देहरादून। प्रसिद्ध पर्वतारोही एवं पद्मभूषण सम्मान प्राप्त बछेंद्री पाल ने शनिवार को मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए 10 लाख रुपए का चेक प्रदान किया। यह चेक उनकी ओर से राज्य महिला उद्यमिता परिषद की उपाध्यक्ष श्रीमती विनोद उनियाल द्वारा मुख्यमंत्री को सौंपा गया।
मुख्यमंत्री ने बछेंद्री पाल के इस सामाजिक योगदान के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संकट की घड़ी में सहयोग एवं सेवा की भावना ही समाज को जोड़ती है। उन्होंने कहा कि ऐसे योगदान न केवल ज़रूरतमंदों की मदद करते हैं, बल्कि जनहित के कार्यों के प्रति लोगों को प्रेरित भी करते हैं।


हल्द्वानी में शांति योग धाम चैम्पियनशिप का शुभारंभ
मंत्री ने कहा – योग और रोग विलोम शब्द, फिट उत्तराखंड मिशन की आधारशिला योग
हल्द्वानी। कैबिनेट मंत्री एवं उत्तराखंड की खेल मंत्री रेखा आर्या ने शनिवार को ऊंचा पुल, अमृत आश्रम क्षेत्र में आयोजित शांति योग धाम चैंपियनशिप का शुभारंभ किया। उद्घाटन अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा योग को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के बाद आज योग का सूर्य एशिया से लेकर अफ्रीका, यूरोप और अमेरिका तक दीदिप्तिमान हो रहा है।
खेल मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि योग अब भारत की सांस्कृतिक धरोहर के साथ-साथ विश्व का स्वास्थ्य संदेश बन चुका है।
मंत्री ने कहा कि 38वें राष्ट्रीय खेलों में पहली बार योगासन को एक खेल स्पर्धा के रूप में शामिल कराना उत्तराखंड और देश के लिए गर्व की बात है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में ओलंपिक जैसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी योगासन एक खेल विधा के रूप में सम्मिलित होगा।
रेखा आर्या ने कहा कि योग और रोग दोनों विलोम अर्थ वाले शब्द हैं। जहां योग है, वहां रोग नहीं हो सकता। इसलिए फिट इंडिया और फिट उत्तराखंड अभियान की आधारशिला भी योग ही है।
उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे अपनी दिनचर्या में योग को शामिल करें ताकि समाज स्वस्थ और सशक्त बने।
इस अवसर पर हल्द्वानी के मेयर गजराज सिंह बिष्ट, नैनीताल दुग्ध संघ के अध्यक्ष मुकेश बोरा, शांति योगधाम संस्था के संस्थापक दर्शन सिंह बोरा, विजयलक्ष्मी बोरा, भुवन भट्ट, पलक चौरसिया, खुशी सोनकर, प्रेम बोरा, महेंद्र रावत, दीपक पांडे, मुकेश रघुवंशी, आशीष शर्मा और ममता पंत सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।
देहरादून। लंबे इंतजार के बाद राजाजी टाइगर रिज़र्व में पर्यटकों के लिए सफारी सीजन आधिकारिक रूप से शुरू हो गया है। शनिवार को रिज़र्व के सभी प्रमुख पर्यटन गेट खोल दिए गए, जिनमें मोतीचूर, चीला, रानीपुर और मोहंड रेंज शामिल हैं। यह क्षेत्र देश-विदेश के वन्यजीव प्रेमियों के बीच खासा लोकप्रिय है।
मोतीचूर रेंज में उद्घाटन से पहले पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद रेंज अधिकारी महेश सेमवाल और वार्डन सरिता भट्ट ने रिबन काटकर पर्यटन गतिविधियों की औपचारिक शुरुआत की। वहीं चीला रेंज में वार्डन चित्रांजलि नेगी, रेंज अधिकारी बी.डी. तिवारी और रेंज अधिकारी राजेश जोशी ने सफारी मार्ग को खोलते हुए सीजन का उद्घाटन किया।
