प्रदेश में आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए बनेंगे 13 मॉडल आयुष ग्राम, लगेंगे नियमित शिविर..
उत्तराखंड: प्रदेश में आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक जिले में एक-एक मॉडल आयुष ग्राम बनाए जाएंगे। प्रदेशभर में 12 गांव चयनित कर विभाग ने आयुष गतिविधियों के लिए गाइडलाइन जारी कर दी है। आयुष ग्राम में नियमित रूप से आयुर्वेद, योग और होम्योपैथी चिकित्सा के शिविर लगाए जाएंगे। साथ ही गांव के लोगों को औषधीय पौधे भी दिए जाएंगे। उत्तराखंड स्टेट आयुष मिशन सोसायटी ने आयुष ग्राम के साथ योग वेलनेस केंद्र बनाने के लिए रूपरेखा तैयार कर गाइडलाइन जारी की है। राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत प्रत्येक आयुष ग्राम को हर वर्ष तीन लाख रुपये की राशि दी जाएगी। इन गांवों में हर्बल गार्डन बनाए जाएंगे। इसके साथ ही गांव में रहने वाले सभी परिवारों को औषधीय पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे। लोगों को आयुर्वेद व योग के प्रति जागरूक करने के लिए सप्ताह और महीने में शिविर लगेंगे।
गांव के प्रवेश द्वार पर आरोग्य सदन श्लोगन का वॉल पेटिंग की जाएगी। इस बाबत अपर सचिव आयुष विजय कुमार जोगदंडे का कहना हैं कि प्रदेश में आदर्श आयुष ग्रामों का चयन कर लिया गया है। शीघ्र ही इन गांवों में आयुर्वेद गतिविधियां शुरू करने को गाइडलाइन तैयार की जाएगी। आयुष ग्राम में रहने वाले लोगों को आयुष के प्रति जागरूक करने के साथ हर सुविधाएं दी जाएंगी।
ये बनेंगे आयुष ग्राम..
अल्मोड़ा में हवालबाग ब्लाक में शाला रौतेला गांव, बागेश्वर में कपकोट ब्लाक में कर्मी गांव, चमोली में देवाल ब्लाक में घेस, चंपावत ब्लाक में सैलानी गोथ, देहरादून के रायपुर ब्लाक में क्यारकुली भट्टा, हरिद्वार के लक्सर ब्लाक में सुभाषगढ़, नैनीताल के भीमताल में नौकुचियाताल, पौड़ी के खरसू ब्लाक में पोखरी, पिथौरागढ़ के मुनाकोट ब्लाक में माजिरकंडा, रुद्रप्रयाग के जखोली ब्लाक में पोंथी गांव, टिहरी के नरेंद्रनगर ब्लाक में देयूली गांव, ऊधमसिंह नगर के काशीपुर ब्लाक में प्रतापपुर, उत्तरकाशी के भटवाड़ी ब्लाक के हर्षिल गांव।
CM का एलान, स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं को बिजली में मिलेगी 4 प्रतिशत छूट..
उत्तराखंड: प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगवाने वाले बिजली उपभोक्ताओं को वर्तमान दरों में चार प्रतिशत की छूट मिलेगी। इसकी शुरुआत सोमवार से सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कर दी है। मीटर लगने पर बिजली बिल की जरूरत खत्म होगी। मोबाइल की भांति रिचार्ज करना होगा। सचिव ऊर्जा आर मीनाक्षी सुंदरम ने कहा कि प्रदेश में 15 लाख 84 हजार उपभोक्ताओं के घरों पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जाने हैं। बिजली आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए वर्तमान में 59,212 ट्रांसफार्मर और 2,602 फीडरों पर स्मार्ट मीटर लगाने का काम शुरू हो चुका है।
उनका कहना हैं कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने वाले उपभोक्ताओं को बिजली दरों में चार प्रतिशत की छूट मिलेगी। यूपीसीएल के प्रबंध निदेशक अनिल कुमार ने कहा कि यह योजना उपभोक्ताओं के लिए वरदान साबित होगी। स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगने पर मोबाइल की तर्ज पर बिजली का भी रिचार्ज होगा। बिलों की समस्या दूर हो जाएगी। उपभोक्ता का रिचार्ज खत्म होने से पहले ही एसएमएस आ जाएगा। कभी भी वह अपना बिजली खर्च मोबाइल एप के माध्यम से देख सकेंगे, ताकि उसी हिसाब से बिजली खर्च पर नियंत्रण पाया जा सके। लाइन हानियां भी कम हो जाएंगी।
उपभोक्ता के बिजली खर्च की पूरी जानकारी..
