देहरादून । मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर आयोजित आदि गौरव महोत्सव में भगवान बिरसा मुंडा जी को कोटि-कोटि नमन किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि “आदि गौरव महोत्सव केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनजातीय समाज की गौरवशाली परंपराओं, वीरता, संस्कृति और आस्था का उत्सव है। ऐसे आयोजन जनजातीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच प्रदान करते हैं तथा समाज के अन्य वर्गों को जनजातीय समुदाय की समृद्ध कला और संस्कृति से परिचित कराते हैं।”
जनजातीय समाज देश की विविधता की सबसे बड़ी ताकत – मुख्यमंत्री
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा जी संघर्ष, स्वाभिमान और संगठित शक्ति के प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि “जब तक समाज की सबसे कमजोर कड़ी मजबूत नहीं होती, तब तक देश वास्तविक रूप से मजबूत नहीं हो सकता।”
उन्होंने कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार जनजातीय समाज के सम्मान और सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। केंद्र सरकार द्वारा जनजातीय बजट को तीन गुना तक बढ़ाना, जनजातीय समुदाय के प्रति उनकी संवेदनशीलता का परिचायक है।
128 जनजातीय गांवों का चयन – शिक्षा, स्वास्थ्य व आर्थिक सशक्तिकरण पर विशेष फोकस
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान के तहत उत्तराखंड के 128 जनजातीय गांवों को चिह्नित किया गया है, जहां आधारभूत सुविधाओं के विकास के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका को बढ़ावा देने की दिशा में विशेष कार्य किए जा रहे हैं।
जनजातीय समाज की प्रमुख पहल
मुख्यमंत्री ने जनजातीय समुदाय के कल्याण हेतु राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों का विवरण भी साझा किया । उन्होंने बताया कि प्रदेश में चार एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय — कालसी, मेहरावना, बाजपुर व खटीमा में संचालित हैं, पिथौरागढ़ जिले में भोटिया तथा राजी जनजाति के लिए नया एकलव्य विद्यालय खोलने हेतु केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है। प्राथमिक से स्नातकोत्तर तक छात्रवृत्ति योजना, जिससे हजारों जनजातीय छात्र लाभान्वित हो रहे हैं।
प्रदेश में 16 राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय संचालित हैं । शिक्षित बेरोजगार युवाओं के लिए 3 आईटीआई कॉलेज, तकनीकी प्रशिक्षण हेतु समर्पित हैं।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निःशुल्क कोचिंग व छात्रवृत्ति, जनजातीय समाज की बेटियों के विवाह हेतु ₹50,000 अनुदान,जनजातीय कला, संस्कृति व खेलों को बढ़ावा देने के लिए राज्य जनजाति महोत्सव व खेल महोत्सव का नियमित आयोजन,
जनजातीय शोध संस्थान के लिए ₹1 करोड़ का कॉर्पस फंड की व्यवस्था है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ये सभी प्रयास जनजातीय समाज को मुख्यधारा से जोड़ने और उनके आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास को सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
जनजातीय गौरव दिवस का महत्व
