दिल्ली से देहरादून आ रही थी वॉल्वो बस, परिचालक घायल
देहरादून। देहरादून-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक भीषण सड़क हादसा हो गया, जब नुंनावाला, भानियावाला के पास यात्रियों से भरी एक वॉल्वो बस अचानक अनियंत्रित होकर आगे चल रहे गन्ने से लदे ट्रैक्टर-ट्राले से भिड़ गई। तेज टक्कर के कारण बस चालक की मौत हो गई, जबकि परिचालक गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे के बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय पुलिस के साथ एसडीआरएफ की टीम तत्काल मौके पर पहुंची।
सूचना मिलते ही रेस्क्यू शुरू किया गया, जिसके तहत क्षतिग्रस्त बस में फंसे चालक को कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया। पुलिस के अनुसार दुर्घटना सुबह करीब 5:30 बजे हुई, जब दिल्ली से देहरादून आ रही वॉल्वो बस नुंनावाला गुरुद्वारा के पास अचानक नियंत्रण खो बैठी और सीधे ट्रैक्टर-ट्राले से जा टकराई। हादसे में चालक के अलावा परिचालक भी घायल हुआ, जिसे उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया है। डॉक्टरों ने बस चालक को मृत घोषित कर दिया।
चौकी प्रभारी नवीन डंगवाल ने बताया कि हादसे में बस के सभी यात्री सुरक्षित हैं और किसी यात्री को गंभीर चोट नहीं आई है। मृतक चालक की पहचान योगेंद्र (52) पुत्र ओमशरण निवासी पटला, थाना मोदी नगर (गाजियाबाद) के रूप में हुई है, जबकि घायल परिचालक का नाम दिलशान (32) पुत्र इंसाफ निवासी आरिफपुर, थाना बाबूगढ़ जिला हापुड़, उत्तर प्रदेश बताया गया है।
पुलिस ने बताया कि दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है और ट्रैक्टर ट्राले सहित दोनों वाहनों को कब्जे में लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
पौड़ी। प्रदेश पर्यटन, लोक निर्माण, सिंचाई, पंचायतीराज, ग्रामीण निर्माण, जलागम, धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री एवं चौबट्टाखाल विधायक सतपाल महाराज ने जिलाधिकारी पौड़ी से दूरभाष पर वार्ता कर विकासखण्ड बीरोंखाल के अन्तर्गत मां कालिंका मन्दिर में 06 दिसम्बर, 2025 को होने वाले मेले की व्यवस्थाओं को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिये हैं।
प्रदेश पर्यटन, लोक निर्माण, सिंचाई, पंचायतीराज, ग्रामीण निर्माण, जलागम, धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री एवं चौबट्टाखाल विधायक सतपाल महाराज ने गुरुवार को जिलाधिकारी पौड़ी से दूरभाष पर वार्ता कर विकासखण्ड बीरोंखाल के अन्तर्गत मां कालिंका मन्दिर में 06 दिसम्बर, 2025 को होने वाले मेले की व्यवस्थाओं को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा हेतु पर्याप्त पुलिस बल तैनात करने के साथ-साथ मेडिकल टीम, ऐम्बुलेंस पेयजल की समुचित व्यवस्थाएं और मोटर मार्गो को चुस्त दुरुस्त करने को कहा है।
महाराज ने जिलाधिकारी से मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पौड़ी, रामनगर, कोटद्वार, धूमाकोट और बैजरों आदि क्षेत्रों से बसों की पर्याप्त व्यवस्था करावाने के भी निर्देश दिए हैं।
हल्द्वानी कोतवाली की जिम्मेदारी अब इंस्पेक्टर विजय सिंह मेहता को सौंपी गई
नैनीताल। नैनीताल जिले में पुलिस विभाग में देर रात बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। एसएसपी मंजूनाथ टीसी ने इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारियों के तबादले से जुड़े आदेश जारी करते हुए कई थानों की कमान बदली है। हल्द्वानी, बनभूलपुरा, भीमताल, मुखानी और रामनगर सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नए प्रभारियों की नियुक्ति की गई है।
