नशा मुक्ति के संकल्प के साथ युवाओं ने लगाई दौड़ : कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने किया मैराथन का शुभारंभ
देहरादून: कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने आज परेड ग्राउंड देहरादून में दून यूथ फाउंडेशन द्वारा नशे के खिलाफ थीम पर आयोजित मैराथन का शुभारंभ किया। उन्होंने 10 किमी दौड़ को फ्लैग ऑफ करते हुए युवाओं में उत्साह का संचार किया।
इस अवसर पर मंत्री जोशी ने कहा कि स्वस्थ समाज के लिए प्रत्येक व्यक्ति का निरोगी होना अनिवार्य है। जीवन के सभी सुख और सफलता निरोगी काया से ही संभव हैं। उन्होंने कहा कि स्वस्थ मन, वचन और कर्म के लिए शरीर का तंदुरुस्त होना जरूरी है।

मंत्री जोशी ने युवाओं से “ड्रग्स फ्री उत्तराखंड” का संकल्प लेने का आह्वान किया और कहा कि नशा न केवल व्यक्ति बल्कि पूरे समाज को कमजोर करता है। उन्होंने शारीरिक व्यायाम को दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने की सलाह दी और नशे के दुष्प्रभावों के बारे में प्रतिभागियों को जागरूक किया।

कार्यक्रम के अंत में कैबिनेट मंत्री ने मैराथन में विजेताओं को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन भी किया। इस अवसर पर कैंट विधायक सविता कपूर, सिकंदर, पूनम नौटियाल, गौरव डंगवाल सहित कई लोग उपस्थित रहे।
जौनसार एसटी क्षेत्र नहीं, नेताओं की ठगी से ठगा जौनसार, बेरोज़गारों के हक पर पड़ा डाका – एडवोकेट विकेश सिंह नेगी का खुलासा
राष्ट्रपति के 24 जून 1967 के आदेश का हो रहा खुल्ला उलंघन, जारी हो रहे गैरकानूनी तरीके से ST सर्टिफिकेट – एडवोकेट विकेश सिंह नेगी
देहरादून: आरटीआई एक्टिविस्ट एडवोकेट विकेश नेगी ने दावा किया है कि जौनसार अनुसूचित जनजाति क्षेत्र नहीं है। इस क्षेत्र को कोई एसटी का दर्जा नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में महज पांच ही जनजातियां हैं। ऐसे में जौनसार के ब्राह्मण, राजपूत और खस्याओं को आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए। इन जातियों को निर्गत किये गये अनुसूचित जनजाति के प्रमाणपत्र अवैध हैं। एडवोकेट नेगी कहा कि जौनसार के नेताओं वहां की जनता को छला है। इसका खमियाजा प्रदेश के बेरोजगार भुगत रहे हैं। नेताओं की जालसाजी के कारण प्रदेश के सामान्य वर्ग के युवाओं के हकों पर डाका पड़ा है।
“लोकुर समिति रिपोर्ट” के अनुसार
आरटीआई एक्टिविस्ट एडवोकेट विकेश नेगी ने दस्तावेजों के आधार पर कहा है कि जौनसार को अनुसूचित जनजाति का दर्जा हासिल नहीं है। उन्होंने कहा कि 1965 में भारत सरकार द्वारा डेप्लवमेंट ऑफ सोशल सोसायटी दिनांक 25 अगस्त 1965 में बीएन लोकुर की अध्यक्षता में लोकुर समिति का गठन किया गया। इसे सामान्यतः “लोकुर समिति रिपोर्ट” कहा जाता है। भारत सरकार ने 1965 में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की सूची का पुनरीक्षण करने के लिए एक समिति गठित की थी। इस समिति का कार्य था कि 1950 के राष्ट्रपति आदेशों (अनुसूचित जाति आदेश 1950 एंव अनुसूचित जनजाति आदेश 1950) की समीक्षा करे और यह देखे कि किन जातियों/जनजातियों को सूची में शामिल या बाहर किया जाना चाहिए। समिति ने अपने कार्य में भौगोलिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक आधारों पर विचार किया। उत्तर प्रदेश (जिसमें उस समय उत्तराखंड भी सम्मिलित था) के संदर्भ में लोकुर समिति ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जनजातियों की स्थिति बहुत सीमित है। समिति ने कुछ ही जनजातियों को मान्यता देने की संस्तुति की, क्योंकि बाकी जनसंख्या सामान्य जातियों में आती थी। राष्ट्रपति के 24 जून 1967 के आदेश में उत्तर प्रदेश (वर्तमान उत्तराखंड सहित) के लिए केवल पाँच जनजातियों को अनुसूचित जनजाति घोषित किया गया। 