मुख्यमंत्री ने स्मरण कराया कि वर्ष 2021 में आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस घोषित किया। यह दिवस केवल भगवान बिरसा मुंडा जी के योगदान को याद करने का ही नहीं, बल्कि जनजातीय संस्कृति और इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का भी अवसर है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार इस महोत्सव के आयोजन के लिए 50 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करती है ताकि जनजातीय संस्कृति का संरक्षण और विस्तार सुनिश्चित हो सके।
पहली बार जनजातीय इतिहास को मिला राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व की सरकारों ने जनजातीय समाज के स्वतंत्रता संग्राम तथा राष्ट्र निर्माण में योगदान को कभी पर्याप्त स्थान नहीं दिया। लेकिन आज मोदी जी के नेतृत्व में देश जागृत है और जनजातीय नायकों के महान योगदान को इतिहास में उचित सम्मान मिल रहा है।
जनजातीय समाज के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई
मुख्यमंत्री धामी ने कहा, “मैं आपको आश्वस्त करता हूँ कि हमारी सरकार उत्तराखंड के आदिवासी समाज के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर संकल्पित है। हम ‘विकल्प रहित संकल्प’ के साथ उत्तराखंड को देश का श्रेष्ठ राज्य बनाने के लिए सतत प्रयत्नशील हैं।”
कार्यक्रम में देशभर और राज्य के विभिन्न जनजातिया एवं सांस्कृतिक समूहों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये ।
कार्यक्रम में राज्य सभा सांसद नरेश बंसल, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक खजान दास, मुन्ना सिंह चौहान, सविता कपूर, सचिव एवं अपर सचिव समाज कल्याण व विभाग के अन्य अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।
भूकंप राहत तैयारी को परखने हेतु जिले में व्यापक मॉक ड्रिल संपन्न
पौड़ी- शनिवार को राज्य स्तर पर भूकंप जैसी आपदा से निपटने की तैयारियों का मूल्यांकन करने के लिए व्यापक मॉक अभ्यास आयोजित किया गया। जनपद पौड़ी में भी यह अभ्यास आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर स्वयं मुख्य सचिव आनंद वर्धन इसकी मॉनिटरिंग कर रहे थे।
मॉक अभ्यास के तहत सुबह 9:56 बजे श्रीनगर स्थित एनआईटी मैदान के स्टेजिंग एरिया को स्वीत गाँव में भूकंप आने और जनहानि की आशंका की सूचना मिली। संबंधित टीमों ने बिना विलंब के राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया।
इसी दौरान सुबह 10:18 बजे न्यू बस अड्डा पौड़ी स्थित स्टेजिंग एरिया को मैसमोर इंटर कॉलेज का भवन भूकंप से ध्वस्त होने और छात्र फंसे होने की सूचना मिली। सूचना पर तत्परता से प्रतिक्रिया देते हुए एसडीआरएफ, फायर सर्विस, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की टीमें तुरंत बचाव कार्य हेतु मौके पर पहुंची और त्वरित खोज एवं राहत कार्य प्रारंभ किया।
मॉक ड्रिल के दौरान कलेक्ट्रेट स्थित नियंत्रण कक्ष से जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने स्वयं पूरे अभ्यास की निगरानी की। उन्होंने लगातार विभागीय अधिकारियों से अपडेट प्राप्त किए और राहत कार्यों के समन्वय एवं समयबद्धता का आकलन किया।

जिलाधिकारी ने कहा कि आपदा के समय त्वरित प्रतिक्रिया और विभागों के बीच बेहतर तालमेल अनिवार्य है। यह मॉक ड्रिल वास्तविक परिस्थितियों के लिए तैयार रहने और संभावित कमजोरियों को पहचानने में मदद करती है।
