शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन व उद्योग के क्षेत्र में हासिल की कई उपलब्धियां, संस्कृति और जनसहभागिता बताई सबसे बड़ी ताकत
देहरादून। उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने कहा कि पिछले 25 वर्षों में उत्तराखंड ने विकास की अनेक ऊंचाइयां छुई हैं। उन्होंने कहा कि यह यात्रा जनसहभागिता, परिश्रम और राज्यवासियों की एकजुटता की मिसाल है। राज्य ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बावजूद शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, उद्योग और कृषि जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखंड की सबसे बड़ी ताकत उसकी संस्कृति, परंपरा और लोगों की दृढ़ इच्छाशक्ति है, जिन्होंने हर चुनौती को अवसर में बदला है।
राज्यपाल ने कहा कि राज्य की कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक तंत्र ने सीमित संसाधनों के बावजूद जनसेवा में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में उत्तराखंड को देश के आदर्श राज्य के रूप में विकसित करने की दिशा में सबको मिलकर कार्य करना होगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अवसर पर कहा कि राज्य निर्माण की इन 25 वर्षों की यात्रा में उत्तराखंड ने अनेक चुनौतियों का सामना करते हुए आज देश के अग्रणी एवं सशक्त राज्यों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं और कठिन परिस्थितियों के बावजूद राज्य की कानून-व्यवस्था को बनाए रखना एक बड़ी चुनौती रही, लेकिन उत्तराखंड पुलिस ने जनसेवा का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला अपराधों के निराकरण में उत्तराखंड पुलिस ने सराहनीय कार्य किया है। गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार महिला अपराधों एवं पोक्सो अधिनियम के मामलों के निस्तारण में उत्तराखंड देश में पांचवें स्थान पर रहा है। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधों पर नियंत्रण के लिए पुलिस की तकनीकी क्षमता को और अधिक सशक्त बनाया जा रहा है तथा ‘ड्रग फ्री उत्तराखंड’ के संकल्प को एक जन आंदोलन का रूप दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार ने पिछले साढ़े चार वर्षों में अनेक उल्लेखनीय उपलब्धियां अर्जित की हैं। किसानों की आय में वृद्धि के मामले में उत्तराखंड देश में प्रथम स्थान पर रहा है। राज्य की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट 12.69 प्रतिशत रही है, जो राष्ट्रीय औसत से चार गुना अधिक है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने में देश का अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। पर्यटन क्षेत्र में भी राज्य की पहचान नई ऊंचाइयों तक पहुंची है। उत्तराखंड के चार गांव — जखोल, हर्षिल, गूंजी और सूपी — को देश के सर्वश्रेष्ठ पर्यटन ग्राम का पुरस्कार मिला है। इसके साथ ही राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में उत्तराखंड को ‘मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट’ का सम्मान भी प्राप्त हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार समग्र विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक मूल्यों और जनसांख्यिकीय स्वरूप को सुरक्षित रखने के लिए पूर्ण रूप से संकल्पबद्ध है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की आत्मा उसकी संस्कृति और लोकजीवन में बसती है, और सरकार विकास के हर कदम पर इस पहचान को संरक्षित रखेगी।
इस अवसर पर राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक प्रेमचंद अग्रवाल, खजान दास, दुर्गेश्वर लाल, मेयर देहरादून सौरभ थपलियाल, मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, डीजीपी दीपम सेठ सहित शासन, पुलिस और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