इस वर्ष मोतीचूर रेंज में पर्यटकों के स्वागत के लिए नया रिसेप्शन सेंटर तैयार किया गया है। साथ ही वन्यजीवों और आगंतुकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त प्रबंध किए गए हैं।
पार्क प्रशासन ने इस सीजन में प्रवेश शुल्क में किसी भी तरह की बढ़ोतरी नहीं की है। मोतीचूर रेंज अधिकारी महेश सेमवाल के अनुसार भारतीय पर्यटक से 150 रुपये, विदेशी पर्यटक से 600 रुपये, भारतीय वाहनों से 250 रुपये और विदेशी वाहनों से 500 रुपये प्रवेश शुल्क लिया जाएगा। छात्र समूहों को प्रवेश शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट मिलेगी।
वन विश्राम भवन का किराया 1000 रुपये तथा व्यावसायिक कैमरे का शुल्क 500 रुपये निर्धारित किया गया है।
वन्यजीव संरक्षण के दृष्टिगत मोतीचूर रेंज में अनियमित (डग्गामार) वाहनों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। केवल पंजीकृत टैक्सी और अधिकृत वाहन ही जंगल सफारी के लिए प्रवेश कर सकेंगे। पार्क प्रशासन ने साफ किया है कि बिना रजिस्टर्ड वाहन के किसी भी पर्यटक को प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।
नैनीताल। बहुचर्चित बनभूलपुरा रेलवे अतिक्रमण प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को हुई सुनवाई के बाद अगली तारीख 2 दिसंबर तय कर दी है। अदालत ने हाईकोर्ट के हटाए जाने वाले आदेश पर लगी अंतरिम रोक को यथावत रखने का निर्देश दिया।
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जयमाला बागची की खंडपीठ ने मामले की विस्तृत सुनवाई की। यह याचिका अब्दुल मतीन सिद्दीकी द्वारा दायर लीव-टू-अपील से संबंधित है, जिसमें उन्होंने उत्तराखंड हाईकोर्ट की उस खंडपीठीय व्यवस्था को चुनौती दी है, जिसमें बनभूलपुरा क्षेत्र से रेलवे अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए गए थे।
सुनवाई के दौरान रेलवे, राज्य सरकार और प्रभावित पक्षों के अधिवक्ताओं ने अपने-अपने तर्क रखे। रेलवे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ऐश्वार्या भाटी ने दलील देते हुए कहा कि रेल परियोजनाओं के विस्तार और निर्माण के लिए कुल 30 हेक्टेयर जमीन की आवश्यकता है। इस भूमि पर मौजूद अतिक्रमण को हटाए बिना रेल सेवा विकास संभव नहीं है, इसलिए अदालत को हस्तक्षेप करना चाहिए।
राज्य सरकार की तरफ से अधिवक्ता अभिषेक अत्रे ने पक्ष रखा।
वहीं कब्जेदारों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद, प्रशांत भूषण और अन्य वकीलों ने रेलवे के दावों पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि जिस भूमि की मांग रेलवे अब कर रहा है, वह उसके पहले दिए गए लिखित दावे में शामिल नहीं थी। साथ ही उन्होंने यह भी तर्क दिया कि निर्माणाधीन रिटेनिंग वॉल के बाद रेलवे के ढांचे को कोई खतरा नहीं बचता।
कब्जेदारों की ओर से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत विस्थापन के प्रस्ताव का भी विरोध किया गया। उनका कहना था कि बनभूलपुरा के निवासियों को जबरन हटाकर किसी अन्य स्थान पर बसाना अनुचित है। इस पर रेलवे के अधिवक्ताओं ने कड़ा विरोध जताया।
अब अदालत इस मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर को करेगी।
एमडीडीए का सिटी फॉरेस्ट पार्क बन रहा देहरादून का धड़कता दिल, प्रकृति-स्वास्थ्य-पर्यटन का आधुनिक संगम