उन्होंने सभी विभागों को निर्देशित किया कि राहत उपकरणों, मानव संसाधन और संचार प्रणाली की नियमित जांच सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में देरी नहीं हो। मॉक ड्रिल में पुलिस, एसडीआरएफ, स्वास्थ्य विभाग, राजस्व, फायर सर्विस, नगर निकाय तथा अन्य विभागों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
पौड़ी और श्रीनगर दोनों स्थानों में एक साथ भूकंप की स्थिति का सिमुलेशन किया गया, जिसमें विभिन्न विभागों ने रेस्क्यू, राहत एवं उपचार की कार्यप्रणाली का प्रदर्शन किया।
पौड़ी स्थित मैसमोर इंटर कॉलेज में मॉक ड्रिल के दौरान 80 छात्र–छात्राएं मौजूद थे। भूकंप आने की काल्पनिक स्थिति में 8 छात्र घायल हो गए। सूचना मिलते ही एसडीआरएफ, पुलिस, फायर सर्विस और स्वास्थ्य विभाग की टीमें मौके पर पहुँचीं। राहत कार्य के दौरान 2 छात्रों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि एक गंभीर छात्र को हेली सेवा के माध्यम से ऋषिकेश एम्स भेजा गया। अन्य घायलों का प्राथमिक उपचार स्कूल परिसर में ही किया गया।
इसी दौरान टेका मार्ग पर 33 केवी विद्युत लाइन क्षतिग्रस्त हो गयी, जिससे पौड़ी–सतपुली की बिजली आपूर्ति बाधित हो गयी। फायर सर्विस और वन विभाग की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया। इस दौरान वन विभाग का एक कार्मिक घायल हुआ, जिसे जिला अस्पताल ले जाया गया। विद्युत आपूर्ति को सुचारू रखने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में श्रीनगर लाइन से विद्युत आपूर्ति बहाल की गयी। पौड़ी में पूरे राहत एवं बचाव अभियान की निगरानी इंसिडेंट कमांडर एवं संयुक्त मजिस्ट्रेट दीक्षिता जोशी ने की।
वहीं श्रीनगर में मॉक ड्रिल के दौरान सूचना मिली कि भूकंप से कीर्तिनगर का पुल ध्वस्त हो गया है। इसके बाद पुलिस प्रशासन ने रूद्रप्रयाग और चमोली से आने वाले वाहनों को पौड़ी–सबदरखाल–देवप्रयाग मार्ग से डायवर्ट किया। इसी क्रम में श्रीकोट स्थित विशाल मेगा मार्ट मॉल में सौर शॉर्ट सर्किट होने से लिफ्ट बंद हो गयी, जिसमें 20 लोग फंस गए थे। राहत एवं बचाव दल ने सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला।
श्रीनगर के स्वीत गांव में भूकंप से चार मकान क्षतिग्रस्त होने की सूचना पर राहत टीमें मौके पर पहुँचीं। यहां 18 लोग घायल हुए, जिन्हें श्रीनगर बेस अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल में आईसीयू वार्ड को भी क्षतिग्रस्त दिखाया गया, जिसमें 17 मरीज थे। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने 12 मरीजों को आपातकालीन वार्ड में, जबकि 5 मरीजों को मिनी आईसीयू में शिफ्ट किया। श्रीनगर क्षेत्र के राहत एवं बचाव कार्यों की कमान इंसिडेंट कमांडर एवं उपजिलाधिकारी नूपुर वर्मा ने संभाली।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी गिरीश गुणवंत, अपर जिलाधिकारी अनिल सिंह गर्ब्याल, पीडी डीआरडीए विवेक कुमार उपाध्याय, सीओ तुषार बोरा, सीएमओ शिव मोहन शुक्ला, अर्थ एवं संख्याधिकारी राम सलोने सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को दून इंटरनेशनल स्कूल में आयोजित देहरादून लिटरेचर फेस्टिवल में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने वेणु अग्रहारा ढींगरा द्वारा लिखित पुस्तक लीडिंग लेडीज ऑफ इंडिया का विमोचन किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि साहित्य भावनाओं, विचारों और अनुभवों को अभिव्यक्त करने का सशक्त माध्यम है। सामाजिक व सांस्कृतिक चेतना के प्रसार में भी साहित्य की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने आशा जताई कि यह पुस्तक विशेष रूप से महिलाओं को आगे बढ़ने और नेतृत्व की दिशा में प्रेरणा देगी।