घुसपैठिए के पास से पाकिस्तानी मुद्रा और चाकू बरामद
जैसलमेर। राजस्थान के जैसलमेर जिले में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा बलों ने सतर्कता के चलते एक बड़ी घुसपैठ की कोशिश को नाकाम कर दिया। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने भारतीय सीमा में अवैध रूप से प्रवेश करने का प्रयास कर रहे एक पाकिस्तानी नागरिक को हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई नाचना–नोक सेक्टर से सटे सीमावर्ती इलाके में की गई।
बीएसएफ अधिकारियों के मुताबिक पकड़ा गया व्यक्ति प्रारंभिक जांच में मानसिक रूप से असंतुलित प्रतीत हो रहा है। हालांकि उसकी वास्तविक स्थिति, मंशा और पृष्ठभूमि की पुष्टि विस्तृत चिकित्सीय परीक्षण और संयुक्त पूछताछ केंद्र (JIC) में जांच के बाद ही हो सकेगी। शुरुआती पूछताछ में उसने अपना नाम इश्रात (35 वर्ष), पुत्र राणा मोहम्मद असलम बताया है और खुद को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के सरगोधा जिले का निवासी बताया।
तलाशी के दौरान उसके पास से पाकिस्तानी मुद्रा, एक चाकू और कुछ अन्य संदिग्ध सामान बरामद किया गया है। इसके बाद बीएसएफ ने उसे आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए नोक थाना पुलिस को सौंप दिया।
सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस इस पूरे मामले की गहन जांच कर रही हैं। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि व्यक्ति किस रास्ते से सीमा पार कर भारत में दाखिल हुआ और क्या इस घटना के पीछे किसी प्रकार की सुरक्षा से जुड़ी साजिश तो नहीं है। सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एजेंसियां अतिरिक्त सतर्कता बरत रही हैं।
जयराम रमेश बोले—भारत-पाक तनाव पर चीन की मध्यस्थता का दावा चिंताजनक
नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम कराने को लेकर चीन द्वारा किए गए मध्यस्थता के दावे पर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस ने इन बयानों को गंभीर और चिंताजनक बताते हुए केंद्र सरकार से इस पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर चुप्पी देश की सुरक्षा से जुड़े सवाल खड़े करती है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में स्थिति साफ करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि चीन जैसे देश, जो खुले तौर पर पाकिस्तान का समर्थन करता रहा है, उसके द्वारा भारत-पाक संबंधों में मध्यस्थता का दावा करना राष्ट्रीय हितों के खिलाफ है और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।
सरकार की चुप्पी पर कांग्रेस का सवाल
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि इससे पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी यह दावा कर चुके हैं कि उन्होंने मई 2025 में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को रोकने में भूमिका निभाई थी। कांग्रेस का आरोप है कि प्रधानमंत्री ने अब तक इन दावों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी। अब चीन के विदेश मंत्री द्वारा इसी तरह का बयान सामने आने से स्थिति और गंभीर हो गई है।
कांग्रेस नेता ने यह भी याद दिलाया कि चार जुलाई 2025 को भारतीय सेना के उप प्रमुख राहुल सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा था कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारत को चीन की ओर से रणनीतिक चुनौती का सामना करना पड़ा था। ऐसे में चीन द्वारा मध्यस्थता का दावा कई सवाल खड़े करता है।
ऑपरेशन सिंदूर और चीन की भूमिका पर उठे सवाल
कांग्रेस ने कहा कि चीन की पाकिस्तान के प्रति झुकी हुई नीति जगजाहिर है। ऐसे में भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम कराने में उसकी भूमिका का दावा न सिर्फ विरोधाभासी है, बल्कि यह देशवासियों को दिए गए भरोसे के भी खिलाफ है। पार्टी ने आरोप लगाया कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे को हल्के में लेने जैसा है।
जयराम रमेश ने भारत-चीन संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि 2020 में चीन को लेकर दिए गए बयानों से भारत की कूटनीतिक स्थिति कमजोर हुई है। उन्होंने कहा कि आज भारत का व्यापार घाटा बढ़ा हुआ है और कई क्षेत्रों में चीन पर निर्भरता बनी हुई है। ऐसे हालात में यह जानना जरूरी है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को रोकने में चीन की कथित भूमिका क्या थी।
क्या है चीन का दावा
