पोर्टल नहीं खुला तो यूजी, पीजी और 12वीं के कंपार्टमेंट में पास हुए छात्रों को नहीं मिलेगा इस साल दाखिला
विश्वविद्यालयों को स्वायत्ता, नकेल शिक्षा विभाग के हाथ
देहरादून। प्रदेश सरकार भले ही सुदूर गांव के छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए सहूलियतें दे रही हो, लेकिन अधिकारी सरकारी प्रयासों पर पानी फेरने का काम कर रहे हैं। श्रीदेव सुमन और कुमाऊं विश्वविद्यालय से संबंधित कालेजों में इस बार 12वीं रामनगर और सीबीएसई की कंपार्टमेंट परीक्षाओं में पास होने के बावजूद इन छात्रों को दाखिला नहीं मिलेगा। इसके अलावा कई यूजी और पीजी छात्रों को भी दाखिले से वंचित रहना पड़ सकता है। समर्थ पोर्टल न खुलने से इन छात्रों को दाखिला नहीं मिल रहा है।
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि समर्थ पोर्टल खोलने का अधिकार शिक्षा विभाग के पास है। ऐसे में उच्च शिक्षा विभाग ही पोर्टल खोलने का फैसला लेगा।
कुमाऊं और श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय की पहले सेमेस्टर की परीक्षाएं 6 दिसम्बर से शुरू हो रही हैं। परीक्षाएं वही छात्र दे पाएंगे जो कि समर्थ पोर्टल पर पंजीकृत हों। कालेजों का तर्क है कि बैक पेपर, नीट मॉप अप राउंड, सीयूईटी के तहत कालेज मिलने का इंतजार कर रहे छात्रों को अब कुमाऊं और श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालयों में भी दाखिला नहीं मिलेगा। इन्हें तभी दाखिला मिल सकेगा जब समर्थ पोर्टल खुलेगा और उच्च शिक्षा विभाग पोर्टल खोलने के लिए तैयार नहीं है।
कालेज प्रबंधन एसोसिएशन ने इस संबंध में शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत से गुहार लगाई थी कि पोर्टल एक दिन के लिए खोल दिया जाएं ताकि छात्रों को समर्थ पोर्टल पर पंजीकरण किया जा सके। डा. धन सिंह रावत ने उच्च शिक्षा विभाग को पोर्टल खोलने के निर्देश दिये लेकिन पोर्टल नहीं खुला।
इस संबंध में उच्च शिक्षा विभाग में समर्थ पोर्टल के इंचार्ज असिस्टेंट डायरेक्टर दीपक पांडे ने कहा कि 180 दिन पढ़ाई की शर्त भी है। इसके अलावा पोर्टल खोलने न खोलने का फैसला अथारिटी करती है। यदि अथारिटी कहेगी तो पोर्टल खोल दिया जाएगा।
दूसरी ओर विश्वविद्यालय का तर्क है कि विभाग ही पोर्टल खोल सकता है। जबकि कालेजों में दाखिला देना, नियम बनाने और उसका अनुपालन करना और समर्थ पोर्टल भी विश्वविद्याय के दायरे में होना चाहिए। समर्थ पोर्टल पर उच्च शिक्षा विभाग का कब्जा होने से अब सैकड़ों छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो गया है। बता दें कि शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत कोलकत्ता गये हैं।
देहरादून/दिल्ली। प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने केन्द्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान केन्द्रीय मंत्री ने अपनी कामयाबी के पीछे पत्नी पाना देवी के योगदान को बताते हुए उन पर लिखी पुस्तक “एक सफर हमसफ़र के साथ” भी उन्हें भेंट की।
प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने बुधवार को केन्द्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल से नई दिल्ली स्थित उनके आवास पर शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान केन्द्रीय मंत्री ने अपनी कामयाबी के पीछे पत्नी पाना देवी के योगदान को बताते हुए पत्नी पर लिखी पुस्तक “एक सफर हमसफ़र के साथ” भी उन्हें भेंट की। महाराज ने बताया कि अर्जुन राम मेघवाल की पुस्तक “एक सफर हमसफर के साथ” उनकी पत्नी पाना देवी के जीवन पर आधारित है। इस पुस्तक में, मेघवाल ने अपनी पत्नी के साथ अपने जीवन के अनुभवों और संघर्षों को साझा किया है। उन्होंने अपनी पत्नी की भूमिका को अपने जीवन में बहुत महत्वपूर्ण बताया है और कहा है कि उनकी सफलता में उनकी पत्नी का बहुत बड़ा योगदान है।
