कार और बाइक की टक्कर के बाद वाहन नहर में गिरे, दो लोग गंभीर रूप से घायल
नासिक। महाराष्ट्र के नासिक जिले में देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसे में सात लोगों की जान चली गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। यह दुर्घटना डिंडोरी कस्बे के पास वाणी-डिंडोरी रोड पर उस समय हुई जब एक कार और मोटरसाइकिल के बीच जबरदस्त टक्कर हो गई।
पुलिस के अनुसार, हादसे की जानकारी उन्हें रात करीब 11:57 बजे मिली। घटना वाणी-डिंडोरी रोड पर एक नर्सरी के पास घटी, जहां टक्कर के बाद दोनों वाहन सड़क किनारे एक नहर में जा गिरे। सूचना मिलते ही पुलिस और आपदा राहत टीमें मौके पर पहुंचीं और तुरंत बचाव कार्य शुरू किया गया।
मलबे से कुल सात लोगों के शव निकाले गए, जबकि दो अन्य घायलों को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस का कहना है कि मृतकों की पहचान की जा रही है और हादसे के कारणों की जांच भी जारी है।
स्थानीय प्रशासन ने घटना को बेहद दुखद बताया है और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताई है। फिलहाल, दुर्घटना को लेकर मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
सीएम सरमा बोले-‘जो खुद जमानत पर हैं, वो दूसरों को जेल भेजेंगे?’
असम। असम की राजनीति में बयानबाजी ने नया मोड़ ले लिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के एक कथित बंद कमरे वाले बयान को लेकर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। राहुल गांधी के इस बयान में सरमा को जेल भेजने की बात कही गई थी, जिसे लेकर मुख्यमंत्री ने एक्स पर पलटवार करते हुए इसे राजनीतिक दुर्भावना करार दिया है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी हाल ही में असम दौरे पर थे, जहां उन्होंने पार्टी की राज्य स्तरीय राजनीतिक मामलों की समिति के साथ एक बंद बैठक की। इस दौरान मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने कथित रूप से कहा कि “लिखकर ले लीजिए, हिमंत बिस्वा सरमा को जेल भेजा जाएगा।”
इस बयान को लेकर मुख्यमंत्री सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पलटवार करते हुए कहा कि राहुल गांधी खुद कई आपराधिक मामलों में जमानत पर हैं और अब दूसरों को जेल भेजने की बात कर रहे हैं। उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए तंज कसा—”असम की मेहमाननवाजी का आनंद लीजिए, आप सिर्फ मुझे जेल भेजने की बात करने के लिए आए हैं?”
मुख्यमंत्री ने इस बयान को राजनीतिक मंच का दुरुपयोग और व्यक्तिगत प्रतिशोध की भावना से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह की टिप्पणियां लोकतांत्रिक विमर्श को कमजोर करती हैं।
इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। कांग्रेस जहां असम सरकार को भ्रष्टाचार और तानाशाही के आरोपों में घेर रही है, वहीं भाजपा कांग्रेस पर परिवारवाद और कानून उल्लंघन के आरोप लगा रही है।
मुख्यमंत्री सरमा ने राहुल गांधी पर दर्ज मामलों का भी जिक्र किया, जिसमें सबसे प्रमुख “मोदी सरनेम” टिप्पणी वाला मानहानि का केस है। इस मामले में राहुल को दो साल की सजा सुनाई गई थी, हालांकि बाद में उन्हें जमानत मिल गई। इसके अलावा, राहुल गांधी पर अन्य कानूनी मामले भी लंबित हैं।
मानेकशॉ सेंटर में रक्षा स्वदेशीकरण पर खास प्रदर्शनी
नई दिल्ली। सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने बुधवार को स्पष्ट किया कि 10 मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान की ओर से ड्रोन और हथियारबंद तकनीकों का प्रयोग किया गया, लेकिन भारतीय सुरक्षा बलों की तत्परता के चलते कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। इस ऑपरेशन ने ड्रोन हमलों से निपटने में स्वदेशी तकनीकों की अहमियत को रेखांकित किया।
