भारत सरकार ने देश में रेमेडिसविर की कमी को दूर करने के लिए दूसरे देशों से इस महत्वपूर्ण दवा का आयात शुरू किया है। इसके तहत शुक्रवार को रेमेडिसविर की 75,000 शीशियों की पहली खेप भारत पहुंचेगी।
केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में जानकारी गई है कि भारत सरकार के स्वामित्व वाली कंपनी एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड ने अमेरिका के मेसर्स गिलियड साइंसेज इंक और मिस्र की मेसर्स ईवीए फार्मा को रेमेडिसविर की 4,50,000 शीशियां बनाने का ऑर्डर दिया है। अमेरिका से अगले एक या दो दिनों में 75,000 से 1,00,000 शीशियां भारत पहुंचेगी। इसके अलावा 15 मई से पहले एक लाख शीशियों की आपूर्ति की जाएगी। साथ ही ईवीए फार्मा शुरुआत में लगभग 10,000 शीशियों की आपूर्ति करेगी, जिसके बाद हर 15 दिन या जुलाई तक 50,000 शीशियां मिलेंगी।
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सरकार ने देश में भी रेमेडिसविर की उत्पादन क्षमता को बढ़ा दिया है। 27 अप्रैल तक सात लाइसेंस प्राप्त घरेलू निर्माताओं की उत्पादन क्षमता प्रति माह 38 लाख शीशियों से बढ़कर 1.03 करोड़ शीशियों प्रति माह हो गई। पिछले सात दिनों में दवा कंपनियों द्वारा देश भर में कुल 13.73 लाख शीशियों की आपूर्ति की गई है। दैनिक आपूर्ति 11 अप्रैल को 67,900 शीशियों से बढ़कर 28 अप्रैल को 2.09 लाख शीशियों तक पहुंच गई है। गृह मंत्रालय द्वारा रेमेडिसविर आपूर्ति को सुचारू रूप से करने के लिए राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को एडवाजरी जारी की गई थी।
सरकार ने भारत में इसकी उपलब्धता बढ़ाने के लिए रेमेडिसविर के निर्यात पर भी रोक लगा दी। आम लोगों के बीच इंजेक्शन की लाभप्रदता सुनिश्चित करने के लिए, एनपीपीए ने इस माह 17 अप्रैल को संशोधित अधिकतम खुदरा मूल्य जारी किया, जिससे सभी प्रमुख ब्रांडों की लागत 3500 रुपये प्रति शीशी से नीचे आ गई।
रेमेडिसविर के उत्पादन तेजी से बढ़ाने और उपलब्धता को आसानी से सुनिश्चित बनाने के लिए, राजस्व विभाग ने 20 अप्रैल को अधिसूचना जारी कर रेमेडिसविर इंजेक्शन पर सीमा शुल्क की पूरी तरह से खत्म करने का ऐलान किया था। इसके साथ ही रेमेडिसविर के निर्माण में इस्तेमाल किए जाने वाले एपीआई और बीटा साइक्लोडोडेक्सट्रिन पर भी यह छूट दी गई थी। सीमा शुल्क में यह छूट इस वर्ष 31 अक्टूबर तक लागू रहेगी।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसस) के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा कि कोरोना के क्रूर प्रहार से देश के कई हिस्से प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि इस महामारी से निपटने में समाज के सभी लोगों का सहयोग आवश्यक है। कोरोना के प्रकोप पर शासन-प्रशासन व समाज के समन्वित प्रयास से ही भारत विजय प्राप्त करेगा।
आंबेकर ने नयी दिल्ली में डिजिटल माध्यम से आयोजित प्रेस वार्ता में संघ तथा सेवा भारती द्वारा चलाए जा रहे सेवा कार्यों के संबंध में जानकारी दी और कहा कि हमेशा की तरह संघ व सेवाभारती सहित अन्य संगठन व संस्थाएं प्रभावित क्षेत्रों व परिवारों में राहत पहुंचाने के काम में जुटे हैं। संघ की पहल पर आवश्यकता के अनुसार अभी बारह प्रकार के कार्य प्राथमिकता से प्रारंभ हुए हैं।
उन्होंने कहा कि कोविड के संभावित लोगों हेतु आइसोलेशन केंद्र व पॉज़िटिव रोगियों हेतु कोविड केअर (सेवा) केंद्र, सरकारी कोविड केंद्र व अस्पतालों में सहायता, सहायता हेतु दूरभाष (हेल्पलाइन नंबर), रक्तदान, प्लाज्मादान, अंतिम संस्कार के कार्य, आयुर्वेदिक काढ़ा वितरण, समुपदेशन (काउंसलिंग), ऑक्सीजन आपूर्ति व एम्बुलेंस सेवा, भोजन, राशन व मास्क तथा टीकाकरण अभियान व जागरूकता जैसे आवश्यक कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर तत्काल कई प्रांतों में स्वयंसेवकों द्वारा प्रारंभ किया गया है। स्थानीय प्रशासन की भी हर संभव सहायता की जा रही है ताकि सभी मिलकर इस चुनौती पर विजय प्राप्त कर सकें।
