महर्षि वाल्मीकि की रचनाओं से हमें सत्य, प्रेम और कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है- सीएम धामी
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वाल्मीकि जयंती के अवसर पर महर्षि वाल्मीकि के चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर उनका भावपूर्ण स्मरण किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रामायण के रचनाकार, आदिकवि महर्षि वाल्मीकि की रचनाओं से हमें सत्य, प्रेम और कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। उनके द्वारा दी गई समरसता, सद्भाव तथा मानवता जैसे नैतिक मूल्यों की शिक्षा सदैव प्रेरित करती रहेगी।
शिक्षकों की भर्ती पर भी तय होंगे नए मानक
देहरादून। उत्तराखंड में मदरसों को अब केवल धार्मिक शिक्षा देने के लिए भी नई व्यवस्था के तहत मान्यता लेनी होगी। राज्य में नया अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान कानून लागू होने के बाद धार्मिक संस्थानों को शिक्षण व्यवस्था और शिक्षकों की नियुक्ति दोनों में निर्धारित मानकों का पालन करना अनिवार्य कर दिया गया है।
नए नियमों के अनुसार, उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड से मान्यता प्राप्त मदरसे केवल शैक्षिक सत्र 2025-26 तक ही मौजूदा अधिनियम — उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम 2016 और अरबी एवं फारसी मदरसा मान्यता नियमावली 2019 — के तहत शिक्षा दे सकेंगे।
इसके बाद, शैक्षिक सत्र 2026-27 से धार्मिक शिक्षा जारी रखने के लिए प्रत्येक मदरसे को नए कानून के तहत गठित प्राधिकरण से दोबारा मान्यता प्राप्त करनी होगी। यह मान्यता तीन शैक्षणिक सत्रों के लिए वैध रहेगी, जिसके बाद संस्थानों को इसका नवीनीकरण कराना होगा।
कानून के तहत अब यह भी आवश्यक किया गया है कि संस्थान की भूमि उसकी सोसाइटी के नाम पर दर्ज हो और सभी वित्तीय लेन-देन संस्थान के नाम से खुले बैंक खाते के माध्यम से ही किए जाएं।
इसके साथ ही, कोई भी अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थान अब अपने छात्रों या कर्मचारियों को किसी धार्मिक गतिविधि में भाग लेने के लिए बाध्य नहीं कर सकेगा। वहीं, मदरसों को शिक्षक नियुक्ति के लिए अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थान परिषद द्वारा तय योग्यता मानकों का पालन करना होगा।
पहले शिक्षकों की नियुक्ति में इतनी सख्ती नहीं थी, लेकिन अब राज्य सरकार ने पारदर्शिता और गुणवत्ता को सुनिश्चित करने के लिए यह व्यवस्था लागू की है।
सीएम धामी ने ऑनलाइन कोचिंग क्लास का किया शुभारंभ, बोले — शिक्षा और आत्मनिर्भरता से ही मजबूत होगा नया उत्तराखंड
ऋषिकेश। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत सी.एल.एफ. हेतु 1.20 करोड़ रुपये की 12 आर्थिक गतिविधियों का लोकार्पण किया। इसके साथ ही 10 अन्य सी.एल.एफ. के लिए 1 करोड़ रुपये की प्रस्तावित आर्थिक गतिविधियों का शिलान्यास भी किया गया। मुख्यमंत्री ने मेले में ‘Rising Tehri – Physics Wala Online Coaching Class’ का शुभारंभ किया, जिससे ग्रामीण युवा अपने गांव में रहकर जेईई और नीट जैसी प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कर सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने ग्राम्य विकास विभाग और जिला प्रशासन द्वारा ‘ग्रामोत्थान परियोजना’ के तहत की गई पहलों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह मेला ग्रामीण संस्कृति, कौशल और उद्यमिता को प्रदर्शित करने का अनूठा मंच है। मेले के माध्यम से स्थानीय उत्पादों और ग्रामीण कारीगरों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने सभी से अपील की कि मेले में लगे स्टॉल से स्वदेशी उत्पाद खरीद कर ‘स्वदेशी अपनाओ’ अभियान को मजबूत करें और महिला उद्यमियों के सपनों में निवेश करें।
महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता के नए आयाम