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने मानेकशॉ सेंटर में आयोजित एक वर्कशॉप और प्रदर्शनी के दौरान कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने यह साबित कर दिया है कि भारत को अपनी सुरक्षा के लिए विदेशी तकनीक पर निर्भर रहने की बजाय स्वदेशी समाधान विकसित करने होंगे। उन्होंने बताया कि 10 मई को हुए इस ऑपरेशन में पाकिस्तान ने निहत्थे ड्रोन और गोला-बारूद का इस्तेमाल किया, लेकिन इनमें से ज्यादातर को भारतीय सुरक्षा बलों ने सफलतापूर्वक निष्क्रिय कर दिया। कुछ ड्रोन सही हालत में जब्त भी किए गए।
जनरल चौहान ने कहा, “इस तरह के हमले दिखाते हैं कि अब समय आ गया है कि हम काउंटर-यूएएस (Counter-UAS) तकनीकों को अपने दम पर विकसित करें। यह हमारी सुरक्षा नीति का हिस्सा होना चाहिए।”
ड्रोन की भूमिका पर उन्होंने कहा कि युद्ध के परिदृश्य में ड्रोन अब एक क्रांतिकारी उपकरण बन चुके हैं। उन्होंने कहा, “ड्रोन का विकास तकनीकी रूप से भले ही क्रमिक हो, लेकिन युद्धक्षेत्र में इनका इस्तेमाल बेहद क्रांतिकारी रहा है। हमारी सेनाएं अब तेजी से इन्हें रणनीतिक अभियानों में शामिल कर रही हैं।”
प्रदर्शनी का उद्देश्य:
मानेकशॉ सेंटर में आयोजित यह प्रदर्शनी और वर्कशॉप इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ मुख्यालय और सेंटर फॉर जॉइंट वॉरफेयर स्टडीज (CENJOWS) के संयुक्त प्रयास से आयोजित की गई। इसका मकसद रक्षा क्षेत्र में आयातित तकनीकों की जगह स्वदेशी विकल्पों को बढ़ावा देना है।
इस पहल से न सिर्फ भारत की रणनीतिक आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, बल्कि घरेलू रक्षा उद्योगों को अनुसंधान और निर्माण में नई ऊर्जा भी मिलेगी। यह कदम ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियानों को भी मजबूती प्रदान करेगा।
मुंबई में खुला पहला शोरूम, कीमत 60 लाख से शुरू, सितंबर से शुरू होगी डिलीवरी
नई दिल्ली। टेस्ला ने भारत में अपने पहले शोरूम की लॉन्चिंग के साथ ही इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में धूम मचा दी है। कंपनी ने अपनी प्रीमियम इलेक्ट्रिक ‘Model Y’ को भारत में आधिकारिक रूप से लॉन्च कर दिया है, जिसकी कीमत लगभग 60 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) तय की गई है। मुंबई के बीकेसी स्थित मैक्सिटी मॉल में टेस्ला का पहला शोरूम खुल चुका है, और डिलीवरी सितंबर 2025 से शुरू होगी।
बुकिंग हुई शुरू
टेस्ला ने अपनी वेबसाइट पर Model Y की बुकिंग शुरू कर दी है, जो फिलहाल मुंबई, दिल्ली और गुरुग्राम में उपलब्ध होगी। खास बात यह है कि जो ग्राहक फुल-सेल्फ ड्राइविंग (FSD) फीचर वाला वेरिएंट लेना चाहते हैं, उन्हें इसके लिए अतिरिक्त 6 लाख रुपये का भुगतान करना होगा।
वेरिएंट्स और परफॉर्मेंस
Tesla Model Y को भारत में दो वेरिएंट्स में उतारा गया है:
लॉन्ग रेंज RWD:
यह वेरिएंट सिंगल इलेक्ट्रिक मोटर से लैस है, जो 295 हॉर्सपावर और 420 Nm टॉर्क पैदा करता है। यह कार एक बार चार्ज करने पर 500 किमी तक चल सकती है और सिर्फ 5.6 सेकंड में 0 से 100 किमी प्रति घंटा की रफ्तार पकड़ लेती है।
लॉन्ग रेंज AWD:
ड्यूल मोटर से लैस इस वेरिएंट की रेंज 622 किमी है। इसमें 384 bhp की पावर और 510 Nm का टॉर्क मिलता है। इसकी टॉप स्पीड 217 किमी प्रति घंटा है और यह मात्र 4.6 सेकंड में 0-100 किमी/घंटा की रफ्तार पकड़ लेती है।
चार्जिंग टेक्नोलॉजी