सिटी फॉरेस्ट पार्क मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की दूरदृष्टि और हरित-शहरी विकास की सोच का परिणाम- बंशीधर तिवारी
देहरादून – मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा सहस्त्रधारा रोड हैलीपैड के ठीक सामने पर विकसित किया गया सिटी फॉरेस्ट पार्क देहरादून का नया पहचान दे रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का यह ड्रीम प्रोजेक्ट न केवल देहरादून के जनमानस की पहली पसंद बन रहा है, बल्कि राज्य में आधुनिक हरित-विकास का एक मॉडल भी प्रस्तुत कर रहा है। लगभग 12.45 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला यह पार्क प्रकृति, स्वास्थ्य, आयुर्वेद, योग, मनोरंजन और पर्यटन का अनूठा संगम है।
प्रकृति के बीच हंसी-खुशी के पल
बाल दिवस के अवसर पर भी पार्क में बच्चों की असाधारण भीड़ देखने को मिली। स्कूलों से आए समूहों ने प्राकृतिक पगडंडियों पर घूमकर, बांस के गज़ेबो में बैठकर और ट्री हाउस में खेलते हुए दिन का भरपूर आनंद लिया। स्कूल से आये शिक्षकों ने भी बताया कि देहरादून में बच्चों के लिए इतना बड़ा, सुरक्षित और प्राकृतिक खुला स्थान मिलना किसी उपहार से कम नहीं है। यह दृश्य स्पष्ट करता है कि यह पार्क केवल एक अवकाश-स्थल नहीं, बल्कि बच्चों में प्रकृति के प्रति प्रेम और जागरूकता बढ़ाने का माध्यम भी बन रहा है। एमडीडीए द्वारा सभी बच्चों के लिए सूक्ष्य जलपान की व्यवस्था भी कई गई थी।
वन-जैसा वातावरण, आधुनिक सुविधाएँ
सिटी फॉरेस्ट पार्क की सबसे बड़ी विशेषता इसका “वन जैसे माहौल” को सुरक्षित रखना है। विकास कार्य इस तरह किया गया है कि प्राकृतिक ढलानें, पेड़ों का आवरण, मौसमी नाले, वनस्पतियों और मिट्टी की संरचना को नुकसान न पहुंचे। यही कारण है कि यहाँ आते ही शहर का शोर-शराबा अचानक धीमा लगता है और जंगल जैसी शांति महसूस होती है।
हर आयु वर्ग के लोगों के लिए आकर्षक
पार्क को हर आयु वर्ग के लोगों के लिए आकर्षक और उपयोगी बनाने के उद्देश्य से यहाँ अनेक सुविधाएँ विकसित की गई हैं। पार्क में तैयार साइकिल ट्रैक, लगभग 1.2 किलोमीटर लंबा वन-वॉक फिटनेस ट्रेल, सुव्यवस्थित जॉगिंग ट्रैक और प्राकृतिक ढलानों के बीच बना बच्चों का मेज़ (Maze) इसे बच्चों और युवाओं के लिए रोमांचक बनाते हैं। प्राकृतिक सौंदर्य से मेल खाते हुए झूला पुल, शांत वातावरण में बने योग एवं ध्यान केन्द्र, और स्वास्थ्य लाभ हेतु तैयार किया गया एक्यूपंक्चर ज़ोन आगंतुकों को मानसिक-शारीरिक आराम प्रदान करते हैं। इसके अलावा, पार्क में सुंदर बांस गज़ेबो, रंग-बिरंगी फूलों की क्यारियाँ, बच्चों और वयस्कों दोनों के लिए सुरक्षित ट्री हाउस, सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए ओपन एयर थिएटर, आरामदायक कैफेटेरिया, शांत पठन क्षेत्र, युवाओं के लिए स्केटिंग रिंक, प्राकृतिक स्पर्श से युक्त पेबल क्रॉसिंग, तथा जैव-विविधता संरक्षण को बढ़ावा देता वेटलैंड रिस्टोरेशन ज़ोन विकसित किया गया है। इन सभी सुविधाओं का उद्देश्य लोगों को एक ही स्थान पर स्वास्थ्य, मनोरंजन, शिक्षा और प्रकृति का अद्भुत संगम प्रदान करना है, जिससे यह पार्क देहरादून का सबसे पसंदीदा शहरी हरित क्षेत्र बनकर उभर रहा है।
एमडीडीए का दूरदृष्टि-युक्त विकास, 40.07 करोड़ की लागत से