24 जून 1967 के आदेश के अनुसार उत्तर प्रदेश (उत्तराखंड सहित) में केवल पाँच जनजातियाँ (भोटिया, बुक्सा, जनसारी, राजी और थारू) एसटी हैं। अतः राजस्व अधिकारी इन्हीं पाँच जातियों को प्रमाणपत्र जारी करने की अनुशंसा कर सकते हैं।
उत्तराखंड में एसटी के रूप में पाँच जनजातियाँ मान्य
वर्तमान उत्तराखंड के परिप्रेक्ष्य में जब 2000 में उत्तराखंड राज्य बना तो अनुसूचित जनजातियों की वही सूची लागू हुई जो पहले उत्तर प्रदेश में लागू थी। यानी आज भी उत्तराखंड में एसटी के रूप में यही पाँच जनजातियाँ मान्य हैं। बाद में कुछ केंद्र सरकार की समितियों (जैसे कर्मा आयोग, 2002 और अन्य सामाजिक न्याय मंत्रालय की सिफारिशें) ने एसटी सूची विस्तार पर विचार किया, परंतु संसद द्वारा संविधान (अनुसूचित जनजातियाँ) आदेश में संशोधन किए बिना कोई नई जाति इसमें नहीं जुड़ सकती। किसी नई जाति/उपजाति को एसटी मानने के लिए संसद में विधेयक पारित करना आवश्यक है।

ब्राह्मण, राजपूत और खस्याओं को नहीं मिलना चाहिए लाभ-नेगी
राष्ट्रपति के अध्यादेश में स्पष्ट किया गया है कि 24 जून 1967 से पहले जौनसार में रहने वाले ब्राह्मण, राजपूत और खस्याओं को छोड़कर अन्य जौनसर जाति को ही अनुसूचित जनजाति का लाभ मिलेगा। एडवोकेट नेगी के अनुसार अध्यादेश में जानसर टाइपिंग मिस्टेक होने का लाभ उठाते हुए इसे जौनसारी कर दिया दिया गया और इसका लाभ वहां के समस्त लोग उठा रहे हैं। जबकि यह गैर कानूनी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को किसी भी क्षेत्र को अनुसूचित जनजाति क्षेत्र घोषित करने का अधिकार नहीं है। सरकार इसके लिए प्रस्ताव बनाकर केंद्र को भेजेगी और यह प्रस्ताव संसद से पास होने के बाद ही राष्ट्रपति को मंजूरी के बाद अस्तित्व में आएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के नेता इस मामले में जनता को अब तक भ्रमित करते चले आ रहे हैं।
ब्राह्मणों और स्वर्ण राजपूतों को जारी हो रहे हैं सर्टिफिकेट गैरकानूनी
एडवोकेेट नेगी का तर्क है कि 1967 के बाद कोई भी अध्यादेश जारी नहीं किया गया है। इसके अलावा संसद में भी अनुसूचित जनजाति क्षेत्र का कोई विधेयक पारित नहीं हुआ है। आर्टिकल 244 में शेड्यूल पांच और छह में उत्तराखंड को कही भी एसटी का दर्जा नहीं दिया गया है। ऐसे में जौनसार क्षेत्र में जितने भी सर्टिफिकेट ब्राह्मणों और स्वर्ण राजपूतों को जारी हो रहे हैं वो गैरकानूनी हैं। इसका खमियाजा प्रदेश के सामान्य श्रेणी के अभ्यर्थियों को भुगतना पड़ रहा है। आरक्षण के नाम पर जौनसार के नेता जनता को गुमराह कर राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं।
1982 में तैयार की गई पुस्तिका में दिशा-निर्देश बिस्तार से