महाराज ने बताया कि अर्जुन राम मेघवाल की पत्नी पाना देवी एक साधारण घरेलू महिला हैं, जिन्होंने अपने पति के साथ अपने जीवन को समर्पित किया है। उन्होंने कहा कि जब केन्द्रीय मंत्री मेघवाल पढ़ाई कर रहे थे तो उनके पास स्कूल की फ़ीस देने को पैसे कम पड़ जाते थे उस समय उनकी पत्नी पाना देवी दस्तकारी का काम कर उससे मिलने वाली धनराशि को उन्हें पढ़ने के लिए देते थी। शादी के बाद पति को पढ़ने देने के लिए पाना देवी ने ही बार-बार उन्हें प्रेरित किया और कदम-कदम पर उनका साथ दिया।
केन्द्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा लिखित पुस्तक “एक सफर हमसफर के साथ” निश्चित रूप से अब तक के सफर में उनकी पत्नी के योगदान और समर्पण का एक सम्पूर्ण दस्तावेज है जो सभी के लिए एक प्रेरणा है।
10 दिसंबर से ऑनलाइन आवेदन, 30 दिसंबर आख़िरी तारीख
देहरादून। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने राज्य के विभिन्न विभागों में रिक्त चल रहे पदों को भरने के लिए 57 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। आयोग ने जारी नोटिफिकेशन में मनोवैज्ञानिक, पर्यटन अधिकारी, कंप्यूटर प्रोग्रामर, प्रशिक्षक, अनुदेशक, कैमरामैन, फोटो कॉपी मशीन ऑपरेटर और जूनियर तकनीकी सहायक सहित कई तकनीकी और गैर-तकनीकी पदों की घोषणा की है।
आवेदन प्रक्रिया 10 दिसंबर 2025 से ऑनलाइन प्रारंभ होगी, जबकि 30 दिसंबर 2025 आवेदन की अंतिम तिथि निर्धारित की गई है। उम्मीदवारों को आवेदन पत्र में संशोधन का अवसर 3 जनवरी से 5 जनवरी 2026 तक दिया जाएगा।
आयोग के अनुसार, इन पदों के लिए लिखित परीक्षा 9 मार्च 2026 से प्रस्तावित है। इच्छुक अभ्यर्थी योग्यता, चयन प्रक्रिया और विस्तृत दिशा-निर्देश आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर देख सकते हैं।
डाॅग स्क्वाड तथा एएनटीएफ टीम के साथ पुलिस की अलग-अलग टीमो द्वारा कोतवाली नगर क्षेत्रांतर्गत लक्खी बाग, रीठा मंडी, सिंगल मंडी, कुसुम विहार आदि क्षेत्रों में वृहद स्तर पर चलाया गया सत्यापन अभियान
किरायेदार सत्यापन में लापरवाही पर 30 मकान मालिकों पर 3 लाख का जुर्माना
देहरादून। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून के निर्देश पर जनपद में संदिग्ध व्यक्तियों और अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए व्यापक स्तर पर सत्यापन एवं चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में 3 दिसंबर 2025 को कोतवाली पुलिस ने एनएनटीएफ टीम और डॉग स्क्वाड के साथ मिलकर लक्खीबाग, रीठामंडी, सिंगल मंडी, कुसुम विहार सहित आसपास के क्षेत्रों में सघन चेकिंग अभियान संचालित किया।
अभियान के दौरान पुलिस टीम ने क्षेत्र में घूम रहे संदिग्ध व्यक्तियों की तलाश की, साथ ही अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों से संबंधित जानकारी जुटाई। पुलिस ने बाहरी राज्यों से आए लोगों, किरायेदारों और अस्थायी रूप से रहने वाले व्यक्तियों का सत्यापन किया।
