विवाह समारोह से लौटते समय हुआ हादसा
मसूरी के सेंट जॉर्ज स्कूल में योग शिक्षक के रूप में थे कार्यरत
देहरादून। थत्यूड़–मसूरी–देहरादून मोटर मार्ग पर सटागाड़ के पास देर रात एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना हो गई, जिसमें एक कार गहरी खाई में गिरने से चालक की मौत हो गई। मृतक की पहचान थत्यूड़ क्षेत्र के अलमस गांव निवासी अमित पवार के रूप में हुई है। देर रात हुई इस दुर्घटना के समय अमित पवार, जो अलमस गांव के रहने वाले थे, ओडारसू गांव से एक विवाह समारोह में शामिल होकर वापस घर लौट रहे थे। घटना स्थल उनके गांव से लगभग चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जहां अचानक वाहन अनियंत्रित होकर नीचे खाई में जा गिरा।
सुबह जब स्थानीय लोग मॉर्निंग वॉक पर निकले तो सड़क किनारे क्षतिग्रस्त वाहन और नीचे खाई में पड़े शव को देखकर घटना की जानकारी मिली। तुरंत ही इसकी सूचना थाना थत्यूड़ पुलिस को दी गई। सूचना पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और 108 एंबुलेंस सेवा की मदद से घायल अवस्था में पड़े अमित को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र थत्यूड़ ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
थानाध्यक्ष महावीर रावत ने बताया कि घटना की सूचना परिजनों को दे दी गई है और आगे की प्रक्रिया के तहत शव को पोस्टमॉर्टम के लिए सिविल अस्पताल मसूरी भेजा जाएगा। अमित पवार सेंट जॉर्ज स्कूल मसूरी में योग शिक्षक के रूप में कार्यरत थे और परिवार में अकेले कमाने वाले सदस्य थे। हादसे की खबर मिलते ही गांव और परिवार में शोक की लहर दौड़ गई। माता–पिता अपने इकलौते बेटे की आकस्मिक मौत से गहरे सदमे में हैं।
ऊपरी यमुना नदी बोर्ड की 9वीं रिव्यू कमेटी की बैठक, राज्यों के बीच जल बंटवारे पर हुई गहन चर्चा
देहरादून/नोएडा। ऊपरी यमुना नदी बोर्ड की 9वीं रिव्यू कमेटी की बैठक में प्रदेश के सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने राज्य में सिंचाई की कमी से पर्वतीय इलाकों में उगने वाली नकदी फसल फल, सब्जी आदि की उत्पादकता में कमी से पलायन का जिक्र करते हुए उत्तराखंड राज्य को उसकी मांग के अनुसार यमुना जल आवंटित किए जाने का अनुरोध किया।
नोएडा, गौतम बुद्ध नगर स्थित ऊपरी यमुना नदी बोर्ड भवन में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में भारत सरकार, जल शक्ति मंत्रालय, जल संसाधन गंगा संरक्षण विभाग, ऊपरी यमुना नदी बोर्ड द्वारा आयोजित रिव्यू कमेटी की नवीं बैठक में यमुना नदी से संबंधित विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई, जिनमें जलस्तर, प्रदूषण और जल-बंटवारे के मुद्दे शामिल रहे।
बैठक में प्रदेश के सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि ऊपरी यमुना बेसिन राज्यों उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली इन पांचों राज्यों के मध्य जल बंटवारे को लेकर 12 मई 1994 को एक समझौता हुआ और यमुना बेसिन राज्यों के बीच यमुना जल प्रवाह में से उत्तर प्रदेश को कुल 4.032 बी.सी. एम. जल आवंटित किया गया था। वर्ष 2000 में उत्तराखंड अलग राज्य बनने के बाद ऊपरी यमुना नदी बोर्ड समिति का छठ सदस्य बना। लेकिन उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच यमुना जल बंटवारे को लेकर समझौता न हो पाने की स्थिति में केंद्र के हस्तक्षेप के बाद उत्तराखंड राज्य को उसकी मांग से लगभग 32% कम यमुना जल आवंटित किया गया।
महाराज ने बैठक के दौरान राज्य का पक्ष रखते हुए कहा कि ऊपरी यमुना नदी बोर्ड की 8वीं रिव्यू कमेटी की 21 फरवरी 2024 की बैठक में उत्तराखंड राज्य को तत्कालीन उत्तर प्रदेश के 4.032 बी.सी.एम. यमुना जल के हिस्से में से 0.311बी.सी.एम.यमुना जल आवंटित हुआ था जो कि मांग से 32 प्रतिशत कम था। यमुना जल आवंटन को लेकर सहमति इस शर्त के साथ दी गई थी कि 2025 के बाद समझौता ज्ञापन 12 मई 1994 की समीक्षा की जाएगी।