डीएम सविन बंसल ने हरी झंडी दिखाकर किया फ्लैग ऑफ
महिला वर्ग में तनुश्री और पुरुष वर्ग में नितिन भंडारी रहे प्रथम
देहरादून। उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस की रजत जयंती के अवसर पर शनिवार को जिला प्रशासन देहरादून के तत्वावधान में दून मैराथन का आयोजन किया गया। जिलाधिकारी सविन बंसल ने पवेलियन ग्राउंड से हरी झंडी दिखाकर मैराथन को रवाना किया।
8 किलोमीटर की यह दौड़ पवेलियन ग्राउंड से शुरू होकर कनक चौक, ऐस्ले हॉल, बहल चौक, दिलाराम चौक, ब्रह्मकमल चौक होते हुए एनआईवीएच तक गई और वहां से वापस पवेलियन ग्राउंड में समाप्त हुई। इस मैराथन में लगभग 700 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा कि यह अवसर हमारे लिए ऐतिहासिक और गौरवशाली है। उत्तराखंड राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के इस विशेष अवसर पर आयोजित यह दून मैराथन केवल एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि एकता, ऊर्जा और संकल्प का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि मैराथन हमें दृढ़ संकल्प, धैर्य और निरंतर आगे बढ़ते रहने का संदेश देती है। जैसे दौड़ में लक्ष्य तक पहुँचने के लिए सतत प्रयास जरूरी होता है, वैसे ही राज्य के विकास के लिए भी प्रत्येक नागरिक का योगदान आवश्यक है।
जिलाधिकारी ने कहा कि प्रदेश का युवा वर्ग हमारी शक्ति और भविष्य है। उनके कदमों की गति में उत्तराखंड का उज्ज्वल कल निहित है। यह आयोजन “खेल भावना, स्वास्थ्य और एकता” का प्रतीक है। हमें मिलकर अपने राज्य को स्वच्छ, स्वस्थ, समृद्ध और आदर्श बनाने का संकल्प लेना चाहिए।
महिला वर्ग में तनुश्री चौहान प्रथम, गौरी रावत द्वितीय तथा सुधा पटेल तृतीय स्थान पर रहीं। पुरुष वर्ग में नितिन भंडारी प्रथम, मुकेश द्वितीय और विपिन तृतीय स्थान पर रहे।
इस अवसर पर जिला पर्यटन विकास अधिकारी विजेंद्र पांडेय, जिला खेल अधिकारी रविंद्र सिंह, जिला युवा कल्याण अधिकारी प्रमोद पांडेय सहित विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि और प्रतिभागी उपस्थित रहे।
भारतीय हॉकी के 100 साल पूरे होने पर खिलाड़ियों को दी शुभकामनाएं
हल्द्वानी मानसखंड खेल परिसर में हॉकी में मंत्री ने आजमाए हाथ
हल्द्वानी। शुक्रवार को भारतीय हॉकी के 100 साल पूरे होने के अवसर पर खेल मंत्री रेखा आर्या ने हल्द्वानी स्थित मानसखंड खेल परिसर में हॉकी खिलाड़ियों के साथ खेल में हाथ आजमाएं। इस मौके पर यहां एक प्रदर्शनी मैच का आयोजन भी किया गया।
खेल मंत्री रेखा आर्या शुक्रवार को बिना पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के गोलापुर स्टेडियम पहुंची और वहां हॉकी खिलाड़ियों से मिलकर उन्हें शुभकामनाएं दी। खेल मंत्री रेखा आर्या ने खिलाड़ियों को बताया कि आज ही के दिन 1925 में भारतीय हॉकी महासंघ की स्थापना की गई थी। इसके बाद भारतीय हॉकी टीम ने पहली बार 1928 के ओलंपिक में हिस्सा लिया और गोल्ड मेडल जीतकर पूरी दुनिया में भारतीय हॉकी का परचम फहराया।
खेल मंत्री रेखा आर्या ने खिलाड़ियों से कहा कि एक जमाने में दुनिया की कोई भी टीम भारतीय हॉकी टीम के साथ खेलने में डरती थी। उन्होंने कहा कि युवा हॉकी खिलाड़ी भारतीय हॉकी का यह पुराना गौरव वापस लाने का संकल्प लेकर तैयारी करें तो फिर से ऐसी सफलता पाई जा सकती है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में हॉकी का कल्चर तेजी से विकसित हो रहा है और आधुनिक दौर में भी प्रदेश ने वंदना कटारिया जैसे खिलाड़ी दिए हैं।
