विभागीय मंत्री डॉ. रावत के निर्देश पर शासन ने की त्वरित कार्यवाही
विश्वविद्यालय स्तर से संचालित होंगी प्रवेश एवं परीक्षा सहित अन्य गतिविधियां
देहरादून- भारत सरकार द्वारा तैयार उच्च शिक्षा के एकीकृत समर्थ पोर्टल के संचालन का अधिकार राज्य विश्वविद्यालयों को पूर्ण रूप से सौंप दिया गया है। इस संबंध में शासन द्वारा आदेश जारी कर दिया गया है। अब राज्य विश्वविद्यालय अपने-अपने स्तर पर छात्र-छात्राओं के प्रवेश, परीक्षा व अन्य शैक्षिक गतिविधियां सम्पादित कर सकेंगे। जिसकी जिम्मेदारी संबंधित विश्वविद्यालय के कुलपति व कुलसचिव को सौंपी गई है।
सूबे के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के निर्देशों के उपंरात समर्थ पोर्टल के संचालन की सम्पूर्ण जिम्मेदारी तत्काल प्रभाव से राज्य विश्वविद्यालयों कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल, श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय, टिहरी तथा सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा को सौंप दी गई है। अब राज्य विश्वविद्यालय सम्बद्ध राजकीय महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालय परिसरों में स्नातक एवं स्नातकोत्तर कक्षाओं में प्रवेश एवं परीक्षा से लेकर विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियां अपने स्तर से संचालित कर सकेंगे। अभी तक समर्थ पोर्टल का संचालन शासन स्तर पर राज्य समर्थ टीम (एनईपी-पीएमयू) के द्वारा किया जा रहा था लेकिन इससे छात्र-छात्राओं को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। शासन स्तर से जारी आदेश के तहत सभी राज्य विश्वविद्यालय के द्वारा समर्थ पोर्टल के सभी मॉडयूल के संचालन को समयबद्ध कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी। पोर्टल संबंधी संचालन की सारी जिम्मेदारी संबंधित विश्वविद्यालय के कुलपति व कुलसचिव की होगी, जो किसी भी प्रकार से अन्य को हस्तगत नहीं की जायेगी। प्रत्येक माह पोर्टल की समीक्षा की जायेगी जिसकी रिपोर्ट शासन को आवश्यक रूप से सौंपी जायेगी। छात्र-छात्राओं के प्रवेश हेतु पोर्टल खोलने से पहले विश्वविद्यालय सात दिन पहले इसकी सूचना अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड करेगा साथ ही सामाचार पत्रों व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया माध्यामों के जरिये इसका प्रचार-प्रसार भी करेगा। इसके अलावा इस संबंध में शासन को भी अवगत कराया जायेगा। उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में समर्थ पोर्टल का ही प्रयोग किया जायेगा। विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में पूर्व से संचालित समस्त ईआरपी/पोर्टल का डाटा 31 मार्च 2026 तक समर्थ पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड किया जायेगा इसके उपरांत समर्थ पोर्टल के अतिरिक्त किसी भी दशा में कोई भी ईआरपी/पोर्टल का संचालन नहीं की जायेगी और न ही इस संबंध में कोई भुगतान किया जायेगा।
शासन स्तर से जारी आदेश के तहत सभी राजकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों को अपना एकेडमिक कैलेण्डर तैयार कर उसे आगामी 31 मई 2026 तक अपनी कार्यपरिषद से अनिवार्य रूप से अनुमोदित कराना होगा तदोपरांत आगामी सत्र के प्रवेश, परीक्षा एवं अन्य प्रक्रियाएं सम्पादित की जायेगी। विश्वविद्यालय द्वारा प्रत्येक सेमेस्टर में प्रवेश के उपरांत छात्र-छात्राओं की कक्षाओं का संचालन 90 दिवस तथा 75 फीसदी उपस्थिति अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जायेगी, जिसका डाटा समर्थ पोर्टल पर अपलोड़ करना अनिवार्य होगा। जबकि निजी विश्वविद्यालयों में समर्थ मॉड्यूल लागू होने तक छात्रों की उपस्थिति संबंधित ईआरपी पर अपलोड़ की जायेगी, जिसकी जानकारी शासन को उपलब्ध कराई जायेगी। छात्रों की उपस्थिति व कक्षाओं के संचालन मानक पूर्ण न होने की दशा में छात्रों को किसी भी दशा में परीक्षा में बैठने की अनुमति कतई भी नहीं दी जायेगी। उक्त आदेशों को सुनिश्चित करने के लिये संबंधित विश्वविद्यालयों के कुलपति, कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक, संबंधित संस्थान के प्राचार्य/निदेशक एवं उच्च शिक्षा निदेशक जिम्मेदार होंगे।