भारत सरकार कार्मिक और प्रशासनिक सुधार विभाग गृह मंत्रालय नई दिल्ली द्वारा 1982 में तैयार की गई पुस्तिका (ब्रोशर) विशेष रूप से सरकारी सेवाओं में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण से संबंधित दिशा-निर्देश विस्तार से दिये गये हैं। लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि राज्य में उनका किसी भी प्रकार से कोई पालन नहीं हो रहा है। इसमें कहा गया है कि अनुसूचित जाति/जनजाति का प्रमाणपत्र केवल वही अधिकारी जारी कर सकते हैं जिन्हें राज्य सरकार द्वारा “सक्षम प्राधिकारी” घोषित किया गया है (जैसे उपजिलाधिकारी/तहसीलदार)। प्रमाणपत्र जारी करने से पहले यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि आवेदनकर्ता का नाम/जाति राजस्व अभिलेखों या अन्य प्रामाणिक दस्तावेज़ों में दर्ज हो। राजस्व अधिकारियों की भूमिका लेखपाल, पटवारी, राजस्व निरीक्षक आदि की जिम्मेदारी है कि वे आवेदक के अभिलेखों की पड़ताल करें और यह प्रमाणित करें कि संबंधित व्यक्ति वास्तव में अधिसूचित जाति या जनजाति से संबंध रखता है। दि राजस्व रिकॉर्ड उपलब्ध न हों तो अन्य विश्वसनीय साधनों से जाँच की जाए। प्रमाणपत्र उसी व्यक्ति को मिलेगा जो राष्ट्रपति की अधिसूचना 24 जून 1967 का आदेश में उल्लिखित जाति/जनजाति से संबंध रखता हो और उसी राज्य/क्षेत्र का स्थायी निवासी हो। यदि कोई व्यक्ति किसी दूसरे राज्य में रहता है, तो वहाँ उसे केवल उसी स्थिति में एससी/एसटी माना जाएगा यदि उस राज्य की अधिसूचना में उसकी जाति सूचीबद्ध है।
यह भी बता दें कि संसद में 2003 और 2022 में पूछे गये एक सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने भी माना है कि जौनसार एसटी क्षेत्र नहीं है। उन्होंने लोकसभा में 12 दिसम्बर 2022 को पूछे गये प्रश्न संख्या 786 का हवाला देते हुए कहा कि सरकार ने इसके जवाब में कहा कि पूरे भारत में 700 प्लस अनुसूचित जनजातियां अधिसूचित हैं। सदन में जानकारी दी गयी कि 1967 के बाद भी उत्तराखंड में सिर्फ भोटिया, बुक्सा, जौनसारी, राजी, थारू ही जनजाति हैं और इसमें कोई अन्य नई प्रविष्टि नहीं हुई है। एडवोकेट विकेश नेगी के मुताबिक 2003 में लोकसभा में भी इस संबंध में पूछे गये सवाल में यही उत्तर मिला था। लोकसभा में स्पष्ट कहा गया है कि उत्तराखंड में कोई भी अनुसूचित जनजाति क्षेत्र नहीं है। स्पष्ट है कि जौनसार में रहने वाले ब्राह्मणों और क्षत्रियो को आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए।
यह एक बड़ी राजनीतिक ठगी- विकेश सिंह नेगी
एडवोकेट नेगी के मुताबिक यह एक बड़ी राजनीतिक ठगी है। नेताओं ने जहां एक ओर जौनसार की जनता को ठगकर राजनीतिक सत्ता हासिल की तो वहीं प्रदेश के अन्य योग्य अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी से वंचित रखा। उन्होंने कहा कि जौनसार क्षेत्र को अनुसूचित जनजाति क्षेत्र नहीं कहा जा सकता है और न ही इसे यह दर्जा हासिल है। उन्होंने कहा कि एसटी श्रेणी से मिले सरकारी रोजगार वालों की जांच होनी चाहिए और यह नौकरियां योग्य अभ्यर्थियों को मिलनी चाहिए।
एडवोकेट नेगी ने कहा कि इस मामले की लड़ाई कानूनी रूप से लड़ी जायेगी, जरूरत पड़ी तो पूरे मामले को लेकर हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जायेंगे। इसके साथ वह जल्द संबंधित विभागों और केंद्र सरकार को भी शिकायत करेंगे, ताकि इस घोटाले की जांच हो सके।
उत्तरकाशी: दयारा बुग्याल में इस वर्ष पारंपरिक अंडुड़ी मेला (बटर फेस्टिवल) धराली आपदा के कारण तय तिथि से 20 दिन बाद आयोजित किया गया। रैथल और आसपास के ग्रामीणों ने परंपरा निभाते हुए दूध-दही, मक्खन की होली खेली और राधा-कृष्ण बने पात्रों ने दही की हांडी फोड़कर उत्सव का शुभारंभ किया।
परंपरा से जुड़ा पर्व