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार महिला सशक्तीकरण के लिए लगातार प्रयासरत है। महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने हेतु अनेक योजनाएं प्रभावी रूप से संचालित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि समाज के समग्र विकास के लिए महिलाओं का मजबूत होना आवश्यक है और आज उत्तराखण्ड की बेटियां हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की आत्मा उसकी संस्कृति और परंपराओं में बसती है, जिसे संरक्षित रखने की दिशा में सरकार निरंतर कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले दो वर्षों से प्रवासी उत्तराखण्डी सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ना है। इसके बाद अनेक प्रवासियों ने अपने मूल गांवों के विकास और राज्य निर्माण में सहयोग की इच्छा जताई है।
कार्यक्रम में गीता पुष्कर धामी, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, दून इंटरनेशनल स्कूल समूह के संस्थापक डी.एस. मान सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।
देहरादून। प्रसिद्ध पर्वतारोही एवं पद्मभूषण सम्मान प्राप्त बछेंद्री पाल ने शनिवार को मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए 10 लाख रुपए का चेक प्रदान किया। यह चेक उनकी ओर से राज्य महिला उद्यमिता परिषद की उपाध्यक्ष श्रीमती विनोद उनियाल द्वारा मुख्यमंत्री को सौंपा गया।
मुख्यमंत्री ने बछेंद्री पाल के इस सामाजिक योगदान के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संकट की घड़ी में सहयोग एवं सेवा की भावना ही समाज को जोड़ती है। उन्होंने कहा कि ऐसे योगदान न केवल ज़रूरतमंदों की मदद करते हैं, बल्कि जनहित के कार्यों के प्रति लोगों को प्रेरित भी करते हैं।


हल्द्वानी में शांति योग धाम चैम्पियनशिप का शुभारंभ
मंत्री ने कहा – योग और रोग विलोम शब्द, फिट उत्तराखंड मिशन की आधारशिला योग
हल्द्वानी। कैबिनेट मंत्री एवं उत्तराखंड की खेल मंत्री रेखा आर्या ने शनिवार को ऊंचा पुल, अमृत आश्रम क्षेत्र में आयोजित शांति योग धाम चैंपियनशिप का शुभारंभ किया। उद्घाटन अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा योग को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के बाद आज योग का सूर्य एशिया से लेकर अफ्रीका, यूरोप और अमेरिका तक दीदिप्तिमान हो रहा है।
खेल मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि योग अब भारत की सांस्कृतिक धरोहर के साथ-साथ विश्व का स्वास्थ्य संदेश बन चुका है।
मंत्री ने कहा कि 38वें राष्ट्रीय खेलों में पहली बार योगासन को एक खेल स्पर्धा के रूप में शामिल कराना उत्तराखंड और देश के लिए गर्व की बात है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में ओलंपिक जैसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी योगासन एक खेल विधा के रूप में सम्मिलित होगा।
रेखा आर्या ने कहा कि योग और रोग दोनों विलोम अर्थ वाले शब्द हैं। जहां योग है, वहां रोग नहीं हो सकता। इसलिए फिट इंडिया और फिट उत्तराखंड अभियान की आधारशिला भी योग ही है।
उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे अपनी दिनचर्या में योग को शामिल करें ताकि समाज स्वस्थ और सशक्त बने।