यूपीसीएल मुख्यालय में कंट्रोल रूम बनाया गया है। यहां सभी बिजली उपभोक्ताओं के खर्च की पूरी जानकारी अपडेट रहेगी। किस महीने कितनी बिजली खर्च की गई, लगातार खर्च बढ़ने पर उसी हिसाब से कनेक्शन का लोड भी बढ़ जाएगा। रिचार्ज खत्म होने पर कुछ समय के लिए बिजली आपूर्ति सुचारू रहेगी और फिर निर्धारित अवधि के बाद बिजली स्वत: बंद हो जाएगी।
राजधानी देहरादून में जुटेंगे 65 देशों के साहित्यकार, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद करेंगे समारोह का उद्घाटन..
उत्तराखंड: राजधानी के थानों इलाके में विकसित किए जा रहे लेखक गांव में 23 से 27 अक्तूबर तक अंतरराष्ट्रीय कला, साहित्य एवं संस्कृति महोत्सव का आयोजन होगा। इस पांच दिवसीय समारोह में लगभग 65 देशों के साहित्यकार, लेखक और कलाकार भाग लेंगे। देश के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद समारोह का उद्घाटन करेंगे। देश के पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक की अध्यक्षता में बैठक में महोत्सव की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया गया।डॉ. निशंक का कहना हैं कि यह महोत्सव हिंदी भाषा के वैश्विक प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को उजागर करेगा। समारोह में भाग लेने वाले विदेशी विद्वान, साहित्यकार और छात्र हिंदी भाषा के ब्रांड एंबेसडर के रूप में अपने-अपने देशों में हिंदी का प्रचार करेंगे। महोत्सव के उद्घाटन सत्र में देश के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और समापन समारोह में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित कई केंद्रीय मंत्री भी इस आयोजन में शिरकत करेंगे।
चार सत्रों में साहित्यिक परिचर्चाओं और विमर्शों का आयोजन किया जाएगा..
महोत्सव का उद्घाटन में विभिन्न प्रदर्शनियों और लोक प्रस्तुतियों के साथ होगा। हिंदी और स्थानीय भाषाओं के 20 लेखकों की पुस्तकों का विमोचन भी शामिल होगा। 23 और 24 अक्टूबर को हिंदी और स्थानीय बोली-भाषाओं पर विशेष कार्यशालाओं का आयोजन होगा। जिसमें डॉ. निशंक की 12 पुस्तकों के गढ़वाली और कुमाऊंनी संस्करणों का लोकार्पण भी किया जाएगा। पहले दो दिनों का संयोजन भाषा विज्ञानी रमाकांत बैंजवाल और बीना बैंजवाल करेंगे। इसी दौरान एनबीटी (नेशनल बुक ट्रस्ट) द्वारा बच्चों की किताबों की अनुवाद कार्यशाला भी आयोजित की जाएगी। 25 अक्तूबर को मुख्य उद्घाटन सत्र के बाद चार सत्रों में साहित्यिक परिचर्चाओं और विमर्शों का आयोजन किया जाएगा। 26 अक्तूबर को पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य बालकृष्ण योग, अध्यात्म और संगीत के स्वास्थ्य पर प्रभावों पर विचार प्रस्तुत करेंगे। 27 अक्तूबर को समापन समाराेह होेगा।
अब नगर निगम, पालिका और नगर पंचायत मनमर्जी से खर्च नहीं कर पाएंगे बजट..