उन्होंने बताया कि इंदौर में संघ की पहल पर शासन, निजी अस्पताल, राधा स्वामी संत्संग आदि के सहयोग से दो हज़ार बिस्तर का कोविड केंद्र शासन व समाज के समन्वित कार्य का उत्कृष्ट उदाहरण बन गया है। संघ के स्वयंसेवकों द्वारा अभी 43 प्रमुख शहरों में कोविड सेवा केंद्र चलाए जा रहे हैं तथा अन्य 219 स्थानों पर कोविड अस्पतालों में प्रशासन का सहयोग किया जा रहा है। टीकाकरण हेतु दस हजार से अधिक स्थानों पर जागरूकता अभियान के साथ 2442 टीकाकरण केंद्र अभी तक प्रारंभ किए गए हैं।
एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने बताया कि आवश्यकता के अनुसार प्लाज्मा व रक्तदान में सहयोग किया जा रहा है। कुछ स्थानों पर संभावितों की सूची भी बनी है। दिल्ली में रक्तदाताओं की सूची उपलब्ध है। पूणे में जनजागरण अभियान के माध्यम से 600 लोगों ने प्लाज्मा डोनेट किया, जिससे 1500 लोगों का जीवन बचाने में सहायता मिली। एक अन्य प्रश्न के उत्तर में कहा कि विभिन्न शहरों में बुजुर्गों व अकेले रहने वालों को ध्यान में रखते हुए हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं। इनके माध्यम से जरूरतमंदों को आवश्यक सहायता उपलब्ध करवाई जा रही है।
उन्होंने कहा कि संघ कोरोना की महामारी में दिवंगत सभी को श्रद्धांजलि अर्पित करता है। डॉक्टरों, स्वास्थ्य कर्मियों, ऑक्सीजन आदि सामग्री की आपूर्ति में लगे कर्मचारी, सुरक्षा व स्वच्छता कर्मियों सहित सभी कोरोना योद्धाओं का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि हमारे समाज की संवेदना व सक्रियता अद्भुत है। अपनी जान जोखिम में डालकर संकट की स्थिति में कार्य कर रहे हैं। परिस्थिति भले ही विकट हो, भारत में समाज की शक्ति भी विशाल है।
बीते एक वर्ष में कोरोना महामारी ने सभी को प्रभावित किया है। इस दौरान सामाजिक, आर्थिक और मानसिक रूप से देश के प्रत्येक वर्ग पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। हालांकि, समाज का एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है जो लोगों का सहयोग करने के साथ-साथ समाज में सकारात्मकता फैलाने का कार्य भी कर रहा है। लेकिन, जैसे कि हर समाज की सच्चाई है… कुछ ऐसे समूह भी हैं जो विपरीत परिस्थितियों में भी सिर्फ नकारात्मकता परोसते हैं और वर्षों से क्रांतिकारी होने का ढोंग करने वाले लोग अब अपने-अपने बिल में छिपे हुए हैं।
अफजल गुरु की बरसी मनाने और भारत के टुकड़े करने के नारे लगाने के आरोप में देशद्रोह का मुकदमा झेल रहे कम्युनिस्ट पार्टी के नेता कन्हैया कुमार गायब हैं। उनकी ओर से कोरोना के खिलाफ जंग में कोई क्रांतिकारी पहल नहीं दिख रही।
वामपंथी मीडिया द्वारा क्रांतिकारी के रूप में प्रस्तुत किए गए कन्हैया कुमार जब देश में विपत्ति आई तो अपने बिल में जाकर छिप गए हैं। सिर्फ इतना ही नहीं समय-समय पर मुख्यतः केंद्र की सरकार पर तंज कसने वाले कन्हैया कुमार खुद आगे बढ़कर किसी की भी मदद करते हुए नजर नहीं आ रहे।
एक अन्य़ कथित क्रांतिकारी हार्दिक पटेल, जिसके माध्यम से गुजरात में सरकार गिराने के लिए पाटीदार आंदोलन करवाया गया था, वह आज गुजरात कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष हैं। हार्दिक पटेल वर्तमान समय में कहीं पर भी कोरोना वायरस महामारी से लोगों को बचाने के लिए सहयोग का पहल करते हुए दिखाई नहीं दे रहे हैं। हां, सोशल मीडिया पर अवश्य एक्टिव हैं।
अक्सर अपने विवादित ट्वीट के कारण चर्चाओं में रहने वाली स्वरा भास्कर भी वर्तमान संकट के समय गायब हैं। सरकार को तो कोस रही हैं, लेकिन अपने स्तर पर समाज या कुछ लोगों की सहायता को कोई कार्य किया हो तो हमें भी बताएं। जिन्हें सरकार के खिलाफ भड़का रही थीं, या जिनके साथ आंदोलन कर रही थीं, उनकी ही सहायता कर रही हों तो भी बताएं ?