हल्द्वानी कोतवाली की जिम्मेदारी अब इंस्पेक्टर विजय सिंह मेहता को सौंपी गई है, जबकि पूर्व कोतवाल इंस्पेक्टर अमर चंद्र शर्मा को जिला कंप्लेंट सेल का प्रभारी बनाया गया है। वहीं, बनभूलपुरा कोतवाली की कमान इंस्पेक्टर सुशील कुमार को मिली है।
भीमताल थाने में इंस्पेक्टर राजेश यादव को नया कोतवाल नियुक्त किया गया है। रामनगर की कमान इंस्पेक्टर दिनेश सिंह फर्त्याल के हाथों में सौंपी गई है। इसके साथ ही सम्मन सेल की ज़िम्मेदारी संभाल रहे इंस्पेक्टर राजेंद्र सिंह रावत को अब डीसीआरबी का इंचार्ज बनाया गया है।
सब-इंस्पेक्टर स्तर पर भी बदलाव किए गए हैं। मुखानी थाना प्रभारी पद से हटाए गए एसआई दिनेश जोशी को एसएसआई मल्लीताल की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि उनकी जगह एसआई सुशील चंद्र जोशी को मुखानी थाने का नया एसओ नियुक्त किया गया है।

प्रेज़िडेंट पुलिस मेडल विजेताओं को मिलेंगे 5 लाख रुपये- सीएम धामी
हल्द्वानी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल कैंप मुख्यालय हल्द्वानी में आयोजित पूर्व अर्धसैनिक बलों के सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कहा कि अर्धसैनिक बलों के वीर जवानों ने कश्मीर से कन्याकुमारी और कच्छ से अरुणाचल तक हर मोर्चे पर अदम्य साहस, शौर्य और समर्पण के साथ देश की सेवा की है। तिरंगे की शान को बढ़ाने में इन वीर सपूतों का योगदान अविस्मरणीय है। उन्होंने अर्द्धसैनिक बल के जवानों को वीरता, साहस और देश भक्ति का प्रतीक बताते हुए उन्हें राष्ट्र की शान बताया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने अर्द्धसैनिक बलों के कल्याण के लिए घोषणा की कि भविष्य में प्रेजिडेन्ट पुलिस मेडल-गैलेन्ट्री वीरता पदक से अलंकृत होने वाले अर्द्धसैनिक को एकमुश्त 05 लाख रूपये की अनुदान राशि दी जायेगी, पूर्व अर्द्धसैनिक एवं अर्द्धसैनिक की वीर नारी, जिसके पास स्वयं की कोई अचल सम्पत्ति नहीं है, को उत्तराखण्ड राज्य में जीवनकाल में एक बार अचल सम्पत्ति क्रय किये जाने में स्टाम्प शुल्क में 25 प्रतिशत तक की छूट दी जायेगी, उत्तराखण्ड राज्य अर्द्धसैनिक बल कल्याण परिषद् को क्रियाशील किया जायेगा और परिषद् के लिए पुलिस मुख्यालय में एक कार्यालय कक्ष आवंटित किया जायेगा, सैनिक कल्याण निदेशालय में उपनिदेशक (अर्द्धसैनिक) एवं बड़े जिलों के जिला सैनिक कल्याण कार्यालयों में सहायक जिला सैनिक कल्याण अधिकारी (अर्द्धसैनिक) के एक-एक पद स्वीकृत किये जायेंगे, जिसमें पूर्व अर्द्धसैनिक संविदा में नियुक्त किये जायेंगे, जो अर्द्ध सैनिक बलों के बच्चे हैं, उनको शादी हेतु हमारे सैनिकों के भांति धनराशि प्रदान की जाएगी तथा मुख्यमंत्री ने सीजीएचएस भवन निर्माण हेतु तत्काल प्राथमिकता देते हुए भूमि चयन करने के निर्देश जिलाधिकारी को दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सैनिक कभी भी ‘भूतपूर्व’ नहीं होता, वह जीवनपर्यंत सैनिक ही रहता है। उन्होंने बताया कि वे स्वयं एक सैनिक परिवार से आते हैं और सैनिकों व उनके परिवारों की चुनौतियों को नजदीक से समझते हैं। शहीदों की शहादत की कोई कीमत नहीं हो सकती और राज्य सरकार का दायित्व है कि उनके परिवारों को किसी प्रकार की कठिनाई न होने पाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने अर्द्धसैनिक बलों और शहीदों के परिजनों के सम्मान हेतु अनुग्रह राशि को 10 लाख से बढ़ाकर 50 लाख रुपये किया है। अशोक चक्र, कीर्ति चक्र और शौर्य चक्र से अलंकृत वीरों की पुरस्कार राशि एवं वार्षिक अनुदान में भी महत्वपूर्ण वृद्धि की गई है। शहीदों की स्मृति में स्मारक