Model Y को टेस्ला की फास्ट चार्जिंग तकनीक से लैस किया गया है। कंपनी का दावा है कि यह केवल 15 मिनट में 238 किमी की दूरी तय करने लायक चार्ज हो सकती है।
सेफ्टी फीचर्स
सभी वेरिएंट्स में लेवल-2 ADAS तकनीक दी गई है, जिसमें फॉरवर्ड कोलिजन वार्निंग, ऑटोमैटिक इमर्जेंसी ब्रेकिंग, लेन कीप असिस्ट और स्पीड लिमिट असिस्ट जैसे एडवांस फीचर्स शामिल हैं। साथ ही, कार में 6 स्टैंडर्ड एयरबैग्स भी दिए गए हैं।
डिजाइन और इंटीरियर
Tesla Model Y भारत में कुल 7 एक्सटीरियर कलर ऑप्शन और 2 इंटीरियर ट्रिम्स के साथ उपलब्ध होगी। इसमें 15.4 इंच का फ्रंट टचस्क्रीन, 8 इंच का रियर डिस्प्ले, पावर-एडजेस्टेबल सीट्स और स्टीयरिंग कॉलम, डुअल-जोन क्लाइमेट कंट्रोल, 19-इंच क्रॉसफ्लो व्हील्स, ग्लास रूफ और पावर रियर लिफ्टगेट जैसे प्रीमियम फीचर्स मिलते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI को फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग लागू करने का दिया निर्देश
नई दिल्ली– सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) को सभी पैक्ड खाद्य उत्पादों पर फ्रंट-ऑफ-पैक न्यूट्रिशन लेबलिंग (FOP) को अनिवार्य रूप से लागू करने का निर्देश दिया है। यह फैसला उपभोक्ताओं को स्वास्थ्यवर्धक विकल्पों की जानकारी सरलता से उपलब्ध कराने और देश में तेजी से बढ़ रही मोटापे की समस्या से निपटने के प्रयास के तहत लिया गया है। इस निर्णय की जानकारी शिवसेना सांसद मिलिंद देवड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की।
क्या है FSSAI और FOP लेबलिंग?
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) एक स्वायत्त संस्था है, जो देश में खाद्य गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों की निगरानी करती है। फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग एक ऐसी प्रणाली है, जिसमें पैक्ड खाद्य उत्पादों के सामने स्पष्ट पोषण संबंधी जानकारी दी जाती है, जैसे वसा, चीनी और नमक की मात्रा। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को यह जानने में मदद करना है कि कोई उत्पाद स्वास्थ्य के लिए कितना फायदेमंद या हानिकारक है।
देवड़ा की सलाह: सिंगापुर मॉडल अपनाने पर जोर
मिलिंद देवड़ा ने FSSAI को सिंगापुर की A-to-D न्यूट्री-ग्रेड प्रणाली अपनाने की सिफारिश की है। इस प्रणाली में खाद्य उत्पादों को उनके पोषण स्तर के आधार पर A (सबसे अच्छा) से D (सबसे खराब) तक ग्रेड दिया जाता है। उनका कहना है कि इससे उपभोक्ताओं को जागरूक फैसले लेने में मदद मिलेगी और FSSAI को जल्द अनुपालन सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस कदम मिलेगा।
स्वास्थ्य मंत्रालय की नई पहल
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने देशभर में स्वस्थ खानपान की आदतों को बढ़ावा देने के लिए चीनी और तेल जागरूकता बोर्ड लगाने का प्रस्ताव भी रखा है। ये बोर्ड स्कूलों, दफ्तरों और सार्वजनिक स्थलों पर लगाए जाएंगे, जिनमें दृश्यात्मक चेतावनी के ज़रिए यह बताया जाएगा कि आम खाद्य पदार्थों में कितनी मात्रा में वसा और चीनी छिपी हो सकती है।
भारतीय पारंपरिक स्नैक्स भी निशाने पर
देवड़ा ने यह भी कहा कि भारत को केवल बहुराष्ट्रीय कंपनियों के उत्पादों तक सीमित न रहकर समोसा, जलेबी जैसे पारंपरिक भारतीय स्नैक्स के पोषण मूल्य की भी निगरानी करनी चाहिए। उन्होंने इसे स्वास्थ्य मंत्रालय की राष्ट्रीय गैर-संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम की दिशा में एक आवश्यक कदम बताया, जिससे मधुमेह, उच्च रक्तचाप और मोटापे जैसी बीमारियों की रोकथाम संभव हो सकेगी।