इस अवसर पर हल्द्वानी के मेयर गजराज सिंह बिष्ट, नैनीताल दुग्ध संघ के अध्यक्ष मुकेश बोरा, शांति योगधाम संस्था के संस्थापक दर्शन सिंह बोरा, विजयलक्ष्मी बोरा, भुवन भट्ट, पलक चौरसिया, खुशी सोनकर, प्रेम बोरा, महेंद्र रावत, दीपक पांडे, मुकेश रघुवंशी, आशीष शर्मा और ममता पंत सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।
देहरादून। लंबे इंतजार के बाद राजाजी टाइगर रिज़र्व में पर्यटकों के लिए सफारी सीजन आधिकारिक रूप से शुरू हो गया है। शनिवार को रिज़र्व के सभी प्रमुख पर्यटन गेट खोल दिए गए, जिनमें मोतीचूर, चीला, रानीपुर और मोहंड रेंज शामिल हैं। यह क्षेत्र देश-विदेश के वन्यजीव प्रेमियों के बीच खासा लोकप्रिय है।
मोतीचूर रेंज में उद्घाटन से पहले पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद रेंज अधिकारी महेश सेमवाल और वार्डन सरिता भट्ट ने रिबन काटकर पर्यटन गतिविधियों की औपचारिक शुरुआत की। वहीं चीला रेंज में वार्डन चित्रांजलि नेगी, रेंज अधिकारी बी.डी. तिवारी और रेंज अधिकारी राजेश जोशी ने सफारी मार्ग को खोलते हुए सीजन का उद्घाटन किया।
इस वर्ष मोतीचूर रेंज में पर्यटकों के स्वागत के लिए नया रिसेप्शन सेंटर तैयार किया गया है। साथ ही वन्यजीवों और आगंतुकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त प्रबंध किए गए हैं।
पार्क प्रशासन ने इस सीजन में प्रवेश शुल्क में किसी भी तरह की बढ़ोतरी नहीं की है। मोतीचूर रेंज अधिकारी महेश सेमवाल के अनुसार भारतीय पर्यटक से 150 रुपये, विदेशी पर्यटक से 600 रुपये, भारतीय वाहनों से 250 रुपये और विदेशी वाहनों से 500 रुपये प्रवेश शुल्क लिया जाएगा। छात्र समूहों को प्रवेश शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट मिलेगी।
वन विश्राम भवन का किराया 1000 रुपये तथा व्यावसायिक कैमरे का शुल्क 500 रुपये निर्धारित किया गया है।
वन्यजीव संरक्षण के दृष्टिगत मोतीचूर रेंज में अनियमित (डग्गामार) वाहनों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। केवल पंजीकृत टैक्सी और अधिकृत वाहन ही जंगल सफारी के लिए प्रवेश कर सकेंगे। पार्क प्रशासन ने साफ किया है कि बिना रजिस्टर्ड वाहन के किसी भी पर्यटक को प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।
नैनीताल। बहुचर्चित बनभूलपुरा रेलवे अतिक्रमण प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को हुई सुनवाई के बाद अगली तारीख 2 दिसंबर तय कर दी है। अदालत ने हाईकोर्ट के हटाए जाने वाले आदेश पर लगी अंतरिम रोक को यथावत रखने का निर्देश दिया।
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जयमाला बागची की खंडपीठ ने मामले की विस्तृत सुनवाई की। यह याचिका अब्दुल मतीन सिद्दीकी द्वारा दायर लीव-टू-अपील से संबंधित है, जिसमें उन्होंने उत्तराखंड हाईकोर्ट की उस खंडपीठीय व्यवस्था को चुनौती दी है, जिसमें बनभूलपुरा क्षेत्र से रेलवे अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए गए थे।
सुनवाई के दौरान रेलवे, राज्य सरकार और प्रभावित पक्षों के अधिवक्ताओं ने अपने-अपने तर्क रखे। रेलवे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ऐश्वार्या भाटी ने दलील देते हुए कहा कि रेल परियोजनाओं के विस्तार और निर्माण के लिए कुल 30 हेक्टेयर जमीन की आवश्यकता है। इस भूमि पर मौजूद अतिक्रमण को हटाए बिना रेल सेवा विकास संभव नहीं है, इसलिए अदालत को हस्तक्षेप करना चाहिए।