बयान
समर्थ पोर्टल के संचालन का अधिकार राज्य विश्वविद्यालयों को दे दिया गया है। जिसका लाभ छात्र-छात्राओं को मिलेगा। इसके अलावा उच्च शिक्षण संस्थानों में एकेडमिक कैलेण्डर लागू कर प्रत्येक सेमेस्टर में छात्र-छात्राओं की 75 फीसदी उपस्थिति व 90 दिवस कक्षाओं का संचालन अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जायेगा। जिसका रिकार्ड समर्थ पोर्टल पर अपलोड़ किया जायेगा। – डॉ. धन सिंह रावत, उच्च शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड ।
दिल्ली में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति की बैठक
ट्रेनों से हाथियों की मौत पर सांसद त्रिवेन्द्र रावत की चिंता, रेल–वन समन्वय मजबूत करने की मांग
देहरादून/ नई दिल्ली। केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में दिल्ली में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में समिति के सदस्य, हरिद्वार सांसद एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने हिस्सा लिया।
बैठक के दौरान सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने उत्तराखंड सहित हिमालयी क्षेत्रों में “मानव–पशु संघर्ष” को एक गंभीर एवं ज्वलंत मुद्दा बताते हुए कहा कि जंगली पशुओं का आबादी वाले क्षेत्रों की ओर बढ़ता पलायन चिंता का विषय है। उन्होंने आग्रह किया कि संवेदनशील क्षेत्रों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कर उन मूल कारणों की पहचान की जाए, जिनके चलते मानव–पशु संघर्ष की घटनाएँ बढ़ रही हैं, ताकि स्थायी और व्यवहारिक समाधान सुनिश्चित किए जा सकें।
सांसद रावत ने हरिद्वार क्षेत्र में ट्रेनों से हाथियों की मृत्यु की घटनाओं पर विशेष चिंता व्यक्त करते हुए रेल–वन समन्वय, चेतावनी तंत्र, गति नियंत्रण एवं संरचनात्मक उपायों को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही उन्होंने लच्छीवाला में एलिफैंट कॉरिडोर से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करते हुए वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए प्रभावी संरक्षण उपाय अपनाने का आग्रह किया।
इस दौरान मानव–पशु संघर्ष की चुनौती से निपटने हेतु समन्वित नीति, स्थानीय सहभागिता और तकनीकी हस्तक्षेप पर व्यापक विचार–विमर्श किया गया।
बैठक में समिति के अन्य सदस्यगण एवं संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
ग्रामीण आजीविका बढ़ाने के लिए राज्य सरकार कर रही है ठोस प्रयास
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास में ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग, उत्तराखण्ड की 10वीं बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि पलायन की समस्या राज्य के लिए एक बड़ी चुनौती रही है, लेकिन पिछले चार–पाँच वर्षों में रिवर्स पलायन को प्रोत्साहित करने की दिशा में राज्य सरकार ने कई महत्त्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की आजीविका के साधन बढ़ाने के लिए अनेक योजनाएँ लागू की गई हैं। इन योजनाओं के अंतर्गत ऋण लेने पर पात्र लाभार्थियों को अनुदान (सब्सिडी) भी प्रदान की जा रही है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिल रही है।
प्रवासी पंचायतों और वेडिंग डेस्टिनेशन विकास पर विशेष बल
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्यभर में प्रवासी पंचायतों का आयोजन किया जाए, जिनमें देश एवं विदेश में कार्यरत प्रवासियों को आमंत्रित किया जाए। उन्हें राज्य सरकार की रिवर्स पलायन से जुड़ी पहलों की जानकारी दी जाए और उनके सुझाव भी प्राप्त किए जाएँ।
मुख्यमंत्री ने आयोग के सदस्यों से अन्य राज्यों में जाकर रिवर्स पलायन के लिए राज्य सरकार द्वारा किए गए कार्यों की जानकारी देने के साथ ही पलायन रोकने और रिवर्स पलायन से जुड़े नवाचारों का अध्ययन करने के निर्देश भी दिए।
