पलटन बाजार और प्रमुख मार्गों में वाहनों का प्रवेश रहेगा प्रतिबंधित
देहरादून। आगामी धनतेरस, दीपावली, भैया दूज और गोवर्धन पूजा को ध्यान में रखते हुए, देहरादून पुलिस और प्रशासन ने शहर की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए विशेष तैयारियां शुरू कर दी हैं। जाम से बचाव और त्योहारों के दौरान सुविधाजनक आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए नया ट्रैफिक प्लान जारी किया गया है।
शहर के प्रमुख बाजारों और मार्गों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए जा रहे हैं। पुलिस के अलावा होमगार्ड और पीआरडी की टीम भी निगरानी में सहयोग करेगी। शिमला बाईपास और हरिद्वार बाईपास पर ट्रैफिक पुलिस अधिकारी लगातार पैट्रोलिंग करेंगे और जरूरत पड़ने पर डायवर्जन या प्रतिबंध लागू करेंगे।
बाजारों में प्रवेश और ट्रैफिक नियम
पलटन बाजार सहित अन्य व्यस्त बाजारों में वाहनों का प्रवेश सीमित रहेगा। लोडिंग वाहन सुबह 10 बजे तक माल पहुंचा सकते हैं, इसके बाद केवल राजा रोड से वन-वे व्यवस्था के तहत ही प्रवेश मिलेगा। व्यापारियों के वाहनों को टोकन के आधार पर ही अनुमति दी जाएगी। धामावाला बाजार, मच्छी बाजार और पीपल मंडी में केवल पैदल यात्री ही प्रवेश कर सकेंगे।
विक्रम/मैजिक रूट और सिटी बस व्यवस्था
राजपुर रोड, रायपुर रोड और रिस्पना क्षेत्र में विक्रम/मैजिक वाहनों के लिए अलग-अलग रूट निर्धारित किए गए हैं। सिटी बसों के लिए सवारी चढ़ाने-उतारने के नए प्वाइंट बनाए गए हैं, जैसे ऑरियंट चौक और रेंजर्स ग्राउंड।
डायवर्जन और ट्रैफिक नियंत्रण
भीड़ और ट्रैफिक दबाव के समय कई डायवर्जन पॉइंट बनाए गए हैं। सर्वे चौक, घंटाघर, धर्मपुर और नेहरू कॉलोनी तिराहा पर यातायात को सुचारू बनाए रखने के लिए वैकल्पिक मार्ग तय किए गए हैं।
एसएसपी अजय सिंह ने खुद जाकर घंटाघर, पलटन बाजार और लक्खी बाग क्षेत्रों में तैयारियों की समीक्षा की और सभी विभागों को सुरक्षा और यातायात नियंत्रण के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।
हरिद्वार केंद्र से हुआ था परीक्षा का पेपर लीक, सरकार ने परीक्षा रद्द की घोषणा की
देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने स्नातक स्तरीय परीक्षा रद्द करने का बड़ा फैसला लिया है। यह कदम पेपर लीक प्रकरण के बाद उठाया गया है। जांच के लिए गठित एकल सदस्यीय आयोग ने अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सौंप दी, जिसके आधार पर यह निर्णय लिया गया। 21 सितंबर को प्रदेश में आयोजित इस परीक्षा में करीब 1 लाख 5 हजार अभ्यर्थी शामिल हुए थे। हालांकि, हरिद्वार के एक परीक्षा केंद्र से पेपर के तीन पेज मोबाइल के माध्यम से बाहर निकल गए थे और परीक्षा के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल हो गए थे।
युवाओं का आंदोलन और सरकार की प्रतिक्रिया
पेपर लीक के विरोध में उत्तराखंड बेरोजगार संघ के तहत युवाओं ने धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री धामी खुद आंदोलन स्थल पर पहुंचे और युवाओं को सुनवाई और कार्रवाई का आश्वासन दिया। छात्रों ने सरकार को दस दिन का अल्टीमेटम दिया था, जो आज समाप्त हो रहा था। जांच आयोग ने सभी जनसंवाद और घटनाओं का बारीकी से अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी, जिसके बाद परीक्षा को रद्द करने का निर्णय लिया गया।
छात्रहित में उठाया गया कदम
सीएम धामी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी का गठन किया था और उच्च न्यायालय से सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी को अध्यक्ष बनाकर एकल सदस्यीय जांच आयोग बनाया था। भाजपा विधायक प्रतिनिधिमंडल ने भी परीक्षा को छात्रहित में रद्द कर दोबारा कराने की मांग की थी। इस फैसले के बाद अब प्रदेश में स्नातक स्तरीय परीक्षा की प्रक्रिया नवीन सत्र के अनुसार दोबारा आयोजित की जाएगी।
बिना स्वीकृति चल रहे बहुमंज़िला व्यवसायिक और आवासीय भवनों पर गिरी गाज