मुख्यमंत्री ने लखपति दीदी योजना के तहत अब तक 1.65 लाख महिलाओं को लखपति बनने का गौरव प्राप्त होने की जानकारी दी। ‘मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना’ के माध्यम से महिलाओं द्वारा 2000 से अधिक स्टॉल लगाकर 5.5 करोड़ रुपये का विपणन किया गया। ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड से स्वदेशी उत्पादों की वैश्विक पहुंच बनी।
राज्य में 68 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूहों में 5 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। महिला किसान सशक्तिकरण योजना और फार्म लाइवलीहुड के माध्यम से 3 लाख से अधिक महिला किसानों की क्षमता विकसित की गई है। 2.5 लाख किचन गार्डन स्थापित किए गए और लगभग 500 फार्म मशीनरी बैंक उपलब्ध कराए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन सभी पहलों से महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और मातृशक्ति आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही है।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, सुबोध उनियाल, स्वयं सहायता समूह के सदस्य, ग्रामीण उद्यमी और स्थानीय लोग उपस्थित रहे।
उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी के नेतृत्व में लगातार कार्रवाई जारी
देहरादून। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) की ओर से अवैध प्लाटिंग, नियम विरुद्ध निर्माण और अनाधिकृत निर्माणों के खिलाफ अभियान लगातार जारी है। प्राधिकरण उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी के निर्देशन में विभिन्न क्षेत्रों में रोजाना कार्रवाई की जा रही है। उपाध्यक्ष स्वयं टीम का नेतृत्व करते हुए मौके पर पहुंचकर सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करा रहे हैं। एमडीडीए की यह कार्रवाई शहर को योजनाबद्ध और सुव्यवस्थित रूप में विकसित करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। प्राधिकरण का स्पष्ट संदेश है कि जो भी व्यक्ति बिना स्वीकृति के भूमि काटकर बेचने या निर्माण करने का प्रयास करेगा, उसके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जौलीग्रांट में एमडीडीए की टीम की कार्रवाई
प्राधिकरण की टीम ने संजय ग्राम बागी वार्ड संख्या 07, कोठारी मोहल्ला, जौलीग्रांट, देहरादून में स्थित एक अनाधिकृत निर्माण को सील किया। कार्रवाई के दौरान एमडीडीए के सहायक अभियंता प्रमोद मेहरा, कनिष्ठ अभियंता स्वाति, कनिष्ठ अभियंता प्रवेश नौटियाल और सुपरवाइजर अमर लाल भट्ट पुलिस बल के साथ मौके पर मौजूद रहे।

सचिव एमडीडीए मोहन सिंह बर्निया का बयान
सचिव एमडीडीए मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि एमडीडीए का उद्देश्य देहरादून को सुव्यवस्थित और योजनाबद्ध स्वरूप में विकसित करना है। इसके लिए नियमों का पालन करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। बिना स्वीकृति के किए जा रहे निर्माणों को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्राधिकरण नियमित निरीक्षण अभियान चला रहा है और जहां भी नियम विरुद्ध निर्माण पाए जा रहे हैं, वहां तत्काल सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा रही है।
उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी का बयान
उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी ने कहा कि प्राधिकरण की प्राथमिकता शहर की सुंदरता, सुव्यवस्था और नियोजन को सुरक्षित रखना है। कोई भी व्यक्ति यदि बिना स्वीकृति निर्माण करता है या भूमि काटकर बेचता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि “देहरादून को स्मार्ट और सुव्यवस्थित सिटी के रूप में विकसित करने के लिए नियमों का सख्ती से पालन अनिवार्य है। जनता से अपील है कि किसी भी निर्माण से पहले नक्शा स्वीकृत करवाएं, ताकि बाद में किसी भी तरह की कार्रवाई से बचा जा सके।