उन्होंने कहा कि त्रियुगीनारायण की तर्ज पर राज्य के 25 नए स्थलों को वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जाए। इन स्थलों में सभी मूलभूत सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाए। पर्वतीय क्षेत्रों के विकास के लिए लघु उद्योगों के संवर्धन पर भी बल दिया गया।
रिवर्स पलायन की दिशा में उत्साहजनक परिणाम
ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग के उपाध्यक्ष डॉ॰ एस.एस. नेगी ने बताया कि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में अब रिवर्स पलायन का रुझान देखने को मिल रहा है। अब तक लगभग 6282 व्यक्ति वापस अपने गाँवों में लौटे हैं। इनमें देश के भीतर और विदेशों से लौटे लोग भी शामिल हैं। अधिकतर लोग पर्यटन एवं लघु उद्योग के क्षेत्र में कार्यरत हैं और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
बैठक में आयोग के सदस्यों ने रिवर्स पलायन को और गति देने के लिए कई रचनात्मक सुझाव प्रस्तुत किए।
बैठक में सचिव विनय शंकर पाण्डेय, धीराज गर्ब्याल, डॉ॰ श्रीधर बाबू अद्दांकी, सी. रविशंकर, अपर सचिव श्रीमती अनुराधा पाल, डॉ॰ मेहरबान सिंह बिष्ट, चन्द्र सिंह धर्मशक्तू, संतोष बडोनी, सुरेश जोशी, ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग के सदस्य अनिल सिंह शाही, दिनेश रावत, सुरेश सुयाल, राम प्रकाश पैन्यूली एवं श्रीमती रंजना रावत उपस्थित रहे।
‘सहकारिता से शहरी-ग्रामीण एकता’ की थीम पर आयोजित होगा सहकारिता मेला
देहरादून। देहरादून में 20 से 28 दिसंबर 2025 तक रेंजर्स ग्राउंड में सहकारिता मेले का भव्य आयोजन किया जाएगा। मेला प्रतिदिन प्रातः 11 बजे से रात्रि 09 बजे तक आमजन के लिए खुला रहेगा। इस मेले की थीम “सहकारिता से शहरी ग्रामीण एकता” निर्धारित की गई है। मेले को लेकर रेंजर्स ग्राउंड में तैयारियां पूरी हो गई है।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने मेले के सफल आयोजन के लिए जिला स्तर पर मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय कार्यान्वयन समिति का गठन किया गया है। समिति द्वारा विभिन्न विभागों को उनके दायित्व सौंपे गए हैं, ताकि मेला सुव्यवस्थित एवं प्रभावी ढंग से आयोजित किया जा सके।
मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र महासंघ द्वारा वर्ष 2025 को अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष घोषित किए जाने के उपलक्ष्य में उत्तराखंड सरकार के सहकारिता विभाग द्वारा राज्य के सभी जनपदों में थीम आधारित सहकारिता मेलों के आयोजन का निर्णय लिया गया है। इन मेलों का उद्देश्य सहकारिता की मूल भावना को स्थानीय स्तर पर साकार करना, राज्य की अर्थव्यवस्था में सहकारिता विभाग के योगदान को रेखांकित करना तथा सहकारिता से जुड़े सभी संस्थानों को एक साझा मंच प्रदान करना है।

सहकारिता मेले में विभिन्न विभागों, सहकारी समितियों एवं स्वयं सहायता समूहों द्वारा स्थानीय उत्पादों के आकर्षक एवं विशिष्ट स्टॉल लगाए जाएंगे। मेले में जनपद की सभी स्थानीय सहकारी समितियों, संस्थाओं, स्वयं सहायता समूहों, किसानों एवं काश्तकारों को प्रतिभाग के लिए आमंत्रित किया गया है।
मेले के दौरान प्रत्येक दिवस विषय विशेषज्ञों द्वारा पैनल चर्चाएं, तकनीकी सत्र, निर्यात परामर्श, उत्पाद पैकेजिंग एवं ब्रांडिंग, प्रशिक्षण सत्र, युवा उद्यमिता संवाद, स्टार्टअप एवं तकनीकी समाधान, किसान गोष्ठी, श्वेत क्रांति एवं दुग्ध क्रांति, डिजिटल साक्षरता, फूड स्टॉल, ई-कॉमर्स, वित्तीय समावेशन तथा महिला सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त विभिन्न प्रतियोगिता, मनोरंजन, झूले एवं मेले में उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति को दर्शाते रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए जाएंगे, जो आगंतुकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगे।
सहकारिता मेला न केवल सहकारिता आंदोलन को नई दिशा देगा, बल्कि शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के बीच आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक समन्वय को भी मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
प्रदेश में सब्जी और फूलों के बड़े क्लस्टर विकसित होंगे, किसानों की आय बढ़ाने पर जोर