एमडीडीए द्वारा लगभग 40.07 करोड़ रुपये की लागत से तैयार पार्क को आधुनिक हरित-ढांचे का उत्कृष्ट उदाहरण बनाने की रूपरेखा है। पार्क को पर्यावरण, पर्यटन और जनसुविधा—तीनों आयामों के संतुलन के साथ विकसित किया जा रहा है। पार्क के समग्र विकास की परिकल्पना को आकार देते हुए यहाँ प्रवेश द्वार को महासू देवता मंदिर की पारंपरिक शैली से प्रेरित होकर रूप दिया गया है, जो आगंतुकों का स्वागत सांस्कृतिक सौंदर्य के साथ करता है। पार्क में कार और बसों के लिए पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था की गई है, जबकि ऊँचाई पर बना टॉप व्यू एरिया पूरे परिसर का खूबसूरत दृश्य प्रस्तुत करता है। आगंतुकों की सुविधा के लिए टिकट घर और सूचना केंद्र, आरामदायक बेंच, स्वच्छ शौचालय, तथा हर ओर फैला प्राकृतिक हरित क्षेत्र जिसमें सजावटी और स्थानीय प्रजातियों के पेड़ शामिल हैं, पार्क को विशेष पहचान देते हैं। पार्क में बांस के गज़ेबो, जल पौधों वाला एक्वाटिक प्लांट एरिया, सभी हिस्सों को जोड़ने वाला मुख्य पथ और प्राकृतिक वातावरण से मेल खाता लकड़ी का पुल भी बनाया गया है। संपूर्ण क्षेत्र के चारों ओर 3.5 मीटर चौड़ा प्राकृतिक परिधि मार्ग, 0.6 मीटर चौड़ा मौसमी नाला, झाड़ियों से सजा किनारा और फूलों की क्यारियों के बीच बने आकर्षक वॉकवे पार्क की सुंदरता को और बढ़ाते हैं। आगंतुकों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए एक्यूपंक्चर क्षेत्र, शांत योग एवं ध्यान स्थल, बच्चों का सुरक्षित खेल क्षेत्र, जॉगिंग और फिटनेस ट्रेल, तथा पठन क्षेत्र बनाए गए हैं। वहीं, आधुनिक स्पर्श देने के लिए पेड़ों की छाया में नर्सरी के लिए स्थान, 1.2 किमी लंबा वन-वॉक ट्रेल भी विकसित किए गए हैं। स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए पूरे परिसर में गीले और सूखे कचरे के डस्टबिन, खाद बनाने का गड्ढा, तथा पेयजल फव्वारे सहित सुसज्जित कैफेटेरिया उपलब्ध है। बच्चों और वयस्कों दोनों के लिए अलग-अलग ट्री हाउस, आरामदायक बांस की बेंच, साइकिल ट्रैक, बच्चों के लिए अलग साइकिल ट्रैक के साथ स्केटिंग रिंक, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए खुला थिएटर, तथा पुस्तक वितरण और योग सामग्री के लिए समर्पित स्टोर भी पार्क की विशेषताएँ हैं, जो इसे संपूर्ण रूप से एक आधुनिक, हरित और बहुआयामी सार्वजनिक स्थल बनाते हैं। इस योजना में वैज्ञानिक दृष्टिकोण से मिट्टी संरक्षण, जल संरक्षण, वर्षा जल प्रबंधन, शहरी बायो-डायवर्सिटी और स्थानीय पेड़ों का संरक्षण भी शामिल है।
जनता की बढ़ती आवाजाही
उद्घाटन के बाद से सुबह और शाम यहां आने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हजारों लोग रोजाना जॉगिंग, सैर, योग या मनोरंजन के लिए आते हैं। बुजुर्गों के लिए सुरक्षित बैठने की व्यवस्था, महिलाओं के लिए फिटनेस-ट्रेक और बच्चों के लिए खुला खेल परिसर इसे परिवारों का नया पसंदीदा गंतव्य बन रहा है।
पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा लाभ
इस प्रोजेक्ट के पूर्ण विकसित होने पर सहस्त्रधारा क्षेत्र में पर्यटन का नया आयाम जुड़ा है। स्थानीय दुकानों, कैफे, गाइडों, छोटे व्यवसायों और रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि होगी। एमडीडीए का मानना है कि यह पार्क देहरादून की पर्यटन पहचान को नई दिशा दे सकता है।
राज्य की हरित-पर्यटन पहचान का प्रमुख केंद्र
उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी ने कहा सिटी पार्क देहरादून जिस स्वरूप में सामने आया है, वह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की दूरदृष्टि और हरित-शहरी विकास की सोच का परिणाम है। हमारा लक्ष्य था कि शहर में ऐसे और भी पार्क विकसित किये जायें, जहाँ प्रत्येक आयु वर्ग के लोग स्वास्थ्य, मनोरंजन और प्रकृति तीनों का समग्र अनुभव ले सकें। बाल दिवस के अवसर पर विभिन्न स्कूलों के बच्चों की भारी संख्या में उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह पार्क आने वाली पीढ़ियों के लिए कितना उपयोगी और आकर्षक सिद्ध हो रहा है। बच्चों की मुस्कान, उनकी ऊर्जा और प्रकृति के बीच उनका उत्साह हमारे लिए सबसे बड़ा संदेश है। मुझे पूरा विश्वास है कि आने वाले समय में यह पार्क देहरादून का धड़कता दिल और राज्य की हरित-पर्यटन पहचान का प्रमुख केंद्र बनेगा।
देहरादून का भविष्य, प्रकृति के साथ
सचिव एमडीडीए मोहन सिंह बर्निया ने कहा सिटी फॉरेस्ट पार्क केवल एक पार्क नहीं, बल्कि देहरादून के भविष्य का हरित-धरोहर है। यहाँ प्रकृति है, स्वास्थ्य है, योग और आयुर्वेद है, बच्चों का हँसी-खेल है, पर्यटन का आकर्षण है, और एक आधुनिक, स्वच्छ और स्थायी शहर की झलक है। आने वाले वर्षों में यह पार्क राजधानी देहरादून की पहचान, गौरव और प्रमुख आकर्षण के रूप में विश्व स्तर पर उभारने का प्रयास है।
मंत्री धन सिंह रावत ने बच्चों की प्रतिभा की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए दिए प्रेरक संदेश
डोईवाला। बाल दिवस के अवसर पर राजकीय इंटर कॉलेज कोटी भानियावाला में राज्य स्तरीय बाल चौपाल कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें आज प्रदेश के चिकित्सा एवं शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा, कला और विचारों को प्रभावशाली रूप से मंच पर प्रस्तुत किया।

मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बच्चों के उत्साह की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रेरक संदेश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने, सकारात्मक सोच विकसित करने और नेतृत्व क्षमता को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
बाल चौपाल में छात्र-छात्राओं ने विभिन्न गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिससे कार्यक्रम उत्साह और ऊर्जा से भर गया।
चमोली के 50 एनसीसी कैडेट्स को आपदा प्रबंधन का सात दिवसीय प्रशिक्षण शुरू
देहरादून। भारत सरकार की युवा आपदा योजना के तहत सचिव, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग उत्तराखड एवं जिलाधिकारी के निर्देशन में जनपद चमोली के 50 एनसीसी कैडेट्स को 14 से 20 नवंबर तक ओल्ड बुचडी गढ़ी कैंट में आपदा प्रबंधन की जानकारी एवं प्रशिक्षण दिया जा रहा है। शुक्रवार को इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभांरभ किया गया।