आमतौर पर दयारा पर्यटन समिति और ग्रामीण हर साल भाद्रपद संक्रांति के दिन यह मेला मनाते हैं। सावन में बुग्यालों में मवेशियों के साथ रहने वाले लोग दूध-दही और मक्खन एकत्र करते हैं, जिन्हें बाद में देवताओं और वनदेवियों को भोग स्वरूप अर्पित किया जाता है। इस बार आपदा के कारण केवल गांव के लोगों ने ही सीमित रूप से यह पर्व मनाया।
उत्सव और श्रद्धांजलि
शनिवार को आयोजित मेले में ढोल-दमाऊं की थाप पर ग्रामीणों ने रासो-तांदी किया और क्षेत्र की खुशहाली की कामना की। समिति अध्यक्ष मनोज राणा और सदस्य पृथ्वीराज राणा ने बताया कि आयोजन से पहले शुक्रवार शाम धराली आपदा में मारे गए लोगों की आत्मा की शांति के लिए श्रद्धांजलि सभा रखी गई।
सांस्कृतिक संध्या का आयोजन
मेले के समापन पर रैथल में सांस्कृतिक संध्या आयोजित हुई, जिसमें स्थानीय कलाकारों ने पारंपरिक प्रस्तुतियों से माहौल को भक्तिमय और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर कर दिया।
देहरादून: आज लगने वाले चंद्रग्रहण के चलते चारों धाम बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री सहित प्रदेशभर के प्रमुख मंदिरों के कपाट निर्धारित समय पर बंद कर दिए जाएंगे। ग्रहण काल के दौरान पूजा-अर्चना और दर्शन पूरी तरह से स्थगित रहेंगे।
बीकेटीसी के मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश चंद्र गौड़ ने बताया कि चंद्रग्रहण रविवार रात 9:56 बजे शुरू होगा। सूतक काल नौ घंटे पहले से प्रभावी हो जाने के कारण बदरीनाथ और केदारनाथ धाम के कपाट रविवार दोपहर 12:58 बजे ही बंद कर दिए जाएंगे। इस अवधि में सांयकालीन आरती भी नहीं होगी।
सोमवार से फिर शुरू होंगे दर्शन
ग्रहण समाप्त होने के बाद सोमवार को गर्भगृह की शुद्धि और धार्मिक परंपराओं के निर्वहन के बाद श्रद्धालु पुनः पूजा-अर्चना और दर्शन कर सकेंगे। ज्योतिर्मठ के नृसिंह मंदिर, पांडुकेश्वर स्थित योग बदरी, भविष्य बदरी, पंचकेदार गद्दीस्थल ओंकारेश्वर, विश्वनाथ मंदिर, त्रियुगीनारायण और कालीमठ मंदिर भी ग्रहणकाल तक बंद रहेंगे।
गंगोत्री और यमुनोत्री धाम भी रहेंगे बंद
गंगोत्री धाम मंदिर समिति के सचिव सुरेश सेमवाल ने बताया कि गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट भी सूतक काल से बंद कर दिए जाएंगे। इसी तरह काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत अजय पुरी ने कहा कि वाराणसी में भी कपाट सोमवार सुबह तक बंद रहेंगे।
हरिद्वार में दोपहर को ही गंगा आरती
हरिद्वार की हरकी पैड़ी पर रविवार दोपहर में ही गंगा आरती सम्पन्न करा दी जाएगी। इसके बाद मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे और सोमवार को पुनः आरती आयोजित होगी।
भारी बारिश से कमजोर हुई पहाड़ों की धरातलीय संरचना, कई जिलों में भू-धंसाव से बढ़ा खतरा
देहरादून: इस साल हुई भारी बारिश ने उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों की भू-आकृतियों को कमजोर कर दिया है। नतीजतन चमोली के नंदानगर से लेकर टिहरी, रुद्रप्रयाग, पौड़ी और उत्तरकाशी तक कई गांवों, कस्बों और शहरों में भू-धंसाव और भूस्खलन की घटनाओं ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
गोपेश्वर के क्यूंजा घाटी स्थित किणझाणी गांव के खेतों में दरारें आ चुकी हैं, जबकि टिहरी जिले के घुत्तू क्षेत्र के कनियाज और भाटगांव में मकानों की दीवारें फट गई हैं। गढ़वाल विश्वविद्यालय क्षेत्र और रुद्रप्रयाग के कुछ इलाकों में भी जमीन खिसकने की घटनाएं सामने आई हैं।