चेकिंग के दौरान कई अनियमितताएं सामने आईं। किरायेदार सत्यापन न कराने पर 30 मकान मालिकों के खिलाफ धारा 83 पुलिस एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए 3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। इसके अलावा संदिग्ध रूप से घूम रहे चार लोगों से पूछताछ की गई और सत्यापन पूरा करने के बाद 81 पुलिस अधिनियम में चालान कर 1,000 रुपये का जुर्माना वसूला गया।
एसएसपी देहरादून के निर्देश पर जनपदभर में यह सत्यापन और चेकिंग अभियान लगातार जारी है, ताकि क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और भी अधिक सुदृढ़ की जा सके।
वन विभाग ने बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए स्कूल टाइमिंग एक घंटा आगे बढ़ाने का अनुरोध किया
देहरादून। राज्य में लगातार बढ़ रहे भालू-हमलों को देखते हुए वन विभाग ने बड़ी पहल की है। गंभीर रूप से घायल होने की स्थिति में प्रभावित लोगों को 10 लाख रुपये तक की अनुग्रह सहायता देने का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजने की तैयारी शुरू कर दी गई है। साथ ही जिन इलाकों में भालुओं की गतिविधि और हमलों में तेजी आई है, वहां जैव विविधता बोर्ड और वन अनुसंधान संस्थान के जरिए विस्तृत अध्ययन कराने की भी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
प्रमुख वन संरक्षक रंजन मिश्रा की अध्यक्षता में हुई बैठक में मानव–वन्यजीव संघर्ष को रोकने और प्रभावितों को त्वरित सहायता सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। अधिकारियों ने बताया कि गांवों में जागरूकता कार्यक्रमों, झाड़ियों की कटान और ट्रैकिंग के लिए अतिरिक्त मानव बल की आवश्यकता है। पीसीसीएफ मिश्रा ने निर्देश दिए कि वनाग्नि और मानव–वन्यजीव संघर्ष दोनों बड़ी चुनौतियां हैं, इसलिए संवेदनशील क्षेत्रों में नियमों के अनुरूप पर्याप्त वॉचर नियुक्त किए जाएं।
बैठक में यह भी बताया गया कि भालू या अन्य वन्यजीवों के हमले में घायल व्यक्ति को अस्पताल तक पहुंचाने की पूरी व्यवस्था विभाग करता है, लेकिन कई बार गांव में रुकने और तत्काल सहायता पर अतिरिक्त व्यय आता है। अधिकारियों ने इस खर्च की प्रतिपूर्ति के लिए विशेष प्रावधान बनाने का अनुरोध किया।
स्कूल का समय बदलने की सिफारिश भी
गढ़वाल वन संरक्षक ने जानकारी दी कि रुद्रप्रयाग वन प्रभाग के कई इलाकों में स्कूल खुलने के समय भालू देखे जा रहे हैं, जिससे बच्चों की सुरक्षा को खतरा बढ़ रहा है। इस पर वन विभाग ने जिला प्रशासन से स्कूलों का समय एक घंटा आगे बढ़ाने का औपचारिक अनुरोध किया है, ताकि बच्चे सुरक्षित समय में स्कूल आ-जा सकें।
बैठक में पीसीसीएफ एस.बी. सुबुद्धि, अपर प्रमुख वन संरक्षक मीनाक्षी जोशी, सुशांत पटनायक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
धामी सरकार के निर्देशों से मेडिकल शिक्षा को नई रफ्तार
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के बाद उत्तराखंड में मेडिकल एजुकेशन का विस्तार अभूतपूर्व रफ्तार पकड़ चुका है। राज्य सरकार हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज स्थापित करने के लक्ष्य की ओर तीव्रता से बढ़ रही है, और उसी अभियान का एक महत्वपूर्ण केंद्र बना है सीमांत पिथौरागढ़। कठिन भूगोल और सीमित संसाधनों के बावजूद यहां राजकीय मेडिकल कॉलेज का निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है और अब यह परियोजना अपने निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुकी है।