देहरादून। कृषि मंत्री गणेश जोशी ने देहरादून में प्रदेश के सभी जनपदों के मुख्य विकास अधिकारियों, मुख्य कृषि अधिकारियों और मुख्य उद्यान अधिकारियों के साथ बैठक कर नाबार्ड द्वारा वित्त पोषित प्रदेशव्यापी क्लस्टर आधारित पॉलीहाउस योजना की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और तय समयसीमा में लक्ष्यों को पूरा करने पर विशेष जोर दिया गया।
बैठक के दौरान मंत्री गणेश जोशी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी जिलों में उपयुक्त क्लस्टरों का चयन कर किसानों को चिन्हित किया जाए और सब्जी व फूलों की कम से कम दो फसलों के बड़े क्लस्टर विकसित किए जाएं। उन्होंने कहा कि निर्धारित लक्ष्यों के अनुसार शीघ्र पॉलीहाउस स्थापित किए जाएं और जिला स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
इसके साथ ही मंत्री ने जायका परियोजना, कीवी मिशन, एप्पल मिशन और ड्रैगन फ्रूट मिशन के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार कर योजनाबद्ध तरीके से कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने पीएमएफएमई योजना के अंतर्गत स्टोरेज की स्थापना और अधिक से अधिक फूड प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित कर किसानों को मूल्य संवर्धन से जोड़ने पर भी बल दिया।
गणेश जोशी ने कहा कि राज्य सरकार नीतिगत सुधारों के माध्यम से प्रदेश में कृषि और उद्यानिकी को प्रोत्साहित कर रही है। सरकार का उद्देश्य आधुनिक तकनीकों और योजनाओं के जरिए किसानों की आय में वृद्धि करना है, जिसके लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
उत्तराखंड में अल्पसंख्यकों के शैक्षणिक और आर्थिक सशक्तिकरण पर फोकस, सीएम धामी ने रखी विकास की रूपरेखा
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र, नींबूवाला (देहरादून) में विश्व अल्पसंख्यक अधिकार दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस दौरान उन्होंने अल्पसंख्यक समुदाय के मेधावी छात्रों को सम्मानित किया तथा विभिन्न स्टालों का अवलोकन किया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उपस्थित मुस्लिम महिलाओं ने उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू किए जाने पर मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया। महिलाओं ने कहा कि मुख्यमंत्री एक भाई के रूप में प्रदेश और अल्पसंख्यक समुदाय के हित में कार्य कर रहे हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अल्पसंख्यक समुदाय के कल्याण के लिए निरंतर विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्व अल्पसंख्यक अधिकार दिवस भारत की एकता और अखंडता के संरक्षण हेतु हमारे मौलिक कर्तव्यों को स्मरण करने का अवसर है। भारतीय संस्कृति में सदियों से समानता तथा सभी धर्मों और समुदायों के प्रति सम्मान की परंपरा रही है। विविध संस्कृतियों, भाषाओं और परंपराओं के बावजूद देश में सदैव एकता की भावना बनी रही है। वसुधैव कुटुम्बकम के सिद्धांत को आत्मसात करते हुए भारत ने पूरी दुनिया को एक परिवार के रूप में देखने की परंपरा स्थापित की है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र के साथ सभी समुदायों को आगे बढ़ाया जा रहा है। जन-धन योजना, उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, मुफ्त राशन योजना जैसी अनेक योजनाओं के माध्यम से अल्पसंख्यक समुदाय को मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। साथ ही करतारपुर साहिब कॉरिडोर का निर्माण, लंगर से करों की समाप्ति, जियो पारसी योजना, बौद्ध सर्किट का विकास, जैन अध्ययन केंद्र की स्थापना, हज यात्रा प्रक्रिया को डिजिटल व पारदर्शी बनाना तथा तीन तलाक जैसी कुप्रथा का अंत जैसे ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम के तहत अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में स्कूल, कॉलेज, छात्रावास, आईटीआई, स्वास्थ्य केंद्र और कौशल विकास संस्थान स्थापित किए जा रहे हैं। वक्फ कानूनों में सुधार कर वक्फ संपत्तियों को अधिक पारदर्शी और उत्तरदायी बनाने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए गए हैं, ताकि उनका वास्तविक लाभ समाज के गरीब और जरूरतमंद वर्गों तक पहुंच सके।