राशन डीलर एसोसिएशन और विभागीय अधिकारी के साथ बैठक में मंत्री ने दिए निर्देश
देहरादून। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री रेखा आर्या ने राशन डीलरों को होने वाले लाभांश और भाड़े की भुगतान में एकरूपता लाने के निर्देश दिए हैं। कैबिनेट मंत्री ने सोमवार को ऑल इंडिया शेयर प्राइस शॉप डीलर्स फेडरेशन और विभागीय अधिकारियों के साथ विधानसभा भवन स्थित सभागार में बैठक की।
बैठक के बाद कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि अलग-अलग जनपदों में राशन डीलरों को अलग-अलग समय सीमा तक का भुगतान होने की बात सामने आई है । इसलिए अधिकारियों से कहा गया है कि केंद्र से जो भी बजट मिले इसका आवंटन इस तरह किया जाए कि किसी भी जनपद के डीलरों का बैकलॉग बाकी ना रहे।
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने राशन की दुकानों से दी जाने वाली दाल में में विविधता लाने के निर्देश दिए जिससे लाभार्थियों को सिर्फ एक ही तरह की दाल न मिले। साथ ही अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश भी दिया कि राशन की दुकान से मिलने वाली दाल का रेट बाजार मूल्य से कम होना चाहिए।
बैठक में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने दाल वितरण में डीलर को मिलने वाले कमीशन को बढ़ाने और ई पाॅश मशीनों के खराब होने की दशा में उन्हें ठीक करने वाले इंजीनियरों की संख्या बढ़ाने के भी निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि ई पाॅश मशीन लागू करने का अभी पायलट प्रोजेक्ट चल रहा है इसलिए उसमें दिखने वाला डाटा त्रुटि पूर्ण हो सकता है, इस डाटा के आधार पर जिला पूर्ति अधिकारी राशन डीलरों के खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई करने से बचें।
कैबिनेट मंत्री ने बताया कि एसएफआई लाभांश को एनएसएफए के समान बढ़ाने की मांग शासन में विचाराधीन है और उन्होंने अधिकारियों को इसे दिवाली से पहले मंजूर कराने के निर्देश दिए हैं।
बैठक में ऑल इंडिया फेयर प्राइस शॉप डीलर फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष रेवाधर बृजवासी ने राशन डीलरों की मांगो पर सहानुभूति पूर्वक विचार करने के लिए कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या का आभार जताया।
बैठक में प्रमुख सचिव एल फैनई, खाद्य आयुक्त चंद्रेश कुमार, अपर आयुक्त पीएस पांगती, डीलर्स फेडरेशन के कार्यकारी अध्यक्ष हरीश पंत, अनिल कक्कड़, महामंत्री संजय शर्मा, दिनेश चौहान, धर्मानंद बिजलवान, कुंदन शर्मा, दिनेश चंद्र जोशी आदि मौजूद रहे।
अग्निवीर भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं को मिलेगा सहयोग : धामी
खेल विवि व महिला स्पोर्ट्स कॉलेज की कार्यवाही में तेजी लाएं
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को खेल विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को राज्य में खेल अवसंरचना को सुदृढ़ करने और युवाओं को खेलों के प्रति अधिक प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 38वें राष्ट्रीय खेलों के दौरान तैयार की गई खेल अवसंरचना का नियमित रखरखाव और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए, ताकि राज्य में खेल गतिविधियों को निरंतर गति मिलती रहे।उन्होंने निर्देश दिए कि इन परिसंपत्तियों के अधिकतम उपयोग हेतु राज्यभर में नियमित खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाए।
मुख्यमंत्री ने हल्द्वानी में प्रस्तावित खेल विश्वविद्यालय और लोहाघाट में बनने वाले महिला स्पोर्ट्स कॉलेज की कार्यवाही में तेजी लाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के शीघ्र क्रियान्वयन से प्रदेश के खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण सुविधाएं मिलेंगी, जिससे राज्य खेल क्षेत्र में नई पहचान बनाएगा।