उत्तराखंड: प्रदेश के नगर निकाय अब मनमर्जी से खर्च नहीं कर पाएंगे। निकायों की आमदनी और खर्च को व्यवस्थित करने के लिए पहली बार नीति बनाई जा रही है। इस नीति के आने के बाद निकायों के नेता बिना बजट की हवा-हवाई घोषणाएं नहीं कर पाएंगे। न ही निर्धारित सीमा से अधिक खर्च कर सकेंगे। राज्य के नगर निकाय लगातार सरकार की इमदाद पर निर्भर रहते हैं। कई निकायों की तो कमाई बेहद कम होने से हर खर्च सरकार के बजट से ही चलता है। यहां बजट खर्च करने की व्यवस्था निर्धारित नहीं है।
सरकार से मिलने वाले पैसे के अलावा खुद की आमदनी को भी कहीं विकास कार्यों में ही खर्च कर दिया जाता है, तो कहीं वेतन और भत्तों में ही बड़ा हिस्सा खर्च हो रहा है। जरूरत इस बात की है कि नगर निकाय कुल बजट व राजस्व प्राप्ति को श्रेणीकरण के हिसाब से खर्च करें। कई निकायों में अक्सर चुनाव से पहले नेता व पार्षद, सभासद बजट की अनुपलब्धता के बावजूद कई घोषणाएं कर देते हैं। इससे या तो वे घोषणाएं पूरी नहीं हो पाती या फिर कम बजट के बावजूद बड़ी योजनाएं निकायों पर बोझ बन जाती हैं। शहरी विकास विभाग के स्तर से नगर निकायों के लिए बजट खर्च, राजस्व प्राप्ति की नीति तैयार की जा रही है। यह नीति भविष्य में कैबिनेट में लाई जाएगी। कैबिनेट की मुहर के बाद यह अस्तित्व में आ जाएगी।
इतना बजट देती है सरकार..
आपको बता दे कि सरकार हर बजट में नगर निकायों को 10-10 करोड़ रुपये का प्रावधान करती है। अनिर्वाचित निकायों बद्रीनाथ, केदारनाथ और गंगोत्री के लिए दो-दो करोड़ रुपये का प्रावधान किया जाता है। 2023 के बजट में भी नगर निगमों के लिए सरकार ने 392 करोड़ 96 लाख, नगर पालिकाओं के लिए 464 करोड़ 37 लाख, नगर पंचायतों के लिए 114 करोड़ 70 लाख का प्रावधान किया था। इस साल के बजट में भी कमोबेश ऐसे ही बजटीय प्रावधान किए गए हैं। नए निकायों को सीधे 10-10 करोड़ दिए जाते हैं। अनिर्वाचित निकाय बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री को दो-दो करोड़ का बजट दिया जाता है। दूसरी ओर, केंद्रीय वित्त आयोग से भी निकायों को करीब 450 करोड़ मिलते हैं।
ग्रामीण सीएचसी में 80% विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी, रिपोर्ट में हुआ खुलासा..
उत्तराखंड: पर्वतीय क्षेत्रों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में 80% विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है। पहाड़ों में 80 हजार की आबादी पर एक सीएचसी होना चाहिए। इसके अनुसार पहाड़ में 44 सीएचसी की कमी है। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से हाल ही में जारी हेल्थ डायनमिक्स (इंफ्रास्ट्रक्चर एंड ह्यमून रिसोर्स) रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में 31 मार्च 2023 तक उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का विश्लेषण किया गया। इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड (आईपीएचएस) के मानकों के अनुसार विशेषज्ञ डॉक्टरों की 80% कमी है।
आपको बता दे कि पर्वतीय क्षेत्रों के सीएचसी में सर्जन, बाल रोग, ग्यानाक्लोजिस्ट, फिजिशियन, एनेस्थेटिस्ट के 245 विशेषज्ञ डॉक्टरों की जरूरत है। इनमें 48 ही कार्यरत हैं जबकि 197 पद खाली चल रहे हैं। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि पर्वतीय क्षेत्रों के अधिकतर सीएचसी में ग्यानाक्लोजिस्ट डॉक्टर कार्यरत नहीं है। 2005 में राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में कुल 44 सीएचसी थे, जो बढ़कर 49 हो गए हैं। वही प्रदेश में चार राजकीय मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। एमबीबीएस डॉक्टरों को पीजी कराने की सुविधा है, लेकिन पीजी करने वाले विशेषज्ञ डॉक्टरों का लाभ ग्रामीण उत्तराखंड को नहीं मिल रहा है। प्रदेश में विशेषज्ञ डॉक्टरों के 1,240 पद सृजित हैं। इसमें लगभग पांच सौ ही विशेषज्ञ डॉक्टर कार्यरत हैं। उत्तराखंड ही नहीं पूरे देश में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी चल रही है। प्रदेश सरकार की ओर से इस कमी को दूर करने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। 2027 तक प्रदेश में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी दूर हो जाएगी।
देहरादून की कमान मिलते ही नए DM सविन बंसल ने किया बड़ा बदलाव, वर्षों पुरानी व्यवस्था को किया खत्म..