उन्होंने कहा कि अगले ओलंपिक के लिए भारतीय हॉकी टीम में प्रदेश का भी अच्छा प्रतिनिधित्व रहे, यह लक्ष्य लेकर खिलाड़ी तैयारी करें।
इस अवसर पर सहायक निदेशक रसिका सिद्दकी, जिला उप खेल अधिकारी वरुण बेलवाल आदि उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री धामी बोले— वंदे मातरम् भारतीय अस्मिता और राष्ट्रभावना का अमर प्रतीक
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ पर समस्त प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ भारतीय अस्मिता और राष्ट्रभावना का अमर प्रतीक है। यह गीत हमें बार-बार यह स्मरण कराता है कि आज़ादी केवल अधिकार नहीं, बल्कि मातृभूमि के प्रति उत्तरदायित्व भी है—उसकी सेवा, सम्मान और संरक्षण का संकल्प।
सीएम धामी ने कहा कि हर वर्ष 7 नवंबर को राष्ट्रीय गीत की वर्षगांठ केवल एक गीत का उत्सव नहीं, बल्कि भारत माता के प्रति शाश्वत निष्ठा और प्रेम की पुनर्पुष्टि का अवसर है।
मुख्यमंत्री धामी और कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने किया उद्घाटन
सांस्कृतिक कलाकारों और बैंड ने जमाया रंग
देहरादून। राज्य स्थापना की रजत जयंती के अवसर पर परेड ग्राउंड देहरादून में युवा महोत्सव का भव्य और रंगारंग आगाज हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और युवा कल्याण एवं पीआरडी मंत्री रेखा आर्या ने संयुक्त रूप से किया। इस मौके पर प्रदेश भर से आए युवाओं और सांस्कृतिक कलाकारों की सहभागिता ने पूरे परिसर को उत्साह और ऊर्जा से सराबोर कर दिया।
उद्घाटन के पहले मुख्यमंत्री और मंत्री रेखा आर्या ने प्रदर्शनी में लगे सभी स्टालों का निरीक्षण किया और विशेष रूप से तैयार किए गए ड्रोन कबड्डी एरिना का भी उद्घाटन किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश सरकार युवाओं को सशक्त बनाने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है उन्होंने कहा कि भारत को विश्व गुरु और आर्थिक महाशक्ति बनाने में सबसे बड़ी भूमिका युवाओं की ही रहने वाली है।
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि प्रदेश की युवा शक्ति ही 2047 के विकसित भारत के सपने को साकार करने की सामर्थ्य रखती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवाओं के स्किल डेवलपमेंट, रोजगारपरक शिक्षा, खेल और अन्य रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए सतत प्रयास कर रही है।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री रेखा राना राज्य आंदोलनकारी और उत्तराखंड राज्य का गठन करने वाले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को नमन किया।
उद्घाटन समारोह के दौरान प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आए कलाकारों ने लोक संस्कृति पर आधारित प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। खटीमा से आए बैंड ने श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।
कार्यक्रम में सांसद नरेश बंसल, विधायक खजान दास, अल्पसंख्यक आयोग अध्यक्ष फरजाना बेगम, विशेष प्रमुख खेल सचिव अमित सिन्हा, प्रताप सिंह, मीता सिंह सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
“चिपको आंदोलन” को मुख्यमंत्री धामी ने बताया महिला शक्ति और पर्यावरण प्रेम का वैश्विक संदेश
रामनगर। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड राज्य स्थापना की रजत जयंती के शुभ अवसर पर रामनगर में राज्य स्तरीय जन वन महोत्सव का शुभारंभ किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वन्य जीवों का संरक्षण देवभूमि की संस्कृति का अभिन्न अंग है और प्रकृति का संरक्षण हमारे संस्कारों में समाहित है। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने मानव और प्रकृति के सहअस्तित्व की जो विचारधारा दी, वह आज भी हमारी जीवनशैली का आधार है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह जन वन महोत्सव जनता और जंगलों के बीच अटूट रिश्ते का प्रतीक है। यह हमें सिखाता है कि विकास तभी सार्थक है जब पारिस्थितिकी और आर्थिकी के बीच सामंजस्य बना रहे। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना और उसे अपने जीवन का हिस्सा बनाना समय की मांग है।