ऋषिकेश। देहरादून के सुनियोजित विकास और भवन निर्माण मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एम.डी.डी.ए.) ने नियम विरुद्ध निर्माणों के विरुद्ध अपनी सख़्त नीति पर अमल तेज़ कर दिया है। इसी क्रम में प्राधिकरण द्वारा ऋषिकेश क्षेत्र में बड़े पैमाने पर कार्रवाई की गई, जिसमें विभिन्न स्थानों पर बिना स्वीकृति के किए गए बहुमंज़िला व्यवसायिक एवं आवासीय निर्माणों को नियमानुसार सील किया गया।
यह कार्रवाई उन सभी निर्माणकर्ताओं के विरुद्ध की गई, जिन्होंने बिना एम.डी.डी.ए. की स्वीकृति के बहुमंज़िला निर्माण कार्य प्रारंभ किए थे। प्राधिकरण की यह मुहिम शहर में अवैध निर्माण की बढ़ती प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने तथा नियोजित विकास की दिशा में एक ठोस कदम है।
प्राधिकरण की संयुक्त प्रवर्तन टीम ने पुलिस बल की उपस्थिति में तुलसी देवी (विपरीत पोस्ट ऑफिस, बनखण्डी, ऋषिकेश), हरजीत सिंह (साईं विहार कॉलोनी, निकट सब्ज़ी मंडी), जयराम सेमवाल (आमबाग लेन नं. 01, विस्थापित, विपरीत THDC कार्यालय), लालमणी भट्ट (आमबाग लेन नं. 01, विस्थापित), रवी गुप्ता (आमबाग लेन नं. 02, विस्थापित), विक्रम सिंह बिष्ट (आमबाग लेन नं. 02, विस्थापित), प्रमोद सेमवाल (आमबाग लेन नं. 02, विस्थापित), जय चौहान (निर्मल बाग लेन नं. 10, ब्लॉक-‘बी’, विस्थापित), सगुन शर्मा (निर्मल बाग लेन नं. 11, ब्लॉक-‘बी’, विस्थापित) तथा प्रमोद चौहान (विपरीत गंगा फार्मेसी, निकट इंडियन ऑयल पंप, स्यामपुर, ऋषिकेश) द्वारा किए गए अवैध निर्माणों पर नियमानुसार सीलिंग की कार्रवाई की।
इस कार्यवाही में मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण की संयुक्त प्रवर्तन टीम तथा स्थानीय पुलिस बल की सक्रिय भागीदारी रही।
सचिव, मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण का बयान
सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि प्राधिकरण क्षेत्र में बिना स्वीकृति के किसी भी प्रकार का निर्माण सहन नहीं किया जाएगा। आमजन से अपेक्षा है कि वे भवन निर्माण से पूर्व एम.डी.डी.ए. से नियमानुसार स्वीकृति अवश्य प्राप्त करें। अवैध निर्माण करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही लगातार जारी रहेगी।
उपाध्यक्ष, मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण का बयान
उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि ऋषिकेश सहित पूरे प्राधिकरण क्षेत्र में नियमविरुद्ध निर्माणों की पहचान कर उन्हें हटाने का अभियान जारी है। भविष्य में ऐसे मामलों में सख्त कार्यवाही की जाएगी। प्राधिकरण शहर के सुनियोजित एवं सुरक्षित विकास के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है।
मरीजों से ली सेवाओं की जानकारी, अस्पताल की व्यवस्था सुधारने के दिए निर्देश
डॉ. राजेश कुमार बोले— मरीजों को समयबद्ध और बेहतर इलाज देना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता
श्रीनगर। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर जनपद रुद्रप्रयाग के प्रभारी सचिव एवं स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार जनपद प्रवास पर पहुंचे। जनपद प्रवास के दौरान डॉ. राजेश कुमार ने मार्ग में पड़ने वाले श्रीनगर मेडिकल कॉलेज का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कॉलेज परिसर, चिकित्सालय भवन, वार्डों और विभिन्न विभागों का भ्रमण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने मरीजों से मुलाकात कर अस्पताल में दी जा रही सुविधाओं और उपचार की गुणवत्ता की जानकारी ली।
स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास
निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य सचिव ने सीटी स्कैन, एमआरआई और कैथ लैब की कार्यप्रणाली का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि कैथ लैब का संचालन नियमित रूप से हो, इसके लिए विभाग निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मरीजों को बेहतर और समयबद्ध चिकित्सा सेवाएं मिलें, यह सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं समय-समय पर अस्पतालों की व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हैं और प्रदेशवासियों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए हर आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर रैली को किया फ्लैग ऑफ