उत्तराखंड: देहरादून की बदहाल सफाई व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए जिलाधिकारी सविन बंसल पहले दिन से ही कसरत कर रहे हैं। इस बीच डीएम ने नगर निगम देहरादून में सालों से चली आ रही कार्य प्रणाली को कार्यभार ग्रहण करने के पांचवे दिन ही बदल दिया है। बता दें अभी तक सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी देखते थे। अब डीएम ने इसकी जिम्मेदारी उप नगर आयुक्त को सौंप दी है।
डीएम सविन बंसल ने सफाई कार्यों के सफाई व्यवस्था और मॉनिटिरिंग, कूड़ा उठान, कूड़ा वाहन संचालन, फॉगिंग, कार्य सत्यापन सम्बन्धी कार्य देख रहे मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी से यह कार्य हटाते हुए उनके पद के मूल कार्य दिए गए हैं, अब वे अपने पद के मूल कार्य स्वास्थ्य विभाग से समन्वय, शहरी क्षेत्र में डेंगू-मलेरिया रोकथाम, सर्विलांस, स्वास्थ्य जोखिम आंकलन के कार्य करेंगे। सफाई व्यवस्था और मॉनिटिरिंग, कूड़ा उठान, कूड़ा वाहन संचालन, फॉगिंग, सत्यापन कार्य अब उप नगर आयुक्त द्वारा किया जाएगा, जिसके लिए जिलाधिकारी की ओर से आदेश जारी कर दिए गए हैं।
बता दें जिलाधिकारी सविन बंसल नगर निगम के सफाई कार्यों की खुद मॉनिटिरिंग कर रहे हैं, उन्होंने कूड़ा उठान कार्यों और मॉनिटिरिंग में लचर व्यवस्था पाए जाने पर गहरी नाराजगी व्यक्त की थी। जिलाधिकारी बंसल ने कहा यह सभी कार्य उप नगर आयुक्त का है, जबकि जिले में कई सालों से यह कार्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी अपने पद के अन्य कार्यों के साथ कर रहे थे, जिसको बदलने के आदेश जारी कर दिए हैं। जिलाधिकारी कार्यभार ग्रहण करने के बाद से ही एक्शन मोड़ में नजर आ रहे है।
अनुबन्धित कम्पनियों को दी है चेतावनी..
शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर डीएम की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वे पदभार ग्रहण करने के ही दिन से जनमानस से सम्बन्धित विषयों पर त्वरित कार्यवाही कर रहे हैं। डीएम कार्यभार ग्रहण करने के दूसरे ही दूसरे ही दिन देर शाम नगर निगम पंहुचकर सफाई व्यवस्थाओं को लेकर अधिकारियों को तलब किया. इसके साथ ही कूड़ा निस्तारण कार्यों की भी समीक्षा करते हुए अनुबन्धित कम्पनियों को कार्य प्रवृत्ति में सुधार लाने के लिए 45 दिन की मोहलत दी है।
सीएम ने बार एसोसिएशन देहरादून के नए भवन के शिलान्यास में लिया भाग..