गौरतलब है कि चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने हाल ही में कहा था कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करना चीन की इस साल की कूटनीतिक सफलताओं में शामिल है। इस बयान के बाद भारतीय राजनीति में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
भारत का आधिकारिक रुख
भारत सरकार लगातार यह स्पष्ट करती रही है कि मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच उत्पन्न हालात दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच सीधी बातचीत से सुलझाए गए थे। नई दिल्ली का स्पष्ट मत है कि भारत-पाकिस्तान से जुड़े मामलों में किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार्य नहीं है।
बंगाल चुनाव से पहले गरमाई सियासत , अमित शाह ने टीएमसी पर साधा निशाना
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में प्रस्तावित विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल तेजी से गरमाता जा रहा है। राज्य में सभी प्रमुख दल रणनीति बनाने में जुटे हैं, वहीं आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है। इसी क्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोलकाता में आयोजित प्रेस वार्ता में राज्य की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला। शाह ने घुसपैठ, भ्रष्टाचार, प्रशासनिक विफलता और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों को लेकर राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा किया।
घुसपैठ चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बनेगा— अमित शाह
अमित शाह ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राजनीतिक फायदे के लिए बांग्लादेश से हो रही अवैध घुसपैठ को नजरअंदाज कर रही हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा सीमा पर बाड़ लगाने के लिए जमीन उपलब्ध नहीं कराई जा रही, जिसके कारण घुसपैठ पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है। शाह ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2026 का विधानसभा चुनाव घुसपैठ रोकने और सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर लड़ा जाएगा।
टीएमसी शासन में भय और भ्रष्टाचार का माहौल— शाह
गृह मंत्री ने दावा किया कि पिछले 15 वर्षों में टीएमसी शासन के दौरान पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार, डर और प्रशासनिक अराजकता बढ़ी है। उन्होंने कहा कि आम नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और विकास कार्य ठप पड़े हैं। शाह ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं राज्य में ‘टोल सिंडिकेट’ और भ्रष्ट तंत्र की भेंट चढ़ रही हैं, जिससे गरीब और जरूरतमंद वर्ग को लाभ नहीं मिल पा रहा।
सीमा पर बाड़बंदी में अड़चन का आरोप
अमित शाह ने कहा कि भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा बाड़ लगाने के लिए केंद्र सरकार पूरी तरह तैयार है, लेकिन राज्य सरकार जमीन उपलब्ध नहीं करा रही। उन्होंने सवाल उठाया कि जब त्रिपुरा, असम, राजस्थान, पंजाब, जम्मू-कश्मीर और गुजरात में घुसपैठ पर काफी हद तक नियंत्रण हो चुका है, तो केवल पश्चिम बंगाल में यह समस्या क्यों बनी हुई है।
शाह ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की जानकारी में ही अवैध घुसपैठ हो रही है और इसका उद्देश्य जनसंख्या संतुलन बदलकर वोट बैंक को मजबूत करना है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बताया।
ममता बनर्जी को लिखे सात पत्र— शाह
एक सवाल के जवाब में गृह मंत्री ने बताया कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सात पत्र लिखे हैं, लेकिन अब तक जमीन देने को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने कहा कि गृह सचिव समेत केंद्रीय अधिकारियों की कई बैठकों के बावजूद समाधान नहीं निकला। शाह ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार घुसपैठियों के फर्जी दस्तावेज तैयार करा रही है, जिससे समस्या और गंभीर होती जा रही है।
2026 में भाजपा सरकार बनने का दावा
अमित शाह ने दावा किया कि 2026 के विधानसभा चुनाव में भाजपा पश्चिम बंगाल में दो-तिहाई बहुमत के साथ सरकार बनाएगी। उन्होंने भाजपा के बढ़ते जनाधार का हवाला देते हुए कहा कि पार्टी ने पिछले एक दशक में राज्य में लगातार मजबूती हासिल की है। उन्होंने विभिन्न चुनावों के आंकड़े गिनाते हुए कहा कि भाजपा का वोट शेयर और सीटें लगातार बढ़ी हैं, जबकि कांग्रेस और वाम दल हाशिये पर चले गए हैं।