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु छात्र-छात्राओं को प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। पूर्वदशम एवं दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजनाओं के माध्यम से अल्पसंख्यक विद्यार्थियों को वार्षिक छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है। जनता से किए गए वादे के अनुरूप राज्य में समान नागरिक संहिता लागू कर सामाजिक न्याय और समानता की दिशा में देश को नई दिशा दी गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अल्पसंख्यक क्षेत्रों में आर्थिक एवं शैक्षणिक विकास को गति देने के लिए अल्पसंख्यक विकास निधि की स्थापना की गई है, जिसके अंतर्गत प्रतिवर्ष 4 करोड़ रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई जा रही है। मुख्यमंत्री हुनर योजना के माध्यम से लोगों को रोजगार से जोड़ा जा रहा है। अल्पसंख्यक स्वरोजगार योजना में 25 प्रतिशत सब्सिडी के साथ 10 लाख रुपये तक का ऋण तथा मौलाना आज़ाद एजुकेशन ऋण योजना के तहत 5 लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त शिक्षा ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। पिछले चार वर्षों में इस योजना के अंतर्गत 169 लाभार्थियों को 4 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि वितरित की गई है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश में नया अल्पसंख्यक शिक्षा कानून लागू किया गया है। यह कानून सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध, पारसी और मुस्लिम सभी अल्पसंख्यक समुदायों को शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर प्रदान करेगा। इसके अंतर्गत सभी मदरसों सहित अल्पसंख्यक विद्यालयों में धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा बोर्ड का पाठ्यक्रम भी पढ़ाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि राज्य में धर्मांतरण विरोधी कानून लागू कर सभी धर्मों की स्वायत्तता की रक्षा सुनिश्चित की गई है, ताकि किसी भी प्रकार के दबाव, प्रलोभन या छल से होने वाले धर्मांतरण को रोका जा सके और सामाजिक सौहार्द बना रहे। मुख्यमंत्री ने विश्व अल्पसंख्यक अधिकार दिवस के अवसर पर अल्पसंख्यक समुदाय से आह्वान किया कि वे विश्व के अन्य देशों में हो रहे अत्याचार और भेदभाव के खिलाफ सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी आवाज उठाएं।
कार्यक्रम में अल्पसंख्यक आयोग की उपाध्यक्ष फरजाना बेगम, पद्मश्री डॉ. आर.के. जैन, हेमकुंड साहिब ट्रस्ट अध्यक्ष नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा, वक्फ बोर्ड अध्यक्ष शादाब शम्स सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
आयोग व सरकार महिलाओं की सुरक्षा व अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर संवेदनशील व सक्रिय भूमिका में कर रहे कार्य- कुसुम
देहरादून। उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने मुख्यमंत्री आवास पर प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से शिष्टाचार भेंट कर उत्तराखंड राज्य महिला आयोग से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक चर्चा की गई।
आयोग अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने बताया कि इस अवसर पर महिला सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण एवं आयोग के आगामी कार्यक्रमों को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को राज्य महिला आयोग द्वारा प्रस्तावित आगामी कार्यक्रमों की जानकारी दी गई, जिस पर उन्होंने महिलाओं के हित में प्रभावी कार्यों को और अधिक सुदृढ़ करने हेतु उपयोगी मार्गदर्शन प्रदान किया।
अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने बताया कि महिलाओं के अधिकार, सुरक्षा और सशक्तिकरण की दिशा में यह संवाद निश्चित रूप से एक सशक्त कदम है।