मुख्यमंत्री ने युवाओं में खेलों के प्रति उत्साह और भागीदारी बढ़ाने के लिए न्याय पंचायत स्तर से लेकर विधायक, सांसद एवं मुख्यमंत्री चैंपियनशिप ट्रॉफी जैसी प्रतियोगिताओं का भव्य आयोजन सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि खेल एवं युवा कल्याण विभाग अग्निवीर भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं को भी आवश्यक सहयोग प्रदान करे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 39वें राष्ट्रीय खेलों के दृष्टिगत प्रदेश के खिलाड़ियों को और बेहतर प्रशिक्षण एवं संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को समयबद्ध रूप से पुरस्कार, छात्रवृत्ति और बीमा सुरक्षा के लाभ दिए जाएं।
उन्होंने कहा कि खेल विभाग को निजी क्षेत्र एवं कॉरपोरेट जगत की भागीदारी से खेल अवसंरचना के विकास पर भी ध्यान देना चाहिए, ताकि खेल सुविधाओं का विस्तार जन-जन तक हो सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुभवी प्रशिक्षकों की नियुक्ति कर खिलाड़ियों को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण प्रदान किया जाए तथा राज्य में विभिन्न खेल अकादमियों की स्थापना से संबंधित कार्यों में तेजी लाई जाए।
उन्होंने कहा कि सरकार का संकल्प प्रदेश में खेल संस्कृति को बढ़ावा देना और युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देना है।
बैठक में खेल मंत्री रेखा आर्या, उत्तराखंड राज्य स्तरीय खेल परिषद के उपाध्यक्ष हेमराज बिष्ट, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, विशेष प्रमुख सचिव खेल अमित सिन्हा, सचिव शैलेश बगोली, निदेशक खेल आशीष चौहान तथा खेल विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
नई दिल्ली/नैनीताल: उत्तराखंड के युवा बेहतर रोजगार की तलाश में अक्सर अपने घर-परिवार और पहाड़ों को छोड़कर बड़े शहरों की ओर जाते हैं। लेकिन कभी-कभी यह संघर्ष उनकी जान तक ले लेता है। ऐसा ही एक दुखद मामला दिल्ली के “टर्निंग पॉइंट” होटल में सामने आया है, जहां नैनीताल जिले के बेतालघाट क्षेत्र के ऊंचाकोट मल्ला गांव निवासी प्रेमचंद पुत्र कुंदन राम की हत्या कर दी गई।
रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रेमचंद दिल्ली में होटल में काम कर रहे थे और अपने परिवार के लिए मेहनत कर रहे थे। रात करीब 1:45 बजे, होटल में उनके और उत्तर प्रदेश के रहने वाले अखिलेश के बीच विवाद हो गया। अचानक गुस्से में आए अखिलेश ने प्रेमचंद के सीने में कई बार चाकू मार दिया। इससे उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई।
इस घटना ने उनके परिवार पर गहरा शोक छोड़ दिया है। प्रेमचंद की पत्नी और दो छोटे-छोटे बच्चों का जीवन अचानक अंधकार में बदल गया है। परिवार न केवल पिता और पति को खोकर टूट गया है, बल्कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी के लिए संघर्ष करने के लिए मजबूर भी है।
सामाजिक कार्यकर्ता रोशन रतूड़ी ने घटना पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए आरोपी पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा, “उत्तराखंड के एक और होटलियर भाई की दिल्ली में बेरहमी से हत्या की गई। पुलिस प्रशासन द्वारा आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। हमें चाहिए कि ऐसी घटनाओं पर कड़ा कानूनी शिकंजा कसा जाए।”
पुलिस ने बताया कि हत्या का आरोपी गिरफ्तार कर लिया गया है और मामले की जांच जारी है। इस दुखद घटना ने रोजगार की तलाश में जाने वाले युवाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस दौरान पूरे परिवार और समाज से प्रार्थना की जा रही है कि भगवान दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और परिवार को यह अपार दुख सहने की शक्ति दें।
देहरादून। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) ने दीपावली के अवसर पर राज्य के आठ प्रमुख शहरों में हवा और ध्वनि प्रदूषण की निगरानी की तैयारी पूरी कर ली है। यह विशेष अभियान 13 अक्टूबर से शुरू होकर 15 दिन तक चलेगा, जैसा कि हर साल दीपावली के समय किया जाता है।