प्रशिक्षण के दौरान एनसीसी कैडेट्स को आपदा प्रबंधन के अंतर्गत विभिन्न विषयों जैसे आपदा प्रबंधन, आपदा अधिनियम 2005 आपदाओं से तैयारी, भूकंप से सुरक्षा, भूस्खलन, बाढ़, त्वरित बाढ़, सूखा की जानकारी, फर्स्ट एड की जानकारी, केमिकल, न्यूक्लियर, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल डिजास्टर की जानकारी, रोड सेफ्टी, रस्सी की गांठे तथा रस्सी को लपेटना, गहरी खाइयो में चढ़ना उतरना, नदियों को पार करने के तरीके, स्ट्रेचर बनाना, सैटेलाइट फोन का उपयोग, आग का प्रबंध करना, जंगल की आग का प्रबंध करना, पेशेंट को स्टेचर में शिफ्ट करना, किसी भारी वस्तु को एक स्थान से दूसरे स्थान में हस्तांतरित करना आदि विषयों पर जानकारी प्रदान की जाएगी।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य आपदा के दौरान प्रशिक्षित एनसीसी कैडेट्स को फर्स्ट रिस्पांडर के रूप में अपनी भूमिका निभाना है, जिससे त्वरित गति से राहत एवं बचाव कार्य संचालित किये जा सकेंगे।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रथम दिवस में कार्यक्रम का संचालन ’आपदा प्रबंधन मास्टर ट्रेनर राजू शाही, सुशील सिंह कैन्तुरा एवं किशन राजगुरु, मास्टर ट्रेनर युवा आपदा मित्र तथा एनडीआरएफ से भास्कर मेहंदी एवं अमित कुमार गुप्ता के नेतृत्व में किया गया। आयोजन के दौरान एनसीसी की ओर से कर्नल राजेश रावत, सूबेदार समर सिंह, सूबेदार जगदीश सिंह, हवलदार वीरेंद्र, हवलदार ललित, हवलदार साजिद अली, हवलदार अजय तथा जनपद आपदा प्रबंधन प्राधिकरण देहरादून की ओर से जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी ऋषभ कुमार मौजूद रहे।
यूजीसी द्वारा तय समय सीमा पर सभी रिकॉर्ड दर्ज करने के निर्देश
19 नवम्बर को होगी डाटा अपलोडिंग को लेकर समीक्षा बैठक व कार्यशाला
देहरादून। प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में शैक्षणिक रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण किया जा रहा है। जिसके क्रम में सभी राजकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा निर्धारित समयसीमा के भीतर शैक्षणिक वर्ष 2021 से 2024 तक के समस्त शैक्षणिक दस्तावेज, क्रेडिट रिकॉर्ड और छात्रों की अपार आईडी से संबंधित डेटा डिजीलॉकर/एनएडी-एबीसी प्लेटफॉर्म पर अनिवार्य रूप से अपलोड करने के निर्देश दे दिये गये हैं, ताकि छात्र-छात्राओं को उनके शैक्षणिक दस्तावेज ऑनलाइन माध्यम पर उपलब्ध हो सके।
उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि राज्य सरकार उच्च शिक्षा संस्थानों में डिजिटल परिवर्तन को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ा रही है। इसके तहत प्रदेभभर के राजकीय एवं निजी महाविद्यालयों व विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत सभी छात्रों के शैक्षणिक प्रमाणपत्र, क्रेडिट डेटा और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों को नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी (एनएडी) एवं अकैडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (एबीसी) पर अपलोड किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस डिजिटल व्यवस्था से छात्र-छात्राओं को किसी भी समय, कहीं पर भी अपने शैक्षणिक दस्तावेज ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सुलभ होंगे, जिससे पारदर्शिता, सुगमता और समय की बचत सुनिश्चित होगी।