एवं शहीद द्वार निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। इस वर्ष 10 वीर बलिदानियों की स्मृति में नए स्मारकों की स्वीकृति दी गई है। साथ ही शहीदों के परिजनों के एक सदस्य को सरकारी नौकरी में समायोजित करने की व्यवस्था भी लागू की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में सेना का आधुनिकरण तेजी से हुआ है। भारत आज रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनते हुए कई देशों को रक्षा उपकरण निर्यात कर रहा है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने भारत के स्वदेशी हथियारों की क्षमता को विश्व स्तर पर सिद्ध किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में अवैध बसावट और अन्य गलत गतिविधियों के खिलाफ सरकार कड़े कदम उठा रही है। 10 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि कब्जामुक्त कराई गई है तथा 550 से अधिक अवैध संरचनाओं को ध्वस्त किया गया है। राज्य में समान नागरिक संहिता, सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून, दंगा-रोधी कानून और भू-कानून लागू कर सामाजिक समरसता एवं आंतरिक सुरक्षा को मजबूत किया गया है।
उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड वीरभूमि भी है, और यहां की धरोहर, संस्कृति तथा परंपरा की रक्षा करना सभी का दायित्व है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार “विकल्प रहित संकल्प” के साथ उत्तराखंड को देश का श्रेष्ठ राज्य बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
कार्यक्रम में सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि राज्य सरकार पूर्व सैनिकों के कल्याण हेतु निरंतर दृढ़ता से कार्य कर रही है।
इस अवसर पर मेयर हल्द्वानी गजराज सिंह बिष्ट, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती दीपा दरमवाल, विधायक राम सिंह कैड़ा, दायित्व धारी डॉ. अनिल डब्बू, शंकर कोरंगा, रेनू अधिकारी, आई जी रिद्धिम अग्रवाल, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के डीआईजी शंकर दत्त पांडे, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ मंजूनाथ टीसी, पूर्व अर्धसैनिक संगठन उत्तराखंड के अध्यक्ष एस.एस. कोटियाल, सेवानिवृत्त आईजी एम.एल. वर्मा, एच.आर. सिंह, भानु प्रताप सिंह सहित बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
व्यवस्थाओं की समीक्षा, महिलाओं-बालिकाओं को गर्म कपड़े व मिठाई की वितरित; सुरक्षा, स्वास्थ्य और इन्फ्रास्ट्रक्चर सुधार के निर्देश
देहरादून। जिलाधिकारी सविन बंसल ने केदारपुरम अवस्थित राजकीय नारी निकेतन, बालिका निकेतन, बाल गृह एवं शिशु सदन का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। जिलाधिकारी ने सबसे पहले परिसर का भ्रमण किया और यहां पर आवास, सुरक्षा, भोजन, स्वास्थ्य, साफ, सफाई एवं शौचालय संबंधी व्यवस्थाओं की समीक्षा की। निकेतन में निवासरत महिलाओं, बालिकाओं एवं अधिकारियों से यहां की आवश्यकताओं और समस्याओं की जानकारी ली।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि संस्थान में निवासरत महिलाओं, बालक एवं बालिकाओं को सुरक्षित, स्वच्छ और अनुकूल वातावरण मिल सके, इसके लिए अधिकारी नियमित मॉनिटरिंग करना सुनिश्चित करें। इस दौरान जिलाधिकारी ने बढ़ती ठंड को देखते हुए निकेतन की महिलाओं, बालिकाओं और शिशुओं को स्वायटर, टोपी इत्यादि गर्म कपडे प्रदान करते हुए मिठाई बांटी। केदारपुरम स्थित निकेतन में 173 बेसहारा, परित्यक्त व शोषित महिलाएं निवासरत है। वहीं बालिका निकेतन में 19 और बाल गृह व शिशु सदन 23 बच्चे रह रहे है। जिन्हें सामाजिक सुरक्षा, आश्रय और अन्य सुविधाएं प्रदान की जा रही है।