भेंट के दौरान अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने मुख्यमंत्री पुष्कर धामी को आयोग द्वारा किए जा रहे कार्यों एवं प्रस्तावित कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए कहा कि “महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना केवल संवैधानिक दायित्व ही नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है। राज्य महिला आयोग व सरकार महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर संवेदनशील व सक्रिय भूमिका निभा रहे है।”
साथ ही उन्होंने जानकारी देते हुए बताया की मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व वाली सरकार के सहयोग से आयोग, महिला उत्पीड़न, घरेलू हिंसा और साइबर अपराध जैसे मामलों में त्वरित एवं प्रभावी हस्तक्षेप सुनिश्चित कर रहा है, जिससे पीड़ित महिलाओं को शीघ्र न्याय मिल रहा है।
साथ ही, अध्यक्ष कण्डवाल ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर धामी से राज्य महिला आयोग के कार्यालय को शहर के मध्य स्थापित किए जाने संबंधी प्रस्ताव भी दिया है, जिस पर मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को शीघ्र कार्यवाही के निर्देश दिए।
मुुख्य सचिव ने एनआईसी, आईटीडीए एवं राजस्व विभाग के उच्चाधिकारियों के साथ की बैठक
देहरादून। मुुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने गुरूवार को सचिवालय में भूमि अभिलेखों के डिजीटलीकरण के सम्बन्ध में एनआईसी, आईटीडीए एवं राजस्व विभाग के उच्चाधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में मुख्य सचिव ने अधिकारियों को भूमि अभिलेखों के सम्बन्ध में विभिन्न सॉफ्टवेयर्स की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि भू अभिलेखों से सम्बन्धित सभी पोर्टल शीघ्र से शीघ्र शुरू किए जाएं।
मुख्य सचिव ने भूलेख पोर्टल को 1 जनवरी से शुरू किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इससे आमजन को बहुत ही राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि दाखिल खारिज का स्टेटस अपडेट होते ही सम्बन्धित को व्हाट्सएप और एसएमएस के माध्यम से तत्काल सूचना प्राप्त हो जाए एवं आरओआर में परिवर्तन होते ही स्वतः ही सजरे में भी स्टेटस परिवर्तन हो जाए। उन्होंने कहा कि यह भी प्राविधान रखा जाए कि अपने भूमि अभिलेखों की प्रति भी आसानी से प्राप्त हो सके।
मुख्य सचिव ने कहा कि आरसीएमएस पोर्टल को भी 26 जनवरी, 2026 तक शुरू किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि राजस्व कोर्ट को पूर्ण रूप से ई-कोर्ट के रूप में स्थापित किया जाए, ताकि मामलों के निस्तारण में तेजी आ सके। उन्होंने राजस्व कोर्ट मामलों में भूमि अभिलेखों के सत्यापन आदि के लिए पटवारी-कानूनगो के स्तर पर समय-सीमा निर्धारित करते हुए सॉफ्टवेयर में समाविष्ट किया जाए ताकि मामलों को शीघ्र से शीघ्र निस्तारित किया जा सके।
मुख्य सचिव ने इसके लिए आईटीडीए को भी अपने सिस्टम को मजबूत किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस सिस्टम के संचालन के लिए आवश्यक ढांचागत एवं तकनीकी व्यवस्थाएं अनिवार्य रूप से सुनिश्चित कर ली जाएं। साथ ही, सभी हितधारकों एवं उपयोगकर्ताओं का आवश्यक प्रशिक्षण उपलब्ध करा लिया जाए।
इस अवसर पर सचिव डॉ. एस.एन. पाण्डेय एवं राजस्व आयुक्त श्रीमती रंजना राजगुरू, जिलाधिकारी देहरादून सविन बंसल सहित एनआईसी एवं आईटीडीए के उच्चाधिकारी एवं जनपदों से जिलाधिकारी उपस्थित थे।
देहरादून/नई दिल्ली। प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने गुरुवार को नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय पहुंच कर पार्टी के नवनियुक्त राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन से शिष्टाचार भेंट कर उन्हें उत्तराखंड की जनता, भाजपा कार्यकर्ताओं और अपने मंत्रिमंडलीय सहयोगियों की ओर से सफल कार्यकाल के लिए शुभकामनाएँ दीं।
महाराज ने कहा कि भाजपा के नवनियुक्त राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन का नेतृत्व और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मार्गदर्शन भारतीय जनता पार्टी के जनसेवा व राष्ट्रनिर्माण की यात्रा को नई दिशा प्रदान करेगा और भाजपा सरकार की लोक-कल्याणकारी नीतियों संगठन के विचारों को दृढ़ता से जन-जन तक पहुँचाएंगे।