संस्कृति और विकास को नई दिशा देने का वादा
शाह ने कहा कि भाजपा की सरकार बनने के बाद पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक विरासत को संजोने और विकास को नई गति देने का काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बंगाल भाजपा के लिए ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि पार्टी के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का इस धरती से गहरा नाता रहा है।
गृह मंत्री ने भरोसा दिलाया कि भाजपा सरकार गरीबों के कल्याण, कानून-व्यवस्था सुधार और घुसपैठ पर सख्त नियंत्रण को प्राथमिकता देगी। उन्होंने कहा कि भाजपा बंगाल में बदलाव, सुरक्षा और विकास का नया अध्याय लिखना चाहती है।
पीड़ित पक्ष को न्याय की उम्मीद, सेंगर को मिली राहत पर सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप
नई दिल्ली। उन्नाव दुष्कर्म मामले में भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर से जुड़ा मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। शीर्ष अदालत ने इस प्रकरण में सुनवाई करते हुए सेंगर को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। साथ ही अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले में विस्तृत आदेश बाद में जारी किया जाएगा।
दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की रोक
दरअसल, यह सुनवाई केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की उस याचिका पर हुई, जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा निलंबित किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई थी। दिल्ली हाईकोर्ट ने 23 दिसंबर को सेंगर को राहत देते हुए उसकी सजा पर रोक लगा दी थी। इसके बाद सीबीआई ने इस निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है।
अन्य याचिकाओं पर भी होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले से जुड़ी अधिवक्ता अंजलि पटेल और पूजा शिल्पकार की ओर से दायर याचिकाओं पर भी सुनवाई होनी है। उन्नाव दुष्कर्म मामला देश के सबसे संवेदनशील और चर्चित मामलों में शामिल रहा है, ऐसे में शीर्ष अदालत का फैसला बेहद अहम माना जा रहा है।
पीड़ित पक्ष का विरोध प्रदर्शन, न्याय की उम्मीद
इससे पहले रविवार को उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता और उसकी मां ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर सेंगर को मिली राहत का विरोध किया था। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोग हाथों में बैनर और तख्तियां लिए नजर आए। पीड़िता की मां ने कहा कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट पर पूरा भरोसा है और उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद है। उन्होंने आरोप लगाया कि केस वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है।
सुरक्षा की मांग
पीड़िता ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील करते हुए कहा कि उन्हें और उनके परिवार को पर्याप्त सुरक्षा दी जाए, ताकि वे बिना किसी डर के अपनी कानूनी लड़ाई जारी रख सकें। पीड़ित पक्ष का कहना है कि वे हर हाल में न्याय के लिए संघर्ष करते रहेंगे।
BS6 से कम बाहरी वाहनों की दिल्ली में एंट्री पर स्थायी रोक
नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में लगातार बिगड़ते वायु गुणवत्ता स्तर को देखते हुए दिल्ली सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए बड़ा और दीर्घकालिक फैसला लिया है। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अब अस्थायी उपायों की जगह स्थायी नियम लागू किए जा रहे हैं, ताकि आने वाले समय में राजधानी को गंभीर प्रदूषण संकट से बचाया जा सके।
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मजिंदर सिंह सिरसा ने जानकारी देते हुए बताया कि ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के चौथे चरण के तहत लागू की जाने वाली दो अहम पाबंदियों को अब स्थायी रूप से लागू कर दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब राजधानी में बिना वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (PUCC) के किसी भी वाहन को पेट्रोल, डीजल या सीएनजी नहीं दिया जाएगा। यह नियम सभी पेट्रोल पंपों पर हर समय लागू रहेगा, न कि केवल प्रदूषण के आपात हालात में।