उत्तराखंड: सीएम धामी ने बार एसोसिएशन दून के अधिवक्ताओं के चैंबर्स भवन का शिलान्यास किया। कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि पहुंचे सीएम धामी ने कहा कि राज्य में न्याय व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध है। बार एसोसियेशन देहरादून में 5500 से अधिक अधिवक्ता कार्यरत है। भवन निर्माण के लिए 5 बीघा जमीन स्वीकृत की गई थी। इसके साथ ही अब 1500 चैंबर वाला 9 मंजिला भवन बनाया जाएगा। इस दौरान सीएम धामी ने कहा की अंग्रेजों के समय से चले आ रहे कानून को बदलने का काम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया है।
प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत सरकार ने देश में तीन कानून लागू करने का काम किया है। वही नए कानून के तहत इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल को भी मान्यता प्राप्त की गई है। सीएम धामी ने यूसीसी को लेकर कहा की 9 नवंबर राज्य स्थापना दिवस से पहले यूसीसी लागू करने का काम किया जाएगा जो हमारी सरकार का संकल्प है।
लंबित केसों का निस्तारण समय से किया जाना जरूरी..
देहरादून बार एसोसिएशन में 1 लाख 30 हजार केस लंबित है। जिसके लिए सीएम धामी ने सभी अधिवक्ताओं से आह्वान किया कि लंबित केसों का निस्तारण समय से किया जाना जरूरी है, ताकि न्यायिक प्रक्रिया में देरी न हो। वही बार एसोसिएशन देहरादून के अध्यक्ष राजीव शर्मा उर्फ बंटू का कहना है की नए भवन निर्माण के लिए राज्य सरकार से अनुदान की मांग की है। उन्होंने कहा कि नए भवन की कीमत 90 करोड़ आंकी गई है जिसके लिए अधिवक्तों के साथ साथ राज्य सरकार से भी अंशदान को मांग की है। सीएम धामी ने नए भवन निर्माण को लेकर बार एसोसिएशन को आश्वस्त किया है
उत्तराखंड। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणा के क्रम में पंचकेदारों में से द्वितीय केदार मद्महेश्वर धाम को विकसित किया जाएगा। इसके साथ केदारनाथ धाम के अंतिम मोटर पड़ाव गौरीकुंड स्थित मां गौरी के मंदिर का सौंदर्यीकरण भी किया जाएगा।
शासन के धर्मस्व व संस्कृति विभाग के अनु सचिव रमेश सिंह रावत द्वारा इस संबंध में संस्कृति विभाग के निदेशक को अलग-अलग आदेश जारी किये गए हैं। आदेशों में मुख्यमंत्री की घोषणा के क्रम में मद्महेश्वर धाम के विकास और गौरीकुंड स्थित मां गौरी मंदिर के सौंदर्यीकरण के लिए कार्यदायी संस्था से विस्तृत परियोजना आख्या (डीपीआर) तैयार करने के निर्देश जारी किए गए हैं। आदेश में लोक निर्माण विभाग को कार्यदायी संस्था नामित करते हुए श्री बदरीनाथ – केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) से समन्वय स्थापित करते हुए डीपीआर तैयार करने को कहा गया है।
उधर, बीकेटीसी अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने मद्महेश्वर धाम के विकास और मां गौरी मंदिर के सौंदर्यीकरण की योजना को स्वीकृति देने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा की मद्महेश्वर धाम के विकास की योजना से वहां श्रद्धालुओं व तीर्थयात्रियों की संख्या में वृद्धि होगी। इससे क्षेत्रीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।
उल्लेखनीय है कि 3,497 मीटर की ऊंचाई पर स्थित मद्महेश्वर धाम रुद्रप्रयाग जनपद के ऊखीमठ विकास खंड में स्थित है। मद्महेश्वर पहुंचने के लिए श्रद्वालुओं को करीब 14 किमी की पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। पंच केदारों में से द्वितीय केदार के रूप में मद्महेश्वर धाम की मान्यता है। यहां भगवन शिव के नाभि रूप की पूजा होती है। मंदिर का प्रबंधन बीकेटीसी देखती है। इसी प्रकार मां गौरी का मंदिर केदारनाथ धाम के अंतिम मोटर स्टेशन गौरीकुंड में स्थित है। केदारनाथ धाम की यात्रा पर जाने वाले श्रद्वालु मां गौरी के दर्शनों के बाद अपनी यात्रा पर निकलते हैं। इसका प्रबंधन भी बीकेटीसी के पास है।
दिल्ली में भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पी.टी उषा से मिलीं खेल मंत्री रेखा आर्या..