“चिपको आंदोलन” महिला शक्ति और पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक – मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री धामी ने वर्ष 1973 के चमोली जिले में हुए चिपको आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखंड की महिलाओं ने पेड़ों से लिपटकर जो संदेश दिया था, उसने विश्वभर में पर्यावरण संरक्षण की नई दिशा दी। यह आंदोलन महिला सशक्तिकरण, सत्याग्रह और पर्यावरण प्रेम का प्रतीक बन गया।
प्रकृति: संस्कृति एवं विकास का संतुलन: उत्तराखंड की पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य गठन के 25 वर्षों में उत्तराखंड ने प्रकृति, संस्कृति और विकास का संतुलन बनाए रखते हुए उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने कहा कि राज्य की हरियाली, समृद्ध जैव विविधता और वन्य जीव हमारे प्रदेश की पहचान हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार इकोलॉजी, इकोनॉमी और टेक्नोलॉजी के संतुलन पर कार्य कर रही है। वन्य जीव संरक्षण के लिए प्रदेश में जीपीएस ट्रैकिंग, ड्रोन सर्विलांस, डॉग स्क्वॉड जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है।
इको-टूरिज्म और रोजगार सृजन पर दिया जा रहा है ध्यान
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में इको-टूरिज्म मॉडल पर तेजी से काम किया जा रहा है ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलें और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे। उन्होंने कहा कि बिजरानी, गिरिजा और ढिकुली जोन को आधुनिक रूप में विकसित किया गया है, जिससे हजारों ग्रामीणों को प्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त हुआ है।
उन्होंने कहा कि नेचर गाइड, ड्रोन पायलट, वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर, वाइल्डलाइफ टूरिज्म आधारित कौशल को उद्यम के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में राज्य सरकार लगातार प्रयासरत है।
प्रकृति संरक्षण में बच्चों की भी हो भागीदारी
मुख्यमंत्री धामी ने नगर वन में विभिन्न विद्यालयों के बच्चों द्वारा तैयार की गई चित्रकला एवं कलाकृतियों का अवलोकन किया और उनकी रचनात्मकता की सराहना की। उन्होंने कहा कि बच्चों में पर्यावरण संरक्षण की भावना विकसित करना सबसे बड़ी पूंजी है।
मुख्यमंत्री ने की विकास संबंधी विभिन्न घोषणाएँ
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर क्षेत्र के विकास हेतु कई घोषणाएँ की जिसमें ग्राम लेती-चोपड़ा को नए राजस्व ग्राम के रूप में विकसित कर पानी, बिजली, शिक्षा, सड़क और स्वास्थ्य की मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराए जाने, ग्राम भलौन में सिंचाई और पेयजल ट्यूबवेल की स्थापना, तुमड़िया रोड को मालधन से जोड़े जाने तथा पर्यटन सत्र 2025-26 में महिला जिप्सी चालकों के विशेष प्रशिक्षण के बाद शेष पंजीकरण पूर्ण किए जाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने नगर वन में लाइट एंड साउंड शो शीघ्र प्रारंभ किये जाने, रामनगर में सामुदायिक सोवेनियर शॉप का निर्माण कर स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन दिये जाने की भी घोषणा की।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा वन विभाग के विभिन्न प्रभागों, व महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा लगाए गए स्टालों का भी निरीक्षण किया गया तथा एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत पौधा भी रोपित किया।