राज्य सरकार की तरफ से अधिवक्ता अभिषेक अत्रे ने पक्ष रखा।
वहीं कब्जेदारों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद, प्रशांत भूषण और अन्य वकीलों ने रेलवे के दावों पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि जिस भूमि की मांग रेलवे अब कर रहा है, वह उसके पहले दिए गए लिखित दावे में शामिल नहीं थी। साथ ही उन्होंने यह भी तर्क दिया कि निर्माणाधीन रिटेनिंग वॉल के बाद रेलवे के ढांचे को कोई खतरा नहीं बचता।
कब्जेदारों की ओर से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत विस्थापन के प्रस्ताव का भी विरोध किया गया। उनका कहना था कि बनभूलपुरा के निवासियों को जबरन हटाकर किसी अन्य स्थान पर बसाना अनुचित है। इस पर रेलवे के अधिवक्ताओं ने कड़ा विरोध जताया।
अब अदालत इस मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर को करेगी।
एमडीडीए का सिटी फॉरेस्ट पार्क बन रहा देहरादून का धड़कता दिल, प्रकृति-स्वास्थ्य-पर्यटन का आधुनिक संगम
सिटी फॉरेस्ट पार्क मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की दूरदृष्टि और हरित-शहरी विकास की सोच का परिणाम- बंशीधर तिवारी
देहरादून – मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा सहस्त्रधारा रोड हैलीपैड के ठीक सामने पर विकसित किया गया सिटी फॉरेस्ट पार्क देहरादून का नया पहचान दे रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का यह ड्रीम प्रोजेक्ट न केवल देहरादून के जनमानस की पहली पसंद बन रहा है, बल्कि राज्य में आधुनिक हरित-विकास का एक मॉडल भी प्रस्तुत कर रहा है। लगभग 12.45 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला यह पार्क प्रकृति, स्वास्थ्य, आयुर्वेद, योग, मनोरंजन और पर्यटन का अनूठा संगम है।
प्रकृति के बीच हंसी-खुशी के पल
बाल दिवस के अवसर पर भी पार्क में बच्चों की असाधारण भीड़ देखने को मिली। स्कूलों से आए समूहों ने प्राकृतिक पगडंडियों पर घूमकर, बांस के गज़ेबो में बैठकर और ट्री हाउस में खेलते हुए दिन का भरपूर आनंद लिया। स्कूल से आये शिक्षकों ने भी बताया कि देहरादून में बच्चों के लिए इतना बड़ा, सुरक्षित और प्राकृतिक खुला स्थान मिलना किसी उपहार से कम नहीं है। यह दृश्य स्पष्ट करता है कि यह पार्क केवल एक अवकाश-स्थल नहीं, बल्कि बच्चों में प्रकृति के प्रति प्रेम और जागरूकता बढ़ाने का माध्यम भी बन रहा है। एमडीडीए द्वारा सभी बच्चों के लिए सूक्ष्य जलपान की व्यवस्था भी कई गई थी।
वन-जैसा वातावरण, आधुनिक सुविधाएँ
सिटी फॉरेस्ट पार्क की सबसे बड़ी विशेषता इसका “वन जैसे माहौल” को सुरक्षित रखना है। विकास कार्य इस तरह किया गया है कि प्राकृतिक ढलानें, पेड़ों का आवरण, मौसमी नाले, वनस्पतियों और मिट्टी की संरचना को नुकसान न पहुंचे। यही कारण है कि यहाँ आते ही शहर का शोर-शराबा अचानक धीमा लगता है और जंगल जैसी शांति महसूस होती है।
हर आयु वर्ग के लोगों के लिए आकर्षक