डॉ. रावत ने बताया कि यूजीसी ने भी विश्वविद्यालयों को शैक्षणिक रिकॉर्ड डिजीलॉकर पर दर्ज करने के लिए समय सीमा को बढ़ाकर 30 नवम्बर 2025 कर दिया है। प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों को इस समयसीमा का पूर्ण रूप से पालन करने, तथा वर्ष 2021-2024 तक के सभी छात्रों के दस्तावेज, आपार आईडी डेट और क्रेडिट रिकॉर्ड तत्काल एनएडी-एबीसी प्लेटफार्म पर अपलोड करने के निर्देश दिये गये हैं। विभागीय मंत्री ने बताया कि 19 नवम्बर 2025 को दून विश्वविद्यालय में एनएडी-एबीसी प्लेटफॉर्म पर डेटा अपलोडिंग की प्रगति की समीक्षा हेतु कार्यशाला एवं बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें सभी विश्वविद्यालयों के परीक्षा नियंत्रकों, नोडल अधिकारियों एवं संबंधित तकनीकी कर्मियों को अद्यतन स्थिति रिपोर्ट और आवश्यक दस्तावेजों के साथ अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने को कहा गया है।
डॉ. रावत ने कहा कि केन्द्र सरकार की एनएडी-एबीसी प्रणाली न केवल विद्यार्थियों को डिजिटल शैक्षणिक पहचान उपलब्ध करवाती है, बल्कि क्रेडिट ट्रांसफर को भी अत्यंत सरल बनाती है। साथ ही यह नई शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी और सफल क्रियान्वयन में भी महत्वपूर्ण है।
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने किया दीप प्रज्वलन
देहरादून। प्रदेश के कृषि मंत्री गणेश जोशी ने आज ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी में आयोजित दो दिवसीय वार्षिक कृषि महोत्सव – एग्रीफेस्ट 2025 का दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया। इस अवसर पर कृषि मंत्री गणेश जोशी ने एग्रीफेस्ट में लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन भी किया।
कृषि मंत्री जोशी ने कहा कि इस तरह के आयोजन किसानों, कृषि-स्टार्टअप उद्यमियों, शोधकर्ताओं, छात्रों और कृषि से जुड़े विभागों को एक ही मंच पर लाकर नवाचार, कौशल, उद्यमिता और सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने बताया कि महोत्सव में कृषि, ग्रामीण विकास, बागवानी, पशुपालन व अन्य संबद्ध विभागों के 10–15 आधिकारिक स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें विभिन्न योजनाओं, पहलों और सफल समूहों की उपलब्धियों को प्रदर्शित किया गया है। इससे छात्रों, किसानों और युवा उद्यमियों को प्रेरणा मिलेगी। मंत्री जोशी ने कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को नवाचार और आत्मनिर्भरता की ओर प्रोत्साहित करने का बेहतरीन माध्यम हैं और भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे।

मंत्री जोशी ने कहा कि उत्तराखंड में उत्पादित मिलेट्स बेहतरीन गुणवत्ता के हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों की आय दोगुनी करने के लिए अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं लागू की गई हैं। उन्होंने कहा कि तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद पीएम मोदी द्वारा पहली फाइल पीएम किसान निधि पर हस्ताक्षर करना किसानों के प्रति उनकी संवेदनशीलता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कुशल नेतृत्व में उत्तराखंड में भी कृषकों के हित में अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय के कृषि विद्यालय को सफल आयोजन के लिए बधाई और शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम में चेयरमैन कमल घनसाला, वाइस चांसलर अमित कुमार भट्ट, एन.के. नौटियाल सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और किसान उपस्थित रहे।
