टिहरी गढ़वाल। उत्तराखंड के प्रसिद्ध सिद्धपीठ सुरकंडा देवी मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं को 23 अगस्त से 17 सितंबर तक थोड़ी कठिनाई का सामना करना पड़ेगा। मंदिर तक पहुँचने के लिए बनाई गई रोपवे सेवा को वार्षिक रख-रखाव और निरीक्षण के लिए 26 दिनों के लिए बंद कर दिया जाएगा।
इस संबंध में जानकारी देते हुए रोपवे सेवा के प्रबंधक सी.बी. सिंह और समन्वयक नरेश बिजल्वाण ने बताया कि 23 अगस्त शनिवार से लेकर अगले महीने 17 सितंबर तक टॉवर, केबिन, इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल सिस्टम की गहन जांच और मरम्मत का कार्य किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस निरीक्षण में देश और विदेश के विशेषज्ञ इंजीनियरों की टीम शामिल होगी, जो लोड कैपेसिटी, विंड प्रेशर, सुरक्षा मानकों समेत सभी तकनीकी पहलुओं की जांच करेगी।
श्रद्धालुओं को चढ़नी होगी डेढ़ किमी खड़ी चढ़ाई
रोपवे बंद रहने की अवधि में श्रद्धालुओं और पर्यटकों को मंदिर तक पहुंचने के लिए लगभग 1.5 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई करनी होगी। यह चढ़ाई बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगजनों के लिए थोड़ी मुश्किल हो सकती है। प्रबंधकों ने श्रद्धालुओं से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि यह कार्य उनकी सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखकर किया जा रहा है।
तीन गुना बढ़ी है श्रद्धालुओं की संख्या
बता दें कि रोपवे सेवा शुरू होने के बाद से सुरकंडा देवी मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या तीन गुना तक बढ़ चुकी है। खासकर बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए यह सेवा बेहद सहायक और सुलभ रही है। इस सेवा ने न केवल यात्रा को आसान बनाया है, बल्कि स्थानीय पर्यटन और रोजगार को भी बढ़ावा दिया है।
प्रबंधन का संदेश: असुविधा के लिए खेद, सहयोग अपेक्षित
रोपवे प्रबंधन ने कहा है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोपरि है, और सभी तकनीकी निरीक्षण पूर्ण होने के बाद ही सेवा को दोबारा शुरू किया जाएगा। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों से धैर्य और सहयोग बनाए रखने की अपील की है।
देहरादून- मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया से भेंट कर राज्य में खेलों के व्यापक विकास, उच्च स्तरीय खेल अवस्थापना के निर्माण तथा खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण एवं सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा की और केंद्र सरकार से सहयोग का अनुरोध किया।
मुख्यमंत्री ने 38वें राष्ट्रीय खेलों के सफल आयोजन में केंद्र सरकार से प्राप्त सहयोग के लिए प्रदेशवासियों की ओर से हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस खेल महाकुंभ ने उत्तराखण्ड को एक नई पहचान दिलाई है। इस आयोजन के माध्यम से उत्तराखण्ड ने स्वयं को एक ‘खेलभूमि’ के रूप में प्रस्तुत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से जिला अल्मोड़ा के डीनापानी में उच्च स्तरीय खेल सुविधा की स्थापना, देहरादून स्थित महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज परिसर में आईस स्केटिंग रिंग का संचालन, जिला नई टिहरी में साहसिक प्रशिक्षण केन्द्र का उच्चीकरण, चंपावत के महिला स्पोर्ट्स कॉलेज में इंडोर आर्टिफिशियल रॉक क्लाइम्बिंग की सुविधा और राज्य के 95 विकासखण्डों में बहुउद्देशीय क्रीड़ाहॉल के निर्माण के प्रस्ताव स्वीकृत किये जाने का अनुरोध किया।
मुख्यमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि उत्तराखण्ड में राज्य का प्रथम खेल विश्वविद्यालय स्थापित किया गया है, जो राज्य एवं देश के खिलाड़ियों को प्रशिक्षण के साथ-साथ खेल से संबंधित शैक्षणिक कोर्सेज़ की सुविधा भी प्रदान करेगा। उन्होंने इस विश्वविद्यालय को एक अग्रणी खेल संस्थान के रूप में विकसित करने हेतु केंद्र सरकार से आवश्यक सहयोग और यथासंभव आर्थिक सहायता/अनुदान प्रदान करने का आग्रह किया।
केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने हर सम्भव सहयोग के प्रति मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को आश्वस्त किया।
विधवा माला देवी को प्रताड़ित करने पर बैंक प्रबंधक पर ₹22 लाख की आरसी जारी
देहरादून। पति की मृत्यु के बाद भी ऋण बीमा लागू न करने और दो बच्चों की असहाय विधवा माता माला देवी को प्रताड़ित करने के मामले में जिला प्रशासन ने कड़ा कदम उठाया है। जिलाधिकारी सविन बंसल ने केनफिन होम लि0 की सम्पत्ति कुर्क कर दी है, जिसकी नीलामी 23 अगस्त को की जाएगी।
जिलाधिकारी ने बैंक की अमानवीय कार्यप्रणाली और मानसिक उत्पीड़न के मामले को गंभीर मानते हुए जीएमएस रोड स्थित केनफिन होम लि0 शाखा प्रबंधक पर ₹22 लाख की आरसी भी काटी है।
विधवा माला की शिकायत पर कार्रवाई
चुक्खुवाला निवासी माला देवी ने जिलाधिकारी से शिकायत की थी कि उनके पति स्व. उदय शंकर ने मकान खरीदने के लिए केनफिन लि0 से ₹20 लाख का ऋण लिया था, जिसका बीमा भी कराया गया था। अब तक ₹12.22 लाख की किस्तें जमा की जा चुकी थीं। 20 जनवरी 2025 को पति की मृत्यु हो जाने के बाद भी बैंक और बीमा कंपनी ने ऋण निपटाने की कार्रवाई नहीं की और उल्टा उन्हें परेशान किया जा रहा था, जिससे बच्चों की पढ़ाई भी बाधित हो रही थी।
जिलाधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री के संकल्प अनुसार जिला प्रशासन निर्बल जनों के अधिकारों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा। बैंकों द्वारा बीमा धोखाधड़ी और आश्रितों को प्रताड़ित करने की घटनाओं पर प्रशासन का कड़ा रुख जारी रहेगा।
पुलिस ने आरोपी नेता को लिया हिरासत में
पौड़ी। पौड़ी जनपद के तलसारी गांव में शुक्रवार सुबह एक युवक ने पैसों के लेनदेन के विवाद के चलते गोली मारकर आत्महत्या कर ली। मृतक ने आत्मघाती कदम उठाने से पहले एक वीडियो सोशल मीडिया पर जारी किया, जिसमें उसने भाजपा नेता पर गंभीर आरोप लगाए। वीडियो वायरल होने के बाद क्षेत्र में सनसनी फैल गई और पुलिस ने आरोपी नेता को गिरफ्तार कर लिया।
32 वर्षीय जितेंद्र सिंह नेगी पुत्र सतीश चंद्र ने अपने घर में खुद को गोली मार ली। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस व राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया, जबकि फॉरेंसिक टीम ने भी मौके से साक्ष्य एकत्र किए।
एसएसपी पौड़ी लोकेश्वर सिंह ने बताया कि प्रारंभिक जांच में आत्महत्या की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। लेकिन वायरल वीडियो के आधार पर भाजपा नेता हिमांशु चमोली को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
मुख्यमंत्री धामी ने प्रधानमंत्री मोदी एवं केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर का किया आभार व्यक्त
देहरादून। केंद्र सरकार ने उत्तराखण्ड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) की ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर परियोजना को स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस परियोजना के तहत एचटी/एलटी विद्युत लाइनों को भूमिगत किया जाएगा और साथ ही एससीएडीए (SCADA) ऑटोमेशन प्रणाली लागू की जाएगी।
परियोजना की कुल लागत ₹547.73 करोड़ है, जिसमें समानांतर जीबीएस ₹493.05 करोड़ और पी.एम.ए. शुल्क @ 1.5% यानी ₹8.22 करोड़ (जिसमें जीबीएस ₹7.39 करोड़) शामिल है।
इस योजना से ऋषिकेश के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता और सुरक्षा में सुधार होगा। साथ ही बिजली आपूर्ति की रीयल टाइम निगरानी और त्वरित सुधार संभव हो सकेगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस स्वीकृति पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि, “ऋषिकेश जैसे आध्यात्मिक, पर्यटन और कुंभ क्षेत्र के लिए यह परियोजना न केवल विद्युत व्यवस्था को सुदृढ़ करेगी, बल्कि शहर के सौंदर्यकरण, सुरक्षा और पर्यावरणीय संतुलन में भी अहम योगदान देगी। राज्य सरकार इस योजना को समयबद्ध तरीके से लागू करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से काम करेगी।”