मेडिकल कॉलेज परिसर अब लगभग पूरा आकार ले चुका है। विशाल इमारतें, सुव्यवस्थित ब्लॉक और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर—यह सब पिथौरागढ़ को पहाड़ का एक प्रमुख चिकित्सा केंद्र बनाने की दिशा में बड़े कदम साबित हो रहे हैं। स्थानीय जनता इस परियोजना को लेकर काफी उत्साहित है। लोगों की मानें तो मेडिकल कॉलेज शुरू होने के बाद अब गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए हल्द्वानी, देहरादून या बाहरी राज्यों की ओर जाने की मजबूरी खत्म होगी। रोजगार, व्यवसाय और आवागमन के नए अवसर भी जिले में उभरेंगे। सरकार ने 31 मार्च 2026 तक मेडिकल कॉलेज को पूरी तरह तैयार करने का लक्ष्य रखा है। अगर निर्माण की यही गति बनी रही तो यह लक्ष्य समय पर पूरा होता नजर आ रहा है।
पेयजल निगम की नवीनतम प्रगति रिपोर्ट बताती है कि पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज के अधिकांश प्रमुख ब्लॉक 70 से 95 प्रतिशत तक पूरे हो चुके हैं। यह न केवल विभाग की कार्यकुशलता का प्रमाण है, बल्कि सीमांत जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं का भविष्य भी उज्जवल होने जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार फैकल्टी ब्लॉक, लैबोरेट्री ब्लॉक और परीक्षा–लेक्चर थिएटर ब्लॉक 65 से 80 प्रतिशत तक बन चुके हैं। एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक में भी 45 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन भवनों के लगभग तैयार हो जाने से आने वाले दिनों में फैकल्टी नियुक्ति, विभागों की स्थापना और शैक्षणिक सत्र शुरू करने की दिशा में बड़ा रास्ता साफ होगा।
हॉस्टल भवनों में निर्माण कार्य सबसे तेज रहा है। बॉयज़ हॉस्टल 90 प्रतिशत और गर्ल्स हॉस्टल 80 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। गर्ल्स डाइनिंग ब्लॉक 78 प्रतिशत और बॉयज़ डाइनिंग 35 प्रतिशत निर्माण स्तर पर है। वहीं आवासीय ब्लॉकों में टाइप-6 और टाइप-4 श्रेणियां 85 से 96 प्रतिशत तक पूरी हो चुकी हैं। यह पूरी संरचना मेडिकल कॉलेज के संचालन को सुचारू बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, क्योंकि इससे डॉक्टरों, नर्सों, फैकल्टी और छात्रों को बेहतर रहने की व्यवस्था उपलब्ध होगी।
अस्पताल परिसर में भी प्रगति उल्लेखनीय है। इमरजेंसी ब्लॉक रिमॉडलिंग 90 प्रतिशत और IPD-1 में 75 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। OPD-2 (35%), जूनियर रेजिडेंट हॉस्टल (20%), और इंटर्न होस्टल (25–65%) में काम जारी है। कुछ नए ब्लॉक जैसे IPD-2, IPD-3, नर्स हॉस्टल, BMW ब्लॉक और मोर्चरी अभी शुरुआती चरण में हैं, लेकिन विभाग का दावा है कि जल्द ही इनके निर्माण में भी तेजी आएगी।
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार का बयान
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि, “पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज मुख्यमंत्री धामी की प्राथमिकता वाली परियोजनाओं में शामिल है। सीमांत जिले में अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराना हमारा संकल्प है। अधिकांश प्रमुख ब्लॉकों में तेज़ प्रगति हुई है और शेष कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं। हमारा लक्ष्य सिर्फ एक मेडिकल कॉलेज बनाना नहीं, बल्कि इसे राज्य का ‘मॉडल मेडिकल इंस्टीट्यूट’ बनाना है। आने वाले वर्षों में यहाँ चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का एक मजबूत केंद्र विकसित होगा।”