पार्क को हर आयु वर्ग के लोगों के लिए आकर्षक और उपयोगी बनाने के उद्देश्य से यहाँ अनेक सुविधाएँ विकसित की गई हैं। पार्क में तैयार साइकिल ट्रैक, लगभग 1.2 किलोमीटर लंबा वन-वॉक फिटनेस ट्रेल, सुव्यवस्थित जॉगिंग ट्रैक और प्राकृतिक ढलानों के बीच बना बच्चों का मेज़ (Maze) इसे बच्चों और युवाओं के लिए रोमांचक बनाते हैं। प्राकृतिक सौंदर्य से मेल खाते हुए झूला पुल, शांत वातावरण में बने योग एवं ध्यान केन्द्र, और स्वास्थ्य लाभ हेतु तैयार किया गया एक्यूपंक्चर ज़ोन आगंतुकों को मानसिक-शारीरिक आराम प्रदान करते हैं। इसके अलावा, पार्क में सुंदर बांस गज़ेबो, रंग-बिरंगी फूलों की क्यारियाँ, बच्चों और वयस्कों दोनों के लिए सुरक्षित ट्री हाउस, सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए ओपन एयर थिएटर, आरामदायक कैफेटेरिया, शांत पठन क्षेत्र, युवाओं के लिए स्केटिंग रिंक, प्राकृतिक स्पर्श से युक्त पेबल क्रॉसिंग, तथा जैव-विविधता संरक्षण को बढ़ावा देता वेटलैंड रिस्टोरेशन ज़ोन विकसित किया गया है। इन सभी सुविधाओं का उद्देश्य लोगों को एक ही स्थान पर स्वास्थ्य, मनोरंजन, शिक्षा और प्रकृति का अद्भुत संगम प्रदान करना है, जिससे यह पार्क देहरादून का सबसे पसंदीदा शहरी हरित क्षेत्र बनकर उभर रहा है।
एमडीडीए का दूरदृष्टि-युक्त विकास, 40.07 करोड़ की लागत से
एमडीडीए द्वारा लगभग 40.07 करोड़ रुपये की लागत से तैयार पार्क को आधुनिक हरित-ढांचे का उत्कृष्ट उदाहरण बनाने की रूपरेखा है। पार्क को पर्यावरण, पर्यटन और जनसुविधा—तीनों आयामों के संतुलन के साथ विकसित किया जा रहा है। पार्क के समग्र विकास की परिकल्पना को आकार देते हुए यहाँ प्रवेश द्वार को महासू देवता मंदिर की पारंपरिक शैली से प्रेरित होकर रूप दिया गया है, जो आगंतुकों का स्वागत सांस्कृतिक सौंदर्य के साथ करता है। पार्क में कार और बसों के लिए पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था की गई है, जबकि ऊँचाई पर बना टॉप व्यू एरिया पूरे परिसर का खूबसूरत दृश्य प्रस्तुत करता है। आगंतुकों की सुविधा के लिए टिकट घर और सूचना केंद्र, आरामदायक बेंच, स्वच्छ शौचालय, तथा हर ओर फैला प्राकृतिक हरित क्षेत्र जिसमें सजावटी और स्थानीय प्रजातियों के पेड़ शामिल हैं, पार्क को विशेष पहचान देते हैं। पार्क में बांस के गज़ेबो, जल पौधों वाला एक्वाटिक प्लांट एरिया, सभी हिस्सों को जोड़ने वाला मुख्य पथ और प्राकृतिक वातावरण से मेल खाता लकड़ी का पुल भी बनाया गया है। संपूर्ण क्षेत्र के चारों ओर 3.5 मीटर चौड़ा प्राकृतिक परिधि मार्ग, 0.6 मीटर चौड़ा मौसमी नाला, झाड़ियों से सजा किनारा और फूलों की क्यारियों के बीच बने आकर्षक वॉकवे पार्क की सुंदरता को और बढ़ाते हैं। आगंतुकों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए एक्यूपंक्चर क्षेत्र, शांत योग एवं ध्यान स्थल, बच्चों का सुरक्षित खेल क्षेत्र, जॉगिंग और फिटनेस ट्रेल, तथा पठन क्षेत्र बनाए गए हैं। वहीं, आधुनिक स्पर्श देने के लिए पेड़ों की छाया में नर्सरी के लिए स्थान, 1.2 किमी लंबा वन-वॉक ट्रेल भी विकसित किए गए हैं। स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए पूरे परिसर में गीले और सूखे कचरे के डस्टबिन, खाद बनाने का गड्ढा, तथा पेयजल फव्वारे सहित सुसज्जित कैफेटेरिया उपलब्ध है। बच्चों और वयस्कों दोनों के लिए अलग-अलग ट्री हाउस, आरामदायक बांस की बेंच, साइकिल ट्रैक, बच्चों के लिए अलग साइकिल ट्रैक के साथ स्केटिंग रिंक, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए खुला थिएटर, तथा पुस्तक वितरण और योग सामग्री के लिए समर्पित स्टोर भी पार्क की विशेषताएँ हैं, जो इसे संपूर्ण रूप से एक आधुनिक, हरित और बहुआयामी सार्वजनिक स्थल बनाते हैं। इस योजना में वैज्ञानिक दृष्टिकोण से मिट्टी संरक्षण, जल संरक्षण, वर्षा जल प्रबंधन, शहरी बायो-डायवर्सिटी और स्थानीय पेड़ों का संरक्षण भी शामिल है।