इसके साथ ही दिल्ली की सीमाओं पर भी सख्ती बढ़ा दी गई है। सरकार ने फैसला किया है कि भारत स्टेज-6 (BS6) मानकों से कम उत्सर्जन वाली बाहरी गाड़ियों को दिल्ली में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। यानी BS3 और BS4 श्रेणी के वाहन अब राजधानी में नहीं आ सकेंगे। केवल BS6 मानकों पर खरे उतरने वाले, इलेक्ट्रिक और सीएनजी वाहन ही दिल्ली में प्रवेश कर पाएंगे।
पर्यावरण मंत्री ने कहा कि मौसम विभाग द्वारा आने वाले दिनों में वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के कारण मौसम के फिर से बिगड़ने की आशंका जताई गई है, जिससे प्रदूषण का स्तर और बढ़ सकता है। ऐसे में सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और समय रहते कड़े कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि दिल्ली के लोगों को दोबारा प्रदूषण के गंभीर हालात का सामना न करना पड़े।
सरकार का मानना है कि वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को नियंत्रित किए बिना वायु गुणवत्ता में सुधार संभव नहीं है। इसी वजह से इन दोनों नियमों को स्थायी बनाकर प्रदूषण पर दीर्घकालिक नियंत्रण की दिशा में ठोस कदम उठाया गया है।
नई दिल्ली- देश की सर्वोच्च अदालत ने दुष्कर्म से जुड़े एक मामले में अहम फैसला देते हुए आरोपी को बड़ी राहत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने न सिर्फ दोषसिद्धि को रद्द किया, बल्कि 10 साल की सजा को भी समाप्त कर दिया। अदालत ने माना कि यह मामला आपसी सहमति से बने संबंधों का था, जिसे परिस्थितियों और गलतफहमी के चलते आपराधिक विवाद का रूप दे दिया गया।
यह मामला मध्य प्रदेश से जुड़ा है, जहां ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को दुष्कर्म का दोषी ठहराते हुए सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। बाद में हाईकोर्ट ने भी सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। इसके बाद आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। शीर्ष अदालत में सुनवाई के दौरान पूरे प्रकरण की गहराई से समीक्षा की गई।
न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने मामले के सामाजिक और मानवीय पहलुओं पर भी विचार किया। अदालत ने दोनों पक्षों से उनके परिजनों की मौजूदगी में संवाद किया। बातचीत के बाद यह स्पष्ट हुआ कि दोनों के बीच लंबे समय से संबंध थे और अब वे अपने रिश्ते को वैवाहिक रूप दे चुके हैं। जुलाई 2025 में दोनों का विवाह भी हो गया।
अदालत ने पाया कि दोनों की जान-पहचान वर्ष 2015 में सोशल मीडिया के माध्यम से हुई थी और समय के साथ संबंध गहरे होते चले गए। शिकायतकर्ता ने शादी में देरी को लेकर असुरक्षा महसूस की, जिसके बाद मामला दर्ज कराया गया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम में आपराधिक मंशा के स्पष्ट संकेत नहीं मिलते।
पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 का प्रयोग करते हुए एफआईआर, निचली अदालत का फैसला और सजा सभी को निरस्त कर दिया। अदालत ने कहा कि अब जब दोनों साथ रह रहे हैं और वैवाहिक जीवन व्यतीत कर रहे हैं, तो मुकदमे को आगे बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं रह जाता।
इसके साथ ही अदालत ने आरोपी की नौकरी से जुड़ा मसला भी सुलझाया। आपराधिक मामले के चलते उसे निलंबित कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित विभाग को निलंबन समाप्त करने और बकाया वेतन जारी करने के निर्देश दिए। वहीं, हाईकोर्ट में लंबित अपील को भी निरर्थक घोषित कर दिया गया।
अरावली विवाद पर भूपेंद्र यादव का पलटवार, कांग्रेस के आरोप किए खारिज
नई दिल्ली। अरावली पर्वतमाला को लेकर चल रहे सियासी विवाद के बीच केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कांग्रेस के आरोपों पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहाड़ियों की परिभाषा में बदलाव से अरावली का कोई हिस्सा संरक्षण से बाहर नहीं होगा और कांग्रेस द्वारा फैलाया जा रहा भ्रम तथ्यों से परे है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर इसलिए असहज है क्योंकि केंद्र सरकार ने गुजरात से लेकर दिल्ली तक पूरी अरावली पर्वतमाला में खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी वैज्ञानिक या आधिकारिक अध्ययन में यह साबित नहीं होता कि नई परिभाषा से अरावली के 90 प्रतिशत हिस्से को नुकसान पहुंचेगा।
दरअसल, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया था कि पर्वतीय श्रृंखलाओं की परिभाषा में बदलाव से अरावली क्षेत्र का बड़ा हिस्सा संरक्षण के दायरे से बाहर चला जाएगा, जिससे खनन और अन्य गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए भूपेंद्र यादव ने कहा कि भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) के किसी भी अध्ययन में ऐसे दावों की पुष्टि नहीं होती है।