महिलाओं के साथ इस प्रकार के कुकृत्य करने वालों को बिल्कुल नहीं बख्शा जाएगा- कुसुम कण्डवाल
राजस्व पुलिस से रेगुलर पुलिस को ट्रांसफर के निर्देश, दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित करने का आदेश
देहरादून/चकराता। चकराता क्षेत्र में छह माह की गर्भवती महिला के साथ दुष्कर्म की घटना की जानकारी मिलने पर उत्तराखण्ड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने स्वतः संज्ञान लेते हुए तत्काल हस्तक्षेप किया है। अनुसूचित जाति की पीड़िता ने गांव के ही युवक पर सार्वजनिक शौचालय में जबरन ले जाकर दुष्कर्म करने का गंभीर आरोप लगाया है।
घटना पर अध्यक्ष कण्डवाल ने कहा कि यह अत्यंत दुखद और निन्दनीय मामला है। इस प्रकार की संवेदनशील घटना समाज को झकझोरने वाली है और आरोपियों की घटिया तथा निकृष्ट मानसिकता को दर्शाती है। गर्भवती महिला के साथ इस तरह का कुकृत्य महिला अस्मिता पर सीधा प्रहार है।
संज्ञान लेने के तुरंत बाद अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने उपजिलाधिकारी चकराता क्षेत्र प्रेम लाल को फोन पर वार्ता के क्रम में निर्देशित किया कि यह मामला राजस्व पुलिस से तत्काल रेगुलर पुलिस को ट्रांसफर किया जाए, जिससे निष्पक्ष, त्वरित और प्रभावी जांच सुनिश्चित हो सके। उन्होंने जिलाधिकारी देहरादून को भी मामले में गंभीर, ठोस और कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए कहा है।
इसके अतिरिक्त, अध्यक्ष ने एसपी देहात देहरादून पंकज गैरोला को भी वार्ता करते हुये स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मामला रेगुलर पुलिस के पास आते ही त्वरित और सख्त कार्रवाई की जाए एवम आरोपी से किसी भी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए। अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने कहा “यह मामला किसी भी जाति से पहले महिला की अस्मिता पर आंच और असुरक्षा का है। आयोग महिलाओं के साथ इस प्रकार के कुकृत्य करने वालों को बिल्कुल नहीं बख्शेगा। दोषियों पर कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।”
उन्होंने यह भी निर्देशित किया है कि पीड़िता और उसके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए तथा पीड़िता को उचित से उचित चिकित्सा उपचार तत्काल उपलब्ध कराया जाए। गर्भावस्था को देखते हुए उसकी शारीरिक और मानसिक स्थिति पर विशेष ध्यान देने के आदेश जारी किए गए हैं। महिला आयोग ने स्पष्ट किया है कि पूरे मामले की लगातार मॉनिटरिंग की जाएगी। पीड़िता को हर संभव न्याय दिलाया जाएगा।
देहरादून। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण द्वारा अवैध निर्माण और प्लॉटिंग के खिलाफ अभियान लगातार जारी है। प्राधिकरण क्षेत्रान्तर्गत देहरादून, ऋषिकेश, विकासनगर, शिमला बाईपास सहित कई इलाकों में बीते दिनों महत्वपूर्ण कार्रवाइयाँ की गईं, जिनमें बड़े पैमाने पर ध्वस्तीकरण और सीलिंग शामिल रहे। एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने स्पष्ट संदेश दिया कि राजधानी देहरादून के सुनियोजित विकास और मास्टर प्लान के पालन में किसी भी प्रकार की ढील नहीं बरती जाएगी।