सोशल मीडिया के ज़रिए दिल्ली के पर्यटन स्थलों का प्रचार करने वाले युवाओं को मिलेगी ₹50,000 मासिक सहायता
नई दिल्ली। दिल्ली को एक वैश्विक पर्यटन हब बनाने की दिशा में सरकार ने एक नई पहल की शुरुआत की है। दिल्ली सरकार अब उन युवाओं को प्रोत्साहन राशि देगी, जो राजधानी के ऐतिहासिक स्थलों और सांस्कृतिक धरोहरों का प्रचार-प्रसार डिजिटल माध्यमों से करेंगे। इस योजना के तहत चयनित युवाओं को हर महीने ₹50,000 की आर्थिक सहायता और एक साल के इस प्रोग्राम के अंत में प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा।
योजना का उद्देश्य: दिल्ली को इंटरनेशनल टूरिज्म डेस्टिनेशन बनाना
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक कार्यक्रम में बताया कि सरकार “टूरिज्म एंड हेरिटेज फेलोशिप प्रोग्राम” के तहत दिल्ली को विश्व स्तरीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करना चाहती है। इसके लिए ऐसे युवाओं की तलाश की जा रही है जो सोशल मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म और कंटेंट क्रिएशन के जरिए दिल्ली की विरासत को वैश्विक मंच पर प्रमोट कर सकें।
पहले चरण में 40 युवाओं का चयन
इस योजना को दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम (DTTDC) के माध्यम से लागू किया जाएगा। पहले चरण में 40 युवाओं का चयन किया जाएगा। चयनित प्रतिभागियों को न केवल दिल्ली के प्रमुख पर्यटन स्थलों का प्रचार करना होगा, बल्कि वीडियो निर्माण, पर्यटन से जुड़े शोध, और इन स्थलों के संचालन जैसे कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी करनी होगी।
योजना की पात्रता
इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए उम्मीदवार की आयु 35 वर्ष से कम होनी चाहिए और उसमें डिजिटल मीडिया, सोशल मीडिया और कंटेंट क्रिएशन की अच्छी समझ होनी चाहिए। योजना एक साल तक चलेगी, जिसके अंत में युवाओं को अनुभव प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा।
कहा– बहुपक्षीय टूर्नामेंटों में सभी देशों को मिलेगा समान व्यवहार
मानसून सत्र में पेश होगा राष्ट्रीय खेल शासन विधेयक
नई दिल्ली। देश में खेल प्रशासन को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए केंद्र सरकार जल्द ही ‘राष्ट्रीय खेल शासन विधेयक’ को संसद में पेश करेगी। खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने सोमवार को बताया कि यह बहुप्रतीक्षित विधेयक संसद के आगामी मानसून सत्र में पेश किया जाएगा। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में आयोजित बहुपक्षीय खेल प्रतियोगिताओं में पाकिस्तान के खिलाड़ियों की भागीदारी पर कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा।
खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने जानकारी दी है कि राष्ट्रीय खेल शासन विधेयक को 21 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह विधेयक देश के खेल प्रशासकों की जवाबदेही तय करने और खेलों के संचालन में सुशासन लाने की दिशा में अहम साबित होगा।
विधेयक के तहत एक नियामक बोर्ड का गठन किया जाएगा, जो राष्ट्रीय खेल महासंघों (NSFs) को मान्यता देने और उन्हें फंडिंग प्रदान करने का कार्य करेगा। यह बोर्ड इस बात पर नज़र रखेगा कि खेल संगठन वित्तीय, प्रशासनिक और नैतिक मानकों का पालन कर रहे हैं या नहीं।
इसके अलावा, मसौदे में आचार संहिता आयोग और विवाद निवारण आयोग जैसे स्वतंत्र निकायों की स्थापना का भी प्रस्ताव है। हालांकि, भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) ने इस विधेयक का विरोध किया है। IOA का तर्क है कि नियामक बोर्ड की स्थापना उसकी भूमिका को कमजोर कर सकती है।