गुजरात से विधायक और एक बड़े क्रांतिकारी जिग्नेश मेवाणी भी जमीन पर कहीं नज़र नहीं आ रहे हैं। इसके विपरीत वे ट्विटर पर क्रांति करते दिखाई दे रहे हैं और ट्विटर के माध्यम से फेक खबरें परोस रहे हैं। मंगलवार को उन्होंने एक ट्वीट किया – ”मोदी जी के जन्मस्थल वडनगर में ऑक्सीजन प्लांट के फेल हो जाने के चलते 8 मरीजों की मौत हो गई। ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटना दोबारा न हो उसे सुनिश्चित करने के बजाय या दोषियों के खिलाफ जांच के आदेश के बजाय रुपाणी सरकार लगी है हकीकत छुपाने में। क्या हो रहा है गुजरात में ? कहां है मोदी जी?”
मेवाणी के ट्वीट के बाद गुजरात के आरोग्य कमिश्नर को आधिकारिक बयान जारी करना पड़ा और स्पष्ट करना पड़ा कि वडनगर के अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट फेल होने की बात पूरी तरह गलत है। वडनगर में इस तरह का कोई भी हादसा नहीं हुआ है, यहां तक कि यहां मरीज की मौत होने की बात भी बेबुनियाद है।
साफ है कि इस तरह की गलत बात सोशल मीडिया में कहे जाने पर लोगों में डर का माहौल पैदा होता है। मगर मेवाणी जैसे कथित क्रांतिकारियों को इससे कोई लेना देना नहीं है। उन्हें तो अपनी क्षुद्र राजनीति से मतलब है।
इनके अलावा भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद रावण व अन्य अनेक कथित क्रांतिकारी-समाजसेवी संकट के समय नजर नहीं आ रहे। जो नजर आ रहे हैं वो अपनी हरकत से बाज नहीं आ रहे और समाज में नकारात्मकता फैलाने का ही काम कर रहे हैं। वामपंथी मीडिया और पत्रकार समूह जिन्हें आने वाले समय का नेतृत्वकर्ता बताते हुए नहीं थकता, जब देश पर विपत्ति आई है तो ये नेतृत्वकर्ता क्रांतिकारी नदारद हैं।
भारत के औषधि नियन्त्रण महानिदेशक (Drug Controller General of India-DCGI) ने मध्यम श्रेणी के कोविड-19 लक्षणों वाले रोगियों के उपचार के लिए जाईडस कैडिला द्वारा निर्मित वाईराफिन (Virafin) के सीमित उपयोग की आपात स्वीकृति दे दी है। इस दवा का उपयोग करने के बाद 91.5 प्रतिशत रोगियों का आरटी-पीसीआर परीक्षण सातवें दिन नेगेटिव मिला और रोगियों में अतिरिक्त ऑक्सीजन लेने की जरुरत में उल्लेखनीय कमी आई।
केंद्र सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि चिकित्सकीय अध्ययनों से यह जानकारी मिली है कि कोविड संक्रमित रोगियों में से बड़ी संख्या में जिन रोगियों को त्वचा के नीचे इंजेक्शन के रूप में वाईराफिन दी गई उनकी आरटी-पीसीआर रिपोर्ट एक सप्ताह बाद निगेटिव आई, जो कि अन्य एंटी -वाइरल दवाओं की तुलना में बेहतर परिणाम है।
अध्ययनों से वाईराफिन की सुरक्षित होने, सहनशीलता और प्रभावशीलता की पुष्टि हुई है। अध्ययनों से यह भी जानकारी मिली कि वाईराफिन वाइरल लोड में कमी लाने के साथ-साथ इस रोग का बेहतर तरीके से उपचार करने में कारगर है। इसमें पूरक ऑक्सीजन की आवश्यकता में कमी लाना शामिल है, जिससे ऑक्सीजन का स्तर घटने के कारण सांस लेने में हो रही कठिनाइयों को कम किया जा सकता है।
Just like the ‘whole of society’ & ‘whole of govt’, our scientists keep on contributing to the fight against #COVID19
GoI is committed to supporting each & every positive endeavour to end this #pandemic#Unite2FightCorona #Virafin @PMOIndia @DBTIndia @ZydusUniverse @BIRAC_2012 https://t.co/K0mu1GazYr
— Dr Harsh Vardhan (@drharshvardhan) April 24, 2021
इस उपलब्धि की चर्चा करते हुए केंद्र सरकार की जैव प्रौद्योगिकी विभाग की सचिव डॉ. रेणु स्वरूप ने कहा कि – सरकार कोविड-19 महामारी के विरुद्ध शमन रणनीतियों और हस्तक्षेप की दिशा में काम करने के लिए देश में उद्योगों को हर संभव सुविधा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। वाईराफिन को दी गई आपात स्वीकृति इस दिशा में एक नया पड़ाव है।