महाराज ने कहा कि उत्तराखंड राज्य को लखवाड़ एवं किशाऊ बहुउद्देश्य परियोजनाओं से निर्मित होने वाले जलाशयों के दुष्परिणाम का भी सामना करना पड़ेगा राज्य में सिंचाई सुविधा बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। इसलिए समझौता ज्ञापन 12 मई 1994 की समीक्षा करते हुए उत्तराखंड राज्य को यमुना जल की उपलब्धता के अनुपात में जल आवंटित किया जाये।
महाराज ने दिल्ली में यमुना जल को दूषित होने से बचाने के लिए हरियाणा से यमुना नदी में अमोनिया और अन्य प्रदूषकों के निर्वहन को रोकने के लिए फैक्ट्रियों के पानी का पहले ट्रीटमेंट किया जाने का सुझाव देते हुए कहा कि इसके लिए, फैक्ट्रियों को अमोनिया-विशिष्ट उपचार प्रौद्योगिकियों में निवेश करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके अपशिष्ट का यमुना में छोड़े जाने से पहले ठीक से उपचार किया जाए।
ऊपरी यमुना नदी बोर्ड, रिव्यू कमेटी की नवीं बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, उत्तर प्रदेश के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह, दिल्ली के सिंचाई मंत्री प्रवेश वर्मा, हरियाणा की सिंचाई मंत्री श्रीमति श्रुति चौधरी और राजस्थान के सिंचाई मंत्री सुरेश सिंह रावत मौजूद रहे।
श्रेयस तलपड़े और आलोक नाथ पर भी शिकंजा
देहरादून। जनता से करोड़ों रुपये हड़पने वाली लोनी अर्बन मल्टी क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट कोऑपरेटिव सोसायटी (एलयूसीसी) के खिलाफ अब कार्रवाई की बड़ी शुरुआत हो गई है। हाईकोर्ट के आदेशों के बाद सीबीआई ने सोसायटी और उसके 46 सहयोगियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर ली है। एफआईआर में कंपनी के ब्रांड एंबेसडर अभिनेता श्रेयस तलपड़े और अभिनेता आलोक नाथ के नाम भी शामिल किए गए हैं।
इससे पहले राज्य पुलिस इस घोटाले में 18 मामले दर्ज कर चुकी थी, जिनमें से 10 मामलों में चार्जशीट विशेष बड्स एक्ट कोर्ट में दाखिल हो चुकी है। हाईकोर्ट द्वारा सीबीआई जांच के आदेश दिए जाने के बाद केंद्रीय एजेंसी ने कोटद्वार कोतवाली में दर्ज पहली प्राथमिकी को आधार बनाते हुए यह बड़ा कदम उठाया है।
2019 में शुरू हुआ था जाल, लोगों की बचत पर ‘उच्च मुनाफे’ का लालच
एलयूसीसी ने वर्ष 2019 में उत्तराखंड में कई जिलों में तेजी से शाखाएँ खोलते हुए आम लोगों को कम समय में अधिक रिटर्न का प्रलोभन दिया। कंपनी ने छोटी-छोटी बचत से लेकर भारी निवेश तक सब कुछ एजेंटों के माध्यम से इकट्ठा किया। करोड़ों रुपये जुटाने के बाद अचानक कंपनी के दफ्तर बंद हो गए, जिससे निवेशकों में हड़कंप मच गया। कंपनी से जुड़े कई एजेंट भी खुद को अनजान बताते मिले।
पहली शिकायत कोटद्वार निवासी तृप्ति नेगी की ओर से एक जून को दर्ज कराई गई थी। इसके बाद पूरे प्रदेश से लगातार शिकायतें सामने आईं और पुलिस ने कुल 18 एफआईआर दर्ज कीं। मामले की जांच सीबीसीआईडी को भी सौंपी गई थी।
महिलाओं का बड़ा विरोध, सीएम आवास कूच तक—अब सीबीआई करेगी पूरी जांच
इस घोटाले ने प्रदेशभर में खासकर महिलाओं को भारी नुकसान पहुंचाया। कई जिलों में प्रदर्शन हुए और देहरादून में प्रभावित महिलाओं ने मुख्यमंत्री आवास तक कूच किया। पुलिस और सीबीसीआईडी कुल 10 मामलों में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, लेकिन हाईकोर्ट के निर्देश के बाद सीबीआई अब इस पूरे घोटाले की गहन जांच करेगी।
सीबीआई ने दर्ज की गई एफआईआर में अन्य सभी मामलों के तथ्यों और नामजद आरोपियों को भी शामिल किया है।
राज्य में थीं 35 शाखाएँ, विदेशों में निवेश का भी लालच दिया गया
एलयूसीसी ने उत्तराखंड में कुल 35 शाखाएँ संचालित की थीं। निवेशकों को देश-विदेश में सोना, तेल, रिफाइनरी सहित कई क्षेत्रों में भारी मुनाफे का दावा कर पैसे जमा कराए गए। कई मामलों में निवेश की अवधि पूरी होने के बाद भी लोगों को पैसा वापस नहीं मिला। पहले भी पुलिस इस घोटाले में कई गिरफ्तारियाँ कर चुकी है।