रोजाना 10 हजार ट्रे की जगह अब केवल 4-5 हजार की ही हो रही आवक
देहरादून। उत्तर प्रदेश में बर्ड फ्लू के मामले सामने आने के बाद देहरादून में अंडों और चिकन की खपत पर असर दिखने लगा है। लोगों ने एहतियातन इनकी खरीदारी कम कर दी है, जिसके चलते अंडों का कारोबार भी आधा रह गया है। हालांकि, मांग और आपूर्ति दोनों में कमी आने की वजह से फिलहाल बाजार में कीमतों पर खास असर नहीं पड़ा है।
जानकारी के मुताबिक, दून में रोजाना आठ से दस हजार ट्रे अंडे मंगाए जाते थे, लेकिन बर्ड फ्लू की आशंका के बाद यह संख्या घटकर चार से पांच हजार ट्रे तक सिमट गई है। अंडा कारोबारी संजय चौहान के अनुसार, आवक कम होने के बावजूद दाम स्थिर बने हुए हैं। वहीं, ऑफलाइन बाजार में कीमतों में कोई बदलाव नहीं है, लेकिन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर अंडों के दाम जरूर बढ़ गए हैं।
सरकार पर समिति को दरकिनार कर मनमाने फैसले लेने का लगाया आरोप
देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा की कार्यमंत्रणा समिति से नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और कांग्रेस विधायक प्रीतम सिंह ने अपने सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया है। दोनों नेताओं ने सरकार पर समिति को दरकिनार कर एकतरफा निर्णय लेने का आरोप लगाया है।
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि सरकार संख्या बल के आधार पर सदन को मनमाने ढंग से संचालित कर रही है। कार्यमंत्रणा समिति के सदस्यों को विश्वास में लिए बिना फैसले लिए जा रहे हैं, जिससे समिति में बने रहने का कोई औचित्य नहीं रह जाता। इसी के चलते उन्होंने और विधायक प्रीतम सिंह ने विधानसभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा भेज दिया है।
बता दें कि आगामी मानसून सत्र के लिए 18 अगस्त को कार्यमंत्रणा समिति की बैठक बुलाई गई थी, जिसमें 19 अगस्त को एक दिन के लिए सदन संचालन का एजेंडा तय किया गया। बैठक में यह भी निर्णय हुआ था कि 19 अगस्त को फिर से बैठक बुलाकर आगे के सत्र की रूपरेखा तय की जाएगी। लेकिन इसके विपरीत, 20 अगस्त को सरकार ने बिना समिति की दूसरी बैठक बुलाए अपराह्न में सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया।
आर्य ने कहा, “यह निर्णय कार्यमंत्रणा समिति को पूरी तरह दरकिनार करते हुए लिया गया, जो तानाशाही रवैये का प्रतीक है। महज दो दिनों में मानसून सत्र समाप्त करना प्रदेश की जनता के साथ धोखा है।” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लोकतांत्रिक परंपराओं की अनदेखी कर रही है, जिससे आहत होकर उन्होंने और प्रीतम सिंह ने इस्तीफा देने का निर्णय लिया।
गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब दोनों नेताओं ने कार्यमंत्रणा समिति से इस्तीफा दिया है। इससे पहले भी वे असहमति के चलते इस्तीफा दे चुके हैं, जिसे विधानसभा अध्यक्ष ने अस्वीकार कर दिया था।
विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “अभी तक मुझे इस बाबत कोई इस्तीफा नहीं मिला है। यदि इस्तीफा भेजा गया है, तो वह विधानसभा सचिव को प्राप्त हुआ होगा।”
अब यह देखना होगा कि विधानसभा अध्यक्ष इस बार इन इस्तीफों पर क्या रुख अपनाती हैं और विपक्ष की इस नाराज़गी का आगामी सत्रों पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
सीएम ने स्थानीय जनता से मुलाकात कर योजनाओं पर लिया फीडबैक
गैरसैंण केवल राजधानी नहीं, पर्यटन स्थल भी- धामी
वादियों और शांत वातावरण को बताया ऊर्जा का स्रोत
गैरसैंण। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार सुबह भराड़ीसैंण (गैरसैंण) में प्रातःकालीन भ्रमण के दौरान स्थानीय प्रतिष्ठान चंद्र सिंह नेगी के यहां चाय की चुस्कियों का आनंद लिया। इस दौरान उन्होंने वहां मौजूद स्थानीय नागरिकों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना और सरकार की विकासपरक एवं जनकल्याणकारी योजनाओं पर फीडबैक लिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा सत्र के समापन के बाद गैरसैंण में रुककर कुछ समय स्थानीय जनजीवन से जुड़ने का अवसर उनके लिए विशेष है। उन्होंने गैरसैंण को केवल ग्रीष्मकालीन राजधानी ही नहीं, बल्कि अपार संभावनाओं वाला पर्यटन स्थल बताया। सीएम धामी ने कहा कि गैरसैंण की मनमोहक वादियां, शुद्ध पर्वतीय हवा और शांत वातावरण यहां आने वाले हर व्यक्ति को विशेष ऊर्जा का अनुभव कराते हैं।