इस अवसर पर वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि राज्य सरकार वन एवं वन्य जीव संरक्षण के साथ स्थानीय आजीविका बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि वन विभाग के प्रयासों से प्रदेश में वन्य जीवों की संख्या में निरंतर वृद्धि हुई है।
प्रमुख सचिव वन आर.के. सुधांशु ने वन संरक्षण, मानवदृवन्य जीव संघर्ष की रोकथाम और संरक्षण योजनाओं की जानकारी दी।
कार्यक्रम में विधायक दीवान सिंह बिष्ट, अध्यक्ष अनुसूचित जाति आयोग मुकेश कुमार, प्रमुख वन संरक्षक डॉ. समीर सिन्हा, मुख्य वन संरक्षक (कुमाऊं) डॉ. तेजस्विनी पाटिल, नगर पालिका अध्यक्ष हाजी मोहम्मद अकरम, क्षेत्र प्रमुख मंजू नेगी, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. मंजूनाथ टीसी सहित बड़ी संख्या में स्थानीय जनप्रतिनिधि, अधिकारी, विद्यार्थी और नागरिक उपस्थित रहे।
सैनिक कल्याण विभाग के पुनर्गठन, कार्यालयों के निर्माण और सहायता राशि बढ़ाने का सीएम धामी ने किया ऐलान
हल्द्वानी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरूवार को राज्य स्थापना की रजत जयंती के अवसर पर हल्द्वानी के एम.बी.पी.जी. कॉलेज प्रांगण में आयोजित ‘पूर्व सैनिक सम्मेलन’ का शुभारंभ किया। इस अवसर पर प्रदेशभर से बड़ी संख्या में पूर्व सैनिकों, वीर नारियों, वीरांगनाओं एवं उनके परिजनों द्वारा प्रतिभाग किया गया।
मुख्यमंत्री ने उपस्थित पूर्व सैनिकों पर पुष्पवर्षा कर राज्य निर्माण व राष्ट्र सेवा में उनके योगदान के लिये सभी का अभिनन्दन किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का हर परिवार गर्व से कह सकता है कि उसके घर से कोई न कोई भारत माता की सेवा में समर्पित है। मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड वास्तव में वीरभूमि है, जहाँ की माटी में ही राष्ट्रभक्ति और बलिदान की भावना रची-बसी है।
मुख्यमंत्री धामी ने की सैनिक कल्याण से जुड़ी कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार सैनिकों एवं उनके परिवारों के कल्याण के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। उन्होंने इस अवसर पर सैनिक कल्याण विभाग के पुनर्गठन और सुदृढ़ीकरण की घोषणा करते हुए कहा कि विभाग की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी एवं पारदर्शी बनाया जाएगा ताकि हर सैनिक परिवार तक योजनाओं का लाभ सहज रूप से पहुँच सके।
उन्होंने कहा कि हल्द्वानी, अल्मोड़ा और पौड़ी में जिला सैनिक कल्याण कार्यालयों एवं आवासीय भवनों के पुनर्निर्माण का कार्य किया जाएगा, जिससे पूर्व सैनिकों और वीर नारियों को बेहतर सुविधाएँ मिल सकेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीद सैनिकों की नारियों को आवासीय भवन निर्माण हेतु दी जाने वाली सहायता राशि को 2 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपये किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हल्द्वानी में सैनिकों के 150 बच्चों के लिए एक आधुनिक छात्रावास का निर्माण किया जाएगा, जिससे सैनिक परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुरक्षित आवासीय सुविधा मिल सकेगी।