इस दौरान मांडविया ने पाकिस्तान के खिलाड़ियों को भारत में अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में भाग लेने की अनुमति देने पर भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार को इसमें कोई आपत्ति नहीं है, चाहे वह क्रिकेट हो या हॉकी।
पाकिस्तान की भागीदारी के संभावित टूर्नामेंटों में राजगीर (बिहार) में एशिया कप हॉकी टूर्नामेंट (27 अगस्त – 7 सितंबर) और तमिलनाडु में एफआईएच जूनियर वर्ल्ड कप (28 नवंबर – 10 दिसंबर) शामिल हैं। मांडविया ने कहा कि भारत वीजा देने को तैयार है, लेकिन अब फैसला पाकिस्तान सरकार को लेना है।
जयराम रमेश बोले- ट्रंप सरकार की शर्तें एकतरफा और खतरनाक
नई दिल्ली – भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने इस संभावित डील को लेकर गंभीर आपत्तियां जताईं हैं। उन्होंने कहा कि यह ‘MASALA डील’ दरअसल “Mutually Agreed Settlements Achieved through Leveraged Arm-twisting” का संक्षिप्त रूप है — यानी दबाव डालकर समझौते कराना।
उन्होंने कहा कि इस तरह के समझौतों से भारत जैसे विकासशील देशों के आत्मनिर्भर क्षेत्रों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। रमेश ने ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इंस्टीट्यूट (GTRI) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका एकतरफा लाभ के लिए कई देशों पर व्यापारिक रियायतों का दबाव बना रहा है।
GTRI की चेतावनी:
थिंक टैंक GTRI ने भी भारत को आगाह किया है कि अमेरिका के साथ किसी भी व्यापार समझौते को जल्दबाजी में नहीं करना चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका इस समय 90 से अधिक देशों से व्यापार रियायतें मांग रहा है, जिनमें से कई ने खुलकर विरोध जताया है।
सरकार पर विपक्ष का हमला:
जयराम रमेश ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अमेरिका की व्यापारिक नीतियाँ राजनीतिक और मनमानी हैं। उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों में भारत को मजबूर किया जा रहा है कि वह अमेरिकी उत्पादों को खरीदे, जबकि बदले में भारत को कोई वास्तविक छूट नहीं मिल रही है।
‘मसाला डील’ बनाम ‘मसाला बॉन्ड’:
रमेश ने तंज कसते हुए कहा, “पहले मसाला बॉन्ड हुआ करते थे, अब सरकार मसाला डील में उलझ रही है।” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विदेशी दबाव में फैसले कर रही है, जिससे भारत के कोर सेक्टर — विशेष रूप से कृषि और छोटे उद्योगों — को खतरा है।
दूसरे देश भी कर चुके हैं इनकार:
GTRI रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोपीय यूनियन, मैक्सिको, जापान, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश अमेरिका की कठोर व्यापार शर्तों को पहले ही खारिज कर चुके हैं। इसके बावजूद अमेरिका इन देशों पर भारी टैरिफ की धमकी दे रहा है, लेकिन वे अपने आर्थिक हितों से समझौता नहीं कर रहे।
अगर एकता नहीं बनी, तो मुंबई अदाणी-लोढ़ा के हाथों में चली जाएगी- राज्यसभा सांसद संजय राऊत
मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर ठाकरे परिवार की एकजुटता की संभावनाओं ने जोर पकड़ा है। शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राऊत ने संकेत दिए हैं कि उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का एक मंच पर आना न केवल मराठी अस्मिता की वापसी का प्रतीक हो सकता है, बल्कि राज्य की दिशा भी बदल सकता है।