कैडिला हैल्थकेयर लिमिटेड के प्रबंध निदेशक डॉ.शर्विल पी.पटेल ने कहा कि – यह अनुभूति हो रही है कि अब हम एक ऐसा उपचार देने में सक्षम हैं जिससे वायरल लोड को काफी हद तक कम किया जा सकता है और इस संक्रमण की शुरुआत में ही इस रोग का बेहतर ढंग से उपचार में मदद मिल सकती है। यह ऐसे समय आई है जब रोगियों को इसकी आवश्यकता है।
असामान्य जीवन शैली के कारण आज लगातार पूरे विश्व में लीवर रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। जब लीवर ठीक से अपनी मरम्मत और खुद को फिर से भरने में विफल रहता है, तो इससे नॉन एल्कोहलिक फैटी लिवर डिसीज (एनएएफएलडी) उत्पन्न होता है। एक बार जब यह स्थिति उत्पन्न हो जाती है, तो कोई इलाज उपलब्ध नहीं होता है। दुनिया भर में लगभग 1 बिलियन व्यक्तियों (वैश्विक आबादी का 20-30 प्रतिशत) के पीड़ित होने का अनुमान है। भारत में, यह जनसंख्या के 9-32 प्रतिशतके बीच है। यह तथ्य इस बात का सूचक है कि 10 भारतीयों में से 1 से 3 व्यक्तियों को फैटी लीवर या संबंधित बीमारी होगी।
सोमवार को विश्व लीवर दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने यह आंकड़े रखे। उन्होंने कहा कि लीवर दूसरा सबसे बड़ा अंग है जो चुपचाप सभी महत्वपूर्ण कार्य करता है। असामान्य जीवनशैली के कारण शरीर पर हमले का मुख्य रूप से सामना भी लीवर ही करता है। उन्होंने इसे एक मूक महामारी बताया और लोगों से सचेत रहने का आग्रह किया। उन्होंने धूम्रपान, मदिरापान व जंक फूड का त्याग करने की अपील की , क्योंकि ये इन बीमारियों को बढ़ाने वाले कारक हैं।
कोविड-19 महामारी के इस दौर में स्वास्थ्य के प्रति सजग हुए हैं। इसमें निरंतरता जरूरी है। @MoHFW_INDIA द्वारा #विश्वयकृतदिवस पर आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता की। बेहतर स्वास्थ्य के लिए यकृत की देखभाल आवश्यक है। इसके प्रति जागरूक रहने की जरूरत है। pic.twitter.com/jF31JZ9U5c
— Ashwini Kr. Choubey (@AshwiniKChoubey) April 19, 2021
उन्होंने स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालने वाले खर्राटे जैसे लक्षणों पर सतर्कता बरतने और चिकित्सा परामर्श लेने का भी आग्रह किया। उन्होंने ‘मित-भुक्ता’ और ‘ऋत-भुक्ता’ शब्दों पर जोर देते हुए उस प्राचीन अवधारणा को प्रतिपादित किया कि मितव्ययी रूप से और ज्यादातर मौसमी खाद्य पदार्थों के सेवन से लंबी आयु प्राप्त करने में मदद मिलती है।
This World Liver Day, promise yourself to keep your liver in good shape for maintaining a good health. #WorldLiverDay #SwasthaBharat #WorldLiverday2021 @PMOIndia @drharshvardhan @AshwiniKChoubey @PIB_India @mygovindia @NITIAayog pic.twitter.com/9imGaAq67M
— Ministry of Health (@MoHFW_INDIA) April 19, 2021
वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस कार्यक्रम में विश्व स्वास्थ्य संगठन की दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यालय की क्षेत्रीय निदेशक डॉ. पूनम खेत्रपाल सिंह, अपर सचिव एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन निदेशक वंदना गुरनानी, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक डॉ. सुनील कुमार, संयुक्त सचिव (गैर-संक्रामक रोग) विशाल चौहान, यकृत एवं पित्त विज्ञान संस्थान (आईएलबीएस) के निदेशक डॉ. एस.के.सरीन आदि उपस्थित थे।
शनिवार तक देशभर में 9.80 करोड़ से अधिक लोगों को कोविड-19 के टीके की खुराक दी जा चुकी है। पिछले 24 घंटे के दौरान 34 लाख से अधिक टीके की खुराकें दी गई। वहीं दूसरी तरफ कोरोना महामारी की स्थिति चिंताजनक बनती जा रही है। पिछले 24 घंटे में 1.45 लाख से अधिक नये मामले दर्ज किए गए।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा शनिवार को जारी आंकड़ों के अनुसार अब तक लगभग 89 लाख स्वास्थ्य कर्मियों ने टीके की पहली खुराक और 54 लाख से अधिक स्वास्थ्य कर्मियों ने टीके की दूसरी खुराक ले ली है। कोरोना महामारी में जुटे अग्रिम मोर्चे के लगभग 98 लाख से अधिक कार्यकर्ताओं को टीके की पहली व 46.59 लाख कार्यकर्ताओं को दूसरी खुराक मिल चुकी है। 60 वर्ष से अधिक उम्र वाले 3.86 करोड़ लाभार्थियों ने पहली खुराक व 15.90 लाभार्थियों ने दूसरी खुराक और 45 से 60 वर्ष की उम्र के 2.82 लाभार्थियों ने पहली व 5.8 लाख लाभार्थियों ने टीके की दूसरी खुराक ली है।