वैज्ञानिकों की चेतावनी
गढ़वाल विवि भूगर्भ विज्ञान विभाग के प्रो. वाईपी सुंद्रियाल के अनुसार, पहाड़ों में तीन प्रकार की भू-आकृतियां होती हैं – नदी-नालों के मलबे पर बनी, ग्लेशियर आपदा के मलबे पर बनी और गुरुत्वाकर्षण से प्रभावित ढलानों पर बनी। भारी बारिश के कारण इन मलबों के नीचे की मिट्टी व पत्थर खिसकते हैं, जिससे भू-धंसाव तेजी से बढ़ रहा है।
डीबीएस कॉलेज के पूर्व प्राचार्य व भूगर्भ विज्ञानी डॉ. ए.के. बियानी का कहना है कि नदियों के रुख बदलने और निर्माणाधीन भवनों के पास से रिसते पानी ने हालात को और गंभीर बना दिया है। उनका कहना है कि केवल वैज्ञानिक पैमानों पर आधारित विकास ही इन खतरों से बचाव का रास्ता खोल सकता है।
बदलते मौसम के असर
विशेषज्ञों ने यह भी चेताया है कि पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) की प्रकृति में बदलाव आया है। पहले यह सर्दियों में हिमालय पर बारिश और बर्फबारी का कारण बनता था, लेकिन अब मानसून सीजन में भी सक्रिय हो रहा है। बंगाल की खाड़ी से आने वाली हवाओं और हिमालय से टकराने वाली ठंडी हवाओं के मेल से वेस्टर्न हिमालय पर कम दबाव का क्षेत्र बन रहा है, जिससे बादल फटने और बाढ़ जैसी आपदाओं का खतरा बढ़ गया है।
देहरादून का ऐतिहासिक घण्टाघर अब नए स्वरूप में जगमगाया
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया सौंदर्यीकरण और स्वचालित प्रकाश व्यवस्था का लोकार्पण
देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को शहर की पहचान माने जाने वाले ऐतिहासिक घण्टाघर का सौंदर्यीकरण, भव्य रूपांतरण और स्वचालित प्रकाश व्यवस्था का लोकार्पण किया। लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से इस धरोहर को आधुनिक स्वरूप दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि घण्टाघर अब रात्रि में भी जीवंत दिखाई देगा और शहर की नाइटलाइफ को नया आकर्षण प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल पर्यटकों को आकर्षित करेगी, बल्कि नागरिकों में स्वच्छता, संरक्षण और अपने शहर के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी विकसित करेगी।
महिला सशक्तिकरण और सामाजिक पहल की नई दिशा
हिलांस आउटलेट्स व बाल भिक्षावृत्ति निवारण कार्यक्रम की शुरुआत
मुख्यमंत्री ने घण्टाघर क्षेत्र में महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए निर्मित चार “हिलांस-कम-किचन आउटलेट्स” का भी लोकार्पण किया। साथ ही कलेक्ट्रेट, कोरोनेशन अस्पताल, गुच्चुपानी और आईएसबीटी में हिलांस कैंटीनों की शुरुआत की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये आउटलेट्स न केवल सस्ती व गुणवत्तापूर्ण वस्तुएँ उपलब्ध कराएँगे बल्कि महिलाओं को स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में सशक्त बनाएँगे।
उन्होंने बाल भिक्षावृत्ति निवारण अभियान का भी उल्लेख किया, जिसके तहत अब तक 82 बच्चों को रेस्क्यू कर शिक्षा से जोड़ा गया है। साधूराम इंटर कॉलेज में डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से इंटेंसिव केयर सेंटर भी स्थापित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि देहरादून में 14 सौ करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाएँ प्रगति पर हैं। इनमें इलेक्ट्रिक बस सेवा, 11 चार्जिंग स्टेशन, भूमिगत पार्किंग और रिस्पना-बिंदाल नदियों पर एलिवेटेड रोड का निर्माण प्रमुख हैं।