अपने श्रीनगर प्रवास के दौरान स्वास्थ्य सचिव ने विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस (World Mental Health Day) के अवसर पर मेडिकल कॉलेज परिसर से आयोजित जागरूकता रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि मानसिक स्वास्थ्य, शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है और समाज के हर वर्ग को इसके प्रति जागरूक होने की आवश्यकता है। डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि तनावमुक्त जीवन, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और सकारात्मक सोच मानसिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक तत्व हैं। उन्होंने मेडिकल कॉलेज प्रशासन से कहा कि मानसिक स्वास्थ्य पर जागरूकता बढ़ाने के लिए निरंतर कैंप और जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
नए पीआरओ सेंटर का उद्घाटन एवं स्वास्थ्य शिविर लगाने के निर्देश
इस दौरान स्वास्थ्य सचिव ने मेडिकल कॉलेज परिसर में एक नए पीआरओ (Public Relations Office) सेंटर का भी उद्घाटन किया। उन्होंने बताया कि यह केंद्र मरीजों और उनके परिजनों की सुविधा के लिए कार्य करेगा, जिससे उन्हें जानकारी प्राप्त करने और समस्याओं के समाधान में मदद मिल सकेगी। उन्होंने कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना को निर्देश दिए कि ओपीडी सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जाए ताकि ज्यादा से ज्यादा मरीजों को लाभ मिल सके। साथ ही उन्होंने मेडिकल कॉलेज टीम को ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में नियमित स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए, ताकि ग्रामीण जनता को भी समय पर स्वास्थ्य जांच और परामर्श मिल सके।
कफ सिरप प्रकरण पर सख्त रुख–कार्रवाई जारी
स्वास्थ्य सचिव डॉ. राजेश कुमार ने हाल ही में चर्चा में आए कफ सिरप प्रकरण पर भी स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार इस मामले को लेकर बेहद गंभीर है। उन्होंने कहा कि ड्रग कंट्रोलर के नेतृत्व में राज्यभर में औषधि विभाग की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं और संदिग्ध दवाओं के सैंपल जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सभी जनपदों में एसओपी (Standard Operating Procedure) का सख्ती से पालन कराया जा रहा है। जो मेडिकल स्टोर नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, उनके लाइसेंस निरस्त किए जा रहे हैं और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा, “हम बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेंगे।”
स्वास्थ्य मंत्री का विशेष फोकस श्रीनगर मेडिकल कॉलेज पर
स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि श्रीनगर मेडिकल कॉलेज स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत का विधानसभा क्षेत्र होने के कारण स्वयं मंत्री का इस संस्थान पर विशेष फोकस रहता है। लगातार इंफ्रास्ट्रक्चर, मशीनरी और मानव संसाधन की गुणवत्ता में सुधार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि श्रीनगर मेडिकल कॉलेज को पहाड़ी क्षेत्र का एक मॉडल मेडिकल संस्थान बनाया जाए।
मुख्यमंत्री का स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष फोकस
डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के व्यापक सुधार का संकल्प लिया है। मुख्यमंत्री के निर्देशन में ई-संजीवनी, टेलीमेडिसिन, मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं, और जन औषधि केंद्रों के माध्यम से चिकित्सा सेवाओं को गांव-गांव तक पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि उत्तराखंड का प्रत्येक नागरिक गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाए। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग निरंतर नीतिगत सुधारों, अवसंरचना विकास और जनजागरूकता पर बल दे रहा है।
जांच अधिकारी नियुक्त, एक माह में शासन को रिपोर्ट सौंपने के निर्देश