चार सांसदों ने अमित शाह से की थी मुलाकात, सीबीआई जांच को मिली थी मंजूरी
घोटाले की गंभीरता को देखते हुए उत्तराखंड के चार सांसद—त्रिवेंद्र सिंह रावत, अनिल बलूनी, अजय भट्ट और माला राज्यलक्ष्मी शाह—ने 24 जुलाई को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलकर कार्रवाई की मांग की थी। इससे पहले ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस मामले में सीबीआई जांच की अनुमति दे चुके थे।
मुख्यमंत्री ने खिलाड़ी को शानदार प्रदर्शन पर बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की
देहरादून। वर्ल्ड बॉक्सिंग कप 2025 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए रजत पदक जीतने वाले उत्तराखंड के प्रतिभाशाली बॉक्सर पवन बर्त्वाल ने मुख्यमंत्री आवास पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से शिष्टाचार भेंट की। मुख्यमंत्री ने पवन को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन के लिए बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए लगातार प्रयासरत है।

उन्होंने बताया कि खेलों को बढ़ावा देना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी उद्देश्य से प्रतिभावान खिलाड़ियों को हर संभव सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही राज्य में खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ बनाने के लिए भी निरंतर कार्य किए जा रहे हैं।
सीएम ने आशा व्यक्त की कि पवन बर्त्वाल जैसे युवा खिलाड़ी आने वाले समय में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य का नाम और अधिक रोशन करेंगे।
2026 के शैक्षणिक सत्र से कक्षाएं शुरू करने का लक्ष्य
कैबिनेट मंत्री ने विभाग की योजनाओं की समीक्षा की
देहरादून। प्रदेश की स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी शुरू करने की राह में लगातार बाधा बन रही फॉरेस्ट लैंड का मामला आखिर सुलझ गया है। वन विभाग से जमीन दिए जाने की सैद्धांतिक सहमति बनने के बाद अब 2026 के सत्र से यूनिवर्सिटी शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। खेल मंत्री रेखा आर्या ने विभाग की समीक्षा बैठक के बाद यह जानकारी दी।
विधानसभा भवन स्थित कार्यालय में आयोजित बैठक के बाद कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि दो-तीन बार इस मामले की फाइल वन विभाग से लौटा दी गई थी। लेकिन अब दोनों पक्षों में सैद्धांतिक सहमति बन गई है। उन्होंने अधिकारियों को विश्वविद्यालय के पद सृजित कराने की प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए।
कैबिनेट मंत्री ने बताया कि चंपावत में महिला स्पोर्ट्स कॉलेज का शिलान्यास राज्य स्थापना के रजत जयंती समारोह में प्रधानमंत्री ने किया था। इस बैठक में इस कॉलेज में भी अगले साल से कक्षाएं शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
कैबिनेट मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना और मुख्यमंत्री खिलाड़ी प्रोत्साहन योजना के तहत अक्टूबर तक का पूरा पैसा लाभार्थियों को दिया जा चुका है । आगे के लिए बजट की डिमांड करने के निर्देश उन्होंने अधिकारियों को दे दिए हैं।
इसके अलावा पदक विजेताओं को आउट ऑफ टर्न जॉब देने के लिए खेल विभाग अब यह प्रस्ताव शासन को भेजेगा कि सारे अधिसंख्य पद खेल विभाग में ही सृजित किए जाएं। खेल मंत्री ने कहा कि दूसरे विभागों में आउट ऑफ टर्न जॉब देने के पुराने खराब अनुभव को देखते हुए विभाग अपने यहां ही अधिसंख्य पद चाहता है।
बैठक में खेल मंत्री ने इस पर नाराजगी जताई कि खेल विभाग के लिए आबकारी से ₹1 प्रति बोतल सेस का धन अब तक विभाग को क्यों नहीं मिल पाया है। उन्होंने अधिकारियों से इसमें तुरंत कदम उठाने के लिए कहा।