प्राधिकरण ने छरबा इंटर कॉलेज रोड स्थित मधुकर जोशी द्वारा लगभग 50 से 60 बीघा भूमि में की जा रही अवैध प्लॉटिंग पर बड़ी ध्वस्तीकरण कार्रवाई अमल में लाई। मौके पर अवैध रूप से काटी गई सड़कों और गैर-कानूनी रूप से विकसित हो रहे प्लॉटों को ध्वस्त कर दिया गया। कार्रवाई के दौरान अवर अभियंता सिद्धार्थ सेमवाल, अमन पाल, सुपरवाइजर टीम तथा पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहा। प्राधिकरण टीम ने स्पष्ट कर दिया कि बिना स्वीकृत नक्शे, बिना लेआउट अनुमोदन और नियमों के विपरीत होने वाली किसी भी प्रकार की प्लॉटिंग या निर्माण को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इसी क्रम में एमडीडीए ने शिमला बाईपास रोड स्थित बालाजी एन्क्लेव में दो अलग-अलग अवैध निर्माणों को सील किया। शौकीन द्वारा किए जा रहे अवैध निर्माण पर प्राधिकरण की टीम ने सीलिंग की कार्रवाई पूरी की। वहीं जुल्फी एवं अन्य द्वारा किए गए अवैध निर्माणों पर भी कार्रवाई करते हुए भवनों को सील किया गया। यह कार्रवाई संयुक्त सचिव गौरव चटवाल के निर्देशों पर सहायक अभियंता विजय रावत, अवर अभियंता जितेंद्र सिंह एवं सुपरवाइजरों की टीम द्वारा संपन्न की गई।
प्राधिकरण के साथ जनता की सजगता से रुकेगा अवैध निर्माण— बंशीधर तिवारी
एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि प्राधिकरण शहर के नियोजित विकास के लिए पूर्ण कड़ाई से कार्य कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अवैध कॉलोनाइज़र, अनधिकृत निर्माणकर्ता और बिना अनुमति भूमि काटने वालों पर निरंतर और सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने अपील की कि जनता किसी भी प्रकार की प्लॉटिंग या निर्माण शुरू करने से पूर्व प्राधिकरण से आवश्यक अनुमति अवश्य प्राप्त करे, जिससे उन्हें भविष्य में किसी प्रकार की जटिलता का सामना न करना पड़े। तिवारी ने कहा कि भूखंड या प्लॉट खरीदने से पहले नागरिक प्राधिकरण की वेबसाइट या कार्यालय से उसकी वैधता अवश्य जांच लें। साथ ही यदि कहीं भी अवैध प्लॉटिंग या बिना स्वीकृति निर्माण दिखाई दे तो इसकी सूचना तुरंत एमडीडीए को दें।
मास्टर प्लान के अनुरूप शहर के विकास का लक्ष्य — मोहन सिंह बर्निया
सचिव एमडीडीए मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि प्राधिकरण की प्राथमिकता देहरादून में नियम-सम्मत निर्माण को प्रोत्साहित करना और अवैध गतिविधियों पर पूर्ण रोक लगाना है। उन्होंने बताया कि मास्टर प्लान को ध्यान में रखते हुए सभी निर्माण गतिविधियों की सतत निगरानी की जा रही है। सचिव ने चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार के अनधिकृत निर्माण, अवैध प्लॉटिंग या नियम-विरुद्ध गतिविधि में शामिल व्यक्तियों पर ध्वस्तीकरण, सीलिंग सहित नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि एमडीडीए की टीमें प्रतिदिन क्षेत्रीय निरीक्षण कर रही हैं और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा रही है, जो लगातार जारी रहेगी।
सीएम धामी बोले—सरदार पटेल की दूरदर्शिता और दृढ़ नेतृत्व ने अखंड भारत की नींव रखी