जिलाधिकारी ने कहा कि नारी निकेतन, बालिका निकेतन, बाल गृह एवं शिशु सदन हमारे बहुत महत्वपूर्ण संस्थान है। यहां पर बेसहारा, परित्यक्त, शोषित व खास वर्ग के महिलाएं व बच्चे रहते है, जिनको मुख्यधारा मे लाने के लिए अतिरिक्त देखभाल और सलाह की आवश्यकता रहती है। ये लोग किसी न किसी सदमे से प्रभावित हुए है। एक्सपर्ट की मदद से इनको सदमे से बाहर लाते हुए इनके व्यवहार में परिवर्तन कर मुख्यधारा में लाया जा रहा है। निकेतन में इन्फ्रास्ट्रेक्चर, सीवर लाइन, डोरमेट्री से लेकर जो भी आवश्यकताएं है, उसको जिला प्लान और खनन न्यास से पूरा किया जा रहा है। निकेतन की महिलाओं और बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच से लेकर संतुलित डाइट भी सुनिश्चित की जा रही है। जिलाधिकारी ने कहा कि निकेतन में निवासरत बेसहारा एवं शोषित महिलाओं व बच्चों को मुख्यधारा में जोड़ने के लिए सभी प्रयास किए जा रहे है। जिलाधिकारी ने कहा कि पिछले निरीक्षण के दौरान निकेतन में डोर मैट्री भवन स्वीकृत किया गया था, जिसका निर्माण कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है और अगले दो महीनों के भीतर भवन निकेतन को विधिवत् समर्पित किया जाएगा।
जिलाधिकारी ने कहा कि बालिका निकेतन में निवासरत बालिकाओं के सर्वागीण विकास के लिए खेल गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों निर्देश दिए कि बालिका निकेतन परिसर में एक समुचित खेल मैदान का निर्माण किया जाए। कहा कि खेल मैदान का डिजाइन इस तरह से तैयार किया जाए जिसमें खो-खो, कबड्डी, बैडमिंटन और योग गतिविधियां हो सके। वहीं जिलाधिकारी ने ठंड को ध्यान में रखते हुए शिशु निकेतन के सभी कमरों में ऑयल हीटर लगाने के भी निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने नारी निकेतन की सुरक्षा व्यवस्थाओं और सुदृढ़ करने के लिए नारी निकेतन में दो अतिरिक्त होमगार्ड की तैनाती तुरंत प्रभाव से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ मुख्य चिकित्सा अधिकारी को नारी निकेतन में दो अतिरिक्त नर्सों की नियुक्ति करने और निकेतन के लिए तैनात डॉक्टर को नियमित रूप से निकेतन का विजिट सुनिश्चित कराने को कहा। ताकि महिलाओं की समय-सयम पर स्वास्थ्य जांच हो सके। जिलाधिकारी ने कहा कि निकेतन में बालिकाओं और शिशुओं के समुचित स्वास्थ्य परीक्षण, पोषण स्थिति की जांच तथा समय-समय पर आवश्यक उपचार उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिया कि आरबीएसके टीम नियमित अंतराल पर निकेतन पहुंचकर बच्चों का संपूर्ण स्वास्थ्य परीक्षण करे और किसी भी बीमारी या कमी की पहचान कर त्वरित उपचार व आवश्यक रेफरल की व्यवस्था सुनिश्चित करे। इस दौरान जिलाधिकारी ने नारी निकेतन में महिलाओं व बच्चों के आधार कार्ड बनाने के लिए 11 मोबाइल फोन और सिम की मौके पर ही स्वीकृति प्रदान की।
जिलाधिकारी ने नारी निकेतन परिसर का निरीक्षण करते हुए ग्रामीण निर्माण विभाग के अधिकारियों को निर्माणाधीन अतिरिक्त भवन के कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि नारी निकेतन में रहने वाली महिलाओं, बालिकाओं एवं शिशुओं के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। इसलिए निर्माण कार्य में अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अतिरिक्त भवन तैयार होने से नारी निकेतन की क्षमता और सुविधाओं में महत्वपूर्ण सुधार होगा।