टीकाकरण मुहिम के 84वें दिन शुक्रवार को 34 लाख से अधिक टीके लगाए गए। वैश्विक स्तर पर दैनिक खुराकों की संख्या के मामले में, भारत प्रतिदिन औसत 38,93,288 टीके की खुराक दिए जाने के साथ शीर्ष पर बना हुआ।
देश में दैनिक नये मामलों का बढ़ना जारी है। पिछले 24 घंटे में 1.45 लाख से अधिक नये मामले दर्ज किए गए। दस राज्यों- महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान में दैनिक नये मामलों में वृद्धि दिखाई दे रही है। नये मामलों का 82.82 प्रतिशत इन्हीं दस राज्यों में ही है।देश में कुल सक्रिय मामलों का 51.23 प्रतिशत अकेले महाराष्ट्र से है।

महाराष्ट्र में सबसे अधिक 58,993 दैनिक नये मामले दर्ज किए गए हैं। इसके बाद छत्तीसगढ़ में 11,447 जबकि उत्तर प्रदेश में 9,587 नये मामले दर्ज किए गए हैं।
भारत में सक्रिय मामलों की कुल संख्या 10,46,631 तक पहुंच गई है। यह देश में कुल पॉजिटिव मामलों का अब 7.93 प्रतिशत है। पिछले 24 घंटों में कुल सक्रिय मामलों की संख्या में से 67,023 मामले कम हुए।
देश में शनिवार तक कुल स्वस्थ होने वाले मरीजों की संख्या 1,19,90,859 है। राष्ट्रीय स्तर पर रिकवरी दर 90.80 प्रतिशत है। पिछले 24 घंटे में 77,567 मरीज स्वस्थ हुए।
दैनिक मौतें की संख्या में लगातार उछाल देखा जा रहा है। पिछले 24 घंटों में 794 मौतें दर्ज की गई। महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा मौतें (301) दर्ज हुईं हैं। जिसके बाद छत्तीसगढ़ में 91 दैनिक मौतें दर्ज की गई हैं।
#Unite2FightCorona#LargestVaccineDrive
India's Cumulative Vaccination Coverage exceeds 9.80 Crores (9,80,75,160).https://t.co/RO5nPqhvEx pic.twitter.com/Ls1D6PytXR
— Ministry of Health (@MoHFW_INDIA) April 10, 2021
केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने सोमवार को वर्चुअल माध्यम से देश में इन्टेग्रेटेड हेल्थ इन्फॉर्मेशन प्लेटफार्म (आई.एच.आई.पी.) लांच किया। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा लांचिंग कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। आई.एच.आई.पी. पोर्टल के अन्तर्गत अभी 33 तरह की बीमारियों को जोड़ा गया। इस पोर्टल के माध्यम से विभिन्न प्रकार की बीमारियों की ऑनलाईन रिपोर्टिंग होगी। किसी राज्य के किसी भी क्षेत्र में फैल रही बिमारियों के बारे में इस सिस्टम के माध्यम पता चलेगा, जिससे उसको जल्द नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि कहा कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की दृष्टि से यह देश में एक ऐतिहासिक कदम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया के संकल्प की दिशा में स्वास्थ्य के क्षेत्र में यह एक महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने कहा कि आई.एच.आई.पी को विकसित करने के लिए अनेक प्रयास किये गए हैं, इसके लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन का भी पूरा सहयोग मिला। आने वाले समय में इसके तहत अन्य बीमारियों को शामिल किया जायेगा, ताकि उनकी भी सतत निगरानी हो सके। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों से भी आई.एच.आई.पी में पूरा सहयोग मिल रहा है।
मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कहा कि आई.एच.आई.पी के शुरू होने से विभिन्न प्रकार की बीमारियों को जल्द नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। यह स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आई.एच.आई.पी के क्रियान्वयन के लिए राज्य में 1282 टेबलेट उपलब्ध कराये गए हैं। एएनएम, आशा और लेब टैक्निशियन को प्रशिक्षण दिया गया है। न्याय पंचायत स्तर तक प्रशिक्षण दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में अभी कोविड के 03 हजार केस एक्टिव हैं, राज्य में कोविड का रिकवरी रेट 95 प्रतिशत है। जिन राज्यों में पिछले कुछ दिनों में कोरोना के अधिक मामले आये, उन राज्यों से उत्तराखण्ड आने वाले लोगों को कोविड नेगेटिव रिपोर्ट लाने पर ही प्रवेश दिया जा रहा है। हरिद्वार कुंभ राज्य के लिए एक बड़ी चुनौती है, कुंभ में केन्द्र सरकार की कोविड गाईडलाईन का पूरा पालन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री से राज्य को जल्द 05 लाख और कोविड वैक्सीन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया।
इस अवसर पर वर्चुअल माध्यम से विभिन्न राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, स्वास्थ्य सचिव भारत सरकार राजेश भूषण आदि उपस्थित थे।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसस) के सह-सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले को सर्वसम्मति से संगठन का नया सरकार्यवाह चुना गया है। वे सुरेश (भैय्याजी) जोशी का स्थान लेंगे।
बेंगलुरु में संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की दो दिवसीय बैठक के अंतिम दिन शनिवार को होसबाले के नाम पर मुहर लगी। वे वर्ष 2009 से संघ के सह-सरकार्यवाह के दायित्व का निर्वहन कर रहे थे। संघ में सरसंघचालक के बाद
दूसरा सबसे महत्पूर्ण पद सरकार्यवाह (महासचिव) का होता है।
प्रत्येक तीन वर्ष में होता है चुनाव
संघ में सरसंघचालक के पद पर नियुक्त व्यक्ति आजीवन पद पर बने रहते हैं। किसी अपरिहार्य परिस्थिति में वे अपने उत्तराधिकारी का चयन स्वयं करते हैं। मगर सरकार्यवाह के पद पर प्रत्येक 3 वर्ष में अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में चुनाव होता है। निवर्तमान सरकार्यवाह भैय्याजी जोशी इस पद पर लगातार चार बार निर्वाचित हुए।
Bangaluru : Akhil Bharatiya Pratinidhi Sabha of RSS elected Shri Dattatreya Hosabale as its ‘Sarkaryavah’. He was Sah Sarkaryavah of RSS since 2009. pic.twitter.com/ZZetAvuTo4
— RSS (@RSSorg) March 20, 2021
कौन हैं दत्तात्रेय होसबाले
संघ के नए सरकार्यवाह नियुक्त हुए दत्तात्रेय होसबाले की पहचान एक विचारक के रूप में होती है। उनका का जन्म 1 दिसंबर 1954 में कर्नाटक के शिमोगा जिले के होसबाले गांव में हुआ। उन्होंने बेंगलूरु यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी में स्नातकोत्तर तक की शिक्षा ग्रहण की।
13 वर्ष की आयु में बने संघ के स्वयंसेवक
होसबाले 1968 में 13 वर्ष की आयु में संघ के स्वयंसेवक बने और 1972 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् से जुड़े। वर्ष 1978 में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल करने के पश्चात पूर्णकालिक बने। विद्यार्थी परिषद में विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करने के पश्चात वे वर्ष 1992 से 2003 तक 11 वर्षों तक राष्ट्रीय संगठन मंत्री रहे। वे वर्ष 2003 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह-बौद्धिक प्रमुख बने और वर्ष 2009 में सह-सरकार्यवाह के पद पर नियुक्त हुए।
आपातकाल में 14 माह तक जेल रहे
होसबाले 1975 में आपातकाल के दौरान चले आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई और लगभग 14 माह तक ‘मीसा’ के अंतर्गत जेल में रहे।
कई भाषाओं के हैं ज्ञाता
होसबाले अपनी मातृभाषा कन्नड़ के अतिरिक्त अंग्रेजी, तामिल, मराठी, हिंदी व संस्कृत सहित अनेक भाषाओं के ज्ञाता हैं। वे कन्नड़ मासिक पत्रिका असीमा के संस्थापक संपादक भी रहे।
होसबाले भारत में पढ़ रहे विदेशी छात्रों का संगठन विश्व विद्यार्थी युवा संगठन (WOSY) के संस्थापक महामंत्री रहे।उन्होंने अमेरिका, यूरोप सहित विश्व के अनेक देशों का भ्रमण किया है।
कार्यकारिणी में हुआ ये बड़ा बदलाव