बैठक में विशेष प्रमुख खेल सचिव अमित सिन्हा, खेल निदेशक आशीष चौहान, अपर निदेशक अजय अग्रवाल, महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज के प्राचार्य राजेश मंमगाई आदि मौजूद रहे।
अर्थ एवं संख्या विभाग के 117 सहित चार विभागों में नियुक्ति—सीएम बोले, ईमानदारी से निभाएँ दायित्व
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरूवार को मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित कार्यक्रम में लोक सेवा आयोग के माध्यम से चयनित अर्थ एवं संख्या, कृषि एवं उद्यान तथा महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग के 178 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। जिसमें अर्थ एवं संख्या विभाग के 117, कृषि विभाग के 12 उद्यान विभाग के 30 तथा महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग के 19 अभ्यर्थी शामिल है। उन्होंने नवनियुक्त अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि सभी ईमानदारी, निष्ठा एवं समर्पण के साथ दायित्वों का निर्वहन कर उत्तराखंड को विकसित, आत्मनिर्भर एवं देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।
मुख्यमंत्री ने नव-चयनित अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण, विश्वसनीय एवं समयबद्ध आँकड़े ही योजनाओं की प्रभावी रूपरेखा, क्रियान्वयन और मूल्यांकन का आधार हैं तथा अर्थ एवं संख्या विभाग राज्य में डेटा संग्रह एवं विश्लेषण का नोडल विभाग होने के कारण अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि सहायक सांख्यिकी अधिकारी सरकार की विभिन्न योजनाओं और नीतियों के प्रभाव का आकलन कर तंत्र को तथ्यपरक फीडबैक उपलब्ध कराएँ, ताकि आवश्यकतानुसार सुधारात्मक कदम समय पर उठाए जा सकें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में पिछले साढ़े चार वर्षों के दौरान साढ़े 26 हजार से अधिक युवाओं को पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से सरकारी सेवा में अवसर प्रदान किए गए हैं, जो राज्य के गठन के बाद पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल की तुलना में दोगुने से भी अधिक हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने नकल माफियाओं पर कड़ा प्रहार करते हुए सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया है, जिससे भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, गति और विश्वसनीयता सुनिश्चित हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, नई स्टार्टअप एवं उद्यमिता नीति, नई पर्यटन नीति, कृषि एवं फल उत्पादन तथा होम-स्टे जैसी योजनाओं के माध्यम से राज्य में रोजगार एवं स्वरोजगार के व्यापक अवसर सृजित हुए हैं, जिसके परिणामस्वरूप प्रदेश में रिवर्स माइग्रेशन के आँकड़ों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
इस अवसर पर श्री कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, रेखा आर्या, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक भरत चौधरी, सविता कपूर, 20 सूत्रीय कार्यक्रम एवं क्रियान्वयन समिति श्री के उपाध्यक्ष ज्योति प्रसाद गैरोला, प्रमुख सचिव आर.मीनाक्षी सुंदरम, सचिव एस.एन. पाण्डेय एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
मंत्री गणेश जोशी बोले—पारदर्शिता और सेवा भाव से ही सफल होती हैं सहकारी समितियां
देहरादून। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने आज देहरादून स्थित ग्रीन व्यू गार्डन, सिनोला में बहुउद्देशीय साधन सहकारी समिति लिमिटेड चन्द्रोटी के नव-निर्वाचित सभापति, उपसभापति एवं संचालकों के शपथ ग्रहण समारोह में बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग किया। शपथ ग्रहण समारोह के दौरान मंत्री गणेश जोशी की उपस्थिति में नव-निर्वाचित पदाधिकारियों ने अपने दायित्वों का ईमानदारी, पारदर्शिता और समर्पण के साथ निर्वहन करने की शपथ ली।
कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने नवगठित टीम को बधाई देते हुए कहा कि सहकारी समितियां ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में आर्थिक सशक्तिकरण की सबसे प्रभावी इकाइयों में से एक हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भी सहकारी समितियों को मजबूत बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है, जिससे किसानों, महिलाओं, युवाओं और स्थानीय उद्यमियों को नए अवसर उपलब्ध हो सकें।
उन्होंने कहा कि सहकारी समितियां तभी सफल होती हैं जब उनके चुने गए प्रतिनिधि संवेदनशीलता, पारदर्शिता और सेवा की भावना के साथ काम करें। उन्होंने भरोसा जताते हुए कहा कि नव-निर्वाचित पदाधिकारी समाज के अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से काम करेंगे।
कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने समिति को क्षेत्र में कृषि आधारित गतिविधियों, स्वरोजगार, समूह आधारित उत्पादन, विपणन चैनल मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित भी किया।
इस अवसर पर सभापति किशन सिंह पुंडीर, उपसभापति जीत सिंह, श्याम सिंह पुंडीर, पंकज सैनी, योगेश कुमारी, किरन, अनुराग, लक्ष्मण सिंह रावत, संध्या थापा, रेणु शर्मा, सुनील क्षेत्री, हरिंदर रावत, माया राणा सहित कई लोग उपस्थित रहे।
शिक्षा से आपदा प्रबंधन तक—एआई से बदलेगा उत्तराखंड का भविष्य
देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने राज्य की पहली एआई नीति का ड्राफ्ट जारी कर डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। नीति का उद्देश्य पहाड़ से लेकर मैदानी इलाकों तक शिक्षा, स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन और शासन को एआई आधारित सेवाओं से मजबूत करना है। सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने ड्राफ्ट पर जनता और विशेषज्ञों से सुझाव आमंत्रित किए हैं। सरकार ने मिशन को लागू करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा क्षमता, एआई एप्लिकेशन डेवलपमेंट और क्लीन एनर्जी को मुख्य आधार बनाया है।
एआई मिशन के सात प्रमुख सिद्धांत
टेलीमेडिसिन, ई-लर्निंग सहित मौजूदा योजनाओं को एआई तकनीक से अपग्रेड कर सरकारी सेवाओं को अधिक सक्षम बनाया जाएगा।
दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों, बुजुर्गों और कमजोर समुदायों तक एआई की मदद से तेजी से सेवाएं पहुंचेंगी।
पर्यटन, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, जलवायु और शहरी विकास जैसे क्षेत्रों में एआई तकनीक को प्राथमिकता मिलेगी।
इंडिया एआई, हिमालयी राज्यों, निजी कंपनियों और शोध संस्थानों के साथ मिलकर संयुक्त समाधान विकसित किए जाएंगे।
युवाओं को एआई स्किलिंग, रोजगार और स्टार्टअप के अधिक अवसर देकर राज्य में ही करियर निर्माण को बढ़ावा मिलेगा।
एआई सिस्टम पूरी तरह पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह होगा ताकि आम जनता का भरोसा कायम रहे।
हर विभाग के लिए एआई पायलट प्रोजेक्ट चलाने हेतु एक लीन एआई मिशन और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जाएगा।
2030 और 2047—दो बड़े लक्ष्य
2030 तक इंटरनेट पहुंच 78% से बढ़ाकर 100% और 2047 तक 130% करने का लक्ष्य।
स्मार्टफोन उपयोग 65% से बढ़ाकर 90% और डिजिटल साक्षरता 40% से बढ़ाकर 80% की जाएगी।
सभी ग्राम पंचायतों तक भारतनेट पहुंचाए जाने के साथ पहाड़ों में पीपीपी मॉडल से नेटवर्क का विस्तार होगा।
2030 तक कंप्यूट क्षमता 775 TFLOPS से बढ़ाकर 2047 तक 7500 TFLOPS और डेटा सेंटर क्षमता 5 से बढ़ाकर 45 MW की जाएगी।
गढ़वाली, कुमाऊंनी और हिमालयी पारिस्थितिकी से जुड़े स्थानीय डेटा सेट तैयार किए जाएंगे।
2030 तक तीन और 2047 तक सात एआई इनोवेशन सेंटर; 15 से बढ़ाकर 30 एआई इंक्यूबेशन सेंटर स्थापित किए जाएंगे।