नारी निकेतन में काउंसलिंग कक्ष के समक्ष शौचालय व स्नानागार, डायनिंग एरिया के शौचालय सुदृढीकरण, मंदिर के चारों ओर ग्रिल कार्य, जिम और प्रयोगात्मक क्षेत्र का समतलीकरण, छत मरम्मत, अलमीरा, रसोई के पीछे फर्स, लॉडरी रूम व नए भवन के पीछे फैसिंग, आलम्बन भवन के मुख्य द्वार का अनुरक्षण, डबल बैटर इनवर्टर लगाने को काम किया जा रहा है। वहीं बालिका निकेतन में अधीक्षक का कार्यालय, स्टोर कक्ष, आंगन, आधुनिक किचन, खिडकियों पर सरिया, गेट, लोहे के दरवाजे, डबल बैटरी इन्वर्टर, समर सेविल हेतु विद्युत संयोजन, भण्डारण कक्ष, छत व फर्स मरम्मत, टिन शेड का काम चल रहा है। शिशु व बाल गृह में कक्ष का पार्टीशन, शौचालय, स्टोर रूम, पार्क के तीनों तरफ सीढियां, तीनों संस्थान को जोड़ने का रास्ता, पार्किंग, फैंसिंग, परिसर में स्थायी मंच निर्माण सहित बच्चों के लिए 20 रजाई, 10 लोहे के बैड, 10 डबल गद्दे आदि काम किया जा रहा है। जिलाधिकारी ने कार्यदायी संस्था को संचालित सभी कार्याे को जल्द से जल्द पूर्ण करने के निर्देश दिए।
इस दौरान मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, उप जिलाधिकारी सदर हरिगिरि, जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट, सहायक निदेशक सूचना बद्री चंद, एसीएमओ डा वंदना सेमवाल, अध्यक्ष बाल कल्याण समिति नमिता ममगाई आदि सहित ग्रामीण निर्माण विभाग व पेयजल के अधिकारी मौजूद थे।
पोर्टल नहीं खुला तो यूजी, पीजी और 12वीं के कंपार्टमेंट में पास हुए छात्रों को नहीं मिलेगा इस साल दाखिला
विश्वविद्यालयों को स्वायत्ता, नकेल शिक्षा विभाग के हाथ
देहरादून। प्रदेश सरकार भले ही सुदूर गांव के छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए सहूलियतें दे रही हो, लेकिन अधिकारी सरकारी प्रयासों पर पानी फेरने का काम कर रहे हैं। श्रीदेव सुमन और कुमाऊं विश्वविद्यालय से संबंधित कालेजों में इस बार 12वीं रामनगर और सीबीएसई की कंपार्टमेंट परीक्षाओं में पास होने के बावजूद इन छात्रों को दाखिला नहीं मिलेगा। इसके अलावा कई यूजी और पीजी छात्रों को भी दाखिले से वंचित रहना पड़ सकता है। समर्थ पोर्टल न खुलने से इन छात्रों को दाखिला नहीं मिल रहा है।
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि समर्थ पोर्टल खोलने का अधिकार शिक्षा विभाग के पास है। ऐसे में उच्च शिक्षा विभाग ही पोर्टल खोलने का फैसला लेगा।
कुमाऊं और श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय की पहले सेमेस्टर की परीक्षाएं 6 दिसम्बर से शुरू हो रही हैं। परीक्षाएं वही छात्र दे पाएंगे जो कि समर्थ पोर्टल पर पंजीकृत हों। कालेजों का तर्क है कि बैक पेपर, नीट मॉप अप राउंड, सीयूईटी के तहत कालेज मिलने का इंतजार कर रहे छात्रों को अब कुमाऊं और श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालयों में भी दाखिला नहीं मिलेगा। इन्हें तभी दाखिला मिल सकेगा जब समर्थ पोर्टल खुलेगा और उच्च शिक्षा विभाग पोर्टल खोलने के लिए तैयार नहीं है।
कालेज प्रबंधन एसोसिएशन ने इस संबंध में शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत से गुहार लगाई थी कि पोर्टल एक दिन के लिए खोल दिया जाएं ताकि छात्रों को समर्थ पोर्टल पर पंजीकरण किया जा सके। डा. धन सिंह रावत ने उच्च शिक्षा विभाग को पोर्टल खोलने के निर्देश दिये लेकिन पोर्टल नहीं खुला।
इस संबंध में उच्च शिक्षा विभाग में समर्थ पोर्टल के इंचार्ज असिस्टेंट डायरेक्टर दीपक पांडे ने कहा कि 180 दिन पढ़ाई की शर्त भी है। इसके अलावा पोर्टल खोलने न खोलने का फैसला अथारिटी करती है। यदि अथारिटी कहेगी तो पोर्टल खोल दिया जाएगा।