डॉ. कृष्ण गोपाल, डॉ. मनमोहन वैद्य, सीआर मुकुंद, अरुण कुमार, रामदत्त चक्रधर को सह-सरकार्यवाह की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
राम लाल को अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख, सुनील अम्बेकर को अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख व आलोक कुमार को अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नियुक्त किया गया है।
निवर्तमान सरकार्यवाह सुरेश भैय्याजी जोशी, निवर्तमान सह-सरकार्यवाह सुरेश सोनी व वी भगैया, सुहास राव हिरेमथ, इंद्रेश कुमार, प्रो अनिरुद्ध देशपांडे व उदय कुलकर्णी को केंद्रीय कार्यकारिणी मंडल का सदस्य बनाया गया है। इसके साथ ही भाजपा में राष्ट्रीय महामंत्री रहे राम माधव को भी कार्यकारिणी मंडल में रखा गया है।
यह भी पढ़िए – आरएसस की सर्वोच्च इकाई अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक शुक्रवार से बेंगलुरु में, संघ को मिल सकते हैं नए सरकार्यवाह
तीन वर्ष में एक बार आयोजित होने वाली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की सर्वोच्च इकाई अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की दो दिवसीय बैठक 19 व 20 मार्च को बेंगलुरु में आयोजित होगी। बैठक में संघ की पिछली तीन साल की गतिविधियों व कार्यक्रमों और आगामी तीन वर्षों का रोडमैप तय किया जाएगा। बैठक में नए सरकार्यवाह के चुनाव की प्रक्रिया भी संपन्न होगी।
संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख अरुण कुमार ने बेंगलुरु में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में कहा कि हर तीन साल में हम कार्य की समीक्षा करते हैं। पिछले तीन वर्षों संघ कार्य के विस्तार, ग्राम विकास, पर्यावरण संरक्षण (विशेषकर जल संरक्षण, पौधारोपण, प्लास्टिक का कम से कम उपयोग), सामाजिक परिवर्तन को लेकर योजना तय की थी। प्रतिनिधि सभा में तीन साल में किए कार्य को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा होगी कि हम कहां तक पहुंच पाए। सामाजिक परिवर्तन (सोशल ट्रांसफ़ॉर्मेशन) के कार्य में कितना आगे बढ़ सके। इसके साथ ही आने वाले तीन सालों की योजना पर भी चर्चा होगी, हमारी दिशा क्या होनी चाहिए, इस पर भी बैठक में चर्चा होगी।

पत्रकार वार्ता करते हुए संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख अरुण कुमार
उन्होंने बताया कि प्रतिनिधि सभा की बैठक पिछले वर्ष आयोजित होनी थी। मगर कोरोना महामारी के चलते बैठक स्थगित कर दी गयी थी। प्रतिनिधि सभा में 1500 लोग अपेक्षित रहते हैं, लेकिन कोरोना का संकट अभी समाप्त नहीं हुआ है। इसलिए 450 प्रतिनिधियों को ही बैठक में बुलाया गया है। साथ ही तीन दिन के बजाय बैठक दो दिन की रखी गयी है। उन्होंने कहा कि संघ कार्य की दृष्टि से 44 प्रांत बनाए हैं। इन प्रांतों के संघ के निर्वाचित प्रतिनिधि व अन्य लगभग 1000 लोग 44 स्थानों से ऑनलाइल माध्यम से बैठक में जुड़ेंगे।
उन्होंने कहा कि कोरोना काल के एक साल में भले ही संघ की प्रतिदिन की गतिविधियां कम थीं। मगर संघ के स्वयंसेवकों व कार्यकर्ताओं ने लगातार समाज से व्यापक संपर्क बनाए रखा। इस दौरान अनेक सामाजिक- धार्मिक संगठन, समाज के लिए कार्य करने वाले लोग हमारे निकट आए, हमसे जुड़े, हम अनेक नए स्थानों पर पहुंचे। इन सभी को साथ लेकर समाज जागरूकता के लिए क्या-क्या कर सकते हैं, इसे लेकर भी बैठक में चर्चा होगी।
संघ को मिल सकते हैं नए सरकार्यवाह

यहां यह भी बता दें कि संघ के सबसे बड़े दूसरे पद सरकार्यवाह का हर तीन साल में चुनाव होता है। 20 मार्च को सरकार्यवाह के चुनाव की प्रक्रिया संपन्न होगी। सूत्रों के अनुसार संघ के वर्तमान सरकार्यवाह सुरेश (भय्या जी) जोशी अपनी आयु को देखते हुए पद को छोड़ना चाहते हैं। ऐसा माना जा रहा है कि इस बैठक में उनके उत्तराधिकारी का भी चुनाव होगा।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सह सरकार्यवाह डॉ. मनमोहन वैद्य ने कहा कि हमारे देश में सेक्युलर शब्द बहुत प्रचलित है। सेक्युलर शब्द विदेशी अवधारणा से उत्पन्न हुआ है। रोम के थियोक्रेटिक स्टेट (धर्मसत्ता) के कार्यकाल में उत्पन्न हुआ यह शब्द भारत में प्रासंगिक नहीं है।