रविवार को सामना के साप्ताहिक कॉलम ‘रोक-ठोक’ में संजय राऊत ने लिखा कि अगर ठाकरे बंधु एक होते हैं, तो यह महाराष्ट्र के लिए नई शुरुआत होगी। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि “पहले मुंबई को लूटो, फिर उसे केंद्रशासित प्रदेश बनाओ और अंततः विदर्भ को अलग राज्य घोषित कर महाराष्ट्र की एकता को तोड़ो” — यही भाजपा की रणनीति है। राऊत का दावा है कि भाजपा को न महाराष्ट्र की एकता की परवाह है, न ही मराठी पहचान की।
संजय राऊत ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधते हुए कहा कि वे पहले नागपुर में ‘विदर्भ मेरा राज्य है’ जैसे बैनर के साथ प्रदर्शन कर चुके हैं। उन्होंने चेताया कि अगर ठाकरे भाइयों की एकता अब नहीं बनी, तो मुंबई अदाणी और लोढ़ा जैसे उद्योगपतियों के हाथों में चली जाएगी और एक दिन महाराष्ट्र से भी अलग हो जाएगी।
उन्होंने ठाकरे भाइयों की एकता को मराठी जनता के लिए “आशा की किरण” बताया, लेकिन साथ ही आगाह किया कि यह केवल शुरुआत है। गठबंधन की औपचारिक घोषणा अब तक नहीं हुई है, लेकिन इसे जल्द होना चाहिए ताकि महाराष्ट्र को सही दिशा मिल सके।
राऊत ने कहा कि मराठी जनता को सबसे पहले मुंबई और ठाणे को बचाने की लड़ाई लड़नी होगी, खासकर आगामी नगर निकाय चुनावों को देखते हुए। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग सोचते हैं कि ठाकरे दबाव में आ जाएंगे, वे भ्रम में हैं।
गौरतलब है कि 5 जुलाई को दोनों भाई करीब दो दशकों बाद एक मंच पर आए थे, जब राज्य सरकार ने स्कूलों में हिंदी थोपने से जुड़े दो आदेश वापस लिए। इस मौके पर उद्धव ठाकरे ने कहा, “हम साथ आए हैं और साथ ही रहेंगे,” जिससे मराठी राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
दक्षिण भारतीय सिनेमा ने खोया एक अनमोल सितारा, अभिनेता कोटा श्रीनिवास राव का 83 वर्ष की उम्र में निधन
750 से अधिक फिल्मों में निभाई यादगार भूमिकाएं
हैदराबाद। दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के चर्चित और बहुआयामी अभिनेता कोटा श्रीनिवास राव अब हमारे बीच नहीं रहे। 83 वर्ष की उम्र में उनके निधन की खबर से पूरे फिल्म जगत और उनके चाहने वालों में शोक की लहर दौड़ गई है। अभिनेता ने चार दशक से भी ज्यादा लंबे करियर में 750 से अधिक फिल्मों में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई और दर्शकों के दिलों में अमिट छाप छोड़ी।
उनके निधन पर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “कोटा श्रीनिवास राव की कलात्मक यात्रा अविस्मरणीय है। उनका जाना तेलुगु सिनेमा के लिए एक अपूरणीय क्षति है।” नायडू ने यह भी याद किया कि राव न सिर्फ कला क्षेत्र में बल्कि राजनीति में भी सक्रिय रहे और 1999 में विधायक के रूप में विजयवाड़ा की जनता की सेवा की।
कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर कोटा श्रीनिवास की एक तस्वीर वायरल हुई थी, जिसमें वे बेहद कमजोर नजर आए थे। उनके पैर में चोट के निशान और पट्टी बंधी हुई थी, जिससे उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता गहराने लगी थी।
सिनेमा का बहुमुखी चेहरा
1978 में फिल्म ‘प्राणम खरीदु’ से अभिनय की शुरुआत करने वाले राव ने विलेन, कॉमेडियन और चरित्र अभिनेता के रूप में हर रोल में अपनी छाप छोड़ी। उन्हें नौ बार नंदी अवॉर्ड और 2015 में पद्म श्री से नवाजा गया। उनकी यादगार फिल्मों में ‘दम्मू’, ‘सन ऑफ सत्यमूर्ति’ और ‘डेंजरस खिलाड़ी’ जैसी हिट फिल्में शामिल हैं।
राजनीतिक जीवन भी रहा प्रभावशाली
कोटा श्रीनिवास राव ने 1999 से 2004 तक आंध्र प्रदेश विधानसभा में विजयवाड़ा ईस्ट सीट से बतौर विधायक अपनी सेवाएं दीं। जनता के बीच उनकी सादगी और स्पष्टवादिता को खूब सराहा गया।