देहरादून/वडोदरा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी गुजरात के वडोदरा स्थित साधली में सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर आयोजित यूनिटी मार्च एवं सरदार गाथा कार्यक्रम में शामिल हुए। इस कार्यक्रम में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सरदार पटेल ने अपनी अदम्य इच्छाशक्ति, दूरदर्शिता और अथक समर्पण से स्वतंत्र भारत की अखंडता की नींव रखी। खेड़ा और बारदोली के किसान आंदोलनों में उनके नेतृत्व ने उन्हें देश का सच्चा जन-नायक स्थापित किया।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” के संकल्प को नए आयाम मिल रहे हैं और सरदार पटेल के सपनों को मूर्त रूप दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकता, अखंडता और गौरव को सुदृढ़ करने की दिशा में केंद्र सरकार निरंतर महत्वपूर्ण कार्य कर रही है।
इस अवसर पर पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया, केंद्रीय राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे, गुजरात सरकार के कैबिनेट मंत्री जीतू वाघाणी सहित कई वरिष्ठजन एवं विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे।
ड्रग टेस्ट में स्टूडेंट पॉजिटिव मिलने पर डीन व कॉलेज स्वामी पर होगी आपराधिक कार्रवाई
देहरादून। जिले में नशीले पदार्थों के बढ़ते खतरे और विद्यार्थियों में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। जिलाधिकारी सविन बंसल ने सभी शिक्षण संस्थानों में रोस्टरवार ड्रग टेस्टिंग अभियान चलाने के निर्देश जारी किए हैं। निर्देशों के तहत मंगलवार को दूसरे दिन भी उप जिलाधिकारी सदर हरिगिरि के नेतृत्व में ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में 150 विद्यार्थियों की रैंडम सैंपलिंग की गई।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा है कि किसी भी स्कूल या कॉलेज में ड्रग टेस्टिंग के दौरान विद्यार्थी पॉजिटिव पाए जाने पर संबंधित डीन या संस्थान प्रबंधक के खिलाफ अपराधिक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नशामुक्त उत्तराखंड के संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए प्रशासन ने “कड़े और बड़े कदम” उठाए हैं, ताकि किशोरों और युवाओं को नशे के दुष्प्रभाव से बचाया जा सके।
ड्रग टेस्टिंग अभियान को लेकर जिलाधिकारी ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की कि वे इस प्रक्रिया को लेकर घबराएँ नहीं, बल्कि प्रशासन का सहयोग करें। उन्होंने कहा कि इस अभियान का मकसद विद्यार्थियों को नशे से दूर रखना और प्रदेश में नशामुक्त माहौल तैयार करना है।
जिला प्रशासन ने सभी सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों में एंटी-ड्रग्स कमेटी को सक्रिय करने और उसमें एक छात्र तथा एक छात्रा को प्रतिनिधि के रूप में शामिल करने के निर्देश भी दिए हैं। साथ ही, नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार से संबंधित सूचनाओं को प्रोत्साहित करने के लिए स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर हेल्पलाइन नंबरों के पोस्टर लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इन हेल्पलाइन में मानस हेल्पलाइन 1933, एनसीवी मानस पोर्टल और जिला डी-एडिक्शन सेंटर हेल्पलाइन 9625777399 शामिल हैं। इन नंबरों पर प्राप्त शिकायतों पर प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात कही है।
जिला प्रशासन रायवाला स्थित ओल्ड एज होम में 30 बेड वाले नशामुक्ति एवं मानसिक स्वास्थ्य केंद्र का संचालन कर रहा है। साथ ही एम्स ऋषिकेश के साथ एमओयू कर 10 बेड इंटेंसिव थेरेपी यूनिट को नशामुक्ति मामलों के लिए रिजर्व रखा गया है। इसके अलावा, जिला प्रशासन ने अपने स्तर पर एंटी-ड्रग हेल्पलाइन 9625777399 भी जारी की है, ताकि नशे के खिलाफ प्रभावी लड़ाई को और मजबूत बनाया जा सके।