जनता की बढ़ती आवाजाही
उद्घाटन के बाद से सुबह और शाम यहां आने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हजारों लोग रोजाना जॉगिंग, सैर, योग या मनोरंजन के लिए आते हैं। बुजुर्गों के लिए सुरक्षित बैठने की व्यवस्था, महिलाओं के लिए फिटनेस-ट्रेक और बच्चों के लिए खुला खेल परिसर इसे परिवारों का नया पसंदीदा गंतव्य बन रहा है।
पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा लाभ
इस प्रोजेक्ट के पूर्ण विकसित होने पर सहस्त्रधारा क्षेत्र में पर्यटन का नया आयाम जुड़ा है। स्थानीय दुकानों, कैफे, गाइडों, छोटे व्यवसायों और रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि होगी। एमडीडीए का मानना है कि यह पार्क देहरादून की पर्यटन पहचान को नई दिशा दे सकता है।
राज्य की हरित-पर्यटन पहचान का प्रमुख केंद्र
उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी ने कहा सिटी पार्क देहरादून जिस स्वरूप में सामने आया है, वह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की दूरदृष्टि और हरित-शहरी विकास की सोच का परिणाम है। हमारा लक्ष्य था कि शहर में ऐसे और भी पार्क विकसित किये जायें, जहाँ प्रत्येक आयु वर्ग के लोग स्वास्थ्य, मनोरंजन और प्रकृति तीनों का समग्र अनुभव ले सकें। बाल दिवस के अवसर पर विभिन्न स्कूलों के बच्चों की भारी संख्या में उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह पार्क आने वाली पीढ़ियों के लिए कितना उपयोगी और आकर्षक सिद्ध हो रहा है। बच्चों की मुस्कान, उनकी ऊर्जा और प्रकृति के बीच उनका उत्साह हमारे लिए सबसे बड़ा संदेश है। मुझे पूरा विश्वास है कि आने वाले समय में यह पार्क देहरादून का धड़कता दिल और राज्य की हरित-पर्यटन पहचान का प्रमुख केंद्र बनेगा।
देहरादून का भविष्य, प्रकृति के साथ
सचिव एमडीडीए मोहन सिंह बर्निया ने कहा सिटी फॉरेस्ट पार्क केवल एक पार्क नहीं, बल्कि देहरादून के भविष्य का हरित-धरोहर है। यहाँ प्रकृति है, स्वास्थ्य है, योग और आयुर्वेद है, बच्चों का हँसी-खेल है, पर्यटन का आकर्षण है, और एक आधुनिक, स्वच्छ और स्थायी शहर की झलक है। आने वाले वर्षों में यह पार्क राजधानी देहरादून की पहचान, गौरव और प्रमुख आकर्षण के रूप में विश्व स्तर पर उभारने का प्रयास है।
मंत्री धन सिंह रावत ने बच्चों की प्रतिभा की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए दिए प्रेरक संदेश
डोईवाला। बाल दिवस के अवसर पर राजकीय इंटर कॉलेज कोटी भानियावाला में राज्य स्तरीय बाल चौपाल कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें आज प्रदेश के चिकित्सा एवं शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा, कला और विचारों को प्रभावशाली रूप से मंच पर प्रस्तुत किया।

मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बच्चों के उत्साह की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रेरक संदेश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने, सकारात्मक सोच विकसित करने और नेतृत्व क्षमता को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
बाल चौपाल में छात्र-छात्राओं ने विभिन्न गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिससे कार्यक्रम उत्साह और ऊर्जा से भर गया।