सैनिक कभी ‘पूर्व’ नहीं होता, वह सदैव सैनिक रहता है- मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सैनिकों का जीवन अनुशासन, समर्पण और बलिदान की मिसाल है। उन्होंने कहा कि “सैनिक कभी पूर्व सैनिक नहीं होता, वह सदैव सैनिक ही रहता है।” मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में राष्ट्र विरोधी सोच का कोई स्थान नहीं है और आज भारत में सभी जरूरी सैन्य उपकरण देश में ही बनाए जा रहे हैं तथा भारत आत्मनिर्भर बन रहा है। ऑपरेशन सिंधु मेघ में स्वदेशी ब्रह्मोस और आकाश मिसाइलों की सफलता का भी उन्होंने जिक्र किया। सम्मेलन में जनपद नैनीताल की 31 तथा ऊधमसिंहनगर की 13 वीर नारियों को मुख्यमंत्री धामी द्वारा शॉल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
“वीर नारियों का सम्मान पूरे राज्य के लिए गौरव का क्षण”-सैनिक कल्याण मंत्री
कार्यक्रम में सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि यह दिन उत्तराखंड के लिए गर्व और भावनाओं से परिपूर्ण है। उन्होंने प्रदेशवासियों को राज्य स्थापना दिवस की शुभकामनाएँ दीं और कहा कि उत्तराखंड की पवित्र भूमि ने देश को अनेक वीरता पदक विजेता दिए हैं, परमवीर चक्र, महावीर चक्र, वीर चक्र और शौर्य चक्र से सम्मानित वीर, जो सदैव हमारी प्रेरणा हैं।
उन्होंने कहा कि आज की वीर नारियों और वीरांगनाओं का सम्मान केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि पूरे राज्य के लिए गौरव का क्षण है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड का पंचम धाम, सैन्य धाम का शीघ्र लोकार्पण किया जाएगा। वीरता पदक प्राप्त सैनिकों को निशुल्क बस यात्रा की सुविधा दी गई है तथा प्रदेश सरकार द्वारा अब तक 22 हजार से अधिक सैनिकों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने बताया कि हल्द्वानी में छात्रावास निर्माण हेतु गन्ना सेंटर के समीप 6.4 हेक्टेयर भूमि का चिन्हांकन किया जा चुका है और मुख्यमंत्री द्वारा इसका शिलान्यास शीघ्र किया जाएगा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि उत्तराखंड सैनिक बाहुल्य प्रदेश है और सरकार सैनिकों तथा उनके परिवारों के कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
कार्यक्रम में विधायक बंशीधर भगत, रामसिंह कैड़ा, डॉ. मोहन बिष्ट, राज्यसभा सांसद महेन्द्र भट्ट, मेयर गजराज बिष्ट, जिला पंचायत अध्यक्ष दीपा दरम्वाल, जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट, दर्जा राज्य मंत्री नवीन वर्मा, सुरेश भट्ट, अनिल कपूर (डब्बू), शंकर कोरंगा, कुमाऊँ आयुक्त दीपक रावत, डीएम ललित मोहन रयाल, एसएसपी मंजूनाथ टीसी सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं पूर्व सैनिक उपस्थित रहे।
अब छात्र-छात्राओं को पढ़ाई और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग में नहीं आएगी बाधा
देहरादून। सूबे के राजकीय नर्सिंग कॉलेजों में अब फैकल्टी की कमी दूर हो गई है। राज्य चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से चयनित सात फैकल्टी को विभिन्न कॉलेजों में प्रथम तैनाती दे दी गई है। जिसमें एक प्रोफेसर और छह एसोसिएट प्रोफेसर शामिल है। नर्सिंग कॉलेजों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को संकय सदस्य मिलने से उन्हें पठन-पाठन और प्रशिक्षण में कोई समस्या नहीं आयेगी।
राज्य सरकार प्रदेश के राजकीय मेडिकल कॉलेजों के साथ ही नर्सिंग कॉलेजों में संकाय सदस्यों की कमी को दूर करने में जुटी है, ताकि मेडिकल और नर्सिंग की पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं को उच्च स्तरीय शिक्षण और प्रशिक्षण मिल सके। इसी कड़ी में चिकित्सा शिक्षा विभाग ने राज्य चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से प्रोफेसर व एसोसिएट प्रोफेसर (नर्सिंग) के पदों पर चयनित सात अभ्यर्थियों को प्रदेशभर के राजकीय नर्सिंग कॉलेजों में प्रथम तैनाती दे दी है। जिनमें प्रोफेसर (नर्सिंग) के पद पर चयनित चक्रपाणी चतुर्वेदी को राजकीय नर्सिंग कॉलेज चम्पावत में प्रथम तैनाती दी गई है। इसी प्रकार एसोसिएट प्रोफेसर (नर्सिंग) के पद पर चयनित रोजलिन लिली जैन को राजकीय नर्सिंग कॉलेज टिहरी, दीपिका शर्मा को चम्पावत, स्वेता को बाजपुर, आशुतोष कुंवर को पिथौरागढ़, मीना को पौड़ी और ज्योति गोदियाल को राजकीय नर्सिंग कॉलेज कोडगी रूद्रप्रयाग में प्रथम तैनाती दी गई है।