दूसरी ओर विश्वविद्यालय का तर्क है कि विभाग ही पोर्टल खोल सकता है। जबकि कालेजों में दाखिला देना, नियम बनाने और उसका अनुपालन करना और समर्थ पोर्टल भी विश्वविद्याय के दायरे में होना चाहिए। समर्थ पोर्टल पर उच्च शिक्षा विभाग का कब्जा होने से अब सैकड़ों छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो गया है। बता दें कि शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत कोलकत्ता गये हैं।
देहरादून/दिल्ली। प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने केन्द्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान केन्द्रीय मंत्री ने अपनी कामयाबी के पीछे पत्नी पाना देवी के योगदान को बताते हुए उन पर लिखी पुस्तक “एक सफर हमसफ़र के साथ” भी उन्हें भेंट की।
प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने बुधवार को केन्द्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल से नई दिल्ली स्थित उनके आवास पर शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान केन्द्रीय मंत्री ने अपनी कामयाबी के पीछे पत्नी पाना देवी के योगदान को बताते हुए पत्नी पर लिखी पुस्तक “एक सफर हमसफ़र के साथ” भी उन्हें भेंट की। महाराज ने बताया कि अर्जुन राम मेघवाल की पुस्तक “एक सफर हमसफर के साथ” उनकी पत्नी पाना देवी के जीवन पर आधारित है। इस पुस्तक में, मेघवाल ने अपनी पत्नी के साथ अपने जीवन के अनुभवों और संघर्षों को साझा किया है। उन्होंने अपनी पत्नी की भूमिका को अपने जीवन में बहुत महत्वपूर्ण बताया है और कहा है कि उनकी सफलता में उनकी पत्नी का बहुत बड़ा योगदान है।
महाराज ने बताया कि अर्जुन राम मेघवाल की पत्नी पाना देवी एक साधारण घरेलू महिला हैं, जिन्होंने अपने पति के साथ अपने जीवन को समर्पित किया है। उन्होंने कहा कि जब केन्द्रीय मंत्री मेघवाल पढ़ाई कर रहे थे तो उनके पास स्कूल की फ़ीस देने को पैसे कम पड़ जाते थे उस समय उनकी पत्नी पाना देवी दस्तकारी का काम कर उससे मिलने वाली धनराशि को उन्हें पढ़ने के लिए देते थी। शादी के बाद पति को पढ़ने देने के लिए पाना देवी ने ही बार-बार उन्हें प्रेरित किया और कदम-कदम पर उनका साथ दिया।
केन्द्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा लिखित पुस्तक “एक सफर हमसफर के साथ” निश्चित रूप से अब तक के सफर में उनकी पत्नी के योगदान और समर्पण का एक सम्पूर्ण दस्तावेज है जो सभी के लिए एक प्रेरणा है।
10 दिसंबर से ऑनलाइन आवेदन, 30 दिसंबर आख़िरी तारीख
देहरादून। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने राज्य के विभिन्न विभागों में रिक्त चल रहे पदों को भरने के लिए 57 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। आयोग ने जारी नोटिफिकेशन में मनोवैज्ञानिक, पर्यटन अधिकारी, कंप्यूटर प्रोग्रामर, प्रशिक्षक, अनुदेशक, कैमरामैन, फोटो कॉपी मशीन ऑपरेटर और जूनियर तकनीकी सहायक सहित कई तकनीकी और गैर-तकनीकी पदों की घोषणा की है।
आवेदन प्रक्रिया 10 दिसंबर 2025 से ऑनलाइन प्रारंभ होगी, जबकि 30 दिसंबर 2025 आवेदन की अंतिम तिथि निर्धारित की गई है। उम्मीदवारों को आवेदन पत्र में संशोधन का अवसर 3 जनवरी से 5 जनवरी 2026 तक दिया जाएगा।
आयोग के अनुसार, इन पदों के लिए लिखित परीक्षा 9 मार्च 2026 से प्रस्तावित है। इच्छुक अभ्यर्थी योग्यता, चयन प्रक्रिया और विस्तृत दिशा-निर्देश आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर देख सकते हैं।
डाॅग स्क्वाड तथा एएनटीएफ टीम के साथ पुलिस की अलग-अलग टीमो द्वारा कोतवाली नगर क्षेत्रांतर्गत लक्खी बाग, रीठा मंडी, सिंगल मंडी, कुसुम विहार आदि क्षेत्रों में वृहद स्तर पर चलाया गया सत्यापन अभियान
किरायेदार सत्यापन में लापरवाही पर 30 मकान मालिकों पर 3 लाख का जुर्माना