राजस्व प्राप्ति की स्थिति की समीक्षा कर कहा समय से तय लक्ष्य पूरा करें
कर चोरी पर प्रभावी नियंत्रण के लिए एआई आधारित तकनीक का किया जाय उपयोग
बाहर के वाहनों से ग्रीन सेस की वसूली जल्द शुरू करने के निर्देश
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में सचिवालय में वित्तीय वर्ष 2025-26 की राजस्व प्राप्ति की स्थिति की समीक्षा बैठक आयोजित हुई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि राजस्व वसूली बढ़ाने पर विशेष ध्यान देते हुए तय लक्ष्य समय पर पूरे किये जाएं। संबंधित विभागों के उच्चाधिकारी एवं जिलाधिकारियों द्वारा जनपदों में इसकी नियमित निगरानी की जाए। कर चोरी पर प्रभावी नियंत्रण के लिए एआई आधारित तकनीक का अधिकतम इस्तेमाल किया जाए। निबंधन एवं रजिस्ट्रेशन से संबंधित सभी कार्यों का डिजिटाइजेशन किया जाए। सब रजिस्ट्रार कार्यालयों का जिलाधिकारियों एवं संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा नियमित रूप से निरीक्षण किया जाए। रजिस्ट्री के दौरान संपति का उचित मूल्य दर्ज हो इसकी जाँच के लिए संपतियों का स्थलीय निरीक्षण भी किया जा जाए।
प्रदेश से बाहर के वाहनों से ग्रीन सेस लेने की कार्यवाही में लेटलतीफी पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने परिवहन विभाग को ग्रीन सेस की वसूली जल्द शुरू करने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि पर्यावरण संरक्षण का ध्यान रखते हुए राज्य के हित में वन संपदा का सही उपयोग किया जाए। तराई क्षेत्रों में कमर्शियल प्लांटेशन तथा जड़ी-बूटियों के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने के लिए ठोस योजना बनाई जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के समग्र विकास के लिए राजस्व में बढोतरी करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “इस दशक को उत्तराखंड का दशक” बनाने के संकल्प को साकार करने के लिए संसाधन वृद्धि को मिशन मोड में लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विशेष श्रेणी के राज्यों में उत्तराखंड को शीर्ष स्थान प्राप्त हुआ है। साथ ही, खनन सुधारों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राज्य को ₹200 करोड़ की केंद्रीय प्रोत्साहन राशि प्राप्त हुई है, जो राज्य के सही दिशा में बढ़ने का परिचायक है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए ₹24,015 करोड़ का कर राजस्व लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें अब तक 62 प्रतिशत से अधिक प्राप्ति हो चुकी है। उन्होंने संबंधित विभागों से आगामी अवधि में लक्ष्य की शत-प्रतिशत पूर्ति के लिए समन्वित और सक्रिय प्रयास किए जाने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार दीर्घकालिक आर्थिक सुदृढ़ता के लिए पूंजीगत निवेश पर विशेष बल दे रही है। पूंजीगत व्यय में 34 प्रतिशत की वृद्धि की गई है, जिससे राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को नई गति मिलेगी और स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण होगा। उन्होंने कहा कि वित्तीय प्रबंधन को आधुनिक और उत्तरदायी बनाने के लिए नीति सुधार, नवाचार तथा नई तकनीकों पर निरंतर ध्यान दिया जाना जरूरी है। पारदर्शिता, जवाबदेह और जनहित में ठोस परिणाम देने वाला प्रशासन हमारा उद्देश्य है। जिसके लिए सभी अधिकारियों को कड़े वित्तीय अनुशासन, बेहतर प्रबंधन और सामूहिक उत्तरदायित्व के साथ कार्य में जुटे रहना होगा।
बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के.सुधांशु, एल. फैनई, सचिव दिलीप जावलकर, युगल किशोर पंत, सी. रविशंकर, प्रमुख वन संरक्षक डॉ. रंजन कुमार मिश्रा अपर सचिव अहमद इकबाल, श्रीमती सोनिका, हिमांशु खुराना, श्रीमती अनुराधा पाल, डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट, मनमोहन मैनाली, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष एवं वर्चुअल माध्यम से सभी जिलाधिकारियों ने प्रतिभाग किया।