देहरादून और रुड़की में एआई लैब तथा IIT रुड़की में स्टार्टअप इंक्यूबेशन सेंटर की स्थापना की जाएगी।
आपदा और जलवायु प्रबंधन में एआई का बड़ा असर
एआई की मदद से भूस्खलन, फ्लैश फ्लड और ग्लेशियल लेक फटने जैसी घटनाओं की पहले से पहचान संभव होगी।
सैटेलाइट व ड्रोन से मिले डेटा का एआई तुरंत विश्लेषण कर राहत और बचाव कार्य तेज करेगा।
बाढ़ और भूकंप जैसे परिदृश्यों के वर्चुअल सिमुलेशन से अधिकारी बेहतर तैयारी कर सकेंगे।
पुलों, सड़कों और बांधों की एआई सेंसर से लगातार निगरानी कर समय रहते खराबी का पता लगेगा।
आपदा के दौरान एआई चैटबॉट बहुभाषीय अपडेट और जानकारी उपलब्ध कराएगा।
ग्लेशियर और मौसम में हो रहे बदलाव का एआई विश्लेषण करने से भविष्य की नीतियां अधिक प्रभावी बनेंगी।
वन्यजीव गतिविधियों की निगरानी कर मानव–वन्यजीव संघर्ष कम करने में भी एआई मददगार साबित होगा।
नहर निर्माण, बैराज मरम्मत और जल उपलब्धता पर दोनों राज्यों के बीच हुई अहम चर्चा
लखनऊ/देहरादून। उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिष्टाचार भेंट की। बैठक के दौरान दोनों राज्यों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में विशेष रूप से इकबालपुर नहर के निर्माण, बनबसा बैराज की वृहद मरम्मत, तथा हरिद्वार की दो नहरों के उत्तराखंड को हस्तांतरण जैसे विषयों पर गंभीर विमर्श किया गया। सतपाल महाराज ने इन परियोजनाओं के महत्व और इनके समयबद्ध क्रियान्वयन पर जोर दिया।
इसके अलावा, मुजफ्फरनगर जिले के पवित्र तीर्थ स्थल शुक्रताल में सोलानी और बाणगंगा नदी में पर्याप्त जल उपलब्धता सुनिश्चित करने के मुद्दे पर भी दोनों नेताओं ने विस्तृत विचार-विमर्श किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले इस क्षेत्र के लिए जल की निरंतर उपलब्धता अत्यंत आवश्यक है।
ग्रामीण बोले—कई महीनों से भालू की गतिविधियों से परेशान हैं लोग
टिहरी। भिलंगना ब्लॉक के मगरौं–पौखाल क्षेत्र में एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां गूंज संस्था के कर्मचारी पर भालू ने अचानक हमला कर दिया। हमले की दहशत में कर्मचारी की हालत बिगड़ गई और रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। घटना से क्षेत्र में दहशत फैल गई है।
जानकारी के अनुसार, गूंज संस्था से जुड़े कर्मचारी राकेश गिरी देर शाम स्वाड़ी और चाह गडोलिया क्षेत्र में सफाई किट वितरण से लौट रहे थे। करीब आठ बजे मगरौं–पौखाल मार्ग पर अचानक भालू ने उन पर झपट्टा मार दिया, जिससे वह बाइक से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। पीछे आ रहे लोगों ने शोर मचाकर भालू को भगाया, लेकिन हमले का डर राकेश गिरी की हालत पर भारी पड़ गया और उन्हें घबराहट के कारण हार्ट अटैक आ गया।
स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें तुरंत श्रीनगर बेस अस्पताल ले जाया गया, जहां गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें ऋषिकेश एम्स के लिए रेफर किया। लेकिन कीर्तिनगर पहुँचने से पहले ही उनकी मौत हो गई।
ग्राम खाल–पाली के प्रधान वीरेन्द्र सिंह नेगी सहित ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र में लंबे समय से भालू की गतिविधियां बढ़ी हुई हैं, जिससे लोग दहशत में जी रहे हैं। उनका कहना है कि गडोलिया, स्वाड़ी, पौखाल, खाल, पाली और कोटी में भालू कई महीनों से घूम रहा है, जिसकी शिकायत डीएफओ तक भी की गई है। ग्रामीणों ने वन विभाग से भालू को पकड़ने और संवेदनशील इलाकों में पिंजरे लगाने की मांग की है।
उधर, पौखाल वन रेंज अधिकारी हर्षराम उनियाल का कहना है कि घटना की जानकारी मिलने के बाद इलाके में गश्त बढ़ा दी गई है, हालांकि विभाग को भालू हमले की कोई आधिकारिक सूचना प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि मौके पर भालू के पंजों के निशान भी नहीं मिले हैं।