भूपेंद्र यादव ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि अगर विपक्ष पर्यावरण संरक्षण को लेकर वास्तव में गंभीर होता, तो उसे यह भी बताना चाहिए कि अरावली क्षेत्र को सबसे ज्यादा नुकसान किसके शासनकाल में हुआ। उन्होंने कांग्रेस नेताओं से सवाल किया कि वे अपने ही दल के वरिष्ठ नेताओं से अरावली के क्षरण को लेकर जवाब क्यों नहीं मांगते।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार अरावली पर्वतमाला को संरक्षित और पुनर्जीवित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान इस क्षेत्र में अवैध खनन और अंधाधुंध गतिविधियों से भारी नुकसान हुआ, जिसकी भरपाई अब की जा रही है।
गौरतलब है कि हाल ही में पहाड़ियों की नई परिभाषा तय की गई है, जिसके अनुसार किसी क्षेत्र को पहाड़ी तब माना जाएगा जब उसकी ऊंचाई आसपास के भूभाग से कम से कम 100 मीटर अधिक हो। वहीं, अरावली पर्वतमाला को दो या उससे अधिक ऐसी पहाड़ियों के समूह के रूप में परिभाषित किया गया है, जो 500 मीटर के दायरे में स्थित हों। विवाद बढ़ने के बाद केंद्र सरकार ने राज्यों को निर्देश जारी करते हुए अरावली क्षेत्र में नए खनन पट्टों पर पूरी तरह रोक लगाने का आदेश दिया है।
6100 किलो का सैटेलाइट 16 मिनट में कक्षा में स्थापित
प्रधानमंत्री मोदी ने इसरो की सफलता पर जताया गर्व
श्रीहरिकोटा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने इस वर्ष के अपने अंतिम मिशन के साथ अंतरिक्ष क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। इसरो ने अपने हैवी-लिफ्ट रॉकेट एलवीएम-3 के जरिए अब तक के सबसे भारी वाणिज्यिक संचार उपग्रह ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है। यह मिशन पूरी तरह व्यावसायिक रहा, जिसने वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में भारत की तकनीकी क्षमता और विश्वसनीयता को और मजबूत किया है।
यह प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सुबह 8:55 बजे किया गया। लगभग 16 मिनट की उड़ान के बाद 6,100 किलोग्राम वजनी यह उपग्रह पृथ्वी से करीब 520 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित निचली कक्षा (लो अर्थ ऑर्बिट) में सफलतापूर्वक स्थापित किया गया। इस मिशन में इसरो के एलवीएम-3 रॉकेट का इस्तेमाल किया गया, जिसे इसकी भारी भार वहन क्षमता के कारण ‘बाहुबली’ भी कहा जाता है। यह एलवीएम-3 की छठी उड़ान और तीसरी वाणिज्यिक उड़ान रही।
इसरो के अनुसार यह लॉन्चिंग न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) और अमेरिका की एएसटी स्पेसमोबाइल कंपनी के बीच हुए वाणिज्यिक समझौते का हिस्सा है। ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 अब तक भारत से लॉन्च किया गया सबसे भारी वाणिज्यिक संचार उपग्रह है, जो अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के लिए इसरो की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
इस ऐतिहासिक सफलता पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम युवाओं की ताकत से और अधिक आधुनिक व प्रभावी बन रहा है। एलवीएम-3 की भरोसेमंद क्षमता भविष्य के गगनयान जैसे मिशनों, वाणिज्यिक लॉन्च सेवाओं के विस्तार और वैश्विक साझेदारियों को नई मजबूती दे रही है।
विशेषज्ञों के मुताबिक यह मिशन इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे भारत की पकड़ वैश्विक कमर्शियल स्पेस सेक्टर में और मजबूत होगी। एलवीएम-3 पहले ही चंद्रयान-2, चंद्रयान-3 और वनवेब जैसे अंतरराष्ट्रीय सैटेलाइट मिशनों को सफलतापूर्वक अंजाम दे चुका है। वनवेब मिशन के तहत इसरो ने दो चरणों में 72 उपग्रहों को कक्षा में स्थापित किया था।
ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 उपग्रह अगली पीढ़ी की संचार तकनीक का हिस्सा है। इसके सफल संचालन के बाद 4जी और 5जी स्मार्टफोन को सीधे सैटेलाइट के जरिए ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी मिल सकेगी, वह भी बिना किसी अतिरिक्त एंटीना या विशेष हार्डवेयर के। इससे पहाड़ी क्षेत्रों, समुद्रों, रेगिस्तानों और दूरदराज के इलाकों में मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध कराना आसान होगा।