देहरादून। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून के निर्देश पर जनपद में संदिग्ध व्यक्तियों और अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए व्यापक स्तर पर सत्यापन एवं चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में 3 दिसंबर 2025 को कोतवाली पुलिस ने एनएनटीएफ टीम और डॉग स्क्वाड के साथ मिलकर लक्खीबाग, रीठामंडी, सिंगल मंडी, कुसुम विहार सहित आसपास के क्षेत्रों में सघन चेकिंग अभियान संचालित किया।
अभियान के दौरान पुलिस टीम ने क्षेत्र में घूम रहे संदिग्ध व्यक्तियों की तलाश की, साथ ही अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों से संबंधित जानकारी जुटाई। पुलिस ने बाहरी राज्यों से आए लोगों, किरायेदारों और अस्थायी रूप से रहने वाले व्यक्तियों का सत्यापन किया।
चेकिंग के दौरान कई अनियमितताएं सामने आईं। किरायेदार सत्यापन न कराने पर 30 मकान मालिकों के खिलाफ धारा 83 पुलिस एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए 3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। इसके अलावा संदिग्ध रूप से घूम रहे चार लोगों से पूछताछ की गई और सत्यापन पूरा करने के बाद 81 पुलिस अधिनियम में चालान कर 1,000 रुपये का जुर्माना वसूला गया।
एसएसपी देहरादून के निर्देश पर जनपदभर में यह सत्यापन और चेकिंग अभियान लगातार जारी है, ताकि क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और भी अधिक सुदृढ़ की जा सके।
वन विभाग ने बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए स्कूल टाइमिंग एक घंटा आगे बढ़ाने का अनुरोध किया
देहरादून। राज्य में लगातार बढ़ रहे भालू-हमलों को देखते हुए वन विभाग ने बड़ी पहल की है। गंभीर रूप से घायल होने की स्थिति में प्रभावित लोगों को 10 लाख रुपये तक की अनुग्रह सहायता देने का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजने की तैयारी शुरू कर दी गई है। साथ ही जिन इलाकों में भालुओं की गतिविधि और हमलों में तेजी आई है, वहां जैव विविधता बोर्ड और वन अनुसंधान संस्थान के जरिए विस्तृत अध्ययन कराने की भी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
प्रमुख वन संरक्षक रंजन मिश्रा की अध्यक्षता में हुई बैठक में मानव–वन्यजीव संघर्ष को रोकने और प्रभावितों को त्वरित सहायता सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। अधिकारियों ने बताया कि गांवों में जागरूकता कार्यक्रमों, झाड़ियों की कटान और ट्रैकिंग के लिए अतिरिक्त मानव बल की आवश्यकता है। पीसीसीएफ मिश्रा ने निर्देश दिए कि वनाग्नि और मानव–वन्यजीव संघर्ष दोनों बड़ी चुनौतियां हैं, इसलिए संवेदनशील क्षेत्रों में नियमों के अनुरूप पर्याप्त वॉचर नियुक्त किए जाएं।
बैठक में यह भी बताया गया कि भालू या अन्य वन्यजीवों के हमले में घायल व्यक्ति को अस्पताल तक पहुंचाने की पूरी व्यवस्था विभाग करता है, लेकिन कई बार गांव में रुकने और तत्काल सहायता पर अतिरिक्त व्यय आता है। अधिकारियों ने इस खर्च की प्रतिपूर्ति के लिए विशेष प्रावधान बनाने का अनुरोध किया।
स्कूल का समय बदलने की सिफारिश भी
गढ़वाल वन संरक्षक ने जानकारी दी कि रुद्रप्रयाग वन प्रभाग के कई इलाकों में स्कूल खुलने के समय भालू देखे जा रहे हैं, जिससे बच्चों की सुरक्षा को खतरा बढ़ रहा है। इस पर वन विभाग ने जिला प्रशासन से स्कूलों का समय एक घंटा आगे बढ़ाने का औपचारिक अनुरोध किया है, ताकि बच्चे सुरक्षित समय में स्कूल आ-जा सकें।
बैठक में पीसीसीएफ एस.बी. सुबुद्धि, अपर प्रमुख वन संरक्षक मीनाक्षी जोशी, सुशांत पटनायक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