राष्ट्रीय खेलों के आयोजन को लेकर हुई चर्चा..
उत्तराखंड: प्रदेश में 38वें राष्ट्रीय खेलों को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। गुरुवार को प्रदेश की खेल मंत्री रेखा आर्या ने भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी उषा से मुलाकात की। गुरुवार को खेल मंत्री रेखा आर्या ने नई दिल्ली में भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी उषा और संघ के अन्य पदाधिकारियों से मुलाकात की। इस दौरान खेल मंत्री ने राज्य में प्रस्तावित 38वें राष्ट्रीय खेलों से जुड़े अनेक विषयों पर चर्चा की और खेलों के आयोजन से संबंधित तैयारियों पर विमर्श किया।
नेशनल गेम्स को लेकर बीते बुधवार को सीएम धामी ने केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मंडाविया से दूरभाष पर वार्ता की थी। सीएम ने प्रस्तावित 38वें राष्ट्रीय खेलों की तिथि के विषय में चर्चा की थी। जिस पर मनसुख मंडाविया ने कहा था कि जल्दी ही इस विषय पर भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पी. टी उषा से वार्ता कर तिथि घोषित की जाएगी। माना जा रहा है कि जल्द ही राष्ट्रीय खेलों की तिथि का ऐलान किया जाएगा। आपको बता दें कि अक्टूबर-नवंबर में 38वें राष्ट्रीय खेलों का आयोजन होना है। प्रदेश सरकार व खेल विभाग राष्ट्रीय खेलों की तैयारी में जुटी हुई है। पिछले साल नवंबर 2023 में गोवा में हुए 37वें राष्ट्रीय खेलों के समापन पर भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी ऊषा ने 38वें राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी के लिए उत्तराखंड को भारतीय ओलंपिक संघ का ध्वज सौंपा था।
अंतरराष्ट्रीय आयुर्वेद सम्मेलन की पहली बार मेजबानी करेगा उत्तराखंड..
उत्तराखंड: प्रदेश में पहली बार अंतरराष्ट्रीय आयुर्वेद सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। आयुष मंत्रालय ने इस बार आयोजन की मेजबानी उत्तराखंड को सौंपी है। 12 से 15 दिसंबर तक एफआरआई देहरादून में सम्मेलन प्रस्तावित है। इसके लिए आयुर्वेद विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। सम्मेलन में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयुर्वेद संस्थानों के विशेषज्ञ, आयुष फार्मा कंपनियों के प्रतिनिधि आयुष चिकित्सा व संभावनाओं पर मंथन करेंगे।
बीते वर्ष दिसंबर माह में वैश्विक निवेशक सम्मेलन के बाद प्रदेश सरकार अब अंतरराष्ट्रीय आयुर्वेद सम्मेलन कराने की तैयारियों में है। आयुष मंत्रालय के सहयोग से प्रदेश में यह पहला आयोजन होगा। सम्मेलन में 8 से 10 देशों के प्रतिनिधियों को बुलाया जाएगा। इसके साथ ही देश में प्रसिद्ध आयुष चिकित्सा एवं शोध संस्थानों के विशेषज्ञ, आयुष फार्मा कंपनियां अलग-अलग सत्रों में आयुष चिकित्सा को बढ़ावा देने पर मंथन करेंगे।
इस सम्मेलन से उत्तराखंड को आयुष हब के रूप में विकसित करने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव भी विशेषज्ञों से मिलेंगे। सम्मेलन के दौरान उत्तराखंड में आयुष एवं वेलनेस क्षेत्र में निवेश के लिए कंपनियों के साथ एमओयू कराने के लिए विभाग प्रयास कर रहा है। अपर सचिव आयुष विजय कुमार जोगदंडे ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय आयुर्वेद सम्मेलन के लिए तैयारियां चली है। सम्मेलन के लिए एफआरआई में स्थान चयनित किया गया। इसके लिए देश दुनिया से आने वाले प्रतिनिधियों की सूची तैयार की जा रही है।