इसके अलावा प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़, भूकंप, तूफान या भूस्खलन के दौरान जब जमीन पर मौजूद टेलीकॉम ढांचा प्रभावित हो जाता है, तब सैटेलाइट आधारित संचार सेवाएं अहम भूमिका निभा सकती हैं। इस मिशन के साथ इसरो ने न केवल तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन किया है, बल्कि भविष्य की संचार क्रांति की दिशा में भी एक मजबूत कदम बढ़ाया है।
पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की उठी मांग
नई दिल्ली। बांग्लादेश में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की हत्या की घटना को लेकर देशभर में आक्रोश देखा जा रहा है। इसी कड़ी में मंगलवार को विश्व हिंदू परिषद सहित कई हिंदू संगठनों ने नई दिल्ली स्थित बांग्लादेश उच्चायोग के बाहर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के मद्देनज़र मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है, ताकि स्थिति को नियंत्रित रखा जा सके।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई। इस बीच प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हल्की झड़प की स्थिति भी बनी, जिसे पुलिस ने समय रहते संभाल लिया।
बताया जा रहा है कि यह मामला बांग्लादेश के मयमनसिंह जिले का है, जहां 27 वर्षीय हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की कथित तौर पर भीड़ द्वारा हत्या कर दी गई। आरोप है कि युवक पर ईशनिंदा का आरोप लगाकर पहले उसके साथ बेरहमी से मारपीट की गई और बाद में उसके शव को पेड़ से लटकाकर आग के हवाले कर दिया गया। इस घटना के सामने आने के बाद न केवल बांग्लादेश बल्कि भारत में भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
हिंदू संगठनों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। प्रदर्शनकारियों ने भारत सरकार से इस मामले को कूटनीतिक स्तर पर उठाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित कराने की मांग की है।
पीएम मोदी के असम दौरे पर सियासी घमासान, कांग्रेस ने उठाए सवाल
गुवाहाटी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया असम दौरे के बाद सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई है। असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने प्रधानमंत्री के भाषणों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि उनके संबोधनों में कांग्रेस पर हमलों के साथ-साथ इतिहास की घटनाओं को अपने दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया। गोगोई ने कहा कि यह तरीका न सिर्फ विवाद को जन्म देता है, बल्कि असम की भावनाओं को भी आहत करता है।
भाषणों की विषयवस्तु पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता का कहना है कि प्रधानमंत्री ने अपने भाषणों में आज़ादी से पहले असम को लेकर हुई घटनाओं का उल्लेख करते हुए कांग्रेस की भूमिका पर आरोप लगाए, जो ऐतिहासिक तथ्यों को एकतरफा ढंग से पेश करने जैसा है। गोगोई ने कहा कि इतिहास को राजनीतिक बहस का हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए।
जुबीन गर्ग को लेकर जताई नाराज़गी
गोगोई ने असम के लोकप्रिय गायक जुबीन गर्ग का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने उनके निधन पर सार्वजनिक रूप से संवेदना व्यक्त नहीं की। उन्होंने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने न सिर्फ श्रद्धांजलि दी, बल्कि परिवार से मुलाकात कर न्याय की मांग भी उठाई। कांग्रेस के अनुसार, इससे असम के लोगों की भावनाओं की अनदेखी का संदेश गया।
संवेदना से अधिक आयोजनों पर जोर का आरोप
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री का दौरा अधिकतर औपचारिक आयोजनों और बड़े मंचीय कार्यक्रमों तक सीमित रहा। उनका कहना है कि आम लोगों के दुख-दर्द और भावनाओं को पर्याप्त स्थान नहीं मिला, जिससे जनता में निराशा देखने को मिली।
मणिपुर का उदाहरण भी सामने रखा
गोगोई ने मणिपुर की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां के लोगों ने भी पहले ऐसे ही अनुभव साझा किए थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हिंसा प्रभावित इलाकों का दौरा कर पीड़ितों से सीधे मुलाकात की, जबकि केंद्र सरकार की ओर से अपेक्षित संवेदनशीलता नहीं दिखी।
पूर्वोत्तर के सम्मान की बात
कांग्रेस नेता ने कहा कि पूर्वोत्तर भारत केवल राजनीतिक नारे का विषय नहीं, बल्कि उसकी अपनी संस्कृति, परंपराएं और संघर्ष हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जो भी दल या नेता इन मूल्यों का सम्मान करेगा, उसे ही जनता का समर्थन मिलेगा। प्रधानमंत्री का असम दौरा बीते सप्ताहांत हुआ था, जिसके बाद से यह सियासी बहस जारी है।