गुजरात के कर्णावती में माधव स्मृति न्यास द्वारा धर्मचक्र प्रवर्तनाय विषय पर आयोजित दो दिवसीय व्याख्यान के समापन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ वैद्य ने कहा कि सूरत के केटी शाह ने संविधान सभा में प्रस्ताव दिया था कि भारत को सेक्युलर सोशलिस्ट रिपब्लिक कहा जाए। लेकिन उस समय के विद्वानों ने शाह का यह प्रस्ताव नामंजूर किया था। तत्कालीन विद्वानों का मानना था कि भारतीय सभ्यता में इस शब्द की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि भारतीय समाज और सभ्यता सभी को स्वीकार करती है।
सेक्युलर शब्द की उत्पत्ति पर डॉ. वैद्य ने कहा कि कहा कि कबिलों में बंटा यूरोपियन समाज सबसे पहले तीसरी शताब्दी में रोमन साम्राज्य के विस्तार के साथ एक छत के नीचे आया। यरूशलम से चलने वाली पोप की सत्ता खिसक कर वेटिकन में चली गई। वहीं राजा के आश्रय के कारण बिशप का महत्त्व बढ़ गया था। छठी शताब्दी में रोमन साम्राज्य समाप्त होने के बाद समाज को जोड़े रखने के लिए सत्ता पोप के हाथों में आई। पोप द्वारा चलाए जाने वाले इस राज्य को थियोक्रेटिक स्टेट कहा जाता था। यह राज्य लगभग एक हजार वर्ष तक बरकरार रहा। तत्कालीन रोमन समाज के लोग भौतिक चीजों को धर्म सत्ता से दूर रखना चाहते थे। नतीजतन धर्म से जुड़ी व्यवस्था के लिए रिलीजन और अन्य चीजों के लिए सेक्युलर शब्द का इस्तेमाल किया जाने लगा।
सह सरकार्यवाह ने कहा कि भारत में आपातकाल के दौरान 1976 में बिना चर्चा के भारतीय संविधान में 42वां संशोधन किया गया। इस संशोधन के तहत संविधान की प्रस्तावना में बेवजह सेक्युलर शब्द जोड़ा गया। संविधान के जानकार कहते हैं कि, संविधान की प्रस्तावना में कोई बदलाव नहीं हो सकता, इसके बावजूद प्रस्तावना में सेक्युलर शब्द अनावश्यक रूप से जोडा गया।
डॉ.वैद्य ने कहा कि सेक्युलर शब्द को भारत में जिस तरह से परिभाषित किया गया, वह अपने आप में विचित्र है। उन्होंने कई उदाहरण देते हुए बताया कि, हिन्दू धर्म और आस्था की बात करना हमारे देश में सांप्रदायिक माना जाता है। अन्य धर्मों के लोगों द्वारा मजार पर चादर चढ़ाना सेक्युलर है। लेकिन मंदिर में घंटी बजाना सांप्रदायिकता कहलाता है। भारतीय सेक्युलरिज्म के तहत आप ओवैसी के साथ मंच साझा कर सकते हैं। लेकिन, योगी आदित्यनाथ के साथ मंच पर बैठे तो आप को सांप्रदायिक कहा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि दुनिया के किसी भी मुस्लिम देश में हज यात्रा के लिए सब्सिडी नहीं दी जाती। लेकिन सेक्युलर कहलाने वाले भारत में हज पर सब्सिडी मिलती है। प्रधानमंत्री रहते हुए डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत के संसाधनों पर पहला हक अल्पसंख्यक समुदाय का है। प्रधानमंत्री का यह वाक्य अपने-आप में सांप्रदायिक था। लेकिन सेक्युलर देश में किसी ने उस वाक्य पर आपत्ति दर्ज नहीं कराई।
धर्म की परिभाषा पर डॉ. वैद्य ने कहा कि
धारणात धर्मं इत्याहू: तस्मात् धारयते प्रजाः।
यः स्यात् धारणसंयुक्तः स धर्म इति निश्चयः।।
अर्थात जो धारण करता है, एकत्र करता है, उसे धर्म कहते हैं। उपासना और अध्यात्म धर्म से जुड़ा होता है। नतीजतन कई लोग उपासना पद्धति को धर्म मान लेते हैं। लेकिन धर्म की परिभाषा इतनी सीमित नहीं है। हमारे देश की संसद में धर्मचक्र प्रवर्तनाय लिखा हुआ है। व्यक्ति से समाज को जोड़ने का नाम धर्म है। हमारे राष्ट्रध्वज में जो चक्र है, उसे लोग अशोक चक्र कहते हैं। वास्तव में यह धर्मचक्र है, जिसे सम्राट अशोक ने स्वीकारा था। समाज में दूसरों के प्रति योगदान देना, मैं से हम तक की यात्रा का नाम धर्म है। धर्म के इस विस्तारित अर्थ को ध्यान में रख कर हमें धर्मचक्र को गतिमान रखने में योगदान देना चाहिए।