चयन बोर्ड से चयनित फैकल्टी सदस्यों की तैनाती से नर्सिंग कॉलेजों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को पठन-पाठन एवं प्रशिक्षण में अब किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होगी। इससे न केवल शिक्षण व्यवस्था सुदृढ़ होगी बल्कि छात्र-छात्राओं को किताबी ज्ञान के साथ-साथ बेहतर प्रशिक्षण भी मिल सकेगा।
बयान-
राज्य सरकार राजकीय नर्सिंग कॉलेजों में गुणवत्तापरक शिक्षा सुनिश्चत करने के लिये संकल्पित है। इस दिशा में सरकार ने संकाय सदस्यों के शत-प्रतिशत पदों को भरने का निर्णय लिया है। जिसके क्रम में चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से चयनित प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर (नर्सिंग) के सात अभ्यर्थियों को प्रथम तैनाती दे दी है। इससे पहले नर्सिंग कॉलेजों में 26 नर्सिंग ट्यूटरों को प्रथम तैनाती दी जा चुकी है। – डॉ. धन सिंह रावत, चिकित्सा शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड।
इस वर्ष डेढ़ लाख श्रद्धालुओं ने किए भगवान तुंगनाथ के दर्शन
रुद्रप्रयाग। तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ मंदिर के कपाट शीतकालीन प्रवास के लिए विधि-विधान के साथ आज बंद कर दिए गए। इस वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने ऊँचाई पर स्थित इस पवित्र धाम में दर्शन किए। आंकड़ों के अनुसार इस बार लगभग डेढ़ लाख भक्तों ने तुंगनाथ पहुंचकर बाबा के दर्शन प्राप्त किए।
कपाट बंद होने के साथ ही भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह डोली आज प्रथम पड़ाव चोपता के लिए रवाना हुई। कपाट बंद होने की इस ऐतिहासिक और भावुक प्रक्रिया का साक्षी बनने के लिए 500 से अधिक श्रद्धालु मंदिर परिसर में उपस्थित रहे।
बदरी-केदार मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल की मौजूदगी में सुबह करीब साढ़े दस बजे कपाट बंद करने की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू हुई। भोग, यज्ञ और हवन के बाद भगवान तुंगनाथ के स्वयंभू शिवलिंग को समाधि रूप देकर ठीक 11:30 बजे मंदिर के मुख्य द्वार शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए।
दूसरा गंभीर रूप से घायल
देहरादून। मसूरी-देहरादून हाईवे पर कोल्हुखेत के पास गुरुवार सुबह बड़ा हादसा हो गया। पेंट-पुताई के काम से मसूरी जा रहे दो लोगों की बाइक अचानक अनियंत्रित होकर करीब 300 मीटर गहरी खाई में जा गिरी। हादसे में एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल होकर खाई की ढलान पर फंस गया। पुलिस और SDRF ने मौके पर रेस्क्यू कर घायल को अस्पताल पहुंचाया।
सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस टीम को खाई में बाइक (प्लैटिना – UK07AB-7926) गिरी मिली। SDRF टीम ने रस्सियों की मदद से नीचे उतरकर घायलों को खोजा। एसडीआरएफ की रेस्क्यू टीम सबसे पहले पहाड़ी पर अटके घायल को सुरक्षित बाहर लेकर आई और उसे एम्बुलेंस से अस्पताल रवाना किया।
मृतक की पहचान असवाक अहमद (40) पुत्र फ़ारूक अहमद, निवासी रायपुर अधोईवाला के रूप में हुई है। वहीं गंभीर घायल फैजान अहमद (14) पुत्र असवाक अहमद को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है और हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है।