इस दौरान देहरादून, ऋषिकेश, टिहरी, हरिद्वार, काशीपुर, रुद्रपुर, हल्द्वानी और नैनीताल में हवा की गुणवत्ता और ध्वनि स्तर की जांच की जाएगी।
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देहरादून: घंटाघर और नेहरू कॉलोनी
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ऋषिकेश: नगर निगम परिसर
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टिहरी: डीएम कार्यालय और नगर पालिका परिषद परिसर
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हरिद्वार: ऋषिकुल आयुर्वेदिक कॉलेज
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काशीपुर: एलडी भट्ट उप जिला अस्पताल
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रुद्रपुर: नगर निगम परिसर
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हल्द्वानी: जल संस्थान कार्यालय
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नैनीताल: नगर पालिका परिषद परिसर
पीसीबी अधिकारियों के अनुसार, दीपावली के दौरान पटाखों और अन्य उत्सवों के कारण हवा और ध्वनि प्रदूषण में काफी वृद्धि होती है। इसलिए मानीटरिंग के लिए लगे स्टेशन के माध्यम से जांच होगी।
देहरादून। उत्तराखंड में वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर लगातार प्रयासों के बावजूद हाथियों की अप्राकृतिक मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा है। पिछले 25 वर्षों में प्रदेश में 167 हाथियों की मौत अप्राकृतिक कारणों से दर्ज की गई है, जो चिंताजनक स्थिति को दर्शाती है। हाल ही में हरिद्वार वन प्रभाग में तीन हाथियों की मौत ने एक बार फिर वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। इनमें एक हाथी की मौत करंट लगने से, एक की बीमारी से, जबकि तीसरे की मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका।
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2001 से अक्टूबर 2025 तक कुल 538 हाथियों की मौत दर्ज की गई। इनमें से 52 की मौत बिजली के करंट, 32 की ट्रेन से टकराने, 71 की दुर्घटनाओं, 2 की सड़क हादसों, 1 की जहर से, जबकि 9 की शिकार से हुई। इसके अलावा 79 हाथियों की मौत का कारण अब तक अज्ञात है। वहीं 102 हाथी आपसी संघर्ष में मारे गए और 227 की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई।
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि मानव बस्तियों के तेजी से विस्तार और जंगलों में घटती सुरक्षित जगहें इन घटनाओं का प्रमुख कारण हैं। राज्य में हाथियों की आबादी बढ़कर 2001 में 1507 से 2020 में 2026 तक पहुंच गई, जिससे मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं भी बढ़ी हैं। तराई केंद्रीय, हरिद्वार, रामनगर और तराई पूर्वी वन प्रभागों से सटे ग्रामीण इलाकों में अक्सर हाथियों का प्रवेश देखा जा रहा है।
वन संरक्षक राजीव धीमान ने बताया कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए विभाग लगातार प्रयासरत है। रेलवे ट्रैक के आसपास पेट्रोलिंग बढ़ाई गई है और ट्रेन की गति सीमित करने के उपाय किए गए हैं। वहीं, हरिद्वार वन प्रभाग के डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध के अनुसार, हाथियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए खेताें में लगी 40 अवैध करंट युक्त तारबाड़ें हटाई गईं, जिनसे हाथियों के लिए खतरा था। इस संबंध में एक मुकदमा भी दर्ज किया गया है।
वन विभाग का कहना है कि जनजागरूकता और ग्रामीणों के सहयोग से ही मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम किया जा सकता है। विभाग आने वाले समय में निगरानी और रोकथाम के लिए सैटेलाइट ट्रैकिंग और इलेक्ट्रिक फेंसिंग जैसे आधुनिक उपायों पर भी विचार कर रहा है।