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, सुबोध उनियाल, विधायक खजान दास, प्रशासनिक अधिकारी, व्यापारी वर्ग और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को थाना डालनवाला परिसर में स्थापित 13 लॉन्ग रेंज आधुनिक सायरनों का लोकार्पण किया। यह पहल उत्तराखंड की आपदा प्रबंधन प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड भूस्खलन, बादल फटना, बाढ़ और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के लिए संवेदनशील राज्य है। ऐसे में समय रहते सतर्कता और सूचना प्रसारण जन-जीवन की सुरक्षा में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि 8 किलोमीटर और 16 किलोमीटर तक की रेंज वाले ये सायरन न केवल आपदा की स्थिति में समय पर चेतावनी देंगे, बल्कि राहत एवं बचाव कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने में भी सहायक होंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस प्रणाली का नियमित परीक्षण किया जाए और जनता को इसके उपयोग के प्रति जागरूक किया जाए।
आपदा राहत कोष में मिली सहायता, बाल थाने का भी किया निरीक्षण
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने उत्तराखंड पुलिस और आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा संयुक्त रूप से किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। इस अवसर पर सेवानिवृत्त पुलिस कार्मिकों, उत्तराखंड पीसीएस एसोसिएशन और पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों द्वारा मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष में सहायता राशि के चेक भेंट किए गए।
मुख्यमंत्री ने डालनवाला थाने में स्थापित बाल थाने का भी निरीक्षण किया। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, सुबोध उनियाल, विधायक खजान दास, पुलिस महानिदेशक, आपदा प्रबंधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, जिलाधिकारी देहरादून, स्थानीय जनप्रतिनिधि और अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
सख्त नकल विरोधी कानून के बाद नहीं हुआ भर्ती परीक्षा पेपरलीक
मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन एवं वैश्विक रोजगार योजना से विदेश में रोजगार
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के चार साल के कार्यकाल में रिकॉर्ड 25 हजार युवाओं का चयन सरकारी सेवा में हुआ है। इसी क्रम में शनिवार को जनजाति कल्याण विभाग के राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालयों में चयनित 15 सहायक अध्यापकों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए।
04 जुलाई 2021 को कार्यभार ग्रहण करने के बाद, धामी सरकार ने युवाओं को रोजगार और स्किल प्रदान करने पर विशेष तौर पर फोकस किया। इस दौरान लोक सेवा आयोग, उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग, चिकित्सा सेवा चयन आयोग के जरिए 25 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में स्थायी रोजगार प्रदान किया जा चुका है। उत्तराखंड लोकसेवा आयोग, अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड के स्तर पर अभी कई विभागों की भर्ती प्रक्रिया जारी है। कुछ मामलों में जल्द ही अंतिम चयन संस्तुति की जाने वाली है, इस कारण कुल स्थायी नौकरियों का यह आंकड़ा अभी और बढ़ने वाला है।
विदेश में रोजगार के मौके