देहरादून। हरिद्वार के ग्राम सराय में नगर निगम द्वारा की गई जमीन खरीद में सामने आए घोटाले को लेकर सरकार ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। तत्कालीन डीएम कर्मेन्द्र सिंह, नगर आयुक्त वरुण चौधरी और एसडीएम अजयवीर सिंह के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं। गृह विभाग ने इसे लेकर आधिकारिक अधिसूचना जारी की है।
प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर एसडीएम अजयवीर सिंह के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है। उन्हें पहले ही निलंबित किया जा चुका है और आरोपपत्र जारी करते हुए अपना पक्ष रखने का मौका भी दिया गया था। 16 सितंबर को उन्होंने लिखित रूप में सभी आरोपों से इंकार किया था।
अब शासन ने निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए अपर सचिव डॉ. आनंद श्रीवास्तव (आईएएस) को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। उन्हें एक माह के भीतर जांच रिपोर्ट शासन को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेन्द्र सिंह और नगर आयुक्त वरुण चौधरी की जांच की जिम्मेदारी सचिव सचिन कुर्वे (आईएएस) को सौंपी गई है।
गौरतलब है कि इस जमीन घोटाले में सरकार पहले ही दो आईएएस और एक पीसीएस अधिकारी सहित 12 अधिकारियों-कर्मचारियों को निलंबित कर चुकी है। बताया जा रहा है कि नगर निगम ने ग्राम सराय में अनुपयुक्त 2.3070 हेक्टेयर जमीन 54 करोड़ रुपये में खरीदी थी, जो कूड़े के ढेर के पास स्थित थी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि “राज्य सरकार भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रही है। शासन व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। कोई भी अधिकारी यदि गलत पाया गया, तो उसके खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।”
मुख्यमंत्री बोले— सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय स्थिरता के लिए उत्तराखंड को बनाया जा रहा है मॉडल स्टेट
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को दून विश्वविद्यालय में इंडियन एसोसिएशन ऑफ सोशल साइंस इंस्टीट्यूशंस (IASSI) के 24वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वार्षिक अधिवेशन के विभिन्न सत्रों में सामाजिक कल्याण, अर्थशास्त्र, रोजगार, उद्योग, कृषि, तकनीकी, पर्यावरण और नगरीकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर देश-विदेश के प्रख्यात विद्वान सार्थक विचार-विमर्श करेंगे। यह चिंतन-मंथन सामाजिक नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन और जन-कल्याण के ठोस उपायों के लिए उपयोगी सिद्ध होगा।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र के साथ निरंतर प्रगति कर रहा है। जन-धन योजना, उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना और आयुष्मान भारत जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं से करोड़ों नागरिक लाभान्वित हुए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सौर मिशन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन, नमामि गंगे और प्लास्टिक मुक्त भारत जैसे अभियान पर्यावरण संरक्षण में अहम भूमिका निभा रहे हैं। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में राज्य सरकार सामाजिक न्याय और सतत विकास के लिए निरंतर कार्यरत है। वृद्धावस्था पेंशन में वृद्धि, पति-पत्नी दोनों को पेंशन की सुविधा और पेंशन योजनाओं में मासिक भुगतान जैसी पहलें इसी दिशा में हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए राज्य सरकार पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। राज्य में आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय स्थिरता बनाए रखते हुए एक सुरक्षित व न्यायपूर्ण व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। सरकार ने इकोनॉमी और इकोलॉजी के संतुलन के लिए त्रि-स्तंभीय एवं नौ-सूत्रीय नीति लागू की है।
