर प्राकृतिक पुनरुत्पादन, वृक्षारोपण या वन प्रबंधन से जुड़ी गतिविधियां संचालित करती हैं, तो इन्हें वन गतिविधि माना जाएगा। ऐसे मामलों में प्रतिपूरक वनीकरण और नेट प्रेजेंट वैल्यू (एनपीवी) के भुगतान जैसी शर्तें लागू नहीं होंगी। इसके साथ ही राज्यों को यह अधिकार भी दिया गया है कि वे इन गतिविधियों से होने वाले राजस्व के बंटवारे का ढांचा स्वयं तय करें।
कांग्रेस का कहना है कि इन प्रावधानों से जंगलों के निजी और व्यावसायिक प्रबंधन की राह आसान हो गई है, जिस पर सरकार को पुनर्विचार करना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को दी जमानत
नई दिल्ली। साल 2020 के दिल्ली दंगा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जमानत याचिकाओं पर अहम फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि केवल लंबे समय तक जेल में रहना या ट्रायल में देरी, अपने आप में जमानत का आधार नहीं बन सकता। हालांकि कोर्ट ने मामले के अन्य आरोपियों को राहत देते हुए उन्हें जमानत प्रदान कर दी है।
अन्य आरोपियों को मिली राहत
सुप्रीम कोर्ट ने गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत देने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि इन आरोपियों की भूमिका और उनके खिलाफ लगाए गए आरोप, उमर खालिद और शरजील इमाम की तुलना में अलग प्रकृति के हैं, जिस आधार पर उन्हें राहत दी जा सकती है।
ट्रायल में देरी को नहीं माना जा सकता जमानत का आधार
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने अपने फैसले में साफ कहा कि मुकदमे की सुनवाई में देरी को “ट्रंप कार्ड” के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने चेताया कि यदि केवल देरी के आधार पर जमानत दी जाने लगे, तो विशेष कानूनों के तहत बनाए गए वैधानिक सुरक्षा प्रावधान स्वतः ही कमजोर हो जाएंगे।
उमर खालिद और शरजील पर गंभीर आरोप
अदालत ने कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम कानून (UAPA) के तहत प्रथम दृष्टया गंभीर आरोप बनते हैं। कोर्ट के अनुसार, इस स्तर पर यह नहीं कहा जा सकता कि अभियोजन पक्ष का मामला कमजोर है, इसलिए दोनों को फिलहाल जमानत नहीं दी जा सकती।
दिसंबर में सुरक्षित रखा गया था फैसला
गौरतलब है कि 10 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने सभी आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अदालत ने दोनों पक्षों को 18 दिसंबर तक अपनी दलीलों के समर्थन में आवश्यक दस्तावेज जमा करने का निर्देश भी दिया था।
पुलिस का पक्ष और आरोप
दिल्ली पुलिस के अनुसार, उमर खालिद, शरजील इमाम समेत अन्य आरोपी फरवरी 2020 में हुई हिंसा के कथित साजिशकर्ता थे। पुलिस का दावा है कि इस हिंसा में 53 लोगों की मौत हुई और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। आरोप है कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के विरोध के दौरान भड़की हिंसा का उद्देश्य केवल प्रदर्शन नहीं, बल्कि बड़े स्तर पर अशांति फैलाना था।
दिल्ली दंगों की पृष्ठभूमि
पूर्वोत्तर दिल्ली में फरवरी 2020 में CAA और NRC के विरोध के दौरान हिंसा भड़क उठी थी। आगजनी, पथराव और झड़पों की घटनाओं ने पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया था। इस मामले में कई सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्रों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को आरोपी बनाया गया, जिनमें से कुछ को अब सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है, जबकि कुछ को अभी भी जेल में रहना होगा।
कर्नाटक- कर्नाटक के हुबली में एक 13 वर्षीय लड़की के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में पुलिस ने तीन नाबालिग लड़कों के खिलाफ कार्रवाई की है। पुलिस ने बताया कि आरोपियों की उम्र 14 से 15 वर्ष के बीच है और उनके खिलाफ बाल यौन उत्पीड़न संरक्षण अधिनियम (POCSO) तथा किशोर न्याय (देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस के अनुसार, यह मामला पिछले सात से आठ दिनों तक चलने वाली घटनाओं से जुड़ा है। लड़की के माता-पिता दिन के समय घर से बाहर रहते थे, और इसी दौरान आरोपियों ने घटना को अंजाम दिया।
हुबली-धारवाड़ के पुलिस आयुक्त एन. शशिकुमार ने बताया कि तीनों नाबालिगों को हिरासत में ले लिया गया है और आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मामले की गहन जांच जारी है और पीड़िता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी कदम उठाए जा रहे हैं।
पुलिस ने परिवार के सहयोग से लड़की की सुरक्षा सुनिश्चित की है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आगे की जांच बंद कमरे और विशेषज्ञों की मौजूदगी में की जा रही है।
हालांकि हुबली मामला हाल ही का है, लेकिन यह भारत में बढ़ते बाल यौन अपराधों की चिंता को फिर से उजागर करता है। जनवरी में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में चार वर्षीय बच्ची के साथ हुई हिंसक घटना ने देश में सुरक्षा और जागरूकता की अहमियत को रेखांकित किया था।