मौजूदा सरकार ने साल 9 नवंबर 2022 से मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन एवं वैश्विक रोजगार योजना शुरु की है, इसके लिए युवाओं को आतिथ्य, नर्सिंग, ऑटोमोबाइल के क्षेत्र में प्रशिक्षण प्रदान करते हुए जर्मनी और जापान में रोजगार प्रदान किया जा रहा है। योजना के तहत अब तक 154 युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है, जिसमें से 37 को जापान में रोजगार प्रदान किया जा चुका है।
सख्त कानून से आई पारदर्शिता
धामी सरकार ने 2024 में सख्त नकल विरोध कानून लागू करते हुए, नकल माफिया की कमर तोड़ने का काम किया है। इसके बाद से एक भी परीक्षा में पेपरलीक नहीं हुआ है, यही नहीं धामी सरकार पेपर लीक में शामिल 100 से अधिक माफिया का जेल भी भेज चुकी है।
सरकार युवाओं के लिए शिक्षा, कौशल के जरिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही है। हमारा प्रयास है कि उत्तराखंड का पानी और जवानी, यहीं के काम आए। युवा पलायन करने के बजाय, रोजगार प्रदान करने वाले बने।
महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने डीबीटी किया 3 महीने का पैसा
देहरादून। शनिवार को महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के तहत लाभार्थियों को 4 करोड़ 47 लाख रुपए से ज्यादा की धनराशि जारी की।
कैंप कार्यालय पर धनराशि लाभार्थियों की खातों में डीबीटी करने के बाद कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि इस योजना में प्रदेश सरकार 2020 से ही कोरोना महामारी के समय अभिभावकों को खो देने वाले बेसहारा बच्चों को प्रति माह ₹3000 की सहायता राशि देती है। इस योजना के तहत मई 25 तक का धन पहले ही जारी कर दिया गया था।
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि जून में 5308 लाभार्थियों को कुल 1 करोड़ 59 लाख 24 हजार रुपए शनिवार को जारी किए गए हैं। जबकि जुलाई महीने के लिए कुल 5276 लाभार्थियों के 1 करोड़ 58 लाख 28 हजार रुपए की धनराशि जारी की गई है। इसके अलावा अगस्त महीने के लिए कुल 5242 लाभार्थियों को 1 करोड़ 57 लाख 26 हजार रुपए दिए गए हैं।
इस योजना के तहत लाभार्थी के 21 वर्ष के हो जाने या बालिका लाभार्थियों के विवाह या लाभार्थी के सेवायोजित हो जाने के बाद वह योजना से बाहर हो जाते हैं।
इस अवसर पर विभागीय निदेशक बंसी लाल राणा, सीपीओ अंजना गुप्ता और डिप्टी सीपीओ राजीव नयन आदि उपस्थित रहे।
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को जनजाति कल्याण विभाग के अन्तर्गत संचालित राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालयों में चयनित 15 सहायक अध्यापकों को नियुक्ति पत्र वितरित करने के साथ ही 15 करोड़ रुपए से अधिक लागत की विभिन्न विभागीय निर्माण योजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि ये सभी परियोजनाएँ न केवल जनजातीय समाज की आधारभूत सुविधाओं को सशक्त बनाने में सहायक सिद्ध होंगी, बल्कि नागरिकों को बेहतर सुविधाएं भी उपलब्ध कराएंगी। मुख्यमंत्री ने चयनित अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सभी युवा शिक्षक नई पीढ़ी के समग्र विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज जनजातीय समाज के उत्थान के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाए जा रहे हैं।