उन्होंने कहा कि गरीबी उन्मूलन, खाद्य सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, शहरी विकास, वित्तीय समावेशन और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में लगातार प्रगति हो रही है। मुख्यमंत्री महिला उद्यमिता प्रोत्साहन योजना, सौर ऊर्जा क्रांति अभियान, स्मार्ट सिटी मिशन और शहरी आजीविका योजना के माध्यम से इन क्षेत्रों को सशक्त बनाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि नीति आयोग द्वारा सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में उत्तराखंड देश में प्रथम स्थान पर है। राज्य सरकार ने सामाजिक विकास को सशक्त बनाने के लिए टाटा ट्रस्ट, नैस्कॉम और वाधवानी फाउंडेशन के साथ महत्वपूर्ण समझौते किए हैं।
टाटा ट्रस्ट के सहयोग से जल प्रबंधन, पोषण, टेलीमेडिसिन, ग्रामीण आजीविका और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में कार्य हो रहा है, वहीं नैस्कॉम और वाधवानी फाउंडेशन के साथ एआई, डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा, पायथन, जनरेटिव एआई और कौशल विकास के क्षेत्र में युवाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन नवाचारों के माध्यम से उत्तराखंड को सस्टेनेबल डेवलपमेंट का मॉडल स्टेट बनाया जाएगा।
इस अवसर पर नीति आयोग के सदस्य प्रो. रमेश चंद, दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल, आईएएसएसआई अध्यक्ष एवं नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी, प्रो. आर.पी. ममगांई, प्रो. आई.सी. अवस्थी, प्रो. अलख शर्मा सहित अनेक विषय विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री धामी ने परिजनों को सौंपे चेक, कहा — कर्मचारियों के सम्मान और सुरक्षा के लिए सरकार प्रतिबद्ध
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को उपनल के माध्यम से सेवारत तीन कार्मिकों की सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु होने के उपरांत उनके आश्रितों को 50-50 लाख रुपये की सहायता राशि के चेक प्रदान किए। उपनल के माध्यम से कार्यरत विद्युत वितरण खंड जसपुर के बृजेश कुमार (जनवरी 2025), ब्रिडकुल देहरादून के तसलीम (नवंबर 2024) तथा विद्युत वितरण खंड हरिद्वार के संजीव कुमार (फरवरी 2025) की सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु हो गई थी।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा उपनल, सरकारी एवं अर्द्धसरकारी कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए बैंकों के साथ कॉर्पोरेट सैलरी पैकेज के तहत कई सुविधाएं और बीमा लाभ उपलब्ध कराए गए हैं। इस पहल के अंतर्गत कार्मिक की दुर्घटना में मृत्यु होने पर उनके परिजनों को सहायता राशि प्रदान की जा रही है। उन्होंने उपनल कर्मचारियों के लिए यह सुविधा उपलब्ध कराने हेतु पंजाब नेशनल बैंक का आभार भी व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी आर्थिक सहायता मानव जीवन की कमी को पूर्ण नहीं कर सकती, किंतु यह कठिन समय में परिवार को संबल अवश्य देती है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि कर्मचारियों को सुरक्षित एवं सम्मानजनक कार्य वातावरण के साथ कठिन परिस्थितियों में उनके परिवारों को हर संभव सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उत्तराखंड सरकार द्वारा अनेक नवाचार किए जा रहे हैं और कर्मचारियों के हितों में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव दीपेन्द्र चौधरी, अपर सचिव मनमोहन मैनाली, मेजर जनरल (से.नि.) शम्मी सबरवाल, उपनल के एमडी जे.एन.एस. बिष्ट, पंजाब नेशनल बैंक के जोनल हेड अनुपम, डिप्टी जनरल मैनेजर अभिनंदन तथा एजीएम अजीत कुमार उपाध्याय उपस्थित रहे।
139 दिन चली हेमकुंड साहिब की यात्रा, दो लाख 72 हजार श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
चमोली। हेमकुंड साहिब के कपाट आज दोपहर एक बजे शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। पिछले दिनों हुई बर्फबारी से क्षेत्र पूरी तरह बर्फ की चादर से ढक गया है।
इस साल हेमकुंड साहिब में अंतिम अरदास शुक्रवार को सम्पन्न हुई। कपाट बंद होने की प्रक्रिया सुबह 10 बजे सुखमणी साहिब के पाठ से शुरू हुई और दोपहर एक बजे गुरुद्वारा ट्रस्ट अध्यक्ष नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा की देखरेख में शीतकाल के लिए समाप्त हुई। कीर्तन और गुरुग्रंथ साहिब के सुशोभित होने के बाद श्रद्धालुओं ने इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनकर आशीर्वाद प्राप्त किया।
लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट भी दोपहर 12:31 बजे बंद कर दिए गए। यह मंदिर और हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा एक ही परिसर में स्थित हैं। इस साल हेमकुंड साहिब में दर्शन करने आए श्रद्धालुओं की संख्या दो लाख 72 हजार तक पहुंची।
इस वर्ष हेमकुंड साहिब की यात्रा 25 मई से शुरू हुई थी और 10 अक्टूबर को समाप्त हुई, यानी कुल 139 दिन चली।
मुख्य सचिव ने उद्योगों को बेहतर माहौल और त्वरित समाधान के लिए अधिकारियों को दिए निर्देश
देहरादून। राज्य सरकार ईएसआईसी अस्पताल खोलने के लिए मानकों में ढील देने की योजना बना रही है। प्रस्ताव जल्द ही क्षेत्रीय परिषद को भेजा जाएगा। मुख्य सचिव आनंदबर्द्धन ने उद्योगों को बेहतर माहौल देने और उनसे जुड़े मामलों के त्वरित निपटान के निर्देश दिए हैं।
मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य में उद्योगों को सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए शासन प्रतिबद्ध है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि उद्योगों और उद्यमियों से जुड़े मामलों पर चर्चा के लिए राज्य एवं जिला स्तरीय उद्योग मित्र समितियों की बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जाएँ। तात्कालिक मामलों में तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
बैठक में उद्यमियों और उद्योग संगठनों के प्रतिनिधियों की समस्याओं को सुना गया और कई महत्वपूर्ण प्रकरणों का त्वरित समाधान करने के निर्देश दिए गए। सचिव वित्त दिलीप जावलकर की उपस्थिति में जीएसटी से जुड़ी नई व्यवस्थाओं पर भी चर्चा की गई और समस्याओं का समाधान सुझाया गया।
इसके अलावा, ईएसआईसी अस्पताल खोलने के मानकों में ढील देने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। देहरादून में आवश्यक भूमि की व्यवस्था करने और उद्योगों के लिए बिजली, लॉजिस्टिक व अन्य सुविधाओं को सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए। बैठक में गृह, उद्योग और अन्य संबंधित विभागों के सचिव तथा उद्योग प्रतिनिधि मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने 8,589 करोड़ की जल निकासी योजना और बाह्य सहायतित परियोजनाओं की स्वीकृति की मांग की
देहरादून/नई दिल्ली। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से भेंट कर उत्तराखंड से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की। मुख्यमंत्री ने वित्त मंत्री को जीएसटी सुधारों के सफल क्रियान्वयन के लिए शुभकामनाएँ देते हुए राज्य को मिले सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
उन्होंने बताया कि राज्य के शहरी क्षेत्रों में बढ़ती जनसंख्या के कारण नगरीय जल निकासी प्रणाली के सुधार और अपग्रेडेशन की आवश्यकता है। राज्य के 10 सर्वाधिक वर्षा प्रभावित जिलों के लिए स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम के उन्नयन की डीपीआर तैयार की गई है, जिसकी अनुमानित लागत 8,589.47 करोड़ रुपये है।
मुख्यमंत्री ने बाह्य सहायतित परियोजनाओं (EAPs) की शीघ्र स्वीकृति का भी अनुरोध किया। इनमें उत्तराखंड क्लाइमेट रिज़िलीअन्स डेवलपमेंट प्रोजेक्ट, सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन सुदृढ़ीकरण परियोजना (850 करोड़) और जलापूर्ति सुधार परियोजना (800 करोड़) शामिल हैं।
उन्होंने वर्ष 2023-24 से 2025-26 के लिए 4 अन्य प्रमुख परियोजनाओं—2000 करोड़ की जल एवं स्वच्छता नगरीय अवसंरचना विकास परियोजना, 424 करोड़ की डीआरआईपी-III, 3638 करोड़ की उत्तराखंड क्लाइमेट रेसिलिएंट पॉवर ट्रांसमिशन परियोजना और 1566 करोड़ की पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन सुधार परियोजना—की शीघ्र स्वीकृति देने का अनुरोध किया।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मुख्यमंत्री को हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।