“महज उम्रदराज होना बहु-बेटे को बेघर करने का लाइसेंस नहीं” – डीएम
देहरादून। जिलाधिकारी न्यायालय में पेश एक मार्मिक प्रकरण ने समाज की सोच को झकझोर दिया। राजपत्रित पद से सेवानिवृत्त पिता ने अपनी बीमार बहु, अल्पवेतनभोगी बेटे और 4 वर्षीय पौती को घर से बेदखल करने के लिए भरणपोषण अधिनियम का सहारा लिया था। तथ्यों की जांच के बाद जिला मजिस्ट्रेट ने पिता द्वारा दायर वाद को खारिज करते हुए लाचार दंपति को पुनः कब्जा दिलवा दिया।
डीएम ने स्पष्ट कहा कि “महज उम्रदराज होना बहु-बच्चों को बेघर करने का लाइसेंस नहीं हो सकता।”
यह है मामला
राजपत्रित अधिकारी पद से सेवानिवृत्त पिता और उनकी पत्नी की मासिक आय लगभग 55 हजार रुपये है। इसके बावजूद उन्होंने बेटे अमन वर्मा (अल्प आय वर्ग) और उनकी पत्नी मीनाक्षी पर भरणपोषण अधिनियम के अंतर्गत वाद दायर किया। सुनवाई में पाया गया कि पिता चलने-फिरने में सक्षम हैं और पर्याप्त आय अर्जित करते हैं। इसके बावजूद वे फ्लैट हासिल करने की लालसा में बेटे-बहु को घर से बेदखल करना चाहते थे।
डीएम का निर्णय
जिला मजिस्ट्रेट ने दो ही सुनवाई में मामले की हकीकत परख ली और तुरंत असहाय दंपति को कब्जा दिलाने का आदेश दिया। साथ ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को निर्देशित किया कि वे प्रतिमाह दो बार निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करें कि दोनों पक्षों के बीच शांति व्यवस्था बनी रहे और किसी प्रकार का उत्पीड़न न हो।
यह निर्णय उन सभी मामलों में नजीर बनेगा, जहाँ भरणपोषण अधिनियम का दुरुपयोग कर परिवार के असहाय सदस्यों को प्रताड़ित करने की कोशिश की जाती है। इससे आमजन में न्याय के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ है।
देहरादून/गैरसैंण। प्रदेश के पर्यटन, लोक निर्माण, सिंचाई, पंचायतीराज, ग्रामीण निर्माण, जलागम, धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने कहा है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जन आकांक्षाओं का सम्मान करते हुए गैरसैंण में विधानसभा सत्र आयोजित करने का निर्णय लिया था। लेकिन विपक्ष ने हंगामे और सदन की कार्यवाही में बार अवरोध खड़े कर सदन की मर्यादा को तार-तार करने के साथ-साथ विपक्ष की भूमिका निभाने में भी असफल रहा है।
प्रदेश के पर्यटन, लोक निर्माण, सिंचाई, पंचायतीराज, ग्रामीण निर्माण, जलागम, धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि सदन में विपक्ष का जो आचरण रहा है वह घोर निंदनीय था। विपक्ष कानून व्यवस्था की स्थिति पर चर्चा चाहता था, लेकिन खुद नियम-कानून का पालन करने को तैयार नहीं था। निकाय चुनाव और हाल ही में संपन्न राज्य के 10 पंचायत निकायों के चुनावों में भाजपा को मिले जनादेश से विपक्ष निराशा और हताशा में है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार ने पहाड़ के हितों एवं जन आकांक्षाओं के अनुरूप मानसून के दौरान गैरसैंण में विधानसभा सत्र आयोजित किया लेकिन विपक्ष ने प्रदेश की जनता के हितों को तिलांजलि देकर सदन को नहीं चलने दिया। सदन के अंदर और बाहर विपक्ष के अमर्यादित व्यवहार, लगातार हंगामे एवं अवरोध खड़े करने से उसने जन आकांक्षाओं का गला घोटने का काम किया है उसके इस कृत्य से असमय सत्रावसान हुआ नतीजतन प्रश्नकाल हंगामे की भेंट चढ़ गया।
उन्होंने कहा कि विपक्ष स्वयं नहीं चहाता की जनता से जुड़े कल्याणकारी मुद्दों पर सदन में चर्चा हो। वह जनता के सरोकारों को तिलांजलि देकर केवल अपना राजनैतिक हित साधना चाह रहा था। सदन के बाहर और अंदर विपक्ष ने जिस प्रकार का आचरण किया उसे प्रदेश की जनता कभी माफ नहीं करेगी।