इस संबंध में सबसे अहम फैसला भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने का है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व की सरकारें केवल दिखावे के लिए ही आदिवासी समाज के विकास की बात किया करती थी, जबकि आज प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आदिवासी समाज के समग्र विकास के लिए धरातल पर नए – नए कार्य किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार ने जनजातीय समाज के विकास के लिए दिए जाने वाला बजट को पहले के मुकाबले 3 गुना तक बढ़ाया दिया है। वहीं जनजातीय समाज के लिए एकलव्य मॉडल स्कूल, प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान, वन धन योजना, प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन जैसी योजनाएं भी संचालित की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि “प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान“ के अंतर्गत उत्तराखंड के 128 जनजातीय गांवों का चयन किया गया है। आज हमारे राज्य में 4 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय कालसी, मेहरावना, बाजपुर व खटीमा में संचालित हो रहे हैं, जिसमें जनजातीय समुदाय के छात्रों को निशुल्क शिक्षा एवं हॉस्टल की सुविधा प्रदान की जा रही है।

इसी तरह सीमान्त जनपद पिथौरागढ में भोटिया तथा राजी जनजाति के शैक्षिक उन्नयन के लिये एकलव्य विद्यालय खोलने के लिए अभी हाल ही में केंद्र सरकार से अनुरोध किया गया है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार भी आदिवासी समाज के कल्याण के लिए अनेकों कार्य कर रही है। जहां एक ओर जनजातीय समाज के बच्चों को प्राइमरी स्तर से स्नातकोत्तर स्तर तक की कक्षाओं में छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है। वहीं, राज्य में 16 राजकीय आश्रम पद्वति विद्यालयों का संचालन भी किया जा रहा है। इसके साथ ही, जनजाति समाज के शिक्षित बेरोजगार युवक-युवतियों को तकनीकी शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रदेश में तीन आईटीआई संस्थानों का संचालन किया जा रहा है। जनजाति समाज के बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग की निःशुल्क व्यवस्था के साथ ही छात्रवृत्ति भी प्रदान की जा रही है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा के कार्यों से प्रेरणा लेकर राज्य सरकार भी उत्तराखंड के सांस्कृतिक मूल्यों और डेमोग्राफी को संरक्षित रखने के लिए संकल्पबद्ध होकर कार्य कर रही है। इसके लिए प्रदेश में सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून लागू किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने 9 हजार एकड़ से अधिक की सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया है। इसके साथ ही, उत्तराखंड में देश में सबसे पहले समान नागरिक संहिता कानून को लागू किया गया है, लेकिन जनजातियों की परम्पराओं रीति रिवाजों के संरक्षण के लिए सभी अनुसूचित जनजातियों को इस संहिता से बाहर रखा है। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने जनजातीय शोध संस्थान में सौन्दर्यीकरण तथा बालिकाओं के लिए हाईटेक शौचालय ब्लॉक का निर्माण, “आदि लक्ष्य संस्थान में डाइनिंग हॉल का निर्माण कराए जाने की घोषणा की है।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक खजान दास, उमेश शर्मा काऊ, सविता कपूर, दलीप सिंह रावत, प्रमोद नैनवाल, अध्यक्ष जनजाति आयोग श्रीमती लीलावती राणा, सचिव समाज कल्याण श्रीधर बाबू अद्दांकी, निदेशक जनजाति कल्याण संजय टोलिया, निदेशक समाज कल्याण चंद्र सिंह धर्मशक्तू एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित हुए।
